Anantam IASHindi Note · 18 April 2026

जलवायु परिवर्तन से निपटने के भारत के प्रयास — यूपीएससी नोट्स

जलवायु परिवर्तन पर भारत के प्रयासों को समझें — NAPCC, राज्य कार्य योजनाएँ, INDCs, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ और यूपीएससी पर्यावरण के लिए महत्त्वपूर्ण बिंदु।

भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक है, फिर भी प्रति व्यक्ति उत्सर्जन विकसित देशों से बहुत कम है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से निपटने के लिए भारत ने घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर महत्त्वाकांक्षी कदम उठाए हैं।

राष्ट्रीय जलवायु कार्य योजना (NAPCC)

2008 में भारत ने राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (National Action Plan on Climate Change — NAPCC) जारी की। इसमें आठ राष्ट्रीय मिशन शामिल हैं:

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ

INDCs और NDCs

पेरिस समझौते (2015) के तहत भारत ने अपने NDC (Nationally Determined Contributions) में निम्नलिखित प्रतिबद्धताएँ दीं:

पंचामृत (Panchamrit)

COP26 (ग्लासगो, 2021) में प्रधानमंत्री मोदी ने पाँच लक्ष्य प्रस्तुत किए — “पंचामृत”:

प्रमुख नीतिगत पहलें

भारत का जलवायु न्याय का तर्क

भारत का मानना है कि ऐतिहासिक उत्सर्जन के लिए विकसित देश मुख्यतः ज़िम्मेदार हैं। अतः विकासशील देशों को विकास का अधिकार है और विकसित देशों को तकनीक हस्तांतरण और वित्त प्रदान करना चाहिए। Climate Finance के रूप में $100 बिलियन प्रति वर्ष की माँग भारत करता रहा है।

यूपीएससी की दृष्टि से

जलवायु परिवर्तन GS-III (पर्यावरण) और GS-II (अंतर्राष्ट्रीय संबंध) दोनों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। NAPCC के 8 मिशन, NDC लक्ष्य और COP प्रक्रिया — ये सभी याद करने योग्य हैं।