राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP): पूरी जानकारी और आवेदन कैसे करें
NSP यानी scholarships.gov.in पर केंद्र की 100 से ज़्यादा छात्रवृत्तियाँ हैं। पात्रता, One Time Registration, ज़रूरी काग़ज़, तीन स्तर की जाँच, आवेदन की तारीख़ें और 2023 की CBI जाँच के बाद हुए सुधार।
राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (National Scholarship Portal, NSP) भारत सरकार का वह एक ही जगह वाला डिजिटल मंच है, जहाँ से केंद्र सरकार की छात्रवृत्तियों के आवेदन लिए जाते हैं, जाँचे जाते हैं, मंज़ूर होते हैं और पैसा भेजा जाता है। यह पोर्टल 1 जुलाई 2015 से चल रहा है। इसे राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP) के तहत मिशन मोड प्रोजेक्ट (MMP) के रूप में शुरू किया गया था और अब यह डिजिटल इंडिया का एक अहम हिस्सा है।
NSP पर 17 से ज़्यादा केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की 100 से ज़्यादा छात्रवृत्ति योजनाएँ हैं — प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक, मेरिट-कम-मीन्स, टॉप क्लास एजुकेशन और राष्ट्रीय फ़ेलोशिप तक। UPSC की तैयारी करने वालों के लिए NSP ई-गवर्नेंस, सीधे खाते में पैसा भेजने (DBT) और कल्याण योजनाओं में सुधार का ठोस उदाहरण है — यानी GS पेपर 2 के बीचोबीच वाले विषय।
शुरुआत और संस्थाओं का ढाँचा
- शुरुआत: 1 जुलाई 2015।
- नोडल मंत्रालय: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)।
- तकनीकी एजेंसी: राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC)।
- योजनाएँ किनकी: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय (2022 तक, अब कुछ काम दूसरी जगह चले गए), जनजातीय कार्य मंत्रालय, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय, और कुछ अन्य।
- वेबसाइट: scholarships.gov.in।
NSP के मक़सद
- छात्रों को केंद्र की सारी छात्रवृत्तियों के लिए एक ही जगह से आवेदन करने का रास्ता देना।
- पब्लिक फ़ाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) के ज़रिए पैसा साफ़ तरीक़े से और समय पर सीधे छात्र के बैंक खाते में पहुँचाना।
- आधार से पहचान जाँचकर दोहरे आवेदन और काग़ज़ पर मौजूद फ़र्ज़ी छात्रों को हटाना।
- मंत्रालयों को योजना की प्रगति उसी समय देख पाने की सुविधा देना।
- काग़ज़ी काम घटाना और हिसाब जाँचना आसान बनाना।
NSP पर छात्रवृत्तियों की श्रेणियाँ
| श्रेणी | किसके लिए | उदाहरण योजनाएँ |
|---|---|---|
| प्री-मैट्रिक | कक्षा 1–10 के छात्र | प्री-मैट्रिक SC/ST, गंदे काम में लगे लोगों के बच्चों के लिए प्री-मैट्रिक |
| पोस्ट-मैट्रिक | कक्षा 11 और उससे ऊपर | पोस्ट-मैट्रिक SC/ST/OBC, SC के लिए टॉप क्लास एजुकेशन |
| मेरिट-कम-मीन्स | प्रोफ़ेशनल कोर्स | अल्पसंख्यकों के लिए MCM, OBC के लिए MCM |
| केंद्रीय क्षेत्र छात्रवृत्ति योजना | होनहार स्नातक/परास्नातक छात्र | कॉलेज एवं विश्वविद्यालय छात्रों के लिए CSSS |
| राष्ट्रीय फ़ेलोशिप | शोध करने वाले | SC/ST के लिए राष्ट्रीय फ़ेलोशिप, मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय फ़ेलोशिप (2022 में बंद) |
| टॉप क्लास | राष्ट्रीय महत्व के संस्थान | IIT, NIT, AIIMS में SC, ST, OBC के लिए टॉप क्लास |
| श्रमिक/बीड़ी कल्याण | कुछ ख़ास मज़दूर वर्गों के बच्चे | बीड़ी, सिने और IOMC मज़दूरों के लिए प्री- और पोस्ट-मैट्रिक |
पोर्टल पर मौजूद बड़ी योजनाएँ
- SC छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति — परिवार की आमदनी 2.5 लाख रुपये से कम; कक्षा 9–10।
- SC छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति — छात्रों की संख्या के हिसाब से सबसे बड़ी अकेली योजना; 2020–21 में इसे नए सिरे से बनाया गया, जिसमें केंद्र और राज्य का हिस्सा 60:40 है।
- OBC छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति — परिवार की आमदनी 1.5 लाख रुपये से कम।
- केंद्रीय क्षेत्र छात्रवृत्ति योजना (CSSS) — हर साल 82,000 नई छात्रवृत्तियाँ (41,000 लड़के + 41,000 लड़कियाँ), कक्षा 12 के नंबरों के आधार पर।
- PM युवा उपलब्धि छात्रवृत्ति योजना (PM-YASASVI) — OBC, EBC और DNT छात्रों के लिए मिलाकर बनाई गई योजना (2022–23 से)।
- राष्ट्रीय साधन-सह-मेधा छात्रवृत्ति (NMMS) — कक्षा 9–12 के होनहार और ग़रीब छात्रों के लिए; साल में 12,000 रुपये।
- AICTE प्रगति (लड़कियों के लिए) और सक्षम (दिव्यांग छात्रों के लिए) छात्रवृत्तियाँ।
पात्रता — आम बातें
पात्रता हर योजना में अलग है, लेकिन कुछ बातें ज़्यादातर योजनाओं में एक जैसी हैं:
- श्रेणी: SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक, EBC, दिव्यांग, सामान्य वर्ग के होनहार-ग़रीब छात्र, और मज़दूरों की उप-श्रेणियाँ।
- परिवार की आमदनी की सीमा: सामाजिक न्याय वाली योजनाओं में आम तौर पर सालाना 1 लाख से 2.5 लाख रुपये; मेरिट वाली योजनाओं में इससे ज़्यादा।
- पढ़ाई की शर्त: पिछली परीक्षा में कम से कम तय प्रतिशत नंबर।
- निवास: कुछ योजनाओं में राज्यवार कोटा तय होता है।
- कोर्स: सिर्फ़ मान्यता प्राप्त संस्थान (AISHE / UDISE में दर्ज)।
- क्या नहीं चलेगा: एक ही छात्र को दो छात्रवृत्तियाँ नहीं; आम तौर पर केंद्र की दूसरी छात्रवृत्ति के साथ नहीं ली जा सकती।
One Time Registration (OTR)
2022–23 से NSP पर हर छात्र के लिए One Time Registration (OTR) ज़रूरी है। इसकी ख़ास बातें:
- एक अलग OTR ID बनती है, जो छात्र की पूरी पढ़ाई के दौरान चलती है।
- यह आधार और DigiLocker से जुड़ी होती है।
- e-KYC और निजी जानकारी अपने आप खिंच आती है।
- हर साल एक ही लॉगिन चलता है — दोबारा रजिस्ट्रेशन नहीं करना पड़ता।
OTR ख़ास तौर पर फ़र्ज़ी आवेदकों के गिरोहों से निपटने के लिए लाया गया, जिन्हें 2023 की CBI जाँच ने पकड़ा था। उस जाँच में काग़ज़ पर चलने वाले संस्थान और सैकड़ों करोड़ की धोखाधड़ी सामने आई थी।
आधार से जाँच और DBT
- पैसा पब्लिक फ़ाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) से होते हुए सीधे खाते में (DBT) छात्र के आधार से जुड़े बैंक खाते में जाता है।
- संस्थानों की जाँच AISHE (उच्च शिक्षा) और UDISE+ (स्कूल शिक्षा) के कोड से होती है।
- जहाँ बैंक शाखाएँ कम हैं, वहाँ आधार आधारित भुगतान प्रणाली (AEPS) काम में लाई जाती है।
कौन-कौन से काग़ज़ लगेंगे
- आधार कार्ड (OTR और DBT दोनों के लिए ज़रूरी)।
- बैंक खाते की जानकारी (IFSC, खाता नंबर — आधार से जुड़ा हुआ)।
- आय प्रमाणपत्र (तहसीलदार / SDM से)।
- जाति प्रमाणपत्र (SC/ST/OBC के लिए)।
- दिव्यांगता प्रमाणपत्र (दिव्यांग आवेदकों के लिए)।
- निवास प्रमाणपत्र।
- पिछले साल की मार्कशीट।
- संस्थान से फ़ीस की रसीद / बोनाफ़ाइड प्रमाणपत्र।
- पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो और दस्तख़त (डिजिटल अपलोड)।
आवेदन आगे कैसे बढ़ता है
NSP पर आवेदन तीन स्तर की जाँच से गुज़रता है:
- छात्र: OTR से लॉगिन करके NSP पर फ़ॉर्म भरता है और काग़ज़ अपलोड करता है।
- Institute Nodal Officer (INO): छात्र का दाख़िला, फ़ीस और बोनाफ़ाइड होना जाँचता है।
- State Nodal Officer (SNO) / District Nodal Officer (DNO): निवास, जाति और आय प्रमाणपत्रों से मिलान करता है।
- मंत्रालय: मंज़ूरी देता है और PFMS से पैसा DBT खातों में भेजता है।
कब आवेदन करें और नवीनीकरण
- नए आवेदन की खिड़की: आम तौर पर हर साल जुलाई से अक्टूबर/नवंबर तक।
- नवीनीकरण की खिड़की: आम तौर पर नवंबर से जनवरी तक।
- संस्थान की जाँच की खिड़की: MeitY ज़रूरत के हिसाब से बढ़ा देता है।
- नवीनीकरण बनाम नया आवेदन: उसी कोर्स में आगे पढ़ रहा छात्र नवीनीकरण में आता है; नया कोर्स शुरू करने वाला छात्र नया आवेदन भरता है।
जो गड़बड़ियाँ पकड़ी गईं और जो सुधार हुए
- CBI जाँच (2023): अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की योजनाओं में कई करोड़ की छात्रवृत्ति धोखाधड़ी पकड़ी गई, जिसमें जम्मू-कश्मीर, पंजाब, असम, कर्नाटक और केरल में फ़र्ज़ी छात्र और काग़ज़ी संस्थान शामिल थे।
- सफ़ाई अभियान (2022–24): संस्थान काली सूची में डाले गए; 100 से ज़्यादा FIR दर्ज हुईं; कुछ योजनाएँ (जैसे अल्पसंख्यकों के लिए कक्षा 1–8 की प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति) 2022–23 से बंद कर दी गईं और मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय फ़ेलोशिप ख़त्म कर दी गई।
- धोखाधड़ी रोकने के लिए आधार-OTR ज़रूरी किया गया।
- UDISE+ और AISHE की मैपिंग से संस्थानों की जियो-टैग जाँच।
- शिकायतों के लिए एक जुड़ा हुआ हेल्पडेस्क और CPGRAMS।
फ़ायदे और कमियाँ
फ़ायदे:
- DBT और आधार से पहचान जाँचने के कारण बीच में पैसा कम टपकता है।
- सारे मंत्रालयों और राज्यों में एक जैसी प्रक्रिया।
- पुराने काग़ज़ी तरीक़े से पैसा जल्दी मिलता है।
- लोग ख़ुद नज़र रख सकें, इसके लिए डैशबोर्ड।
कमियाँ:
- डिजिटल खाई — गाँव के छात्रों को इंटरनेट और बैंक खाता जोड़ने में दिक़्क़त आती है।
- संस्थान और राज्य के स्तर पर जाँच में देरी।
- प्रमाणपत्रों का अड़ंगा (राजस्व विभाग से आय और जाति प्रमाणपत्र लेना)।
- नियम बार-बार बदलने से बदलाव वाले सालों में उलझन होती है।
UPSC में इसका काम
GS पेपर 2 — कमज़ोर वर्गों के लिए कल्याण योजनाएँ (SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक, महिलाएँ, दिव्यांग); तंत्र, क़ानून और संस्थाएँ; सामाजिक क्षेत्र और शिक्षा से जुड़ी सेवाओं के विकास और प्रबंधन के मुद्दे; ई-गवर्नेंस।
GS पेपर 3 — सीधे खाते में पैसा भेजने की भूमिका; सामाजिक क्षेत्र के लिए सरकारी बजट।
प्रीलिम्स के लिए मुख्य तथ्य:
- NSP कब शुरू हुआ: 1 जुलाई 2015।
- नोडल मंत्रालय: MeitY; तकनीकी एजेंसी: NIC।
- वेबसाइट: scholarships.gov.in।
- किस ढाँचे का हिस्सा: राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP) के तहत मिशन मोड प्रोजेक्ट।
- OTR कब से ज़रूरी: 2022–23।
- पैसा किस रास्ते से: DBT के लिए PFMS।
- स्कूल की जाँच का मंच: UDISE+; उच्च शिक्षा: AISHE।
- PM-YASASVI: OBC/EBC/DNT छात्रवृत्तियों की छतरी योजना (2022–23 से)।
- मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय फ़ेलोशिप: 2022 में बंद।
- CBI की छात्रवृत्ति धोखाधड़ी जाँच: 2023 — इसी के बाद OTR और काली सूची वाले सुधार आए।