Anantam IASHindi Note · 3 September 2026

UPSC 2025 खेल और पुरस्कार: गांधी शांति पुरस्कार की जूरी, पहला खो-खो विश्व कप और 45वाँ शतरंज ओलंपियाड

गांधी शांति पुरस्कार की जूरी, 1995 से 2024 तक विजेताओं की पूरी सूची, पहला खो-खो विश्व कप और बुडापेस्ट में भारत का दोहरा शतरंज स्वर्ण — UPSC 2025 के तीन सवालों की पूरी पड़ताल।

UPSC 2025 के सामान्य अध्ययन पेपर-I में वह विषय फिर लौटा जो बड़े राष्ट्रीय सम्मानों और भारतीय खेल उपलब्धियों वाले सालों में हमेशा दिखता है: पुरस्कार, समारोह और खेल कूटनीति। तीन सवाल — Q53 (गांधी शांति पुरस्कार की जूरी), Q59 (पहला खो-खो विश्व कप) और Q60 (45वाँ शतरंज ओलंपियाड) — मिलाकर छह अंक के थे। इन्होंने यही जाँचा कि उम्मीदवार पुरस्कार कौन देता है और चुनाव कौन करता है में फ़र्क़ कर पाते हैं या नहीं, एक बार शुरू हुए खेल आयोजन और किसी आम टूर्नामेंट में फ़र्क़ कर पाते हैं या नहीं, और टीम वाले शतरंज ओलंपियाड तथा आमने-सामने वाली विश्व शतरंज चैंपियनशिप में फ़र्क़ कर पाते हैं या नहीं।

यह लेख इन तीन घटनाओं से जुड़ा वह सब एक जगह रखता है जो UPSC ने पूछा है या पूछ सकता है: 1995 से 2024 तक गांधी शांति पुरस्कार पाने वालों की पूरी सूची, पहले खो-खो विश्व कप के नियम, आयोजन और स्कोर, बुडापेस्ट में 45वें शतरंज ओलंपियाड में भारत का ऐतिहासिक दोहरा स्वर्ण, और सिंगापुर में डिंग लिरेन को हराकर डी. गुकेश की अलग FIDE विश्व चैंपियनशिप जीत। रिवीज़न के लिए पाँच तुलना तालिकाएँ और सात अभ्यास MCQ भी दिए हैं।

UPSC 2025 GS पेपर-I — तीनों सवाल एक-एक लाइन में

Q53: गांधी शांति पुरस्कार की जूरी में प्रधानमंत्री, CJI और नेता प्रतिपक्ष शामिल हैं (राष्ट्रपति नहीं)। Q59: पहला खो-खो विश्व कप भारत ने इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम, नई दिल्ली में कराया (जनवरी 2025)। Q60: 45वें शतरंज ओलंपियाड (बुडापेस्ट 2024) में भारत ने टीम स्वर्ण जीता; गुकेश ने बाद में चीन के डिंग लिरेन को हराकर विश्व चैंपियन बना — यह सिंगापुर में हुआ एक अलग आयोजन था।

भाग 1 — गांधी शांति पुरस्कार: संस्था, जूरी और पूरी सूची

संस्था और प्रशासन

गांधी शांति पुरस्कार हर साल दिया जाने वाला सम्मान है, जिसे भारत सरकार ने 1995 में महात्मा गांधी की 125वीं जयंती पर शुरू किया था। इसे संस्कृति मंत्रालय चलाता है और यह हर व्यक्ति के लिए खुला है — देश, नस्ल, भाषा, जाति, धर्म या लिंग का कोई बंधन नहीं। यह पुरस्कार ‘अहिंसा और गांधीवादी तरीक़ों से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बदलाव लाने’ के लिए दिया जाता है।

हर पुरस्कार में ₹1 करोड़ की नक़द राशि, एक प्रशस्ति पत्र, एक पट्टिका और एक बेहतरीन पारंपरिक हस्तशिल्प/हथकरघा वस्तु दी जाती है। यह पुरस्कार राष्ट्रपति भवन में भारत के राष्ट्रपति देते हैं, प्रधानमंत्री नहीं — छोटा सा फ़र्क़, पर परीक्षा में काम का।

जूरी में कौन-कौन — UPSC Q53 का जाल

गांधी शांति पुरस्कार की जूरी पाँच सदस्यों वाली है और इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। UPSC के Q53 में कई बड़े पदाधिकारियों के नाम गिनाकर पूछा गया था कि इनमें से कौन सदस्य हैं। सही सूची यह है:

#सदस्यभूमिकापदेन?
1भारत के प्रधानमंत्रीअध्यक्षहाँ
2भारत के मुख्य न्यायाधीशसदस्यहाँ
3लोकसभा में नेता प्रतिपक्षसदस्यहाँ (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता)
4प्रतिष्ठित व्यक्ति (मनोनीत)सदस्यनहीं — मनोनीत
5प्रतिष्ठित व्यक्ति (मनोनीत)सदस्यनहीं — मनोनीत

आम UPSC उलझन — राष्ट्रपति बनाम जूरी

भारत के राष्ट्रपति जूरी के सदस्य नहीं हैं। राष्ट्रपति राष्ट्रपति भवन में पुरस्कार देते हैं। इसी तरह उपराष्ट्रपति, राज्यसभा के सभापति और लोकसभा अध्यक्ष भी जूरी का हिस्सा नहीं हैं। ‘चुनाव कौन करता है बनाम देता कौन है’ — यही UPSC का पक्का जाल है और Q53 की पूरी रीढ़ यही थी।

चुनाव की प्रक्रिया

  1. हर साल कई तरफ़ से नाम मँगाए जाते हैं — सांसद, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, पहले के पुरस्कार विजेता, नोबेल विजेता, कुलपति और बड़े अख़बारों के संपादक।
  2. संस्कृति मंत्रालय इन नामों की जाँच करता है और उन्हें जूरी के सामने रखता है।
  3. प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली जूरी विचार करके विजेता चुनती है — या उस साल पुरस्कार न देने का फ़ैसला करती है।
  4. संस्कृति मंत्रालय पुरस्कार का ऐलान करता है और राष्ट्रपति भवन में समारोह की व्यवस्था करता है।

कई सालों (1996, 1997, 1999, 2000, 2001, 2002, 2003, 2004, 2006, 2007, 2009, 2010, 2011, 2012, 2014, 2015 और 2016) में कोई पुरस्कार नहीं दिया गया। 2023 में संस्कृति मंत्रालय ने कई बचे हुए साल एक साथ जोड़कर 2019, 2020, 2021, 2022 और 2023 के विजेताओं का ऐलान एक बार में किया और बैकलॉग ख़त्म कर दिया।

गांधी शांति पुरस्कार पाने वालों की पूरी सूची (1995–2024)

सालविजेतादेश / संस्थावजह / क्षेत्र
1995जूलियस न्येरेरेतंज़ानियाराजनेता; पूरे अफ़्रीका में अहिंसा और उजामा सामाजिक दर्शन
1996ए. टी. अरियरत्नेश्रीलंकासर्वोदय श्रमदान आंदोलन; गाँवों में अपनी मदद ख़ुद
1997गेरहार्ड फ़िशरजर्मनीभारत में कुष्ठ रोगियों और दिव्यांगों की सेवा
1998रामकृष्ण मिशनभारतशिक्षा, स्वास्थ्य और मानवीय सेवा
1999बाबा आमटेभारतकुष्ठ रोगियों की सेवा (आनंदवन); आदिवासी कल्याण
2000नेल्सन मंडेला और ग्रामीण बैंकदक्षिण अफ़्रीका / बांग्लादेशसाझा पुरस्कार — रंगभेद के ख़िलाफ़ संघर्ष; गरीबों के लिए माइक्रोफ़ाइनेंस
2001जॉन ह्यूमउत्तरी आयरलैंडशांति की कोशिशें, जिनसे गुड फ़्राइडे समझौता हुआ
2002भारतीय विद्या भवनभारतभारतीय संस्कृति, शिक्षा और गांधीवादी मूल्यों का प्रसार
2003वाक्लाव हावेलचेक गणराज्यवेल्वेट क्रांति; अहिंसक राजनीतिक बदलाव
2004कोरेटा स्कॉट किंगअमेरिकामार्टिन लूथर किंग जूनियर की नागरिक अधिकार विरासत को आगे बढ़ाना
2005डेसमंड टूटूदक्षिण अफ़्रीकारंगभेद विरोध, सत्य एवं समाधान आयोग
2013चंडी प्रसाद भट्टभारतचिपको आंदोलन; हिमालय में पर्यावरण संरक्षण
2014भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)भारतसामाजिक विकास के लिए सस्ता अंतरिक्ष विज्ञान
2015विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारीभारतग्रामीण विकास, मूल्य आधारित शिक्षा
2016अक्षय पात्र फ़ाउंडेशन और सुलभ इंटरनेशनलभारतमध्याह्न भोजन; स्वच्छता आंदोलन
2017एकल अभियान ट्रस्टभारतआदिवासी और ग्रामीण भारत में एक-शिक्षक स्कूल
2018योहेई सासाकावाजापानदुनिया भर में कुष्ठ रोग मिटाने का काम
2019सुल्तान क़ाबूस बिन सईद अल सईद (मरणोपरांत)ओमानपश्चिम एशिया में लंबे समय तक शांति कूटनीति
2020शेख़ मुजीबुर रहमान (मरणोपरांत)बांग्लादेशबंगबंधु — बांग्लादेश की आज़ादी में नेतृत्व
2021गीता प्रेस, गोरखपुरभारतधार्मिक और नैतिक साहित्य छापने के सौ साल
2022पं. श्री कृष्ण महाराजभारतसंगीत के ज़रिए सांस्कृतिक सेवा (2020–2023 वाले सेट के साथ ऐलान)
2023माता अमृतानंदमयी देवी (अम्मा)भारतMA मठ के ज़रिए मानवीय और परमार्थ कार्य
2024UPSC 2025 प्रीलिम्स के समय तक ऐलान नहीं हुआ थाफ़ैसला बाक़ी

झटपट याद — सबसे ज़्यादा पूछे गए तीन विजेता

  • 2021 (ऐलान 2023 में): गीता प्रेस, गोरखपुर — रामचंद्र गुहा और कुछ और लोगों ने इस चुनाव पर सवाल उठाए तो विवाद हुआ; सरकार ने सौ साल की प्रकाशन विरासत के आधार पर इसका बचाव किया।
  • 2020: शेख़ मुजीबुर रहमान — मरणोपरांत सम्मानित पहले विदेशी राष्ट्राध्यक्ष; ऐलान बांग्लादेश की आज़ादी की 50वीं सालगिरह के दौरान हुआ।
  • 2014: ISRO — यह पुरस्कार पाने वाली एकमात्र भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी या वैज्ञानिक संस्था।

भारत के पुरस्कारों की सीढ़ी में गांधी शांति पुरस्कार कहाँ बैठता है

पुरस्कारशुरुआतमंत्रालय / संस्थादेता कौन हैचयन समिति का मुखिया
भारत रत्न1954राष्ट्रपति सचिवालयभारत के राष्ट्रपतिप्रधानमंत्री की सिफ़ारिश (कोई औपचारिक जूरी नहीं)
पद्म पुरस्कार1954गृह मंत्रालयभारत के राष्ट्रपतिपद्म पुरस्कार समिति (अध्यक्ष: कैबिनेट सचिव)
गांधी शांति पुरस्कार1995संस्कृति मंत्रालयभारत के राष्ट्रपतिप्रधानमंत्री (जूरी अध्यक्ष)
ज्ञानपीठ पुरस्कार1961भारतीय ज्ञानपीठ ट्रस्टज्ञानपीठ ट्रस्टनामी साहित्यिक जूरी (गैर-सरकारी)
परमवीर चक्र1950रक्षा मंत्रालयभारत के राष्ट्रपतिसेना के स्तर पर सिफ़ारिश, चुनाव रक्षा मंत्रालय का

UPSC के लिए दो बातें। पहली, गांधी शांति पुरस्कार ही एकमात्र बड़ा नागरिक सम्मान है जिसकी चयन जूरी की अध्यक्षता औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री करते हैंपद्म पुरस्कारों की समिति के अध्यक्ष, उदाहरण के लिए, कैबिनेट सचिव होते हैं। दूसरी, यह पुरस्कार सिर्फ़ भारतीय नागरिकों तक सीमित नहीं है; विदेशी नागरिक और संस्थाएँ (मंडेला, ग्रामीण बैंक, टूटू, मुजीबुर रहमान, सासाकावा) सब जीत चुके हैं।

चर्चित विवाद और नीति की बहसें

गांधी शांति पुरस्कार पर सार्वजनिक बहस को तीन घटनाओं ने आकार दिया है, और ये निबंध के लिए भी काम की हैं:

गांधी शांति पुरस्कार बाक़ी ‘गांधी’ पुरस्कारों से कैसे अलग है

कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान गांधी का नाम लेते हैं, लेकिन वे भारत के बाहर से चलते हैं और उनका चयन तरीक़ा अलग है। एक छोटी तुलना मेन्स के उत्तरों में उलझन से बचा देती है।

पुरस्कारशुरू करने वालादायराकिस काम के लिए
गांधी शांति पुरस्कार (भारत)भारत सरकार, 1995अंतरराष्ट्रीय, दिया जाता है भारत सेअहिंसा से सामाजिक बदलाव
UNESCO–मदनजीत सिंह पुरस्कारUNESCO, 1995वैश्विक, हर दो साल मेंसहनशीलता और अहिंसा का प्रचार
कुष्ठ रोग के लिए अंतरराष्ट्रीय गांधी पुरस्कारगांधी मेमोरियल लेप्रोसी फ़ाउंडेशन, 1986भारत से चलता है, पात्रता दुनिया भर कीकुष्ठ रोग मिटाने में सेवा
जमनालाल बजाज पुरस्कारजमनालाल बजाज फ़ाउंडेशन, 1977निजी ट्रस्ट, भारत + विदेश में बड़ा कामरचनात्मक काम (ग्रामीण कल्याण, महिलाएँ, गाँवों के लिए विज्ञान)

भाग 2 — पहला खो-खो विश्व कप, 2025

हुआ क्या

पहला खो-खो विश्व कप भारत में 13 से 19 जनवरी 2025 तक इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम, नई दिल्ली में हुआ। इसमें 6 महाद्वीपों के 24 देश और पुरुष तथा महिला वर्ग में मिलाकर 615 से ज़्यादा खिलाड़ी उतरे। टूर्नामेंट खो खो फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (KKFI) और इंटरनेशनल खो खो फ़ेडरेशन (IKKF) ने मिलकर कराया, और युवा मामले एवं खेल मंत्रालय ने संस्थागत मदद दी।

भारत ने, जैसी उम्मीद थी, दबदबा बनाया। प्रतीक वायकर की अगुआई वाली भारतीय पुरुष टीम ने 19 जनवरी 2025 के फ़ाइनल में नेपाल को 78–40 से हराकर पहला विश्व चैंपियन बनने का ख़िताब जीता। प्रियंका इंगले की अगुआई वाली भारतीय महिला टीम ने भी महिला फ़ाइनल में नेपाल को 78–40 से हराया — बिल्कुल वही स्कोर, और भारत की पूरी झाड़ू।

फ़ाइनलतारीख़विजेताउपविजेतास्कोर
पुरुष फ़ाइनल19 जनवरी 2025भारतनेपाल78 – 40
महिला फ़ाइनल19 जनवरी 2025भारतनेपाल78 – 40

कौन-कौन से देश और ढाँचा क्या था

24 देश छह महाद्वीपों से थे — यह जान-बूझकर दिया गया संकेत था कि खो-खो अब सिर्फ़ दक्षिण एशिया का खेल नहीं है। टीमें आईं एशिया (भारत, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, भूटान, ईरान, इंडोनेशिया, मलेशिया, दक्षिण कोरिया), अफ़्रीका (केन्या, दक्षिण अफ़्रीका, घाना, युगांडा), यूरोप (इंग्लैंड, जर्मनी, नेदरलैंड्स, पोलैंड), अमेरिका महाद्वीप (अमेरिका, ब्राज़ील, अर्जेंटीना, पेरू) और ओशिनिया (ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड) से।

टूर्नामेंट में ग्रुप स्टेज और उसके बाद नॉकआउट का फ़ॉर्मैट रहा, और पुरुष तथा महिला वर्ग साथ-साथ चले। भारत ने खेलो इंडिया से निकले खिलाड़ी और अल्टीमेट खो खो लीग के खिलाड़ी उतारे, जबकि दोनों फ़ाइनल में उपविजेता रहा नेपाल भारत के बाद सबसे मज़बूत टीम बनकर उभरा।

खेल का इतिहास — महाराष्ट्र से शुरू होकर वैश्विक फ़ेडरेशन तक

सालपड़ाव
अंग्रेज़ों से पहले का दौरपीछा करने और छूने वाला पारंपरिक भारतीय खेल; महाराष्ट्र और कर्नाटक की लोक संस्कृति में ज़िक्र
1914डेक्कन जिमखाना, पुणे ने आधुनिक नियम तय किए
1936बर्लिन ओलंपिक में भारतीय दल ने खो-खो का प्रदर्शन किया
1955–56खो खो फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (KKFI) बना
1959–60विजयवाड़ा में पहली अखिल भारतीय खो-खो चैंपियनशिप
1996कोलकाता में पहली एशियाई खो-खो चैंपियनशिप
2019खेलो इंडिया यूथ गेम्स में खो-खो शामिल
2021–22अल्टीमेट खो खो फ़्रैंचाइज़ी लीग की शुरुआत
2023इंटरनेशनल खो खो फ़ेडरेशन (IKKF) औपचारिक रूप से बना
जनवरी 2025पहला खो-खो विश्व कप, नई दिल्ली — भारत ने दोनों ख़िताब जीते

नियम संक्षेप में — UPSC क्या पूछ सकता है

खो-खो छूने-पीछा करने वाला टीम खेल है, जिसमें शारीरिक संपर्क होता है। इसका ढाँचा मोटे तौर पर समझ लेना सामान्य अध्ययन की तैयारी और इंटरव्यू में देसी खेलों के पुनरुद्धार पर आने वाले सवालों, दोनों में काम आता है।

बातब्यौरा
टीम का आकारहर तरफ़ 12 खिलाड़ी; मैदान पर एक बार में 9 (बाक़ी बदले में उतरते हैं)
मैच का ढाँचाहर टीम की दो पारियाँ; हर पारी में एक हमले की और एक बचाव की बारी
पारी की लंबाईहर बारी 7 मिनट (बारियों के बीच छोटा ब्रेक)
मैदानआयताकार, 27 मी × 16 मी, बीच में एक लेन और दोनों सिरों पर दो पोल
हमला करने वाली टीम8 चेज़र बीच की लेन में बारी-बारी उलटी दिशा में बैठते हैं; एक चेज़र दौड़ता है
बचाव करने वाली टीमएक बार में तीन ‘ड्रीम रनर’ उतरते हैं और चेज़रों से बचने की कोशिश करते हैं
अंकहर आउट डिफ़ेंडर पर 1 अंक; स्काई-डाइव टच और पोल टर्न पर बोनस नियम (अल्टीमेट खो खो में)
‘खो’ क्या हैचेज़र को बारी बैठे साथी को देने के लिए ‘खो’ बोलना पड़ता है; इसी चाल से खेल का नाम पड़ा

सरकारी नीति से जुड़ाव

खो-खो बनाम कबड्डी — दो देसी भारतीय खेल जो दुनिया में फैल रहे हैं

पैमानाखो-खोकबड्डी
शुरुआतमहाराष्ट्र (नियम 1914 में तय)दक्षिण एशिया; आधुनिक नियम महाराष्ट्र से, 1920 के दशक में
पहला विश्व कपजनवरी 2025 (नई दिल्ली)2004 (मुंबई) — स्टैंडर्ड स्टाइल
एशियाई खेलों में जगहप्रदर्शन खेल; अभी पदक स्पर्धा नहीं1990 बीजिंग एशियाई खेलों से पदक स्पर्धा
फ़्रैंचाइज़ी लीगअल्टीमेट खो खो (2022 से)प्रो कबड्डी लीग (2014 से)
देश की फ़ेडरेशनखो खो फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (KKFI), 1955–56अमेच्योर कबड्डी फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (AKFI), 1950
अंतरराष्ट्रीय फ़ेडरेशनइंटरनेशनल खो खो फ़ेडरेशन (IKKF), 2023इंटरनेशनल कबड्डी फ़ेडरेशन (IKF), 2004

यह विश्व कप ट्रॉफ़ी से आगे क्यों मायने रखता है

जनवरी 2025 में तीन बड़े बदलाव एक साथ आ गए, जिनसे खो-खो विश्व कप मुमकिन हुआ। पहला संस्थाओं का था: इंटरनेशनल खो खो फ़ेडरेशन 2023 में ही बना, जिसमें संस्थापक अध्यक्ष की भूमिका भारत ने ली। IKKF के बिना FIDE या FIFA जैसी शक्ल का टूर्नामेंट कराना मुमकिन नहीं था। दूसरा कारोबारी था: 2022 में प्रसारण की मदद से शुरू हुई अल्टीमेट खो खो लीग ने भारत के खिलाड़ियों को साल भर चलने वाला पेशेवर रास्ता दिया और वीडियो सामग्री का ऐसा ज़ख़ीरा बनाया जिसे दूसरे देशों की फ़ेडरेशन पढ़ सकती थीं। तीसरा नीति का था: 2019 में खेलो इंडिया में खो-खो शामिल होने से इसमें छात्रवृत्ति, कोचिंग और बुनियादी ढाँचा आया, जिससे यह स्कूल के पीटी पीरियड वाले खेल से निकलकर एथलेटिक ट्रैक का विषय बन गया।

UPSC सामान्य अध्ययन के लिए सीख यही है कि यह विश्व कप अकेली खेल ख़बर नहीं, बल्कि पाँच साल की नीति और उद्योग की पाइपलाइन का नतीजा है। ‘सॉफ़्ट पावर’, ‘खेलो इंडिया के नतीजे’ या ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ पर आने वाले सवालों में इसे तैयार उदाहरण की तरह लगाया जा सकता है।

UPSC वाला कोण — देसी खेलों का पुनरुद्धार

UPSC ने ‘खेल कूटनीति’ और ‘सांस्कृतिक सॉफ़्ट पावर’ जैसे विषय लगातार बढ़ाकर पूछे हैं। खो-खो विश्व कप दोनों में फ़िट होता है: यह भारत को दक्षिण एशिया के देसी खेलों का स्वाभाविक घर दिखाता है और कबड्डी विश्व कप के ढाँचे के समानांतर चलता है। ‘सॉफ़्ट पावर’, ‘खेलो इंडिया के नतीजे’ या ‘सांस्कृतिक खेल’ पर मेन्स के सवालों में 2025 का खो-खो विश्व कप समकालीन उदाहरण के तौर पर काम आ सकता है।

भाग 3 — 45वाँ शतरंज ओलंपियाड 2024 और गुकेश की विश्व चैंपियनशिप

ओलंपियाड — बुडापेस्ट, सितंबर 2024

45वाँ FIDE शतरंज ओलंपियाड बुडापेस्ट, हंगरी में 10 से 22 सितंबर 2024 तक हुआ। यह विश्व शतरंज की टीम चैंपियनशिप है, जो हर दो साल में होती है और जिसे फ़ेडरेशन इंटरनेशनल दे एशेक (FIDE) कराती है। 2024 के संस्करण में ओपन वर्ग में 197 फ़ेडरेशन और महिला वर्ग में 183 उतरीं — टीमों की गिनती के हिसाब से यह अब तक का सबसे बड़ा ओलंपियाड था।

भारत बुडापेस्ट में ओपन वर्ग में दूसरी सीड के तौर पर उतरा और महिला वर्ग में भी दावेदारों में था। ग्यारह राउंड के स्विस टूर्नामेंट के आख़िर में भारत ने वह कर दिया जो इस सदी में सोवियत संघ और चीन के अलावा किसी देश ने नहीं किया था: एक ही ओलंपियाड के दोनों वर्गों में टीम स्वर्ण। भारत ने दो व्यक्तिगत बोर्ड स्वर्ण भी जीते।

वर्गस्वर्णरजतकांस्यख़ास बात
ओपन (पुरुष)भारतअमेरिकाउज़्बेकिस्तानभारत ने 22 में से 21 मैच अंक बनाए — रिकॉर्ड
महिलाभारतकज़ाख़िस्तानअमेरिकामहिला ओलंपियाड में भारत का पहला टीम स्वर्ण

भारतीय ओपन टीम — खिलाड़ी और व्यक्तिगत नतीजे

बोर्डखिलाड़ी2024 में उम्रव्यक्तिगत पदक
1डी. गुकेश (डोम्माराजू)18स्वर्ण (व्यक्तिगत बोर्ड 1)
2आर. प्रज्ञानानंदा19
3अर्जुन एरिगैसी21स्वर्ण (व्यक्तिगत बोर्ड 3)
4विदित संतोष गुजराती29
रिज़र्वपेंटाला हरिकृष्णा38

भारतीय महिला टीम — खिलाड़ी और व्यक्तिगत नतीजे

बोर्डखिलाड़ी2024 में उम्रव्यक्तिगत पदक
1कोनेरू हम्पी37
2हरिका द्रोणावल्ली33
3आर. वैशाली23
4दिव्या देशमुख18स्वर्ण (व्यक्तिगत बोर्ड 3 — महिला)
रिज़र्ववंतिका अग्रवाल21स्वर्ण (व्यक्तिगत रिज़र्व — महिला)

ओपन टीम के कप्तान: श्रीनाथ नारायणन। महिला टीम के कप्तान: अभिजीत कुंटे। ओलंपियाड में भारत का इससे पहले का सबसे अच्छा नतीजा 2022 चेन्नई ओलंपियाड में दोहरा कांस्य था — वह भी इन्हीं कप्तानों के साथ।

दूसरा बड़ा आयोजन — सिंगापुर में गुकेश विश्व चैंपियन बने

बुडापेस्ट के दो महीने बाद FIDE विश्व शतरंज चैंपियनशिप 2024 सिंगापुर में 25 नवंबर से 13 दिसंबर 2024 तक हुई। मौजूदा चैंपियन चीन के डिंग लिरेन थे, जिन्होंने मैग्नस कार्लसन के ख़िताब छोड़ने के बाद 2023 में यह ताज जीता था। चुनौती देने वाले थे भारत के डी. गुकेश, जिन्होंने अप्रैल 2024 में टोरंटो में हुआ कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीता था।

गुकेश ने 14 गेम का यह मुक़ाबला 7.5 – 6.5 से जीता और 12 दिसंबर 2024 को गेम 14 में ख़िताब पक्का कर लिया, जब डिंग लिरेन ने बराबरी वाले रुख़ के अंतिम चरण में गलती कर दी। 18 साल 8 महीने की उम्र में गुकेश इतिहास के सबसे कम उम्र के निर्विवाद विश्व शतरंज चैंपियन बन गए और उन्होंने गैरी कास्पारोव का 1985 का रिकॉर्ड तोड़ा (जो 22 साल की उम्र में बना था)। विश्वनाथन आनंद के बाद वे दूसरे भारतीय विश्व चैंपियन हैं।

UPSC का Q60 पेचीदा क्यों था

Q60 में ‘शतरंज ओलंपियाड’ पर कथन दिए गए थे, पर बीच में विश्व चैंपियनशिप की बातें घुसा दी गई थीं। जिन उम्मीदवारों को यह पता था कि भारत ओलंपियाड में जीता, पर यह नहीं पता था कि गुकेश ने किसे हराया (चीन के डिंग लिरेन, रूस या इयान नेपोम्नियाश्ची नहीं), उन्होंने गलत विकल्प भरा। जाल इस बात का फ़ायदा उठाता था कि दोनों आयोजन तीन महीने के अंदर हुए और दोनों में गुकेश थे।

ओलंपियाड बनाम विश्व चैंपियनशिप बनाम कैंडिडेट्स बनाम ग्रैंड चेस टूर

आयोजनफ़ॉर्मैटकितने समय में2024 का मेज़बान / विजेतापात्रता
शतरंज ओलंपियाडटीम स्विस (ओपन + महिला)हर 2 सालबुडापेस्ट; भारत ने दोनों टीम स्वर्ण जीतेFIDE की सभी सदस्य फ़ेडरेशन
विश्व चैंपियनशिप मुक़ाबला14 गेम का क्लासिकल मैचहर 2 साल (या द्विवार्षिक चक्र)सिंगापुर; गुकेश ने डिंग लिरेन को हरायामौजूदा चैंपियन बनाम कैंडिडेट्स विजेता
कैंडिडेट्स टूर्नामेंट8 खिलाड़ियों का डबल राउंड-रॉबिनहर 2 साल (चुनौती देने वाला तय होता है)टोरंटो; डी. गुकेश जीतेसबसे ऊँची रेटिंग वाले / क्वालीफ़ाई किए GM
ग्रैंड चेस टूरन्योते वाले आयोजनों की सीरीज़हर साल2024 के विजेता: फ़ैबियानो कारुआनाटूर में बुलाए गए खिलाड़ी (रेटिंग + वाइल्ड कार्ड)
FIDE विश्व कपनॉकआउट, 206 खिलाड़ीहर 2 साल (क्वालीफ़ाइंग आयोजन)2023: मैग्नस कार्लसनज़ोनल के ज़रिए क्वालीफ़ाई करने वालों के लिए खुला

शतरंज ओलंपियाड — छोटा इतिहास

शतरंज ओलंपियाड 1927 (लंदन) से हो रहा है, बीच में दूसरे विश्व युद्ध के कारण थोड़ा रुका। 1948 से 1990 तक सोवियत संघ का दबदबा रहा — उसने 19 में से 18 ओलंपियाड जीते। सोवियत संघ टूटने के बाद रूस, अमेरिका, आर्मीनिया, चीन और अब भारत ने सबसे बड़े सम्मान बाँटे हैं। भारत ने 44वाँ ओलंपियाड 2022 में चेन्नई में कराया — भारत में हुआ पहला ओलंपियाड — और दोहरा कांस्य जीता। दो साल बाद बुडापेस्ट में वही कांस्य स्वर्ण में बदल गया।

भारत शतरंज की ताक़त कैसे बना — नीति और पाइपलाइन का नज़रिया

भारत के शतरंज में उठान का श्रेय कई बार एक ही नाम को दे दिया जाता है — विश्वनाथन आनंद — लेकिन 2024 का दोहरा स्वर्ण तीस साल में बने पूरे तंत्र का नतीजा है। आनंद के 1988 के GM ख़िताब और 2000 से 2012 के बीच उनकी पाँच विश्व चैंपियनशिप ने देश में इस खेल को मान्यता और टीवी कवरेज दिलाई। इसके इर्द-गिर्द परत-दर-परत ढाँचा खड़ा हुआ: तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में राज्य स्तर की अकादमियाँ; वेस्टब्रिज आनंद चेस अकादमी (WACA) जैसे निजी कोचिंग नेटवर्क; और ऑनलाइन रैपिड प्लैटफ़ॉर्म, जिन्होंने स्कूल की उम्र के खिलाड़ियों की ताक़त की ऊपरी सीमा ही बढ़ा दी।

तीन नीतिगत क़दमों ने इस तंत्र को और मज़बूत किया। खेलो इंडिया ने 2019 में शतरंज को एक विषय के तौर पर मान्यता दी, जिससे छात्रवृत्ति और यात्रा अनुदान खुले। टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) ने चुनिंदा खिलाड़ियों को अपनी मदद सूची में जोड़ा। राज्यों की मदद — तमिलनाडु ने 2022 में 44वाँ ओलंपियाड कराया और 2024 के कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए ज़ोरदार दावेदारी की — इसने लंबे समय के राजनीतिक समर्थन का संकेत दिया। 2024 तक भारत में 85 से ज़्यादा ग्रैंडमास्टर थे, चार खिलाड़ी दुनिया के टॉप-25 में थे, और महिला टीम में दुनिया की पूर्व टॉप-5 की दो खिलाड़ी (हम्पी और हरिका) के साथ 25 साल से कम उम्र की तीन उभरती खिलाड़ी थीं।

FIDE का ढाँचा

भारतीय ग्रैंडमास्टर — ख़िताब के साल की तालिका

भारत में ग्रैंडमास्टरों की गिनती 2024 में 85 के पार चली गई — एक दशक में यह संख्या लगभग तीन गुना हुई है। परीक्षा के लिहाज़ से सबसे काम के नाम नीचे दिए हैं।

#ग्रैंडमास्टरGM बनने का सालख़ास पहचान
1विश्वनाथन आनंद1988पहले भारतीय GM; 5 बार विश्व चैंपियन (2000, 2007, 2008, 2010, 2012)
2दिब्येंदु बरुआ1991दूसरे भारतीय GM
3प्रवीण ठिप्से1997अर्जुन पुरस्कार विजेता; लंबे समय तक टीम का आधार
4कृष्णन शशिकिरण2000कई ओलंपियाड पदक विजेता
कोनेरू हम्पी2002उस समय इतिहास की सबसे कम उम्र की महिला GM; 2019 विश्व रैपिड चैंपियन
पेंटाला हरिकृष्णा2001लंबे समय तक भारत के टॉप-10 में
परिमार्जन नेगी2006उस समय दुनिया के दूसरे सबसे कम उम्र के GM
अभिजीत गुप्ता20082008 के विश्व जूनियर चैंपियन
आर. प्रज्ञानानंदा2018विश्व नंबर 1 को चुनौती देने की राह पर; 2023 FIDE विश्व कप के फ़ाइनलिस्ट
डी. गुकेश2019विश्व शतरंज चैंपियन 2024; सबसे कम उम्र में
निहाल सरीन2018कई साल दुनिया में U-16 की सबसे ऊँची रेटिंग
अर्जुन एरिगैसी2018क्लासिकल में विश्व नंबर 4 (नवंबर 2024); ओलंपियाड में व्यक्तिगत स्वर्ण
आर. वैशाली2024भारत की पहली बहन-भाई GM जोड़ी (प्रज्ञानानंदा के साथ)
दिव्या देशमुख2024महिला ओलंपियाड में व्यक्तिगत स्वर्ण; उभरती जूनियर खिलाड़ी

अभ्यास MCQ — गांधी शांति पुरस्कार, खो-खो, शतरंज ओलंपियाड

1. गांधी शांति पुरस्कार की जूरी के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: (1) जूरी की अध्यक्षता भारत के राष्ट्रपति करते हैं। (2) भारत के मुख्य न्यायाधीश पदेन सदस्य हैं। (3) लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सदस्य हैं। इनमें कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  1. केवल (1)
  2. केवल (2) और (3)
  3. केवल (1) और (3)
  4. (1), (2) और (3)

उत्तर: केवल (2) और (3)

जूरी की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं, राष्ट्रपति नहीं। CJI और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सदस्य हैं, साथ में दो मनोनीत प्रतिष्ठित व्यक्ति भी।

2. गांधी शांति पुरस्कार किस साल शुरू हुआ और इसे कौन-सा मंत्रालय चलाता है?

  1. 1969; विदेश मंत्रालय
  2. 1995; संस्कृति मंत्रालय
  3. 1995; गृह मंत्रालय
  4. 2000; शिक्षा मंत्रालय

उत्तर: 1995; संस्कृति मंत्रालय

यह 1995 में गांधी की 125वीं जयंती पर शुरू हुआ; इसे संस्कृति मंत्रालय चलाता है।

3. साल 2021 का गांधी शांति पुरस्कार (ऐलान 2023 में) इनमें से किसे मिला?

  1. माता अमृतानंदमयी
  2. गीता प्रेस, गोरखपुर
  3. ISRO
  4. शेख़ मुजीबुर रहमान

उत्तर: गीता प्रेस, गोरखपुर

गीता प्रेस ने 2021 का पुरस्कार जीता; माता अमृतानंदमयी 2023 की विजेता थीं।

4. पहले खो-खो विश्व कप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: (1) यह जनवरी 2025 में नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में हुआ। (2) भारत ने फ़ाइनल में बांग्लादेश को हराकर पुरुष और महिला, दोनों ख़िताब जीते। इनमें कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  1. केवल (1)
  2. केवल (2)
  3. (1) और (2) दोनों
  4. न (1) न (2)

उत्तर: केवल (1)

भारत ने पुरुष और महिला, दोनों फ़ाइनल में नेपाल को (बांग्लादेश को नहीं) 78–40 से हराया।

5. 2024 में 45वाँ FIDE शतरंज ओलंपियाड कहाँ हुआ?

  1. चेन्नई, भारत
  2. सिंगापुर
  3. बुडापेस्ट, हंगरी
  4. अस्ताना, कज़ाख़िस्तान

उत्तर: बुडापेस्ट, हंगरी

यह 10–22 सितंबर 2024 को बुडापेस्ट में हुआ। 44वाँ ओलंपियाड (2022) चेन्नई में हुआ था।

6. दिसंबर 2024 में सबसे कम उम्र के निर्विवाद विश्व शतरंज चैंपियन बनने के लिए डी. गुकेश ने किसे हराया?

  1. रूस के इयान नेपोम्नियाश्ची
  2. नॉर्वे के मैग्नस कार्लसन
  3. चीन के डिंग लिरेन
  4. अमेरिका के फ़ैबियानो कारुआना

उत्तर: चीन के डिंग लिरेन

गुकेश ने 12 दिसंबर 2024 को सिंगापुर में डिंग लिरेन को 7.5–6.5 से हराया।

7. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: (1) भारत ने 45वें शतरंज ओलंपियाड के ओपन और महिला, दोनों वर्गों में टीम स्वर्ण जीता। (2) शतरंज ओलंपियाड और FIDE विश्व शतरंज चैंपियनशिप एक ही जुड़े हुए आयोजन के तौर पर कराए जाते हैं। (3) अर्जुन एरिगैसी ने बुडापेस्ट 2024 में भारत के लिए व्यक्तिगत बोर्ड स्वर्ण जीता। इनमें कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  1. केवल (1)
  2. केवल (1) और (3)
  3. केवल (2) और (3)
  4. (1), (2) और (3)

उत्तर: केवल (1) और (3)

ओलंपियाड (टीम आयोजन) और विश्व चैंपियनशिप (आमने-सामने का मुक़ाबला) FIDE के अलग-अलग आयोजन हैं। भारत ने बुडापेस्ट में दोनों टीम स्वर्ण जीते; गुकेश और अर्जुन एरिगैसी ने व्यक्तिगत बोर्ड स्वर्ण जीते।

सामान्य प्रश्न

गांधी शांति पुरस्कार की जूरी की अध्यक्षता कौन करता है?

पाँच सदस्यों वाली गांधी शांति पुरस्कार जूरी की अध्यक्षता भारत के प्रधानमंत्री करते हैं। बाक़ी सदस्य हैं भारत के मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और इसी काम के लिए मनोनीत दो प्रतिष्ठित व्यक्ति। भारत के राष्ट्रपति जूरी के सदस्य नहीं हैं — राष्ट्रपति आम तौर पर पुरस्कार देते हैं।

पहला खो-खो विश्व कप कब और कहाँ हुआ?

पहला खो-खो विश्व कप 13–19 जनवरी 2025 को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में हुआ। इसमें 24 देश और पुरुष तथा महिला वर्ग में मिलाकर 600 से ज़्यादा खिलाड़ी उतरे।

पहला खो-खो विश्व कप कौन जीता?

भारत ने पुरुष और महिला, दोनों ख़िताब जीते। 19 जनवरी 2025 के पुरुष फ़ाइनल में भारत ने नेपाल को 78–40 से हराया। भारत की महिला टीम ने भी महिला फ़ाइनल में नेपाल को हराकर पूरी झाड़ू लगा दी।

45वाँ शतरंज ओलंपियाड 2024 कहाँ हुआ?

45वाँ FIDE शतरंज ओलंपियाड बुडापेस्ट, हंगरी में 10–22 सितंबर 2024 को हुआ। इसमें ओपन और महिला वर्ग में मिलाकर 190 से ज़्यादा फ़ेडरेशन खेलीं।

क्या भारत ने 45वें शतरंज ओलंपियाड में टीम स्वर्ण जीता?

हाँ। इतिहास में पहली बार भारत ने एक ही शतरंज ओलंपियाड के ओपन और महिला, दोनों वर्गों में टीम स्वर्ण जीता — एक ऐतिहासिक दोहरी जीत, जो 2022 चेन्नई ओलंपियाड में मिले कांस्य पदकों से आगे की छलाँग थी।

विश्व शतरंज चैंपियन बनने के लिए गुकेश डोम्माराजू ने किसे हराया?

डी. गुकेश ने 12 दिसंबर 2024 को सिंगापुर में हुई FIDE विश्व शतरंज चैंपियनशिप 2024 में मौजूदा चैंपियन चीन के डिंग लिरेन को 7.5–6.5 से हराया और 18 साल की उम्र में सबसे कम उम्र के निर्विवाद विश्व शतरंज चैंपियन बने।

क्या गुकेश की विश्व चैंपियनशिप जीत शतरंज ओलंपियाड का हिस्सा थी?

नहीं। शतरंज ओलंपियाड (बुडापेस्ट, सितंबर 2024) और विश्व शतरंज चैंपियनशिप (सिंगापुर, नवंबर–दिसंबर 2024) FIDE के दो अलग आयोजन हैं। ओलंपियाड टीम चैंपियनशिप है; विश्व चैंपियनशिप चैंपियन और चुनौती देने वाले के बीच आमने-सामने का मुक़ाबला है।

गांधी शांति पुरस्कार कब और किसने शुरू किया?

गांधी शांति पुरस्कार भारत सरकार ने 1995 में महात्मा गांधी की 125वीं जयंती पर शुरू किया था। इसे संस्कृति मंत्रालय चलाता है और इसमें ₹1 करोड़ नक़द के साथ एक प्रशस्ति पत्र, एक पट्टिका और एक पारंपरिक हस्तशिल्प वस्तु दी जाती है।

2023 का गांधी शांति पुरस्कार किसे मिला?

साल 2023 के गांधी शांति पुरस्कार के लिए माता अमृतानंदमयी देवी (अम्मा) का नाम तय हुआ। उन्हें माता अमृतानंदमयी मठ के ज़रिए किए गए मानवीय और परमार्थ कार्यों के लिए यह सम्मान मिला।

खो-खो की शुरुआत परंपरागत रूप से किस भारतीय राज्य से मानी जाती है?

आधुनिक खो-खो की शुरुआत परंपरागत रूप से महाराष्ट्र से मानी जाती है। पहले औपचारिक नियम 1914 में डेक्कन जिमखाना, पुणे ने बनाए, और खो खो फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया 1955–56 में बना।

मुख्य बातें