हिंदी विशेषण: प्रकार और उदाहरण
विशेषण के चार-पाँच भेद, तीन अवस्थाएँ, प्रविशेषण और विशेष्य-विशेषण सामंजस्य — उदाहरण, तालिका और उत्तर-सहित अभ्यास के साथ संपूर्ण अध्ययन-नोट।
विशेषण वह शब्द है जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है — उसका गुण, दोष, रंग, आकार, संख्या या मात्रा। ‘सुंदर लड़की’, ‘दस पुस्तकें’, ‘थोड़ा पानी’ — इन तीनों में पहला शब्द दूसरे की किसी-न-किसी विशेषता को सीमित या स्पष्ट कर रहा है। विशेषण के बिना संज्ञा एक सामान्य, अनिर्दिष्ट नाम-भर रहती है; विशेषण उसमें चित्रात्मकता और विशिष्टता भरता है।
हिंदी अनिवार्य प्रश्नपत्र की दृष्टि से विशेषण अत्यंत उपयोगी विषय है। इससे विशेषण के भेद पहचानना, मूलावस्था से उत्तरावस्था व उत्तमावस्था बनाना, प्रविशेषण छाँटना और विशेष्य के लिंग-वचन के अनुसार विशेषण को शुद्ध रूप में ढालना — ऐसे प्रश्न नियमित बनते हैं। नीचे विषय को परिभाषा, भेद, अवस्था, प्रविशेषण, सामंजस्य और अभ्यास के क्रम में व्यवस्थित किया गया है।
परिभाषा और विशेष्य-विशेषण संबंध
जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता प्रकट करे, उसे विशेषण कहते हैं। जिस संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताई जाती है, उसे विशेष्य कहते हैं। जैसे — ‘काला घोड़ा’ में ‘काला’ विशेषण है और ‘घोड़ा’ विशेष्य।
विशेषण वाक्य में दो स्थितियों में आता है:
- विशेष्य-विशेषण (समान-अधिकरण) — विशेषण सीधे विशेष्य से पहले लगता है : परिश्रमी छात्र, ठंडा पानी।
- विधेय-विशेषण — विशेषण क्रिया के बाद विधेय के रूप में आता है : यह छात्र परिश्रमी है, पानी ठंडा है।
जिस शब्द से विशेषण बनता है उसे प्रकृति और जिस प्रत्यय से बनता है उसे देखकर विशेषण की रचना समझी जा सकती है — जैसे ‘दया’ से ‘दयालु’, ‘भारत’ से ‘भारतीय’, ‘समाज’ से ‘सामाजिक’, ‘मास’ से ‘मासिक’।
विशेषण के भेद
अर्थ की दृष्टि से विशेषण मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं — गुणवाचक, संख्यावाचक, परिमाणवाचक और सार्वनामिक। कई व्याकरण व्यक्तिवाचक/जातिवाचक (व्यक्ति, स्थान या जाति-नाम से बने) विशेषण को पाँचवाँ भेद भी मानते हैं।
| भेद | किसका बोध | उदाहरण |
|---|---|---|
| गुणवाचक | गुण, दोष, रंग, रूप, आकार, स्वाद, अवस्था | अच्छा, बुरा, लाल, गोल, मीठा, बीमार |
| संख्यावाचक | गिनती/क्रम/आवृत्ति | एक, दस, पहला, दुगुना, कुछ |
| परिमाणवाचक | नाप-तौल/मात्रा | थोड़ा, बहुत, दो लीटर, पाँच किलो |
| सार्वनामिक | सर्वनाम से बनकर विशेषता | यह लड़का, वह पुस्तक, कौन-सा छात्र |
| व्यक्ति/जातिवाचक | व्यक्ति, स्थान या जाति से बना | भारतीय, राजस्थानी, ब्राह्मण |
1. गुणवाचक विशेषण
जो विशेषण किसी वस्तु का गुण, दोष, रंग, रूप, आकार, अवस्था, समय, स्थान, दिशा, स्वाद, स्पर्श आदि बताए, वह गुणवाचक कहलाता है। इसकी कोई गिनती-सीमा नहीं — यह विशेषण का सबसे बड़ा और खुला वर्ग है।
- गुण/दोष — अच्छा, भला, सच्चा, ईमानदार; बुरा, दुष्ट, कपटी, आलसी।
- रंग — लाल, पीला, हरा, नीला, श्वेत, काला।
- आकार/रूप — लंबा, छोटा, गोल, चौकोर, मोटा, पतला, टेढ़ा।
- अवस्था — स्वस्थ, बीमार, थका, गीला, सूखा, नया, पुराना।
- समय/स्थान/दिशा — प्राचीन, आधुनिक, ताज़ा, बासी, ऊपरी, भीतरी, पूर्वी, दक्षिणी।
- स्वाद/स्पर्श — मीठा, कड़वा, खट्टा, नमकीन; मुलायम, खुरदरा, ठंडा, गरम।
2. संख्यावाचक विशेषण
जो विशेषण संख्या या गिनती का बोध कराए, वह संख्यावाचक कहलाता है। इसके दो प्रमुख वर्ग हैं — निश्चित और अनिश्चित।
- निश्चित संख्यावाचक — संख्या स्पष्ट हो : एक, दो, सौ, पहला, दूसरा, दुगुना।
- अनिश्चित संख्यावाचक — संख्या अनिश्चित हो : कुछ, कई, अनेक, सब, थोड़े, सैकड़ों।
निश्चित संख्यावाचक के पाँच उप-भेद होते हैं:
| उप-भेद | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| गणनावाचक | केवल गिनती | एक, दो, तीन, सौ |
| क्रमवाचक | क्रम/स्थान | पहला, दूसरा, तीसरा, दसवाँ |
| आवृत्तिवाचक | कितने गुना | दुगुना, तिगुना, चौगुना |
| समुदायवाचक | समूह की पूरी गिनती | दोनों, तीनों, चारों |
| प्रत्येकबोधक | एक-एक करके | प्रत्येक, हर-एक, प्रति |
3. परिमाणवाचक विशेषण
जो विशेषण किसी वस्तु की मात्रा, नाप या तौल का बोध कराए, वह परिमाणवाचक कहलाता है। ध्यान दें — परिमाणवाचक प्रायः उन वस्तुओं के साथ आता है जो गिनी नहीं जातीं, केवल नापी या तौली जाती हैं (पानी, दूध, अनाज, तेल)। इसके भी दो भेद हैं:
- निश्चित परिमाणवाचक — माप निश्चित : दो लीटर दूध, पाँच किलो आटा, तीन मीटर कपड़ा।
- अनिश्चित परिमाणवाचक — माप अनिश्चित : थोड़ा पानी, बहुत दूध, कम नमक, अधिक तेल, ज़रा-सी चीनी।
> पहचान-युक्ति : ‘दस आम’ संख्यावाचक है (आम गिने जाते हैं), पर ‘दस किलो आम’ में ‘किलो’ तौल बताने के कारण परिमाण की ओर ले जाता है। जो वस्तु गिनी जाए — संख्यावाचक; जो नापी/तौली जाए — परिमाणवाचक।
4. सार्वनामिक विशेषण
जब कोई सर्वनाम किसी संज्ञा से पहले लगकर उसकी विशेषता बताए, तब वह सार्वनामिक विशेषण कहलाता है। अकेला खड़ा हो तो वही शब्द सर्वनाम है; संज्ञा के साथ लगे तो विशेषण।
- यह (सर्वनाम) मेरा है। → यह लड़का परिश्रमी है। (सार्वनामिक विशेषण)
- वह पुस्तक मेरी है। / कौन-सा छात्र आया? / कोई व्यक्ति बाहर खड़ा है। / जैसा देश वैसा भेष।
5. व्यक्तिवाचक/जातिवाचक विशेषण
व्यक्तिवाचक संज्ञा (व्यक्ति, स्थान, जाति) से बने विशेषण इस वर्ग में आते हैं — भारत → भारतीय संस्कृति, राजस्थान → राजस्थानी वेशभूषा, पंजाब → पंजाबी भोजन, ब्राह्मण → ब्राह्मण-परिवार, इतिहास → ऐतिहासिक स्थल।
विशेषण की अवस्थाएँ
जब किसी गुण की तुलना की जाती है, तब विशेषण तीन अवस्थाओं में प्रकट होता है — मूलावस्था, उत्तरावस्था और उत्तमावस्था।
| अवस्था | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| मूलावस्था (Positive) | सामान्य रूप, कोई तुलना नहीं | सुंदर, अच्छा, बड़ा |
| उत्तरावस्था (Comparative) | दो में तुलना | अधिक सुंदर, सुंदरतर, राम से बड़ा |
| उत्तमावस्था (Superlative) | अनेक में सर्वाधिक | सबसे सुंदर, सुंदरतम, सर्वश्रेष्ठ |
हिंदी में अवस्था-निर्माण के दो ढंग प्रचलित हैं:
(क) हिंदी रीति — ‘से’ और ‘सबसे’ से :
- मूलावस्था : राम परिश्रमी है।
- उत्तरावस्था : राम श्याम से परिश्रमी है।
- उत्तमावस्था : राम सबसे परिश्रमी है।
(ख) संस्कृत प्रत्यय — ‘-तर’ और ‘-तम’ से (मुख्यतः तत्सम विशेषणों के साथ):
| मूलावस्था | उत्तरावस्था (-तर) | उत्तमावस्था (-तम) |
|---|---|---|
| सुंदर | सुंदरतर | सुंदरतम |
| महान् | महत्तर | महत्तम |
| लघु | लघुतर | लघुतम |
| श्रेष्ठ | श्रेष्ठतर | श्रेष्ठतम |
| प्रिय | प्रियतर | प्रियतम |
| उच्च | उच्चतर | उच्चतम |
| अधिक | अधिकतर | अधिकतम |
| गुरु | गरीयान् | गरिष्ठ |
> सावधानी : ‘-तर/-तम’ वाले रूपों के साथ फिर ‘अधिक’ या ‘सबसे’ न लगाएँ — ‘सबसे सुंदरतम’ या ‘अधिक श्रेष्ठतर’ अशुद्ध है; केवल ‘सुंदरतम’ या ‘श्रेष्ठतम’ पर्याप्त है।
प्रविशेषण
जो शब्द विशेषण की भी विशेषता बताए, उसे प्रविशेषण कहते हैं। अर्थात् प्रविशेषण विशेषण की मात्रा या तीव्रता को घटाता-बढ़ाता है। जैसे — ‘बहुत अच्छा’ में ‘अच्छा’ विशेषण है और ‘बहुत’ उसकी विशेषता बताने वाला प्रविशेषण।
- वह बहुत परिश्रमी छात्र है।
- आज अत्यंत ठंडा दिन है।
- यह आम कुछ मीठा है।
- वह पूर्णतः स्वस्थ है।
सामान्य प्रविशेषण : बहुत, अति, अत्यंत, अधिक, कम, थोड़ा, ज़रा, पूर्णतः, नितांत, सर्वथा, काफ़ी, बेहद, खूब।
> पहचान-युक्ति : प्रविशेषण से ठीक आगे विशेषण होता है (बहुत सुंदर), जबकि क्रियाविशेषण से आगे क्रिया होती है (वह बहुत दौड़ा)। आगे क्या है — विशेषण या क्रिया — यही भेद तय करता है।
विशेष्य-विशेषण में सामंजस्य और सामान्य अशुद्धियाँ
विशेषण अपने विशेष्य के लिंग, वचन और (कहीं-कहीं) कारक के अनुसार रूप बदलता है या स्थिर रहता है — यह उसके अंत्य स्वर पर निर्भर है।
| विशेषण-प्रकार | नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| आकारांत (अ/आ-अंत) | लिंग-वचन से बदलते हैं | अच्छा लड़का, अच्छी लड़की, अच्छे लड़के |
| ईकारांत/अन्य | प्रायः नहीं बदलते | सुंदर लड़का, सुंदर लड़की, सुंदर लड़के |
| संस्कृत-मूल (विद्वान्) | स्त्रीलिंग में अलग रूप | विद्वान् छात्र, विदुषी छात्रा |
सामान्य अशुद्धियाँ और शुद्ध रूप:
| अशुद्ध | शुद्ध | कारण |
|---|---|---|
| अच्छा लड़की | अच्छी लड़की | आकारांत विशेषण स्त्रीलिंग में ‘ई’ |
| दो अच्छा घोड़े | दो अच्छे घोड़े | बहुवचन में ‘ए’ |
| सबसे सुंदरतम दृश्य | सुंदरतम दृश्य | ‘-तम’ के साथ ‘सबसे’ अनावश्यक |
| वह राम से अधिक श्रेष्ठतर है | वह राम से श्रेष्ठ है | दोहरी तुलना अशुद्ध |
| विद्वान् स्त्री | विदुषी स्त्री | स्त्रीलिंग रूप ‘विदुषी’ |
इनके अतिरिक्त, संख्यावाचक को परिमाणवाचक समझ लेना, सार्वनामिक विशेषण को शुद्ध सर्वनाम मान लेना और प्रविशेषण को क्रियाविशेषण से न पहचान पाना — ये भी परीक्षा में बारंबार दिखती गलतियाँ हैं।
अभ्यास प्रश्न
(क) निम्नलिखित विशेषणों का भेद बताइए —
- हरा (पत्ता)
- तीसरा (अध्याय)
- थोड़ा (दूध)
- यह (पुस्तक)
- दुगुना (लाभ)
- भारतीय (सेना)
- अनेक (लोग)
(ख) कोष्ठक में दिए विशेषण को विशेष्य के अनुरूप शुद्ध कीजिए —
- (अच्छा) लड़की पढ़ रही है।
- दो (बड़ा) मकान बिक गए।
- (विद्वान्) महिला ने भाषण दिया।
(ग) तीनों अवस्थाएँ लिखिए —
- लघु
- श्रेष्ठ
(घ) वाक्य से प्रविशेषण छाँटिए —
- यह आम बहुत मीठा है।
- वह अत्यंत परिश्रमी छात्र है।
(ङ) सही विकल्प चुनिए —
- ‘पाँच लीटर दूध’ में ‘पाँच लीटर’ कौन-सा विशेषण है? (संख्यावाचक / परिमाणवाचक)
उत्तर
(क) 1. गुणवाचक (रंग) 2. संख्यावाचक — क्रमवाचक 3. परिमाणवाचक (अनिश्चित) 4. सार्वनामिक 5. संख्यावाचक — आवृत्तिवाचक 6. व्यक्ति/जातिवाचक 7. संख्यावाचक — अनिश्चित।
(ख) 8. अच्छी लड़की पढ़ रही है। 9. दो बड़े मकान बिक गए। 10. विदुषी महिला ने भाषण दिया।
(ग) 11. लघु — लघुतर — लघुतम। 12. श्रेष्ठ — श्रेष्ठतर — श्रेष्ठतम।
(घ) 13. बहुत 14. अत्यंत।
(ङ) परिमाणवाचक — क्योंकि ‘लीटर’ तौल/माप का बोध कराता है।