नर्मदा नदी — उद्गम, मार्ग, सहायक नदियाँ और यूपीएससी नोट्स
नर्मदा नदी अमरकंटक से निकलती है, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में दरार घाटी से होती हुई पश्चिम की ओर बहती है। संपूर्ण यूपीएससी मार्गदर्शिका — मानचित्र, सहायक नदियाँ और बाँधों सहित।
नर्मदा नदी, जिसे नर्बदा या रेवा भी कहा जाता है, प्रायद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी पश्चिम-वाहिनी नदी और भारत की पाँचवीं सबसे लंबी नदी है। मध्य प्रदेश की मैकाल पर्वतमाला में अमरकंटक से उद्गमित होकर यह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से होती हुई खंभात की खाड़ी (कैंबे की खाड़ी) के रास्ते अरब सागर में मिलती है। विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमालाओं के बीच की दरार घाटी (rift valley) से इसका मार्ग, हिंदू परंपरा में इसका पवित्र स्थान, और सरदार सरोवर बाँध से इसका जुड़ाव — इसे यूपीएससी का एक उच्च-प्राथमिकता वाला विषय बनाते हैं जो भौतिक भूगोल, संसाधन भूगोल, पर्यावरण और सामाजिक आंदोलनों के पार-काटता है।
नर्मदा भारत की उन कुछ नदियों में है जिनके चारों ओर पुराण कथाएँ, धार्मिक तीर्थ, आदिवासी संस्कृति, ऊर्जा-सिंचाई परियोजनाएँ और एक प्रसिद्ध जन-आंदोलन सब एक साथ जुड़ते हैं। इसी कारण यह यूपीएससी अभ्यर्थी के लिए केवल भूगोल का प्रश्न नहीं — यह विकास बनाम पर्यावरण, संघवाद बनाम राज्य हित, और परंपरा बनाम आधुनिकता के बीच की बहसों का जीवंत केस-स्टडी है।
नर्मदा एक नज़र में

| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| उद्गम | अमरकंटक पठार, मैकाल श्रेणी, अनूपपुर ज़िला, मध्य प्रदेश |
| उद्गम की ऊँचाई | लगभग 1,057 मीटर |
| लंबाई | लगभग 1,312 किमी |
| अपवाह क्षेत्र | लगभग 98,796 वर्ग किमी |
| राज्य | मध्य प्रदेश (~1,077 किमी), महाराष्ट्र (~74 किमी), गुजरात (~161 किमी); मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र तथा महाराष्ट्र-गुजरात की सीमा का भाग भी निर्मित |
| प्रवाह दिशा | मुख्यतः पूर्व से पश्चिम |
| मुहाना | खंभात की खाड़ी, अरब सागर |
| भू-वैज्ञानिक संरचना | विंध्य श्रेणी (उत्तर) और सतपुड़ा श्रेणी (दक्षिण) के बीच दरार घाटी |
| प्रमुख बाँध | सरदार सरोवर बाँध (गुजरात) |
| अन्य प्रमुख बाँध | इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, महेश्वर, बरगी |
| पवित्र स्थिति | भारत की सात पवित्र नदियों में से एक |
अमरकंटक में उद्गम
नर्मदा का उद्गम मैकाल श्रेणी के अमरकंटक पठार पर एक कुंड (नर्मदा कुंड) से समुद्र-तल से 1,057 मीटर ऊपर, मध्य प्रदेश के अनूपपुर ज़िले में होता है। अमरकंटक सोन और महानदी का भी उद्गम-क्षेत्र है, जिससे यह तीन महत्वपूर्ण नदियों का त्रि-संधि बिंदु बन जाता है। नर्मदा अपने उद्गम के निकट कपिलधारा प्रपात और दुग्धधारा प्रपात से नीचे उतरती है।
अमरकंटक स्वयं में एक भू-सांस्कृतिक चमत्कार है — यह विंध्य और सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं के मिलन-बिंदु पर स्थित है, और तीन अलग-अलग दिशाओं में जल भेजता है: नर्मदा पश्चिम की ओर, सोन उत्तर-पूर्व (गंगा बेसिन) की ओर, तथा महानदी दक्षिण-पूर्व (बंगाल की खाड़ी) की ओर। पुराणों में इसे ‘तीर्थराज’ कहा गया है। आज यह जैव-विविधता का अभयारण्य भी है — अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फीयर रिज़र्व के रूप में संरक्षित।
नर्मदा का मार्ग

नदी की यात्रा को ऊपरी, मध्य और निचले भागों में विभाजित किया जा सकता है।
ऊपरी मार्ग (अमरकंटक से जबलपुर)
अमरकंटक से नर्मदा ऊपरी सतपुड़ा पठार के माध्यम से पश्चिम की ओर बहती है। जबलपुर के पास यह प्रसिद्ध भेड़ाघाट के संगमरमरी चट्टानों से होकर गुज़रती है, जहाँ यह धुआँधार प्रपात (“धुएँ का जलप्रपात”) से नीचे गिरती है। यहाँ नदी संकरी, तेज़, तथा एकदम सीधी सफ़ेद संगमरमर की चट्टानों से घिरी होती है — एक लोकप्रिय पर्यटक एवं भू-वैज्ञानिक स्थल।
मध्य मार्ग (जबलपुर से महेश्वर)
जबलपुर के नीचे नदी नर्मदा घाटी में प्रवेश करती है — एक दरार घाटी (rift valley) जो उत्तर में विंध्य श्रेणी और दक्षिण में सतपुड़ा श्रेणी से घिरी है। यह दरार घाटी भारत की सबसे विशिष्ट भौतिक विशेषताओं में से एक है, जो ब्लॉक भ्रंशन (block faulting) से बनी। नर्मदा जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद (नर्मदापुरम), हरदा, खंडवा और खरगोन से होकर बहती है। इस मार्ग पर महत्वपूर्ण बाँध और शहर:
- बरगी बाँध — पहला बड़ा भंडारण बाँध, जबलपुर के निकट।
- इंदिरा सागर बाँध — खंडवा ज़िले के पुनासा में; नर्मदा पर आयतन की दृष्टि से सबसे बड़ा जलाशय।
- ओंकारेश्वर बाँध — मांधाता के पास, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक की मेज़बानी करता है।
- महेश्वर बाँध — अहिल्याबाई होलकर से जुड़े ऐतिहासिक नगर महेश्वर के निकट।
निचला मार्ग (महेश्वर से अरब सागर)
महेश्वर के बाद नर्मदा एक छोटे खंड के लिए महाराष्ट्र में प्रवेश करती है, संक्षेप में मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र, फिर महाराष्ट्र-गुजरात के बीच सीमा बनाती है। यह गुजरात के नवगाम में सरदार सरोवर बाँध से होकर गुज़रती है, फिर भरूच के उपजाऊ जलोढ़ मैदान को पार कर खंभात की खाड़ी में मिल जाती है। मुहाना चौड़ा एवं फ़नल-आकार का है, जो भरूच के निचले भागों में महत्वपूर्ण ज्वारीय प्रभाव बनाता है।
नर्मदा पश्चिम की ओर क्यों बहती है
अधिकांश प्रायद्वीपीय नदियाँ (गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, महानदी) पूर्व की ओर बंगाल की खाड़ी में बहती हैं क्योंकि प्रायद्वीपीय पठार पूर्व की ओर ढलवाँ है। नर्मदा और इसकी बहन तापी अपवाद हैं — वे पश्चिम की ओर बहती हैं क्योंकि वे विंध्य-सतपुड़ा और सतपुड़ा-अजंता श्रेणियों के बीच ब्लॉक भ्रंशन से बनी दरार घाटियों में स्थित हैं। ये भ्रंश पुरानी भू-वैज्ञानिक विशेषताएँ हैं। यह दरार संरचना यह भी समझाती है कि नर्मदा बड़ा डेल्टा क्यों नहीं बनाती; इसका निचला मार्ग सागर तक पहुँचने से पहले श्रेणियों के बीच दबा हुआ है।
नर्मदा की सहायक नदियाँ
नर्मदा की लगभग 41 सहायक नदियाँ हैं, जिनमें से 22 बाएँ तट और 19 दाएँ तट पर हैं।
प्रमुख बाएँ तट की सहायक नदियाँ (लंबी; सतपुड़ा से उद्गमित)
| सहायक नदी | संगम स्थल | टिप्पणी |
|---|---|---|
| बुर्हनेर | मंडला | ऊपरी मार्ग में मिलती |
| बंजर | मंडला | कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से होकर बहती |
| शेर | गाडरवारा | – |
| शक्कर | गाडरवारा | – |
| दूधी | नरसिंहपुर | – |
| तवा | होशंगाबाद के पास | सबसे बड़ी सहायक नदी; तवा बाँध की मेज़बानी |
| गंजाल | – | – |
| छोटा तवा | – | – |
| कुंदी | – | – |
| गोई | – | – |
| करजान | भरूच ज़िला | निचले मार्ग में मिलती |
प्रमुख दाएँ तट की सहायक नदियाँ (छोटी; विंध्य से उद्गमित)
| सहायक नदी | टिप्पणी |
|---|---|
| हिरण | कटनी-जबलपुर क्षेत्र से होकर बहती |
| तेंदोनी | – |
| बरना | बरना बाँध की मेज़बानी |
| कोलार | – |
| मान | – |
| उरि | – |
| हटनी | – |
| ओरसांग | गुजरात में मिलती |
निर्वहन (discharge) और जल-संग्रहण क्षेत्र की दृष्टि से तवा सबसे महत्वपूर्ण सहायक नदी है; हिरण सबसे लंबी दाएँ तट की सहायक नदी है।
नर्मदा घाटी परियोजना और सरदार सरोवर बाँध
नर्मदा घाटी विकास परियोजना विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत बहु-उद्देशीय नदी-घाटी योजनाओं में से एक है। यह नर्मदा और इसकी सहायक नदियों पर 30 बड़े बाँधों, 135 मध्यम बाँधों और 3,000 से अधिक छोटे बाँधों की परिकल्पना करती है।
सरदार सरोवर बाँध
सरदार सरोवर बाँध नर्मदा पर सबसे बड़ा बाँध और परियोजना का अंतिम बाँध है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| स्थान | नवगाम, गुजरात |
| प्रकार | कंक्रीट गुरुत्व बाँध |
| ऊँचाई | 163 मीटर |
| लंबाई | ~1,210 मीटर |
| नींव | 1961 (जवाहरलाल नेहरू) |
| उद्घाटन | 17 सितंबर 2017 |
| स्थापित जल-विद्युत | 1,450 मेगावाट (200 मेगावाट नदी-तल + 250 मेगावाट नहर-शीर्ष) — गुजरात और मध्य प्रदेश लाभार्थी |
| मुख्य नहर | नर्मदा मुख्य नहर — विश्व की सबसे लंबी नहर ~458 किमी |
| लाभार्थी राज्य | गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान |
अन्य प्रमुख बाँध
| बाँध | राज्य | नदी | उद्देश्य |
|---|---|---|---|
| बरगी | मध्य प्रदेश | नर्मदा | सिंचाई, विद्युत |
| इंदिरा सागर | मध्य प्रदेश | नर्मदा | बहु-उद्देशीय; आयतन की दृष्टि से सबसे बड़ा जलाशय |
| ओंकारेश्वर | मध्य प्रदेश | नर्मदा | विद्युत, सिंचाई |
| महेश्वर | मध्य प्रदेश | नर्मदा | विद्युत |
| तवा | मध्य प्रदेश | तवा सहायक | सिंचाई |
नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण
नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण (NWDT) का गठन 1969 में अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के अंतर्गत किया गया, जिसमें मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान शामिल थे। इसके 1979 के पंचाट ने वार्षिक उपयोग योग्य प्रवाह को 28 MAF (मिलियन एकड़ फीट) निर्धारित किया तथा चार राज्यों में आवंटित किया — गुजरात को 9 MAF, मध्य प्रदेश को 18.25 MAF, महाराष्ट्र को 0.25 MAF, और राजस्थान को 0.5 MAF। पंचाट ने सरदार सरोवर बाँध की ऊँचाई की शर्तें भी निर्धारित कीं।
नर्मदा बचाओ आंदोलन
1980 के दशक के मध्य से मेधा पाटकर के नेतृत्व में चलाए गए नर्मदा बचाओ आंदोलन (NBA) ने सरदार सरोवर बाँध की नियोजित ऊँचाई का विरोध किया। इसके मुख्य आधार थे — आदिवासी एवं ग्रामीण समुदायों का विस्थापन, अपर्याप्त पुनर्वास, वनों एवं कृषि भूमि का जलमग्न होना, तथा पारिस्थितिक व्यवधान। सर्वोच्च न्यायालय के 2000 के निर्णय ने पुनर्वास की निगरानी के साथ बाँध निर्माण जारी रखने की अनुमति दी। यह आंदोलन विस्थापन, पर्यावरणीय न्याय और सहभागी विकास पर एक मील का पत्थर केस-स्टडी बना हुआ है।
नर्मदा बचाओ आंदोलन ने भारत में ‘विकास के मानवीय मूल्य’ पर बहस को नए आयाम दिए। मेधा पाटकर, बाबा आम्टे और अरुंधति राय जैसे आवाज़ें इस आंदोलन से जुड़ीं। आलोचकों ने तर्क दिया कि बड़े बाँध तकनीकी समाधान के बजाय ‘आधुनिक मंदिर’ हैं जो विस्थापितों — विशेषकर आदिवासियों — की आवाज़ को मिटा देते हैं। भारत के पुनर्वास कानून, सूचित सहमति की अवधारणा, तथा ‘भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013’ का जन्म इसी आंदोलन के दबाव से हुआ।
सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व
- भारत की सात पवित्र नदियों में से एक (गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु, कावेरी)।
- नर्मदा परिक्रमा नदी की 2,600 किमी लंबी पवित्र प्रदक्षिणा है।
- पवित्र स्थलों में अमरकंटक, ओंकारेश्वर (ज्योतिर्लिंग), महेश्वर, भेड़ाघाट और भरूच शामिल हैं।
- कुछ पुराण परंपराओं में नर्मदा को गंगा से भी अधिक प्राचीन और पवित्र माना जाता है।
तुलना: नर्मदा बनाम तापी
| विशेषता | नर्मदा | तापी |
|---|---|---|
| उद्गम | अमरकंटक (मैकाल) | मुलताई (सतपुड़ा) |
| लंबाई | ~1,312 किमी | ~724 किमी |
| दरार घाटी | विंध्य-सतपुड़ा के बीच | सतपुड़ा-अजंता के बीच |
| मुहाना | खंभात की खाड़ी | खंभात की खाड़ी |
| राज्य | मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात | मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात |
| सबसे बड़ी सहायक | तवा | पूर्णा |
| प्रमुख बाँध | सरदार सरोवर | उकाई |
त्वरित पुनरावलोकन तालिका (Prelims बिंदु)
| बिंदु | तथ्य |
|---|---|
| उद्गम | अमरकंटक, मैकाल श्रेणी, मध्य प्रदेश |
| लंबाई | ~1,312 किमी (भारत की 5वीं सबसे लंबी) |
| राज्य | मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात |
| मुहाना | खंभात की खाड़ी, अरब सागर |
| प्रवाह दिशा | पश्चिम (दरार घाटी से) |
| सबसे बड़ी सहायक नदी | तवा |
| सबसे लंबी दाएँ तट सहायक | हिरण |
| सबसे बड़ा बाँध | सरदार सरोवर (गुजरात) |
| सबसे बड़ा जलाशय | इंदिरा सागर (मध्य प्रदेश) |
| प्रसिद्ध जलप्रपात | धुआँधार (जबलपुर) |
| प्रसिद्ध चट्टानें | संगमरमरी चट्टानें, भेड़ाघाट |
| अंतर-राज्य न्यायाधिकरण | NWDT, 1969; पंचाट 1979 |
यूपीएससी प्रासंगिकता
नर्मदा नदी उद्गम, सहायक नदियों, राज्यों और प्रमुख बाँधों पर प्रश्नों के माध्यम से एक आवर्ती प्रारंभिक परीक्षा विषय है। अभ्यर्थियों को अमरकंटक को उद्गम, विंध्य और सतपुड़ा के बीच दरार घाटी, तवा को सबसे बड़ी सहायक नदी, और सरदार सरोवर बाँध को अंतिम बाँध के रूप में याद रखना चाहिए।
मेन्स जीएस पेपर I (भूगोल) के लिए, नर्मदा प्रायद्वीपीय भारत के नदी प्रतिरूप, अपवाह में भ्रंश रेखाओं की भूमिका, और बहु-उद्देशीय परियोजनाओं के महत्व को दर्शाती है। जीएस पेपर II में यह अंतर-राज्यीय नदी विवादों, जल की संघीय राजनीति, और अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 से जुड़ती है।
जीएस पेपर III में नर्मदा घाटी परियोजना पर्यावरण बनाम विकास के समझौतों का एक पाठ्यपुस्तक उदाहरण है, जिसमें नर्मदा बचाओ आंदोलन, सर्वोच्च न्यायालय का 2000 का निर्णय, और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन सभी प्रासंगिक हैं।
नैतिकता (जीएस IV) और निबंध के लिए, नर्मदा की कथा सार्वजनिक निर्णय-निर्माण में वितरणात्मक न्याय, विस्थापन, पुनर्वास नीति, और पारिस्थितिक विरासत के नैतिक महत्व का समृद्ध चित्रण प्रदान करती है।
मेन्स अभ्यास प्रश्न
- “प्रायद्वीपीय भारत में नर्मदा का पश्चिम-वाहिनी प्रवाह भू-वैज्ञानिक संरचना का परिणाम है।” विश्लेषण करें। (10 अंक)
- नर्मदा घाटी परियोजना के संदर्भ में ‘विकास बनाम पर्यावरण’ की बहस की समीक्षा करें, नर्मदा बचाओ आंदोलन और 2000 के सर्वोच्च न्यायालय निर्णय का संदर्भ लें। (15 अंक)
- अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के संदर्भ में नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण की भूमिका का मूल्यांकन करें। (10 अंक)
सामान्य प्रश्न
नर्मदा नदी का उद्गम कहाँ से होता है?
नर्मदा का उद्गम मध्य प्रदेश के अनूपपुर ज़िले में मैकाल पर्वतमाला के अमरकंटक पठार से होता है, समुद्र-तल से लगभग 1,057 मीटर ऊँचाई पर स्थित नर्मदा कुंड से। अमरकंटक सोन और महानदी का भी उद्गम-क्षेत्र है, जिससे यह तीन नदियों का त्रि-संधि बिंदु बनता है।
नर्मदा नदी पश्चिम की ओर क्यों बहती है?
नर्मदा विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमालाओं के बीच स्थित एक दरार घाटी (rift valley) में बहती है, जो ब्लॉक भ्रंशन (block faulting) की भू-वैज्ञानिक प्रक्रिया से बनी है। चूँकि प्रायद्वीपीय पठार पूर्व की ओर ढलवाँ है, अधिकांश नदियाँ पूर्व की ओर बहती हैं, परंतु नर्मदा और तापी की दरार घाटियाँ इन्हें पश्चिम की ओर — अरब सागर — ले जाती हैं।
नर्मदा की सबसे बड़ी सहायक नदी कौन सी है?
तवा नर्मदा की सबसे बड़ी सहायक नदी है, जो जल-संग्रहण क्षेत्र और निर्वहन (discharge) दोनों दृष्टियों से अग्रणी है। यह सतपुड़ा श्रेणी से निकलती है और होशंगाबाद (नर्मदापुरम) के पास नर्मदा में मिलती है। तवा बाँध इसी पर बना है। दाएँ तट पर हिरण सबसे लंबी सहायक नदी है।
सरदार सरोवर बाँध कहाँ स्थित है और इसकी क्या विशेषताएँ हैं?
सरदार सरोवर बाँध गुजरात के नवगाम में नर्मदा पर स्थित है। यह 163 मीटर ऊँचा कंक्रीट गुरुत्व बाँध है। नींव 1961 में जवाहरलाल नेहरू ने रखी और 17 सितंबर 2017 को इसका उद्घाटन हुआ। इसकी स्थापित जल-विद्युत क्षमता 1,450 मेगावाट है। नर्मदा मुख्य नहर ~458 किमी लंबी है — विश्व की सबसे लंबी सिंचाई नहर। लाभार्थी राज्य गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान हैं।
नर्मदा बचाओ आंदोलन क्या है?
नर्मदा बचाओ आंदोलन (NBA) 1980 के दशक के मध्य में मेधा पाटकर के नेतृत्व में आरंभ हुआ एक जन-आंदोलन है, जिसने सरदार सरोवर बाँध की नियोजित ऊँचाई का विरोध किया। मुख्य चिंताएँ थीं — आदिवासी एवं ग्रामीण समुदायों का विस्थापन, अपर्याप्त पुनर्वास, वनों का जलमग्न होना और पारिस्थितिक व्यवधान। 2000 के सर्वोच्च न्यायालय निर्णय ने पुनर्वास की निगरानी के साथ निर्माण जारी रखने की अनुमति दी।
नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण ने क्या निर्णय दिया?
नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण (NWDT) का गठन 1969 में अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के अंतर्गत हुआ। इसने 1979 में पंचाट जारी किया जिसमें वार्षिक उपयोग योग्य प्रवाह 28 MAF (मिलियन एकड़ फीट) निर्धारित कर इस तरह बाँटा गया — गुजरात 9 MAF, मध्य प्रदेश 18.25 MAF, महाराष्ट्र 0.25 MAF, राजस्थान 0.5 MAF। पंचाट ने सरदार सरोवर बाँध की ऊँचाई की शर्तें भी तय कीं।
नर्मदा घाटी परियोजना में कुल कितने बाँध हैं?
नर्मदा घाटी विकास परियोजना नर्मदा और इसकी सहायक नदियों पर 30 बड़े बाँधों, 135 मध्यम बाँधों और 3,000 से अधिक छोटे बाँधों की परिकल्पना करती है। यह विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत बहु-उद्देशीय नदी-घाटी योजनाओं में से एक है, जिसमें सरदार सरोवर, इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, महेश्वर और बरगी प्रमुख हैं।
नर्मदा परिक्रमा क्या है?
नर्मदा परिक्रमा नर्मदा नदी की लगभग 2,600 किलोमीटर लंबी पवित्र प्रदक्षिणा है, जिसमें श्रद्धालु पैदल नदी के दोनों किनारों के साथ-साथ चलते हैं — एक किनारे उद्गम से मुहाने तक, फिर दूसरे किनारे वापस। यह सामान्यतः 3 वर्ष, 3 महीने और 13 दिन में पूरी होती है। हिंदू परंपरा में नर्मदा भारत की सात पवित्र नदियों में से एक मानी जाती है।
नर्मदा का प्रसिद्ध धुआँधार जलप्रपात कहाँ है?
धुआँधार जलप्रपात मध्य प्रदेश के जबलपुर के निकट भेड़ाघाट में स्थित है। यहाँ नर्मदा प्रसिद्ध संगमरमरी चट्टानों के बीच से तेज़ी से गिरती है, जिससे जल का छिड़काव धुएँ की तरह प्रतीत होता है — इसी कारण इसे ‘धुआँधार’ (धुएँ का जलप्रपात) कहते हैं। यह एक प्रमुख पर्यटक एवं भू-वैज्ञानिक स्थल है।
नर्मदा और तापी में क्या अंतर और समानताएँ हैं?
दोनों प्रायद्वीपीय भारत की पश्चिम-वाहिनी नदियाँ हैं, दोनों दरार घाटियों में बहती हैं और दोनों खंभात की खाड़ी में मिलती हैं। नर्मदा अमरकंटक (मैकाल) से निकलती है और 1,312 किमी लंबी है, जबकि तापी मुलताई (सतपुड़ा) से निकलती है और लगभग 724 किमी लंबी है। नर्मदा विंध्य-सतपुड़ा के बीच की दरार में, तापी सतपुड़ा-अजंता के बीच की दरार में बहती है। नर्मदा की सबसे बड़ी सहायक तवा है, तापी की पूर्णा।