Anantam IASHindi Note · 4 September 2026

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY): कामयाबी और चुनौतियों का लेखा-जोखा

बिना जमा राशि के LPG कनेक्शन से लेकर 300 रुपये की सब्सिडी और रीफ़िल के आँकड़ों तक — PMUY 1.0 और 2.0 का ढाँचा, असर, दिक़्क़तें और आगे का रास्ता UPSC के लिहाज़ से।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) भारत सरकार की वह प्रमुख साफ़ रसोई ईंधन योजना है, जिसके तहत ग़रीबी रेखा से नीचे (BPL) वाले परिवारों की महिलाओं को बिना जमा राशि के LPG कनेक्शन दिए जाते हैं। इसे मई 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलिया (उत्तर प्रदेश) से शुरू किया था। अब तक योजना के तहत 10 करोड़ से ज़्यादा LPG कनेक्शन दिए जा चुके हैं और भारत में LPG की पहुँच क़रीब 62% (2016) से बढ़कर 99% से ऊपर पहुँच गई है — गाँवों में ऊर्जा की पहुँच के लिहाज़ से यह बहुत बड़ा बदलाव है। UPSC के लिए PMUY GS-II (कल्याणकारी योजना), GS-III (ऊर्जा सुरक्षा, समावेशी विकास) और GS-I (महिला सशक्तीकरण, जन स्वास्थ्य) — तीनों में काम आती है।

योजना का ढाँचा

बातब्योरा
शुरुआत का सालमई 2016 (PMUY 1.0); अगस्त 2021 (PMUY 2.0)
नोडल मंत्रालयपेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय
लाभार्थीBPL परिवार की बालिग़ महिला सदस्य
शुरुआती सब्सिडीहर नए कनेक्शन पर 1,600 रुपये
PMUY 2.0 में जुड़ी बातेंप्रवासी अपने घोषणापत्र से; पहली रीफ़िल और चूल्हा मुफ़्त
अभी की पहुँच (2024)10 करोड़ से ज़्यादा कनेक्शन
LPG की पहुँच (2024)क़रीब 99% परिवारों तक

ताज़ा तस्वीर: 2024 तक PMUY के तहत 10 करोड़ से ज़्यादा कनेक्शन दिए जा चुके थे (PMUY 1.0 का मूल लक्ष्य 8 करोड़ था, जो मार्च 2020 में पूरा हुआ; PMUY 2.0 में 1.6 करोड़ और जुड़े; आगे और बढ़ाने का लक्ष्य है)।

PMUY की ज़रूरत क्यों पड़ी

2016 से पहले भारत के क़रीब 38% परिवार — ज़्यादातर गाँवों में — खाना पकाने के लिए ठोस ईंधन (लकड़ी, गोबर के उपले, मिट्टी का तेल, फ़सल के अवशेष) पर टिके थे। इसका नुक़सान गहरा था:

PMUY 1.0 की बड़ी कामयाबियाँ

LPG लगभग हर घर तक

2016 के 62% से बढ़कर 2022-24 तक 99-100% तक पहुँच — साफ़ ऊर्जा का इतनी तेज़ी से फैलना दुनिया में कहीं और कम ही दिखा है।

महिला सशक्तीकरण

कनेक्शन महिला के नाम पर होने से घर के फ़ैसलों का समीकरण बदला। ईंधन बीनने से जो वक़्त बचा, वह कमाई वाले काम या आराम में लगा।

सेहत पर असर

घर के भीतर का प्रदूषण घटने से साँस की बीमारियाँ, मोतियाबिंद और जलने के हादसे कम होते हैं। WHO और ICMR के अध्ययन इन फ़ायदों को नाप कर दिखाते हैं।

संवैधानिक अधिकारों का विस्तार

घर के भीतर साफ़ हवा को हक़ीक़त बनाकर PMUY अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन के अधिकार को मज़बूत करती है, और SDG 7 (सबके लिए सस्ती और साफ़ ऊर्जा) की तरफ़ बढ़ाती है।

समावेशी विकास

योजना का निशाना SC/ST, OBC, अंत्योदय अन्न योजना के परिवार और वनवासी रहे; 93% लाभार्थी SC/ST/OBC परिवारों से हैं।

PMUY की दिक़्क़तें

रीफ़िल कम भरवाना

औसतन PMUY परिवार साल में 4-5 सिलेंडर भरवाते हैं, जबकि ग़ैर-PMUY परिवारों में यह आँकड़ा क़रीब 7-8 है। मुफ़्त कनेक्शन मिल जाने के बाद भी बहुत-से घर LPG संभाल-संभाल कर इस्तेमाल करते हैं और कुछ समय लकड़ी पर ही खाना पकाते रहते हैं।

सब्सिडी घटने के बाद रीफ़िल महँगी

2021-23 में तेल के दाम चढ़े तो LPG के खुदरा दाम भी चढ़े। PMUY परिवारों के लिए केंद्र अलग से सब्सिडी देता है (इस समय हर सिलेंडर पर 300 रुपये), ताकि रीफ़िल पहुँच में रहे। यह न होती तो बाज़ार भाव पर रीफ़िल सबसे ग़रीब घरों के बस से बाहर हो जाती।

सोच और सामाजिक आदतें

बहुत-से घरों को लगता है कि चूल्हे पर बना खाना ज़्यादा स्वादिष्ट होता है; कुछ को लगता है कि LPG के धुएँ या नए चूल्हों का अपना ख़तरा है। ढाँचा जितनी तेज़ी से पहुँचा, आदत उतनी तेज़ी से नहीं बदली।

प्रवासियों तक पहुँच

शहरों में रहने वाले बहुत-से ग़रीब परिवारों के पास पते का पक्का सबूत नहीं था। PMUY 2.0 ने इसका हल निकाला — अब अपना घोषणापत्र देकर काम चल जाता है और प्रवासी मज़दूर भी रजिस्टर करा सकते हैं।

आख़िरी छोर तक पहुँचाने की मुश्किल

दूर-दराज़ के इलाक़ों में सिलेंडर वक़्त पर नहीं पहुँचते; पहाड़ी इलाक़ों में ढुलाई जुड़ने से रीफ़िल की लागत ज़्यादा बैठती है।

PMUY 2.0 (अगस्त 2021 में शुरू)

PMUY 2.0 में ये बातें जुड़ीं:

अभी की सब्सिडी व्यवस्था

इस समय PMUY लाभार्थियों को मिलता है:

आगे का रास्ता

अंत्योदय जैसी सीढ़ीदार सब्सिडी

NFSA की तर्ज़ पर — जहाँ AAY परिवारों को अनाज बेहद सस्ते दाम पर मिलता है — PMUY भी अपने लाभार्थियों में सबसे ग़रीब घरों को मुफ़्त या बहुत सस्ते सिलेंडर दे सकती है।

व्यवहार अर्थशास्त्र और नज

छोटे सिलेंडर

5 किलो के छोटे सिलेंडर जेब पर एक बार में कम बोझ डालते हैं; इन्हें ज़्यादा जगह उपलब्ध कराने से इस्तेमाल लगातार बना रहता है।

दूसरे साफ़ ईंधन

सेहत और शिक्षा से जोड़ना

PMUY लाभार्थियों की सूची को ASHA, ICDS और स्कूल की सेहत से जुड़े कार्यक्रमों से जोड़िए, ताकि असर नापा जा सके और इस्तेमाल बढ़े।

हाल की बातें (2024-26)

UPSC के लिहाज़ से

GS-III में कहाँ

GS-I / GS-II में कहाँ

प्रीलिम्स के लिए पॉइंट

मुख्य परीक्षा के कोण

PMUY ने कनेक्शन पहुँचाने का काम कर दिखाया है; अगली लड़ाई लगातार इस्तेमाल की है। सब्सिडी बनी रहे, आदत बदलने वाले नज चलते रहें, PNG और बिजली का साथ मिलता रहे — तो भारत LPG तक पहुँच को LPG की आदत में बदल सकता है — औरतों की सेहत बचाकर, और साफ़ रसोई का सफ़र पूरा करके। UPSC के लिए योजना के ढाँचे को 2024 की सब्सिडी व्यवस्था और रीफ़िल के आँकड़ों के साथ मिलाकर पढ़िए, जवाब मज़बूत बनेगा।