Anantam IASHindi Note · 4 May 2026

कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) — UPSC नोट्स

यूरोपीय संघ का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) क्या है, यह कैसे काम करता है, भारत के इस्पात-एल्युमिनियम निर्यात पर इसके प्रभाव, CBDR विवाद, भारत की रणनीति (CCTS, हरित इस्पात नीति) और UPSC GS-II/III प्रासंगिकता का विस्तृत विश्लेषण।

यूरोपीय संघ (European Union) का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (Carbon Border Adjustment Mechanism — CBAM) 2020 के दशक का संभवतः सबसे प्रभावशाली जलवायु-व्यापार उपकरण है। यह यूरोपीय संघ में प्रवेश करने वाली कार्बन-गहन वस्तुओं के आयात में निहित अंतर्निहित कार्बन (embedded carbon) पर कर लगाता है, और निश्चित रूप से 1 जनवरी 2026 से लागू होगा। भारत के लिए — जिसके यूरोपीय संघ को इस्पात और एल्युमिनियम निर्यात अरबों डॉलर के हैं — CBAM एक साथ जलवायु चुनौती और व्यापार-नीति ख़तरा है। UPSC के लिए CBAM पर्यावरण (GS-III), अंतर्राष्ट्रीय संबंध (GS-II) और अर्थव्यवस्था के संगम बिंदु पर बैठता है।

CBAM को समझने का अर्थ है यह समझना कि व्यापार और जलवायु नीति अब अलग-अलग द्वीप नहीं हैं — वे एक-दूसरे के निर्धारक हैं। 2026 के बाद हर वैश्विक निर्यातक को अपने उत्पाद के पीछे की कार्बन-तीव्रता पर हिसाब देना होगा। भारत के लिए यह दोहरा संकट है: एक ओर निर्यात बाज़ार पर असर, दूसरी ओर घरेलू उद्योग को तेज़ी से डीकार्बोनाइज़ करने का दबाव। UPSC अभ्यर्थियों को इसे केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि “जलवायु-संरक्षणवाद बनाम साझा-परंतु-भिन्न-उत्तरदायित्व (CBDR)” के रूप में समझना चाहिए।

CBAM क्या है?

समस्या: कार्बन रिसाव (Carbon Leakage)

संक्षेप में: कार्बन रिसाव वह “रिसाव” है जो जलवायु बाल्टी से प्रदूषण को बाहर निकलने नहीं देता — वह केवल एक कोने से दूसरे कोने में बहता है। CBAM इसी रिसाव को रोकने का यांत्रिक उत्तर है।

कार्बन-शुल्क के रूप में CBAM

यूरोपीय संघ का उत्तर: तीसरे देशों से आयात पर वही कार्बन उपकर लगाओ जो EU उत्पादक EU ETS के तहत भुगतान करते हैं। इसका उद्देश्य है:

CBAM कैसे काम करता है

सम्मिलित क्षेत्र (प्रारंभिक सूची)

सीमेंट, लोहा एवं इस्पात, एल्युमिनियम, उर्वरक, बिजली, हाइड्रोजन — ये इसलिए चुने गए क्योंकि ये कार्बन-गहन हैं और रिसाव के सबसे अधिक जोखिम में हैं। 2030 तक इस सूची का विस्तार रसायन, कार्बनिक यौगिकों और प्लास्टिक तक होने की संभावना है।

समय-सारणी

चरणअवधिक्रिया
परिवर्तनीय (Transitional)अक्टूबर 2023 – दिसंबर 2025आयातकर्ता तिमाही आधार पर अंतर्निहित उत्सर्जन की रिपोर्ट करते हैं; कोई वित्तीय दायित्व नहीं
निश्चित (Definitive)1 जनवरी 2026 सेआयातकर्ताओं को अंतर्निहित उत्सर्जन के अनुरूप CBAM प्रमाणपत्र ख़रीदने होंगे; EU उत्पादकों के लिए मुफ़्त ETS भत्ते समानांतर रूप से समाप्त किए जाएँगे

CBAM प्रमाणपत्र मूल्य निर्धारण

प्रमाणपत्र EU ETS की साप्ताहिक औसत नीलामी कीमत पर मूल्यांकित किए जाते हैं (2024 में लगभग €70-100 प्रति टन CO₂)। यह कीमत हर सप्ताह बदलती है, जिससे CBAM का दायित्व भी गतिशील होता है।

तीसरे देश में कार्बन मूल्य निर्धारण के लिए क्रेडिट

यदि निर्यातक ने अपने स्वदेश में पहले से कार्बन कीमत चुकाई है, तो वह राशि घटाई जा सकती है। इसका सीधा निहितार्थ है — निर्यातक देश में घरेलू कार्बन मूल्य निर्धारण से CBAM लागत कम होती है। यही कारण है कि भारत ने अपनी कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (CCTS) को 2023 में अधिसूचित किया।

CBAM के लाभ (EU दृष्टिकोण)

कार्बन रिसाव की रोकथाम

EU उद्योग की सुरक्षा

EU ग्रीन डील के साथ संरेखण

वैश्विक महत्वाकांक्षा बढ़ाना

राजस्व सृजन

CBAM से जुड़ी चिंताएँ — भारत के सरोकार

1. औद्योगिक हित

2. CBDR उल्लंघन

3. हरित संरक्षणवाद (Green Protectionism)

4. अंतर्निहित कार्बन का मूल्यांकन

5. ऐतिहासिक उत्तरदायित्व

6. मुक्त व्यापार समझौते

7. WTO अनुकूलता

भारत बनाम EU: तुलनात्मक तस्वीर

संकेतकभारतयूरोपीय संघ
प्रति-व्यक्ति CO₂ उत्सर्जन (टन)~1.9~7.0
ऐतिहासिक संचयी उत्सर्जन (1850-2020)~3%~22%
नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता (2024)~200 GW~600 GW
NDC लक्ष्य2070 तक नेट-ज़ीरो2050 तक जलवायु-तटस्थता
घरेलू कार्बन मूल्यCCTS (नवजात)EU ETS (€70-100/टन)
EU को वार्षिक स्टील निर्यातUSD 6-7 बिलियन

भारत की प्रतिक्रिया

घरेलू कार्बन मूल्य निर्धारण

EU के साथ बातचीत

उद्योग का डीकार्बोनाइज़ेशन

स्वतंत्र कार्बन कर (वाणिज्य मंत्री का प्रस्ताव)

व्यापार विविधीकरण

बहुपक्षीय चुनौती

अन्यत्र समान उपकरण

CBAM की वैश्विक प्रतिकृति लगभग निश्चित है — कार्बन-सीमा नीतियों का एक नेटवर्क बन रहा है जो 2025 के बाद के व्यापार पैटर्न को आकार देगा। भारत के लिए अनिवार्य है कि वह इस लहर के नीचे न दबे, बल्कि तैयारी से इसका सामना करे।

हालिया घटनाक्रम (2024-26)

अद्यतन संदर्भ: EU आयोग, GoI वाणिज्य मंत्रालय, CBAM रजिस्ट्री से सत्यापित करें।

UPSC प्रासंगिकता

GS-III मानचित्रण

GS-II ओवरलैप

प्रीलिम्स बिंदु

मेन्स कोण

निबंध हुक

त्वरित पुनरीक्षण

विशेषताविवरण
उद्देश्यकार्बन रिसाव की रोकथाम
तंत्रEU ETS मूल्य पर CBAM प्रमाणपत्र
सम्मिलित वस्तुएँ6 श्रेणियाँ — इस्पात, सीमेंट, एल्युमिनियम सहित
परिवर्तनीय चरणअक्टूबर 2023 – दिसंबर 2025
निश्चित चरणजनवरी 2026 से आगे
भारत की प्रतिक्रियाCCTS, हरित इस्पात, WTO चुनौती

UPSC के लिए मूल बात: CBAM अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कार्बन को आंतरिक करने का पहला बड़ा प्रयास है — जलवायु अखंडता के लिए तर्कसंगत रूप से आवश्यक, परंतु CBDR के अंतर्गत समस्याग्रस्त। भारत की प्रतिक्रिया को घरेलू डीकार्बोनाइज़ेशन, बहुपक्षीय वकालत और बातचीत से तय छूट का संयोजन होना चाहिए।

सामान्य प्रश्न

CBAM का पूरा नाम क्या है और यह कब लागू होगा?

CBAM का पूरा नाम कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (Carbon Border Adjustment Mechanism) है। यह यूरोपीय संघ की पहल है। इसका परिवर्तनीय चरण अक्टूबर 2023 से शुरू हुआ और निश्चित चरण 1 जनवरी 2026 से लागू होगा।

CBAM किन वस्तुओं पर लागू होता है?

प्रारंभिक सूची में छह क्षेत्र शामिल हैं — सीमेंट, लोहा एवं इस्पात, एल्युमिनियम, उर्वरक, बिजली, और हाइड्रोजन। 2030 तक रसायन और पॉलिमर भी शामिल किए जा सकते हैं।

भारत के लिए CBAM की चिंता क्यों है?

भारत का यूरोपीय संघ को इस्पात और एल्युमिनियम निर्यात लगभग USD 10 बिलियन का है। CBAM 20-35% प्रभावी मूल्य भार जोड़ सकता है, जिससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

CBDR सिद्धांत क्या है और CBAM इसका उल्लंघन कैसे करता है?

CBDR (Common But Differentiated Responsibilities) UNFCCC का सिद्धांत है जो विकसित और विकासशील देशों के लिए जलवायु में भिन्न उत्तरदायित्व मानता है। CBAM सभी देशों पर समान शुल्क लगाता है, ऐतिहासिक उत्सर्जन और प्रति-व्यक्ति क्षमता की अनदेखी करता है।

CCTS क्या है और यह CBAM से कैसे जुड़ी है?

कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (CCTS) भारत की 2023 में अधिसूचित घरेलू कार्बन मूल्य निर्धारण व्यवस्था है। यदि भारतीय निर्यातक स्वदेश में पहले से कार्बन कीमत चुकाते हैं, तो वह राशि CBAM दायित्व से घटाई जा सकती है।

CBAM प्रमाणपत्रों का मूल्य कैसे तय होता है?

CBAM प्रमाणपत्र EU ETS की साप्ताहिक औसत नीलामी कीमत पर मूल्यांकित होते हैं। 2024 में यह कीमत लगभग €70-100 प्रति टन CO₂ रही, जो साप्ताहिक रूप से बदलती है।

क्या CBAM WTO अनुकूल है?

यह विवादास्पद है। WTO अनुच्छेद XX ग़ैर-भेदभावपूर्ण पर्यावरणीय उपायों की अनुमति देता है, परंतु CBAM का चयनात्मक कवरेज और डिफ़ॉल्ट मान MFN तथा राष्ट्रीय व्यवहार सिद्धांतों पर प्रश्न उठाते हैं। BASIC देशों ने इसे WTO में चुनौती देने का इरादा जताया है।

भारत की हरित इस्पात नीति CBAM से कैसे संबंधित है?

हरित इस्पात नीति 2024 में हाइड्रोजन-घटित इस्पात के लिए दिशानिर्देश तय करती है। यह भारतीय इस्पात की कार्बन तीव्रता घटाकर CBAM शुल्क कम करने और EU बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने में सहायक है।

क्या अन्य देश भी CBAM जैसे तंत्र अपना रहे हैं?

हाँ। यूनाइटेड किंगडम ने 2027 से CBAM की घोषणा की है। अमेरिका में Clean Competition Act प्रस्ताव है। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण कोरिया भी समान सीमा-कार्बन तंत्र पर अध्ययन कर रहे हैं।