Anantam IASHindi Note · 4 May 2026

भारत में अनौपचारिक श्रम का स्त्रीकरण (Feminization of Informal Labour) — UPSC मार्गदर्शिका

भारत में अनौपचारिक श्रम के स्त्रीकरण पर UPSC मार्गदर्शिका — कृषि का स्त्रीकरण, ग़ैर-कृषि क्षेत्र, MKSP, PLFS 2023-24, ई-श्रम, गिग अर्थव्यवस्था, लखपति दीदी, ड्रोन दीदी और 2024-26 के नवीनतम अद्यतन।

अनौपचारिक श्रम का स्त्रीकरण (Feminization of Informal Labour) — अर्थात अनौपचारिक, असुरक्षित और बिना संरक्षण वाले कार्यों में महिलाओं की बढ़ती संकेंद्रण — भारतीय श्रम बाज़ारों की एक परिभाषित चुनौती है। यद्यपि महिला श्रम बल भागीदारी दर (Female Labour Force Participation Rate, FLFPR) बढ़कर 41.7% (PLFS 2023-24, सामान्य स्थिति) तक पहुँच गई है, फिर भी अधिकांश अतिरिक्त महिलाएँ अनौपचारिक, अल्प-वेतन और अनिश्चित कार्य में ही प्रवेश कर रही हैं। UPSC GS-I और GS-III के अभ्यर्थियों के लिए कृषि के स्त्रीकरण और ग़ैर-कृषि अनौपचारिक क्षेत्र के स्त्रीकरण की दोहरी परिघटना को समझना अनिवार्य है।

विरोधाभास यह है कि महिलाएँ अब पहले से अधिक काम कर रही हैं, परंतु इस बढ़ी हुई भागीदारी का अधिकांश हिस्सा “न्यून-गुणवत्तायुक्त रोज़गार” है — जहाँ लिखित अनुबंध, सामाजिक सुरक्षा, मातृत्व लाभ या न्यूनतम मज़दूरी की कोई गारंटी नहीं। ILO इसे “Decent Work Deficit” कहता है। GS-I में महिला सशक्तिकरण के विषय और GS-III में रोज़गार/अनौपचारिक क्षेत्र के विषयों को जोड़ने वाला यह सबसे महत्वपूर्ण पुल है।

वैचारिक ढाँचा

अनौपचारिक क्षेत्र (Informal Sector)

अनौपचारिक क्षेत्र उन इकाइयों से बना है जो प्राथमिक रूप से कार्यरत व्यक्ति के लिए रोज़गार और आय उत्पन्न करने हेतु वस्तुओं या सेवाओं का उत्पादन करती हैं — बिना औपचारिक अनुबंध, सामाजिक सुरक्षा या क़ानूनी संरक्षण के। ILO का “डीसेंट वर्क डेफ़िसिट” (Decent Work Deficit) ढाँचा इन कमज़ोरियों को सटीक रूप से पकड़ता है — पर्याप्त रोज़गार का अभाव, अप्रचुर मज़दूरी, असुरक्षित कार्य-दशाएँ, सामाजिक सुरक्षा का अभाव और अधिकारों की कमी।

श्रम का स्त्रीकरण (Feminization of Labour)

स्त्रीकरण दो प्रकार का होता है:

उदाहरणस्वरूप, बैंकिंग का “टेलर” काम कभी पुरुष-प्रधान और प्रतिष्ठित था; जैसे ही ATM ने रिटेल बैंकिंग बदली और टेलर काम संख्या में महिलाओं द्वारा भर गया, वेतन और कैरियर-संभावनाएँ दोनों गिर गईं। यह “गुणात्मक स्त्रीकरण” का क्लासिक उदाहरण है।

भारत की स्थिति

अनौपचारिकता का पैमाना

दोहरा बोझ (Double Burden)

कृषि का स्त्रीकरण

प्रवृत्तियाँ

कारक (Drivers)

कृषि के स्त्रीकरण की चुनौतियाँ

चुनौतीप्रभाव
श्रमिक के रूप में उच्च संकेंद्रणकृषि की केवल 37% महिलाएँ कृषक हैं; 63% श्रमिक
निम्न भू-स्वामित्वकेवल 13% परिचालन जोत महिलाओं के नाम (कृषि गणना 2015-16)
छोटी जोतें~90% महिला-स्वामित्व छोटी/सीमांत — पैमाने की मितव्ययिता नहीं
“कृषक” मान्यता का अभावभू-अधिकार नहीं → PM-KISAN, KCC, फसल बीमा से बहिष्कृत
ऋण की पहुँच नहींऔपचारिक बैंकिंग के लिए संपार्श्विक चाहिए
तकनीक, कौशल, विस्तार सेवाओं का अभावनिम्न उत्पादकता
दोहरा बोझवैतनिक कार्य + अवैतनिक देखभाल

विद्वान इसे वास्तविक सशक्तिकरण के बजाय “कृषि-संकट का स्त्रीकरण (Feminization of Agrarian Distress)” कहते हैं — जहाँ पुरुष कृषि छोड़कर बेहतर अवसरों की ओर जाते हैं और महिलाएँ संकटग्रस्त, घटती लाभप्रदता वाले क्षेत्र में पीछे रह जाती हैं।

सरकारी प्रतिक्रिया

ग़ैर-कृषि अनौपचारिक क्षेत्र का स्त्रीकरण

पैमाना

महिलाओं का रोज़गार अधिकांशतः अनौपचारिक है। PLFS 2017-18 के अनुसार:

समुदायअनौपचारिक रोज़गार (%)औपचारिक रोज़गार (%)
अनुसूचित जनजाति87.113.0
अनुसूचित जाति90.49.6
मुस्लिम95.14.9
अन्य85.714.3
कुल92.17.9

मुस्लिम महिलाएँ उच्चतम अनौपचारिकीकरण (95.1%) दर्शाती हैं — जो लिंग, जाति और धर्म के अंतर्संबंध (Intersectionality) को उजागर करती है। एक दलित मुस्लिम महिला को तिहरी कमज़ोरी का सामना करना पड़ता है।

अनौपचारिक कार्य के प्रकार

महिलाओं की अनौपचारिकता के कारण

महिलाओं के कार्य को औपचारिक बनाने के क़दम

मातृत्व लाभ

कौशल विकास

रोज़गार प्रोत्साहन

वित्तीय समावेशन

लिंग-संवेदनशील अवसंरचना

चुनौतियाँ

नवीनतम विकास (2024-26)

कृषि बनाम ग़ैर-कृषि अनौपचारिक स्त्रीकरण: एक तुलना

आयामकृषि का स्त्रीकरणग़ैर-कृषि अनौपचारिक स्त्रीकरण
मुख्य कारणपुरुष प्रवासन, कृषि-संकटवैश्वीकरण, घर-आधारित उत्पादन
कार्य का स्वरूपकृषि श्रमिक/कृषकघरेलू, घर-आधारित, गिग
भू-आधारित अधिकारकेवल 13% भू-स्वामित्वलागू नहीं
प्रमुख योजनाMKSP, ड्रोन दीदीe-Shram, सामाजिक सुरक्षा संहिता
दृश्यताकुछ हद तक मान्यलगभग अदृश्य
मुख्य चुनौती“कृषक” मान्यतासंरक्षण के बिना औपचारिकीकरण

UPSC प्रासंगिकता

आपका उत्तर इस प्रकार होना चाहिए:

  1. कृषि के स्त्रीकरण को ग़ैर-कृषि अनौपचारिक स्त्रीकरण से अलग करें।
  2. PLFS, कृषि गणना, IHD डेटा का उद्धरण दें।
  3. कारणों का विश्लेषण करें — ग़रीबी, कृषि-संकट, पुरुष प्रवासन, वैश्वीकरण, संरक्षणवादी क़ानूनों का प्रत्युत्पन्न प्रभाव।
  4. भू-अधिकार, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा, जेंडर बजट को नीति-उत्तोलक के रूप में प्रस्तावित करें।
  5. सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 कार्यान्वयन से जोड़ें।
  6. अंतर्संबंधी असमानता को पहचानें — जाति, धर्म, क्षेत्र।

मेन्स अभ्यास प्रश्न

  1. “कृषि के स्त्रीकरण” से क्या तात्पर्य है? यह सशक्तिकरण है या कृषि-संकट का स्त्रीकरण? परीक्षण कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)
  2. “महिलाओं के लिए संरक्षणवादी श्रम-क़ानून प्रायः उन्हें औपचारिक रोज़गार से बाहर धकेल देते हैं।” टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)
  3. e-Shram पोर्टल और सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 अनौपचारिक महिला कामगारों के लिए क्या परिवर्तन लाते हैं? (150 शब्द, 10 अंक)

भारत में महिलाओं का कार्य प्रायः अदृश्य, अवैतनिक, या असुरक्षित होता है। अनौपचारिक श्रम का स्त्रीकरण सशक्तिकरण का संकेत नहीं है; यह औपचारिक रोज़गार-सृजन की विफलता है। भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश जनसांख्यिकीय बोझ में बदल जाएगा यदि आधा कार्यबल आर्थिक हाशिये पर ही रहा। उत्तर महिलाओं को कार्य से दूर रखना नहीं, बल्कि कार्य को महिलाओं तक लाना है — औपचारिक अनुबंधों, सामाजिक सुरक्षा, कार्यस्थल की गरिमा और जीवन-योग्य मज़दूरी के साथ।

सामान्य प्रश्न

अनौपचारिक श्रम के स्त्रीकरण से क्या तात्पर्य है?

अनौपचारिक, असुरक्षित और संरक्षणहीन कार्यों में महिलाओं की बढ़ती संकेंद्रण को अनौपचारिक श्रम का स्त्रीकरण कहते हैं। भारत में 90%+ कामकाजी महिलाएँ अनौपचारिक क्षेत्र में हैं।

PLFS 2023-24 के अनुसार महिला श्रम बल भागीदारी दर कितनी है?

PLFS 2023-24 (सामान्य स्थिति) के अनुसार महिला श्रम बल भागीदारी दर (FLFPR) 41.7% है, परंतु अधिकांश वृद्धि अनौपचारिक स्व-रोज़गार में हुई है।

कृषि का स्त्रीकरण क्या है और इसके कारक क्या हैं?

कृषि कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी का बढ़ना कृषि का स्त्रीकरण है। मुख्य कारक हैं — कृषि-संकट के कारण पुरुषों का प्रवासन, ग़रीबी, MGNREGA, और कम मज़दूरी पर महिला श्रम की उपलब्धता।

कितनी प्रतिशत कृषक महिलाओं के पास भू-स्वामित्व है?

कृषि गणना 2015-16 के अनुसार केवल 13% परिचालन जोत महिलाओं के नाम हैं, जिसके कारण वे PM-KISAN, KCC और फसल बीमा जैसे लाभों से बहिष्कृत रह जाती हैं।

MKSP योजना क्या है?

महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना (MKSP), DAY-NRLM का उप-घटक है। यह SHG के माध्यम से कृषक महिलाओं को कौशल, क्षमता-निर्माण और सूक्ष्म-ऋण प्रदान करती है।

नमो ड्रोन दीदी और लखपति दीदी योजनाएँ क्या हैं?

नमो ड्रोन दीदी (2024) के तहत 15,000 ग्रामीण महिलाओं को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। लखपति दीदी मिशन का लक्ष्य SHG के माध्यम से 3 करोड़ महिलाओं को वार्षिक ₹1 लाख से अधिक की आय प्रदान करना है।

e-Shram पोर्टल पर कितनी महिलाएँ पंजीकृत हैं?

e-Shram पोर्टल पर 30+ करोड़ अनौपचारिक कामगार पंजीकृत हैं, जिनमें 53% महिलाएँ हैं। यह सामाजिक सुरक्षा लाभ देने का एक केंद्रीय डेटाबेस है।

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 गिग और प्लेटफ़ॉर्म महिला कामगारों के लिए क्या लाती है?

यह संहिता पहली बार गिग और प्लेटफ़ॉर्म कामगारों को परिभाषित करती है और उनके लिए सामाजिक सुरक्षा कोष का प्रावधान करती है। नियम 2025 में आंशिक अधिसूचित किए गए हैं।

मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम, 2017 का प्रत्युत्पन्न प्रभाव क्या रहा?

26 सप्ताह की वैतनिक छुट्टी ने सार्वजनिक क्षेत्र की महिलाओं को लाभ दिया, परंतु निजी और छोटे नियोक्ताओं ने महिलाओं की भर्ती हतोत्साहित की — एक “संरक्षणवादी बैकफ़ायर”।

क्या भारत में महिलाओं की बढ़ती श्रम भागीदारी सशक्तिकरण का संकेत है?

आवश्यक नहीं। अधिकांश वृद्धि अनौपचारिक, अल्प-वेतन और असुरक्षित कार्य में है। यह “कृषि-संकट का स्त्रीकरण” और “औपचारिक रोज़गार-सृजन की विफलता” का संकेत है।