Anantam IASHindi Note · 18 April 2026

मैकियावेली और राजनीतिक यथार्थवाद (यूपीएससी नीतिशास्त्र — GS IV)

मैकियावेली का मानना था कि राजनीति में सत्ता बनाए रखना सर्वोच्च लक्ष्य है। 'द प्रिंस' में उन्होंने नैतिकता और राजनीति को अलग रखा। यूपीएससी GS IV में वे एक महत्त्वपूर्ण राजनीतिक विचारक हैं।

निकोलो मैकियावेली (1469–1527) इतालवी पुनर्जागरण के राजनीतिक विचारक थे। उनकी प्रसिद्ध कृति ‘द प्रिंस’ (The Prince) आधुनिक राजनीति विज्ञान की आधारशिला मानी जाती है। वे पहले विचारक थे जिन्होंने राजनीति को नैतिकता और धर्म से अलग देखा।

मैकियावेली की मुख्य अवधारणाएँ

सत्ता ही राजनीति का केंद्र

मैकियावेली के अनुसार राजनीति का एकमात्र लक्ष्य सत्ता प्राप्त करना और उसे बनाए रखना है। नैतिकता, धर्म और आदर्श इस लक्ष्य के साधन हो सकते हैं, बाधा नहीं।

“साध्य साधनों को उचित ठहराते हैं”

यद्यपि मैकियावेली ने यह वाक्य कभी नहीं कहा, किंतु उनके विचारों का सार यही है। वे मानते थे कि एक शासक को जनहित के लिए कभी-कभी अनैतिक तरीके अपनाने पड़ सकते हैं।

शेर और लोमड़ी

मैकियावेली ने शासक को शेर और लोमड़ी दोनों का गुण रखने की सलाह दी। शेर की तरह शक्तिशाली और भयभीत करने वाला; लोमड़ी की तरह चालाक और कूटनीतिक।

‘द प्रिंस’ की मुख्य शिक्षाएँ

आलोचनाएँ

यूपीएससी में प्रासंगिकता

GS IV में मैकियावेली को अक्सर “राजनीतिक यथार्थवाद” और “नीतिशास्त्र बनाम राजनीति” के प्रश्नों में उद्धृत किया जाता है। उनके विचारों की आलोचना और उनकी सीमाएँ भी बताना आवश्यक है।