UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

हिंदी वाक्य शुद्धि: सामान्य अशुद्धियाँ और उनका शुद्ध रूप

वाक्य-शुद्धि की पूरी पाठशाला — आठ प्रकार की सामान्य अशुद्धियाँ, हर प्रकार के अशुद्ध-शुद्ध जोड़े तालिका में, और उत्तर सहित पंद्रह वाक्यों का अभ्यास।

हिंदी वाक्य शुद्धि: सामान्य अशुद्धियाँ और उनका शुद्ध रूप

वाक्य शुद्धि का अर्थ है किसी अशुद्ध वाक्य की त्रुटि पहचानकर उसे व्याकरण-सम्मत शुद्ध रूप में बदलना। शुद्ध वाक्य वही है जिसमें शब्दों का रूप, लिंग, वचन, कारक और क्रिया परस्पर अनुकूल हों, पदों का क्रम सही हो और अर्थ स्पष्ट रूप से संप्रेषित हो। हिंदी में अधिकांश अशुद्धियाँ इन्हीं छोटे-छोटे मेल-बिंदुओं पर चूक से उपजती हैं, इसलिए वाक्य-शुद्धि सीखना वस्तुतः पूरे व्याकरण को व्यवहार में परखना है।

अनिवार्य हिंदी की परीक्षा में “निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध कीजिए” प्रकार के प्रश्न लगभग निश्चित रूप से आते हैं और इनमें पूरे अंक तभी मिलते हैं जब त्रुटि का सही स्थान पहचानकर उसका शुद्ध रूप लिखा जाए। यह नोट अशुद्धियों को आठ स्पष्ट वर्गों में बाँटकर प्रत्येक का नियम, पहचान और भरपूर अशुद्ध-शुद्ध उदाहरण देता है, जिससे उत्तर-पुस्तिका में आत्मविश्वास के साथ सुधार किया जा सके।

लिंग और वचन संबंधी अशुद्धियाँ

हिंदी में विशेषण और क्रिया अपने संज्ञा या सर्वनाम के लिंग एवं वचन के अनुसार रूप बदलते हैं। जब संज्ञा का लिंग गलत मान लिया जाता है, या एकवचन-बहुवचन का मेल नहीं बैठता, तो वाक्य अशुद्ध हो जाता है। नदियों के नाम प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं (गंगा, यमुना), जबकि कुछ अपवाद पुल्लिंग हैं (ब्रह्मपुत्र, सोन)। ‘दही’, ‘आँसू’, ‘प्राण’, ‘दर्शन’, ‘हस्ताक्षर’ जैसे शब्दों के लिंग-वचन प्रायः गलत प्रयुक्त होते हैं।

अशुद्ध वाक्यशुद्ध वाक्य
मेरी प्राण निकल गई।मेरे प्राण निकल गए।
उसने मीठी दही खाई।उसने मीठा दही खाया।
आपके दर्शन की बड़ी इच्छा थी।आपके दर्शनों की बड़ी इच्छा थी।
उसके आँसू पोंछ दी।उसके आँसू पोंछ दिए।
गंगा का जल पवित्र होता है, वह सबको पावन करता है।गंगा का जल पवित्र होता है, वह सबको पावन करती है।
मैंने अपनी हस्ताक्षर कर दी।मैंने अपने हस्ताक्षर कर दिए।

कारक और परसर्ग संबंधी अशुद्धियाँ

कारक के चिह्न (परसर्ग) — ने, को, से, के लिए, में, पर आदि — का सही चयन वाक्य की शुद्धता तय करता है। सकर्मक क्रिया के सामान्य भूतकाल में कर्ता के साथ ‘ने’ लगता है (राम ने पढ़ा), पर अकर्मक क्रिया में नहीं (राम सोया)। ‘को’ और ‘से’ का परस्पर भ्रम तथा अपादान (‘से’) व करण (‘से’) में अंतर न समझना सामान्य त्रुटियाँ हैं। ‘द्वारा’ का अति प्रयोग भी अशुद्धि मानी जाती है जहाँ सीधा कर्ता-प्रयोग संभव हो।

अशुद्ध वाक्यशुद्ध वाक्य
मैं विद्यालय को जाता हूँ।मैं विद्यालय जाता हूँ।
राम सोया नहीं, उसने जागता रहा।राम सोया नहीं, वह जागता रहा।
उसको आँखों से दिखाई नहीं देता।उसे आँखों से दिखाई नहीं देता।
यह पुस्तक मेरे द्वारा लिखी गई है।यह पुस्तक मैंने लिखी है।
वह छत के ऊपर से कूद पड़ा।वह छत से कूद पड़ा।
बच्चे को विद्यालय में पढ़ने भेजो।बच्चे को विद्यालय पढ़ने भेजो।

क्रिया-अन्विति संबंधी अशुद्धियाँ

क्रिया-अन्विति (subject-verb agreement) का अर्थ है कि क्रिया अपने कर्ता या कर्म के लिंग, वचन और पुरुष से मेल खाए। ‘ने’ वाले वाक्यों में जब कर्म के साथ परसर्ग नहीं होता, तब क्रिया कर्म के अनुसार चलती है (राम ने रोटी खाई — रोटी स्त्रीलिंग)। आदरार्थ बहुवचन में क्रिया भी बहुवचन होती है (पिता जी आए हैं)। दो भिन्न-लिंग कर्ताओं के बाद क्रिया प्रायः निकटवर्ती कर्ता या पुल्लिंग बहुवचन के अनुसार आती है।

अशुद्ध वाक्यशुद्ध वाक्य
राम ने रोटी खाया।राम ने रोटी खाई।
पिता जी बाज़ार गया है।पिता जी बाज़ार गए हैं।
सीता और गीता घर जा रहा है।सीता और गीता घर जा रही हैं।
उसने अनेक पुस्तकें पढ़ा।उसने अनेक पुस्तकें पढ़ीं।
लड़के और लड़कियाँ खेल रहा है।लड़के और लड़कियाँ खेल रहे हैं।
गुरु जी ने यह बात कहा था।गुरु जी ने यह बात कही थी।

पदक्रम संबंधी अशुद्धियाँ

हिंदी का सामान्य पदक्रम है — कर्ता, कर्म, क्रिया (राम पुस्तक पढ़ता है)। विशेषण अपने विशेष्य से पहले आता है, क्रियाविशेषण क्रिया के समीप रहता है, और संबंधबोधक अव्यय अपने संबंधी शब्द के बाद आते हैं। पदों के स्थान-विपर्यय से अर्थ बदल जाता है या वाक्य भोंडा हो जाता है। ‘केवल’, ‘भी’, ‘ही’ जैसे निपात जिस शब्द पर बल देना हो, ठीक उसके पास रखे जाने चाहिए।

अशुद्ध वाक्यशुद्ध वाक्य
मैं केवल दो रुपये ही चाहता हूँ बस।मुझे केवल दो रुपये चाहिए।
वह पढ़ता है पुस्तक प्रतिदिन।वह प्रतिदिन पुस्तक पढ़ता है।
सुंदर एक लड़की वहाँ खड़ी थी।एक सुंदर लड़की वहाँ खड़ी थी।
मैंने उसे कल ही देखा था बाज़ार में।मैंने उसे कल बाज़ार में ही देखा था।
आप कृपया करके बैठ जाइए।आप कृपया बैठ जाइए।
वह दौड़ता हुआ तेज़ आया।वह तेज़ दौड़ता हुआ आया।

अनावश्यक शब्द और पुनरुक्ति संबंधी अशुद्धियाँ

एक ही अर्थ देने वाले दो शब्दों को साथ रखना (पुनरुक्ति दोष) तथा बिना आवश्यकता के शब्द जोड़ना भाषा को दूषित करता है। ‘अपना स्वयं’, ‘मूल आधार’, ‘सर्वसम्मति से सबने’, ‘अति उत्कृष्ट’, ‘विधवा स्त्री’ जैसे प्रयोगों में दोनों शब्द एक ही भाव दोहराते हैं, अतः एक हटाना आवश्यक है। संक्षिप्तता शुद्ध भाषा का गुण है।

अशुद्ध वाक्यशुद्ध वाक्य
उसने अपने आप स्वयं यह कार्य किया।उसने स्वयं यह कार्य किया।
यह उसका मूल आधार है।यह उसका आधार है।
सबने सर्वसम्मति से प्रस्ताव माना।सबने प्रस्ताव माना।
वह एक अति उत्कृष्ट कवि है।वह उत्कृष्ट कवि है।
कल रात्रि के समय वर्षा हुई।कल रात वर्षा हुई।
केवल मात्र दस लोग आए।केवल दस लोग आए।

विशेषण और मुहावरे संबंधी अशुद्धियाँ

विशेषण की मात्रा-वृद्धि (अतिरंजना) तथा विशेषण-विशेष्य का लिंग-वचन-मेल न होना सामान्य दोष हैं — ‘बहुत अधिक श्रेष्ठतम’ में ‘श्रेष्ठतम’ पहले से ही उत्तमावस्था है, अतः ‘अधिक’ अनावश्यक है। इसी प्रकार मुहावरे और लोकोक्तियाँ रूढ़ होती हैं; उनके शब्द, क्रिया या रूप बदलने से अर्थ नष्ट हो जाता है। मुहावरा सही क्रिया-रूप और सही प्रसंग में ही शुद्ध माना जाता है।

अशुद्ध वाक्यशुद्ध वाक्य
वह सबसे श्रेष्ठतम विद्यार्थी है।वह सबसे श्रेष्ठ विद्यार्थी है।
यह सबसे सुंदरतम दृश्य है।यह सबसे सुंदर दृश्य है।
उसने मेरे ऊपर आँख रखी।उसने मुझ पर आँख रखी। (अर्थ: निगरानी)
वह नौ दो ग्यारह कर गया।वह नौ-दो-ग्यारह हो गया।
उसकी आँखों में पानी भर आया, वह लज्जित था।उसका मुँह पानी-पानी हो गया, वह लज्जित था।
दाल में कुछ काला है।दाल में काला है।

अभ्यास प्रश्न

निम्नलिखित अशुद्ध वाक्यों को शुद्ध कीजिए (उत्तर नीचे दिए गए हैं):

  1. मैंने अपनी हस्ताक्षर कर दी।
  2. पिता जी बाज़ार गया है।
  3. वह सबसे श्रेष्ठतम छात्र है।
  4. मैं विद्यालय को जाता हूँ।
  5. उसने मीठी दही खाई।
  6. सीता और गीता घर जा रहा है।
  7. यह पुस्तक मेरे द्वारा लिखी गई है।
  8. उसने अपने आप स्वयं यह कार्य किया।
  9. एक सुंदर लड़की के बजाय: सुंदर एक लड़की वहाँ खड़ी थी।
  10. राम ने रोटी खाया।
  11. कल रात्रि के समय वर्षा हुई।
  12. वह छत के ऊपर से कूद पड़ा।
  13. आप कृपया करके बैठ जाइए।
  14. केवल मात्र दस लोग आए।
  15. गुरु जी ने यह बात कहा था।

उत्तर:

  1. मैंने अपने हस्ताक्षर कर दिए। (हस्ताक्षर पुल्लिंग बहुवचन)
  2. पिता जी बाज़ार गए हैं। (आदरार्थ बहुवचन — क्रिया-अन्विति)
  3. वह सबसे श्रेष्ठ छात्र है। (‘श्रेष्ठतम’ पहले से उत्तमावस्था है)
  4. मैं विद्यालय जाता हूँ। (गति के स्थान में ‘को’ अनावश्यक)
  5. उसने मीठा दही खाया। (‘दही’ पुल्लिंग)
  6. सीता और गीता घर जा रही हैं। (बहुवचन स्त्रीलिंग अन्विति)
  7. यह पुस्तक मैंने लिखी है। (‘द्वारा’ का अनावश्यक प्रयोग)
  8. उसने स्वयं यह कार्य किया। (‘अपने आप’ और ‘स्वयं’ पुनरुक्ति)
  9. एक सुंदर लड़की वहाँ खड़ी थी। (विशेषण विशेष्य से पहले — पदक्रम)
  10. राम ने रोटी खाई। (क्रिया कर्म ‘रोटी’ के अनुसार स्त्रीलिंग)
  11. कल रात वर्षा हुई। (‘रात्रि के समय’ में पुनरुक्ति)
  12. वह छत से कूद पड़ा। (‘के ऊपर से’ अनावश्यक)
  13. आप कृपया बैठ जाइए। (‘कृपया करके’ पुनरुक्ति)
  14. केवल दस लोग आए। (‘केवल’ और ‘मात्र’ एक ही अर्थ)
  15. गुरु जी ने यह बात कही थी। (कर्म ‘बात’ स्त्रीलिंग के अनुसार क्रिया)

संक्षिप्त सुझाव: वाक्य पढ़ते ही पहले कर्ता खोजिए, फिर उसका लिंग-वचन निश्चित कीजिए, फिर देखिए कि विशेषण और क्रिया उसी के अनुरूप हैं या नहीं। इसके बाद परसर्ग, पदक्रम और पुनरुक्ति की जाँच कीजिए — इसी क्रम से अभ्यास करने पर अशुद्धि शीघ्र पकड़ में आती है।

Tell Google you want more of this.

Add Anantam IAS as a preferred source

One tap, and this site shows up more often in your own Top Stories, AI Overviews and AI Mode. Remove it any time.

Share this

PDF

Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

Recognized as one of India’s best content marketers, Gaurav Tiwari is an SEO strategist, WordPress developer, and founder of Gatilab. He builds websites that load in under a second, creates content that ranks on Google’s first page, and develops WordPress plugins and tools used on thousands of live sites.

Specialises in · Writing, web development, design — UPSC prep tooling Experience · 16+ years Visit website ↗

Preparing for UPSC CSE 2026? Sit in a free demo class.

No sales call. No brochure. Watch a real Monday-morning GS session taught by ex-Rau's IAS faculty.