Anantam IASHindi Note · 4 September 2026

PM-JAY आयुष्मान भारत: ₹5 लाख का स्वास्थ्य कवर, सूचीबद्ध अस्पताल और 70+ विस्तार

PM-JAY आयुष्मान भारत का डिज़ाइन, SECC-2011 से तय होने वाली हक़दारी, 1,961 प्रक्रियाएँ, अस्पतालों की सूची, धोखाधड़ी पर रोक, ABDM जुड़ाव और 70+ विस्तार — UPSC के लिए।

PM-JAY आयुष्मान भारत दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी पैसे से चलने वाली स्वास्थ्य आश्वासन योजना है। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, जो आयुष्मान भारत का बीमा वाला खंभा है, हर परिवार को साल में ₹5 लाख तक का कवर देती है — सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में दूसरे और तीसरे दर्जे के इलाज में भर्ती होने के लिए। PM-JAY आयुष्मान भारत 23 सितंबर 2018 को राँची से शुरू हुई और आबादी के सबसे नीचे के 40 प्रतिशत हिस्से से क़रीब 55 करोड़ लोगों को समेटती है — यानी आबादी के लिहाज़ से यह अमेरिका के ओबामाकेयर या जर्मनी की सरकारी स्वास्थ्य बीमा व्यवस्था से भी बड़ी है।

2018-19 के केंद्रीय बजट में घोषित आयुष्मान भारत कार्यक्रम के दो खंभों में से एक PM-JAY है। दूसरा खंभा है आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (पहले हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) का जाल, जो पूरी प्राथमिक चिकित्सा देता है। दोनों को इसलिए बनाया गया कि भारत में जेब से होने वाले इलाज ख़र्च का ज़िद्दी वक्र झुक सके — यह ख़र्च आज भी कुल स्वास्थ्य ख़र्च का क़रीब 47 प्रतिशत है। इस लेख में हम PM-JAY आयुष्मान भारत का डिज़ाइन, लाभार्थियों का आधार, अस्पतालों को सूची में लेने का तरीक़ा, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) से जुड़ाव, और सितंबर 2024 के आयुष्मान भारत 70+ विस्तार को देखेंगे।

शुरुआत कैसे हुई

PM-JAY आयुष्मान भारत ने पहले चल रही राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (RSBY) और वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा योजना की जगह ली और उन्हें अपने भीतर समेट लिया। 2008 में शुरू हुई RSBY ₹30,000 का कवर देती थी और उसकी दिक़्क़तें दर्ज हैं — लोगों को पता ही नहीं चलना, अस्पतालों का कम जुड़ना, निजी अस्पतालों में धोखाधड़ी, और तीसरे दर्जे के इलाज का ख़र्च उठा न पाना। PM-JAY ने कवर बढ़ाया, परिवार के आकार की सीमा हटाई, और तय पैकेज वाले बिना नक़दी के इलाज पर स्विच किया।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 ने इसका रणनीतिक ढाँचा तय किया। 2011 में के. श्रीनाथ रेड्डी की अध्यक्षता वाले सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज पर उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समूह ने ग़रीबों के लिए टैक्स के पैसे से चलने वाले आश्वासन की सिफ़ारिश की थी। नीति आयोग ने 2017-18 में इसका काम-काजी डिज़ाइन तैयार किया, और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) को लागू करने वाली एजेंसी के रूप में बनाया गया। योजना 23 सितंबर 2018 को प्रधानमंत्री ने शुरू की, और भुगतान उसी दिन से चालू हो गया।

PM-JAY आयुष्मान भारत में क्या-क्या शामिल है

PM-JAY आयुष्मान भारत बिना नक़दी और बिना काग़ज़ का दूसरे और तीसरे दर्जे के इलाज में भर्ती का आश्वासन है। हर लाभार्थी परिवार को साल में ₹5 लाख तक मिलते हैं, और परिवार में कितने लोग हैं, इसकी कोई सीमा नहीं। पहले से चली आ रही बीमारियाँ पहले ही दिन से शामिल हैं। न कोई नाम लिखवाने की फ़ीस है, न प्रीमियम, और न ही लाभार्थी को अपनी जेब से कुछ मिलाना पड़ता है।

इसमें 27 चिकित्सा विशेषज्ञताओं की 1,961 प्रक्रियाएँ आती हैं, जिनमें हृदय रोग, कैंसर, न्यूरोसर्जरी, बच्चों की सर्जरी, हड्डी रोग, मूत्र रोग, और जलने के इलाज शामिल हैं। भर्ती से तीन दिन पहले का ख़र्च और भर्ती के बाद 15 दिन तक जाँच व दवाओं का ख़र्च भी इसी में जुड़ता है। यह फ़ायदा पूरे देश में साथ चलता है — बिहार में पहचाना गया लाभार्थी तमिलनाडु के किसी सूचीबद्ध अस्पताल में भी इसका इस्तेमाल कर सकता है।

लाभार्थी कौन है?

PM-JAY आयुष्मान भारत में आवेदन नहीं करना पड़ता। हक़दारी अपने आप तय होती है — गाँवों के परिवारों के लिए सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना 2011 (SECC-2011) के वंचना मानकों से, और शहरी परिवारों के लिए काम-धंधे की श्रेणियों से। छह वंचना मानक ग्रामीण लाभार्थियों को पहचानते हैं — जैसे वे घर जिनमें 16 से 59 साल का कोई वयस्क नहीं है, हाथ से मैला ढोने वाले परिवार, वे भूमिहीन परिवार जिनकी बड़ी कमाई दिहाड़ी मज़दूरी से आती है, वग़ैरह। ग्यारह काम-धंधा श्रेणियाँ शहरी असंगठित मज़दूरों को समेटती हैं, जैसे कचरा बीनने वाले, भीख माँगने वाले, घरेलू कामगार, और निर्माण मज़दूर।

इसी आधार पर कई राज्यों ने दायरा बढ़ाया है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना अपने पैसे से ऊपर जोड़कर सारे राशन कार्ड धारकों को शामिल करते हैं। केरल ने PM-JAY को अपनी करुण्य आरोग्य सुरक्षा पधति के साथ जोड़ दिया है। फ़रवरी 2026 तक क़रीब 38 करोड़ आयुष्मान कार्ड बन चुके थे, शुरुआत से अब तक 9.3 करोड़ बार लोग अस्पताल में भर्ती हुए, और ₹1.32 लाख करोड़ के इलाज की मंज़ूरी दी जा चुकी है।

अस्पतालों को सूची में लेना

PM-JAY आयुष्मान भारत सूचीबद्ध अस्पतालों के जाल से चलती है — सरकारी भी, निजी भी। फ़रवरी 2026 तक इस जाल में क़रीब 32,000 अस्पताल थे, जिनमें लगभग 58 प्रतिशत सरकारी और 42 प्रतिशत निजी हैं। सूची में लेने का काम राज्य के स्तर पर होता है, और आधार होते हैं राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मानक — बिस्तरों की संख्या, स्टाफ़ के नियम, उपकरण, और मान्यता।

अस्पतालों को पहले से तय हेल्थ बेनिफ़िट पैकेज (HBP) की दर से पैसा मिलता है। HBP की सूची समय-समय पर बदलती रहती है — सबसे नई HBP 2.2 नवंबर 2024 में लागू हुई, जिसमें हृदय रोग और कैंसर की प्रक्रियाओं की दरें बदली गईं। दावे ऑनलाइन भेजे जाते हैं, राज्य स्वास्थ्य एजेंसियाँ (SHA) उन्हें निपटाती हैं, और भुगतान NHA के ट्रांज़ैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (TMS) से होता है। वित्त वर्ष 2024-25 में दावा निपटने में औसतन 14 दिन लगे।

धोखाधड़ी पर रोक

PM-JAY आयुष्मान भारत में सबसे ज़्यादा चर्चा धोखाधड़ी के ख़तरे की होती है। NHA की राष्ट्रीय धोखाधड़ी रोधी इकाई आँकड़ों के विश्लेषण से शक वाले दावों के पैटर्न पकड़ती है — हज़ारों मरीज़ों पर एक ही प्रक्रिया कोड, बेहद छोटा ठहराव और फिर दोबारा भर्ती, या पुरुष मरीज़ के नाम पर महिलाओं वाली प्रक्रिया का बिल। मार्च 2025 तक 1,500 से ज़्यादा अस्पताल धोखाधड़ी के चलते निलंबित या सूची से बाहर किए जा चुके थे, और ₹780 करोड़ की वसूली पूरी हो चुकी थी। स्वास्थ्य पर संसद की स्थायी समिति (2024) ने सूची से हटाए गए अस्पतालों का सार्वजनिक डैशबोर्ड बनाने की सिफ़ारिश की थी, जो अक्टूबर 2024 में लागू हो गया।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM)

PM-JAY आयुष्मान भारत का जुड़ाव आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से लगातार गहरा हो रहा है, जो 27 सितंबर 2021 को शुरू हुआ था। ABDM भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था की डिजिटल रीढ़ बनाता है, और उसका केंद्र है आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) — हर निवासी के लिए 14 अंकों की अलग स्वास्थ्य पहचान।

ABHA किसी व्यक्ति के अस्पतालों, लैब और दवा दुकानों में बने रिकॉर्ड को एक लंबी कड़ी में जोड़ देता है, और साझा करना मरीज़ की मंज़ूरी से ही होता है। हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल रजिस्ट्री, हेल्थ फ़ैसिलिटी रजिस्ट्री, और पर्सनल हेल्थ रिकॉर्ड्स सिस्टम ABDM के चार बुनियादी हिस्से हैं। फ़रवरी 2026 तक 70 करोड़ से ज़्यादा ABHA आईडी बन चुकी थीं, 53 करोड़ स्वास्थ्य रिकॉर्ड जुड़ चुके थे, और 4.6 लाख स्वास्थ्य केंद्र रजिस्ट्री में दर्ज थे।

ABDM में शामिल होना मर्ज़ी की बात है, और इसका डेटा ढाँचा DEPA फ़्रेमवर्क से निकले सहमति प्रबंधक (consent manager) मॉडल पर चलता है। आलोचक — ख़ासकर इंटरनेट फ़्रीडम फ़ाउंडेशन — यह उठाते रहे हैं कि स्वास्थ्य डेटा पर अलग से कोई क़ानून नहीं है, और आँकड़ों से निकाले गए निष्कर्षों के इस्तेमाल का ख़तरा बना रहता है।

आयुष्मान भारत 70+ विस्तार

11 सितंबर 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने PM-JAY आयुष्मान भारत का शुरुआत के बाद का सबसे बड़ा विस्तार मंज़ूर किया — 70 साल और उससे ऊपर के हर नागरिक को कवर, आमदनी चाहे जो भी हो। यह 29 अक्टूबर 2024 से लागू हुआ।

आयुष्मान भारत 70+ के तहत 70 से ऊपर के सारे बुज़ुर्गों को ₹5 लाख का परिवार फ़्लोटर कवर मिलता है, जो उनके घर के बाक़ी लोगों को मिलने वाले कवर से अलग है। इस नई श्रेणी में क़रीब 4.5 करोड़ परिवार और 6 करोड़ बुज़ुर्ग आते हैं। जिस बुज़ुर्ग का परिवार पहले से PM-JAY कार्ड रखता है, उसे 70+ का फ़ायदा ख़ास तौर पर उसी बुज़ुर्ग के लिए ₹5 लाख के अतिरिक्त टॉप-अप के रूप में मिलता है। और जहाँ परिवार वैसे हक़दार नहीं है, वहाँ अकेले बुज़ुर्ग को ₹5 लाख का कवर मिल जाता है।

70+ विस्तार का पूरा पैसा केंद्र देता है, और यह राज्यों की चल रही योजनाओं के ऊपर से लागू होता है। फ़रवरी 2026 तक क़रीब 1.2 करोड़ आयुष्मान वय वंदना कार्ड (बुज़ुर्गों के लिए बना नया कार्ड) जारी हो चुके थे। अकेले 70+ श्रेणी पर सालाना ख़र्च का अनुमान ₹3,437 करोड़ है।

70+ श्रेणी क्यों मायने रखती है

भारत तेज़ी से बूढ़ा हो रहा है — 60 साल से ऊपर की आबादी 2022 के 14.9 करोड़ से बढ़कर 2050 तक 34.7 करोड़ हो जाएगी। जेब से होने वाला इलाज ख़र्च बुज़ुर्ग उम्र में सबसे ज़्यादा होता है; LASI वेव-1 अध्ययन में पाया गया कि 25 प्रतिशत बुज़ुर्गों को एक ही बार अस्पताल में भर्ती होने के लिए उधार लेना पड़ा या सामान बेचना पड़ा। 70 से ऊपर सबको कवर देने से दोनों बातें सधती हैं — भारी ख़र्च की मार भी, और यह राजनीतिक सवाल भी कि पैसे वाले बुज़ुर्ग ही इकलौता ऐसा समूह थे जो ढाँचे के हिसाब से आयुष्मान भारत से बाहर रह जाते थे।

पैसे का ढाँचा

PM-JAY आयुष्मान भारत का ख़र्च केंद्र और राज्य मिलकर उठाते हैं — ज़्यादातर राज्यों में 60:40, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में 90:10, और बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा 100 प्रतिशत केंद्र से। केंद्रीय बजट 2025-26 में 70+ हिस्से को छोड़कर PM-JAY के लिए ₹9,406 करोड़ रखे गए, और आयुष्मान भारत 70+ के लिए अलग से ₹3,437 करोड़।

छह राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों का PM-JAY से रिश्ता अलग-अलग रहा है — ओडिशा (जो 2024 में जुड़ा), पश्चिम बंगाल, दिल्ली, तेलंगाना (2024 में जुड़ा), केरल (जो अपना अलग मॉडल चला रहा है), तमिलनाडु, गोवा, और कुछ और। 2026 तक पश्चिम बंगाल और दिल्ली को छोड़कर बाक़ी सारे राज्य औपचारिक रूप से इस योजना का हिस्सा हैं।

नतीजे और आलोचनाएँ

PM-JAY आयुष्मान भारत के मूल्यांकन इलाज तक पहुँच के मामले में काफ़ी हद तक सकारात्मक रहे हैं, और पैसे की सुरक्षा के मामले में मिले-जुले। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के एक अध्ययन (2023) में पाया गया कि SECC परिवारों में भारी इलाज ख़र्च का हिस्सा PM-JAY से पहले के 18 प्रतिशत से घटकर योजना में आने के बाद 11 प्रतिशत रह गया। लांसेट ग्लोबल हेल्थ के एक अध्ययन (2024) में तीन बड़े राज्यों के हक़दार परिवारों में तीसरे दर्जे के इलाज के इस्तेमाल में 21 प्रतिशत बढ़त मिली।

आलोचनाएँ तीन बातों पर टिकी हैं। पहली, कुछ विशेषज्ञताओं में पैकेज की दरें — ख़ासकर हृदय शल्य चिकित्सा और कैंसर में — निजी क्षेत्र के स्तर से नीचे हैं, जिससे बड़े निजी अस्पताल इसमें कम आते हैं। दूसरी, SECC-2011 का आधार पुराना पड़ चुका है, जिससे वे परिवार बाहर रह जाते हैं जो उसके बाद ग़रीब हुए। तीसरी, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के तहत प्राथमिक चिकित्सा 1.74 लाख केंद्रों तक फैल तो गई है, लेकिन गुणवत्ता और दवा लिखने के तौर-तरीक़े राज्य-दर-राज्य बहुत अलग हैं।

सामान्य प्रश्न

PM-JAY आयुष्मान भारत क्या है?

PM-JAY (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना) आयुष्मान भारत केंद्र की स्वास्थ्य आश्वासन योजना है, जो सूचीबद्ध अस्पतालों में दूसरे और तीसरे दर्जे के इलाज में भर्ती के लिए हर परिवार को साल में ₹5 लाख देती है। यह 23 सितंबर 2018 को शुरू हुई और क़रीब 55 करोड़ लाभार्थियों को समेटती है।

मैं कैसे देखूँ कि PM-JAY में मेरा हक़ बनता है या नहीं?

हक़दारी सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना 2011 से अपने आप तय होती है। आप pmjay.gov.in पर अपना मोबाइल नंबर और राशन कार्ड डालकर देख सकते हैं, या हेल्पलाइन 14555 पर फ़ोन कर सकते हैं। राज्य की स्वास्थ्य एजेंसियाँ आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए शिविर भी लगाती हैं।

PM-JAY और आयुष्मान भारत में क्या फ़र्क़ है?

आयुष्मान भारत पूरा छाता कार्यक्रम है, जिसके दो खंभे हैं — प्राथमिक चिकित्सा के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर, और दूसरे व तीसरे दर्जे के इलाज में भर्ती के लिए PM-JAY। PM-JAY आयुष्मान भारत का वह हिस्सा है जो बिना नक़दी वाला स्वास्थ्य बीमा देता है।

PM-JAY में कितनी प्रक्रियाएँ शामिल हैं?

हेल्थ बेनिफ़िट पैकेज में 27 चिकित्सा विशेषज्ञताओं की 1,961 प्रक्रियाएँ आती हैं, जिनमें हृदय शल्य चिकित्सा, कैंसर, न्यूरोसर्जरी, बच्चों का इलाज, और जलने का इलाज शामिल हैं। यह पैकेज राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण समय-समय पर बदलता रहता है।

आयुष्मान भारत 70+ क्या है?

आयुष्मान भारत 70+ सितंबर 2024 का वह विस्तार है, जो 70 साल और उससे ऊपर के हर भारतीय नागरिक को आमदनी देखे बिना साल में ₹5 लाख का स्वास्थ्य कवर देता है। यह फ़ायदा नए आयुष्मान वय वंदना कार्ड से मिलता है।

क्या निजी अस्पताल भी PM-JAY में हैं?

हाँ। PM-JAY आयुष्मान भारत के 32,000 सूचीबद्ध अस्पतालों में से क़रीब 42 प्रतिशत निजी हैं। उन्हें हेल्थ बेनिफ़िट पैकेज की तय दरों से पैसा मिलता है। धोखाधड़ी वाले दावों में शामिल पाए जाने पर अस्पतालों को सूची से बाहर किया जा सकता है।

ABHA क्या है और क्या यह ज़रूरी है?

ABHA (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत बनी 14 अंकों की अलग स्वास्थ्य पहचान है। यह आपकी मंज़ूरी से आपके स्वास्थ्य रिकॉर्ड को अलग-अलग अस्पतालों में जोड़ती है। यह मर्ज़ी की बात है, लेकिन PM-JAY के दावे निपटाने में काम आती है।

कौन-से राज्य PM-JAY आयुष्मान भारत में शामिल नहीं हैं?

फ़रवरी 2026 तक पश्चिम बंगाल और दिल्ली वे बड़े राज्य हैं जो PM-JAY औपचारिक रूप से लागू नहीं कर रहे। ओडिशा और तेलंगाना, जो पहले बाहर थे, 2024 में जुड़ गए। बाक़ी ज़्यादातर राज्य केंद्र के साथ 60:40 वाले पैसे के ढाँचे पर चलते हैं।