Anantam IASHindi Note · 5 October 2026

बिहार भूमि: जमाबंदी पंजी, ऑनलाइन दाखिल-खारिज, LPC और लगान भुगतान

बिहार भूमि आसान भाषा में: जमाबंदी पंजी कैसे देखें, ऑनलाइन दाखिल-खारिज कैसे करें, LPC कैसे लें, लगान कैसे भरें और जमीन के रिकॉर्ड की गलती कैसे सुधारें।

बिहार भूमि बिहार सरकार का जमीन के रिकॉर्ड वाला पोर्टल है, जिसका पता biharbhumi.bihar.gov.in है। इसे राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग चलाता है। ज्यादातर लोग इसे चार में से किसी एक काम के लिए खोलते हैं: किसी प्लॉट की जमाबंदी पंजी (अंचल का राजस्व रजिस्टर) पढ़ने के लिए, जमीन खरीदने या विरासत में मिलने के बाद दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) का आवेदन करने के लिए, भूमि दखल-कब्जा प्रमाण पत्र (LPC) के लिए आवेदन करने के लिए, या लगान (भू-राजस्व) भरने के लिए। रिकॉर्ड देखना मुफ्त है और इसके लिए लॉगिन की जरूरत नहीं है। सेवाओं के लिए अपने मोबाइल नंबर से एक बार रजिस्ट्रेशन करना होता है।

ज्यादातर लोगों की उलझन इस बात पर होती है कि स्क्रीन पर दिख रहा रिकॉर्ड असल में साबित क्या करता है। बिहार भूमि पर जो जमाबंदी आप देखते हैं, वह अंचल (सर्किल) कार्यालय में रखे रजिस्टर की डिजिटल कॉपी है। पोर्टल का अपना डिस्क्लेमर कहता है कि इसमें कुछ प्रविष्टियां छूटी हुई या गलत हो सकती हैं। गलत प्रविष्टि काउंटर पर शिकायत करने से ठीक नहीं होती, और नया दाखिल-खारिज डालने से भी नहीं। वह परिमार्जन प्लस से ठीक होती है, जो सुधार का अलग रास्ता है। और किसी भी औपचारिक काम के लिए LPC या डिजिटल हस्ताक्षर वाली कॉपी चाहिए, स्क्रीनशॉट नहीं। इन तीनों रास्तों को अलग-अलग समझ लीजिए, तो बिहार भूमि इस्तेमाल करना काफी आसान हो जाता है।

बिहार भूमि क्या-क्या करता है: एक नजर में

बिहार भूमि असल में विभाग के कई अलग-अलग पोर्टलों का एक साझा मुख्य पेज है: ई-म्यूटेशन, भू-लगान, भू-अभिलेख, परिमार्जन प्लस, भू-नक्शा और राजस्व न्यायालय का सिस्टम। बिहार भूमि जानकारी की बुनियादी बातें नीचे की तालिका में हैं, और ये सब पोर्टल और विभाग की अपनी पुस्तिका (बुकलेट) से ली गई हैं।

तथ्यविवरण
किसका पोर्टलराजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार सरकार, पुराना सचिवालय, बेली रोड, पटना
आधिकारिक पताbiharbhumi.bihar.gov.in (NIC बिहार ने बनाया)
ऑनलाइन रिकॉर्डकरीब 4.40 करोड़ जमाबंदी; पहली 3.58 करोड़ जमाबंदी सभी 534 अंचलों से दिसंबर 2017 से अक्टूबर 2018 के बीच ऑनलाइन हुईं
बिना लॉगिन, मुफ्तजमाबंदी पंजी, दाखिल-खारिज की स्थिति, LPC की स्थिति, परिमार्जन प्लस की स्थिति, बंधक (मॉर्गेज) का विवरण, भू-नक्शा के नक्शे
मोबाइल लॉगिन जरूरीऑनलाइन दाखिल-खारिज, LPC का आवेदन, परिमार्जन प्लस, SMS अलर्ट, भू-अभिलेख की हस्ताक्षरित कॉपी
दाखिल-खारिज का कानूनबिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 और बिहार भूमि दाखिल-खारिज नियमावली, 2012
लगान का कानूनबिहार काश्तकारी अधिनियम, 1885 की धारा 24
शिकायतRaise a Ticket (17 अंकों की टिकट ID) और विभाग का जन शिकायत पोर्टल

बिहार के भूमि रिकॉर्ड समझिए: खतियान, जमाबंदी और बाकी

बिहार के भूमि रिकॉर्ड कई परतों में आते हैं, और हर परत एक अलग सवाल का जवाब देती है। खतियान सर्वे का अधिकार-अभिलेख (record of rights) है, जो कैडस्ट्रल और रिविजनल सर्वे के दौरान बना। यह बताता है कि सर्वे के समय कौन-सा प्लॉट किसके पास था। जमाबंदी पंजी, जिसे रजिस्टर II भी कहते हैं, अंचल कार्यालय में लगातार चलने वाला राजस्व रजिस्टर है। विभाग के FAQ के मुताबिक यह सबसे पहले मूल खतियान और जमींदारी रिटर्न से लिखा गया था। यह तब हुआ जब बिहार भूमि सुधार अधिनियम, 1950 ने जमींदारी खत्म की और 1952 में अंचल कार्यालय बने। उसके बाद से हर दाखिल-खारिज इसी रजिस्टर को अपडेट करता है।

बिहार भूमि की लगभग हर स्क्रीन पर ये कुछ शब्द बार-बार दिखते हैं:

रिकॉर्डयह क्या साबित करता हैबिहार भूमि पर कहां मिलेगा
जमाबंदी पंजी (रजिस्टर II)अभी दर्ज रैयत, खाता, खेसरा, रकबा और बकाया लगान“जमाबंदी पंजी देखें”, मुफ्त
खतियान (कैडस्ट्रल या रिविजनल सर्वे)सर्वे में दर्ज अधिकारभू-अभिलेख पोर्टल, स्कैन की हुई कॉपी देखना मुफ्त और हस्ताक्षरित कॉपी शुल्क देकर
दाखिल-खारिज आदेश और शुद्धि पत्रकि हस्तांतरण रजिस्टर में दर्ज हो गयादाखिल-खारिज की स्थिति वाला पेज; आदेश केस के साथ रहता है
LPC (भूमि दखल-कब्जा प्रमाण पत्र)डिजिटल जमाबंदी के मुताबिक कब्जा“ऑनलाइन एल॰ पी॰ सी॰ आवेदन करें”
लगान रसीदकिस साल तक भू-राजस्व भरा जा चुका हैभुगतान के बाद भू-लगान पर
राजस्व नक्शा (भू-नक्शा)गांव के नक्शे में प्लॉट का आकार और उसकी जगहbhunaksha.bihar.gov.in, “View Map” (नक्शा देखें)

भारत में ऐसे रजिस्टरों को डिजिटल बनाने की राष्ट्रीय कोशिश, और कर्ज और अदालतों के लिए साफ रजिस्टर क्यों मायने रखता है, यह सब हमारे नोट भारत में भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन में है। बिहार की रैयत और जमींदारी वाली शब्दावली की जड़ें 1793 के स्थायी बंदोबस्त तक जाती हैं।

बिहार भूमि पर जमाबंदी पंजी कैसे देखें

जमाबंदी देखने के लिए आपको एक जिला, एक अंचल, एक मौजा और खोजने का एक आधार चाहिए। लॉगिन की कोई जरूरत नहीं है। नीचे के स्टेप विभाग की पुस्तिका और FAQ के मुताबिक हैं।

  1. biharbhumi.bihar.gov.in खोलिए और “जमाबंदी पंजी देखें” पर क्लिक कीजिए।
  2. अपना जिला और अंचल चुनिए, फिर “Proceed” (आगे बढ़ें) पर क्लिक कीजिए।
  3. हल्का (पंचायत) और मौजा चुनिए।
  4. खोजने का एक विकल्प चुनिए: भाग-पृष्ठ संख्या, रैयत का नाम, खाता नंबर, खेसरा नंबर, पुराना जमाबंदी नंबर या कंप्यूटरीकृत जमाबंदी नंबर। चाहें तो उस मौजा की सारी जमाबंदी की सूची भी देख सकते हैं।
  5. “Search” (खोजें) पर क्लिक कीजिए, फिर सही प्रविष्टि के आगे “view” (देखें) पर क्लिक कीजिए।

यह पेज रजिस्टर की एक लाइन से कहीं ज्यादा दिखाता है। इसमें वे केस भी दिखते हैं जिनके जरिए ऑनलाइन दाखिल-खारिज से (2017-18 के बाद) इस जमाबंदी से जमीन निकली। साथ में जमीन के बंधक की प्रविष्टियां, अंचल स्तर पर किए गए बदलाव और इस जमाबंदी के खिलाफ दायर राजस्व न्यायालय के केस भी दिखते हैं। खरीदार को कोर्ट केस वाली लाइन सबसे ध्यान से पढ़नी चाहिए। अगर सिर्फ यह देखना है कि प्लॉट पर कोई कर्ज है या नहीं, तो जमाबंदी खोलिए और जमीन के बंधक विवरण वाले लिंक पर क्लिक कीजिए। बैंक जब कर्ज देता है, तो प्लॉट के सामने अपना कर्ज दर्ज करता है।

अगर आपको नहीं पता कि कोई गांव किस अंचल में आता है, तो बिहार के जिलों की सूची से शुरू कीजिए और फिर जिले के राजस्व कार्यालय से अंचल पक्का कर लीजिए।

ऑनलाइन दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के लिए आवेदन कैसे करें

दाखिल-खारिज का मतलब है जमाबंदी में मालिकाना हक के बदलाव की प्रविष्टि: नए धारक का नाम चढ़ता है (दाखिल) और पुराने धारक का हिस्सा हटता है (खारिज)। बिहार में इसका आवेदन सिर्फ ऑनलाइन हो सकता है। बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 के तहत अधिकार मिलने के 90 दिन के भीतर आवेदन करना होता है। उसके बाद, विभाग के FAQ के मुताबिक, आपको विलंब माफी याचिका (delay condonation petition) लगानी होती है। इस पर अंचल अधिकारी (Circle Officer) गुण-दोष के आधार पर फैसला करते हैं।

शुरू करने से पहले एक बात जरूर जांच लीजिए। विक्रेता (या पिछले रैयत) की जमाबंदी बिहार भूमि पर पहले से ऑनलाइन होनी चाहिए। और जो खाता, खेसरा और रकबा आपने खरीदा है, वह उसमें इतने क्षेत्रफल के साथ दिखना चाहिए कि हस्तांतरण हो सके। अगर ऐसा नहीं है, तो पोर्टल आवेदन आगे नहीं जाने देगा। उस रिकॉर्ड को पहले परिमार्जन प्लस से ठीक कराना होगा।

  1. बिहार भूमि खोलिए और “ऑनलाइन दाखिल खारिज आवेदन करें” पर क्लिक कीजिए।
  2. अपने मोबाइल नंबर से लॉगिन कीजिए। नया यूजर पहले “नागरिक लॉगिन” से रजिस्टर करता है: वह Registration Form (रजिस्ट्रेशन फॉर्म) भरता है, “Register Now” पर क्लिक करता है और OTP डालता है।
  3. जिला और अंचल चुनिए और “नया दाखिल-खारिज आवेदन करें” पर क्लिक कीजिए।
  4. हर हिस्सा भरिए: आवेदक का विवरण, खाता-खेसरा का विवरण, खरीदार या वारिस का विवरण, विक्रेता या पिछले जमाबंदी धारक का विवरण, और साक्ष्य। हर हिस्से के बाद “Save & Next” पर क्लिक कीजिए।
  5. हर दस्तावेज अलग PDF में अपलोड कीजिए।
  6. खरीदार का मोबाइल नंबर OTP से सत्यापित कीजिए, प्रीव्यू जांचिए और “Final Submit” पर क्लिक कीजिए। पावती पर एक टोकन नंबर होता है।

विभाग रैयतों से कहता है कि वे अपने ही लॉगिन से आवेदन करें। अगर कोई और अपनी ID से आपका आवेदन डालता है, तो हर वापसी, नोटिस और सवाल उसी ID पर जाता है। फिर आप अपना आवेदन खुद ठीक नहीं कर पाते।

दाखिल-खारिज के लिए दस्तावेज

कौन-सा दस्तावेज लगेगा, यह इस पर निर्भर करता है कि जमीन आपको कैसे मिली। विभाग का दाखिल-खारिज FAQ ये मुख्य मामले गिनाता है:

अगर आपने दर्ज रैयत की जगह उसके किसी वंशज या किसी एक सह-हिस्सेदार से जमीन खरीदी है, तो कुछ और कागज भी लगाइए: वंशावली, रैयत से विक्रेता के रिश्ते का सबूत और बाकी हिस्सेदारों की लिखित सहमति। जहां विक्रेता की जमाबंदी संयुक्त है, वहां सहमति पत्र अनिवार्य है।

आवेदन जमा करने के बाद क्या होता है

आवेदन ऑनलाइन अंचल अधिकारी के न्यायालय में पहुंचता है। अगर आवेदन पूरा है, तो उसे एक दाखिल-खारिज केस नंबर मिलता है। अगर पूरा नहीं है, तो वह कारणों के साथ आपके लॉगिन में लौट आता है, और आप उसे ठीक करके दोबारा जमा करते हैं। इसके बाद राजस्व कर्मचारी हर खेसरा का मौके पर जाकर सत्यापन करते हैं, और राजस्व अधिकारी अपनी राय जोड़ते हैं।

आदेश देने से पहले अंचल अधिकारी आम और खास सूचना (नोटिस) जारी करते हैं और आपत्तियों के लिए 14 दिन इंतजार करते हैं। कोई आपत्ति न आए, तो आदेश पारित होता है और शुद्धि पत्र जारी होता है। इससे रकबा पुराने रैयत की जमाबंदी से अपने-आप आपकी जमाबंदी में चला जाता है। अगर 14 दिन के भीतर कोई आपत्ति करता है, तो अंचल अधिकारी पहले सभी पक्षों को सुनते हैं। पोर्टल पर कोई भी व्यक्ति “दाखिल-खारिज वाद पर आपत्ति दर्ज करें” के जरिए किसी लंबित दाखिल-खारिज केस पर ऑनलाइन आपत्ति भी दर्ज कर सकता है।

पुस्तिका में दाखिल-खारिज केस के शुरू से आखिर तक की कोई समय-सीमा नहीं छपी है, इसलिए किसी तारीख का वादा करने वाले पर भरोसा मत कीजिए। खारिज हुआ या विवादित आदेश ऊपर के राजस्व न्यायालयों में जाता है। पोर्टल का ऑनलाइन राजस्व न्यायालय सिस्टम (RCMS) इन न्यायालयों की सूची देता है: अंचल अधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता, अपर समाहर्ता, समाहर्ता (कलेक्टर) और प्रमंडलीय आयुक्त।

परिमार्जन प्लस: गलत या छूटी हुई जमाबंदी कैसे सुधारें

परिमार्जन प्लस दो समस्याओं का ऑनलाइन रास्ता है: डिजिटल जमाबंदी में कोई गलती, और ऐसी जमाबंदी जो कभी ऑनलाइन आई ही नहीं। यह विभाग के उन पत्रों के तहत चलता है जिनकी शुरुआत पत्र 1426(9), दिनांक 05/06/2024 से होती है। बाद में अगस्त 2024 में, और फिर जनवरी और मार्च 2025 में, इनमें नए निर्देश जोड़े गए।

किसी पुरानी ऑनलाइन जमाबंदी (यानी जो ऑनलाइन दाखिल-खारिज शुरू होने से पहले से मौजूद थी) में गलती सुधारने के लिए:

  1. बिहार भूमि खोलिए, “परिमार्जन प्लस” पर क्लिक कीजिए और अपने मोबाइल नंबर से लॉगिन कीजिए।
  2. “डिजिटल जमाबंदी में सुधार करें” के नीचे “Rectification in Old Jamabandi” (पुरानी जमाबंदी में सुधार) चुनिए।
  3. जमाबंदी खोजिए और खोलिए। जिस-जिस हिस्से को बदलवाना है (नाम, पिता का नाम, पता, खाता, खेसरा, रकबा, चौहद्दी, लगान), उसके सामने YES चुनिए। फिर उस फील्ड के सामने “परिवर्तन अनुरोध” पर YES चुनिए और सही जानकारी भरिए।
  4. हर बदलाव के लिए सबूत अपलोड कीजिए, “Preview” पर क्लिक कीजिए, फिर Finalize पर। इसके बाद कुछ भी बदला नहीं जा सकता।
  5. Final Submit करने पर ट्रैकिंग के लिए एक पावती संख्या मिलती है।

कंप्यूटरीकरण के समय छूट गई जमाबंदी के लिए “छूटे हुए जमाबंदी का डिजिटाईजेशन” वाला विकल्प चुनिए। फिर जिला, अंचल, हल्का और मौजा चुनिए और “Prepare Application” (आवेदन तैयार करें) पर क्लिक कीजिए। इसके बाद जो जानकारी आपको पता हो, वह भरिए: जमाबंदी नंबर, होल्डिंग, खंड और पृष्ठ, और रैयत, प्लॉट और लगान का विवरण। आखिर में PDF अपलोड करके आवेदन जमा कीजिए।

राजस्व कर्मचारी अनुरोध की जांच करते हैं और अंचल अधिकारी उसे मंजूर या नामंजूर करते हैं। एक समय-सीमा सबसे अहम है: अगर आवेदन सुधार के लिए आपको लौटाया गया और आपने उसे 30 दिन के भीतर दोबारा जमा नहीं किया, तो वह अपने-आप रद्द हो जाता है। आप बाद में फिर से आवेदन कर सकते हैं, लेकिन कतार में आपकी जगह चली जाती है।

किसी दूसरे मौजा में गलती से चढ़ी जमाबंदी अलग मामला है। पत्र 168(9), दिनांक 20/01/2025 के तहत यह सुधार परिमार्जन प्लस पर नहीं होता। इसकी शुरुआत अंचल अधिकारी को ऑफलाइन आवेदन देने से होती है।

LPC, लगान और हस्ताक्षरित कॉपी

ये तीनों सेवाएं एक ही सवाल का जवाब हैं: “किसी दफ्तर में असल में क्या जमा करें?” जमाबंदी का मुफ्त व्यू सिर्फ जानकारी है। विभाग की अपनी पुस्तिका कहती है कि सरकारी लाभ और कर्ज के लिए नागरिकों को LPC चाहिए।

भूमि दखल-कब्जा प्रमाण पत्र (LPC)

  1. “ऑनलाइन एल॰ पी॰ सी॰ आवेदन करें” पर क्लिक कीजिए, लॉगिन कीजिए, जिला और अंचल चुनिए, फिर “नया LPC आवेदन करें” पर क्लिक कीजिए।
  2. हल्का, मौजा और खोजने के एक आधार से अपनी जमाबंदी खोजिए, जैसे भाग-पृष्ठ, खाता, खेसरा या नाम।
  3. अगर लगान अपडेट है, तो “apply for LPC” (LPC के लिए आवेदन करें) पर क्लिक कीजिए; अगर नहीं, तो पहले लगान भरिए।
  4. जमाबंदी के सामने “चयन करें” पर क्लिक कीजिए, अपना नाम, पता और मकसद भरिए, स्व-घोषणा पत्र और कोई दूसरा साक्ष्य अपलोड कीजिए, फिर “Save & Next” और “Final Submit” पर क्लिक कीजिए।

अंचल अधिकारी जमाबंदी और आपके स्व-घोषणा पत्र की जांच के बाद LPC ऑनलाइन जारी करते हैं। संयुक्त जमाबंदी पर एक ही LPC बनता है, जिसमें हर रैयत का नाम होता है। अपने हिस्से का अलग LPC चाहिए, तो पहले बंटवारे का दाखिल-खारिज कराना होगा। जारी हुए LPC पोर्टल पर जमाबंदी पेज के साथ दिखते हैं, इसलिए कोई भी उनका सत्यापन कर सकता है।

लगान ऑनलाइन कैसे भरें

  1. बिहार भूमि पर “भू-लगान” पर क्लिक कीजिए। इससे भू-लगान पोर्टल खुल जाएगा।
  2. जिला, अंचल, हल्का और मौजा के साथ जमाबंदी का कोई एक विवरण डालिए, अपना पेज खोजिए और “देखें” पर क्लिक कीजिए। बकाया रकम स्क्रीन पर दिख जाती है।
  3. अपना नाम, मोबाइल नंबर और पता डालिए और ऑनलाइन भुगतान वाले बटन पर क्लिक कीजिए।
  4. ई-पेमेंट से भुगतान कीजिए (PNB, IDBI, SBI, UBI, केनरा बैंक या बैंक ऑफ बड़ौदा से नेट बैंकिंग, या SBI के जरिए UPI या कार्ड), या चालान प्रिंट करके PNB या SBI के काउंटर पर पैसा जमा कीजिए।
  5. ई-पेमेंट के बाद लगान रसीद तुरंत बन जाती है। चालान से भुगतान करने पर रसीद आपके जमाबंदी पेज पर दिखती है।

अगर खाते से पैसा कट गया लेकिन रसीद नहीं आई, तो दोबारा भुगतान मत कीजिए। भू-लगान पोर्टल का अपना निर्देश है कि “लंबित भुगतान देखें” (Failed Transaction Status) खोलिए, Transaction ID डालिए और Verify दबाइए। ID आपके पास न हो, तो अपनी जमाबंदी खोजिए और पिछले भुगतान वाले विकल्प से उसे ढूंढिए।

भू-अभिलेख से डिजिटल हस्ताक्षर वाले रिकॉर्ड

बिहार रिकॉर्ड मैनुअल, 1960 का नियम 297(क) नागरिकों को राजस्व रिकॉर्ड की हस्ताक्षरित कॉपी पाने का हक देता है, और भू-अभिलेख पोर्टल ये कॉपी ऑनलाइन देता है। लॉगिन कीजिए और दस्तावेज का प्रकार, जिला, अंचल, मौजा, केस नंबर, वर्ष, खाता, खेसरा या पक्षकार के नाम से खोजिए। स्कैन किया हुआ पन्ना देखने के लिए “View” पर, और हस्ताक्षरित कॉपी के लिए “Apply for Download Copy” पर क्लिक कीजिए। पन्ने चुनिए, “Send Application” पर क्लिक कीजिए, दिखाई गई रकम जांचिए और “Make Payment” पर क्लिक कीजिए। पुस्तिका इस पोर्टल पर 28 तरह के रिकॉर्ड गिनाती है। इनमें कैडस्ट्रल और रिविजनल सर्वे का खतियान, चकबंदी खतियान, गांव के नक्शे और डिजिटल जमाबंदी रजिस्टर शामिल हैं। पोर्टल भुगतान से पहले शुल्क दिखा देता है; पुस्तिका में शुल्क की कोई सूची नहीं छपी है।

स्थिति कैसे देखें और आम गलतियां कैसे ठीक करें

स्थिति देखने वाले सारे पेज मुफ्त हैं और बिहार भूमि के मुख्य पेज पर ही मिलते हैं:

बिहार भूमि पर ज्यादातर आवेदन कुछ गिनी-चुनी वजहों से अटकते हैं, और हर वजह का इलाज है:

जब भी कोई लेन-देन या सुधार आपकी जमाबंदी पर असर डाले, उसका SMS अलर्ट पाने के लिए “SMS अलर्ट सेवा प्राप्त करें” पर जाइए, प्लॉट चुनिए और OTP से पुष्टि कीजिए। “Check AADHAAR/Mobile Seeding Status” से पता चलता है कि किसी कंप्यूटरीकृत जमाबंदी से कौन-सा मोबाइल नंबर जुड़ा है।

शिकायत कहां करें

बिहार भूमि पर शिकायत के तीन रास्ते हैं, और सही रास्ता चुनने से हफ्तों का समय बचता है:

लगान के अटके भुगतान के लिए भू-लगान पोर्टल पर अलग ईमेल दिया गया है: [email protected]। पोर्टल के मुख्य पेज पर कोई टेलीफोन हेल्पलाइन नहीं दी गई है, इसलिए सोशल मीडिया पर घूम रहे किसी भी नंबर से सावधान रहिए।

बिहार भूमि आज

पोर्टल अब सिर्फ रिकॉर्ड दिखाने से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर उन्हें सुधारने तक पहुंच गया है। विभाग ने 16 अगस्त 2025 से 20 सितंबर 2025 तक राजस्व महा-अभियान चलाया। इसमें टीमें छपी हुई जमाबंदी की कॉपी घर-घर लेकर गईं और हल्का स्तर पर शिविर लगाए। इन शिविरों में सुधार, उत्तराधिकार वाला दाखिल-खारिज, बंटवारे वाला दाखिल-खारिज और छूटी हुई जमाबंदी को डिजिटल बनाने का काम हुआ। परिमार्जन प्लस को उसके मौजूदा नियम जून 2024 से मार्च 2025 के बीच जारी पत्रों से मिले।

मुख्य पेज पर चार मुख्य सेवाओं के अलावा कुछ नई सेवाएं भी हैं: जमीन की मापी के आवेदन के लिए ई-मापी, भूमि उपयोग बदलने (land-use conversion) की सेवा, राजस्व नक्शों की घर तक डिलीवरी, पुराने दस्तावेजों के लिए कैथी लिपि अनुवाद सेवा, और भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय की बिहार विशेष सर्वेक्षण सेवाओं के लिंक। अगर आपके परिवार के कागज कैथी में हैं, तो पुराना खतियान खुद पढ़ने की कोशिश से पहले इस अनुवाद सेवा के बारे में जान लीजिए।

राज्यों की तुलना करें, तो उत्तर प्रदेश यही काम अलग तरह से बांटता है; हमारी UP भूलेख खतौनी गाइड बताती है कि बिहार की जमाबंदी के बराबर वहां खतौनी है। किसानों को यह भी जानना चाहिए कि पीएम-किसान जैसी योजनाएं भूमि रिकॉर्ड जुड़ने (सीडिंग) के बाद ही पैसा देती हैं, इसलिए साफ जमाबंदी सिर्फ कागजी काम नहीं है। इसी वजह से भूमि रिकॉर्ड भूमि सुधार के केंद्र में रहते हैं: रजिस्टर ही तय करता है कि राज्य किसे मालिक मानेगा।

सामान्य प्रश्न

बिहार भूमि क्या है?

बिहार भूमि बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का भूमि रिकॉर्ड पोर्टल है, जिसका पता biharbhumi.bihar.gov.in है। इस पर आप जमाबंदी पंजी मुफ्त देख सकते हैं, और दाखिल-खारिज, LPC, रिकॉर्ड सुधार और लगान भुगतान के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। रिकॉर्ड देखने के लिए लॉगिन नहीं चाहिए, जबकि सेवाओं के लिए मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन जरूरी है।

बिहार भूमि पर अपनी जमाबंदी कैसे देखें?

पोर्टल खोलिए, ‘जमाबंदी पंजी देखें’ वाले विकल्प पर क्लिक कीजिए, जिला और अंचल चुनिए और Proceed पर क्लिक कीजिए। फिर हल्का और मौजा चुनिए, भाग-पृष्ठ, नाम, खाता, खेसरा या जमाबंदी नंबर से खोजिए और view पर क्लिक कीजिए। इसके लिए न रजिस्ट्रेशन चाहिए, न कोई शुल्क।

क्या ऑनलाइन जमाबंदी कानूनी सबूत के तौर पर मान्य है?

ऑनलाइन जमाबंदी अंचल रजिस्टर की डिजिटल कॉपी है, और पोर्टल का डिस्क्लेमर कहता है कि इसकी प्रविष्टियां अधूरी हो सकती हैं। कर्ज और सरकारी लाभ के लिए विभाग LPC की ओर इशारा करता है, और प्रमाणित रिकॉर्ड भू-अभिलेख से डिजिटल हस्ताक्षर वाली कॉपी के रूप में मिलते हैं। मुफ्त व्यू का इस्तेमाल जांच के लिए कीजिए, जमा करने वाले दस्तावेज के तौर पर नहीं।

बिहार में दाखिल-खारिज के लिए कितने दिन के भीतर आवेदन करना होता है?

विभाग का दाखिल-खारिज FAQ अधिकार मिलने की तारीख से 90 दिन का समय देता है। उसके बाद भी आप आवेदन कर सकते हैं, लेकिन तब विलंब माफी याचिका लगानी होगी, जिस पर अंचल अधिकारी गुण-दोष के आधार पर फैसला करते हैं।

मेरा दाखिल-खारिज आवेदन आगे क्यों नहीं बढ़ रहा?

सबसे आम वजह यह है कि विक्रेता की जमाबंदी ऑनलाइन नहीं है, या उसमें वह खाता, खेसरा और रकबा नहीं दिखता जो आपने खरीदा है। दाखिल-खारिज के लिए वह जमीन पिछले धारक के ऑनलाइन रिकॉर्ड में होनी चाहिए। पहले परिमार्जन प्लस से उस रिकॉर्ड को ठीक कराइए, फिर दाखिल-खारिज का आवेदन कीजिए।

परिमार्जन प्लस किस काम आता है?

परिमार्जन प्लस डिजिटल जमाबंदी की गलतियां सुधारता है, जैसे गलत नाम, खाता, खेसरा, रकबा, चौहद्दी या लगान। यह छूटी हुई जमाबंदी को भी ऑनलाइन लाता है। हर अनुरोध पर अंचल अधिकारी, कर्मचारी की जांच के बाद, फैसला करते हैं। आपको लौटाया गया आवेदन 30 दिन के भीतर दोबारा जमा न हो, तो वह रद्द हो जाता है।

बिहार भूमि पर LPC कैसे मिलता है?

लॉगिन कीजिए, ऑनलाइन LPC वाला विकल्प चुनिए, जिला और अंचल चुनिए और अपनी जमाबंदी खोजिए। अगर लगान भरा हुआ है, तो apply for LPC पर क्लिक कीजिए, अपना विवरण भरिए और स्व-घोषणा पत्र अपलोड कीजिए। अंचल अधिकारी LPC ऑनलाइन जारी करते हैं, और आप आवेदन संख्या से उसकी स्थिति देख सकते हैं।

लगान का भुगतान फेल हो जाए तो क्या करें?

दोबारा भुगतान मत कीजिए। भू-लगान पोर्टल खोलिए, Failed Transaction Status वाला विकल्प चुनिए और अपनी Transaction ID से सत्यापन कीजिए; भुगतान सफल रहा हो, तो रसीद बन जाती है। इसके बाद भी दिक्कत रहे, तो पोर्टल पर दिया गया ईमेल [email protected] है।