Anantam IASHindi Note · 18 April 2026

DNA प्रोफाइलिंग एवं न्यायालयिक विज्ञान (Forensic Science) — UPSC विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

UPSC के लिए DNA प्रोफाइलिंग गाइड: DNA फिंगरप्रिंटिंग, STR विश्लेषण, CODIS डेटाबेस, DNA प्रौद्योगिकी उपयोग और विनियमन विधेयक 2019 तथा गोपनीयता के मुद्दे।

DNA प्रोफाइलिंग (DNA Profiling) — जिसे DNA फिंगरप्रिंटिंग भी कहते हैं — अपराध जाँच, व्यक्ति पहचान और पितृत्व निर्धारण के लिए एक शक्तिशाली वैज्ञानिक उपकरण है। भारत में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और DNA प्रौद्योगिकी (उपयोग और अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक, 2019 इसे विधायी ढाँचा देने का प्रयास करता है।

DNA प्रोफाइलिंग कैसे काम करती है?

DNA प्रोफाइलिंग के अनुप्रयोग

क्षेत्रउपयोग
अपराध जाँचहत्या, बलात्कार, चोरी के मामलों में साक्ष्य
गुमशुदा व्यक्तिलावारिस शव/गुमशुदा लोगों की पहचान
पितृत्व निर्धारणकानूनी विवाद में पिता की पहचान
आपदा पीड़ित पहचानसुनामी, विमान दुर्घटना पीड़ितों की पहचान
वन्यजीव अपराधतस्करी के सबूत

DNA प्रौद्योगिकी विनियमन विधेयक, 2019

इस विधेयक की मुख्य विशेषताएँ:

गोपनीयता और नैतिक चिंताएँ

UPSC के लिए प्रासंगिकता

GS III में DNA प्रोफाइलिंग विज्ञान, आपराधिक न्याय और गोपनीयता अधिकार के संगम पर है। DNA प्रौद्योगिकी विधेयक, PCR, STR और गोपनीयता बनाम सुरक्षा — ये सभी UPSC में पूछे जाते हैं।