UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) एवं भारत लघु रिएक्टर (यूपीएससी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)

लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों पर यूपीएससी-केन्द्रित मार्गदर्शिका: तकनीक, लाभ, चुनौतियाँ, भारत लघु रिएक्टर कार्यक्रम, न्यूक्लियर एनर्जी मिशन और 2024-26 के घटनाक्रम।

Small Modular Reactors (SMRs) and Bharat Small Reactors (UPSC Science & Tech) — UPSC featured image

लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (Small Modular Reactors — SMRs) सघन, कारख़ाने में असेंबल किए जाने वाले परमाणु रिएक्टर हैं, जिनकी विद्युत उत्पादन क्षमता प्रति इकाई लगभग 300 MWe तक होती है — पारंपरिक संयंत्र की लगभग एक-तिहाई। ये परमाणु ऊर्जा की अर्थशास्त्र, स्थल-चयन और सुरक्षा-पहचान को बदलने का वादा करते हैं। भारत के केंद्रीय बजट 2024-25 में समर्पित न्यूक्लियर एनर्जी मिशन तथा भारत लघु रिएक्टर (Bharat Small Reactor — BSR) कार्यक्रम की घोषणा की गई, जिससे SMRs यूपीएससी GS प्रश्नपत्र III का एक प्रमुख विषय बन गए हैं।

लघु मॉड्यूलर रिएक्टर क्या हैं?

  • लघु (Small) — पारंपरिक रिएक्टर की तुलना में आकार में बहुत छोटा, सामान्यतः 300 MWe से कम।
  • मॉड्यूलर (Modular) — प्रणालियाँ और घटक कारख़ाने में असेंबल होते हैं और इकाइयों के रूप में स्थल पर स्थापना के लिए भेजे जाते हैं।
  • रिएक्टर — ऊर्जा या प्रक्रिया-अनुप्रयोगों हेतु ताप उत्पन्न करने के लिए परमाणु विखंडन का उपयोग करते हैं।

इनका सघन फुटप्रिंट, कारख़ाना-निर्माण तथा पैसिव सेफ़्टी इन्हें विविध स्थलों के लिए उपयुक्त बनाते हैं — जिनमें सेवानिवृत्त थर्मल संयंत्र स्थल तथा दूरस्थ औद्योगिक क्लस्टर भी शामिल हैं।

कार्यप्रणाली एवं तकनीकी विकल्प

चालू एवं प्रस्तावित अधिकांश SMRs लाइट वॉटर रिएक्टर (LWRs) के विविध रूप हैं — जैसे NuScale, Rolls-Royce SMR और Holtec SMR। अन्य प्रकार:

  • उच्च-तापमान गैस-कूल्ड रिएक्टर (HTGR)
  • तरल धातु तीव्र रिएक्टर (LMFR)
  • मोल्टेन सॉल्ट रिएक्टर (MSR)
  • भारी जल रिएक्टर (Heavy Water Reactors) — जिनमें भारत का प्रस्तावित भारत लघु रिएक्टर भी है, जो 220 MWe PHWR का संस्करण है।

SMRs के अनुप्रयोग

  • बिजली उत्पादन — ग्रिड से बाहर दूरस्थ क्षेत्रों में।
  • औद्योगिक प्रोसेस हीट — इस्पात, सीमेंट, रसायन।
  • अलवणीकरण (Desalination) — तटीय जल-दुर्लभ क्षेत्रों के लिए।
  • हाइड्रोजन उत्पादन — उच्च-तापमान विद्युत-अपघटन के माध्यम से।
  • परमाणु पनडुब्बियाँ एवं शोध रिएक्टर (तकनीकी दृष्टि से समान)।
  • सेवानिवृत्त होते थर्मल संयंत्रों का प्रतिस्थापन — ग्रिड तथा ट्रांसमिशन अवसंरचना बरक़रार रहती है।

लाभ

लचीलापन एवं विस्तार-योग्यता

  • माँग बढ़ने पर इकाइयाँ चरणबद्ध ढंग से जोड़ी जा सकती हैं।
  • पुराने थर्मल संयंत्र स्थलों के पुनर्निर्माण के लिए उपयुक्त।

लंबा ईंधन-पुनर्भरण चक्र

  • कुछ SMR डिज़ाइनों में ईंधन हर 3-7 वर्ष में बदला जाता है, जबकि पारंपरिक रिएक्टरों में 1-2 वर्ष में।

सघन डिज़ाइन

  • कारख़ाना-निर्माण निर्माण-काल को 10+ वर्ष से घटाकर 3-5 वर्ष कर देता है।
  • स्थल का फुटप्रिंट और एक्सक्लूज़न ज़ोन भी छोटे।

पैसिव सेफ़्टी

  • गुरुत्व, प्राकृतिक परिसंचरण एवं पैसिव हीट सिंक के द्वारा बाह्य बिजली या सक्रिय हस्तक्षेप के बिना भी रिएक्टर बंद एवं शीतल हो जाते हैं।
  • दुर्घटना की संभावना और उसके परिणाम नाटकीय ढंग से घटते हैं।

अर्थशास्त्र

  • प्रति इकाई कम पूँजीगत आवश्यकता से वित्तपोषण अधिक सुलभ हो जाता है।
  • मात्रा बढ़ने पर मॉड्यूलर सीख-वक्र (learning curve) इकाई लागत घटा सकते हैं।

चुनौतियाँ

  • प्रति यूनिट बिजली की उच्च लागत — आरंभिक तैनाती में आपूर्ति-शृंखला की अपरिपक्वता और पैमाने के अभाव के कारण।
  • प्रति MWh रेडियोधर्मी कचरा कुछ डिज़ाइनों में बड़े रिएक्टरों की तुलना में अधिक हो सकता है, और ख़र्च हो चुके ईंधन के लिए भंडारण एवं निपटान सुविधाएँ आज भी आवश्यक हैं।
  • नियामक अनुमोदन — नए डिज़ाइनों को अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षोपाय और सुरक्षा अनुमोदनों की आवश्यकता होती है; दुनिया भर के नियामक अभी विशेषज्ञता विकसित कर रहे हैं।
  • सामाजिक-राजनीतिक प्रतिरोध — छोटे रिएक्टरों के नए स्थलों के प्रति भी।
  • प्रसार (proliferation) संबंधी चिंताएँ — कुछ हाई-असे लो-एनरिच्ड यूरेनियम (HALEU) ईंधनों के मामले में।

भारत का दृष्टिकोण: भारत लघु रिएक्टर

भारत लघु रिएक्टर (BSR) एक 220 MWe PHWR है — एक सिद्ध स्वदेशी तकनीक, जिसे अब मॉड्यूलर तैनाती के लिए अनुकूलित किया गया है। एक समानांतर मार्ग पर लगभग 200 MWe का भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (BSMR) तथा उन्नत SMR प्रौद्योगिकियाँ विकसित की जाएँगी। बजट 2024-25 में घोषित न्यूक्लियर एनर्जी मिशन के लिए 20,000 करोड़ रुपये का आवंटन है तथा 2033 तक पाँच स्वदेशी SMRs की तैनाती का लक्ष्य रखा गया है।

आगे का रास्ता

  • परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 में संशोधन करें ताकि निजी क्षेत्र SMRs में निवेश और उनके संचालन के लिए सक्षम हो।
  • ईंधन नियंत्रण एवं अपशिष्ट प्रबंधन सुरक्षा, सुरक्षोपाय और निरीक्षण के लिए भारत सरकार के पास ही रहना चाहिए।
  • डिज़ाइन अनुमोदन, स्थल चयन, निर्माण, संचालन, संचालक प्रमाणन तथा अपशिष्ट पुनर्प्रसंस्करण की विशेषज्ञता वाला एक सशक्त, स्वतंत्र नियामक बोर्ड स्थापित किया जाए।
  • सुरक्षा सरकार के हाथ में रहे; NPCIL हैंड-होल्डिंग चरण में निजी स्वामित्व वाले SMRs को संचालित कर सकती है।
  • विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से बातचीत कर, SMRs के ख़र्च हो चुके ईंधन का पुनर्प्रसंस्करण IAEA सुरक्षोपायों के अंतर्गत राज्य-नियंत्रित सुविधाओं में किया जाए।
  • परमाणु ऊर्जा विभाग को IAEA सुरक्षोपायों के अंतर्गत चालू नागरिक रिएक्टरों के पर्यावरणीय एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य आँकड़ों के पारदर्शी प्रकटीकरण से जनधारणा सुधारनी चाहिए।
  • NTPC, Tata Power, Reliance तथा अंतर्राष्ट्रीय SMR विक्रेताओं के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी

वैश्विक दृश्य में भारत की स्थिति

रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम और अर्जेंटीना SMR तैनाती या प्रदर्शन में अग्रणी हैं। रूस का Akademik Lomonosov पहले से परिचालन में है (फ़्लोटिंग SMR)। चीन का HTR-PM ग्रिड से जुड़ा है। NuScale ने US NRC से डिज़ाइन प्रमाणन प्राप्त किया। भारत लघु रिएक्टरों के साथ भारत PHWR-आधारित SMRs में आरंभिक-चालक (early-mover) की स्थिति में है।

नैतिक एवं नीतिगत चिंताएँ

  • सुरक्षा मानकीकरण — तेज़ी से दोहराए जाने वाले मॉड्यूलर निर्माणों के लिए।
  • सीमा-पार ख़र्च-ईंधन परिवहन के जोखिम।
  • परमाणु प्रसार — निर्यात परिदृश्यों में।
  • स्थानीय समुदाय की सहमति — विशेषकर संवेदनशील पारितंत्रों के निकट स्थल चयन में।
  • नियामक स्वतंत्रता — सरकार प्रोमोटर और नियामक दोनों होने पर हितों के टकराव से बचने के लिए महत्वपूर्ण।

हाल के घटनाक्रम (2024-26)

  • केंद्रीय बजट 2024-25 में न्यूक्लियर एनर्जी मिशन की घोषणा — 20,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ 2033 तक पाँच परिचालित स्वदेशी SMRs का लक्ष्य।
  • केंद्रीय बजट 2025-26 में निजी भागीदारी को सक्षम करने और आपूर्तिकर्ताओं की चिंताओं को दूर करने हेतु परमाणु ऊर्जा अधिनियम तथा परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित।
  • AI Action Summit, पेरिस (2025) — SMRs को AI डेटा सेंटरों के लिए निम्न-कार्बन कंप्यूट अवसंरचना के रूप में चर्चा का विषय बनाया गया।
  • इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन — SMR यंत्रीकरण के लिए सेंसर एवं विकिरण-सहनशील इलेक्ट्रॉनिक्स की आपूर्ति करता है।
  • चंद्रयान-4 और गगनयान — परमाणु नवाचार को समर्थन देने वाले उच्च-तकनीक पारितंत्र को आगे बढ़ाते हैं।
  • राष्ट्रीय क्वांटम मिशन — रिएक्टर नियंत्रण एवं सुरक्षोपायों के लिए क्वांटम-सुरक्षित संचार सक्षम करता है।
  • DPDP अधिनियम संचालकों, ठेकेदारों तथा स्थानीय समुदायों के व्यक्तिगत आँकड़ों को शासित करता है।
  • BARC की साझेदारियाँ — 2024-25 में SMR डिज़ाइन एवं निर्माण के लिए निजी उद्योग के साथ घोषित।
  • अंतर्राष्ट्रीय गठजोड़ — SMR सहयोग के लिए रूस (Rosatom), अमेरिका (NuScale, Holtec), फ़्रांस (EDF) तथा दक्षिण कोरिया (KAERI) के साथ चर्चाएँ।

यूपीएससी प्रासंगिकता

प्रारंभिक परीक्षा के लिए 300 MWe की ऊपरी सीमा, न्यूक्लियर एनर्जी मिशन (बजट 2024-25), भारत लघु रिएक्टर तथा BSR (220 MWe PHWR-आधारित) एवं BSMR (नया डिज़ाइन) के अंतर को याद रखें। GS III मुख्य परीक्षा के लिए, SMRs विज्ञान, ऊर्जा संक्रमण, औद्योगिक नीति तथा नियामक सुधार के संगम को दर्शाते हैं। नीतिशास्त्र एवं पर्यावरण खंड सुरक्षा, अपशिष्ट तथा जन-सहमति के पहलुओं पर चर्चा कर सकते हैं। यह क्षेत्र संरचनात्मक सुधार की दहलीज़ पर है, इसलिए अभ्यर्थी परमाणु ऊर्जा अधिनियम तथा नागरिक दायित्व संशोधनों पर नज़र रखें।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

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