Anantam IASHindi Note · 4 September 2026

भरण पोषण भत्ता योजना: छत्तीसगढ़ की मातृत्व योजना

छत्तीसगढ़ की भरण पोषण भत्ता योजना PVTG की गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को हर महीने नक़द देती है। जानिए पात्रता, रकम, मियाद और PMMVY से इसका फ़र्क़।

भरण पोषण भत्ता योजना — नाम का सीधा मतलब है "पालन-पोषण और पोषण के लिए भत्ता" — छत्तीसगढ़ सरकार की योजना है, जो कमज़ोर तबक़ों की गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को हर महीने नक़द सहारा देती है। इसमें ख़ास तौर पर विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (PVTG) और साधनहीन ग्रामीण परिवार आते हैं। इसे राज्य का महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) चलाता है। भारत की मातृत्व लाभ व्यवस्था में एक बड़ी ख़ाली जगह थी, और यह योजना प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) जैसी केंद्र प्रायोजित योजनाओं के साथ-साथ बिना शर्त, ज़्यादा लंबे समय तक नक़द सहारा देकर उसे भरती है।

UPSC और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) में यह योजना शासन और समाज के विषय के तौर पर अक्सर पूछी जाती है, क्योंकि यह माँ का पोषण, जनजातीय कल्याण, सीधे पैसा भेजने की व्यवस्था (DBT) और राज्य स्तर के नए प्रयोग — इन सबको भारत के व्यापक जन-स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा ढाँचे से जोड़ती है।

ऐसी योजना की ज़रूरत क्यों पड़ी?

भरण पोषण भत्ता योजना का ब्योरा — मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान, लक्ष्य समूह, मासिक भत्ता, अवधि, मक़सद और प्रशासनिक प्रक्रिया

योजना एक नज़र में

बातब्योरा
नामभरण पोषण भत्ता योजना
चलाने वाला राज्यछत्तीसगढ़
नोडल विभागमहिला एवं बाल विकास विभाग (WCD), छत्तीसगढ़
किस तरह की योजनागर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए राज्य के पैसे से चलने वाला सीधा नक़द हस्तांतरण (DBT)
शुरुआतचरणों में लागू; 2 अक्टूबर 2019 को शुरू हुए मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत इसका दायरा बढ़ा
किसके लिएPVTG और चुने हुए हाशिये के समूहों की गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ
क्या मिलता हैहर महीने नक़द भत्ता (रकम राज्य की अधिसूचना और लाभार्थी की श्रेणी से तय होती है; पहले यह हर महीने ₹1,000–₹1,500 रही है)
कब तकगर्भ की पुष्टि से लेकर बच्चे के 24 महीने का होने तक (ठीक-ठीक मियाद राज्य के आदेश के मुताबिक़)
तरीक़ाआधार से जुड़े बैंक खाते में DBT
किनसे जुड़ी हैआँगनवाड़ी सेवाएँ, मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान, ICDS

मक़सद

PMMVY और भरण पोषण भत्ता योजना की आमने-सामने तुलना — पैसा कहाँ से, कितना मिलता है, किसे मिलता है, कब तक, शर्तें और दायरा
  1. माँ का पोषण सुधारना, ताकि मातृ मृत्यु और ख़ून की कमी घटे।
  2. बच्चे का जन्म के समय वज़न ठीक रहे और उसकी बढ़त सेहतमंद हो।
  3. दिहाड़ी करने वाली महिलाओं की गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान छूटी हुई कमाई की भरपाई करना।
  4. आँगनवाड़ी सेवाओं से जोड़कर अस्पताल में प्रसव और टीकाकरण को बढ़ावा देना।
  5. लक्ष्य तय करके PVTG परिवारों तक कल्याण पहुँचाना

पात्रता की शर्तें

क्या मिलता है और कैसे

पोषण से जुड़ी योजनाएँ आपस में कैसे जुड़ती हैं — ICDS, पोषण अभियान, जननी सुरक्षा योजना, PMMVY, पोषण 2.0, मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान और हाट बाज़ार क्लिनिक

काग़ज़ी प्रक्रिया

  1. पहचान: आँगनवाड़ी कार्यकर्ता (AWW) पात्र गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिला को चिह्नित करती है।
  2. पंजीकरण: माँ-और-बच्चा सुरक्षा (MCP) कार्ड बनता है और ब्योरा पोषण ट्रैकर ऐप में चढ़ता है।
  3. जाँच: सुपरवाइज़र और CDPO (बाल विकास परियोजना अधिकारी) पात्रता जाँचते हैं।
  4. मंज़ूरी: ज़िला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) मंज़ूरी देते हैं।
  5. भुगतान: हर महीने PFMS (सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली) के ज़रिए DBT।
  6. निगरानी: प्रखंड, ज़िला और राज्य WCD निदेशालय के डैशबोर्ड पर।

PMMVY से तुलना

बातPMMVY (केंद्र)भरण पोषण भत्ता योजना (छत्तीसगढ़)
पैसा कहाँ सेकेंद्र प्रायोजित (60:40; पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में 90:10)राज्य के पैसे से
किसके लिएगर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ (पहले सिर्फ़ पहले जीवित बच्चे तक; PMMVY 2.0 में दूसरे बच्चे तक भी, अगर वह लड़की हो)PVTG और तय किए गए हाशिये के समूह
कितना मिलता हैकुल ₹5,000, 2–3 किस्तों में (JSY मिलाकर ₹6,000)हर महीने भत्ता (अक्सर ₹1,000–₹1,500 या उससे ज़्यादा)
कब तकपहली गर्भावस्था; सीमित समय के लिएपूरी गर्भावस्था और स्तनपान के 24 महीने तक
शर्तेंपंजीकरण, प्रसव-पूर्व जाँच, टीकाकरणबहुत कम; ज़ोर इस पर कि तय समूह में सबको मिले
दायरापूरा देशराज्य — आदिवासी बहुल ज़िले (बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, जशपुर, कोरबा)

असल बात: PMMVY शर्तों के साथ एक बार मिलने वाला प्रोत्साहन है; भरण पोषण भत्ता हर महीने आने वाला, पोषण पर केंद्रित नक़द है — दोनों एक-दूसरे की जगह नहीं लेतीं, एक-दूसरे को पूरा करती हैं।

मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान से रिश्ता

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में कुपोषण से लड़ने के लिए 2 अक्टूबर 2019 को मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान शुरू किया था। इसके मुख्य हिस्से ये हैं:

राज्य सरकार के जारी किए आँकड़ों के मुताबिक़ कार्यक्रम शुरू होने के बाद आदिवासी ज़िलों में गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) में बड़ी कमी आई है।

दूसरी योजनाओं से जुड़ाव

योजनाजुड़ाव कहाँ है
ICDS / सक्षम आँगनवाड़ीसेवाएँ आँगनवाड़ी से ही मिलती हैं
पोषण अभियानपोषण ट्रैकर, SAM/MAM का प्रबंधन
जननी सुरक्षा योजना (JSY)अस्पताल में प्रसव के लिए प्रोत्साहन
PMMVYएक बार मिलने वाला मातृत्व लाभ
पोषण 2.0पूरक पोषण और पोषक तत्व मिला हुआ खाना
मुख्यमंत्री सुपोषण अभियानगरम पका खाना
हाट बाज़ार क्लिनिक (छत्तीसगढ़)आदिवासी साप्ताहिक बाज़ारों में प्राथमिक इलाज

मज़बूत पक्ष

दिक़्क़तें

नीति के लिहाज़ से अहमियत

झटपट रिवीज़न

UPSC के लिहाज़ से अहमियत

प्रीलिम्स (GS पेपर II): भरण पोषण भत्ता जैसी राज्य की योजनाएँ हाल के प्रीलिम्स में आ चुकी हैं। PMMVY, JSY, पोषण अभियान और PMMVY 2.0 को जोड़कर बनने वाले MCQ आम हैं।

मेन्स (GS पेपर II — शासन):

मेन्स (GS पेपर I — समाज): जनजातीय कल्याण, महिला सशक्तीकरण और PVTG की हालत।

मेन्स (GS पेपर III — अर्थव्यवस्था): सीधा नक़द हस्तांतरण, खाद्य और पोषण सुरक्षा, सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन (PFMS)।

निबंध: "पोषण एक सार्वजनिक भलाई है", "नक़द हस्तांतरण और महिलाओं की अपनी हैसियत", "ज़मीनी स्तर पर संघवाद" — ऐसे विषय इससे अच्छे से जुड़ते हैं।