खाद्य संवर्धन — चावल संवर्धन कार्यक्रम, लाभ, आलोचनाएँ (यूपीएससी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)
खाद्य संवर्धन (Food Fortification) सूक्ष्म पोषक तत्व जोड़ने की विधि है। FSSAI मानक, चावल संवर्धन, लाभ और विवाद के साथ यूपीएससी GS-III नोट्स।
खाद्य संवर्धन (Food Fortification) — खाद्य उत्पादों में आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व (विटामिन, खनिज) जोड़ने की प्रक्रिया है, जो उनमें स्वाभाविक रूप से कम हों। यह कुपोषण से निपटने का एक लागत-प्रभावी तरीका है।
भारत में कुपोषण की स्थिति
- NFHS-5 (2019-21): 35.5% बच्चे अवरुद्ध वृद्धि (Stunting)।
- 67% बच्चे एनीमिया से पीड़ित।
- 57% महिलाएँ एनीमिया से पीड़ित।
- आयरन, विटामिन A, विटामिन D और जिंक की कमी व्यापक।
भारत में खाद्य संवर्धन कार्यक्रम
चावल संवर्धन कार्यक्रम
- 2021 में लॉन्च; 2024 तक सभी सरकारी योजनाओं (PDS, MDM, ICDS) में संवर्धित चावल।
- प्रति 100 किग्रा सामान्य चावल में 1 किग्रा फोर्टिफाइड कर्नेल।
- आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन B12 जोड़े जाते हैं।
अन्य संवर्धित खाद्य
- नमक: आयोडीन और आयरन (डबल फोर्टिफाइड नमक)।
- आटा/मैदा: आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन B12।
- दूध और खाद्य तेल: विटामिन A और D।
FSSAI मानक और +F लोगो
- FSSAI ने 2016 में खाद्य संवर्धन मानक जारी किए।
- +F लोगो — प्रमाणित संवर्धित खाद्य।
लाभ
- लागत-प्रभावी — आहार विविधीकरण से सस्ता।
- व्यापक पहुँच — PDS के माध्यम से।
- स्वाद में बदलाव नहीं।
- एनीमिया, रतौंधी, गलगंड में कमी।
आलोचनाएँ और चुनौतियाँ
- सिकल सेल एनीमिया — आयरन संवर्धित चावल से स्वास्थ्य जोखिम की चिंता।
- थैलेसीमिया रोगियों में आयरन अधिभार।
- स्थायी समाधान नहीं — खाद्य विविधता जरूरी।
- संवर्धित कर्नेल की गुणवत्ता नियंत्रण।
यूपीएससी प्रासंगिकता
- GS-III: खाद्य प्रसंस्करण, खाद्य सुरक्षा।
- GS-II: स्वास्थ्य, Poshan Abhiyan, NFHS डेटा।
- मुख्य: “खाद्य संवर्धन कुपोषण उन्मूलन का समाधान है — आलोचनात्मक परीक्षण करें।”
खाद्य संवर्धन कुपोषण से लड़ने का एक शक्तिशाली साधन है, परंतु स्थायी खाद्य सुरक्षा के लिए आहार विविधता, जल-स्वच्छता और सामाजिक-आर्थिक विकास आवश्यक हैं।