पुराना किला: हुमायूँ का दीनपनाह, शेरशाह का शेरगढ़ और ASI की खुदाई
दिल्ली का पुराना किला असल में किसने बनवाया, इसकी मस्जिद और शेर मंडल क्या हैं, और ASI की खुदाई में इसके नीचे क्या मिला: यह नोट यही सब समझाता है।
पुराना किला दिल्ली में मथुरा रोड के किनारे, प्रगति मैदान के पास खड़ा है, और जहाँ आज यह है, वहाँ कभी यमुना का किनारा हुआ करता था। यह दीनपनाह का भीतरी किला (citadel) है। दीनपनाह वह शहर था जिसे हुमायूँ ने 1533 में बसाया था। 1540 में हुमायूँ को खदेड़ने के बाद शेरशाह सूरी ने इस पर कब्जा किया और इसे नए सिरे से बनवाया। इसकी सबसे जानी-पहचानी इमारतें शेरशाह की किला-ए-कुहना मस्जिद और शेर मंडल हैं। शेर मंडल वही अष्टकोणीय मीनार है जिसकी सीढ़ियों से गिरकर जनवरी 1556 में हुमायूँ की मौत हुई।
पुराना किला किसने बनवाया, इस सवाल पर सबसे आम गलती है पूरा किला एक ही आदमी के नाम कर देना। कुछ किताबें इसे हुमायूँ का किला कहती हैं, तो कुछ शेरशाह का। सरकारी स्रोत भी एक राय पर नहीं हैं। दिल्ली पर्यटन का एक पेज कहता है कि दीवारें और दरवाजा हुमायूँ ने बनवाए और शेरशाह ने काम आगे बढ़ाया। वहीं ब्रिटानिका विश्वकोश कहता है कि शेरशाह ने दीनपनाह को ढहा दिया और उसी जगह अपनी राजधानी खड़ी की। ईमानदार जवाब यह है कि श्रेय साझा है, और यह नोट साफ करता है कि कौन-सा हिस्सा किसके खाते में जाता है। यह नोट किले के नीचे भी जाता है, जहाँ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की खुदाई उन परतों तक पहुँच चुकी है जिन्हें ASI मौर्यों से पहले का मानता है।
पुराना किला कहाँ है और इसे किसने बनवाया
छोटा जवाब यह है: इसकी नींव हुमायूँ ने रखी, और शेरशाह ने इसे दोबारा बनवाया और इसका विस्तार किया। फिर अपनी जिंदगी के आखिरी महीने बिताने हुमायूँ इसी किले में लौटे। इन तीनों अध्यायों के नीचे एक पुरानी बस्ती का टीला है, और ASI के मुताबिक इस टीले पर करीब 2,500 साल तक लोग बसे रहे।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| स्थान | मथुरा रोड, नई दिल्ली, दिल्ली चिड़ियाघर और प्रगति मैदान के पास |
| किसने बसाया | हुमायूँ ने, दीनपनाह के भीतरी किले के रूप में, 1533 में |
| किसने दोबारा बनवाया | शेरशाह सूरी ने, 1540 से 1545 के बीच; उन्होंने इसका नाम शेरगढ़ रखा |
| फिर किसके पास लौटा | 1555 में हुमायूँ के पास; जनवरी 1556 में उनकी मौत यहीं हुई |
| किस तरह का किला | यमुना के पुराने किनारे पर बना मैदानी किला; परकोटे से घिरे एक शहर का भीतरी किला |
| दीवारें और दरवाजे | 18 मीटर ऊँची, घेरा करीब 1.5 से 2 किलोमीटर; तीन दरवाजे: बड़ा दरवाजा, हुमायूँ दरवाजा और तलाकी दरवाजा |
| संरक्षण | भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से केंद्रीय संरक्षित स्मारक |
| UNESCO दर्जा | सूची में शामिल नहीं (पड़ोस का हुमायूँ का मकबरा 1993 में शामिल हुआ) |
| किले के नीचे | ASI की खुदाई के मुताबिक मौर्य-पूर्व से मुगल काल तक के नौ सांस्कृतिक स्तर |
किले के नीचे क्या है: ASI की खुदाई
पुराना किला अपने से कहीं ज्यादा पुरानी एक बस्ती के ऊपर बना है। पुराने किले की खुदाई ASI ने कई सीजन में की है। खुदाई से यह तो दिखता है कि यहाँ लंबे समय तक लगातार आबादी रही, लेकिन सिर्फ खुदाई के दम पर यह साबित नहीं होता कि यह कौन-सा प्राचीन नगर था।
खुदाई के सीजन
ASI की अपनी प्रेस विज्ञप्तियाँ खुदाई के ये अभियान गिनाती हैं:
- 1954-55 और 1969 से 1973: पुरातत्वविद बी.बी. लाल की खुदाई।
- 2013-14 और 2017-18: ASI के वसंत कुमार स्वर्णकार की अगुवाई में दो सीजन। दूसरा सीजन ऐसे सबूतों के साथ खत्म हुआ जो मौर्य काल से पुरानी परतों की ओर इशारा करते थे।
- जनवरी 2023 से: स्वर्णकार की अगुवाई में तीसरा सीजन। इसका मकसद पहले खोदी गई खाइयों को फिर से खोलकर सुरक्षित करना था, और चित्रित धूसर मृद्भांड (Painted Grey Ware) को उसकी सही परत में ढूँढ़ना था।
चित्रित धूसर मृद्भांड को थोड़ा समझ लीजिए। ये महीन, धूसर यानी स्लेटी रंग के मिट्टी के बर्तन हैं, जिन पर काले रंग से सादे डिजाइन बने होते हैं। इनका संबंध गंगा-यमुना के मैदानों की शुरुआती लौह युग की बस्तियों से है। पुराने किले में पहले के सीजन में ये बर्तन मिल चुके हैं, और ASI इन्हें करीब 900 ईसा पूर्व का मानता है। पेच संदर्भ का है, और यह बात ASI ने खुद उठाई है। कोई ठीकरा तभी पक्का सबूत बनता है जब वह ऐसी परत से निकले जिसे किसी ने छेड़ा न हो, और वह परत अपने सही क्रम में हो। चित्रित धूसर मृद्भांड को इसी स्तर-क्रम (stratigraphic context) में ढूँढ़ना 2023 के सीजन का घोषित मकसद था। मई 2023 की ASI की जानकारी के मुताबिक खुदाई 5.5 मीटर की गहराई पर शुरुआती कुषाण स्तर की संरचनाओं तक पहुँच गई थी।
नौ परतों का मतलब
2023 की विज्ञप्तियाँ सारे सबूतों को नौ सांस्कृतिक स्तरों में समेटती हैं। नीचे से ऊपर की ओर ये स्तर हैं:
- मौर्य-पूर्व
- मौर्य
- शुंग
- कुषाण
- गुप्त
- गुप्तोत्तर
- राजपूत
- सल्तनत
- मुगल
यहाँ परत का मतलब है मलबे और इमारतों की वह पट्टी, जो इस जगह पर जिंदगी के एक दौर ने छोड़ी और जो अगले दौर के नीचे दब गई। इन परतों को नीचे से ऊपर पढ़ना, दिल्ली का इतिहास क्रम से पढ़ने जैसा है। इसीलिए मई 2023 में खुदाई का मुआयना करते हुए केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने पुराने किले को दिल्ली क्षेत्र की अकेली ऐसी जगह बताया, जहाँ यह लगातार चलती कहानी खुदाई में निकले अवशेषों में देखी जा सकती है। 2023 के सीजन में एक छोटे-से हिस्से से 136 से ज्यादा सिक्के मिले, साथ में 35 मुहरें और मुहरों की छापें भी। ASI इसे व्यापार का संकेत मानता है। मिली चीजों में वैकुंठ विष्णु की पत्थर की एक मूर्ति थी, और गजलक्ष्मी की टेराकोटा यानी पकी मिट्टी की एक पट्टिका भी। खाइयों में मौर्य काल का एक वलय कूप (ring well) भी सामने आया।
इंद्रप्रस्थ: परंपरा है, सबूत नहीं
अब वह सवाल, जो हर पाठक पूछता है। ASI की विज्ञप्तियाँ इस जगह की पहचान इंद्रप्रस्थ से करती हैं, यानी महाभारत में पांडवों के नगर से। लेकिन यह पहचान परंपरा पर टिकी है। पुरातत्व यह दिखा सकता है कि यहाँ मौर्यों से पहले भी लोग रहते थे और व्यापार करते थे, और चित्रित धूसर मृद्भांड कहानी को और पीछे ले जा सकते हैं। पर पुरातत्व अकेले बस्ती का नाम नहीं बता सकता, क्योंकि मिट्टी के बर्तनों की परत पर कोई नाम नहीं लिखा होता। इसलिए उत्तर में लिखिए “परंपरा के अनुसार इसकी पहचान इंद्रप्रस्थ से की जाती है”, और आपकी बात सटीक रहेगी।
हुमायूँ का दीनपनाह, 1533
हुमायूँ ने 1533 में यहाँ एक नया शहर बसाना शुरू किया और उसे दीनपनाह नाम दिया, यानी “धर्म की शरण”। दिल्ली सरकार का विरासत पेज पुराने किले को इस शहर का भीतरी किला बताता है, जिसकी नींव उसी साल पड़ी और जो पाँच साल बाद पूरा हुआ। दिल्ली पर्यटन विशाल दरवाजे और दीवारों का श्रेय हुमायूँ को देता है। ब्रिटानिका भी नींव की बात पर सहमत है: 1533 में हुमायूँ ने यमुना के किनारे एक नया शहर बसाया।
राजधानी बनाने के लिए यह मुश्किल वक्त था। उन सालों में हुमायूँ पश्चिम में गुजरात के बहादुर शाह से लड़ रहे थे, और पूरब में शेरशाह सूरी से, जो उस समय बिहार और बंगाल में ताकत जुटा रहे थे। शेरशाह ने उन्हें 1539 में चौसा में और 1540 में कन्नौज में हराया। हुमायूँ को भारत छोड़ना पड़ा, और उनकी नई राजधानी उसी आदमी के हाथ चली गई जिसने उन्हें हराया था। मुगल साम्राज्य उस मोड़ पर खत्म होने के कितने करीब आ गया था, यह समझने के लिए वंश वाला नोट सबसे अच्छी शुरुआत है।
1540 से 1545 के बीच शेरशाह ने क्या बनवाया
शेरशाह ने पाँच साल दिल्ली पर राज किया, 1540 से लेकर 1545 में अपनी मौत तक, और इस किले को पूरी तरह अपना बना लिया। दिल्ली सरकार के विरासत पेज के मुताबिक उन्होंने इसका नाम बदलकर शेरगढ़ रखा और इसमें कई इमारतें जोड़ीं। किले के भीतर जो दो इमारतें आज भी खड़ी हैं, किला-ए-कुहना मस्जिद और शेर मंडल, दोनों का श्रेय उन्हीं को दिया जाता है।
श्रेय का विवाद, निष्पक्ष ढंग से
यहाँ स्रोत सचमुच बँट जाते हैं, और यह ठीक-ठीक देख लेना काम का है कि कैसे:
- हुमायूँ ने बनवाया, शेरशाह ने आगे बढ़ाया। दिल्ली पर्यटन का पुराना किला वाला पेज दीवारों और दरवाजे का श्रेय हुमायूँ को देता है, और कहता है कि शेरशाह ने काम आगे बढ़ाया।
- शेरशाह ने ढहाया और नए सिरे से बनाया। ब्रिटानिका, और शेरगढ़ पर दिल्ली पर्यटन का अपना पेज, दोनों कहते हैं कि शेरशाह ने दीनपनाह को जमीन में मिला दिया और उसी जगह अपनी राजधानी बनाई।
- साझा श्रेय। ASI की जनवरी 2023 की विज्ञप्ति सीधे-सीधे कहती है कि यह किला शेरशाह सूरी और हुमायूँ ने बनवाया।
समझदारी इन तीनों को मिलाकर पढ़ने में है। जगह हुमायूँ ने चुनी और 1533 में शहर बसाया। 1540 से 1545 के बीच शेरशाह ने किलेबंदी पूरी की या उसे नए सिरे से बनवाया, और भीतर की वे इमारतें खड़ी कीं जो आज बची हैं। 1555 में हुमायूँ लौटे और शेरशाह की बनवाई इमारतों में रहे। इसलिए न तो पूरा किला अकेले हुमायूँ के नाम करना ठीक है, न ही उन्हें इस कहानी से बाहर कर देना।
ये दोनों नाम कितनी आसानी से आपस में घुल-मिल जाते हैं, यह सरकारी लेखन में भी दिखता है। दिल्ली पर्यटन का शेरगढ़ वाला पेज, उसी पैराग्राफ में जहाँ शेरशाह को श्रेय देता है, यह भी कहता है कि उनकी मौत 1556 में शेर मंडल की सीढ़ियों पर हुई। जबकि शेरशाह की मौत 1545 में ही हो चुकी थी। सीढ़ियों से गिरे हुमायूँ थे।
हुमायूँ की वापसी और शेर मंडल से उनका गिरना
हुमायूँ को अपना किला 1555 में वापस मिला। ब्रिटानिका के मुताबिक शेरशाह के उत्तराधिकारियों के बीच गृहयुद्ध छिड़ने के बाद उन्होंने उस साल जुलाई में दिल्ली और आगरा फिर से जीत लिए। अब उनके पास करीब छह महीने बचे थे। दिल्ली सरकार का विरासत पेज तारीख बताता है: 24 जनवरी 1556 को शाम की नमाज के लिए जाते हुए उनका पैर शेर मंडल की सीढ़ियों पर फिसला। वे सिर के बल गिरे, और दो दिन बाद चोटों की वजह से उनकी मौत हो गई। ब्रिटानिका बस इतना दर्ज करता है कि जनवरी 1556 में अपने पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरने के बाद उनकी मौत हुई।
गिरने की घटना जितनी अहम है, इमारत भी उतनी ही अहम है। शेर मंडल लाल बलुआ पत्थर की एक दोमंजिला अष्टकोणीय मीनार है। इसे शेरशाह ने बनवाया था और हुमायूँ ने इसे अपना पुस्तकालय बनाया। दिल्ली सरकार का पेज इसे दिल्ली की सबसे पहली वेधशालाओं में गिनता है। यानी जिस मीनार में हुमायूँ की मौत हुई, वह उनके विरोधी की बनवाई हुई थी। किले के साझा निर्माण का इससे सटीक सार शायद ही कहीं मिले।
उनकी मौत के बाद उनका 13 साल का बेटा गद्दी पर बैठा। दिल्ली पर नए शासन की पकड़ पक्की करने के लिए नवंबर 1556 में पानीपत की दूसरी लड़ाई लड़नी पड़ी। यह कहानी अकबर और पानीपत की लड़ाइयों वाले नोट्स में आगे बढ़ती है।
20वीं सदी में पुराना किला: नई दिल्ली की धुरी और एक शरणार्थी कैंप
किले का आधुनिक इतिहास कम जाना-पहचाना है, और ज्यादा दर्द भरा भी। दिल्ली सरकार का विरासत पेज बताता है कि 1920 के दशक में जब एडविन लुटियंस के नक्शे पर नई दिल्ली बन रही थी, तब राजधानी का सेंट्रल विस्टा पुराने किले की सीध में रखा गया। दो दशक बाद यही किला एक कैंप बन चुका था।
इतिहासकार डेबोरा सटन ने दिल्ली के विभाजन-कालीन कैंपों पर अध्ययन किया है। उनके मुताबिक 1942 में पुराने किले में 2,115 जापानी नजरबंद रखे गए थे, जिन्हें दक्षिण-पूर्व एशिया में गिरफ्तार करके भारत भेजा गया था। पाँच साल बाद यहाँ शरणार्थी थे। 1947 में पुराना किला, हुमायूँ के मकबरे और निजामुद्दीन की दूसरी जगहों के साथ, उन मुसलमानों का कैंप बना जो शहर की हिंसा में अपने घरों से उजड़ गए थे। 1948 में राहत और पुनर्वास मंत्रालय ने इन्हीं जगहों को उन हिंदू शरणार्थियों के कैंप के रूप में चलाया, जो दिल्ली आ रहे थे या दिल्ली से होकर आगे जा रहे थे।
भीतर की जिंदगी मुश्किल थी, और लंबी चली। पहले 18 महीने शरणार्थी तंबुओं में और दालानों में रहे। दालान यानी दीवारों के नीचे बने छोटे, भीतर को धँसे बरामदे। उसके बाद वे एस्बेस्टस की छत वाले एक-एक कमरे के मकानों में रहे। 1959 में भी दीवारों के भीतर करीब 5,000 लोग बसे हुए थे। उन्हें वह नोटिस थमाया गया, जिसे सरकार ने “बेदखली का पक्का और आखिरी नोटिस” (Positively Final Notice to Quit) कहा था। यह याद दिलाता है कि विभाजन को लोगों ने उन्हीं जगहों पर जिया, जहाँ आप आज भी घूम सकते हैं।
पुराने किले की दीवारें, दरवाजे और इमारतें कैसे पढ़ें
पुराना किला बड़े पहाड़ी किलों से सीधा-सादा है, और इसीलिए किलों की शब्दावली सीखने के लिए यह अच्छी जगह है। इसे उसी क्रम में देखिए, जिस क्रम में कोई हमलावर इसके सामने आता।
खंदक और दीवारें। दिल्ली पर्यटन एक चौड़ी खंदक का जिक्र करता है, जो कभी यमुना से जुड़ी थी। तब यमुना किले के पूरब की ओर बहती थी। खंदक के पीछे मोटे परकोटे उठते हैं, जिनके ऊपर कंगूरे (merlons) बने हैं। कंगूरे मुंडेर के वे ठोस हिस्से हैं, जिनके बीच-बीच में हथियार चलाने के लिए खाली जगह छोड़ी जाती है। दिल्ली सरकार का विरासत पेज दीवारों को 18 मीटर ऊँचा और करीब 1.5 किलोमीटर लंबा बताता है, जबकि दिल्ली पर्यटन इनका घेरा करीब 2 किलोमीटर बताता है। ये दोनों आँकड़े अलग-अलग सरकारी पेजों से आते हैं, इसलिए उत्तर में एक दायरा लिखिए।
दरवाजे। तीनों दरवाजे बलुआ पत्थर के दोमंजिला द्वार हैं। हर दरवाजे के दोनों ओर बड़े अर्धगोलाकार बुर्ज (bastion) हैं, और इन पर संगमरमर की जड़ाई और नीली टाइलों की सजावट है। ऊपर झरोखे (बाहर को निकली छज्जेदार खिड़कियाँ) और छतरियाँ (खंभों पर टिके छोटे गुंबददार मंडप) बने हैं:
- बड़ा दरवाजा पश्चिम की ओर है, और आज किले में आने-जाने के लिए यही दरवाजा इस्तेमाल होता है।
- हुमायूँ दरवाजा दक्षिण की ओर है। विरासत पेज के मुताबिक इसका नाम शायद इसलिए पड़ा कि इसे हुमायूँ ने बनवाया था, या इसलिए कि यहाँ से हुमायूँ का मकबरा दिखता है।
- तलाकी दरवाजा, यानी वर्जित दरवाजा, उत्तर की ओर है। दिल्ली पर्यटन बताता है कि इसमें इस्लामी नुकीले मेहराब के साथ हिंदू शैली की छतरियाँ और टोड़े (brackets) जोड़े गए हैं।
यहाँ बुर्ज का मतलब है दीवार से बाहर को निकली एक गोल मीनारनुमा बनावट, जो दरवाजे के दोनों तरफ होती है। इस पर खड़े रक्षक दरवाजे की सतह के साथ-साथ वार कर सकते थे, यानी सीधे उस पर जो दरवाजा तोड़ने में लगा हो। पूरे प्रवेश-द्वार का तर्क यही है: हमलावर को पहले खंदक पार करनी पड़ती थी, फिर एक दरवाजा तोड़ते हुए दो बुर्जों की दोतरफा मार झेलनी पड़ती थी। ऊपर के झरोखे और छतरियाँ इस डिजाइन का दूसरा हिस्सा हैं। बाद की मुगल वास्तुकला ने यही चीजें कहीं बड़े पैमाने पर दोहराईं।
किले के भीतर का ज्यादातर हिस्सा अब नहीं बचा। जो दो इमारतें बची हैं, वे दोनों शेरशाह की हैं।
किला-ए-कुहना मस्जिद
किला-ए-कुहना मस्जिद, यानी “पुराने किले की मस्जिद”, इस परिसर की सबसे अच्छी हालत में बची इमारत है, और दिल्ली सरकार का पेज इसका श्रेय शेरशाह को देता है। इसे आम तौर पर एक संक्रमणकालीन (transitional) इमारत कहा जाता है, यानी ऐसी इमारत जो लोदी राजवंश की मस्जिदों और उनके बाद आई मुगल मस्जिदों के बीच खड़ी है। दिल्ली में इंडो-इस्लामिक वास्तुकला के एक शुरुआती पड़ाव के रूप में इसे जरूर याद रखिए। भीतर संगमरमर की एक पट्टी पर खुदा शिलालेख दुआ करता है कि जब तक धरती पर लोग हैं, तब तक यह इमारत आबाद रहे और इसके लोग खुश और हँसते-खेलते रहें।
शेर मंडल
शेर मंडल मस्जिद के दक्षिण में खड़ा है। यह वही दोमंजिला अष्टकोणीय मीनार है जिसकी बात ऊपर हुई, और इसके ऊपर आठ खंभों पर टिकी एक अष्टकोणीय छतरी है। दिल्ली सरकार के पेज के मुताबिक इसे और ऊँचा बनना था, लेकिन शेरशाह की मौत के साथ काम रुक गया। इसकी खड़ी सीढ़ियाँ ही वह वजह हैं जिसके लिए यह इमारत याद की जाती है।
दीवारों के बाहर। मथुरा रोड के उस पार लाल दरवाजा खड़ा है, जिसे विरासत पेज शेरशाह के शहर शेरगढ़ का दक्षिणी दरवाजा बताता है। पुराना किला तो सिर्फ भीतरी किला था। उसके चारों ओर का परकोटे वाला शहर ज्यादातर आज की दिल्ली के नीचे गुम हो चुका है।
आज का पुराना किला: संरक्षण, संग्रहालय और खुदाई की जगह
पुराना किला ASI के तहत केंद्रीय संरक्षित स्मारक है, और यह UNESCO का विश्व धरोहर स्थल नहीं है। किले के दक्षिणी दरवाजे से दिखने वाला हुमायूँ का मकबरा जरूर विश्व धरोहर है: UNESCO ने उसे 1993 में सूची में शामिल किया। याद में दोनों आसानी से घुल-मिल जाते हैं, इसलिए इन्हें अलग रखिए, और पूरी सूची के लिए भारत के UNESCO विश्व धरोहर स्थलों वाला नोट देखिए।
किले के भीतर ASI का पुरातत्व संग्रहालय है, जिसमें पहले की खुदाइयों में मिली चीजें रखी हैं। इनमें चित्रित धूसर मृद्भांड और टेराकोटा की मूर्तियाँ भी हैं। सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक 30 मई 2023 को केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने घोषणा की कि नई खुदाई में निकले अवशेषों को एक शेड के नीचे सहेजा जाएगा और उन्हें खुले आसमान वाले साइट संग्रहालय के रूप में दिखाया जाएगा। जून 2023 में मुख्य उत्खननकर्ता ने दूतावासों के प्रतिनिधियों को खाइयों में घुमाकर खुदाई दिखाई, और संस्कृति राज्य मंत्री ने ASI से कहा कि आगे की खुदाई से पहले लिडार (LiDAR) सर्वे कराए जाएँ। लिडार लेजर पल्स भेजकर जमीन की सतह का बारीक नक्शा बनाता है। इससे दबी हुई दीवारों के वे हल्के निशान पकड़ में आ सकते हैं जो आँख से छूट जाते हैं।
परीक्षा के लिए पुराना किला कैसे पढ़ें
पुराने किले का इतिहास सिलेबस के चार हिस्सों को छूता है, इसीलिए इसकी अहमियत इसके आकार से कहीं ज्यादा है:
- प्राचीन इतिहास: चित्रित धूसर मृद्भांड, इंद्रप्रस्थ की परंपरा, और मौर्य-पूर्व से मुगल तक नौ स्तरों का क्रम।
- मध्यकालीन इतिहास: हुमायूँ का पहला शासन, बीच में आया सूर वंश का दौर और हुमायूँ की वापसी, जो दिल्ली सल्तनत और मुगलों के बीच के जोड़ पर पड़ती है।
- कला और संस्कृति: शुरुआती मुगल और सूर दौर के दरवाजे, और संक्रमणकालीन इमारत के रूप में किला-ए-कुहना मस्जिद।
- आधुनिक इतिहास: 1947 का कैंप और विभाजन के दौर का शहर।
इस हिस्से पर सवाल वास्तुकला के रास्ते आते हैं। इतिहास ऑप्शनल 2026, पेपर I में पूछा गया: “मेहरौली के कुतुब परिसर को दिल्ली सल्तनत के दौर में वास्तुकला के विकास के अध्ययन का आदर्श नमूना किस हद तक माना जा सकता है? विश्लेषण कीजिए।” इतिहास ऑप्शनल 2023, पेपर I में सवाल था: “मुगल वास्तुकला का स्वरूप समन्वयवादी था। टिप्पणी कीजिए।” समय और शैली, दोनों में पुराना किला इन दो सवालों के बीच बैठता है। इसीलिए दिल्ली में यही वह उदाहरण है जो सल्तनत वाले उत्तर को मुगल वाले उत्तर से जोड़ता है।
रिवीजन के लिए ये तथ्य याद रखिए:
- 1533: हुमायूँ ने दीनपनाह बसाया, और पुराना किला उसका भीतरी किला बना।
- 1540 से 1545: दिल्ली शेरशाह के हाथ में रही। उन्होंने किले का नाम शेरगढ़ रखा, और किला-ए-कुहना मस्जिद और शेर मंडल भी उन्हीं ने बनवाए।
- 1555 और 1556: हुमायूँ ने दिल्ली वापस ली, फिर जनवरी 1556 में शेर मंडल की सीढ़ियों से गिरकर उनकी मौत हो गई।
- दरवाजे: बड़ा दरवाजा (पश्चिम, आज इस्तेमाल में), हुमायूँ दरवाजा (दक्षिण), तलाकी दरवाजा (उत्तर, वर्जित दरवाजा)।
- खुदाई: बी.बी. लाल ने 1954-55 में और 1969 से 1973 तक; वसंत कुमार स्वर्णकार ने 2013-14 में, 2017-18 में और 2023 से।
- परतें: नौ सांस्कृतिक स्तर; चित्रित धूसर मृद्भांड करीब 900 ईसा पूर्व के; इंद्रप्रस्थ एक परंपरा है, साबित हुई पहचान नहीं।
- 1947: विस्थापित मुसलमानों का कैंप; 1948 से हिंदू शरणार्थियों का।
तीन उलझनें अभी सुलझा लेना ठीक रहेगा:
- हुमायूँ या शेरशाह? दोनों। शहर हुमायूँ ने बसाया; किला शेरशाह ने दोबारा बनवाया और भीतर की बची इमारतें भी उन्हीं की हैं; और हुमायूँ की मौत शेरशाह की बनवाई मीनार में हुई।
- पुराना किला या हुमायूँ का मकबरा? किला हुमायूँ का शहर है; मकबरा उनकी मौत के बाद बना, और UNESCO का विश्व धरोहर स्थल वही है।
- सीढ़ियों पर किसकी मौत हुई? शेरशाह की मौत 1545 में हुई थी; 1556 में शेर मंडल की सीढ़ियों से हुमायूँ गिरे थे।
इस किले को उस दौर के दिल्ली के दूसरे किलों के बीच रखकर देखना भी मदद करता है, जिनमें शाहजहाँ का लाल किला भी है:
| किला | किसने बनवाया | काल | UNESCO दर्जा |
|---|---|---|---|
| पुराना किला | पहले हुमायूँ, फिर शेरशाह सूरी | 1533 से 1545 | सूची में शामिल नहीं |
| सलीमगढ़ | इस्लाम शाह सूरी, शेरशाह के बेटे | 1546 | लाल किला परिसर का हिस्सा, 2007 |
| लाल किला | शाहजहाँ | 1639 से 1648 | लाल किला परिसर, 2007 |
पुराना किला छोटा है, लेकिन दिल्ली में यही एक जगह है जहाँ आप करीब 2,500 साल की परतों के ऊपर खड़े हो सकते हैं, और उस मीनार के पास भी, जहाँ हुमायूँ का शासन खत्म हुआ। इसे एक साझा किले की तरह पढ़िए: शहर हुमायूँ का, इमारतें शेरशाह की। और परंपरा को तथ्य बना देने के लालच से बचिए। यही आदत एक सावधान उत्तर को सिर्फ आत्मविश्वासी उत्तर से अलग करती है।
सामान्य प्रश्न
पुराना किला किसने बनवाया?
पुराना किला मुगल बादशाह हुमायूँ ने शुरू करवाया था, 1533 में बसाए अपने शहर दीनपनाह के भीतरी किले के रूप में। 1540 में हुमायूँ को खदेड़ने वाले शेरशाह सूरी ने इसे शेरगढ़ के नाम से दोबारा बनवाया और इसका विस्तार किया। आज जो मस्जिद और मीनार बची हैं, वे भी उन्हीं की बनवाई हैं, इसलिए इस किले का श्रेय दोनों को देना ही सबसे सही है।
शेर मंडल क्या है?
शेर मंडल पुराने किले के भीतर लाल बलुआ पत्थर की एक दोमंजिला अष्टकोणीय मीनार है, जिसे शेरशाह सूरी ने बनवाया था। दिल्ली वापस मिलने के बाद हुमायूँ ने इसे अपना पुस्तकालय बनाया, और जनवरी 1556 में इसी की सीढ़ियों पर गिरने के बाद उनकी मौत हुई।
क्या पुराना किला ही इंद्रप्रस्थ की जगह है?
परंपरा इस जगह की पहचान इंद्रप्रस्थ से करती है, यानी महाभारत में पांडवों के नगर से, और ASI की विज्ञप्तियाँ भी यही पहचान दोहराती हैं। खुदाई से यह साबित होता है कि यहाँ मौर्यों से पहले से एक लंबी बस्ती रही, लेकिन कोई भी खोज अकेले यह साबित नहीं करती कि यही महाकाव्य वाला नगर था।
ASI को पुराने किले में क्या मिला?
खुदाई में मौर्य-पूर्व से मुगल काल तक के नौ सांस्कृतिक स्तर मिले, और पहले के सीजन में चित्रित धूसर मृद्भांड भी मिले, जिन्हें ASI करीब 900 ईसा पूर्व का मानता है। 2023 का सीजन 5.5 मीटर की गहराई पर शुरुआती कुषाण संरचनाओं तक पहुँचा, और इसमें 136 से ज्यादा सिक्के और वैकुंठ विष्णु की पत्थर की एक मूर्ति मिली।
इसे पुराना किला क्यों कहा जाता है?
पुराना किला नाम अपने आप में साफ है, और अंग्रेजी में भी इसे Old Fort ही कहते हैं। यह शाहजहाँ के लाल किले से करीब एक सदी पुराना है, और इसकी मस्जिद, किला-ए-कुहना, का नाम भी पुराने किले के इसी अर्थ से निकला है।
क्या पुराना किला UNESCO का विश्व धरोहर स्थल है?
नहीं। पुराना किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में है, लेकिन विश्व धरोहर सूची में नहीं है। इसका पड़ोसी, हुमायूँ का मकबरा, UNESCO की सूची में 1993 में शामिल हुआ।
पुराने किले के दरवाजे कौन-से हैं?
किले में तीन दरवाजे हैं। पश्चिम का बड़ा दरवाजा आज प्रवेश के लिए इस्तेमाल होता है; हुमायूँ दरवाजा दक्षिण की ओर है, और तलाकी दरवाजा उत्तर की ओर, जिसका अर्थ आम तौर पर वर्जित दरवाजा बताया जाता है।
1947 में पुराने किले में क्या हुआ?
1947 में पुराना किला उन मुसलमानों का कैंप बना, जिन्हें दिल्ली की हिंसा ने उनके घरों से उजाड़ दिया था, और 1948 से यहाँ शहर में आ रहे हिंदू शरणार्थी रहने लगे। शरणार्थी तंबुओं में और दीवारों के नीचे बने आलों में रहे। कुछ परिवार 1959 में भी यहीं थे, जब सरकार ने उन्हें जगह खाली करने का आखिरी नोटिस थमाया।
अभ्यास प्रश्न
प्रीलिम्स MCQ
1. पुराने किले के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हुमायूँ ने 1533 में दीनपनाह शहर बसाया था, और यह किला उसी शहर का भीतरी किला है।
2. इसके भीतर की किला-ए-कुहना मस्जिद का श्रेय शेरशाह सूरी को दिया जाता है।
3. इसे 1993 में UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 2 और 3
- (c) केवल 1 और 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a) 1993 हुमायूँ के मकबरे के सूची में शामिल होने का साल है; पुराना किला सूची में शामिल नहीं है।
2. शेर मंडल, जहाँ 1556 में गिरने से हुमायूँ की मौत हुई, क्या है?
- (a) हुमायूँ का बनवाया हुआ, बारह दरों वाला एक मंडप
- (b) शेरशाह की बनवाई लाल बलुआ पत्थर की दोमंजिला अष्टकोणीय मीनार, जिसे हुमायूँ ने पुस्तकालय के रूप में इस्तेमाल किया
- (c) पुराने किले का पश्चिमी दरवाजा
- (d) इस्लाम शाह सूरी की बनवाई एक बावड़ी
उत्तर: (b) यह मीनार शेरशाह ने बनवाई थी, और दिल्ली वापस मिलने के बाद हुमायूँ ने इसे अपना पुस्तकालय बनाया।
3. पुराने किले की खुदाई के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इनमें मौर्य-पूर्व काल से मुगल काल तक के सांस्कृतिक स्तर मिले हैं।
2. चित्रित धूसर मृद्भांड मिलने से यह पक्के तौर पर साबित हो जाता है कि यह जगह महाभारत का इंद्रप्रस्थ थी।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (a) मिट्टी के ये बर्तन एक पुरानी बस्ती की गवाही देते हैं, लेकिन सिर्फ इनके दम पर महाकाव्य वाले नगर की पहचान नहीं हो सकती।
4. पुराने किले का कौन-सा दरवाजा ‘वर्जित दरवाजा’ कहलाता है?
- (a) बड़ा दरवाजा
- (b) हुमायूँ दरवाजा
- (c) तलाकी दरवाजा
- (d) लाल दरवाजा
उत्तर: (c) उत्तर की ओर वाले तलाकी दरवाजे का अर्थ आम तौर पर वर्जित दरवाजा बताया जाता है।
5. दिल्ली के लाल किला परिसर का हिस्सा, सलीमगढ़ किला, किसने बनवाया था?
- (a) हुमायूँ
- (b) शेरशाह सूरी
- (c) इस्लाम शाह सूरी
- (d) शाहजहाँ
उत्तर: (c) UNESCO के रिकॉर्ड के मुताबिक सलीमगढ़ को 1546 में इस्लाम शाह सूरी ने बनवाया था।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
- पुराने किले का श्रेय अक्सर या तो हुमायूँ को दिया जाता है या शेरशाह सूरी को। साझा निर्माण के पक्ष में मौजूद साक्ष्यों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
- पुराने किले का पुरातत्व प्राचीन दिल्ली के बारे में क्या स्थापित कर सकता है, और क्या नहीं? इंद्रप्रस्थ की परंपरा के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
- इंडो-इस्लामिक वास्तुकला में एक संक्रमणकालीन स्मारक के रूप में किला-ए-कुहना मस्जिद का परीक्षण कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
- सल्तनत काल के दौरान कौन-से प्रमुख तकनीकी बदलाव लाए गए? उन तकनीकी बदलावों ने भारतीय समाज को कैसे प्रभावित किया? (15 अंक, 250 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2023, GS पेपर I।
- स्मारक सिर्फ मध्यकालीन ही नहीं, आधुनिक इतिहास भी अपने साथ लिए होते हैं। विभाजन के बाद दिल्ली के स्मारकों के शरणार्थी कैंप के रूप में इस्तेमाल के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)