Anantam IASPost · 18 April 2026

तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशी शब्द

Study Notes · Hindi - Compulsory

तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशी (आगत) शब्दों की पूरी समझ — परिभाषा, ध्वनि-विकास के नियम, बड़ी तालिका और अभ्यास।

हिंदी का शब्द-भंडार चार धाराओं से समृद्ध हुआ है — संस्कृत से सीधे ग्रहण किए गए शब्द, संस्कृत से क्रमिक परिवर्तन द्वारा विकसित शब्द, भारत की लोकभाषाओं से उपजे शब्द, और विदेशी भाषाओं से आए शब्द। उद्गम (व्युत्पत्ति) के इसी आधार पर हिंदी के शब्दों को चार वर्गों में बाँटा जाता है — तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशी (आगत)।

यह विषय अनिवार्य हिंदी की परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है — किसी तत्सम शब्द का तद्भव रूप, किसी तद्भव का तत्सम मूल, अथवा दिए गए शब्दों का वर्गीकरण। नीचे प्रत्येक वर्ग की परिभाषा, तत्सम से तद्भव बनने के सामान्य ध्वनि-नियम, 60 से अधिक जोड़ों की तालिका तथा देशज व विदेशी शब्दों की सुव्यवस्थित सूची दी गई है।

चारों वर्गों की परिभाषा और पहचान

तत्सम (तत् + सम = “उसके समान”) वे शब्द हैं जो संस्कृत से बिना किसी ध्वनि-परिवर्तन के ज्यों-के-त्यों हिंदी में ले लिए गए हैं। इनमें प्रायः संयुक्ताक्षर (क्ष, त्र, ज्ञ, श्र) और संस्कृत प्रत्यय मिलते हैं। जैसे — अग्नि, जल, पुष्प, सूर्य, वायु, मातृ, हस्त।

तद्भव (तत् + भव = “उससे उत्पन्न”) वे शब्द हैं जो संस्कृत से पालि → प्राकृत → अपभ्रंश की यात्रा करते हुए, ध्वनि-सरलीकरण के बाद, बदले रूप में हिंदी में आए हैं। जैसे — आग (अग्नि से), आँख (अक्षि से), हाथ (हस्त से), काम (कर्म से)।

देशज (देश + ज = “देश में ही उत्पन्न”) वे शब्द हैं जो भारत की लोकभाषाओं/बोलियों में जन्मे और जिनका कोई स्पष्ट संस्कृत अथवा विदेशी मूल नहीं ढूँढ़ा जा सका। इन्हें अनुकरणमूलक या अज्ञातमूलक भी कहते हैं। जैसे — लोटा, कटोरा, खिचड़ी, झाड़ू, गड़बड़।

विदेशी / आगत वे शब्द हैं जो विदेशी भाषाओं — अरबी, फ़ारसी, तुर्की, अंग्रेज़ी, पुर्तगाली, फ्रेंच आदि — से हिंदी में आए और अब बोलचाल का अंग बन गए हैं। जैसे — कानून (अरबी), कुर्सी (फ़ारसी), कैंची (तुर्की), साबुन (पुर्तगाली), स्टेशन (अंग्रेज़ी)।

संक्षेप में पहचान: तत्सम कठिन व शास्त्रीय लगते हैं और संयुक्ताक्षर रखते हैं; तद्भव सरल व बोलचाल के होते हैं; देशज पूर्णतः लोक-प्रचलित होते हैं; विदेशी शब्द की पहचान उनके अपरिचित मूल और ‘क़, ख़, ग़, ज़, फ़’ जैसी नुक़्तेदार ध्वनियों से होती है।

तत्सम से तद्भव बनने के सामान्य ध्वनि-नियम

संस्कृत (तत्सम) से तद्भव रूप यूँ ही नहीं बने; इनके पीछे कुछ सुनिश्चित ध्वनि-प्रवृत्तियाँ हैं। प्रमुख नियम इस प्रकार हैं —

क्रमध्वनि-परिवर्तन का नियमउदाहरण (तत्सम → तद्भव)
1संयुक्त व्यंजन का सरलीकरण (एक व्यंजन का लोप)कर्म → काम; सर्प → साँप; सत्य → सच
2‘क्ष’ का ‘ख’/’छ’ हो जानाक्षेत्र → खेत; अक्षि → आँख; क्षीर → खीर
3‘ष/श’ का ‘स’ तथा ‘स’ का बना रहनाशत → सौ; श्वेत → सफेद; मास → महीना
4‘य’ का ‘ज’ हो जानायश → जस; यमुना → जमुना; यज्ञ → जज्ञ
5‘व’ का ‘ब’ हो जानावानर → बानर/बंदर; विवाह → ब्याह
6‘र’ का लोप या परिवर्तनकर्ण → कान; धर्म → धरम; गर्भ → गाभ
7महाप्राण का अल्पप्राण होना (ध्वनि-कोमलता)दुग्ध → दूध; मेघ → मेह; हस्त → हाथ
8अनुनासिकता का जुड़ना (स्वर पर चंद्रबिंदु)दंत → दाँत; अक्षि → आँख; ग्राम → गाँव
9‘त’ का लोप या ‘य/र’ में बदलनाप्रिय → पिया; सूत्र → सूत; पत्र → पत्ता
10आदि स्वर का दीर्घीकरणउष्ट्र → ऊँट; उच्च → ऊँचा; अग्नि → आग
11विसर्ग/’ह’ का लोप या परिवर्तनदुःख → दुख; ग्रह → घर; गृह → घर
12अंत्य ‘अ/अं’ का ‘आ’ होनाअंध → अंधा; मूल्य → मोल; कुब्ज → कूबड़

इन नियमों को रटना आवश्यक नहीं; इन्हें उदाहरणों के साथ समझ लेने पर अनजाने जोड़े भी पहचान में आ जाते हैं।

तत्सम-तद्भव की बड़ी तालिका (60+ जोड़े)

नीचे वर्णक्रम में चुने हुए तत्सम शब्द और उनके तद्भव रूप दिए गए हैं। परीक्षा-दृष्टि से ये सबसे अधिक पूछे जाने वाले जोड़े हैं।

तत्समतद्भवतत्समतद्भव
अग्निआगअक्षिआँख
अक्षरअच्छरअमृतअमिय
अंधअंधाआम्रआम
आश्चर्यअचरजउष्ट्रऊँट
उच्चऊँचाउलूकउल्लू
काककौआकर्मकाम
कर्णकानकार्यकाज
कपोतकबूतरकटुकड़वा
क्षत्रियखत्रीक्षेत्रखेत
क्षीरखीरकुष्ठकोढ़
कूपकुआँकृष्णकिसन/कान्ह
गृहघरगोधूमगेहूँ
गौगायग्रामगाँव
घटघड़ाघृतघी
घोटकघोड़ाचंद्रचाँद
चर्मचामचतुर्थचौथा
छत्रछाताजिह्वाजीभ
ज्येष्ठजेठज्योतिजोत
तप्ततपादंतदाँत
दुग्धदूधदुर्बलदुबला
धैर्यधीरजधूम्रधुआँ
नवनयानिद्रानींद
नासिकानाकपक्षपाख
पर्णपत्तापाषाणपाहन
पिपासाप्यासपुत्रपूत
पुष्पफूलपक्वपका
फाल्गुनफागुनबंधुबाँधव
बधिरबहराबालुकाबालू
भक्तभगतभगिनीबहन
भ्राताभाईमक्षिकामक्खी
मृत्युमौतमध्यमँझला
मुखमुँहमुक्तामोती
यज्ञजज्ञयमुनाजमुना
युवाजवानरज्जुरस्सी
रात्रिरातलक्ष्मणलखन
लवणनमक/लोनलौहलोहा
शतसौशर्कराशक्कर
शुष्कसूखाश्वेतसफेद
सत्यसचसर्पसाँप
सप्तसातसूर्यसूरज
स्वर्णसोनास्तनथन
हस्तहाथहरिद्राहल्दी
क्षणछिनवत्सबछड़ा

(कुल 86 जोड़े) — परीक्षा में जब तद्भव माँगा जाए तो सरल/बोलचाल वाला रूप लिखें, और तत्सम माँगा जाए तो संस्कृत वाला शुद्ध रूप।

देशज शब्दों की सूची

देशज शब्दों का न तो संस्कृत मूल है, न विदेशी। ये लोकजीवन से उपजे हैं और प्रायः वस्तुओं, ध्वनियों या क्रियाओं के अनुकरण से बने हैं।

विदेशी (आगत) शब्दों की भाषा-वार सूची

स्रोत भाषाप्रचलित आगत शब्द
अरबीकानून, किताब, अदालत, मालिक, तारीख़, औरत, हुक्म, अमीर, ग़रीब, कलम, नक़ल, मुक़दमा, हिसाब, इलाज, ख़बर
फ़ारसीआराम, कागज़, कुर्सी, ख़राब, ज़बान, बाज़ार, दुकान, दीवार, गुलाब, चश्मा, नमक, पुल, मज़दूर, रोज़, सब्ज़ी, हफ़्ता
तुर्कीतोप, चाकू, कैंची, बेगम, लाश, उर्दू, चमचा, कुली, क़ुरमा/क़ोरमा, बारूद, तमग़ा, दारोग़ा
अंग्रेज़ीस्टेशन, ट्रेन, कॉलेज, डॉक्टर, टिकट, बटन, रेडियो, टेलीविजन, बस, अफ़सर, बोतल, कप, पेंसिल, स्कूल, मोटर
पुर्तगालीआलू, तंबाकू, चाबी, साबुन, कमरा, बाल्टी, पादरी, गिरजा, अलमारी, इस्तरी, फीता, संतरा, तौलिया, नीलाम
फ्रेंचकारतूस, काजू, अंग्रेज़, बूट, मेयर, कूपन
अन्यचाय, लीची (चीनी); रिक्शा (जापानी)

ध्यान दें — विदेशी शब्द हिंदी में इतने रच-बस गए हैं कि सामान्य प्रयोक्ता उन्हें विदेशी नहीं मानता। फिर भी व्युत्पत्ति की दृष्टि से इनका वर्गीकरण आवश्यक है।

सामान्य अशुद्धियाँ और परीक्षा-दृष्टि

अभ्यास प्रश्न

(अ) निम्न तत्सम शब्दों के तद्भव रूप लिखिए — उष्ट्र, क्षेत्र, दुग्ध, रात्रि, हस्त, श्वेत, मक्षिका, गृह।

(ब) निम्न तद्भव शब्दों के तत्सम मूल लिखिए — काम, आँख, दाँत, कान, साँप, सोना, घी, सात।

(स) बताइए ये शब्द किस वर्ग के हैं — कुर्सी, लोटा, स्वर्ण, ट्रेन, खिचड़ी, कानून, कबूतर, साबुन।

(द) रिक्त स्थान भरिए — क्ष का सरलीकरण होकर तद्भव में प्रायः ______ बनता है; ‘गोधूम’ का तद्भव ______ है; ‘चाय’ शब्द ______ भाषा से आया है।

(य) अति-लघु उत्तरीय — देशज शब्द किसे कहते हैं? पाँच उदाहरण दीजिए। तत्सम और तद्भव में अंतर एक-एक उदाहरण सहित लिखिए।

उत्तर:

(अ) उष्ट्र → ऊँट; क्षेत्र → खेत; दुग्ध → दूध; रात्रि → रात; हस्त → हाथ; श्वेत → सफेद; मक्षिका → मक्खी; गृह → घर।

(ब) काम → कर्म; आँख → अक्षि; दाँत → दंत; कान → कर्ण; साँप → सर्प; सोना → स्वर्ण; घी → घृत; सात → सप्त।

(स) कुर्सी — विदेशी (फ़ारसी); लोटा — देशज; स्वर्ण — तत्सम; ट्रेन — विदेशी (अंग्रेज़ी); खिचड़ी — देशज; कानून — विदेशी (अरबी); कबूतर — तद्भव (कपोत से); साबुन — विदेशी (पुर्तगाली)।

(द) क्ष → ख (अथवा छ); गोधूम → गेहूँ; चाय → चीनी।

(य) देशज वे शब्द हैं जिनका कोई संस्कृत या विदेशी मूल नहीं — जैसे लोटा, कटोरा, खिचड़ी, झाड़ू, गड़बड़। अंतर — तत्सम संस्कृत से ज्यों-के-त्यों आते हैं (जैसे ‘अग्नि’), जबकि तद्भव संस्कृत से ध्वनि-परिवर्तन के बाद बदले रूप में आते हैं (जैसे ‘आग’)।