Anantam IASHindi Note · 18 April 2026

जेरेमी बेन्थम और मात्रात्मक उपयोगितावाद (UPSC नीतिशास्त्र — GS IV)

UPSC GS IV के लिए बेन्थम की नीतिशास्त्र: उपयोगितावाद, सुखकलन (Felicific Calculus), अधिकतम सुख सिद्धांत, आलोचनाएँ तथा सिविल सेवा में प्रासंगिकता।

जेरेमी बेन्थम (1748-1832) ब्रिटिश दार्शनिक और विधि-सुधारक थे जिन्होंने उपयोगितावाद (Utilitarianism) की नींव रखी। उनका मूल सिद्धांत था: “अधिकतम लोगों का अधिकतम सुख” (Greatest happiness of the greatest number)। UPSC GS IV में बेन्थम एक महत्त्वपूर्ण नैतिक विचारक हैं।

उपयोगितावाद का मूल सिद्धांत

बेन्थम के अनुसार:

सुखकलन (Felicific Calculus)

बेन्थम ने सुख को मापने का एक तरीका — सुखकलन (Felicific Calculus या Hedonic Calculus) — प्रस्तावित किया। इसमें सुख को निम्न आयामों पर मापा जाता है:

आयामव्याख्या
तीव्रता (Intensity)सुख कितना तीव्र है?
अवधि (Duration)कितने समय तक रहेगा?
निश्चितता (Certainty)होने की कितनी संभावना?
निकटता (Propinquity)कितना निकट/शीघ्र?
उर्वरता (Fecundity)और सुख उत्पन्न करेगा?
पवित्रता (Purity)दुख के बिना?
विस्तार (Extent)कितने लोगों को?

बेन्थम का उपयोगितावाद — विशेषताएँ

आलोचनाएँ

सिविल सेवा में उपयोगिता

बेन्थम का उपयोगितावाद नीति-निर्माण में व्यापक रूप से उपयोग होता है:

UPSC के लिए प्रासंगिकता

GS IV में बेन्थम को कांट (Kant) और J.S. Mill के साथ तुलना करके प्रस्तुत करना सर्वोत्तम है। परिणामवाद बनाम कर्तव्यवाद — यह तुलना मुख्य परीक्षा में बहुत पूछी जाती है।