UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

हिंदी विशेषण: प्रकार और उदाहरण

विशेषण के चार-पाँच भेद, तीन अवस्थाएँ, प्रविशेषण और विशेष्य-विशेषण सामंजस्य — उदाहरण, तालिका और उत्तर-सहित अभ्यास के साथ संपूर्ण अध्ययन-नोट।

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विशेषण वह शब्द है जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है — उसका गुण, दोष, रंग, आकार, संख्या या मात्रा। ‘सुंदर लड़की’, ‘दस पुस्तकें’, ‘थोड़ा पानी’ — इन तीनों में पहला शब्द दूसरे की किसी-न-किसी विशेषता को सीमित या स्पष्ट कर रहा है। विशेषण के बिना संज्ञा एक सामान्य, अनिर्दिष्ट नाम-भर रहती है; विशेषण उसमें चित्रात्मकता और विशिष्टता भरता है।

हिंदी अनिवार्य प्रश्नपत्र की दृष्टि से विशेषण अत्यंत उपयोगी विषय है। इससे विशेषण के भेद पहचानना, मूलावस्था से उत्तरावस्था व उत्तमावस्था बनाना, प्रविशेषण छाँटना और विशेष्य के लिंग-वचन के अनुसार विशेषण को शुद्ध रूप में ढालना — ऐसे प्रश्न नियमित बनते हैं। नीचे विषय को परिभाषा, भेद, अवस्था, प्रविशेषण, सामंजस्य और अभ्यास के क्रम में व्यवस्थित किया गया है।

परिभाषा और विशेष्य-विशेषण संबंध

जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता प्रकट करे, उसे विशेषण कहते हैं। जिस संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताई जाती है, उसे विशेष्य कहते हैं। जैसे — ‘काला घोड़ा’ में ‘काला’ विशेषण है और ‘घोड़ा’ विशेष्य।

विशेषण वाक्य में दो स्थितियों में आता है:

  • विशेष्य-विशेषण (समान-अधिकरण) — विशेषण सीधे विशेष्य से पहले लगता है : परिश्रमी छात्र, ठंडा पानी।
  • विधेय-विशेषण — विशेषण क्रिया के बाद विधेय के रूप में आता है : यह छात्र परिश्रमी है, पानी ठंडा है।

जिस शब्द से विशेषण बनता है उसे प्रकृति और जिस प्रत्यय से बनता है उसे देखकर विशेषण की रचना समझी जा सकती है — जैसे ‘दया’ से ‘दयालु’, ‘भारत’ से ‘भारतीय’, ‘समाज’ से ‘सामाजिक’, ‘मास’ से ‘मासिक’।

विशेषण के भेद

अर्थ की दृष्टि से विशेषण मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं — गुणवाचक, संख्यावाचक, परिमाणवाचक और सार्वनामिक। कई व्याकरण व्यक्तिवाचक/जातिवाचक (व्यक्ति, स्थान या जाति-नाम से बने) विशेषण को पाँचवाँ भेद भी मानते हैं।

भेदकिसका बोधउदाहरण
गुणवाचकगुण, दोष, रंग, रूप, आकार, स्वाद, अवस्थाअच्छा, बुरा, लाल, गोल, मीठा, बीमार
संख्यावाचकगिनती/क्रम/आवृत्तिएक, दस, पहला, दुगुना, कुछ
परिमाणवाचकनाप-तौल/मात्राथोड़ा, बहुत, दो लीटर, पाँच किलो
सार्वनामिकसर्वनाम से बनकर विशेषतायह लड़का, वह पुस्तक, कौन-सा छात्र
व्यक्ति/जातिवाचकव्यक्ति, स्थान या जाति से बनाभारतीय, राजस्थानी, ब्राह्मण

1. गुणवाचक विशेषण

जो विशेषण किसी वस्तु का गुण, दोष, रंग, रूप, आकार, अवस्था, समय, स्थान, दिशा, स्वाद, स्पर्श आदि बताए, वह गुणवाचक कहलाता है। इसकी कोई गिनती-सीमा नहीं — यह विशेषण का सबसे बड़ा और खुला वर्ग है।

  • गुण/दोष — अच्छा, भला, सच्चा, ईमानदार; बुरा, दुष्ट, कपटी, आलसी।
  • रंग — लाल, पीला, हरा, नीला, श्वेत, काला।
  • आकार/रूप — लंबा, छोटा, गोल, चौकोर, मोटा, पतला, टेढ़ा।
  • अवस्था — स्वस्थ, बीमार, थका, गीला, सूखा, नया, पुराना।
  • समय/स्थान/दिशा — प्राचीन, आधुनिक, ताज़ा, बासी, ऊपरी, भीतरी, पूर्वी, दक्षिणी।
  • स्वाद/स्पर्श — मीठा, कड़वा, खट्टा, नमकीन; मुलायम, खुरदरा, ठंडा, गरम।

2. संख्यावाचक विशेषण

जो विशेषण संख्या या गिनती का बोध कराए, वह संख्यावाचक कहलाता है। इसके दो प्रमुख वर्ग हैं — निश्चित और अनिश्चित।

  • निश्चित संख्यावाचक — संख्या स्पष्ट हो : एक, दो, सौ, पहला, दूसरा, दुगुना।
  • अनिश्चित संख्यावाचक — संख्या अनिश्चित हो : कुछ, कई, अनेक, सब, थोड़े, सैकड़ों।

निश्चित संख्यावाचक के पाँच उप-भेद होते हैं:

उप-भेदअर्थउदाहरण
गणनावाचककेवल गिनतीएक, दो, तीन, सौ
क्रमवाचकक्रम/स्थानपहला, दूसरा, तीसरा, दसवाँ
आवृत्तिवाचककितने गुनादुगुना, तिगुना, चौगुना
समुदायवाचकसमूह की पूरी गिनतीदोनों, तीनों, चारों
प्रत्येकबोधकएक-एक करकेप्रत्येक, हर-एक, प्रति

3. परिमाणवाचक विशेषण

जो विशेषण किसी वस्तु की मात्रा, नाप या तौल का बोध कराए, वह परिमाणवाचक कहलाता है। ध्यान दें — परिमाणवाचक प्रायः उन वस्तुओं के साथ आता है जो गिनी नहीं जातीं, केवल नापी या तौली जाती हैं (पानी, दूध, अनाज, तेल)। इसके भी दो भेद हैं:

  • निश्चित परिमाणवाचक — माप निश्चित : दो लीटर दूध, पाँच किलो आटा, तीन मीटर कपड़ा।
  • अनिश्चित परिमाणवाचक — माप अनिश्चित : थोड़ा पानी, बहुत दूध, कम नमक, अधिक तेल, ज़रा-सी चीनी।

> पहचान-युक्ति : ‘दस आम’ संख्यावाचक है (आम गिने जाते हैं), पर ‘दस किलो आम’ में ‘किलो’ तौल बताने के कारण परिमाण की ओर ले जाता है। जो वस्तु गिनी जाए — संख्यावाचक; जो नापी/तौली जाए — परिमाणवाचक।

4. सार्वनामिक विशेषण

जब कोई सर्वनाम किसी संज्ञा से पहले लगकर उसकी विशेषता बताए, तब वह सार्वनामिक विशेषण कहलाता है। अकेला खड़ा हो तो वही शब्द सर्वनाम है; संज्ञा के साथ लगे तो विशेषण।

  • यह (सर्वनाम) मेरा है। → यह लड़का परिश्रमी है। (सार्वनामिक विशेषण)
  • वह पुस्तक मेरी है। / कौन-सा छात्र आया? / कोई व्यक्ति बाहर खड़ा है। / जैसा देश वैसा भेष।

5. व्यक्तिवाचक/जातिवाचक विशेषण

व्यक्तिवाचक संज्ञा (व्यक्ति, स्थान, जाति) से बने विशेषण इस वर्ग में आते हैं — भारत → भारतीय संस्कृति, राजस्थान → राजस्थानी वेशभूषा, पंजाब → पंजाबी भोजन, ब्राह्मण → ब्राह्मण-परिवार, इतिहास → ऐतिहासिक स्थल।

विशेषण की अवस्थाएँ

जब किसी गुण की तुलना की जाती है, तब विशेषण तीन अवस्थाओं में प्रकट होता है — मूलावस्था, उत्तरावस्था और उत्तमावस्था।

अवस्थाअर्थउदाहरण
मूलावस्था (Positive)सामान्य रूप, कोई तुलना नहींसुंदर, अच्छा, बड़ा
उत्तरावस्था (Comparative)दो में तुलनाअधिक सुंदर, सुंदरतर, राम से बड़ा
उत्तमावस्था (Superlative)अनेक में सर्वाधिकसबसे सुंदर, सुंदरतम, सर्वश्रेष्ठ

हिंदी में अवस्था-निर्माण के दो ढंग प्रचलित हैं:

(क) हिंदी रीति — ‘से’ और ‘सबसे’ से :

  • मूलावस्था : राम परिश्रमी है।
  • उत्तरावस्था : राम श्याम से परिश्रमी है।
  • उत्तमावस्था : राम सबसे परिश्रमी है।

(ख) संस्कृत प्रत्यय — ‘-तर’ और ‘-तम’ से (मुख्यतः तत्सम विशेषणों के साथ):

मूलावस्थाउत्तरावस्था (-तर)उत्तमावस्था (-तम)
सुंदरसुंदरतरसुंदरतम
महान्महत्तरमहत्तम
लघुलघुतरलघुतम
श्रेष्ठश्रेष्ठतरश्रेष्ठतम
प्रियप्रियतरप्रियतम
उच्चउच्चतरउच्चतम
अधिकअधिकतरअधिकतम
गुरुगरीयान्गरिष्ठ

> सावधानी : ‘-तर/-तम’ वाले रूपों के साथ फिर ‘अधिक’ या ‘सबसे’ न लगाएँ — ‘सबसे सुंदरतम’ या ‘अधिक श्रेष्ठतर’ अशुद्ध है; केवल ‘सुंदरतम’ या ‘श्रेष्ठतम’ पर्याप्त है।

प्रविशेषण

जो शब्द विशेषण की भी विशेषता बताए, उसे प्रविशेषण कहते हैं। अर्थात् प्रविशेषण विशेषण की मात्रा या तीव्रता को घटाता-बढ़ाता है। जैसे — ‘बहुत अच्छा’ में ‘अच्छा’ विशेषण है और ‘बहुत’ उसकी विशेषता बताने वाला प्रविशेषण।

  • वह बहुत परिश्रमी छात्र है।
  • आज अत्यंत ठंडा दिन है।
  • यह आम कुछ मीठा है।
  • वह पूर्णतः स्वस्थ है।

सामान्य प्रविशेषण : बहुत, अति, अत्यंत, अधिक, कम, थोड़ा, ज़रा, पूर्णतः, नितांत, सर्वथा, काफ़ी, बेहद, खूब।

> पहचान-युक्ति : प्रविशेषण से ठीक आगे विशेषण होता है (बहुत सुंदर), जबकि क्रियाविशेषण से आगे क्रिया होती है (वह बहुत दौड़ा)। आगे क्या है — विशेषण या क्रिया — यही भेद तय करता है।

विशेष्य-विशेषण में सामंजस्य और सामान्य अशुद्धियाँ

विशेषण अपने विशेष्य के लिंग, वचन और (कहीं-कहीं) कारक के अनुसार रूप बदलता है या स्थिर रहता है — यह उसके अंत्य स्वर पर निर्भर है।

विशेषण-प्रकारनियमउदाहरण
आकारांत (अ/आ-अंत)लिंग-वचन से बदलते हैंअच्छा लड़का, अच्छी लड़की, अच्छे लड़के
ईकारांत/अन्यप्रायः नहीं बदलतेसुंदर लड़का, सुंदर लड़की, सुंदर लड़के
संस्कृत-मूल (विद्वान्)स्त्रीलिंग में अलग रूपविद्वान् छात्र, विदुषी छात्रा

सामान्य अशुद्धियाँ और शुद्ध रूप:

अशुद्धशुद्धकारण
अच्छा लड़कीअच्छी लड़कीआकारांत विशेषण स्त्रीलिंग में ‘ई’
दो अच्छा घोड़ेदो अच्छे घोड़ेबहुवचन में ‘ए’
सबसे सुंदरतम दृश्यसुंदरतम दृश्य‘-तम’ के साथ ‘सबसे’ अनावश्यक
वह राम से अधिक श्रेष्ठतर हैवह राम से श्रेष्ठ हैदोहरी तुलना अशुद्ध
विद्वान् स्त्रीविदुषी स्त्रीस्त्रीलिंग रूप ‘विदुषी’

इनके अतिरिक्त, संख्यावाचक को परिमाणवाचक समझ लेना, सार्वनामिक विशेषण को शुद्ध सर्वनाम मान लेना और प्रविशेषण को क्रियाविशेषण से न पहचान पाना — ये भी परीक्षा में बारंबार दिखती गलतियाँ हैं।

अभ्यास प्रश्न

(क) निम्नलिखित विशेषणों का भेद बताइए —

  1. हरा (पत्ता)
  2. तीसरा (अध्याय)
  3. थोड़ा (दूध)
  4. यह (पुस्तक)
  5. दुगुना (लाभ)
  6. भारतीय (सेना)
  7. अनेक (लोग)

(ख) कोष्ठक में दिए विशेषण को विशेष्य के अनुरूप शुद्ध कीजिए —

  1. (अच्छा) लड़की पढ़ रही है।
  2. दो (बड़ा) मकान बिक गए।
  3. (विद्वान्) महिला ने भाषण दिया।

(ग) तीनों अवस्थाएँ लिखिए —

  1. लघु
  2. श्रेष्ठ

(घ) वाक्य से प्रविशेषण छाँटिए —

  1. यह आम बहुत मीठा है।
  2. वह अत्यंत परिश्रमी छात्र है।

(ङ) सही विकल्प चुनिए —

  1. ‘पाँच लीटर दूध’ में ‘पाँच लीटर’ कौन-सा विशेषण है? (संख्यावाचक / परिमाणवाचक)

उत्तर

(क) 1. गुणवाचक (रंग) 2. संख्यावाचक — क्रमवाचक 3. परिमाणवाचक (अनिश्चित) 4. सार्वनामिक 5. संख्यावाचक — आवृत्तिवाचक 6. व्यक्ति/जातिवाचक 7. संख्यावाचक — अनिश्चित।

(ख) 8. अच्छी लड़की पढ़ रही है। 9. दो बड़े मकान बिक गए। 10. विदुषी महिला ने भाषण दिया।

(ग) 11. लघु — लघुतर — लघुतम। 12. श्रेष्ठ — श्रेष्ठतर — श्रेष्ठतम।

(घ) 13. बहुत 14. अत्यंत।

(ङ) परिमाणवाचक — क्योंकि ‘लीटर’ तौल/माप का बोध कराता है।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

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