अनुच्छेद लेखन: प्रारूप, संकेत बिंदु, 120 शब्द की सीमा और तीन नमूने
अनुच्छेद लेखन सीखिए: Anuchchhed Lekhan का प्रारूप, संकेत बिंदुओं से 120 शब्द में लिखने का तरीका, तीन नमूने और निबंध-पल्लवन से इसका फर्क।
अनुच्छेद लेखन का मतलब है किसी एक विषय, भाव या विचार को सीमित शब्दों में, एक ही पैराग्राफ में, कसकर और क्रम से लिखना। स्कूल की परीक्षा में यह आम तौर पर संकेत बिंदुओं के साथ आता है: तीन विषय दिए जाते हैं, उनमें से एक चुनना होता है, और लगभग 120 शब्दों में अनुच्छेद लिखना होता है। प्रतियोगी परीक्षाओं के निबंध, संक्षेपण और उत्तर-लेखन की नींव भी यही कौशल है।
सबसे आम गलतफहमी यह है कि अनुच्छेद छोटा निबंध है। ऐसा नहीं है। निबंध में भूमिका, विस्तार और उपसंहार अलग-अलग होते हैं, जबकि अनुच्छेद पहले वाक्य से ही विषय पर आ जाता है और एक ही पहलू को पूरा करता है। यह नोट अनुच्छेद का प्रारूप, संकेत बिंदुओं को शब्दों में बदलने का तरीका, तीन पूरे नमूने और वे गलतियाँ बताता है जिनसे अच्छे विचार वाले अनुच्छेद के भी नंबर कट जाते हैं।
अनुच्छेद लेखन एक नजर में
नीचे की तालिका में वह सब है जो परीक्षा से पहले याद रहना चाहिए। हर बिंदु आगे के खंडों में विस्तार से है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| परिभाषा | एक भाव या विचार को व्यक्त करने वाला सुसंबद्ध और छोटा वाक्य-समूह (NIOS) |
| आकार | एक ही पैराग्राफ, बीच में कोई तोड़ नहीं |
| शब्द सीमा | CBSE कक्षा 9 और 10 में लगभग 120 शब्द |
| अंक | CBSE हिंदी A में 6, हिंदी B में 5 |
| प्रश्न का रूप | संकेत बिंदुओं वाले तीन विषयों में से एक |
| चार कसौटियाँ | पूर्णता, क्रमबद्धता, विषय-केंद्रित होना, सामासिकता |
| शैली | ‘मैं’ शैली और कोई भी काल चल सकता है |
| अलग विधाएँ | निबंध, पल्लवन, संक्षेपण, पत्र |
अनुच्छेद किसे कहते हैं और यह निबंध से कैसे अलग है
NIOS की हिंदी पाठ्यपुस्तक अनुच्छेद को किसी एक भाव या विचार को व्यक्त करने के लिए लिखे गए सुसंबद्ध और लघु वाक्य-समूह के रूप में परिभाषित करती है। आसान शब्दों में, किसी विषय पर थोड़े पर चुने हुए शब्दों में अपनी बात रखना अनुच्छेद लेखन है। विषय कुछ भी हो सकता है: एक चित्र, एक घटना, एक व्यक्ति, एक सूक्ति या कोई सामाजिक समस्या।
अनुच्छेद और निबंध का फर्क आकार से ज्यादा ढाँचे का है। निबंध बहुआयामी होता है, यानी उसमें विषय के कई पहलू अलग-अलग पैराग्राफ में खुलते हैं। अनुच्छेद में एक ही पहलू पूरी तरह खुलता है। NIOS इसे एक उदाहरण से समझाती है: “अहिंसा परमो धर्मः” पर अनुच्छेद भी लिखा जा सकता है और निबंध भी, पर दोनों का ढाँचा अलग होगा। बल्कि कई सुव्यवस्थित अनुच्छेदों को जोड़कर ही निबंध बनता है।
पल्लवन से भी अनुच्छेद अलग है, हालाँकि दोनों छोटे दिखते हैं। पल्लवन किसी सूक्ति, लोकोक्ति या काव्य-पंक्ति में छिपे भाव को खोलकर फैलाता है। NIOS के अनुसार पल्लवन में एक से ज्यादा अनुच्छेद हो सकते हैं, उसमें ‘मैं’ शैली नहीं आती और वह वर्तमान काल में रहता है। अनुच्छेद में ‘मैं’ शैली भी चल सकती है और कोई भी काल।
| विधा | क्या करती है | आकार | ढाँचा |
|---|---|---|---|
| अनुच्छेद | एक विषय का एक पहलू पूरा करता है | एक पैराग्राफ, लगभग 120 शब्द | पहले वाक्य से विषय, आखिरी वाक्य में समापन |
| निबंध | विषय के कई पहलू खोलता है | कई पैराग्राफ | भूमिका, विस्तार, उपसंहार |
| पल्लवन | सूक्ति या पंक्ति का भाव फैलाता है | एक या ज्यादा पैराग्राफ | वर्तमान काल, ‘मैं’ शैली नहीं |
| संक्षेपण | लंबे अंश को छोटा करता है | आम तौर पर मूल का लगभग एक-तिहाई | मूल के विचार, अपने शब्द |
| पत्र | किसी व्यक्ति या दफ्तर को संबोधित | तय प्रारूप | पता, संबोधन, विषय, समापन |
निबंध की पूरी तकनीक हिंदी निबंध लेखन वाले नोट में है, और लंबे अंश को छोटा करने का तरीका हिंदी संक्षेपण वाले नोट में।
अच्छे अनुच्छेद की चार कसौटियाँ
CBSE का हिंदी पाठ्यक्रम अनुच्छेद लेखन के लिए चार कसौटियाँ तय करता है। जाँचने वाला इन्हीं को देखता है, इसलिए लिखते समय इन्हें चेकलिस्ट की तरह इस्तेमाल कीजिए।
- पूर्णता: विषय के सभी जरूरी पक्ष अनुच्छेद के सीमित आकार में आ जाएँ। कोई संकेत बिंदु छूटे नहीं।
- क्रमबद्धता: विचार क्रम से और तर्क के साथ आएँ। हर वाक्य पिछले वाक्य से जुड़ा हो।
- विषय-केंद्रित: शुरू से आखिर तक अनुच्छेद एक सूत्र में बँधा रहे। विषय से बाहर की बात न आए।
- सामासिकता: बेवजह फैलाव न हो। कम शब्दों में ज्यादा से ज्यादा बात कही जाए।
NIOS की पाठ्यपुस्तक इसमें लिखने की प्रक्रिया भी जोड़ती है: पहले विषय पर सोचिए, फिर उसकी रूपरेखा बनाइए, शैली और भाषा चुनिए, दोहराव और अप्रासंगिक बातों से बचिए, और आखिर में पूरा अनुच्छेद दोबारा पढ़कर वर्तनी, वाक्य-रचना और विराम चिह्न की गलतियाँ ठीक कीजिए। यह आखिरी कदम सबसे ज्यादा छूटता है और सबसे ज्यादा नंबर बचाता है।
अनुच्छेद लेखन का प्रारूप
अनुच्छेद का कोई सरकारी प्रारूप नहीं है जैसा पत्र का होता है, पर परीक्षा में एक ढाँचा लगभग हर जगह चलता है। इसे याद कर लीजिए, ताकि परीक्षा भवन में ढाँचे पर समय न लगे और सारा ध्यान विचार पर रहे।
शीर्षक, फिर एक ही पैराग्राफ
सबसे ऊपर विषय का शीर्षक लिखिए, जैसे प्रश्न में दिया गया है। उसके ठीक नीचे पूरा अनुच्छेद एक ही पैराग्राफ में लिखिए। बीच में नई पंक्ति से नया पैराग्राफ शुरू करना अनुच्छेद की मूल शर्त तोड़ देता है। संकेत बिंदुओं को उप-शीर्षक या बुलेट बनाकर मत लिखिए; वे सिर्फ आपके लिए रास्ता हैं।
शुरुआत, बीच और समापन
एक पैराग्राफ के भीतर भी तीन हिस्से होते हैं, बस वे अलग पैराग्राफ में नहीं दिखते:
- पहला वाक्य: सीधे विषय पर आइए। विषय क्या है या उसकी सबसे जरूरी बात क्या है, यह पहले वाक्य में दिख जाए।
- बीच के वाक्य: हर संकेत बिंदु पर एक या दो वाक्य, उसी क्रम में जिसमें बिंदु दिए गए हैं। एक बिंदु से दूसरे पर जाने के लिए “इसलिए”, “लेकिन”, “इसके साथ ही” जैसे जोड़ने वाले शब्द इस्तेमाल कीजिए।
- आखिरी वाक्य: समापन, सुझाव या निष्कर्ष। पहले कही बात दोहराइए नहीं, उसे एक कदम आगे ले जाइए।
120 शब्दों का हिसाब
120 शब्द सुनने में कम लगते हैं, पर चार संकेत बिंदुओं में बाँटें तो हर बिंदु के हिस्से लगभग 25 से 30 शब्द आते हैं। यानी हर बिंदु पर दो छोटे वाक्य। पहले और आखिरी वाक्य के लिए 10 से 15 शब्द अलग रखिए। इस हिसाब से लिखेंगे, तो अनुच्छेद न बहुत छोटा रहेगा, न सीमा से बहुत बाहर जाएगा। शब्द सीमा “लगभग” है, इसलिए दस-पंद्रह शब्द ऊपर-नीचे से घबराने की जरूरत नहीं, पर दोगुना लिखना सामासिकता की कसौटी पर नंबर कटवाता है।
संकेत बिंदुओं को अनुच्छेद में बदलने का तरीका
संकेत बिंदु प्रश्न का सबसे काम का हिस्सा हैं, क्योंकि वे बता देते हैं कि जाँचने वाला किन बातों को खोजेगा। उन्हें अनदेखा करके अपनी मर्जी का अनुच्छेद लिखना सबसे महँगी गलती है।
- तीनों विषय पढ़िए और वह चुनिए जिस पर आपके पास हर संकेत बिंदु के लिए कम से कम एक ठोस बात हो।
- हाशिये पर हर संकेत बिंदु के आगे दो-तीन शब्दों का नोट लिखिए। यही आपकी रूपरेखा है।
- पहला वाक्य ऐसा सोचिए जो सीधे विषय पर हो। “आज के युग में” या “प्राचीन काल से” जैसी घिसी शुरुआत से बचिए।
- हर बिंदु पर दो वाक्य लिखिए: एक बात और एक उदाहरण या कारण।
- आखिरी वाक्य में सुझाव या निष्कर्ष दीजिए।
- शब्द गिनिए, और एक बार पूरा अनुच्छेद पढ़कर वर्तनी और विराम चिह्न जाँचिए।
भाषा में मुहावरे और लोकोक्तियाँ असर बढ़ाते हैं, बशर्ते वे सही जगह और सही अर्थ में हों। एक अनुच्छेद में एक-दो काफी हैं; हर वाक्य में मुहावरा भाषा को भारी बना देता है। सही प्रयोग के लिए मुहावरे और लोकोक्तियाँ वाला नोट देखिए।
तीन नमूना अनुच्छेद
नीचे तीन अलग तरह के विषयों पर नमूने हैं: एक विचार वाला, एक समस्या और समाधान वाला, और एक वर्णन वाला। हर नमूने के ऊपर संकेत बिंदु हैं, ताकि आप देख सकें कि हर बिंदु अनुच्छेद में कहाँ आया है। इन्हें रटिए मत; इनसे ढाँचा सीखिए।
नमूना 1: समय का महत्व
संकेत बिंदु: समय सबसे कीमती, बीता समय नहीं लौटता, विद्यार्थी जीवन में समय, समय-सारणी का लाभ।
समय का महत्व। समय दुनिया की अकेली ऐसी चीज है जो सबके पास बराबर है, फिर भी कोई उसे खरीद नहीं सकता। पैसा खोकर दोबारा कमाया जा सकता है, लेकिन बीता हुआ एक पल भी वापस नहीं आता। इसीलिए कहा जाता है कि जो समय को बर्बाद करता है, समय उसे बर्बाद कर देता है। विद्यार्थी जीवन में यह बात और भी सच है, क्योंकि यही वह उम्र है जब आदतें बनती हैं और नींव पड़ती है। जो विद्यार्थी रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़ता है, उसे परीक्षा से पहले रात-रात भर जागना नहीं पड़ता। इसका सबसे आसान तरीका एक सीधी-सादी समय-सारणी है, जिसमें पढ़ाई, खेल और आराम तीनों के लिए जगह हो। समय की कद्र करने वाला ही आगे चलकर अपने समय का मालिक बनता है।
नमूना 2: मोबाइल फोन, सुविधा या लत
संकेत बिंदु: मोबाइल से बदली जिंदगी, पढ़ाई और काम में फायदा, जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल के नुकसान, संतुलन का रास्ता।
मोबाइल फोन: सुविधा या लत। मोबाइल फोन ने हमारी जिंदगी को जितनी तेजी से बदला है, उतनी तेजी से शायद किसी और चीज ने नहीं बदला। आज बैंक का काम, टिकट, खबरें और दोस्तों से बातचीत, सब एक छोटी-सी स्क्रीन पर सिमट गए हैं। पढ़ाई में भी यह बड़ा सहारा है, क्योंकि किसी कठिन प्रश्न का हल या कोई वीडियो-पाठ बस कुछ सेकंड दूर है। लेकिन यही सुविधा तब मुसीबत बन जाती है जब हाथ बार-बार बिना वजह फोन की ओर बढ़ने लगे। देर रात तक स्क्रीन देखने से नींद बिगड़ती है, आँखें थकती हैं और पढ़ाई में मन नहीं लगता। इसका हल फोन छोड़ना नहीं, उस पर लगाम लगाना है। पढ़ते समय फोन दूसरे कमरे में रखना और सोने से पहले उसे बंद कर देना छोटे पर असरदार कदम हैं।
नमूना 3: वर्षा की पहली बौछार
संकेत बिंदु: गर्मी से बेहाल मौसम, पहली बारिश का दृश्य, लोगों और प्रकृति पर असर, मन पर प्रभाव।
वर्षा की पहली बौछार। जून की तपती दोपहरों के बाद जब आसमान में पहली बार काले बादल घिरते हैं, तो पूरा शहर जैसे साँस रोककर इंतजार करने लगता है। हवा अचानक ठंडी हो जाती है और सूखी मिट्टी से एक सोंधी खुशबू उठने लगती है। फिर बड़ी-बड़ी बूँदें टीन की छतों पर ढोल-सा बजाने लगती हैं। बच्चे कागज की नावें लेकर गलियों में निकल पड़ते हैं, और बड़े लोग भी छज्जों पर खड़े होकर भीगती सड़कें देखने लगते हैं। धूल से ढके पेड़ धुलकर चमकने लगते हैं और किसानों के चेहरों पर उम्मीद लौट आती है। पहली बारिश सिर्फ गर्मी नहीं धोती, वह मन की थकान भी बहा ले जाती है। शायद इसीलिए हर साल लोग इसका इंतजार किसी त्योहार की तरह करते हैं।
तीनों नमूनों में एक बात साझा है। हर संकेत बिंदु पर एक या दो वाक्य हैं, पहला वाक्य सीधे विषय पर है, और आखिरी वाक्य कुछ नया जोड़ता है, पिछली बात दोहराता नहीं।
आम गलतियाँ जिनसे नंबर कटते हैं
अनुच्छेद में नंबर ज्यादातर विचार की कमी से नहीं, ढाँचे और भाषा की चूक से कटते हैं। ये सबसे आम गलतियाँ हैं:
- कई पैराग्राफ बना देना: अनुच्छेद एक ही पैराग्राफ है। दो पैराग्राफ लिखते ही वह छोटा निबंध बन जाता है।
- संकेत बिंदु छोड़ देना: हर बिंदु पर कम से कम एक वाक्य जरूरी है, वरना पूर्णता की कसौटी टूटती है।
- बिंदुओं का क्रम उलट देना: क्रमबद्धता के लिए वही क्रम रखिए जो प्रश्न में है।
- शब्द सीमा से बहुत आगे जाना: 120 की जगह 250 शब्द लिखना सामासिकता के खिलाफ है और समय भी खाता है।
- घिसी हुई शुरुआत: “आज के आधुनिक युग में” से शुरू होने वाले सैकड़ों अनुच्छेदों में आपका अनुच्छेद अलग नहीं दिखेगा।
- एक ही बात दोहराना: NIOS दोहराव को रचना का दोष मानती है। हर वाक्य में नई जानकारी या नया तर्क होना चाहिए।
- वर्तनी और विराम चिह्न की गलतियाँ: “कि” और “की” का फर्क, अनुस्वार-चंद्रबिंदु, और पूर्ण विराम की जगह बिंदु लगाना आम चूक है।
विराम चिह्नों पर एक मानक बात याद रखिए। केंद्रीय हिंदी निदेशालय के अनुसार हिंदी में पूर्ण विराम (।) अपना है, जबकि बाकी विराम चिह्न वही हैं जो अंग्रेजी में चलते हैं, जैसे अल्पविराम, प्रश्नचिह्न और विस्मयादिबोधक चिह्न। विस्तार के लिए हिंदी वर्तनी और विराम चिह्न वाला नोट देखिए, और वाक्य-स्तर की गलतियों के लिए वाक्य शुद्धि वाला नोट।
परीक्षा में अनुच्छेद लेखन
CBSE के 2025-26 के पाठ्यक्रम में अनुच्छेद लेखन कक्षा 9 और 10 दोनों में है। हिंदी A में संकेत-बिंदुओं पर आधारित, समसामयिक और व्यावहारिक जीवन से जुड़े तीन विषयों में से किसी एक पर लगभग 120 शब्दों का अनुच्छेद लिखना होता है, जिसके 6 अंक हैं। हिंदी B में यही प्रश्न 5 अंक का है। हिंदी A में अनुच्छेद एक और जगह आता है: श्रवण कौशल की जाँच में परीक्षक लगभग 100 से 150 शब्दों का एक अनुच्छेद पढ़कर सुनाता है और फिर उस पर प्रश्न पूछता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुच्छेद नाम से प्रश्न कम आता है, पर यह कौशल हर लिखित उत्तर में काम आता है। सिविल सेवा के अनिवार्य हिंदी प्रश्नपत्र में निबंध, संक्षेपण और गद्यांश पर उत्तर लिखने होते हैं, और इन तीनों में अच्छा उत्तर वही है जिसका हर पैराग्राफ एक विचार पर टिका हो और पहले वाक्य से विषय पर आए। यानी हर अच्छा निबंध असल में अच्छे अनुच्छेदों की एक कड़ी है। निबंध की तैयारी के लिए अनिवार्य हिंदी निबंध लेखन गाइड और पत्र के प्रारूप के लिए हिंदी पत्र लेखन वाला नोट देखिए। पूरे प्रश्नपत्र का क्रम अनिवार्य हिंदी व्याकरण गाइड में है।
अनुच्छेद लेखन ऐसा कौशल है जो अभ्यास से ही आता है, पढ़ने से नहीं। हफ्ते में तीन अनुच्छेद लिखिए, हर बार घड़ी लगाकर 12 से 15 मिनट में, और लिखने के बाद चारों कसौटियों पर खुद जाँचिए। एक महीने में आप देखेंगे कि आपके निबंध और लंबे उत्तर भी अपने आप कसे हुए लगने लगे हैं।
अभ्यास प्रश्न
पहले आठ प्रश्नों में दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर लगभग 120 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए। बाकी प्रश्न नियमों और फर्क पर हैं। उत्तर खंड में लिखने वाले प्रश्नों के लिए रूपरेखा दी गई है, पूरा अनुच्छेद नहीं, ताकि आप अपने शब्दों में लिखें।
- पुस्तकें: सच्ची मित्र (संकेत बिंदु: पुस्तकों से मिलने वाला ज्ञान, अकेलेपन की साथी, अच्छी पुस्तक का चुनाव, पढ़ने की आदत कैसे डालें)।
- स्वच्छता: हम सबकी जिम्मेदारी (संकेत बिंदु: गंदगी से होने वाली बीमारियाँ, घर और मोहल्ले की सफाई, सरकार के साथ नागरिकों की भूमिका, छोटी शुरुआत)।
- पेड़ लगाओ, धरती बचाओ (संकेत बिंदु: पेड़ों से मिलने वाली चीजें, कटते जंगल, गर्मी और प्रदूषण पर असर, हर व्यक्ति का योगदान)।
- परीक्षा का डर (संकेत बिंदु: डर के कारण, पढ़ाई पर असर, तैयारी का सही तरीका, अभिभावकों की भूमिका)।
- खेलों का जीवन में महत्व (संकेत बिंदु: शरीर पर असर, मन और अनुशासन, टीम भावना, पढ़ाई और खेल का संतुलन)।
- बढ़ती महँगाई (संकेत बिंदु: आम आदमी पर असर, कारण, बचत की आदत, समाधान)।
- सड़क सुरक्षा (संकेत बिंदु: दुर्घटनाओं के कारण, नियमों का पालन, हेलमेट और सीट बेल्ट, जागरूकता)।
- मेरा प्रिय त्योहार (संकेत बिंदु: त्योहार कब और क्यों, तैयारियाँ, मनाने का तरीका, संदेश)।
- अनुच्छेद लेखन की चार कसौटियाँ लिखिए।
- अनुच्छेद और निबंध में दो अंतर बताइए।
- अनुच्छेद और पल्लवन में शैली और काल के आधार पर क्या फर्क है?
- 120 शब्दों के अनुच्छेद में चार संकेत बिंदु हों, तो हर बिंदु को लगभग कितने शब्द मिलेंगे?
- “आज के आधुनिक युग में” से अनुच्छेद शुरू करना कमजोर क्यों माना जाता है?
उत्तर
- पहला वाक्य: पुस्तकें ऐसी मित्र हैं जो कभी साथ नहीं छोड़तीं। फिर ज्ञान और सोच, अकेलेपन में साथ, उम्र और रुचि के हिसाब से किताब चुनना, रोज 20 मिनट पढ़ने से आदत। समापन: अच्छी किताब से दोस्ती जिंदगी भर का निवेश है।
- शुरुआत गंदगी और बीमारी के रिश्ते से। फिर घर-मोहल्ले की सफाई, सिर्फ सरकार पर न छोड़ने की बात, कूड़ा अलग करने जैसी छोटी आदत। समापन: स्वच्छता आदत है, अभियान नहीं।
- पेड़ों से छाया, फल, लकड़ी और साफ हवा; जंगल कटने से बढ़ती गर्मी; हर व्यक्ति का एक पेड़ लगाना और उसकी देखभाल। समापन: पेड़ लगाना आसान है, बचाना असली काम।
- डर के कारण (अधूरी तैयारी, तुलना); असर (नींद, ध्यान); उपाय (रोज दोहराना, अभ्यास परीक्षा); अभिभावक तुलना की जगह हौसला दें। समापन: तैयारी डर की सबसे अच्छी दवा है।
- शरीर की ताकत और फुर्ती; अनुशासन और हार सहना; टीम में काम करना; पढ़ाई के साथ रोज एक घंटा खेल। समापन: खेल पढ़ाई का दुश्मन नहीं, साथी है।
- रसोई और बजट पर असर; मोटे कारण (माँग, लागत), बिना आँकड़ा गढ़े; बचत और जरूरत-चाहत का फर्क; समाधान। समापन संतुलित रखिए।
- तेज रफ्तार, लापरवाही और नियम तोड़ना; हेलमेट और सीट बेल्ट; पैदल चलने वालों का ध्यान; स्कूलों में जागरूकता। समापन: नियम सजा से बचने के लिए नहीं, जान बचाने के लिए हैं।
- ‘मैं’ शैली चल सकती है। त्योहार का नाम और समय, घर की तैयारियाँ, मनाने का तरीका, त्योहार का संदेश। समापन में संदेश को आज से जोड़िए।
- पूर्णता, क्रमबद्धता, विषय-केंद्रित होना और सामासिकता।
- अनुच्छेद एक पैराग्राफ में विषय का एक पहलू पूरा करता है, जबकि निबंध कई पैराग्राफ में कई पहलू खोलता है। निबंध में भूमिका, विस्तार और उपसंहार जरूरी हैं, जबकि अनुच्छेद पहले वाक्य से ही विषय पर आ जाता है।
- पल्लवन में ‘मैं’ शैली नहीं आती और वह वर्तमान काल में रहता है। अनुच्छेद में ‘मैं’ शैली चल सकती है और कोई भी काल इस्तेमाल हो सकता है।
- लगभग 25 से 30 शब्द, यानी हर बिंदु पर दो छोटे वाक्य, और पहले-आखिरी वाक्य के लिए 10 से 15 शब्द अलग।
- यह शुरुआत कुछ नहीं बताती और सैकड़ों उत्तरों में एक जैसी होती है। पहला वाक्य सीधे विषय की सबसे जरूरी बात पर होना चाहिए, ताकि अनुच्छेद पहले वाक्य से ही अलग दिखे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अनुच्छेद लेखन किसे कहते हैं?
किसी एक विषय, भाव या विचार को सीमित शब्दों में, एक ही पैराग्राफ में, क्रम से और कसकर लिखना अनुच्छेद लेखन कहलाता है। NIOS इसे एक भाव या विचार को व्यक्त करने वाला सुसंबद्ध और छोटा वाक्य-समूह कहती है। स्कूल परीक्षा में यह आम तौर पर संकेत बिंदुओं के साथ लगभग 120 शब्दों में लिखना होता है।
अनुच्छेद लेखन का प्रारूप क्या है?
सबसे ऊपर विषय का शीर्षक, फिर एक ही पैराग्राफ में पूरा अनुच्छेद। पहला वाक्य सीधे विषय पर, बीच में हर संकेत बिंदु पर एक-दो वाक्य उसी क्रम में, और आखिरी वाक्य में समापन या सुझाव। संकेत बिंदुओं को अलग शीर्षक या बुलेट बनाकर नहीं लिखा जाता।
कक्षा 9 और 10 में अनुच्छेद कितने शब्दों का लिखना होता है?
CBSE के 2025-26 के पाठ्यक्रम में कक्षा 9 और 10 दोनों में अनुच्छेद लगभग 120 शब्दों का है। हिंदी A में इसके 6 अंक हैं और हिंदी B में 5 अंक। तीन विषय दिए जाते हैं, जिनमें से किसी एक पर संकेत बिंदुओं के आधार पर लिखना होता है।
अनुच्छेद और निबंध में क्या अंतर है?
अनुच्छेद एक पैराग्राफ में विषय का एक पहलू पूरा करता है, जबकि निबंध कई पैराग्राफ में विषय के कई पहलू खोलता है। निबंध में भूमिका, विस्तार और उपसंहार अलग-अलग होते हैं, जबकि अनुच्छेद पहले वाक्य से ही विषय पर आ जाता है। कई अच्छे अनुच्छेदों को जोड़कर ही निबंध बनता है।
अनुच्छेद में संकेत बिंदु क्यों दिए जाते हैं?
संकेत बिंदु बताते हैं कि अनुच्छेद में किन बातों का आना जरूरी है, और जाँचने वाला इन्हीं को खोजता है। इन्हें उसी क्रम में शामिल करने से पूर्णता और क्रमबद्धता दोनों कसौटियाँ पूरी होती हैं। किसी बिंदु को छोड़ देना सबसे आम कारण है जिससे अच्छे अनुच्छेद के भी नंबर कटते हैं।
क्या अनुच्छेद में ‘मैं’ शैली में लिख सकते हैं?
हाँ, अनुच्छेद में ‘मैं’ शैली चल सकती है, खासकर वर्णन और अनुभव वाले विषयों में। NIOS के अनुसार यही बात अनुच्छेद को पल्लवन से अलग करती है, क्योंकि पल्लवन में ‘मैं’ शैली नहीं आती। विचार वाले विषयों में फिर भी सामान्य शैली ज्यादा असरदार रहती है।
अनुच्छेद की चार कसौटियाँ कौन-सी हैं?
CBSE के पाठ्यक्रम के अनुसार चार कसौटियाँ हैं: पूर्णता, क्रमबद्धता, विषय-केंद्रित होना और सामासिकता। पूर्णता यानी सभी पक्ष आएँ, क्रमबद्धता यानी विचार तर्क से जुड़ें, विषय-केंद्रित यानी बात भटके नहीं, और सामासिकता यानी कम शब्दों में पूरी बात। लिखने के बाद इन्हीं चारों पर अपना अनुच्छेद जाँचिए।
अनुच्छेद लिखने में कितना समय लगाना चाहिए?
परीक्षा में 120 शब्दों के अनुच्छेद के लिए 12 से 15 मिनट काफी हैं: दो मिनट रूपरेखा, दस मिनट लिखना और दो-तीन मिनट दोबारा पढ़ना। यह समय-बँटवारा अभ्यास से तय कीजिए, कोई आधिकारिक नियम नहीं है। घर पर घड़ी लगाकर लिखने से परीक्षा में समय का दबाव कम लगता है।