Anantam IASHindi Note · 14 September 2026

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF): अधिनियम, हवाई अड्डे और फायर विंग

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को समझिए: 1968 का अधिनियम, सशस्त्र बल का दर्जा, हवाई अड्डे, दिल्ली मेट्रो, संसद, साथ ही 1999 और 2009 के संशोधन।

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) भारत का वह केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है जो देश के अहम प्रतिष्ठानों की रखवाली करता है। इसका गठन 10 मार्च 1969 को CISF अधिनियम, 1968 के तहत हुआ। यह गृह मंत्रालय के अधीन काम करता है। मार्च 2026 की स्थिति में यह देश भर में 361 प्रतिष्ठानों की सुरक्षा संभालता है, जिनमें 70 हवाई अड्डे हैं। भारत के ज्यादातर बड़े हवाई अड्डों पर टर्मिनल गेट और तलाशी बूथ पर जो जवान खड़े मिलते हैं, वे इसी बल के होते हैं।

ज्यादातर लोग CISF से पहली बार हवाई अड्डे पर मिलते हैं और मान लेते हैं कि बस यही इसका पूरा काम है। ऐसा नहीं है। यह बल सार्वजनिक क्षेत्र के कारखानों के लिए बना था, और हवाई अड्डे इसके पास 1999 में उड़ान IC-814 के अपहरण के बाद ही आए। केंद्रीय बलों में पूरी फायर सर्विस भी सिर्फ यही चलाता है। दूसरी उलझन कानूनी है। 1999 के एक संशोधन ने CISF को निजी कंपनियों को सलाह देने की छूट दी, जबकि 2009 के संशोधन ने उसे उनकी असल में रखवाली करने दी। इन परतों को अलग-अलग रखिए, तो पूरा बल समझ में आ जाता है।

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल क्या है?

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल कानून से बना संघ का सशस्त्र बल है। यह उन प्रतिष्ठानों की रक्षा करता है जिन्हें केंद्र सरकार तय करती है, और इसकी शुरुआत केंद्र के अपने औद्योगिक उपक्रमों से हुई थी। यह गृह मंत्रालय के अधीन केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में से एक है। पहले दिन से इसके साथ एक अनोखा नियम चला आ रहा है: जो उपक्रम इस बल को बुलाता है, वही इसका खर्च उठाता है। नीचे की तालिका में वे तथ्य हैं जिन्हें सबसे पहले पक्का कर लेना चाहिए।

तथ्यविवरण
पूरा नामकेंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF)
गठन10 मार्च 1969, जिस दिन अधिनियम लागू किया गया
कानूनी आधारCISF अधिनियम, 1968 (1968 का अधिनियम संख्या 50)
दर्जा1983 के संशोधन से संघ का सशस्त्र बल, जो 15 जून 1983 से लागू हुआ
मूल मंत्रालयगृह मंत्रालय (MHA); केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में से एक
प्रमुखमहानिदेशक, जिनके पास अधिनियम की धारा 7 के तहत बल की कमान होती है
मुख्यालयब्लॉक 13, CGO कॉम्प्लेक्स, लोधी रोड, नई दिल्ली
ध्येय वाक्य“सुरक्षा और संरक्षा”, जैसा बल की वेबसाइट पर दिया गया है
दायरा361 अहम प्रतिष्ठान, जिनमें 70 हवाई अड्डे शामिल हैं (केंद्रीय गृह मंत्री, मार्च 2026)

तालिका में एक संख्या जान-बूझकर नहीं रखी गई है। CISF की शुरुआत करीब 3,000 जवानों से हुई थी। दिसंबर 2008 के एक नागरिक चार्टर (citizen’s charter) ने, जो MHA की वेबसाइट पर मौजूद है, इसकी संख्या करीब 1,05,000 बताई थी। आज की संख्या का कोई एक, तारीख वाला आधिकारिक आँकड़ा नहीं है। इसलिए उद्धृत करने के लिए ज्यादा सुरक्षित संख्याएँ वे प्रतिष्ठान और हवाई अड्डे हैं जो गृह मंत्री ने मार्च 2026 में बताए।

CISF का गठन क्यों हुआ, और यह सशस्त्र बल कैसे बना?

CISF इसलिए बनाया गया, क्योंकि भारत के नए सार्वजनिक क्षेत्र के कारखानों की रखवाली उनका अपना चौकीदारी स्टाफ (watch and ward) करता था, और यह इंतजाम नाकाफी पाया गया। 1968 के विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के विवरण में यह बात साफ लिखी थी। उसके मुताबिक चौकीदारी स्टाफ आम तौर पर सिर्फ प्रवेश द्वारों और चारदीवारी पर पहरा देता था, और बिना इजाजत घुसने वालों को रोकता था। स्टील प्लांट या रिफाइनरी को एक दरबान से कहीं ज्यादा की जरूरत थी।

बल की अपनी कहानी एक आग से शुरू होती है। 29 जनवरी 1964 को रांची में हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन के प्लांट में बड़ी आग लगी, जिससे भारी नुकसान हुआ। जस्टिस बी. मुखर्जी की अध्यक्षता वाले एक आयोग ने इसकी वजह तोड़फोड़ बताई। आयोग ने सिफारिश की कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को आग और सुरक्षा, दोनों का कवर देने के लिए एक अनुशासित, वर्दीधारी बल बनाया जाए।

संसद ने इसका जवाब CISF अधिनियम, 1968 से दिया, जिसका नंबर 1968 का अधिनियम संख्या 50 है। यह अधिनियम पास होते ही बल शुरू नहीं हो गया। धारा 1(3) ने लागू होने की तारीख चुनने का अधिकार केंद्र सरकार पर छोड़ा था। फिर 3 मार्च 1969 की एक अधिसूचना ने इस अधिनियम को 10 मार्च 1969 से लागू किया। इसीलिए कागज पर CISF 1968 में “बना”, लेकिन असल में उसका “गठन” 1969 में हुआ। इसी वजह से इसका स्थापना दिवस (Raising Day) मार्च में पड़ता है: मार्च 2026 का समारोह 57वाँ था।

1983 का संशोधन

असली मोड़ 1983 में आया। 1983 के अधिनियम संख्या 14 नाम के संशोधन ने, जो 15 जून 1983 से लागू हुआ, CISF को संघ का सशस्त्र बल बना दिया। इसके उद्देश्यों के विवरण में लिखा था कि यह बल करीब 13 साल से मौजूद है। साथ में यह भी कि अहम औद्योगिक उपक्रमों की रखवाली के लिए इसे “ज्यादा असरदार साधन” बनाने की जरूरत है।

इस वाक्यांश के पीछे असली बात छिपी है। संघ का सशस्त्र बल वह होता है जिसे केंद्र अपने कानून के तहत खड़ा करता है और अपने नियंत्रण में रखता है। उसकी अपनी रैंक व्यवस्था होती है, अपना अनुशासन होता है। यह उस श्रेणी में आता है जिसका नाम संविधान संघ सूची की प्रविष्टि 2 में लेता है: “संघ के कोई अन्य सशस्त्र बल”। 1983 से पहले CISF एक प्रशिक्षित सुरक्षा स्टाफ जैसा था, जिसे कारखानों को उधार दिया जाता था। 1983 के बाद यह एक अनुशासित केंद्रीय बल बन गया, जिसकी खास महारत बस कारखानों की सुरक्षा थी।

इसी संशोधन ने बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार भी बढ़ाया। अब इसके दायरे में बल के सदस्यों पर हमला भी आ गया, और उस परिसर के अंदर रखी संपत्ति के खिलाफ अपराध भी, जिसकी वे रखवाली करते हैं। फिर 1989 के संशोधन, यानी 1989 के अधिनियम संख्या 20, ने उपक्रमों के कर्मचारियों की सुरक्षा का कर्तव्य भी जोड़ दिया। यानी सिर्फ प्लांट नहीं, वहाँ काम करने वाले लोग भी। इसके उद्देश्यों के विवरण में दर्ज है कि उस समय CISF 182 सरकारी और सार्वजनिक उपक्रमों में तैनात था। 2026 के 361 प्रतिष्ठानों से तुलना के लिए यह एक काम का पैमाना है।

CISF अधिनियम बल को कौन-सी शक्तियाँ देता है?

CISF अधिनियम तीन अलग-अलग काम करता है, और हर काम की अपनी धारा है:

दो और प्रावधान अहम हैं। धारा 7 बल का अधीक्षण केंद्र सरकार को सौंपती है, और उसकी कमान महानिदेशक को। धारा 11 सदस्यों को तय मामलों में बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार देती है। धारा 10 केंद्र सरकार को “भारत के भीतर और बाहर” कर्तव्य सौंपने की छूट देती है।

ज्यादातर नोट्स इन दोनों संशोधनों को आपस में मिला देते हैं। इसलिए एक उदाहरण लीजिए: एक निजी रिफाइनरी, जिसे CISF की सुरक्षा चाहिए। अब देखिए कि कानून ने उसे कब क्या करने दिया:

तो परामर्श की भूमिका 1999 का विचार है, और तैनाती की भूमिका 2009 का। परामर्श एक योजना बेचता है। तैनाती गेट पर हथियारबंद जवान खड़े करती है।

परामर्श की फीस MHA मंजूर करता है, और इसे हर दो साल में बदला जाता है। 18 जुलाई 2023 से लागू अनुसूची के तहत किसी बड़े प्रतिष्ठान के सुरक्षा परामर्श की फीस ₹16.25 लाख है। सुरक्षा और फायर, दोनों का मिला-जुला परामर्श ₹21 लाख का पड़ता है।

2009 के बदलाव को पिछली तारीख से, यानी 10 जनवरी 2009 से, लागू माना गया। यह नवंबर 2008 के मुंबई हमलों के करीब छह हफ्ते बाद की तारीख है। इसके उद्देश्यों के विवरण ने वजह सीधे बताई। आतंकी संगठनों का खतरा बढ़ रहा था, इसलिए निजी और संयुक्त उद्यम वाले उद्योगों को भी CISF सुरक्षा की जरूरत थी। यह सुरक्षा लागत की भरपाई के आधार पर (cost-reimbursement basis) दी जानी थी। सार्वजनिक क्षेत्र के कारखानों पर यही सिद्धांत 1968 से लागू था। तब मूल विधेयक में साफ लिखा गया था कि तैनाती का खर्च सरकार नहीं, बल्कि वह उपक्रम उठाएगा।

CISF हवाई अड्डों और संसद की सुरक्षा क्यों करता है?

क्योंकि केंद्र सरकार ने धारा 3 की अपनी शक्ति का इस्तेमाल करके इस बल को नए काम सौंपे, और ज्यादातर बार ऐसा किसी खास सुरक्षा चूक के बाद हुआ। हर नई जिम्मेदारी एक ही ढर्रे पर आई। किसी अहम जगह पर कोई घटना एक कमी उजागर करती है। फिर CISF ने उद्योगों में प्रवेश नियंत्रण (access control) का जो तरीका बनाया था, उसे वहाँ ले जाया जाता है।

हवाई अड्डे

हवाई अड्डों की भूमिका इंडियन एयरलाइंस की उड़ान IC-814 के अपहरण से जुड़ती है, जिसे दिसंबर 1999 में काठमांडू से कंधार ले जाया गया था। हवाई अड्डों पर CISF तैनात करने की बात पहली बार उसी अपहरण के बाद उठी। 2001 की एक रिपोर्ट ने इसे संवेदनशील प्रतिष्ठानों पर ज्यादा पेशेवर बल की माँग से जोड़ा। सितंबर 2001 में अमेरिका पर हुए हमलों के बाद इस काम ने रफ्तार पकड़ी। उसी अक्टूबर तक कोलकाता का हवाई अड्डा CISF को सौंपने की कतार में आ चुका था।

2008 के नागरिक चार्टर में CISF के पास 56 हवाई अड्डे गिने गए थे। गृह मंत्री ने मार्च 2026 में यह संख्या 70 बताई। सबसे नए नामों में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और नवी मुंबई हवाई अड्डा हैं। बल इन्हें एक अलग एयरपोर्ट सेक्टर के जरिए चलाता है। हवाई अड्डे पर हमला हो या अपहरण की कोशिश, सबसे पहले मोर्चा CISF संभालता है। लेकिन अपहरण-रोधी खास कार्रवाई अब भी राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड का काम है।

दिल्ली मेट्रो

2002 से दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा दिल्ली पुलिस के पास थी। मार्च 2007 की PTI की एक रिपोर्ट के शब्दों में यह नेटवर्क “आतंकियों के निशाने पर सबसे ऊपर” था। इसलिए MHA ने 15 अप्रैल 2007 से इसे CISF को सौंप दिया। गृह मंत्री के मुताबिक, मार्च 2025 तक यह बल इस नेटवर्क पर रोज 70 लाख से ज्यादा यात्रियों को संभाल रहा था। आधिकारिक विज्ञप्तियों में सिर्फ दिल्ली मेट्रो का नाम है, इसलिए यह मत मान लीजिए कि दूसरे शहरों की मेट्रो भी CISF के पास हैं।

संसद

सबसे नई जिम्मेदारी सबसे ज्यादा प्रतीकात्मक भी है। 13 दिसंबर 2023 को दो घुसपैठिए दर्शक दीर्घा से लोकसभा कक्ष में कूद गए, और उन्होंने धुएँ के कनस्तर छोड़ दिए। 20 मई 2024 से CISF के 3,317 जवानों की एक टुकड़ी ने पुराने और नए संसद भवन, दोनों की सुरक्षा का पूरा जिम्मा संभाल लिया। यह जिम्मा आतंकवाद-रोधी और तोड़फोड़-रोधी सुरक्षा का है। इस टुकड़ी ने CRPF के पार्लियामेंट ड्यूटी ग्रुप और दिल्ली पुलिस की जगह ली।

CISF का ढाँचा कैसा है, और यह फायर सर्विस क्यों चलाता है?

CISF एक पिरामिड की तरह चलता है, जिसके शीर्ष पर नई दिल्ली मुख्यालय में महानिदेशक होते हैं। सुरक्षा इकाइयों के साथ-साथ एक फायर विंग भी चलती है। मैदानी ढाँचा कुछ ऐसा है:

यह बल अपने लोग बाहर भी भेजता है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल अपनी 16 बटालियनें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से लेता है, और CISF इनमें योगदान देने वाले बलों में से एक है। ये सब बल आपस में कैसे जुड़ते हैं, यह आंतरिक सुरक्षा ग्रिड वाले नोट में दिखाया गया है।

फायर विंग

फायर विंग की जड़ें बल की शुरुआती कहानी में ही हैं। मुखर्जी आयोग ने ऐसे बल की माँग की थी जो आग और सुरक्षा, दोनों का कवर दे। इसलिए CISF की पहली फायर यूनिट, जिसमें 53 जवान थे, 16 अप्रैल 1970 को कोचीन के FACT में तैनात की गई। तब बल के गठन को मुश्किल से एक साल हुआ था।

अपने अलग भर्ती नियमों वाला फायर सर्विस कैडर बहुत बाद में, 12 जनवरी 1991 को बना। यानी CISF के पास फायर कैडर बनने से दो दशक पहले से फायरमैन थे। रिवीजन में इन दो तारीखों को आपस में बदल देना बहुत आसान है, इसलिए इन पर ध्यान दीजिए।

आज यह इकलौता केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है जिसके पास पूरी तरह विकसित फायर विंग है। यह विंग 115 उपक्रमों और सरकारी प्रतिष्ठानों को कवर करती है, जिनमें संसद भवन परिसर भी है। CISF फायर विंग पेज के मुताबिक, अकेले 2024 में इस विंग ने 3,291 फायर कॉल संभालीं। इसके कर्मी फायर सर्विस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में प्रशिक्षण लेते हैं। यह संस्थान 1987 में देवली में बना था, और 1999 में इसे हैदराबाद के हकीमपेट में NISA के कैंपस में ले जाया गया।

2024 के बाद CISF के लिए क्या बदला है?

CISF की कानूनी जमीन 2009 के बाद से नहीं हिली है: यह आज भी 1968 के अधिनियम के तहत संघ का सशस्त्र बल है। जो बदला है, वह है इसके काम का आकार और इसके शीर्ष पदों के नियम। तारीखवार रिकॉर्ड देखिए:

ड्रोन वाला काम करीब से देखने लायक है, क्योंकि इससे चारदीवारी की रखवाली का मतलब ही बदल जाता है। दीवार और प्रवेश गेट उस सस्ते क्वाडकॉप्टर को नहीं रोक सकते जो उनके ऊपर से उड़ जाए। अगस्त 2026 के इस समझौते पर CISF की काउंटर-ड्रोन क्षमता वाला यह करंट अफेयर्स ब्रीफ है। यह समझौता उस आधार पर खड़ा है जिसमें 3,000 से ज्यादा CISF जवान पहले ही ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रोटोकॉल में प्रशिक्षित हो चुके हैं। तकनीक वाला बड़ा सवाल ड्रोन स्वार्म और काउंटर-ड्रोन सिस्टम वाले नोट में समझाया गया है।

CISF को लेकर कौन-से सवाल अभी खुले हैं?

तीन बहसें बार-बार उठती हैं, और तीनों में दोनों तरफ ठीक-ठाक दलीलें हैं।

दायरा। कारखानों के गेट के लिए बना बल अब हवाई अड्डों और संसद की सुरक्षा करता है, और जल्द ही बंदरगाह भी संभालने वाला है। इसके पक्ष में दलील एकरूपता की है। प्रवेश नियंत्रण और स्क्रीनिंग एक ही हुनर है, और एक केंद्रीय बल हर जगह एक ही मानक लाता है। विरोध में दलील दबाव की है। हर नई जगह के लिए कहीं न कहीं से प्रशिक्षित जवान खींचने पड़ते हैं। जनवरी 2025 की बटालियनों के लिए MHA ने खुद यही वजह दी थी: बल पर बढ़ती माँग।

निजी उद्योग। परामर्श 1999 से निजी कंपनियों के लिए खुला है, और तैनाती 2009 से। फिर भी मार्च 2026 में गृह मंत्री ने निजी क्षेत्र की सुरक्षा को ऐसी चीज बताया जो CISF “आने वाले दिनों में” देगा। यह एक हाइब्रिड मॉडल के जरिए होना है, जिसे बनाने को बल से चार साल पहले कहा गया था। धीमी शुरुआत की एक संभावित वजह लागत है। कंपनी जितने जवान माँगती है, उनका पूरा खर्च उसे खुद उठाना पड़ता है।

नेतृत्व। CAPF (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 पाँच बलों पर लागू होता है, और CISF उनमें से एक है। यह अधिनियम इन वरिष्ठ पदों को प्रतिनियुक्ति पर आने वाले IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित करता है:

विधेयक का घोषित मकसद अदालती निर्देशों और प्रशासनिक जरूरतों के बीच तालमेल बैठाना था। यह केंद्र सरकार को किसी भी अदालती फैसले के बावजूद सेवा नियम बनाने की छूट देता है। इसका सीधा असर यह है कि बलों के अपने कैडर अधिकारी कितना ऊपर जा सकते हैं, इस पर एक छत लग जाती है। यही छत इस बहस का केंद्र है। संतुलित उत्तर दोनों पक्ष रखता है। IPS अधिकारी पुलिसिंग का व्यापक अनुभव लाते हैं, जबकि कैडर अधिकारी बल के भीतर बिताए बरसों का अनुभव लाते हैं।

परीक्षा के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल कैसे पढ़ें

CISF, GS पेपर III में “विभिन्न सुरक्षा बल, एजेंसियाँ और उनके अधिदेश” वाले हिस्से में आता है। प्रीलिम्स के लिए परखने लायक परत है अधिनियम और उसके संशोधनों की तारीखें।

मुख्य परीक्षा इस बल को सीधे नहीं, बल्कि आंतरिक सुरक्षा और नए खतरों वाले सवालों के जरिए परखती है। मुख्य परीक्षा 2023, GS पेपर III में यह सवाल पूछा गया था: “सीमा पार बैठे हमारे विरोधियों द्वारा हथियार/गोला-बारूद, नशीले पदार्थ आदि पहुँचाने के लिए मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) का इस्तेमाल आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। इस खतरे से निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर टिप्पणी कीजिए।” 2026 में CISF को ड्रोन सुरक्षा की नोडल एजेंसी बनाया जाना ठीक वैसा तारीख वाला, ठोस तथ्य है जो ऐसे उत्तर को आम सूची से ऊपर उठा देता है। प्रीलिम्स की तरफ देखें, तो Anantam IAS का प्रीलिम्स प्रश्न बैंक, जिसमें 2013 से 2026 तक के 1,403 प्रश्न हैं, दिखाता है कि वैधानिक संस्थाओं पर कथन वाले सवाल कैसे बनाए जाते हैं।

इन सात तथ्यों को तब तक दोहराइए, जब तक ये बिना जोर लगाए याद न आने लगें:

जिन उलझनों को अलग रखना है, वे जोड़ों में आती हैं। पहली है 1968 बनाम 1969: अधिनियम 1968 का है, गठन 1969 का। दूसरी है 1999 बनाम 2009: पहले सलाह, और हथियारबंद जवान एक दशक बाद। तीसरी है CISF बनाम रेलवे सुरक्षा बल। दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा CISF करता है, लेकिन भारतीय रेल की सुरक्षा RPF करता है। RPF गृह मंत्रालय को नहीं, रेल मंत्रालय को जवाब देता है।

CISF को याद रखने का सबसे तेज तरीका है उसे उसके भाई-बहन बलों के सामने रखकर देखना। सीमा सुरक्षा बल सबसे साफ तुलना देता है: वही मंत्रालय, और उसी साल यानी 1968 का अधिनियम, लेकिन रखवाली कारखाने की नहीं, सरहद की।

बलमंत्रालयकानूनकिसकी सुरक्षा करता है
CISFगृह मंत्रालयCISF अधिनियम, 1968अहम प्रतिष्ठान, हवाई अड्डे, दिल्ली मेट्रो और संसद
CRPFगृह मंत्रालयCRPF अधिनियम, 1949आंतरिक सुरक्षा और राज्य पुलिस की मदद
BSFगृह मंत्रालयBSF अधिनियम, 1968भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमाएँ
NSGगृह मंत्रालयNSG अधिनियम, 1986आतंकवाद-रोधी और अपहरण-रोधी अभियान
RPFरेल मंत्रालयRPF अधिनियम, 1957रेलवे की संपत्ति और यात्री

CISF छोटा विषय है, लेकिन सटीकता का पूरा इनाम देता है। उत्तर में “CISF हवाई अड्डों की सुरक्षा करता है” लिख देने से ज्यादा अंक नहीं मिलते। लेकिन अगर आप दिखाते हैं कि दो संशोधनों ने सार्वजनिक क्षेत्र के एक गार्ड बल को पैसे लेकर सेवा देने वाली राष्ट्रीय सेवा में बदल दिया, और अब बंदरगाह और ड्रोन उसका अगला बोझ हैं, तो साफ दिखता है कि आप समझते हैं। यानी आप समझते हैं कि भारत हर चूक के बाद अपनी सुरक्षा संस्थाएँ कैसे खड़ी करता है।

सामान्य प्रश्न

CISF का फुल फॉर्म क्या है?

CISF का पूरा नाम Central Industrial Security Force है, यानी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल। यह गृह मंत्रालय के अधीन एक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है। इसे CISF अधिनियम, 1968 से बनाया गया, ताकि यह औद्योगिक उपक्रमों और दूसरे अहम प्रतिष्ठानों की रक्षा करे।

CISF की स्थापना कब हुई?

संसद ने CISF अधिनियम 1968 में पास किया, और यह अधिनियम 10 मार्च 1969 को लागू किया गया। बल इसी तारीख को अपना गठन मानता है। इसीलिए पाठ्यपुस्तकों में दोनों साल दिखते हैं। मार्च 2026 का स्थापना दिवस समारोह 57वाँ था।

क्या CISF एक सशस्त्र बल है?

हाँ। 1983 के एक संशोधन ने, जो 15 जून 1983 से लागू हुआ, CISF को संघ का सशस्त्र बल बना दिया। उससे पहले यह सार्वजनिक क्षेत्र के कारखानों में भेजे गए एक प्रशिक्षित सुरक्षा स्टाफ की तरह ज्यादा काम करता था।

क्या CISF सिर्फ हवाई अड्डों की सुरक्षा करता है?

नहीं। हवाई अड्डे इसका सबसे ज्यादा दिखने वाला काम हैं, और मार्च 2026 तक 70 हवाई अड्डे इसकी सुरक्षा में थे। लेकिन ये उन 361 अहम प्रतिष्ठानों का सिर्फ एक हिस्सा हैं जिनकी यह रक्षा करता है। यह दिल्ली मेट्रो और संसद भवन की सुरक्षा भी करता है। साथ ही यह एक फायर विंग चलाता है, जो 115 प्रतिष्ठानों को कवर करती है।

क्या निजी कंपनियाँ CISF सुरक्षा ले सकती हैं?

हाँ। 2009 के संशोधन के बाद से यह बल निजी और संयुक्त उद्यम वाले उपक्रमों में लागत की भरपाई के आधार पर तैनात हो सकता है, यानी जवानों का खर्च कंपनी उठाती है। 1999 के संशोधन के बाद से निजी कंपनियाँ सुरक्षा और फायर ऑडिट के लिए इसकी परामर्श सेवा भी ले सकती हैं।

संसद भवन की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसके पास है?

20 मई 2024 से संसद भवन परिसर की आतंकवाद-रोधी और तोड़फोड़-रोधी सुरक्षा CISF संभाल रहा है। 13 दिसंबर 2023 को दो घुसपैठियों के लोकसभा कक्ष में घुसने के बाद MHA ने यह काम उसे सौंपा।

CISF, CRPF से कैसे अलग है?

दोनों गृह मंत्रालय के अधीन केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल हैं, लेकिन इनके काम अलग हैं। CRPF आंतरिक सुरक्षा का मुख्य बल है, और राज्यों को कानून-व्यवस्था में मदद देता है। CISF हवाई अड्डों और औद्योगिक प्लांट जैसे तय प्रतिष्ठानों की रक्षा करता है। आम तौर पर इसका खर्च वह संगठन उठाता है जो इसे बुलाता है।

CISF का प्रमुख कौन होता है?

CISF का प्रमुख महानिदेशक होता है, जिसके पास CISF अधिनियम की धारा 7 के तहत बल की कमान होती है। CAPF (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 के तहत महानिदेशक का पद प्रतिनियुक्ति पर आए IPS अधिकारी से भरा जाता है।

अभ्यास प्रश्न

प्रीलिम्स MCQ

1. केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसका गठन 1969 में एक ऐसे अधिनियम के तहत हुआ, जिसे संसद ने 1968 में पास किया था।
2. यह 2009 के एक संशोधन के जरिए ही संघ का सशस्त्र बल बना।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

उत्तर: (a) 1968 का अधिनियम 10 मार्च 1969 को लागू हुआ। सशस्त्र बल का दर्जा 1983 के संशोधन से मिला, 2009 में नहीं।

2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. CISF अधिनियम में 1999 के संशोधन ने बल को निजी औद्योगिक प्रतिष्ठानों को सुरक्षा पर तकनीकी परामर्श देने के लायक बनाया।
2. 2009 के संशोधन ने निजी और संयुक्त उद्यम वाले उपक्रमों में CISF की तैनाती का रास्ता खोला, वह भी उनके लिए बिना किसी खर्च के।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

उत्तर: (a) निजी और संयुक्त उद्यम वाले उपक्रमों में तैनाती लागत की भरपाई के आधार पर होती है, इसलिए दूसरा कथन गलत है।

3. निम्नलिखित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में से किसके पास पूरी तरह विकसित फायर सर्विस विंग है?

उत्तर: (c) CISF की पहली फायर यूनिट 1970 में कोचीन के FACT में तैनात हुई, और अलग फायर कैडर 1991 में शुरू हुआ।

4. CISF ने मई 2024 में संसद भवन परिसर की सुरक्षा का पूरा जिम्मा किस घटना के बाद संभाला?

उत्तर: (b) 13 दिसंबर 2023 को दो घुसपैठिए दर्शक दीर्घा से लोकसभा कक्ष में घुस आए, और उसके बाद MHA ने परिसर CISF को सौंप दिया।

5. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. CISF रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करता है।
2. CISF उन बलों में से एक है जिनसे राष्ट्रीय आपदा मोचन बल अपनी बटालियनें लेता है।
3. CAPF (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 के तहत CISF में महानिदेशक का हर पद IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से भरा जाना जरूरी है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर: (b) CISF गृह मंत्रालय के अधीन काम करता है। बाकी दोनों कथन सही हैं।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

  1. CISF का गठन सार्वजनिक क्षेत्र के कारखानों की रखवाली के लिए हुआ था, लेकिन आज यह हवाई अड्डों और संसद की सुरक्षा करता है। इस विस्तार के पीछे के कानूनी बदलावों और सुरक्षा घटनाओं का परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
  2. 1999 में CISF को परामर्श की भूमिका दी गई, और 2009 में निजी और संयुक्त उद्यम वाले उपक्रमों के लिए तैनाती का रास्ता खुला। इन दोनों भूमिकाओं में अंतर स्पष्ट कीजिए। कोई निजी कंपनी इनमें से एक को दूसरी पर क्यों चुन सकती है? (10 अंक, 150 शब्द)
  3. सस्ते ड्रोनों ने अहम प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की समस्या को बदल दिया है। इस संदर्भ में CISF को ड्रोन सुरक्षा की नोडल एजेंसी बनाए जाने का मूल्यांकन कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
  4. CISF जैसे बलों में नेतृत्व और मनोबल के नजरिए से CAPF (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
  5. क्या हवाई अड्डों और बंदरगाहों, दोनों की सुरक्षा के लिए एक ही केंद्रीय बल सही मॉडल है, या इस काम के कुछ हिस्से विशेष एजेंसियों को सौंपे जाने चाहिए? चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)