Anantam IASHindi Note · 24 August 2026

ई-इनवॉइस पोर्टल लॉगिन: किसे रजिस्ट्रेशन कराना है, IRN कैसे बनता है और सीमाएँ

GST ई-इनवॉइस पोर्टल लॉगिन आसान भाषा में — ₹5 करोड़ की सीमा, einvoice.gst.gov.in और छह IRP का फ़र्क़, GST लॉगिन से रजिस्ट्रेशन, और IRN बनने की पूरी बात।

जिन कारोबारों का कुल कारोबार (टर्नओवर) ₹5 करोड़ या उससे ज़्यादा है, उन्हें अपनी B2B सप्लाई पर ई-इनवॉइस बनाना ज़रूरी है। लॉगिन किसी इनवॉइस रजिस्ट्रेशन पोर्टल (IRP) पर होता है — सबसे ज़्यादा इस्तेमाल NIC वाले पोर्टल einvoice1.gst.gov.in का होता है — और उसके लिए आपको अपने GSTIN पर अलग से लॉगिन बनाना पड़ता है। मुख्य साइट einvoice.gst.gov.in पर आप देख सकते हैं कि आपका GSTIN चालू है या नहीं, किसी भी ई-इनवॉइस को जाँच सकते हैं, और छहों मान्यता प्राप्त IRP की सूची पा सकते हैं। इस गाइड में यही है — किसे लॉगिन करना है, रजिस्ट्रेशन कैसे होता है, और इनवॉइस रेफरेंस नंबर (IRN) बनने के बाद क्या होता है।

ई-इनवॉइसिंग है क्या

ई-इनवॉइसिंग का मतलब यह नहीं कि आप सरकारी वेबसाइट पर जाकर बिल बनाएँगे। बिल आप अपने ही बिलिंग या अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर में बनाते रहेंगे — बस उसे IRP को भेजना पड़ेगा। IRP उसे जाँचता है, 64 अक्षरों का एक अलग IRN देता है, उस पर डिजिटल दस्तख़त करता है और एक QR कोड लौटाता है, जिसे बिल पर छापना ज़रूरी है। जिस बिल पर IRN होना चाहिए था और नहीं है, वह वैध टैक्स इनवॉइस माना ही नहीं जाएगा।

यही डेटा अपने आप GST सिस्टम में चला जाता है (GSTR-1 भर जाता है) और ई-वे बिल सिस्टम में भी। पूरी बात यही है — रिपोर्ट एक बार, काम कई।

ई-इनवॉइस किसे बनाना है: टर्नओवर की सीमा

ई-इनवॉइसिंग उन GST-रजिस्टर्ड कारोबारों पर लागू होती है जिनका कुल सालाना टर्नओवर (AATO) 2017-18 के बाद किसी भी वित्त वर्ष में ₹5 करोड़ से ऊपर गया हो। ₹5 करोड़ की यह सीमा 1 अगस्त 2023 से लागू है (CBIC अधिसूचना 10/2023–केंद्रीय कर) और जुलाई 2026 तक यही चल रही है। अपनी स्थिति einvoice.gst.gov.in पर “e-Invoice Enablement Status” वाली खोज से ख़ुद जाँच लें।

किस पर लागू होगा, इसकी मुख्य बातें:

पोर्टल: einvoice.gst.gov.in और IRP में फ़र्क़

दो तरह की वेबसाइटें इसमें आती हैं, और सबसे ज़्यादा गड़बड़ इन्हीं दोनों को आपस में मिला देने से होती है।

einvoice.gst.gov.in — यह साझा मुख्य पोर्टल है। यहाँ कोई बिल नहीं बनता। यहाँ आप देखते हैं कि आपका GSTIN चालू है या नहीं, किसी IRN या QR कोड को जाँचते हैं, ई-इनवॉइस का स्कीमा डाउनलोड करते हैं, और यहीं से IRP तक पहुँचते हैं। इस पर लॉगिन अपने GST पोर्टल के यूज़रनेम और पासवर्ड से होता है।

छह IRP — असली रजिस्ट्रेशन यहीं होता है। GSTN ने NIC के दो पोर्टल (einvoice1 और einvoice2) और चार निजी IRP — Cygnet, ClearTax (CTX), EY और IRIS — को मंज़ूरी दी है, और सबकी सूची मुख्य पोर्टल पर है। छहों के दिए IRN बराबर वैध हैं और करदाता के लिए मुफ़्त हैं। ज़्यादातर कारोबार NIC-IRP (einvoice1.gst.gov.in) ही इस्तेमाल करते हैं, जिसकी बात यह गाइड कर रही है।

NIC IRP पर रजिस्ट्रेशन और लॉगिन कैसे करें

आपका GST पोर्टल वाला लॉगिन einvoice1 पर सीधे नहीं चलता — वहाँ अपने GSTIN से जुड़ा अलग ई-इनवॉइस लॉगिन बनाना पड़ता है:

  1. einvoice1.gst.gov.in खोलिए और Registration → Portal Login पर जाइए।
  2. अपना GSTIN और कैप्चा डालिए। पोर्टल आपके कारोबार की जानकारी GST सिस्टम से ख़ुद उठा लेता है।
  3. GST में दर्ज मोबाइल या ईमेल पर आए OTP से पुष्टि कीजिए।
  4. यूज़रनेम और पासवर्ड बनाइए। यही आपका ई-इनवॉइस लॉगिन है।
  5. अगर आप पहले से ई-वे बिल पोर्टल पर रजिस्टर्ड हैं तो यह सब छोड़ दीजिए — वही ई-वे बिल वाला यूज़रनेम-पासवर्ड NIC के ई-इनवॉइस पोर्टल पर सीधे चल जाता है।

लॉगिन के बाद डैशबोर्ड पर ई-इनवॉइस बनाने (एक-एक करके या JSON से थोक में), IRN रद्द करने, MIS रिपोर्ट, और सॉफ़्टवेयर जोड़ने के लिए API/GSP रजिस्ट्रेशन के विकल्प मिलते हैं। शाखाओं के लिए अलग-अलग अधिकार देकर सब-यूज़र भी बनाए जा सकते हैं।

IRN कैसे बनता है: पूरा तरीक़ा

  1. बिल अपने बिलिंग सॉफ़्टवेयर में हमेशा की तरह बनाइए।
  2. उसे IRP को भेजिए — सीधे API जोड़कर, अपने अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर में लगे कनेक्टर से, थोक JSON अपलोड टूल से, या पोर्टल पर हाथ से भरकर।
  3. IRP डेटा जाँचता है (GSTIN, बिल दोबारा तो नहीं आया, स्कीमा सही है या नहीं) और दस्तख़त किया हुआ ई-इनवॉइस IRN + QR कोड के साथ लौटा देता है, आम तौर पर कुछ ही सेकंड में।
  4. ख़रीदार को जो बिल दे रहे हैं, उस पर QR कोड और IRN छापिए।
  5. यह डेटा आपके GSTR-1 में अपने आप भर जाता है; रिटर्न भरते समय GST पोर्टल पर इसे जाँच लीजिए।

IRN बनने के 24 घंटे के भीतर उसे रद्द किया जा सकता है (बशर्ते उस पर कोई चालू ई-वे बिल न हो)। 24 घंटे बाद सुधार सिर्फ़ क्रेडिट या डेबिट नोट से ही हो सकता है।

ई-इनवॉइस और ई-वे बिल

दोनों जुड़े हुए हैं, पर सवाल अलग-अलग हैं — ई-इनवॉइस *बिल* को सही ठहराता है; ई-वे बिल *माल की आवाजाही* की इजाज़त देता है।

पहलूई-इनवॉइस (IRN)ई-वे बिल
मक़सदB2B बिल को GST सिस्टम से प्रमाणित करानामाल की खेप की ढुलाई की इजाज़त देना
सीमाAATO ₹5 करोड़ से ऊपर (बेचने वाले की तरफ़)खेप की क़ीमत ₹50,000 से ऊपर (राज्यों में थोड़ा फ़र्क़)
किस पर लागूB2B बिल, निर्यात, क्रेडिट-डेबिट नोट — सामान और सेवा दोनोंसिर्फ़ माल की आवाजाही
पोर्टलIRP (einvoice1.gst.gov.in वगैरह)ewaybill.gst.gov.in (ewaybillgst.gov.in)
वैधताएक बार जारी होने पर हमेशा के लिए; 24 घंटे में रद्द हो सकता हैदूरी के हिसाब से वैधता (बढ़ाई जा सकती है)
आपस में जोड़IRN के डेटा से ई-वे बिल का पार्ट-A अपने आप बन सकता हैIRN के साथ एक ही बार में बनाया जा सकता है

सिर्फ़ सेवाएँ देने वाले जिस कारोबार का टर्नओवर ₹5 करोड़ से ऊपर है, उसे ई-इनवॉइस चाहिए पर ई-वे बिल शायद कभी न चाहिए; और ₹5 करोड़ से नीचे के छोटे व्यापारी को ई-वे बिल चाहिए, ई-इनवॉइस नहीं।

फ़ीस, सीमाएँ और समय: एक नज़र में

बातब्योरा
टर्नओवर की सीमा2017-18 के बाद किसी भी वित्त वर्ष में AATO ₹5 करोड़ से ऊपर (1 अगस्त 2023 से)
रजिस्ट्रेशन और IRN बनाने का ख़र्चछहों मान्यता प्राप्त IRP पर मुफ़्त
IRN रद्द करने की मोहलत24 घंटे
रिपोर्ट करने की मोहलत (AATO ₹10 करोड़ या ऊपर)बिल की तारीख़ से 30 दिन के भीतर (GSTN की सलाह, 1 अप्रैल 2025 से)
कौन-से दस्तावेज़ आते हैंB2B बिल, निर्यात, क्रेडिट नोट, डेबिट नोट
क्या नहीं आताB2C बिल, छूट वाली इकाइयाँ (बैंक, बीमा कंपनियाँ, NBFC, माल ढुलाई एजेंसी, यात्री परिवहन, SEZ यूनिट)
ई-इनवॉइस न बनाने पर जुर्मानाबिल अवैध माना जाएगा; GST क़ानून के तहत हर बिल पर ₹10,000 तक जुर्माना

सरकारी ख़रीदारों को माल बेचने वालों को यह ध्यान रखना चाहिए कि GeM पोर्टल पर बिलिंग का अपना अलग तरीक़ा है — पर अगर आपका टर्नओवर सीमा पार करता है तो GST वाली ई-इनवॉइस की ज़िम्मेदारी उसके ऊपर से लागू रहती है।

सामान्य प्रश्न

ई-इनवॉइस पोर्टल का लॉगिन क्या है?

मुख्य पोर्टल einvoice.gst.gov.in पर आप अपने आम GST पोर्टल यूज़रनेम और पासवर्ड से लॉगिन करते हैं। NIC वाले IRP (einvoice1.gst.gov.in) पर वह अलग ई-इनवॉइस यूज़रनेम चलता है जो आपने पहली बार रजिस्ट्रेशन के समय बनाया था — या आपका पुराना ई-वे बिल पोर्टल वाला लॉगिन, जो वैसे का वैसा चल जाता है।

ई-इनवॉइस के लिए अभी टर्नओवर की सीमा क्या है?

₹5 करोड़ का कुल सालाना टर्नओवर, जो 1 अगस्त 2023 से लागू है और जुलाई 2026 तक वैसा ही है। 2017-18 के बाद किसी भी वित्त वर्ष में यह सीमा पार की, तो आपकी B2B सप्लाई पर ई-इनवॉइसिंग ज़रूरी हो जाती है।

क्या B2C बिक्री पर भी ई-इनवॉइस चाहिए?

नहीं। ई-इनवॉइसिंग में B2B बिल, निर्यात और क्रेडिट-डेबिट नोट आते हैं। बड़े B2C बिलों पर ₹500 करोड़ से ऊपर के कारोबारों को डायनैमिक QR कोड छापना पड़ता है, पर वह अलग नियम है — B2C के लिए कोई IRN नहीं बनता।

क्या बिना सॉफ़्टवेयर के मुफ़्त में ई-इनवॉइस बन सकता है?

हाँ। NIC के IRP पर हाथ से भरने की और थोक JSON अपलोड की मुफ़्त सुविधा है, और NIC एक मुफ़्त ऑफ़लाइन टूल भी देता है। ज़्यादातर अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर सीधे किसी IRP से जुड़ जाते हैं, जिससे IRN अपने आप आपके बिल में आ जाता है।

ई-इनवॉइस बनाना भूल गए तो क्या होगा?

वह दस्तावेज़ वैध टैक्स इनवॉइस नहीं रहेगा, आपके ख़रीदार का इनपुट टैक्स क्रेडिट ख़तरे में पड़ जाएगा, और जुर्माना लगेगा (हर बिल पर ₹10,000 तक)। अगर आपका AATO ₹10 करोड़ या उससे ज़्यादा है तो IRP 30 दिन से पुराने बिल भी नहीं लेगा, यानी पीछे की तारीख़ में रिपोर्ट करने की एक पक्की सीमा है।

कैसे पता करें कि मेरे GSTIN पर ई-इनवॉइसिंग लागू है या नहीं?

einvoice.gst.gov.in पर “e-Invoice Enablement Status” वाली खोज इस्तेमाल कीजिए। GST रिटर्न के डेटा से यह अपने आप चालू हो जाता है; अगर आपने ₹5 करोड़ पार कर लिया है पर चालू नहीं दिख रहा, तो उसी पोर्टल पर ख़ुद चालू कर सकते हैं।

क्या ई-इनवॉइस रद्द या ठीक किया जा सकता है?

उसमें सुधार नहीं हो सकता। बनने के 24 घंटे के भीतर उसे IRP पर रद्द किया जा सकता है, उसके बाद सुधार सिर्फ़ क्रेडिट या डेबिट नोट से होता है, जिन्हें आप अपने रिटर्न में दिखाते हैं।