Anantam IASHindi Note · 14 September 2026

श्रीशैलम बांध: कृष्णा की गहरी घाटी, दो पावर हाउस और प्लंज पूल का खतरा

श्रीशैलम बांध कृष्णा पर कहाँ है, इसके दो पावर हाउस कौन चलाता है, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना इस पर क्यों टकराते हैं और NDSA को इसके नीचे क्या मिला।

श्रीशैलम बांध कृष्णा नदी पर बना 145 मीटर ऊँचा गुरुत्व बांध है। यह नल्लामला पहाड़ियों की एक गहरी घाटी में खड़ा है, जहाँ कृष्णा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सीमा बनाती है। बांध 1980 के दशक की शुरुआत में पूरा हुआ। इससे दो पावर हाउस चलते हैं, जिनकी कुल क्षमता 1,670 मेगावाट है। दोनों किनारों पर एक-एक पावर हाउस है, और हर एक का मालिक अलग राज्य है। आज इसका जलाशय दोनों तरफ की नहरों और लिफ्ट सिंचाई योजनाओं को भी पानी देता है।

ज्यादातर लोगों के मन में श्रीशैलम डैम की आधी-अधूरी तस्वीर होती है। कोई इसे ज्योतिर्लिंग मंदिर के पास बना एक बड़ा बांध समझता है, तो कोई तेलंगाना की परियोजना, क्योंकि हैदराबाद से सड़क वहीं जाती है। जरा ध्यान से देखें तो दोनों धारणाएँ टिकती नहीं। बांध राज्यों की सीमा पर है और दोनों किनारों के पावर हाउस अलग-अलग राज्यों के हैं। यह भी याद रखिए कि इसे सबसे पहले बिजली के लिए बनाया गया था। यही असली वजह है कि आज दोनों राज्य इस बात पर झगड़ते हैं कि इसकी झील का पानी कितना नीचे तक उतारा जा सकता है। यह नोट इन बातों को साफ करता है। साथ ही एक ऐसी बात भी, जिसके बारे में ज्यादातर लोगों ने कभी सुना ही नहीं: स्पिलवे के ठीक नीचे नदी की तली में कटकर बना एक गहरा गड्ढा।

श्रीशैलम बांध: एक नजर में

श्रीशैलम, नल्लामला की घाटी में बना कृष्णा का बिजली वाला बांध है। दो राज्य इसे साझा करते हैं, और 2021 से यह एक केंद्रीय नदी बोर्ड के नियंत्रण वाली सूची में दर्ज है। यह बोर्ड है कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB), जो इसे इसके औपचारिक नाम नीलम संजीव रेड्डी श्रीशैलम परियोजना से दर्ज करता है।

तथ्यविवरण
नदीकृष्णा, नल्लामला पहाड़ियों की एक घाटी में
स्थानआंध्र प्रदेश के नंद्याल जिले (पहले कुरनूल) और तेलंगाना के नागरकुर्नूल जिले (पहले महबूबनगर) की सीमा
प्रकार और आकारगुरुत्व बांध, 145 मीटर ऊँचा (सबसे गहरी नींव से 143.26 मीटर) और 512 मीटर लंबा, 12 रेडियल क्रेस्ट गेट के साथ
कब पूरा हुआCWC के बड़े बांधों के राष्ट्रीय रजिस्टर में 1982; दाएँ किनारे का स्टेशन 1987 में पूरी 770 मेगावाट क्षमता पर पहुँचा (JICA)
जलाशयपूर्ण जलाशय स्तर 885 फुट; इस स्तर पर कुल भंडारण 215.81 TMC
दाएँ किनारे का पावर हाउसआंध्र प्रदेश (APGENCO): 7 x 110 मेगावाट = 770 मेगावाट, अर्ध-भूमिगत
बाएँ किनारे का पावर हाउसतेलंगाना (TGGENCO): 6 x 150 मेगावाट = 900 मेगावाट, रिवर्सिबल इकाइयाँ, भूमिगत
नियंत्रणआंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत जारी 15 जुलाई 2021 की KRMB क्षेत्राधिकार अधिसूचना की अनुसूची-2 में दर्ज
पड़ोसनीचे की ओर नागार्जुनसागर; करीब 3 किलोमीटर दूर श्रीशैलम मंदिर; नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व

श्रीशैलम बांध कहाँ है और किस नदी पर बना है?

श्रीशैलम बांध कृष्णा नदी पर बना है। नदी नल्लामला पहाड़ियों को काटकर यहाँ एक गहरी घाटी बनाती है, और बांध उसी घाटी में खड़ा है। नंद्याल जिला प्रशासन के मुताबिक यह श्रीशैलम मंदिर से करीब 3 किलोमीटर दूर है। KRMB के अनुसार यह जगह समुद्र तल से करीब 300 मीटर ऊपर है, और उस समय के आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले और तेलंगाना के महबूबनगर जिले की सीमा पर पड़ती थी। बाद में दोनों जिलों का बँटवारा हुआ। इसलिए अब बांध के किनारे नंद्याल और नागरकुर्नूल में आते हैं। नागरकुर्नूल जिला 11 अक्टूबर 2016 को बना।

बांध का डिजाइन इसी जगह की वजह से ऐसा है। संकरी घाटी में सिर्फ 512 मीटर लंबी दीवार करीब 616 वर्ग किलोमीटर की झील को रोक सकती है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के रजिस्टर में जलाशय का यही क्षेत्रफल दर्ज है। इसे ऐसे समझिए: पूरी बोतल के चारों ओर दीवार खड़ी करने की बजाय सिर्फ उसकी गर्दन पर कॉर्क लगा दिया गया है। फर्क बस इतना है कि कॉर्क को कभी बाढ़ का पानी बाहर नहीं निकालना पड़ता, जबकि इस दीवार को निकालना पड़ता है।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के अनुसार नल्लामला पहाड़ियाँ पूर्वी घाट की एक शाखा हैं। KRMB के मुताबिक बांध में पानी लाने वाला जलग्रहण क्षेत्र 206,030 वर्ग किलोमीटर में फैला है। कृष्णा नदी वाला नोट नदी का पूरा रास्ता और उस पर बने बाकी बांधों की कहानी बताता है।

श्रीशैलम बांध कितना बड़ा है और इसका जलाशय कैसे काम करता है?

श्रीशैलम बांध 145 मीटर ऊँचा और 512 मीटर लंबा है। पूरा भरने पर इसका जलाशय करीब 216 TMC पानी रखता है। लेकिन ज्यादा काम की बात यह समझना है कि इस जलाशय का पानी किन हिस्सों में बँटा है, क्योंकि आगे की राजनीति इसी से समझ आती है।

कृष्णा के जलाशयों को TMC में नापा जाता है, यानी हजार मिलियन घन फुट (thousand million cubic feet)। KRMB के अपने रूपांतरण के मुताबिक एक TMC करीब 28.3 मिलियन घन मीटर के बराबर होता है। नदी का बहाव क्यूसेक में नापा जाता है, यानी घन फुट प्रति सेकंड।

यह एक गुरुत्व बांध (gravity dam) है। यानी ऐसी दीवार जो पानी को अपने वजन के दम पर रोकती है, घाटी की दीवारों पर मेहराब की तरह टिककर नहीं। इसमें 12 रेडियल क्रेस्ट गेट हैं। ये स्टील के घुमावदार गेट हैं, जो बाढ़ का पानी निकालने के लिए ऊपर की ओर घूमकर खुलते हैं। हर गेट का आकार 18.3 मीटर बाय 16.7 मीटर है।

KRMB ने बांध की मुख्य विशेषताओं में चार स्तर दिए हैं। श्रीशैलम से जुड़ा हर सवाल चुपचाप इन्हीं पर टिका होता है:

अब बीच के दोनों आँकड़ों को साथ रखकर देखिए। 854 फुट और 834 फुट के बीच 89.29 घटा 53.85, यानी करीब 35.4 TMC पानी है। नियम के हिसाब से इस हिस्से से टरबाइन चलाई जा सकती हैं। लेकिन जैसे ही यह पानी इस्तेमाल होता है, झील सिंचाई के लिए तय स्तर से नीचे चली जाती है। यानी जो टरबाइन चलाता है, वही इन 35 TMC का भविष्य तय करता है। पूरा झगड़ा बस एक घटाव में समा जाता है।

KRMB के मुताबिक बांध की डिजाइन बाढ़ (design flood) 19 लाख क्यूसेक है। जलाशय इस बाढ़ को थामकर बाहर जाने वाले बहाव को करीब 13.56 लाख क्यूसेक तक घटा देता है। बाद की सुरक्षा रिपोर्टें बताती हैं कि 2009 में बांध को करीब 25 लाख क्यूसेक पानी निकालना पड़ा था, जो इस डिजाइन से कहीं ज्यादा था। प्लंज पूल वाले हिस्से के लिए यह फर्क याद रखिए।

श्रीशैलम सबसे पहले बिजली के लिए क्यों बना?

श्रीशैलम की योजना एक जलविद्युत परियोजना के रूप में बनी थी, और इसे बनाया भी इसी रूप में गया। केंद्रीय जल आयोग का बड़े बांधों का राष्ट्रीय रजिस्टर (National Register of Large Dams) आज भी इसका उद्देश्य केवल जलविद्युत बताता है। सिंचाई और पीने के पानी वाली भूमिका बाद में जुड़ी, उन नहरों और लिफ्ट योजनाओं के जरिए जो इस जलाशय से पानी लेती हैं।

बांध पूरा होने की तारीख अलग-अलग स्रोतों में अलग है। CWC का रजिस्टर 1982 दर्ज करता है। दूसरी ओर JICA, यानी वह जापानी सहायता एजेंसी जिसने बाद में बाएँ किनारे के स्टेशन के लिए कर्ज दिया, 2006 के अपने मूल्यांकन में जलाशय को 1984 का और 770 मेगावाट वाले दाएँ किनारे के प्लांट को 1987 का बताती है। तो सुरक्षित जवाब यह है: बांध 1980 के दशक की शुरुआत में पूरा हुआ, और दाएँ किनारे का स्टेशन 1987 में अपनी पूरी क्षमता पर पहुँचा।

दाएँ किनारे का पावर हाउस

दाएँ किनारे का स्टेशन आंध्र प्रदेश का है और इसे APGENCO चलाती है। APGENCO इसे सुन्नीपेंटा में दर्ज करती है, जहाँ 110 मेगावाट की 7 इकाइयाँ हैं, यानी कुल 770 मेगावाट। KRMB इसे अर्ध-भूमिगत बताता है। इसमें फ्रांसिस टरबाइन लगी हैं, जो सिर्फ बिजली बनाती हैं।

बाएँ किनारे का पंप्ड स्टोरेज स्टेशन

बाएँ किनारे का स्टेशन तेलंगाना का है और इसे TGGENCO चलाती है, जिसका पुराना नाम TSGENCO था। KRMB के अनुसार यह पूरी तरह भूमिगत है, और इसमें 150 मेगावाट की 6 रिवर्सिबल (दोनों दिशाओं में चलने वाली) इकाइयाँ हैं। जब पानी इनसे होकर नीचे गिरता है, तो हर मशीन टरबाइन की तरह बिजली बनाती है। और जब बिजली सस्ती होती है, तो यही मशीन पंप बनकर पानी को वापस ऊपर श्रीशैलम में धकेल देती है।

इसी को पंप्ड स्टोरेज कहते हैं, यानी पानी से बनी एक ऐसी बैटरी जिसे बार-बार चार्ज किया जा सके। इसमें श्रीशैलम ऊपर की टंकी है, और नीचे की ओर अगला बड़ा जलाशय नागार्जुनसागर नीचे की टंकी। JICA का मूल्यांकन इसी जोड़ी का वर्णन करता है। बैटरी वाली मिसाल एक जगह जाकर टूटती है: प्लांट को नीचे की झील में खड़ा पानी चाहिए। इसीलिए श्रीशैलम के नीचे एक वियर, यानी नदी पर बनी छोटी नीची दीवार, की योजना बनी, ताकि रोज करीब आठ घंटे की पंपिंग के लायक पानी रुका रहे।

JICA के रिकॉर्ड में बाएँ किनारे का निर्माण फरवरी 1988 से सितंबर 2003 तक चला, यानी 212 महीने, जबकि शुरुआत में सिर्फ 87 महीने तय थे। JICA की रिपोर्ट 165 मेगावाट की 6 इकाइयाँ बताती है, जबकि KRMB और बाद की रिपोर्टें 150 मेगावाट लिखती हैं। आज भारतीय रिकॉर्ड में 900 मेगावाट का आँकड़ा ही चलता है। इसमें दाएँ किनारे के 770 मेगावाट जोड़ दें तो कुल 1,670 मेगावाट बनते हैं। जलविद्युत वाला नोट बताता है कि ऐसे स्टेशन भारत के बिजली मिश्रण में कहाँ बैठते हैं।

सिंचाई की भूमिका जलाशय के किनारों पर बने कामों के जरिए आई। KRMB की 2021 की क्षेत्राधिकार अधिसूचना इन्हें इस तरह गिनाती है:

श्रीशैलम जलाशय से पानी लेने वाला कामराज्य
पोतिरेड्डीपाडु हेड रेगुलेटर और श्रीशैलम राइट मेन कैनालआंध्र प्रदेश
तेलुगु गंगा हेड वर्क्स, जो पानी को चेन्नई की ओर ले जाते हैंआंध्र प्रदेश
हंद्री-नीवा लिफ्ट सिंचाई योजनाआंध्र प्रदेश
वेलिगोंडा परियोजना की सुरंगआंध्र प्रदेश
श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल की सुरंगतेलंगाना
कलवाकुर्ती लिफ्ट सिंचाई योजनातेलंगाना
पालमुरु-रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई योजनातेलंगाना
डिंडी लिफ्ट सिंचाई योजनातेलंगाना

इनमें से कई को बिना मंजूरी वाली परियोजना के रूप में दर्ज किया गया है। अधिसूचना साफ कहती है कि किसी परियोजना को सूची में रखने का मतलब उसे मंजूरी देना नहीं है। रजिस्टर में इसकी एंट्री कुछ भी कहे, इस्तेमाल के हिसाब से श्रीशैलम प्रायद्वीप के बहुउद्देशीय बांधों में से एक है।

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना श्रीशैलम पर क्यों लड़ते हैं?

झगड़े की जड़ यह है कि एक ही पानी के दो इस्तेमाल हो सकते हैं। या तो वह तेलंगाना के बाएँ किनारे की टरबाइन चलाकर आगे नागार्जुनसागर की ओर बह जाए, या फिर नहरों और लिफ्ट योजनाओं के लिए झील में ही रुका रहे। और बेसिन से बाहर पानी ले जाने वाली सबसे बड़ी योजनाएँ आंध्र प्रदेश की हैं। जुलाई 2021 की रिपोर्टों के मुताबिक तेलंगाना का कहना है कि श्रीशैलम एक जलविद्युत परियोजना के रूप में बना था। इसलिए बिजली बनाना इसका पहला इस्तेमाल है, दुरुपयोग नहीं। KRMB के दो ड्रॉ-डाउन स्तर, सिंचाई के लिए 854 फुट और बिजली के लिए 834 फुट, असल में इन्हीं दो पक्षों को अंकों में लिखा गया रूप हैं।

आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 ने क्या व्यवस्था बनाई

आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 ने बँटवारे के बाद बने दोनों राज्यों के बीच नदी का पानी बाँटने की पूरी मशीनरी खड़ी की। इसकी चार धाराएँ काम की हैं:

बोर्ड और न्यायाधिकरण के काम अलग-अलग हैं, और यहीं लगभग हर कोई गड़बड़ा जाता है। KRMB साझा ढाँचों को चलाता है। न्यायाधिकरण तय करता है कि किसे कितना पानी मिलेगा, और इसका गठन अंतर्राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत 2 अप्रैल 2004 को हुआ था। 4 अक्टूबर 2023 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने KWDT-II के लिए और संदर्भ शर्तों (terms of reference) को मंजूरी दी, ताकि वह दोनों राज्यों के बीच फैसला कर सके। अनुच्छेद 262 और न्यायाधिकरण वाली व्यवस्था के लिए अंतर्राज्यीय जल विवाद वाला नोट देखिए।

2021 की अधिसूचना और अटका हुआ हस्तांतरण

बरसों से अटका क्षेत्राधिकार आखिरकार 15 जुलाई 2021 की गजट अधिसूचना से तय हुआ। यह अधिसूचना S.O. 2842(E) है, और 14 अक्टूबर 2021 से लागू हुई। इसने श्रीशैलम के स्पिलवे और दोनों पावर हाउस को अनुसूची-2 में रखा। यह उन कामों की सूची है जिन्हें KRMB को राज्यों के जरिए नहीं, खुद चलाना है। कागज पर दोनों पावर हाउस एक केंद्रीय बोर्ड के पास चले गए, लेकिन असल में राज्य ही उन्हें चलाते रहे। तब से अब तक का रिकॉर्ड दिखाता है कि कागजी आदेश कितनी धीमी रफ्तार से असली नियंत्रण में बदलता है:

अगर श्रीशैलम को पहले बिजली के लिए चलाया जाए, या हर फुट पानी नहरों के लिए रोककर रखा जाए, तो दोनों ही हालात में सूखे साल में किसी न किसी के हिस्से कम पानी आएगा। समझदारी वाला बीच का रास्ता यह है कि एक निष्पक्ष संचालक तय नियमों की किताब के हिसाब से पानी छोड़े। KRMB को इसी भूमिका के लिए बनाया गया था। और धारा 89 भी न्यायाधिकरण से कम पानी वाले वर्षों के लिए यही नियम-पुस्तिका लिखने को कहती है।

क्या श्रीशैलम बांध सुरक्षित है? प्लंज पूल और 2020 की आग

श्रीशैलम की चिंता दीवार में दरार नहीं, बल्कि उसके नीचे बना गड्ढा है। स्पिलवे के नीचे की ओर नदी की तली कटते-कटते एक गहरे गड्ढे में बदल गई है। भारत के बांध सुरक्षा नियामक ने इसे भारी बाढ़ के समय बांध के लिए खतरा बताया है। इससे अलग, बाएँ किनारे के पावर स्टेशन में 2020 में एक जानलेवा आग भी लगी थी।

प्लंज पूल नदी की तली का वह हिस्सा है जहाँ स्पिलवे से गिरता पानी नीचे टकराता है और अपनी ताकत खर्च करता है। खुले नल के नीचे रखी रेत की तरह, सबसे पहले यही जगह खुदती है। डर यह है कि यह खोखलापन पीछे की ओर बढ़ते-बढ़ते दीवार की नींव तक पहुँच जाए। फर्क सिर्फ पैमाने का है, क्योंकि 2009 में यहाँ करीब 25 लाख क्यूसेक की धार गिरी थी।

रिपोर्टें इस गड्ढे की शुरुआत उसी 2009 की बाढ़ से जोड़ती हैं। पहले की सुरक्षा, यानी कंक्रीट भरे स्टील के सिलेंडर, या तो टूट गई या बह गई। 2025 में खबर आई कि पूल में एक गहरा गड्ढा बन गया है। इसका नियामक राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) है, जिसकी स्थापना 17 फरवरी 2022 को बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के तहत हुई। यह अधिनियम 30 दिसंबर 2021 से लागू हुआ था। खबरों के मुताबिक अब तक इसके आदेश ये रहे:

अगस्त 2020 की आग

20 अगस्त 2020 की रात करीब 10:30 बजे, बाएँ किनारे के भूमिगत स्टेशन में यूनिट 1 के कंट्रोल पैनल में आग लग गई। उस समय अंदर 17 लोग थे, जिनमें से 8 बाहर निकल पाए। POWER पत्रिका की 25 अगस्त 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक नौ लोगों की मौत हुई। इनमें 7 TSGENCO के कर्मचारी थे और 2 एक बैटरी सप्लायर के कामगार। CID ने 24 अगस्त को इसकी जाँच शुरू की।

श्रीशैलम बांध के आसपास क्या है?

नीचे की ओर अगला बड़ा बांध नागार्जुनसागर है। CWC के रजिस्टर में इसकी ऊँचाई 124.66 मीटर दर्ज है, और यह सिंचाई और बिजली, दोनों के लिए बना है। पंप्ड स्टोरेज के लिए यही श्रीशैलम की निचली झील का काम भी करता है। नवंबर 2023 के टकराव के बाद इसे CRPF की निगरानी में रखा गया।

श्रीशैलम मंदिर मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का धाम है, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसी परिसर में भ्रामरांबा शक्तिपीठ भी है। मंदिर आंध्र प्रदेश के नंद्याल जिले में है, सीमा पर नहीं। श्रीशैलम मल्लिकार्जुन मंदिर वाला नोट इसके इतिहास और स्थापत्य को विस्तार से बताता है।

आसपास का जंगल नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व है। NTCA के आँकड़ों में यह 5,937 वर्ग किलोमीटर का है, जिसमें 3,721 वर्ग किलोमीटर कोर क्षेत्र है। नंद्याल जिला प्रशासन के मुताबिक श्रीशैलम के पास बाघ परियोजना 1983 में शुरू हुई। राज्य के बँटवारे के बाद तेलंगाना ने 6 फरवरी 2015 को अपने हिस्से को अमराबाद टाइगर रिजर्व के रूप में अधिसूचित किया। यानी व्यवहार में बांध का दायाँ किनारा आंध्र प्रदेश वाले रिजर्व की ओर है और बायाँ किनारा अमराबाद की ओर। भारत के टाइगर रिजर्व वाला नोट इसे बाकी रिजर्वों के साथ रखकर समझाता है।

आज का श्रीशैलम बांध

आज श्रीशैलम KRMB की सूची में दर्ज परियोजना है, जिसे अब भी दोनों राज्य ही चलाते हैं। इसके प्लंज पूल की मरम्मत का आदेश अपनी समय-सीमा पार कर चुका है:

सितंबर 2026 का यह आदेश वही 35 TMC वाली समस्या है, जिसकी बात इस नोट में पहले हुई थी, बस अब यह हमारी आँखों के सामने घट रही है। पानी कम हो तो बोर्ड टरबाइन की जगह पीने के पानी का साथ देता है।

परीक्षा के लिए श्रीशैलम बांध कैसे पढ़ें

श्रीशैलम वहाँ खड़ा है जहाँ सिलेबस की तीन रेखाएँ आपस में मिलती हैं। इसीलिए इस एक बांध पर लगाया गया समय पूरा वसूल होता है:

परीक्षा में यह विषय नाम लेकर कम, बड़े सवालों के जरिए ज्यादा पूछा जाता है। मुख्य परीक्षा 2013 के GS पेपर II में पूछा गया था, “अंतर्राज्यीय जल विवादों को सुलझाने के संवैधानिक तंत्र समस्याओं को संबोधित करने और हल करने में विफल रहे हैं। क्या यह विफलता संरचनात्मक या प्रक्रियात्मक अपर्याप्तता के कारण है, या दोनों के कारण? चर्चा कीजिए।” इस जवाब के लिए 2014 के बाद का सबसे साफ उदाहरण श्रीशैलम है, क्योंकि यहाँ एक ही पानी पर बोर्ड और न्यायाधिकरण, दोनों सक्रिय हैं। प्रीलिम्स में Anantam IAS के प्रीलिम्स प्रश्न बैंक के 1,403 सवालों में से 82 भूगोल के हैं।

जो कुछ पूछा जाता है, उसका ज्यादातर हिस्सा इन सात तथ्यों में आ जाता है:

जिन उलझनों में नंबर कटते हैं, वे गिनी-चुनी हैं, और उनका अंदाजा पहले से लगाया जा सकता है:

अब CWC रजिस्टर के अपने आँकड़ों से श्रीशैलम को कृष्णा बेसिन के बाकी बड़े बांधों के साथ रखकर देखिए:

बांधनदीCWC रजिस्टर में राज्यऊँचाईCWC रजिस्टर में उद्देश्य
श्रीशैलमकृष्णाआंध्र प्रदेश145 मीटरजलविद्युत
नागार्जुनसागरकृष्णातेलंगाना124.66 मीटरसिंचाई और जलविद्युत
अलमट्टीकृष्णाकर्नाटक49.29 मीटरसिंचाई और जलविद्युत

तीनों में श्रीशैलम सबसे ऊँचा है, और अकेला ऐसा बांध है जिसे रजिस्टर सिर्फ बिजली के लिए दर्ज करता है। अलमट्टी बांध वाला नोट नदी के ऊपरी छोर और अलमट्टी की ऊँचाई पर चल रहे विवाद को समझाता है।

श्रीशैलम उस अभ्यर्थी को फायदा देता है जो दस आँकड़े रटने की जगह एक तंत्र को समझ लेता है। बिजली के लिए बना एक बांध आज दो राज्यों की नहरों का बोझ उठा रहा है। और एक केंद्रीय बोर्ड के हाथ में कानूनी चाबियाँ तो हैं, लेकिन गेट अभी तक नहीं। अगर आप समझा सकें कि 854 फुट और 834 फुट अलग-अलग आँकड़े क्यों हैं, तो आप संघवाद वाला जवाब और ऊर्जा वाला जवाब, दोनों एक ही पन्ने से लिख सकते हैं।

सामान्य प्रश्न

श्रीशैलम बांध किस नदी पर है?

श्रीशैलम बांध कृष्णा नदी पर, नल्लामला पहाड़ियों की एक गहरी घाटी में बना है। यहाँ कृष्णा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सीमा बनाती है, और नीचे की ओर अगला बड़ा बांध नागार्जुनसागर है।

श्रीशैलम बांध आंध्र प्रदेश में है या तेलंगाना में?

यह दोनों राज्यों की सीमा पर है। दायाँ किनारा आंध्र प्रदेश के नंद्याल जिले में है और बायाँ किनारा तेलंगाना के नागरकुर्नूल जिले में। हर किनारे का अपना पावर हाउस है, जिसे उसी राज्य की बिजली उत्पादन कंपनी चलाती है। CWC का बांध रजिस्टर इस परियोजना को आंध्र प्रदेश के नाम से दर्ज करता है।

श्रीशैलम बांध की ऊँचाई कितनी है?

केंद्रीय जल आयोग और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड के मुताबिक बांध 145 मीटर ऊँचा और 512 मीटर लंबा है। सबसे गहरी नींव से नापने पर KRMB इसकी ऊँचाई 143.26 मीटर बताता है।

श्रीशैलम परियोजना की बिजली क्षमता कितनी है?

परियोजना के दो पावर हाउस में कुल 1,670 मेगावाट की क्षमता है। आंध्र प्रदेश के दाएँ किनारे वाले स्टेशन में 110 मेगावाट की 7 इकाइयाँ हैं। तेलंगाना के भूमिगत बाएँ किनारे वाले स्टेशन में 150 मेगावाट की 6 रिवर्सिबल इकाइयाँ हैं, जो पानी को वापस जलाशय में पंप भी कर सकती हैं।

श्रीशैलम बांध की भंडारण क्षमता कितनी है?

KRMB के मुताबिक 885 फुट के पूर्ण जलाशय स्तर पर जलाशय में करीब 215.81 TMC का कुल भंडारण होता है। सिंचाई के लिए पानी रोकते समय झील को 854 फुट तक और बिजली बनाने के लिए 834 फुट तक उतारा जा सकता है।

श्रीशैलम बांध को कौन नियंत्रित करता है?

आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत 15 जुलाई 2021 की एक अधिसूचना ने बांध के स्पिलवे और दोनों पावर हाउस को 14 अक्टूबर 2021 से कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड के तहत रख दिया। लेकिन असल में दोनों राज्य अब भी अपने-अपने पावर हाउस चलाते हैं, और बोर्ड को पूरा हस्तांतरण अभी भी विवाद में है।

श्रीशैलम बांध में प्लंज पूल की समस्या क्या है?

स्पिलवे के नीचे नदी की वह तली, जहाँ गिरता पानी टकराता है, 2009 की बाढ़ के बाद से कटकर एक गहरे गड्ढे में बदल गई है। 2025 में राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष ने इसे ‘भारी जोखिम वाली खोखली जगह’ कहा, और कंक्रीट टेट्रापॉड से मरम्मत का आदेश दिया गया। फिर जनवरी 2026 में CWC ने नुकसान का आकलन करने के लिए एक तकनीकी विशेषज्ञ समूह बनाया।

2020 में श्रीशैलम पावर स्टेशन में क्या हुआ था?

20 अगस्त 2020 की रात तेलंगाना की तरफ वाले भूमिगत बाएँ किनारे के पावर स्टेशन में आग लग गई। इसमें नौ लोगों की मौत हुई, और कुछ दिन बाद CID ने आग की वजह की जाँच शुरू की।

अभ्यास प्रश्न

प्रीलिम्स MCQ

1. श्रीशैलम बांध के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह नल्लामला पहाड़ियों में कृष्णा नदी पर बना है। 2. इसके बाएँ किनारे का पावर हाउस आंध्र प्रदेश का है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

उत्तर: (a) बाएँ किनारे का स्टेशन तेलंगाना का है; आंध्र प्रदेश दाएँ किनारे का स्टेशन चलाता है।

2. बांध और नदी के निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. श्रीशैलम: कृष्णा 2. श्रीराम सागर: गोदावरी 3. अलमट्टी: तुंगभद्रा। ऊपर दिए गए युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?

उत्तर: (b) अलमट्टी कर्नाटक में खुद कृष्णा नदी पर बना है, तुंगभद्रा पर नहीं।

3. कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसका गठन आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत हुआ था। 2. यह अंतर्राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत गठित एक न्यायाधिकरण है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

उत्तर: (a) बोर्ड का गठन 2014 के अधिनियम की धारा 85 के तहत हुआ; कृष्णा के लिए न्यायाधिकरण KWDT-II है, जो एक अलग निकाय है।

4. श्रीशैलम का बाएँ किनारे का पावर स्टेशन पंपिंग मोड में भी चल सकता है। इसके निचले जलाशय का काम कौन-सा जलाशय करता है?

उत्तर: (b) पंप्ड स्टोरेज योजना में श्रीशैलम ऊपरी जलाशय है, और ठीक नीचे की ओर बना नागार्जुनसागर निचला जलाशय।

5. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व नल्लामला पहाड़ियों में है, जो पूर्वी घाट की एक शाखा हैं। 2. तेलंगाना ने पुराने नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व के अपने हिस्से को अमराबाद टाइगर रिजर्व के रूप में अधिसूचित किया। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

उत्तर: (c) NTCA नल्लामलाई को पूर्वी घाट की एक शाखा बताता है, और तेलंगाना ने फरवरी 2015 में अमराबाद टाइगर रिजर्व अधिसूचित किया।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

  1. बांधों का टूटना हमेशा विनाशकारी होता है, खासकर नीचे की ओर, जहाँ जान-माल का भारी नुकसान होता है। बांध टूटने के विभिन्न कारणों का विश्लेषण कीजिए। बड़े बांधों के टूटने के दो उदाहरण दीजिए। (10 अंक, 150 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2023, GS पेपर III।
  2. श्रीशैलम बांध बिजली के लिए बना था, लेकिन अब यह दो राज्यों की नहरों और लिफ्ट योजनाओं को पानी देता है। समझाइए कि भूमिका का यह बदलाव आंध्र प्रदेश-तेलंगाना जल विवाद की जड़ में कैसे है, और कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
  3. पंप्ड स्टोरेज मौजूदा जलाशयों को ऊर्जा भंडार में बदल सकता है। श्रीशैलम के बाएँ किनारे के पावर स्टेशन और नागार्जुनसागर जलाशय पर उसकी निर्भरता के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
  4. प्लंज पूल क्या है? श्रीशैलम के संदर्भ में परीक्षण कीजिए कि स्पिलवे के नीचे का कटाव बांध की सुरक्षा के लिए खतरा क्यों है, और बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के तहत हुई कार्रवाई का मूल्यांकन कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
  5. आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत बने नदी प्रबंधन बोर्डों को साझा परियोजनाओं का संचालन नियंत्रण अपने हाथ में लेने में मुश्किल आई है। इसके कारणों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)