Anantam IASHindi Note · 24 August 2026

शून्य से UPSC की तैयारी कैसे शुरू करें: पहले 60 दिन

UPSC शुरू करने में सबसे मुश्किल हिस्सा सिलेबस नहीं है। मुश्किल यह जान न पाना है कि सौ तरह की सलाहों में से आप पर लागू कौन-सी होती है।

अगर आप बिलकुल शून्य से शुरू कर रहे हैं, तो दिक़्क़त यह नहीं है कि सिलेबस बड़ा है। दिक़्क़त यह है कि हर स्रोत कुछ अलग कहता है, ज़्यादातर सलाह आपसे कहीं आगे बढ़ चुके किसी और के लिए है, और उसमें से कुछ भी ऐसे क्रम में नहीं है कि आप कल सुबह से उस पर काम शुरू कर सकें।

तो यह रहा एक क्रम। साठ दिन, चार फ़ैसले, एक पढ़ाई की सूची। इसमें कहीं भी आपसे यह नहीं माँगा गया कि आपने ऑप्शनल, कोचिंग या टाइम टेबल पहले से तय कर रखा हो।

हफ़्ता 1: पढ़ना शुरू करने से पहले परीक्षा समझिए

पहला हफ़्ता पढ़ाई में मत लगाइए। यह ग़लत लगता है और यही महीनों बचा देता है।

आधिकारिक नोटिफ़िकेशन और सिलेबस शुरू से आख़िर तक पढ़िए। उसका सार नहीं — असली दस्तावेज़। यही एकमात्र भरोसेमंद बयान है कि आपकी परीक्षा किस चीज़ पर होगी, और ज़्यादातर ख़राब तैयारी इसी को कभी न पढ़ने से निकलती है।

तीनों चरण समझिए। प्रीलिम्स एक ऑब्जेक्टिव छँटाई परीक्षा है, जिसके अंक आख़िरी रैंक में नहीं जुड़ते। मेन्स नौ पेपर का है, जिनमें से सात के अंक गिने जाते हैं। इंटरव्यू 275 अंक का है। बहुत से उम्मीदवार साल भर प्रीलिम्स की तैयारी करते रहते हैं, यह जाने बिना कि वह सिर्फ़ आगे जाने का रास्ता खोलता है।

तीन असली प्रश्नपत्र देखिए। एक प्रीलिम्स, एक GS मेन्स, एक निबंध। इन्हें हल करने की कोशिश मत कीजिए। बस देखिए कि सवाल दिखते कैसे हैं, क्योंकि “UPSC पूछता क्या है” का आपका अंदाज़ा लगभग तय रूप से ग़लत है।

पात्रता ठीक से जाँच लीजिए — उम्र, अटेम्प्ट, और श्रेणी के हिसाब से मिलने वाली छूट।

हफ़्ते 2-5: NCERT की बुनियाद

यही अकेला दौर है जिसकी किताबों की सूची पर सचमुच कोई झगड़ा नहीं है। पढ़िए, नोट्स मत बनाइए, और अभी और कुछ मत ख़रीदिए।

यानी क़रीब बारह पतली किताबें, चार से पाँच हफ़्ते की लगातार पढ़ाई। NCERT की अपनी साइट पर ये PDF में मुफ़्त मिलती हैं।

इन्हें एक बार, ढंग से पढ़िए, बिना नोट्स बनाए। अभी आपको पता ही नहीं है कि किस चीज़ का वज़न कितना है, और पहली पढ़ाई में बनाए गए नोट्स सिर्फ़ नक़ल उतारना होते हैं, सीखना नहीं।

हफ़्ता 6: अख़बार शुरू कीजिए

यहाँ से आगे रोज़ एक अख़बार, तीस से चालीस मिनट। इसे पहले हफ़्ते में शुरू मत कीजिए — तब तक आपके पास वह ढाँचा नहीं होगा जिससे तय हो कि काम की ख़बर कौन-सी है, और आप डूब जाएँगे।

रोज़ पढ़िए, निशान लगाइए, और नोट्स हफ़्ते में एक बार बनाइए। पूरा तरीक़ा अख़बार से नोट्स कैसे बनाएँ में है; छोटी बात यह है कि ज़्यादातर ख़बरें उसी दिन मर जाती हैं और उन्हें उसी दिन नोट करना मेहनत की बरबादी है।

हफ़्ते 7-8: एक मानक किताब, और एक फ़ैसला

अब NCERT की बुनियाद के ऊपर एक मानक किताब जोड़िए। शुरुआत राजव्यवस्था से कीजिए, क्योंकि वह सबसे ज़्यादा अपने आप में पूरी है और उसमें आगे बढ़ने का एहसास सबसे जल्दी होता है — लक्ष्मीकांत लगभग सबकी पसंद है।

एक किताब। पाँच नहीं। पहले महीने में पूरी अलमारी भर लेने का मन करना ही शुरुआत करने वालों की सबसे आम और सबसे महँगी ग़लती है।

और एक फ़ैसला कीजिए: ऑप्शनल। आख़िरी जवाब नहीं, बस दो नामों की छोटी सूची। यह इसलिए मायने रखता है कि ऑप्शनल 500 अंक का है और उसे साल भर चाहिए, और इसलिए भी कि यह फ़ैसला आठवें महीने पर टालने से ही लोग पूरा एक चक्र गँवा देते हैं।

वे चार फ़ैसले जो असल में मायने रखते हैं

बाकी सब ब्योरा है। तैयारी की शक्ल ये चार बनाते हैं:

  1. आपका ऑप्शनल। सच्ची दिलचस्पी, सामग्री की उपलब्धता और अपनी पृष्ठभूमि तौलिए — पिछले साल के सफलता प्रतिशत नहीं।
  2. आपका माध्यम। अंग्रेज़ी, हिंदी या कोई और भाषा — जल्दी तय कीजिए और पूरी तैयारी उसी में कीजिए।
  3. कोचिंग या ख़ुद पढ़ाई। दोनों चलते हैं। जो नहीं चलता वह यह है कि आप दाख़िला लेकर इस फ़ैसले से बच जाएँ कि पढ़ेंगे असल में कैसे।
  4. आपकी समय-सीमा। आप किस अटेम्प्ट की तैयारी कर रहे हैं? “जब तैयार हो जाऊँगा तब” जैसी बात से ऐसी तैयारी बनती है जिस पर कोई दबाव ही नहीं होता।

पहले साठ दिन में किन चीज़ों को छोड़ दीजिए

साठ दिन बाद आपके पास क्या होना चाहिए

पढ़ी जा चुकी NCERT की बुनियाद। रोज़ अख़बार पढ़ने की आदत, जो एक महीना टिक चुकी हो। एक मानक किताब, जो चल रही हो। ऑप्शनल के दो नाम। और सबसे बढ़कर, इस बात का सही अंदाज़ा कि परीक्षा असल में पूछती क्या है — यही वह चीज़ है जिससे आगे का हर फ़ैसला सस्ता पड़ता है।

यहाँ से आगे बारह महीने का ढाँचा शुरुआती लोगों के लिए रोडमैप में है, और हमारा प्रीलिम्स PYQ विश्लेषण दिखाता है कि अंक असल में कहाँ पड़े हैं — चार विषय ही पेपर का 61% ले जाते हैं, और साल भर का वक़्त बाँटने से पहले यह जान लेना ज़रूरी है।

सामान्य प्रश्न

शून्य से UPSC की तैयारी कैसे शुरू करूँ? एक हफ़्ता परीक्षा समझने और आधिकारिक सिलेबस पढ़ने में लगाइए, चार हफ़्ते NCERT की बुनियाद पर, फिर एक अख़बार और एक मानक किताब जोड़िए। पहले दो महीनों में न किताबों की अलमारी भरिए, न नोट्स बनाइए।

UPSC के लिए सबसे पहले कौन-सी किताबें पढ़ूँ? NCERT — कक्षा 11 और 12 की राजव्यवस्था, अर्थव्यवस्था, भूगोल और इतिहास, साथ में कक्षा 9-10 का विज्ञान। ये NCERT की साइट पर मुफ़्त हैं और किसी भी सूची का यही अकेला हिस्सा है जिस पर कोई झगड़ा नहीं।

क्या तैयारी शुरू करते ही नोट्स बनाने चाहिए? पहली पढ़ाई में नहीं। अभी आप बता ही नहीं सकते कि किस चीज़ का वज़न कितना है, इसलिए शुरुआती नोट्स नक़ल उतारना बन जाते हैं। पहले पढ़िए, नोट्स दूसरे दौर में बनाइए।

अख़बार कब से पढ़ना शुरू करूँ? क़रीब छठे हफ़्ते से, जब NCERT की बुनियाद आपको यह ढाँचा दे चुकी हो कि काम की ख़बर कौन-सी है। पहले ही दिन से शुरू करने पर आम तौर पर रोज़ के दो घंटे बेकार पढ़ाई में चले जाते हैं।

क्या तैयारी शुरू करने के लिए कोचिंग ज़रूरी है? नहीं। कोचिंग और ख़ुद पढ़ाई, दोनों से चयन होते हैं। मायने यह रखता है कि आपने तय कर लिया हो कि पढ़ेंगे कैसे, न कि दाख़िले को उस फ़ैसले की जगह रख दें।

शून्य से शुरू करने पर UPSC की तैयारी में कितना वक़्त लगता है? बिना किसी पृष्ठभूमि के शुरू करने वाले ज़्यादातर उम्मीदवारों को पहले गंभीर अटेम्प्ट तक बारह से अठारह महीने की लगातार मेहनत लगती है। यहाँ बताए गए पहले साठ दिन उसी की बुनियाद हैं।