Anantam IASHindi Note · 4 May 2026

बाग़वानी, इंद्रधनुषी क्रांति एवं द्वितीयक कृषि (Horticulture, Rainbow Revolution, Secondary Agriculture — UPSC)

इंद्रधनुषी क्रांति अनाज से आगे विविधीकरण लाती है। बाग़वानी प्लस, द्वितीयक कृषि, मधुमक्खी पालन की मीठी क्रांति, एवं 2024-26 के यूपीएससी अर्थव्यवस्था अद्यतन को समझिए।

भारत की हरित क्रांति (Green Revolution) ने खाद्य आत्मनिर्भरता प्रदान की, परंतु पंजाब, हरियाणा एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विशाल क्षेत्रों को जल-गहन धान-गेहूँ एकल फ़सल चक्र (rice-wheat monoculture) में बंद कर दिया। आगे का मार्ग — जिसे किसानों की आय दुगुनी करने पर अशोक दलवई समिति (2018) एवं उसके बाद की कृषि नीति ने स्पष्ट किया है — एक इंद्रधनुषी क्रांति (Rainbow Revolution) है, जो बाग़वानी, पशुपालन, मत्स्यपालन, मुर्गीपालन, मधुमक्खी पालन एवं द्वितीयक कृषि को परंपरागत अनाज खेती के साथ जोड़ती है। यूपीएससी इसका परीक्षण जीएस-III — प्रमुख फ़सलें, सहायक क्षेत्र, किसानों की आय दुगुनी करना, खाद्य प्रसंस्करण के अंतर्गत करता है।

हरित क्रांति की दूसरी पीढ़ी की समस्याएँ अब स्पष्ट हैं — मृदा क्षरण (soil degradation), भू-जल का अत्यधिक दोहन, उर्वरक/कीटनाशक पर निर्भरता, उपज में ठहराव, और जलवायु-संवेदनशीलता। पंजाब में लगभग 84 प्रतिशत भू-जल “अतिशोषित” (over-exploited) श्रेणी में है। इंद्रधनुषी क्रांति इन्हीं समस्याओं का संरचनात्मक उत्तर है।

इंद्रधनुषी क्रांति: ढाँचा

इंद्रधनुषी क्रांति एक ऐसा नीतिगत विचार है जिसका समर्थन दलवई समिति ने किया, ताकि सँकरी हरित क्रांति की जगह बहु-रंगीय, बहु-क्षेत्रीय विविधीकरण रणनीति आ सके:

क्रांतिक्षेत्र
हरित (Green)खाद्यान्न (चावल, गेहूँ)
पीली (Yellow)तिलहन (सरसों, सोयाबीन, मूँगफली)
श्वेत (White)दूध एवं डेयरी
स्वर्णिम (Golden)बाग़वानी (फल, सब्ज़ियाँ, फूल, मसाले)
नीली (Blue)मत्स्यपालन एवं जलकृषि
गुलाबी (Pink)मुर्गीपालन, झींगा एवं मांस
रजत (Silver)अंडे
मीठी (Sweet)मधुमक्खी पालन एवं शहद
धूसर (Grey)उर्वरक एवं पोषक तत्व प्रबंधन
लाल (Red)टमाटर, मांस
काली (Black)पेट्रोलियम एवं खनिज तेल (अप्रत्यक्ष)

मिलकर, ये क्षेत्र किसान की आय दुगुनी करते हैं, पोषण में सुधार करते हैं, और भू-जल पर तनाव कम करते हैं। दलवई समिति ने पाया कि स्टेपल फ़सलों से उच्च-मूल्य फ़सलों की ओर 1 हेक्टेयर का संक्रमण आय में लगभग 1 लाख रुपये की वृद्धि करता है।

बाग़वानी प्लस: MIDH से आगे

भारत का बाग़वानी उत्पादन 2023–24 में 355 मिलियन टन को पार कर गया, जो मात्र 14% फ़सली क्षेत्र से कृषि सकल मूल्य वर्धन (GVA) के 33% से अधिक का योगदान देता है। चावल, गेहूँ एवं खाद्यान्न अब भी क्षेत्र पर हावी हैं परंतु बाग़वानी मूल्य पर हावी है।

बाग़वानी की संरचना

प्रमुख योजनाएँ

बाग़वानी की चुनौतियाँ

द्वितीयक कृषि: खेत के द्वार पर मूल्य-वर्धन

द्वितीयक कृषि (Secondary Agriculture) उन मूल्य-वर्धन एवं प्रसंस्करण गतिविधियों को संदर्भित करती है जो प्राथमिक कृषि से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हैं — प्रायः खेत पर या निकट। घटक शामिल हैं:

द्वितीयक कृषि क्यों मायने रखती है

नीतिगत प्रोत्साहन

मीठी क्रांति: मधुमक्खी पालन एवं शहद

मीठी क्रांति (Sweet Revolution) मधुमक्खी पालन, शहद उत्पादन, एवं छत्ते के सहायक उत्पादों — मोम, राजकीय जेली, पराग, प्रोपोलिस — को लक्षित करती है। भारत विश्व का 8वाँ सबसे बड़ा शहद उत्पादक है, जिसका वार्षिक उत्पादन लगभग 1.33 लाख टन है।

राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन (NBHM)

कृषि मंत्रालय के अंतर्गत 2020 में लगभग 500 करोड़ रुपये के तीन-वर्षीय परिव्यय के साथ शुरू, NBHM समर्थन करता है:

लाभ

गुलाबी क्रांति: मांस एवं मुर्गीपालन

नीली क्रांति: मत्स्यपालन एवं जलकृषि

तुलनात्मक तालिका: हरित क्रांति बनाम इंद्रधनुषी क्रांति

आयामहरित क्रांति (1960s–80s)इंद्रधनुषी क्रांति (2018–)
केंद्रचावल-गेहूँविविधीकृत क्षेत्र
क्षेत्रउत्तर भारतराष्ट्रीय एवं क्षेत्र-विशिष्ट
आदानHYV बीज + उर्वरक + सिंचाईतकनीकी नवाचार + FPO + मूल्य शृंखला
लाभखाद्य आत्मनिर्भरताआय दुगुनी + पोषण + सततता
सीमाएँजल-गहन; पर्यावरणीय हानिनीतिगत समन्वय; FPO क्षमता

इंद्रधनुषी क्रांति की चुनौतियाँ

हालिया घटनाक्रम (2024–26)

यूपीएससी प्रासंगिकता

जीएस-III मानचित्रण

प्रीलिम्स बिंदु

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

निष्कर्ष

भारत का कृषि-भविष्य विविधीकरण, मूल्य-वर्धन, एवं सहायक क्षेत्रों से होकर गुज़रता है — अधिक चावल एवं गेहूँ से नहीं। इंद्रधनुषी क्रांति कोई एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि एक पोर्टफोलियो रणनीति है जो बाग़वानी, पशुपालन, मत्स्यपालन, मधुमक्खी पालन, एवं द्वितीयक कृषि को एक साथ बुनती है। यूपीएससी हेतु, अपने उत्तरों को दलवई समिति ढाँचे में स्थापित कीजिए, 2024 की मिशन वास्तुकला जोड़िए, और आप लगभग किसी भी विविधीकरण प्रश्न को संभाल लेंगे।

सामान्य प्रश्न

इंद्रधनुषी क्रांति (Rainbow Revolution) क्या है?

इंद्रधनुषी क्रांति एक नीतिगत ढाँचा है जो हरित क्रांति की एकल फ़सल केंद्रितता से आगे बढ़कर बाग़वानी, पशुपालन, मत्स्यपालन, मुर्गीपालन, मधुमक्खी पालन, द्वितीयक कृषि एवं अन्य रंगों की क्रांतियों को एकीकृत करता है। इसे दलवई समिति (2018) ने सुझाया।

दलवई समिति का क्या योगदान है?

अशोक दलवई समिति (2018) ने ‘किसानों की आय दुगुनी करने’ का व्यापक ढाँचा प्रस्तुत किया, जिसमें सात आय-वृद्धि स्रोत — उत्पादकता, संसाधन-दक्षता, फ़सल विविधीकरण, मूल्य प्राप्ति, ग़ैर-कृषि आय, द्वितीयक कृषि, एवं ग्रामीण कौशल — पहचाने गए।

बाग़वानी का भारतीय कृषि में क्या स्थान है?

2023–24 में बाग़वानी उत्पादन 355 मिलियन टन को पार कर गया। यह केवल 14% फ़सली क्षेत्र पर कृषि सकल मूल्य वर्धन (GVA) का 33% से अधिक प्रदान करती है। फलों एवं सब्ज़ियों में भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।

MIDH क्या है?

बाग़वानी के एकीकृत विकास हेतु मिशन (MIDH) भारत सरकार की प्रमुख छाता योजना है, जो NHM, HMNEH, NHB, CDB एवं NBM को समाहित करती है। यह बाग़वानी क्षेत्र के समग्र विकास हेतु राज्यों को वित्तीय एवं तकनीकी सहायता प्रदान करती है।

मीठी क्रांति क्या है?

मीठी क्रांति मधुमक्खी पालन, शहद उत्पादन एवं छत्ते के सहायक उत्पादों (मोम, राजकीय जेली, पराग, प्रोपोलिस) को बढ़ावा देने हेतु पहल है। 2020 में राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन (NBHM) इसके क्रियान्वयन का प्रमुख वाहक है।

द्वितीयक कृषि क्या है?

द्वितीयक कृषि वे मूल्य-वर्धन एवं प्रसंस्करण गतिविधियाँ हैं जो प्राथमिक खेती से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हैं — कटाई-पश्चात प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि-आधारित कुटीर उद्योग, अपशिष्ट से धन (CBG, खाद), एवं कृषि-लॉजिस्टिक्स।

PMFME योजना क्या है?

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिककरण योजना (PMFME) 2020 में 10,000 करोड़ रुपये की पाँच-वर्षीय योजना के रूप में लॉन्च हुई। यह ‘एक ज़िला एक उत्पाद’ (ODOP) से जुड़ी सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को क्रेडिट-संबद्ध सब्सिडी प्रदान करती है।

PMMSY के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) 2020 में 20,050 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ लॉन्च हुई। इसका उद्देश्य मत्स्य उत्पादन में सतत वृद्धि, मूल्य शृंखला आधुनिकीकरण, मछुआरों की आय दुगुनी करना, एवं भारत को विश्व का अग्रणी मत्स्य निर्यातक बनाना है।

कृषि अवसंरचना कोष (AIF) क्या है?

AIF भारत सरकार का 1 लाख करोड़ रुपये का दीर्घकालिक ऋण-वित्तपोषण कोष है, जो खेत के द्वार पर कटाई-पश्चात प्रबंधन एवं सामुदायिक कृषि अवसंरचना (शीत भंडारण, गोदाम, संग्रह केंद्र) में निवेश को सहायता प्रदान करता है। 2024 तक 40,000 करोड़ रुपये से अधिक स्वीकृत।

इंद्रधनुषी क्रांति की प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?

योजना खंडीकरण, शीत-शृंखला अंतराल, FPO की कमज़ोर वित्तीय एवं प्रबंधकीय क्षमता, गुणवत्ता एवं अनुरेखण मुद्दे, ग़ैर-प्रशुल्क निर्यात बाधाएँ, और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव प्रमुख चुनौतियाँ हैं।