Anantam IASHindi Note · 18 April 2026

इंडो-पैसिफिक भू-राजनीति — भारत की दृष्टि, क्वाड, AUKUS और यूपीएससी नोट्स (यूपीएससी अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

इंडो-पैसिफिक की अवधारणा, भारत की रणनीति, IPOI, क्वाड, AUKUS और इस क्षेत्र की चुनौतियों का यूपीएससी के लिए विश्लेषण।

इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) 21वीं सदी की भू-राजनीति का केंद्र बन चुका है। यह हिंद महासागर से प्रशांत महासागर तक फैले क्षेत्र को संदर्भित करता है, जहाँ विश्व की 65% आबादी, 60% GDP और 50% से अधिक वैश्विक व्यापार केंद्रित है।

इंडो-पैसिफिक की अवधारणा

परंपरागत रूप से ‘एशिया-पैसिफिक’ की अवधारणा प्रचलित थी। ‘इंडो-पैसिफिक’ शब्द इंडोनेशियाई विदेश मंत्री मारती नाटालेगावा ने लोकप्रिय बनाया। जापान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और भारत ने इसे सक्रिय रूप से प्रचारित किया।

भारत की इंडो-पैसिफिक दृष्टि

PM मोदी ने 2018 शांगरी-ला संवाद में भारत की इंडो-पैसिफिक दृष्टि प्रस्तुत की — एक मुक्त, खुला और समृद्ध इंडो-पैसिफिक। भारत चाहता है:

IPOI (Indo-Pacific Oceans Initiative)

2019 में PM मोदी द्वारा प्रस्तुत IPOI के सात स्तंभ: समुद्री सुरक्षा, समुद्री पारिस्थितिकी, समुद्री संसाधन, क्षमता निर्माण, आपदा जोखिम प्रबंधन, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, और व्यापार-संपर्क।

चीन का बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI)

चीन का BRI इंडो-पैसिफिक में सबसे बड़ी चुनौती है। भारत CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) का विरोध करता है क्योंकि यह POK से गुज़रता है।

क्वाड और AUKUS

भारत की रणनीतिक स्वायत्तता

भारत इंडो-पैसिफिक में सक्रिय है परंतु किसी एक गुट का पूर्ण सदस्य नहीं। यह ‘Strategic Autonomy’ — गुटनिरपेक्षता की विरासत — भारत की विदेश नीति का मूल सिद्धांत है।

यूपीएससी के लिए महत्त्वपूर्ण बिंदु