संसद की गिरावट: कम बैठकें, कम जाँच
लोक सभा की बैठकें, समिति को भेजना, धन विधेयक वाला रास्ता और बजट गिलोटिन के आँकड़ों से संसद की विचार-विमर्श वाली गिरावट और सुधार समझें।
जो संसद कम बैठती है, कम बहस करती है और विधेयकों को जाँच के बिना पारित कर देती है, वह मज़बूत नहीं, चुप हो जाती है। बजट सत्र 2026 में यह चुप्पी साफ़ दिखी। PRS Legislative Research ने दर्ज किया कि केंद्रीय बजट का 77% “गिलोटिन” (guillotine) हो गया, यानी सदन में एक मिनट की चर्चा के बिना पारित। सत्र 3 अतिरिक्त दिन बढ़ा, ताकि सरकार 3 संवैधानिक और चुनावी विधेयक पेश कर पारित करा सके। तीनों पर कुल बहस 2 दिनों में 21 घंटे 28 मिनट चली।
ख़बर के नीचे धीमी कहानी है। 70 साल में संसद कम बैठी, कम क़ानून जाँच के लिए भेजे गए और ज़्यादा क़ानून जल्दबाज़ी में पारित हुए। क़ानून बनाने की संख्या बनी रही, जाँच घटी। संविधान ने जाँच माँगी थी, सिर्फ़ संख्या नहीं।
मुद्दा क्या है?
संसद काम करना बंद नहीं हुई। उसका विचार-विमर्श वाला काम, यानी कार्यपालिका के प्रस्ताव की धीमी, सार्वजनिक और दो तरफ़ से जाँच, पतला हुआ; आउटपुट वाला काम बना रहा। दोनों अलग हैं।
बैठक का दिन वह दिन है जब सदन काम करता है। प्रश्न, बहस और वोट उसी दिन हो सकते हैं।
प्रश्नकाल (Question Hour) सामान्य बैठक का पहला घंटा है, जब मंत्री अपने विभाग के प्रश्नों का रिकॉर्ड पर जवाब देते हैं। साधारण सांसद का सीधा जवाबदेही वाला औज़ार है।
विभागीय स्थायी समितियाँ, DRSCs, 24 स्थायी पैनल हैं। मंत्रालय समूहों के विधेयक, बजट और नीति को धारा-दर-धारा जाँचती हैं, सब दलों के सांसद, विशेषज्ञ और हफ़्तों के काम के साथ। समिति को भेजना अनिवार्य नहीं; लोक सभा अध्यक्ष या राज्य सभा सभापति, आम तौर पर मंत्रालय की सिफ़ारिश पर फ़ैसला करते हैं। गिरावट एक चुनाव है।
धन विधेयक, अनुच्छेद 110, केवल कर, सरकारी उधार या संचित निधि से ख़र्च से जुड़ा विधेयक है। राज्य सभा संशोधन या अस्वीकार नहीं कर सकती, केवल सिफ़ारिशें देती है जिन्हें लोक सभा नज़रअंदाज़ कर सकती है। अध्यक्ष का प्रमाणन ऊपरी सदन को लगभग बंद कर देता है।
गिलोटिन (guillotine) में बजट का समय ख़त्म होने पर बची हुई अनुदान माँगें एक वोट में, बिना चर्चा, पारित हो जाती हैं।
अनुच्छेद 123 का अध्यादेश संसद सत्र में न हो तो मंत्रिमंडल की सलाह पर राष्ट्रपति जारी करते हैं। क़ानून जैसा बल है, दोबारा बैठक के 6 हफ़्ते में मंज़ूरी न मिले तो ख़त्म। आपात औज़ार का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल संसद के इर्द-गिर्द क़ानून बनाना है।
गिरावट की कहानी में ये सभी औज़ार साथ कमज़ोर हुए।
आँकड़े क्या बताते हैं?
PRS और लोक सभा रिकॉर्ड के मुताबिक पहली लोक सभा ने 1950 के दशक में औसत 135 दिन/वर्ष बैठकर काम किया; 1950 और 1956 में 150 से ज़्यादा। दूसरी-तीसरी करीब 116–117। 10वीं करीब 93, 14वीं 66, 15वीं 71, 16वीं 66 और 2019–24 की 17वीं लोक सभा केवल 55 दिन/वर्ष, पूरे कार्यकाल वाले सदन का सबसे कम। अब पहले दशक के करीब 40% दिन।
17वीं लोक सभा में 5 साल में 274 बैठकें। इससे कम केवल 4 सदन, सभी जल्दी भंग। कोविड वाले 2020 में 33 दिन, लेकिन रुझान ढाँचे का है। 15 सत्रों में 11 जल्दी स्थगित, 40 तय बैठकें, 13%, नहीं हुईं। UK, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया करीब 100–150 दिन/वर्ष बैठते हैं।
समिति को भेजना 14वीं लोक सभा में करीब 60%, 15वीं में 71%, 16वीं में 26–28% और 17वीं में केवल 16%। एक दशक में 10 में 7 से 10 में 2 से कम विधेयक जाँच को गए।


17वीं लोक सभा ने नियमित वित्त और विनियोग विधेयक छोड़कर 179 विधेयक पारित किए। 58% पेश होने के 2 हफ़्ते में, 35% लोक सभा में एक घंटे से कम बहस, राज्य सभा में 34%। Jammu and Kashmir Reorganisation Bill 2019 और Women’s Reservation Bill 2023 पेश होने के 2 दिनों में पारित। दर्ज मतदान केवल करीब 9% विधेयकों पर।
बजट सत्र 2026 में 77% केंद्रीय बजट गिलोटिन हुआ। 5 सूचीबद्ध मंत्रालयों में कृषि और रेलवे पर चर्चा हुई; गृह, विदेश और बिजली नहीं। पारित विधेयकों में केवल 1 समिति-जाँचा। 12 बैठक दिनों पर लोक सभा का प्रश्नकाल 15 मिनट से कम। 17वीं लोक सभा में प्रश्नकाल तय समय का लोक सभा 60%, राज्य सभा 52%; मौखिक सूची वाले प्रश्नों में लोक सभा फ़्लोर पर केवल 24% का जवाब मिला।
पक्ष: संसद अब भी काम करती है
संस्था टूटी कहने से पहले दूसरा पक्ष रखें।
17वीं लोक सभा के 179 विधेयकों में Women’s Reservation Act 2023, 3 Labour Codes, Digital Personal Data Protection Act 2023 और औपनिवेशिक दंड, प्रक्रिया, साक्ष्य क़ानूनों की जगह लेने वाले 3 आपराधिक संहिताएँ शामिल हैं। लकवाग्रस्त निकाय इतना क़ानून नहीं बनाती।
3 वित्तीय समितियों और 24 DRSCs ने करीब 1,700 बैठकें और 1,280 रिपोर्ट दीं। डेटा सुरक्षा विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति ने 2 साल से ज़्यादा में 78 बैठकें कीं। कार्यशाला बंद नहीं, कम इस्तेमाल होती है।
राजनीतिक इच्छा पर संसद सख़्त बैठती है। शीतकालीन सत्र 2025 दोनों सदनों में 100% से ज़्यादा उत्पादकता, अतिरिक्त घंटे, 40% से ज़्यादा समय बहस। बजट सत्र 2026 क़ानून के लिए 3 दिन बढ़ा।
जवाबदेही काटती भी है। अगस्त 2023 अविश्वास प्रस्ताव 20 घंटे बहस। बजट सत्र 2026 में सरकार का प्रमुख Constitution (131st Amendment) Bill 298–230 से हारा। गिरावट आदत और प्रक्रिया में है, पूरा ढहना नहीं।
विपक्ष: जाँच सच में घटी है
आउटपुट क़ानून की मात्रा बताता है, जाँच नहीं। रिकॉर्ड कमज़ोर है।
55 दिन/वर्ष, समिति को भेजना 16%, एक-तिहाई विधेयक एक घंटे से कम बहस। 179 विधेयक प्रभावशाली लगते हैं, पर 84% धारा-दर-धारा दलों-पार जाँच से नहीं गुज़रे। जाँच के बिना मात्रा।
अनुच्छेद 110 वाला धन विधेयक का रास्ता राज्य सभा को बाईपास करता है। K.S. Puttaswamy v Union of India (2018) में 5 न्यायाधीशों की पीठ ने 4–1 से Aadhaar Act को धन विधेयक माना; Justice D.Y. Chandrachud ने “संविधान पर धोखा” कहा। Rojer Mathew v South Indian Bank (2019) में दूसरी 5 न्यायाधीशों की पीठ ने आधार वाली दलील असंतोषजनक मानी और Finance Act 2017 की धन विधेयक वैधता को बड़ी 7 न्यायाधीशों की पीठ भेजा। संदर्भ अब भी लंबित है।
बाधा और निलंबन भी भीतर से खोखला करते हैं। 17वीं लोक सभा कार्यकाल उत्पादकता लोक सभा 88%, राज्य सभा 73%, लेकिन शीत 2024 में 52% और 39%। दिसंबर 2023 सुरक्षा भंग के बाद 146 विपक्षी सांसद निलंबित, भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा। विपक्षी बेंचें लगभग खाली रहते 3 आपराधिक संहिताओं समेत क़ानून पारित हुए। एक तरफ़ हटाकर बहस जाँच नहीं।
अनुच्छेद 93 का उपाध्यक्ष 2019 से खाली, पहली बार पूरे लोक सभा कार्यकाल की रिक्ति। 17वीं लोक सभा में 729 निजी सदस्य विधेयक पेश, केवल 2 पर चर्चा। 16वीं और 17वीं लोक सभा में कोई स्थगन प्रस्ताव नहीं। कार्यपालिका रोकने वाले औज़ार बिना इस्तेमाल के जंग खा गए।

गहरी ढाँचे की समझ
पैटर्न एक सरकार नहीं, आत्मविश्वासी कार्यपालिका और कार्यपालिका-नियंत्रित कैलेंडर वाले वेस्टमिंस्टर शैली तंत्र का ढाँचागत खिसकाव है।
सरकार तय करती है संसद कब, कितने समय और किस एजेंडे पर बैठे। संविधान केवल 2 सत्रों के बीच अधिकतम 6 महीने कहता है। जाँच का मुख्य चर उसी कार्यपालिका के हाथ है जिसे जाँचना है।
मज़बूत लोक सभा बहुमत में नतीजा पहले से तय होता है। बहस और समिति को भेजना रगड़ लगते हैं। भेजना समितियों के नाकाम होने से नहीं, वैकल्पिक होने और बहुमत के छोड़ देने से गिरा। तुलनात्मक राजनीति का “विधायिकाओं की गिरावट” वाला दावा यही है: पेशेवर कार्यपालिकाएँ और मज़बूत दल व्हिप (whip) विधायिका को क़ानून बनाने वाले से क़ानून पक्का करने वाले में बदल देते हैं।
धन विधेयक वाला रास्ता क़ानूनी शक्ल में वही खिसकाव है: असली अनुच्छेद 110 को तय गली से थोड़ा बाहर इस्तेमाल कर राज्य सभा का वीटो हटता है। अध्यक्ष का प्रमाणन लगभग चुनौती से बाहर और न्यायपालिका धीमी/बँटी है। लंबित Rojer Mathew संदर्भ तय करेगा अदालत प्रक्रिया कितनी देखेगी।
यह तख्तापलट या नाटकीय टूटन नहीं। संसद बैठती और क़ानून पारित करती दिखती है। घिसाव जोड़कर बनता है: कम दिन, छोड़ा गया भेजना, साधारण की जगह धन विधेयक। हर कदम बचाव योग्य, जोड़ में विचार-विमर्श की ताक़त चुपचाप कार्यपालिका को चली जाती है।
क्या किया जाना चाहिए?
“ज़्यादा बहस” नहीं, 6 नियम-स्तर के उपाय चाहिए।
- बैठकों का क़ानूनी फ़र्श। NCRWC 2002 ने लोक सभा न्यूनतम 120 दिन/वर्ष और राज्य सभा 100 सुझाए। पहले से बाध्य वार्षिक कैलेंडर कार्यपालिका का समय नियंत्रण हटाए।
- समिति को भेजना डिफ़ॉल्ट। हर गैर-जरूरी विधेयक अपने आप DRSC जाए; छूट पर अध्यक्ष लिखित कारण दे। असली जरूरी तेज़ रास्ता बना रहे, 84% जाँच-छोड़ न हो।
- धन विधेयक वाले रास्ते पर बाड़। Rojer Mathew 7 न्यायाधीशों का फैसला न्यायिक समीक्षा और अनुच्छेद 110 की सीमा तय करे। गैर-वित्तीय क़ानून धन विधेयक बनकर राज्य सभा बाईपास न करे।
- प्रश्नकाल की घेराबंदी, नियमित गिलोटिन ख़त्म। हल्के में रद्द न हो; अनुदान माँगों के वोट से पहले न्यूनतम बहस हो। 77% बिना चर्चा बजट मंज़ूरी नहीं, दर्ज कर लेना है।
- बाधा-रोधी नियम + गारंटीशुदा विपक्षी समय। क्रमबद्ध दंड के साथ विपक्ष-नेतृत्व वाले दिन और कार्य सलाहकार समिति का कैलेंडर। आवाज़ बिना अनुशासन दबाना लगेगा; 146 सांसदों का निलंबन उसी नाकामी का नतीजा है।
- संवैधानिक पद और सोए औज़ार जगाएँ। अनुच्छेद 93 का उपाध्यक्ष चुना जाए; निजी सदस्य विधेयक और स्थगन प्रस्ताव असल इस्तेमाल में आएँ।
ये जवाबदेही बढ़ाते हैं, जायज़ सरकारी क़ानून नहीं घटाते। काफ़ी बैठकें, जाँच और कोई प्रक्रिया वाला बाईपास न हो, तो जनता का भरोसा बनेगा।
मुख्य परीक्षा उत्तर के लिए
ऊँचे मूल्य का GS2 विषय: संसद का ढाँचा, कामकाज, कार्य; शक्तियों का बँटवारा; कार्यपालिका की जवाबदेही; PRS जैसी नागरिक संस्थाएँ।
GS पत्र मैपिंग: संसद और राज्य विधायिकाएँ; शक्तियों का बँटवारा; संवैधानिक पद; विधायी प्रक्रिया और जाँच।
PSIR प्रासंगिकता: संसद का कामकाज, कार्यपालिका-विधायिका संबंध, विधायिकाओं की गिरावट; प्रतिनिधित्व, विचार-विमर्श वाली लोकतंत्र, वेस्टमिंस्टर का पतला पड़ना, कैबिनेट-करण, संवैधानिकता बनाम बहुमतवाद।
संभावित प्रश्न:
- “संसद का विचार-विमर्श वाला काम कमज़ोर हुआ, क़ानून का आउटपुट बना रहा।” बैठकों और समिति के आँकड़ों से आलोचनात्मक जाँच करें।
- अनुच्छेद 110 वाला धन विधेयक का रास्ता द्विसदनीय जाँच बाईपास करता है। Puttaswamy 2018 और Rojer Mathew 2019 के आधार पर चर्चा करें।
- कम बैठक, कम जाँच और जल्दबाज़ी वाले क़ानून से विधायिका कार्यपालिका को ताक़त सौंपती है। कारण और सुधार बताएँ।
उद्धरण योग्य आँकड़े:
- बैठकें पहली लोक सभा करीब 135/वर्ष से 17वीं में 55, पूरे कार्यकाल का सबसे कम।
- समिति को भेजना 15वीं में 71%, 16वीं 26–28%, 17वीं 16%।
- 17वीं लोक सभा में 35% विधेयक एक घंटे से कम बहस; 58% पेश होने के 2 हफ़्ते में।
- बजट सत्र 2026 में केंद्रीय बजट का 77% गिलोटिन।
- दिसंबर 2023 में 146 सांसद निलंबित, इतिहास का सबसे बड़ा।
- Finance Act 2017 की धन विधेयक वैधता 7 न्यायाधीशों की पीठ में लंबित।
- 2019 से कोई उपाध्यक्ष नहीं, अनुच्छेद 93 पद की पहली पूरे कार्यकाल वाली रिक्ति।
- दूसरा पक्ष: 179 विधेयक, करीब 1,700 समिति बैठकें, 131वाँ संशोधन 298–230 से हारा।
मुख्य शब्द: विधायी जाँच, विचार-विमर्श वाली लोकतंत्र, कार्यपालिका की जवाबदेही, समिति को भेजना, धन विधेयक वाला रास्ता, बजट गिलोटिन, रोक और संतुलन।
पाठ्यक्रम: संसद, शक्तियों का बँटवारा, संवैधानिक पद, विधायी प्रक्रिया, न्यायिक समीक्षा, जवाबदेही में थिंक टैंक।
निष्कर्ष: संसद क़ानूनों की गिनती से नहीं, शासित को बाँधने से पहले जाँच से आँकी जाती है। जाँच के बिना आउटपुट विधायिका की शक्ल है, काम नहीं।
उत्तर कैसे बनाएँ?
शुरुआत में आउटपुट बचा बनाम जाँच गिरती। दूसरी पंक्ति में बैठक का दिन और समिति को भेजना परिभाषित करें।
135→55 दिन, 71→16% भेजना, 35% एक घंटे से कम विधेयक और मतलब: जाँच छूटी, क़ानून बनना नहीं रुका।
आलोचना से पहले 179 विधेयक, 1,700 बैठकें और हारा 131वाँ संशोधन वाला दूसरा पक्ष दें। पक्षपात नहीं, फ़ैसला लगेगा।
सुधार बाँटें: बैठकों का फ़र्श, डिफ़ॉल्ट भेजना, अनुच्छेद 110 की सीमा, सुरक्षित प्रश्नकाल, बाधा नियम + विपक्षी समय, संवैधानिक पद।
ख़बर नहीं ढाँचे के बिंदु पर बंद करें: जाँच सौंप दी तो कार्यपालिका को ताक़त अपने आप सौंप दी।
इन गलतियों से बचें
- आउटपुट को सेहत न मानें। 179 विधेयक, पर ज़्यादातर बिना जाँच।
- एक तरफ़ न हों। 1,700 बैठकें और 131वाँ हार स्वीकारें।
- आँकड़े न ढेर करें। बैठकों का गिरना, भेजने का ढहना, गिलोटिन और नतीजा।
- एक दल की कहानी न बनाएँ। कार्यपालिका का कैलेंडर नियंत्रण और मज़बूत बहुमत वाला ढाँचा रखें।
- सजावट पर ख़त्म न करें। विधायिका का मूल विचार-विमर्श सिद्धांत दें।
उत्तर का छोटा ढाँचा
- परिचय: आउटपुट बचा, जाँच गिरती; बैठक और भेजना परिभाषित।
- प्रमाण: 3 स्रोत वाले आँकड़े + जवाबदेही का नतीजा।
- तर्क: अभी भी काम करती है, फिर घिसाव का पक्ष।
- निदान: कार्यपालिका का कैलेंडर, बहुमत की रगड़ वाली नज़र, धन विधेयक से वीटो हटाना।
- आगे: नियम, अध्यक्ष, अदालत, कार्य सलाहकार समिति सहित सुधार।
- निष्कर्ष: ठीक प्रश्न के अनुसार संतुलित पंक्ति।
आरेख या फ़्लोचार्ट
15 अंक वाले में कड़ी: कार्यपालिका का कैलेंडर → कम दिन → कम फ़्लोर समय → वैकल्पिक भेजना छूटा → जल्दबाज़ी/धन विधेयक → राज्य सभा/समितियाँ बाईपास → जवाबदेही कमज़ोर।
10 अंक वाले में: आउटपुट बचा बनाम जाँच गिरती, दो स्तंभों की तालिका।
नैतिकता और शासन का कोण
जाँच रगड़ नहीं, शासित को प्रतिनिधियों से बाध्य क़ानून जाँचने का तंत्र है। 77% बजट बिना चर्चा हो तो करदाता की आवाज़ खोती है।
“ज़्यादा बहस” नहीं; क़ानूनी दिन, डिफ़ॉल्ट भेजना, सुरक्षित प्रश्नकाल लिखें।
काम की पंक्ति: “ताक़त जायज़ है; जायज़ियत इस्तेमाल की प्रक्रिया पर निर्भर है।”
आँकड़े यंत्रवत कैसे न लगें?
135→55 दिन, 71→16% भेजना, दूसरे पक्ष में 179 विधेयक/1,700 बैठकें। एक रुझान, एक ढहना, एक उल्टा तथ्य।
आँकड़े के बाद मतलब दें: 16% भेजना यानी देश बाँधने वाले विधेयक बिना धारा जाँच।
PRS रिकॉर्ड, सर्वोच्च न्यायालय ने भेजा, NCRWC ने सुझाया जैसे साफ़ स्रोत भरोसा देते हैं।
बड़ी लेकिन बेकार पंक्ति को तथ्य, कारण, नतीजा या सुधार से बदलें।
सामान्य प्रश्न
क़ानून पारित होते हैं तो कम बैठकें समस्या क्यों?
बैठकें जवाबदेही का कच्चा माल हैं। प्रश्नकाल, बहस, समिति और वोट सदन की बैठक पर होते हैं। PRS के 135 से 55 दिनों में आउटपुट रहा, सार्वजनिक जाँच घटी।
धन विधेयक वाला रास्ता विवादित क्यों?
अनुच्छेद 110 धन विधेयक कर, उधार, ख़र्च तक है; राज्य सभा संशोधन/अस्वीकार नहीं करती। मूल क़ानून ऐसा वर्गीकृत हो तो ऊपरी सदन बाईपास। Puttaswamy 2018 आधार 4–1 कायम; Chandrachud असहमति। Rojer Mathew 2019 ने व्यापक मुद्दा 7 न्यायाधीशों की पीठ भेजा, लंबित।
गिरता भेजना मतलब समितियाँ ज़रूरी नहीं?
नहीं। DRSC धारा-दर-धारा दलों-पार जाँच करती हैं और 17वीं लोक सभा में करीब 1,700 बैठकें हुईं। भेजना 71% से 16% तंत्र के नाकाम होने से नहीं, मर्ज़ी वाले फ़ैसले और बहुमत के छोड़ देने से गिरा।
क्या गिरावट एक सरकार की ग़लती है?
दशकों और दलों में बैठकें गिरना ढाँचागत खिसकाव है: कार्यपालिका का कैलेंडर नियंत्रण और मज़बूत बहुमत। हाल के 16% भेजना, 77% गिलोटिन, 146 निलंबन से रफ़्तार दिखती है। इलाज संस्थाओं के नियम हैं।