UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

बाग़वानी, इंद्रधनुषी क्रांति एवं द्वितीयक कृषि (Horticulture, Rainbow Revolution, Secondary Agriculture — UPSC)

इंद्रधनुषी क्रांति अनाज से आगे विविधीकरण लाती है। बाग़वानी प्लस, द्वितीयक कृषि, मधुमक्खी पालन की मीठी क्रांति, एवं 2024-26 के यूपीएससी अर्थव्यवस्था अद्यतन को समझिए।

Horticulture, Rainbow Revolution, and Secondary Agriculture (UPSC) — UPSC featured image

भारत की हरित क्रांति (Green Revolution) ने खाद्य आत्मनिर्भरता प्रदान की, परंतु पंजाब, हरियाणा एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विशाल क्षेत्रों को जल-गहन धान-गेहूँ एकल फ़सल चक्र (rice-wheat monoculture) में बंद कर दिया। आगे का मार्ग — जिसे किसानों की आय दुगुनी करने पर अशोक दलवई समिति (2018) एवं उसके बाद की कृषि नीति ने स्पष्ट किया है — एक इंद्रधनुषी क्रांति (Rainbow Revolution) है, जो बाग़वानी, पशुपालन, मत्स्यपालन, मुर्गीपालन, मधुमक्खी पालन एवं द्वितीयक कृषि को परंपरागत अनाज खेती के साथ जोड़ती है। यूपीएससी इसका परीक्षण जीएस-III — प्रमुख फ़सलें, सहायक क्षेत्र, किसानों की आय दुगुनी करना, खाद्य प्रसंस्करण के अंतर्गत करता है।

हरित क्रांति की दूसरी पीढ़ी की समस्याएँ अब स्पष्ट हैं — मृदा क्षरण (soil degradation), भू-जल का अत्यधिक दोहन, उर्वरक/कीटनाशक पर निर्भरता, उपज में ठहराव, और जलवायु-संवेदनशीलता। पंजाब में लगभग 84 प्रतिशत भू-जल “अतिशोषित” (over-exploited) श्रेणी में है। इंद्रधनुषी क्रांति इन्हीं समस्याओं का संरचनात्मक उत्तर है।

इंद्रधनुषी क्रांति: ढाँचा

इंद्रधनुषी क्रांति एक ऐसा नीतिगत विचार है जिसका समर्थन दलवई समिति ने किया, ताकि सँकरी हरित क्रांति की जगह बहु-रंगीय, बहु-क्षेत्रीय विविधीकरण रणनीति आ सके:

क्रांतिक्षेत्र
हरित (Green)खाद्यान्न (चावल, गेहूँ)
पीली (Yellow)तिलहन (सरसों, सोयाबीन, मूँगफली)
श्वेत (White)दूध एवं डेयरी
स्वर्णिम (Golden)बाग़वानी (फल, सब्ज़ियाँ, फूल, मसाले)
नीली (Blue)मत्स्यपालन एवं जलकृषि
गुलाबी (Pink)मुर्गीपालन, झींगा एवं मांस
रजत (Silver)अंडे
मीठी (Sweet)मधुमक्खी पालन एवं शहद
धूसर (Grey)उर्वरक एवं पोषक तत्व प्रबंधन
लाल (Red)टमाटर, मांस
काली (Black)पेट्रोलियम एवं खनिज तेल (अप्रत्यक्ष)

मिलकर, ये क्षेत्र किसान की आय दुगुनी करते हैं, पोषण में सुधार करते हैं, और भू-जल पर तनाव कम करते हैं। दलवई समिति ने पाया कि स्टेपल फ़सलों से उच्च-मूल्य फ़सलों की ओर 1 हेक्टेयर का संक्रमण आय में लगभग 1 लाख रुपये की वृद्धि करता है।

बाग़वानी प्लस: MIDH से आगे

भारत का बाग़वानी उत्पादन 2023–24 में 355 मिलियन टन को पार कर गया, जो मात्र 14% फ़सली क्षेत्र से कृषि सकल मूल्य वर्धन (GVA) के 33% से अधिक का योगदान देता है। चावल, गेहूँ एवं खाद्यान्न अब भी क्षेत्र पर हावी हैं परंतु बाग़वानी मूल्य पर हावी है।

बाग़वानी की संरचना

  • फल — आम, केला, पपीता, खट्टे फल, अंगूर, सेब।
  • सब्ज़ियाँ — प्याज़, आलू, टमाटर, बैंगन, गोभी।
  • मसाले — मिर्च, हल्दी, इलायची, काली मिर्च, अदरक (भारत सबसे बड़ा उत्पादक एवं निर्यातक है)।
  • पुष्पकृषि (Floriculture) — कट फ्लावर, सजावटी पौधे।
  • बाग़ान फ़सलें — नारियल, काजू, कोको, सुपारी।
  • सुगंधित एवं औषधीय जड़ी-बूटियाँ — पुदीना, लेमनग्रास, अश्वगंधा।

प्रमुख योजनाएँ

  • बाग़वानी के एकीकृत विकास हेतु मिशन (MIDH) — प्रमुख छाता योजना; NHM, HMNEH, NHB, CDB, NBM को समाहित करती है।
  • ऑपरेशन ग्रीन्स (Operation Greens) — TOP (टमाटर, प्याज़, आलू) से TOTAL (22 शीघ्र-नष्ट होने वाली वस्तुएँ) तक विस्तारित।
  • क्लस्टर विकास कार्यक्रम (CDP) — निर्यात-उन्मुख बाग़वानी क्लस्टर (नासिक अंगूर, लखनऊ आम, शोपियाँ सेब)।
  • कृषि-निर्यात नीति — बासमती, अल्फांसो, भागलपुर ज़र्दालू जैसे GI-टैग बाग़वानी निर्यात।

बाग़वानी की चुनौतियाँ

  • उच्च पूँजी एवं गर्भकाल लागत (सेब को 3–5 वर्ष लगते हैं)।
  • पुराने एवं वृद्ध बाग़ उत्पादकता पर बोझ डालते हैं।
  • केवल ~15% नर्सरियाँ NHB द्वारा मान्यता-प्राप्त हैं।
  • कई क्षेत्रों में वर्षा-आधारित खेती।
  • 10–16% की कटाई-पश्चात हानि (NABCONS) — वार्षिक 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक।

द्वितीयक कृषि: खेत के द्वार पर मूल्य-वर्धन

द्वितीयक कृषि (Secondary Agriculture) उन मूल्य-वर्धन एवं प्रसंस्करण गतिविधियों को संदर्भित करती है जो प्राथमिक कृषि से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हैं — प्रायः खेत पर या निकट। घटक शामिल हैं:

  • कटाई-पश्चात प्रबंधन — श्रेणीकरण, छँटाई, पैकेजिंग, शीत-शृंखला, सफ़ाई।
  • खाद्य प्रसंस्करण — प्राथमिक (पिसाई, सफ़ाई) एवं द्वितीयक (जैम, अचार, डेयरी, जूस)।
  • कृषि-आधारित कुटीर उद्योग — शहद, रेशम, जटा, काजू, मशरूम, आवश्यक तेल।
  • पशुपालन सहायक उद्योग — चारा, टीके, चमड़ा, ऊन।
  • अपशिष्ट से धन — फ़सल अवशेष, गोबर से CBG (Compressed Bio-Gas), खाद, ब्रिकेट।
  • कृषि-लॉजिस्टिक्स — समेकन, गोदाम-व्यवस्था, शीत शृंखला।

द्वितीयक कृषि क्यों मायने रखती है

  • उच्चतर रिटर्न — संसाधित उत्पाद बिना संसाधित मूल्य के 2–4 गुना मूल्य प्राप्त करते हैं।
  • रोज़गार — श्रम-गहन, ग्रामीण ग़ैर-कृषि नौकरियों को सहारा।
  • कटाई-पश्चात हानियाँ कम — शीघ्र-नष्ट उत्पादों को सुरक्षित रखता है।
  • किसानों की आय दुगुनी — दलवई समिति ने द्वितीयक कृषि को आय-वृद्धि के सात स्रोतों में से एक के रूप में सूचीबद्ध किया।
  • निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता — ब्रांडेड GI उत्पाद।
  • ग्रामीण औद्योगीकरण — शहर-उन्मुख प्रवास को कम करता है।

नीतिगत प्रोत्साहन

  • प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) — मेगा फ़ूड पार्क, शीत शृंखलाएँ, कृषि-प्रसंस्करण क्लस्टर।
  • PMFME (सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का औपचारिककरण) — 2020 में लॉन्च 10,000 करोड़ रुपये की योजना, एक ज़िला एक उत्पाद (ODOP) से जुड़ी सूक्ष्म-खाद्य इकाइयों का समर्थन।
  • कृषि अवसंरचना कोष (AIF) — खेत के द्वार पर कटाई-पश्चात अवसंरचना हेतु 1 लाख करोड़ रुपये कोष।
  • ऑपरेशन ग्रीन्स (TOTAL) — 22 शीघ्र-नष्ट उत्पादों के परिवहन एवं भंडारण हेतु 50% सब्सिडी।
  • FPO प्रोत्साहन — 2027–28 तक 10,000 नए FPO, पैमाने को सक्षम बनाते हुए।

मीठी क्रांति: मधुमक्खी पालन एवं शहद

मीठी क्रांति (Sweet Revolution) मधुमक्खी पालन, शहद उत्पादन, एवं छत्ते के सहायक उत्पादों — मोम, राजकीय जेली, पराग, प्रोपोलिस — को लक्षित करती है। भारत विश्व का 8वाँ सबसे बड़ा शहद उत्पादक है, जिसका वार्षिक उत्पादन लगभग 1.33 लाख टन है।

राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन (NBHM)

कृषि मंत्रालय के अंतर्गत 2020 में लगभग 500 करोड़ रुपये के तीन-वर्षीय परिव्यय के साथ शुरू, NBHM समर्थन करता है:

  • प्रत्येक राज्य में एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्र (IBDC) की स्थापना।
  • गुणवत्ता एवं निर्यात हेतु विश्व-स्तरीय शहद परीक्षण प्रयोगशालाएँ
  • मॉड्यूलर पैकेजिंग, प्रसंस्करण, एवं मूल्य-वर्धन इकाइयाँ
  • क्षमता निर्माण एवं वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण।

लाभ

  • परागण सेवाएँ कृषि उपज में वृद्धि करती हैं (कई बाग़वानी फ़सलों के लिए 20–25%)।
  • शहद निर्यात — भारत ने 2022–23 में लगभग 115 मिलियन डॉलर का शहद निर्यात किया; बढ़ती माँग।
  • भूमिहीन एवं सीमांत किसानों हेतु आजीविका — न्यूनतम भूमि की आवश्यकता।
  • जैव-विविधता संरक्षण — मधुमक्खियाँ जंगली वनस्पतियों का समर्थन करती हैं।

गुलाबी क्रांति: मांस एवं मुर्गीपालन

  • भारत भैंस के मांस (कैराबीफ़) का सबसे बड़ा निर्यातक है — 3 अरब डॉलर से अधिक निर्यात।
  • मुर्गीपालन सबसे तीव्र गति से बढ़ता पशुधन उप-क्षेत्र है — 8–10% CAGR
  • ब्रॉयलर उत्पादन 5 मिलियन टन को पार कर चुका; लेयर उत्पादन सालाना 130 अरब से अधिक अंडे प्रदान करता है।

नीली क्रांति: मत्स्यपालन एवं जलकृषि

  • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) — पाँच वर्षों के लिए 2020 में लॉन्च 20,050 करोड़ रुपये परिव्यय।
  • भारत तीसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक एवं दूसरा सबसे बड़ा अंतर्देशीय मछली उत्पादक है।
  • अंतर्देशीय जलकृषि — आंध्र प्रदेश झींगा निर्यात में हावी; नीली क्रांति 2.0 समुद्री पकड़, जलकृषि, एवं प्रसंस्करण पर केंद्रित।

तुलनात्मक तालिका: हरित क्रांति बनाम इंद्रधनुषी क्रांति

आयामहरित क्रांति (1960s–80s)इंद्रधनुषी क्रांति (2018–)
केंद्रचावल-गेहूँविविधीकृत क्षेत्र
क्षेत्रउत्तर भारतराष्ट्रीय एवं क्षेत्र-विशिष्ट
आदानHYV बीज + उर्वरक + सिंचाईतकनीकी नवाचार + FPO + मूल्य शृंखला
लाभखाद्य आत्मनिर्भरताआय दुगुनी + पोषण + सततता
सीमाएँजल-गहन; पर्यावरणीय हानिनीतिगत समन्वय; FPO क्षमता

इंद्रधनुषी क्रांति की चुनौतियाँ

  • योजना खंडीकरण — कई मंत्रालय एवं राज्य विभाग।
  • शीत-शृंखला अंतराल — भारत के पास लगभग 38 मिलियन टन शीत भंडारण क्षमता है; अनुमानित माँग 60 मिलियन टन है।
  • FPO क्षमता — कई नवगठित FPO वित्तीय एवं प्रबंधकीय रूप से कमज़ोर हैं।
  • गुणवत्ता एवं अनुरेखण (Traceability) — निर्यात हेतु अवशेष परीक्षण, GI प्रमाणन में अंतराल।
  • निर्यात अनिश्चितताएँ — प्रमुख बाज़ारों में ग़ैर-प्रशुल्क बाधाएँ।
  • जलवायु परिवर्तन — अनिश्चित मानसून, ऊष्म तनाव, एवं कीट सहायक क्षेत्रों को भी प्रभावित करते हैं।

हालिया घटनाक्रम (2024–26)

  • बजट 2024–25 — जलवायु-सहनशील किस्मों हेतु कृषि अनुसंधान की व्यापक समीक्षा; तिलहन में आत्मनिर्भरता मिशन को बढ़ा समर्थन।
  • बजट 2025–26दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन (6-वर्षीय); सब्ज़ियों एवं फलों का व्यापक कार्यक्रम; सहायक कृषि, FPO, एवं महिला-नेतृत्व वाले समूहों पर केंद्रित बढ़ा हुआ ग्रामीण समृद्धि एवं सहनशीलता कार्यक्रम
  • क्लस्टर विकास कार्यक्रम विस्तारित — आरंभिक 12 से बढ़ाकर 55 बाग़वानी क्लस्टर लक्षित।
  • नमो ड्रोन दीदी — महिला SHGs को छिड़काव एवं सटीक कृषि हेतु 15,000 ड्रोन — बाग़वानी हेतु भी प्रासंगिक।
  • PMMSY एवं नीली क्रांति 2.0 — 2024–25 तक सतत; झींगा, सीवीड, एवं सजावटी मत्स्यपालन को प्रोत्साहन।
  • ऑपरेशन ग्रीन्स — 50% परिवहन/भंडारण सब्सिडी के साथ 22 शीघ्र-नष्ट उत्पाद 2024–25 तक कवर।
  • AIF (कृषि अवसंरचना कोष) — 2024 तक 40,000 करोड़ रुपये से अधिक स्वीकृत; शीत शृंखला एवं गोदाम परियोजनाएँ ज़मीन पर।
  • PMFME — महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाया गया; 1 लाख से अधिक लाभार्थियों को सहायता।
  • श्वेत क्रांति 2.0 — 2033–34 तक 330 मिलियन टन दूध उत्पादन का लक्ष्य।
  • अद्यतन संदर्भ: 2025–26 में आगे के क्षेत्र-विशिष्ट मिशन एवं FPO-नेतृत्व समेकन की उम्मीद, क्योंकि सरकार किसानों की आय दुगुनी करने एवं जल-गहन अनाजों से विविधीकरण को लक्षित कर रही है।

यूपीएससी प्रासंगिकता

जीएस-III मानचित्रण

  • प्रमुख फ़सलें, फ़सल चक्र, विविधीकरण, सहायक क्षेत्र
  • खाद्य प्रसंस्करण एवं संबंधित उद्योग
  • किसानों की आय दुगुनी करना एवं समावेशी विकास
  • कृषि विपणन, भंडारण, आपूर्ति शृंखला

प्रीलिम्स बिंदु

  • दलवई समिति (2018) — किसानों की आय दुगुनी करने का ढाँचा।
  • MIDH — NHM, HMNEH, CDB, NHB, NBM को मिलाकर छाता योजना।
  • मीठी क्रांतिराष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन (2020)
  • PMKSY (खाद्य प्रसंस्करण) — मेगा फ़ूड पार्क, शीत शृंखला, कृषि-प्रसंस्करण क्लस्टर।
  • AIF = कृषि अवसंरचना कोष, 1 लाख करोड़ रुपये।
  • PMMSY = प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, 20,050 करोड़ रुपये।
  • PMFME = सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों हेतु योजना, ODOP-संबद्ध।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

  • “हरित क्रांति की दूसरी पीढ़ी की समस्याओं को संबोधित करने हेतु इंद्रधनुषी क्रांति आवश्यक है।” चर्चा कीजिए। (जीएस-III)
  • “किसानों की आय दुगुनी करने में बाग़वानी, पशुपालन, एवं द्वितीयक कृषि की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।”
  • “राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन एवं मीठी क्रांति में इसके योगदान पर चर्चा कीजिए।”
  • “द्वितीयक कृषि के बढ़ाव में चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और एक नीतिगत मार्ग सुझाइए।”

निष्कर्ष

भारत का कृषि-भविष्य विविधीकरण, मूल्य-वर्धन, एवं सहायक क्षेत्रों से होकर गुज़रता है — अधिक चावल एवं गेहूँ से नहीं। इंद्रधनुषी क्रांति कोई एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि एक पोर्टफोलियो रणनीति है जो बाग़वानी, पशुपालन, मत्स्यपालन, मधुमक्खी पालन, एवं द्वितीयक कृषि को एक साथ बुनती है। यूपीएससी हेतु, अपने उत्तरों को दलवई समिति ढाँचे में स्थापित कीजिए, 2024 की मिशन वास्तुकला जोड़िए, और आप लगभग किसी भी विविधीकरण प्रश्न को संभाल लेंगे।

सामान्य प्रश्न

इंद्रधनुषी क्रांति (Rainbow Revolution) क्या है?

इंद्रधनुषी क्रांति एक नीतिगत ढाँचा है जो हरित क्रांति की एकल फ़सल केंद्रितता से आगे बढ़कर बाग़वानी, पशुपालन, मत्स्यपालन, मुर्गीपालन, मधुमक्खी पालन, द्वितीयक कृषि एवं अन्य रंगों की क्रांतियों को एकीकृत करता है। इसे दलवई समिति (2018) ने सुझाया।

दलवई समिति का क्या योगदान है?

अशोक दलवई समिति (2018) ने ‘किसानों की आय दुगुनी करने’ का व्यापक ढाँचा प्रस्तुत किया, जिसमें सात आय-वृद्धि स्रोत — उत्पादकता, संसाधन-दक्षता, फ़सल विविधीकरण, मूल्य प्राप्ति, ग़ैर-कृषि आय, द्वितीयक कृषि, एवं ग्रामीण कौशल — पहचाने गए।

बाग़वानी का भारतीय कृषि में क्या स्थान है?

2023–24 में बाग़वानी उत्पादन 355 मिलियन टन को पार कर गया। यह केवल 14% फ़सली क्षेत्र पर कृषि सकल मूल्य वर्धन (GVA) का 33% से अधिक प्रदान करती है। फलों एवं सब्ज़ियों में भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।

MIDH क्या है?

बाग़वानी के एकीकृत विकास हेतु मिशन (MIDH) भारत सरकार की प्रमुख छाता योजना है, जो NHM, HMNEH, NHB, CDB एवं NBM को समाहित करती है। यह बाग़वानी क्षेत्र के समग्र विकास हेतु राज्यों को वित्तीय एवं तकनीकी सहायता प्रदान करती है।

मीठी क्रांति क्या है?

मीठी क्रांति मधुमक्खी पालन, शहद उत्पादन एवं छत्ते के सहायक उत्पादों (मोम, राजकीय जेली, पराग, प्रोपोलिस) को बढ़ावा देने हेतु पहल है। 2020 में राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन (NBHM) इसके क्रियान्वयन का प्रमुख वाहक है।

द्वितीयक कृषि क्या है?

द्वितीयक कृषि वे मूल्य-वर्धन एवं प्रसंस्करण गतिविधियाँ हैं जो प्राथमिक खेती से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हैं — कटाई-पश्चात प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि-आधारित कुटीर उद्योग, अपशिष्ट से धन (CBG, खाद), एवं कृषि-लॉजिस्टिक्स।

PMFME योजना क्या है?

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिककरण योजना (PMFME) 2020 में 10,000 करोड़ रुपये की पाँच-वर्षीय योजना के रूप में लॉन्च हुई। यह ‘एक ज़िला एक उत्पाद’ (ODOP) से जुड़ी सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को क्रेडिट-संबद्ध सब्सिडी प्रदान करती है।

PMMSY के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) 2020 में 20,050 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ लॉन्च हुई। इसका उद्देश्य मत्स्य उत्पादन में सतत वृद्धि, मूल्य शृंखला आधुनिकीकरण, मछुआरों की आय दुगुनी करना, एवं भारत को विश्व का अग्रणी मत्स्य निर्यातक बनाना है।

कृषि अवसंरचना कोष (AIF) क्या है?

AIF भारत सरकार का 1 लाख करोड़ रुपये का दीर्घकालिक ऋण-वित्तपोषण कोष है, जो खेत के द्वार पर कटाई-पश्चात प्रबंधन एवं सामुदायिक कृषि अवसंरचना (शीत भंडारण, गोदाम, संग्रह केंद्र) में निवेश को सहायता प्रदान करता है। 2024 तक 40,000 करोड़ रुपये से अधिक स्वीकृत।

इंद्रधनुषी क्रांति की प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?

योजना खंडीकरण, शीत-शृंखला अंतराल, FPO की कमज़ोर वित्तीय एवं प्रबंधकीय क्षमता, गुणवत्ता एवं अनुरेखण मुद्दे, ग़ैर-प्रशुल्क निर्यात बाधाएँ, और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव प्रमुख चुनौतियाँ हैं।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

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