आगरा का किला: अकबर का लाल बलुआ पत्थर वाला गढ़ और शाहजहाँ के संगमरमर के महल
आगरा का किला: 1565-1573 में अकबर का लाल बलुआ पत्थर वाला पुनर्निर्माण, शाहजहाँ के संगमरमर के महल, यहीं उनकी कैद और लाल किले से जुड़ी आम उलझन।
आगरा का किला उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में यमुना के किनारे बना मुगलों का दीवारों से घिरा गढ़ है। यह ताजमहल के बागों के पास ही है। एक पुराने किले की जगह पर अकबर ने इसे 1565 से 1573 के बीच लाल बलुआ पत्थर में दोबारा बनवाया। बाद में उनके पोते शाहजहाँ ने अंदर का ज्यादातर हिस्सा हटाकर सफेद संगमरमर के महल खड़े किए। UNESCO ने 1983 में इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल किया। और यही वह किला है, जहाँ शाहजहाँ ने अपनी जिंदगी के आखिरी 8 साल अपने ही बेटे औरंगजेब के कैदी बनकर बिताए।
इस किले को लेकर ज्यादातर लोगों के मन में एक गलत तस्वीर बैठी है, और इसकी वजह इसका नाम है। आगरा का किला और दिल्ली का लाल किला, दोनों को लाल किला कहा जाता है। दोनों ही यमुना किनारे बने लाल बलुआ पत्थर के मुगल किले हैं, इसलिए दिमाग में दोनों घुल-मिलकर एक ही इमारत बन जाते हैं। लेकिन ये एक किला नहीं हैं। आगरा वाला किला अकबर का है, जिसका काम 1565 में शुरू हुआ और जिसे बाद में शाहजहाँ ने नए सिरे से सजाया। दिल्ली वाला किला शाहजहाँ का अपना है, जो 1639 में उनकी नई राजधानी के लिए शुरू हुआ। इस पहली उलझन के साथ एक दूसरी, छोटी उलझन भी चलती है: 1666 में छत्रपति शिवाजी महाराज का बच निकलना आगरा में हुआ था, लेकिन इस किले के अंदर से नहीं।
आगरा का किला क्या है और इसे किसने बनवाया
आगरा का किला किसने बनवाया, इसका छोटा जवाब यह है: यह लाल बलुआ पत्थर की दीवारों के घेरे में बसा मुगलों का एक महल-शहर है। इसे अकबर ने एक पुरानी जगह पर खड़ा किया, और शाहजहाँ ने संगमरमर से इसका काम पूरा किया। UNESCO अपने विवरण में इसे आगरा का लाल किला कहता है। उसके मुताबिक इसकी चारदीवारी करीब 2.5 किलोमीटर लंबी है, और उसके भीतर मुगल शासकों का शाही शहर बसा है।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| स्थान | आगरा, उत्तर प्रदेश; यमुना के किनारे, ताजमहल के बागों के पास |
| यहाँ पहले का किला | बादलगढ़; सिकंदर लोदी पहले ही आगरा को अपनी राजधानी बना चुके थे |
| दोबारा किसने बनवाया | अकबर ने, 1565 से 1573 के बीच, लाल बलुआ पत्थर में |
| बाद का बड़ा निर्माता | शाहजहाँ: सफेद संगमरमर के महल और संगमरमर की तीन मस्जिदें |
| दीवारें | करीब 2.5 किलोमीटर लंबी (UNESCO); किले की दीवार 21.4 मीटर ऊँची (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, यानी ASI); खाई 9 मीटर चौड़ी और 10 मीटर गहरी (उत्तर प्रदेश सरकार) |
| किस तरह का किला | नदी किनारे बना जमीनी किला, जिसके भीतर पूरा महल-शहर है; नक्शा अर्धचंद्राकार, यानी आधे चाँद की शक्ल का |
| संरक्षण | ASI के तहत केंद्र सरकार से संरक्षित; किले का एक हिस्सा आज भी भारतीय सेना के इस्तेमाल में |
| UNESCO दर्जा | 1983 में 7वें सत्र (फ्लोरेंस) में सूची में शामिल, मानदंड (iii) |
| किस बात के लिए जाना जाता है | जहाँगीरी महल, खास महल और दीवान-ए-खास; 1658 से 1666 तक शाहजहाँ की कैद |
इस तालिका का एक आँकड़ा अक्सर गलत दोहराया जाता है। UNESCO का 2.5 किलोमीटर किले की चारदीवारी की लंबाई है, किले से ताजमहल की दूरी नहीं। फिर भी इंटरनेट पर इसे कई बार दूरी बताकर दोहरा दिया जाता है। याद रखिए, यह आँकड़ा दीवारों का है।
अकबर से पहले आगरा में क्या था
आगरा किले का इतिहास अकबर से शुरू नहीं होता, क्योंकि अकबर ने किसी खाली नदी-किनारे पर काम शुरू नहीं किया था। ASI के रिकॉर्ड के मुताबिक उन्होंने बादलगढ़ नाम की एक पुरानी जगह के अवशेषों पर निर्माण किया। उत्तर प्रदेश सरकार का इस किले वाला पेज भी बताता है कि अकबर के दरबारी इतिहासकार अबुल फजल ने आगरा में मुगलों से पहले के एक पुराने किले का जिक्र किया है। उसे सबसे पहले किसने बनवाया, यह अब तक तय नहीं है। और एक सधा हुआ जवाब इस सवाल को ऐसे ही खुला छोड़ देता है।
इतना जरूर साफ है कि लोदियों के दौर में आगरा का कद बढ़ा। ASI के मुताबिक सिकंदर लोदी दिल्ली के पहले सुल्तान थे, जो अपनी राजधानी आगरा ले गए। इससे यह शहर लोदी राजवंश की गद्दी बन गया। 1526 में जब इब्राहिम लोदी पानीपत की पहली लड़ाई में बाबर से हारे, तब भी आगरा ही लोदियों की राजधानी था। यह इतिहास का एक बड़ा मोड़ था, जिसे पानीपत की लड़ाइयों वाले नोट में समझाया गया है।
इसके बाद जैसे-जैसे साम्राज्य बदला, किला भी हाथ बदलता रहा। पानीपत के बाद आगरा मुगलों के कब्जे में आ गया। 1540 में हुमायूँ उत्तर भारत शेरशाह सूरी के हाथों गँवा बैठे। ब्रिटानिका के मुताबिक वे दिल्ली और आगरा को जुलाई 1555 में जाकर ही वापस ले पाए, यानी अपनी मौत से करीब छह महीने पहले। इसलिए 1556 में जब अकबर गद्दी पर बैठे, तो उन्हें विरासत में मिला यह किला तीन अलग-अलग हुकूमतें देख चुका था।
अकबर ने किले को दोबारा कैसे बनवाया, और इसमें कितना समय लगा
अकबर ने 1565 में किले को दोबारा बनाने का हुक्म दिया। काम कितना बड़ा था, यह ASI के आँकड़ों से समझिए: हर दिन करीब 4,000 कारीगर इस पर काम करते थे, और 8 साल में, यानी 1573 में, किला बनकर तैयार हो गया। नया निर्माण लाल बलुआ पत्थर में हुआ, और किले की दीवार 21.4 मीटर ऊँची उठाई गई। अकबर ने जो बनाया, वह किसी गढ़ से ज्यादा दीवारों के भीतर बसा एक महल-शहर था। UNESCO आज भी इसे इसी रूप में बताता है।
अकबर के समय का अंदरूनी हिस्सा बहुत कम बचा है, और यह बात ज्यादातर लोगों को चौंकाती है। बाद में शाहजहाँ ने उसका ज्यादातर हिस्सा संगमरमर से बदल दिया। उत्तर प्रदेश सरकार का किले वाला पेज अकबर के दौर की वे इमारतें गिनाता है, जो आज भी खड़ी हैं:
- दिल्ली दरवाजा
- अमर सिंह दरवाजा, जो आज सैलानियों के लिए अकेला प्रवेश द्वार है
- अकबरी महल
- जहाँगीरी महल
सबसे ज्यादा धोखा जहाँगीरी महल का नाम देता है। इस पर अकबर के बेटे जहाँगीर का नाम है, लेकिन यह अकबर के निर्माण-अभियान का हिस्सा है। UNESCO का जापानी भाषा वाला सारांश भी इसे अकबर के समय का ही बताता है। किले के लाल बलुआ पत्थर वाले दौर का सबसे साफ बचा हुआ नमूना यही है। इसलिए जब सवाल पूछे कि संगमरमर आने से पहले अकबर का आगरा कैसा दिखता था, तो इसी इमारत का हवाला दीजिए।
शाहजहाँ ने क्या बदला, और किला सफेद क्यों हो गया
आज आप जिस किले में घूमते हैं, वह ज्यादातर शाहजहाँ का बनाया हुआ है। ASI के मुताबिक उन्होंने अकबर की दीवारों के भीतर सफेद संगमरमर के महल खड़े किए, और सफेद संगमरमर की तीन मस्जिदें बनवाईं:
- मोती मस्जिद (अंग्रेजी में Pearl Mosque)
- नगीना मस्जिद
- मीना मस्जिद
UNESCO के विवरण में खास महल का नाम है, जिसे शाहजहाँ ने अपने निजी महल के तौर पर बनवाया। उसमें दीवान-ए-खास का नाम भी है। यह खास लोगों से मिलने का दरबार था, जहाँ बादशाह भीड़ से दूर सरदारों और राजदूतों से मिलते थे। आम लोगों से मिलने का दरबार, यानी दीवान-ए-आम, उत्तर प्रदेश वाले पेज के मुताबिक शाहजहाँ ने 1628 में बनवाया था, उसी साल जब वे गद्दी पर बैठे। लेकिन वह पेज इस साल के साथ “कहा जाता है” जोड़कर सावधानी बरतता है। आपके जवाब में भी यही सावधानी दिखनी चाहिए।
संगमरमर ही क्यों? शाहजहाँ को ऐसा सफेद संगमरमर पसंद था, जिसमें रंगीन पत्थर जड़े हों। यहाँ के महलों से लेकर पास के ताजमहल तक, हर जगह यही पसंद दिखती है, और इसी हिसाब से उन्होंने नदी की तरफ वाले रिहायशी हिस्सों को भी नए सिरे से सजाया। आपके जवाबों के लिए असली बात यह है कि यह किला एक ही परकोटे के भीतर मुगल वास्तुकला के दो दौर दिखाता है: अकबर के बलुआ पत्थर की मजबूती और शाहजहाँ के संगमरमर की नफासत।
फिर शाहजहाँ आगरा छोड़कर चले गए। 1638 में वे राजधानी आगरा से दिल्ली ले गए और शाहजहाँनाबाद की नींव रखी। ASI के मुताबिक वहाँ का लाल किला 1639 में शुरू हुआ और नौ साल बाद पूरा हुआ। आगरा एक बड़ा शाही शहर बना रहा, लेकिन दरबार अब यहाँ नहीं लगता था।
शाहजहाँ की कैद और शिवाजी का आगरा आना
इस किले का सबसे इंसानी अध्याय तब आया, जब शाहजहाँ बीमार पड़े और उनके बेटे गद्दी के लिए आपस में लड़ पड़े। इस लड़ाई में औरंगजेब जीते। ASI का सारांश बिना लाग-लपेट के बताता है कि औरंगजेब ने अपने पिता को 8 साल तक इसी किले में कैद रखा, जब तक 1666 में शाहजहाँ की मौत नहीं हो गई।
परंपरा के मुताबिक ये साल मुसम्मन बुर्ज में बीते। यह किले की नदी वाली तरफ संगमरमर की आठ कोनों वाली मीनार है, जहाँ से ताजमहल दिखता है (मुसम्मन का मतलब ही है आठ कोनों वाला)। कैद की बात रिकॉर्ड में दर्ज है। लेकिन ठीक यही मीनार कैद की जगह थी, यह बात परंपरा से आती है, और जवाब में इसे परंपरा कहकर ही लिखना चाहिए।
शिवाजी का आगरा आना भी इसी साल की घटना है। मिर्जा राजा जय सिंह के अभियान के बाद शिवाजी ने कुछ शर्तें मानी थीं। उन्हीं शर्तों के तहत शिवाजी 1666 में आगरा में औरंगजेब के दरबार में आए, ताकि उन्हें मुगलों के अधीन सरदार के रूप में स्वीकार किया जाए। 2025 की खबरों में जिन इतिहासकार का हवाला दिया गया, वे इस मुलाकात की तारीख 12 मई 1666 बताते हैं, और जगह किले का दीवान-ए-खास। दरबार में शिवाजी को अपनी बेइज्जती महसूस हुई और उन्होंने विरोध जताया। इसके बाद उन्हें नजरबंद कर दिया गया। ब्रिटानिका की तारीख के मुताबिक 17 अगस्त 1666 को शिवाजी और उनके बेटे मिठाई की टोकरियों में छिपकर पहरेदारों के सामने से बाहर निकल गए।
असली सुधार यहीं करना है। शिवाजी को जिस मकान में रखा गया था, वह शहर में था, किले के अंदर नहीं। परंपरा उस जगह को कोठी मीना बाजार से जोड़ती है। मार्च 2025 में महाराष्ट्र सरकार ने वहाँ स्मारक बनाने के लिए वह जमीन लेने का सरकारी प्रस्ताव जारी किया, और राज्य के पर्यटन निगम को इसकी नोडल एजेंसी बनाया। इसलिए आगरा के किले की कहानी में शिवाजी की जगह दरबार में आए मेहमान की है, उसकी मीनारों में बंद कैदी की नहीं।
मुगलों के बाद आगरा का किला, और 1857
18वीं सदी में किले की किस्मत आगरा शहर की किस्मत के साथ बंधी रही। ब्रिटानिका में दिए शहर के इतिहास के मुताबिक आगरा कई हाथों से गुजरा, जिनमें जाट और मराठा भी थे। फिर 1803 में दूसरे आंग्ल-मराठा युद्ध में अंग्रेजों ने इसे ले लिया। 30 दिसंबर 1803 को हुई सुर्जी-अर्जुनगाँव की संधि ने आगरा पर ईस्ट इंडिया कंपनी का कब्जा पक्का कर दिया। इस कहानी का मराठा पक्ष मराठा साम्राज्य वाले नोट में है।
1857 में यह किला शरणस्थल बन गया। जब विद्रोह आगरा पहुँचा, तो अंग्रेजी फौज की टुकड़ी और शहर की ईसाई आबादी ने इसकी दीवारों के भीतर पनाह ली। डिक्शनरी ऑफ नेशनल बायोग्राफी के मुताबिक उत्तर-पश्चिमी प्रांतों के लेफ्टिनेंट-गवर्नर जॉन रसेल कॉल्विन किले में जाने से ठीक पहले बीमार पड़ गए थे। 9 सितंबर 1857 को उनकी मौत हुई, और अगली सुबह उन्हें किले के अंदर ही दफनाया गया। पूरे विद्रोह की कहानी 1857 के विद्रोह वाले नोट में है।
मुगलों का यह महल-शहर इन सदियों को पार करते हुए सही-सलामत नहीं बचा। UNESCO के जापानी भाषा वाले सारांश के मुताबिक दरबार के दिल्ली चले जाने के बाद किले की रौनक फीकी पड़ गई। बाद के विद्रोहों ने, और यहाँ अंग्रेजी फौज की तैनाती ने, इसे और घिस दिया।
आगरा के किले की सुरक्षा कैसे काम करती है: हमलावर का रास्ता
किले को उसी क्रम में देखिए, जिस क्रम में कोई हमलावर उससे टकराता, तो इसका डिजाइन अपने आप समझ में आ जाता है। हर परत का काम था हमलावर की रफ्तार तोड़ना, या उसे सीधे निशाने पर ले आना।
खाई। उत्तर प्रदेश सरकार का पेज बाहरी दीवार के चारों ओर 9 मीटर चौड़ी और 10 मीटर गहरी खाई बताता है। पत्थर की दीवार को छूने से पहले किसी भी फौज को ऊपर से हो रही गोलीबारी के बीच यह खाई भरनी पड़ती, या इस पर पुल बनाना पड़ता।
दीवारें। किले को लाल बलुआ पत्थर के दोहरे कंगूरेदार परकोटे घेरे हुए हैं, और थोड़ी-थोड़ी दूरी पर बुर्ज (bastion) बने हैं। कंगूरेदार (castellated) का मतलब है कि दीवार के सिरे पर कंगूरे बने हों: ठोस पत्थर के उभार, जिन्हें मर्लन (merlon) कहते हैं, और उनके बीच-बीच में गोली चलाने के लिए खाली जगह। बुर्ज दीवार की सीध से बाहर निकली हुई मीनार जैसी बनावट होती है। इस पर खड़े सिपाही दीवार के सामने वाले हिस्से के साथ-साथ गोली चलाकर हर उस आदमी को निशाना बना सकते थे, जो दीवार पर चढ़ने की कोशिश करे। ASI किले की दीवार की ऊँचाई 21.4 मीटर बताता है, और उत्तर प्रदेश वाला पेज इसके पीछे 22 मीटर की एक भीतरी दीवार का जिक्र करता है।
दरवाजा। वही पेज बताता है कि अमर सिंह दरवाजे से होकर जाने वाला रास्ता कोहनी की तरह मुड़ा हुआ (dog-legged) है। यही मोड़ मुगल दरवाजों के डिजाइन की जान है। हमला करती टुकड़ी हो, या फाटक तोड़ने के लिए भेजा गया हाथी, मुड़ते रास्ते पर कोई भी रफ्तार नहीं पकड़ पाता। और मुड़ते वक्त उसका बगल वाला हिस्सा ऊपर की दीवारों के सामने खुला रह जाता है। ASI के मुताबिक किले में कुल चार दरवाजे हैं, हर तरफ एक। इनमें दिल्ली दरवाजा और अमर सिंह दरवाजा, दोनों अकबर के समय से बचे हुए हैं।
महल। दरवाजों के पार पहुँचते ही नक्शे का मिजाज बदल जाता है। किला अर्धचंद्राकार है, यानी आधे चाँद की शक्ल का। पूरब की तरफ यह चपटा है, जहाँ नदी के सामने एक लंबी, लगभग सीधी दीवार खड़ी है। उत्तर प्रदेश वाला पेज बताता है कि किले का नक्शा नदी के बहाव ने तय किया। शाही रिहायशी हिस्से इसी नदी वाले मोर्चे पर बने, इसलिए उनके छज्जे शहर की तरफ नहीं, पानी की तरफ खुलते हैं।
वे इमारतें, जिनके नाम आपको याद होने चाहिए
ज्यादातर अंक गिनती के कुछ नामों से ही आते हैं। हर नाम को उसके बनवाने वाले या उसके इस्तेमाल के साथ याद कीजिए:
- जहाँगीरी महल: नाम के बावजूद, अकबर के समय का लाल बलुआ पत्थर वाला महल।
- खास महल: शाहजहाँ का सफेद संगमरमर वाला निजी महल।
- मुसम्मन बुर्ज: नदी वाली दीवार पर संगमरमर की आठ कोनों वाली मीनार, जिसे परंपरा शाहजहाँ के आखिरी सालों से जोड़ती है।
- दीवान-ए-खास: खास लोगों से मिलने का दरबार।
- दीवान-ए-आम: आम लोगों से मिलने का दरबार। इसे शाहजहाँ का बनवाया माना जाता है, 1628 के साल के साथ, लेकिन स्रोत इस साल पर पक्की मुहर नहीं लगाते।
- मोती मस्जिद: शाहजहाँ की सफेद संगमरमर वाली मस्जिद। इसे उस मोती मस्जिद से मत मिलाइए, जिसे औरंगजेब ने दिल्ली के लाल किले में जोड़ा था।
इस शब्दावली में एक शब्द और जोड़ लीजिए। झरोखा दीवार से बाहर निकली हुई छज्जेदार खिड़की होती थी, जहाँ से मुगल बादशाह अपनी प्रजा को दर्शन देते थे। झरोखे पर आकर दर्शन देने की यह रस्म, यानी झरोखा दर्शन, इस बात को तय करती थी कि मुगल महलों का मुँह जनता की तरफ किस तरह खुले।
आज का आगरा किला: UNESCO दर्जा, सेना और प्रवेश
आगरा का किला 1983 में विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ। यह फैसला फ्लोरेंस में हुए विश्व धरोहर समिति के 7वें सत्र में हुआ, और इसके लिए सिर्फ एक मानदंड, (iii), लगाया गया। आसान शब्दों में, मानदंड (iii) उस जगह को मान्यता देता है, जो किसी सांस्कृतिक परंपरा या सभ्यता का असाधारण सबूत हो। यहाँ वह परंपरा मुगल बादशाहों की दरबारी संस्कृति है। इसकी सूची UNESCO विश्व धरोहर केंद्र की साइट पर है, और यह किला भारत के UNESCO विश्व धरोहर स्थलों वाली बड़ी सूची में भी शामिल है।
यह किला ASI के तहत केंद्र सरकार से संरक्षित है। साथ ही इसका एक हिस्सा आज भी चालू फौजी ठिकाना है। आगरा पर्यटन की आधिकारिक साइट बताती है कि किले का एक हिस्सा अब भी भारतीय सेना के इस्तेमाल में है और आम लोगों के लिए बंद है, और सैलानी सिर्फ अमर सिंह दरवाजे से अंदर जा सकते हैं। इसीलिए आम लोग किले का सिर्फ एक हिस्सा ही देख पाते हैं।
UNESCO के रिकॉर्ड में 1997 से 2013 के बीच आठ अलग-अलग सालों की संरक्षण-स्थिति रिपोर्टें भी दर्ज हैं। मतलब, समिति ने किले की हालत पर एक से ज्यादा बार दोबारा गौर किया है।
परीक्षा के लिए आगरा का किला कैसे पढ़ें
आगरा का किला सिलेबस के तीन हिस्सों को छूता है:
- मध्यकालीन इतिहास: लोदियों का राजधानी आगरा ले जाना; अकबर और शाहजहाँ के समय की मुगल राजधानी; औरंगजेब की उत्तराधिकार की लड़ाई।
- कला और संस्कृति: अकबर के लाल बलुआ पत्थर से शाहजहाँ के संगमरमर तक का बदलाव।
- धरोहर सूचियाँ: भारत के सबसे पहले विश्व धरोहर स्थलों में से एक, जो 1983 में सूची में आया।
ऑप्शनल पेपर में ठीक यही जमीन परखी जा चुकी है। इतिहास ऑप्शनल 2023, पेपर I में पूछा गया था: “मुगल वास्तुकला का स्वरूप समन्वयवादी था। टिप्पणी कीजिए।” उसी पेपर में यह प्रश्न भी था: “अकबर के अधीन मुगल राज्य की प्रकृति पर चर्चा कीजिए।” पहले प्रश्न में आगरा का किला सीधे काम आता है, क्योंकि इसके निर्माण के दो दौर दिखाते हैं कि अकबर से शाहजहाँ तक आते-आते मुगल डिजाइन कैसे बदला। और दूसरे प्रश्न को यह किला एक ठोस जमीन देता है।
दोहराने के लिए ये तथ्य याद रखिए:
- बादलगढ़ इस जगह पर बना पुराना किला था; सिकंदर लोदी ने आगरा को राजधानी बनाया।
- अकबर ने इसे 1565 से 1573 के बीच लाल बलुआ पत्थर में दोबारा बनवाया, और रोज करीब 4,000 कारीगर इस पर काम करते थे।
- जहाँगीरी महल अकबर वाले दौर का है, नाम चाहे जो कहे।
- शाहजहाँ ने संगमरमर के महल और संगमरमर की तीन मस्जिदें जोड़ीं, जिनमें मोती मस्जिद भी है।
- औरंगजेब ने शाहजहाँ को 1658 से 1666 में उनकी मौत तक यहीं कैद रखा।
- UNESCO: 1983 में सूची में शामिल, मानदंड (iii), चारदीवारी करीब 2.5 किलोमीटर।
- किले का एक हिस्सा आज भी भारतीय सेना के पास है; सैलानी अमर सिंह दरवाजे से अंदर जाते हैं।
सबसे बड़ी उलझन दिल्ली के लाल किले से होती है। दोनों को बिंदु-दर-बिंदु अलग रखिए:
| बिंदु | आगरा किला | लाल किला, दिल्ली |
|---|---|---|
| मुख्य निर्माता | अकबर, 1565 से 1573; बाद में शाहजहाँ ने नए सिरे से सजाया | शाहजहाँ; 1639 में शुरू, 1648 में पूरा |
| किस राजधानी का किला | आगरा, 1638 से पहले | शाहजहाँनाबाद, 1638 से |
| मोती मस्जिद | शाहजहाँ ने बनवाई | बाद में औरंगजेब ने जोड़ी |
| 1857 में | अंग्रेजी फौज का शरणस्थल | विद्रोहियों का केंद्र; बाद में यहीं बहादुर शाह जफर पर मुकदमा चला |
| UNESCO | 1983, मानदंड (iii) | 2007, सलीमगढ़ के साथ लाल किला परिसर के रूप में, मानदंड (ii), (iii) और (vi) |
दो छोटी उलझनें भी एक-एक लाइन की हकदार हैं:
- शिवाजी और किला। शिवाजी को आगरा के दरबार में बुलाया गया और शहर में नजरबंद रखा गया; वे किले से नहीं भागे थे।
- 2.5 किलोमीटर का आँकड़ा। यह दीवारों की लंबाई है, ताजमहल तक की दूरी नहीं।
आगरा का किला वह इकलौती इमारत है, जहाँ एक ही दीवारों के भीतर आप मुगल वास्तुकला को अपना मन बदलते देख सकते हैं: अकबर के लाल पत्थर से शाहजहाँ के संगमरमर तक। इसे दो निर्माता और एक कैदी के रूप में याद कीजिए, फिर यह लाल किले में घुल-मिलकर धुंधला नहीं पड़ेगा। इसके बाद दोनों किलों की तुलना मुगल वास्तुकला पर लिखे जा सकने वाले सबसे भरोसेमंद जवाबों में से एक बन जाती है।
सामान्य प्रश्न
आगरा का किला किसने बनवाया?
अकबर ने आगरा का किला 1565 से 1573 के बीच लाल बलुआ पत्थर में दोबारा बनवाया, और यह बादलगढ़ नाम के एक पुराने किले की जगह पर बना। बाद में उनके पोते शाहजहाँ ने अंदर का बड़ा हिस्सा सफेद संगमरमर के महलों और मस्जिदों से बदल दिया। इसलिए आज आप जो किला देखते हैं, वह दोनों का काम है।
आगरा का किला बनने में कितना समय लगा?
ASI के रिकॉर्ड के मुताबिक अकबर का पुनर्निर्माण 8 साल चला, 1565 से 1573 तक, और रोज करीब 4,000 कारीगर इस पर काम करते थे। शाहजहाँ के संगमरमर वाले काम बाद में हुए, 1638 में राजधानी दिल्ली ले जाने से पहले के सालों में।
क्या आगरा का किला और लाल किला एक ही हैं?
नहीं। आगरा का किला, जिसे UNESCO आगरा का लाल किला कहता है, अकबर ने 1565 से दोबारा बनवाया। दिल्ली का लाल किला शाहजहाँ ने 1639 से 1648 के बीच अपनी नई राजधानी शाहजहाँनाबाद के लिए बनवाया, और UNESCO ने उसे 2007 में अलग से सूची में शामिल किया।
क्या आगरा का किला UNESCO विश्व धरोहर स्थल है?
हाँ। UNESCO ने 1983 में मानदंड (iii) के तहत आगरा का किला विश्व धरोहर सूची में शामिल किया। यह फैसला फ्लोरेंस में विश्व धरोहर समिति के 7वें सत्र में हुआ। यह भारत के सबसे पहले विश्व धरोहर स्थलों में से एक था।
शाहजहाँ को कहाँ कैद रखा गया था?
औरंगजेब ने अपने पिता शाहजहाँ को 8 साल तक आगरा के किले में कैद रखा, जब तक 1666 में शाहजहाँ की मौत नहीं हो गई। परंपरा के मुताबिक उनके आखिरी साल मुसम्मन बुर्ज में बीते, जो नदी की तरफ बनी संगमरमर की आठ कोनों वाली मीनार है और जहाँ से ताजमहल दिखता है।
क्या शिवाजी आगरा के किले से भागे थे?
किले के अंदर से नहीं। शिवाजी मई 1666 में आगरा में औरंगजेब के दरबार में आए थे, और इसके बाद उन्हें शहर में नजरबंद रखा गया, उस जगह पर जिसे परंपरा कोठी मीना बाजार से जोड़ती है। 17 अगस्त 1666 को वे मिठाई की टोकरियों में छिपकर निकल भागे।
क्या सैलानी पूरा आगरा का किला देख सकते हैं?
नहीं। किले का एक हिस्सा आज भी भारतीय सेना के इस्तेमाल में है और आम लोगों के लिए बंद है। सैलानी सिर्फ अमर सिंह दरवाजे से अंदर जाते हैं, और खुले हिस्से में महल, दरबार और मस्जिदें देख सकते हैं।
अभ्यास प्रश्न
प्रीलिम्स MCQ
1. आगरा के किले के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर ने इसे 1565 से 1573 के बीच लाल बलुआ पत्थर में दोबारा बनवाया।
2. इसके अंदर का जहाँगीरी महल जहाँगीर के शासनकाल में बना था।
3. शाहजहाँ ने इसके अंदर मोती मस्जिद बनवाई।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 1 और 3
- (c) केवल 2 और 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b) नाम के बावजूद जहाँगीरी महल अकबर के निर्माण वाले दौर का है।
2. आगरा के किले को UNESCO की विश्व धरोहर सूची में किस वर्ष शामिल किया गया?
- (a) 1983
- (b) 1986
- (c) 1993
- (d) 2007
उत्तर: (a) आगरा का किला 1983 में सूची में शामिल हुआ; 2007 दिल्ली के लाल किला परिसर का वर्ष है।
3. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सिकंदर लोदी दिल्ली के पहले सुल्तान थे, जो अपनी राजधानी आगरा ले गए।
2. हुमायूँ ने 1555 में सूर शासकों से आगरा वापस ले लिया।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (c) ASI राजधानी आगरा ले जाने का श्रेय सिकंदर लोदी को देता है, और हुमायूँ ने जुलाई 1555 में दिल्ली और आगरा वापस लिए।
4. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?
- (a) मोती मस्जिद, लाल किला दिल्ली: शाहजहाँ
- (b) मोती मस्जिद, आगरा का किला: शाहजहाँ
- (c) जहाँगीरी महल, आगरा का किला: औरंगजेब
- (d) दीवान-ए-आम, आगरा का किला: बाबर
उत्तर: (b) आगरा की मोती मस्जिद शाहजहाँ ने बनवाई, जबकि दिल्ली के लाल किले की मोती मस्जिद औरंगजेब ने जोड़ी।
5. 1857 के विद्रोह के दौरान आगरा का किला किस रूप में काम आया?
- (a) विद्रोही सरकार के मुख्यालय के रूप में
- (b) अंग्रेजी फौज और आगरा की ईसाई आबादी के शरणस्थल के रूप में
- (c) बहादुर शाह जफर पर चले मुकदमे की जगह के रूप में
- (d) किसी मराठा सूबेदार की गद्दी के रूप में
उत्तर: (b) अंग्रेजी फौज और ईसाई आबादी ने किले में शरण ली, और लेफ्टिनेंट-गवर्नर कॉल्विन को इसके अंदर ही दफनाया गया।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
- आगरा के किले में एक ही परकोटे के भीतर मुगल वास्तुकला के दो दौर दर्ज हैं। अकबर और शाहजहाँ की इमारतों के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
- मुगल शाही ताकत की अभिव्यक्ति के रूप में आगरा के किले और दिल्ली के लाल किले की तुलना कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
- आगरा के किले की रक्षा वाली बनावट का परीक्षण कीजिए, और बताइए कि इसका नक्शा यमुना के हिसाब से कैसे ढला। (10 अंक, 150 शब्द)
- अकबर के धार्मिक समन्वयवाद के मुख्य पहलुओं का परीक्षण कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2025, GS पेपर I।
- जिस विश्व धरोहर किले का एक हिस्सा आज भी सेना के सक्रिय इस्तेमाल में है, उसके संरक्षण की चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)