Anantam IASHindi Note · 4 May 2026

मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) के साथ भारत का अनुभव — लाभ, चुनौतियाँ एवं आगे का मार्ग (UPSC)

भारत के मुक्त व्यापार समझौतों पर यूपीएससी मार्गदर्शिका: लाभ, प्रतिकूल प्रभाव, सुरजीत भल्ला समिति की सिफ़ारिशें, यूएई CEPA, यूके FTA एवं 2024-26 के नवीनतम घटनाक्रम।

मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreements / FTAs) भागीदार देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, और कभी-कभी निवेश एवं बौद्धिक संपदा पर प्रशुल्क (tariff) एवं ग़ैर-प्रशुल्क बाधाओं को कम करते हैं। भारत के पास 13 से अधिक संचालन में मौजूद FTAs हैं, जिनमें जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस के साथ द्विपक्षीय CEPA/CECA, तथा आसियान वस्तु-व्यापार समझौता शामिल हैं। अनुभव मिश्रित रहा है — उपयोग दर निम्न रही, कई भागीदारों के साथ व्यापार घाटा बढ़ा है, फिर भी UAE, ऑस्ट्रेलिया एवं यूके के साथ हाल के समझौते एक “स्मार्ट पीढ़ी” का संकेत देते हैं। यूपीएससी जीएस-III के लिए, FTAs एक मूल बाह्य-क्षेत्र विषय हैं।

FTAs को समझने के लिए यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि वे विश्व व्यापार संगठन (WTO) के बहुपक्षीय ढाँचे के भीतर “अनुच्छेद XXIV” (वस्तुओं हेतु) एवं “GATS अनुच्छेद V” (सेवाओं हेतु) के तहत स्वीकृत अपवाद हैं। MFN (Most Favoured Nation) सिद्धांत के विपरीत, FTAs चुनिंदा देशों को “तरजीही व्यवहार” प्रदान करते हैं — जो विश्व व्यापार में “स्पैगेटी बाउल इफ़ेक्ट” को जन्म देता है।

FTAs का तर्काधार

भारत का FTA परिदृश्य

सकारात्मक प्रभाव

द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि

हर FTA भागीदार के साथ FTA-पश्चात चरण में भारत के कुल व्यापार में वृद्धि हुई है। उदाहरण के तौर पर, भारत-UAE CEPA (2022) के बाद द्विपक्षीय व्यापार 85 अरब डॉलर के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ा है, और रत्न-आभूषण निर्यात में दोहरे-अंकीय वृद्धि दर्ज की गई।

आयात एवं निर्यात की संरचना

FTA भागीदारों ने उच्च-गुणवत्ता वाला कच्चा माल आपूर्ति की है, जो भारतीय विनिर्माण को सहारा देता है। भागीदारों को भारतीय निर्यात मुख्यतः ग़ैर-कच्चे माल श्रेणियों में हैं — तैयार माल, इंजीनियरिंग वस्तुएँ, फार्मा, समुद्री उत्पाद।

सेवा-व्यापार का विस्तार

आईटी/आईटीईएस, दूरसंचार, वित्त एवं पर्यटन जैसे क्षेत्रों में FTA भागीदारों के साथ सेवाओं का व्यापार बढ़ा है। विशेष रूप से सिंगापुर एवं जापान के साथ Mode-4 (पेशेवरों की आवाजाही) में भारतीय आईटी सेवा निर्यातकों को लाभ हुआ है।

बाहरी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Outbound FDI)

भारतीय कंपनियों ने अधिकांश FTA भागीदार देशों में परिचालन स्थापित किया है, जिससे बाहरी निर्यात को सहारा मिला है। टाटा, महिंद्रा, इन्फ़ोसिस, और कई फार्मा कंपनियों ने आसियान, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, यूके में अपने आधार बनाए हैं।

तरजीही बाज़ार पहुँच

UAE CEPA ने यूएई में प्रवेश करने वाले रत्न-आभूषण, परिधान, चमड़ा, इंजीनियरिंग वस्तुओं पर प्रशुल्क तेज़ी से कम कर दिया है — श्रम-गहन श्रेणियों में भारतीय निर्यात को सहारा देते हुए। यह विशेष रूप से उत्तर प्रदेश एवं तमिलनाडु के निर्यातकों के लिए वरदान साबित हुआ है।

प्रतिकूल प्रभाव

व्यापार घाटे का विस्तार

FTA-पश्चात आसियान, कोरिया एवं जापान के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़ा है। इन भागीदारों से आयात भारतीय निर्यात की तुलना में अधिक तेज़ी से बढ़े हैं। भारत-कोरिया CEPA के एक दशक बाद, भारत का घाटा लगभग चार गुना बढ़ा।

व्यापार गुणवत्ता में गिरावट

21 प्रमुख क्षेत्रों में से 13 प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुए हैं — खनिज, चमड़ा, वस्त्र, रत्न-आभूषण, धातु, वाहन। कई मामलों में सस्ते आयातों ने घरेलू MSME उद्योगों को हाशिए पर डाल दिया।

अल्प-उपयोग (Under-utilisation)

भारतीय निर्यातकों द्वारा FTA उपयोग दर अनुमानतः 5–25 प्रतिशत है — प्रदान की गई तरजीह-मूल्य का एक अंश। MSMEs के पास FTA लाभों का दावा करने हेतु जागरूकता, दस्तावेज़ीकरण एवं उद्गम-नियमों (Rules of Origin) की विशेषज्ञता का अभाव है।

उल्टी प्रशुल्क संरचना (Inverted Duty Structure)

FTAs (विशेष रूप से जापान, कोरिया के साथ) ने ऐसी स्थितियाँ उत्पन्न कीं जहाँ तैयार वस्तुओं पर BCD के तहत मध्यवर्ती इनपुट से कम प्रशुल्क लगता है — जो स्थानीय विनिर्माण के बजाय आयात को प्रोत्साहित करता है। यह “मेक इन इंडिया” की रणनीति के विपरीत है।

उद्गम-नियमों का उल्लंघन

ग़ैर-FTA देशों (विशेष रूप से चीन) से वस्तुएँ FTA भागीदारों के माध्यम से पुनर्मार्गांकित होकर भारत में तरजीही प्रशुल्कों पर प्रवेश कर गईं। भारत के 2020 के सीमाशुल्क संशोधन ने उद्गम-नियम प्रावधानों को कड़ा किया।

वैश्विक व्यवधानों के प्रति संवेदनशीलता

FTA भागीदार अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक मंदी या भू-राजनीतिक झटके भारतीय व्यापार प्रदर्शन में फैल जाते हैं। 2008 की वैश्विक मंदी एवं 2020 की कोविड-संकट इस संवेदनशीलता को उजागर करते हैं।

तुलनात्मक तालिका: सफल बनाम समस्याग्रस्त FTAs

FTAहस्ताक्षर वर्षपरिणाममुख्य कारण
भारत-कोरिया CEPA2010समस्याग्रस्तव्यापार घाटा 4× बढ़ा; उल्टी प्रशुल्क संरचना
भारत-जापान CEPA2011मिश्रितनिवेश-केंद्रित; आयात-निर्यात असंतुलन
आसियान FTA2010समस्याग्रस्तघाटा बढ़ा; उद्गम-नियम कमज़ोर
भारत-यूएई CEPA2022सफलश्रम-गहन निर्यात बढ़ा; निवेश आकर्षित
भारत-ऑस्ट्रेलिया ECTA2022सकारात्मकक्रिटिकल मिनरल्स; द्विपक्षीय वृद्धि
भारत-EFTA TEPA2024संरचनात्मक रूप से नवीन15-वर्षीय 100 अरब डॉलर निवेश प्रतिबद्धता

सुरजीत भल्ला समिति की सिफ़ारिशें

एक प्रमुख सुधार समिति ने FTA रणनीति की समीक्षा की। मुख्य बिंदु:

मौजूदा FTAs की समीक्षा

उद्योग एवं उपभोक्ताओं को मिले लाभों की व्यापक समीक्षा करें; जहाँ भारत के हित पूरे नहीं हो रहे, वहाँ पुनः वार्ता करें। उदाहरण के तौर पर, भारत-कोरिया CEPA की समीक्षा 2017 से लंबित है।

व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाएँ

कारक बाज़ारों — भूमि, श्रम, पूँजी — में सुधार करें और लॉजिस्टिक्स लागत कम करें। भारत की लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी के 13–14 प्रतिशत है, जबकि विकसित देशों में यह 8–9 प्रतिशत है।

घरेलू बाज़ार की रक्षा

मज़बूत तकनीकी विनियम बनाएँ; निम्न-गुणवत्ता आयातों के विरुद्ध एंटी-डंपिंग एवं सुरक्षोपाय शुल्कों का उपयोग करें।

सेवा FTAs के प्रति दृष्टिकोण

Mode-4 (प्राकृतिक व्यक्तियों की आवाजाही) से आगे बढ़कर Mode-3 (वाणिज्यिक उपस्थिति) तक — भारतीय सेवा कंपनियाँ विदेशों में अपने आधार स्थापित करें।

अंतर-मंत्रालय समन्वय

वाणिज्य, वित्त, उद्योग एवं अन्य प्रासंगिक मंत्रालयों के बीच नियमित बैठकें।

MSMEs का सहायक मार्गदर्शन

MSME निर्यातकों को FTA संभावनाओं की व्याख्या करने हेतु राष्ट्रव्यापी संवेदीकरण योजना।

FTA उपयोग मिशन

निर्यातकों को लाभ का दावा करने में सहायता पर केंद्रित समर्पित मिशन।

SEZs को 3Es के रूप में पुनः-निर्देशित करें

बाबा कल्याणी-संरेखित ढाँचा जो मूल्य-वर्धन (value addition), रोज़गार (employment) एवं प्रौद्योगिकी अपनाने को प्रोत्साहित करता है — FTA निर्यात क्षमता को पोषित करते हुए।

सरकारी पहलों के साथ एकीकरण

एक ज़िला एक उत्पाद (ODOP), RoDTEP, उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) — निर्यात बढ़ाने हेतु प्रोत्साहनों को FTA बाज़ार पहुँच के साथ संरेखित करें।

हालिया घटनाक्रम (2024–26)

यूपीएससी प्रासंगिकता

जीएस-III (बाह्य क्षेत्र; व्यापार; औद्योगिक नीति) हेतु:

प्रीलिम्स बिंदु

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

एक मज़बूत मुख्य परीक्षा उत्तर एक मूल्यांकनात्मक ढाँचा प्रदान करता है (लाभ बनाम प्रतिकूल प्रभाव), एक या दो विशिष्ट FTAs के साथ चित्रित करता है (जापान-भारत, कोरिया-भारत समस्याग्रस्त के रूप में; UAE, ऑस्ट्रेलिया सकारात्मक के रूप में), और सुरजीत भल्ला-संरेखित सुधार पथ तथा CBAM तैयारी प्रस्तावित करता है।

नमूना प्रश्न: “भारत के FTA अनुभव की समीक्षा करते हुए स्पष्ट कीजिए कि एक ‘स्मार्ट’ पीढ़ी के समझौते किस प्रकार भिन्न हैं। CBAM के युग में भारत की व्यापार-वार्ता रणनीति कैसी होनी चाहिए?” (15 अंक, 250 शब्द)

निष्कर्ष

भारत की FTA यात्रा परिपक्व हुई है — 2000 के दशक के घाटा-बढ़ाने वाले समझौतों (कोरिया, जापान, आसियान) से 2022–25 के अधिक स्मार्ट, बेहतर-अनुक्रमित CEPAs (UAE, ऑस्ट्रेलिया, EFTA, यूके) तक। अगली परीक्षा है पाइपलाइन (EU, ओमान), MSME उपयोग (25 प्रतिशत से 50 प्रतिशत+), और CBAM-युग की हरित व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता। FTAs तभी कारगर होते हैं जब उन्हें एक हाथ में घरेलू सुधार और दूसरे हाथ में वैश्विक बाज़ार पहुँच के साथ बातचीत में लाया जाता है — स्वयं को साध्य के रूप में नहीं, साधन के रूप में।

सामान्य प्रश्न

मुक्त व्यापार समझौता (FTA) क्या होता है?

FTA दो या अधिक देशों के बीच एक समझौता है जिसमें वे आपसी व्यापार पर प्रशुल्क एवं ग़ैर-प्रशुल्क बाधाओं को कम या समाप्त करते हैं। यह WTO के अनुच्छेद XXIV के तहत MFN सिद्धांत का अनुमत अपवाद है।

CEPA, CECA एवं ECTA में क्या अंतर है?

CEPA (व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता) सबसे विस्तृत होता है — वस्तुएँ, सेवाएँ, निवेश, IP सब शामिल। CECA (व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता) इसी प्रकार का है। ECTA (आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौता) प्रारंभिक/अंतरिम समझौता होता है, जो बाद में पूर्ण CEPA में परिवर्तित होता है।

भारत-यूएई CEPA कब लागू हुआ?

भारत-यूएई CEPA 1 मई 2022 को लागू हुआ। यह भारत का खाड़ी क्षेत्र में पहला व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता है, जो 90 प्रतिशत से अधिक भारतीय निर्यात पर प्रशुल्क छूट प्रदान करता है।

FTA उपयोग दर कम क्यों है?

भारतीय MSMEs में जागरूकता की कमी, उद्गम-नियमों (Rules of Origin) की जटिलता, दस्तावेज़ीकरण की बोझिलता, एवं प्रमाणन प्रक्रियाओं की लागत के कारण FTA उपयोग दर 5–25 प्रतिशत के बीच बनी हुई है।

CAROTAR नियम क्या हैं?

CAROTAR (Customs Administration of Rules of Origin under Trade Agreements Rules), 2020 भारतीय आयातकों को FTA उद्गम-दावों के समर्थन में पर्याप्त सूचना प्रदान करने के लिए बाध्य करते हैं। इनका उद्देश्य तीसरे-देश (विशेष रूप से चीन) पुनर्मार्गांकन को रोकना है।

भारत RCEP से बाहर क्यों निकला?

भारत 2019 में RCEP से बाहर निकल गया — चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे, कृषि एवं डेयरी क्षेत्र में संवेदनशीलताओं, MSME हितों, और अनिर्धारित ट्रिगर तंत्रों के कारण।

सुरजीत भल्ला समिति की मुख्य सिफ़ारिशें क्या हैं?

मौजूदा FTAs की समीक्षा, घरेलू प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना, MSME सहायता, FTA उपयोग मिशन, सेवा-FTAs में Mode-3 की प्राथमिकता, अंतर-मंत्रालय समन्वय, एवं SEZs को मूल्य-वर्धन/रोज़गार/प्रौद्योगिकी (3Es) पर पुनः-निर्देशित करना।

CBAM का भारत पर क्या प्रभाव है?

EU का कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) जनवरी 2026 से पूर्ण रूप से लागू है। यह भारतीय इस्पात, एल्युमीनियम, सीमेंट, उर्वरक एवं विद्युत निर्यातों पर कार्बन शुल्क लगाता है, जो भारत-EU FTA वार्ताओं को जटिल बनाता है।

भारत-यूके FTA की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?

जुलाई 2025 में हस्ताक्षरित यह समझौता भारतीय वस्त्र, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, रत्न-आभूषण पर प्रशुल्क कमी प्रदान करता है। ब्रिटिश व्हिस्की एवं ऑटोमोबाइल पर भारतीय प्रशुल्क घटे हैं। सेवा अध्याय में Mode-4 के तहत भारतीय पेशेवरों को आंशिक लाभ मिले हैं।

भारत किन देशों के साथ FTA वार्ता कर रहा है?

वर्तमान में भारत यूरोपीय संघ (EU), ओमान, पेरू, चिली, और न्यूज़ीलैंड के साथ सक्रिय वार्ता में है। कनाडा एवं रूस के साथ वार्ता भू-राजनीतिक कारणों से रुकी हुई है।