Anantam IASHindi Note · 18 April 2026

लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) एवं भारत लघु रिएक्टर (यूपीएससी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)

लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों पर यूपीएससी-केन्द्रित मार्गदर्शिका: तकनीक, लाभ, चुनौतियाँ, भारत लघु रिएक्टर कार्यक्रम, न्यूक्लियर एनर्जी मिशन और 2024-26 के घटनाक्रम।

लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (Small Modular Reactors — SMRs) सघन, कारख़ाने में असेंबल किए जाने वाले परमाणु रिएक्टर हैं, जिनकी विद्युत उत्पादन क्षमता प्रति इकाई लगभग 300 MWe तक होती है — पारंपरिक संयंत्र की लगभग एक-तिहाई। ये परमाणु ऊर्जा की अर्थशास्त्र, स्थल-चयन और सुरक्षा-पहचान को बदलने का वादा करते हैं। भारत के केंद्रीय बजट 2024-25 में समर्पित न्यूक्लियर एनर्जी मिशन तथा भारत लघु रिएक्टर (Bharat Small Reactor — BSR) कार्यक्रम की घोषणा की गई, जिससे SMRs यूपीएससी GS प्रश्नपत्र III का एक प्रमुख विषय बन गए हैं।

लघु मॉड्यूलर रिएक्टर क्या हैं?

इनका सघन फुटप्रिंट, कारख़ाना-निर्माण तथा पैसिव सेफ़्टी इन्हें विविध स्थलों के लिए उपयुक्त बनाते हैं — जिनमें सेवानिवृत्त थर्मल संयंत्र स्थल तथा दूरस्थ औद्योगिक क्लस्टर भी शामिल हैं।

कार्यप्रणाली एवं तकनीकी विकल्प

चालू एवं प्रस्तावित अधिकांश SMRs लाइट वॉटर रिएक्टर (LWRs) के विविध रूप हैं — जैसे NuScale, Rolls-Royce SMR और Holtec SMR। अन्य प्रकार:

SMRs के अनुप्रयोग

लाभ

लचीलापन एवं विस्तार-योग्यता

लंबा ईंधन-पुनर्भरण चक्र

सघन डिज़ाइन

पैसिव सेफ़्टी

अर्थशास्त्र

चुनौतियाँ

भारत का दृष्टिकोण: भारत लघु रिएक्टर

भारत लघु रिएक्टर (BSR) एक 220 MWe PHWR है — एक सिद्ध स्वदेशी तकनीक, जिसे अब मॉड्यूलर तैनाती के लिए अनुकूलित किया गया है। एक समानांतर मार्ग पर लगभग 200 MWe का भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (BSMR) तथा उन्नत SMR प्रौद्योगिकियाँ विकसित की जाएँगी। बजट 2024-25 में घोषित न्यूक्लियर एनर्जी मिशन के लिए 20,000 करोड़ रुपये का आवंटन है तथा 2033 तक पाँच स्वदेशी SMRs की तैनाती का लक्ष्य रखा गया है।

आगे का रास्ता

वैश्विक दृश्य में भारत की स्थिति

रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम और अर्जेंटीना SMR तैनाती या प्रदर्शन में अग्रणी हैं। रूस का Akademik Lomonosov पहले से परिचालन में है (फ़्लोटिंग SMR)। चीन का HTR-PM ग्रिड से जुड़ा है। NuScale ने US NRC से डिज़ाइन प्रमाणन प्राप्त किया। भारत लघु रिएक्टरों के साथ भारत PHWR-आधारित SMRs में आरंभिक-चालक (early-mover) की स्थिति में है।

नैतिक एवं नीतिगत चिंताएँ

हाल के घटनाक्रम (2024-26)

यूपीएससी प्रासंगिकता

प्रारंभिक परीक्षा के लिए 300 MWe की ऊपरी सीमा, न्यूक्लियर एनर्जी मिशन (बजट 2024-25), भारत लघु रिएक्टर तथा BSR (220 MWe PHWR-आधारित) एवं BSMR (नया डिज़ाइन) के अंतर को याद रखें। GS III मुख्य परीक्षा के लिए, SMRs विज्ञान, ऊर्जा संक्रमण, औद्योगिक नीति तथा नियामक सुधार के संगम को दर्शाते हैं। नीतिशास्त्र एवं पर्यावरण खंड सुरक्षा, अपशिष्ट तथा जन-सहमति के पहलुओं पर चर्चा कर सकते हैं। यह क्षेत्र संरचनात्मक सुधार की दहलीज़ पर है, इसलिए अभ्यर्थी परमाणु ऊर्जा अधिनियम तथा नागरिक दायित्व संशोधनों पर नज़र रखें।