मेन्स में अभ्यर्थियों की 3 सबसे बड़ी गलतियाँ (और उन्हें कैसे सुधारें)
मेन्स में ज़्यादातर अंक तीन जानी-पहचानी जगहों पर छूटते हैं: सवाल की जगह टॉपिक पर लिखना, शब्द और समय का बजट शुरू में ही खर्च कर देना, और ऐसे दावे लिखना जिनके पीछे कोई ठोस आधार नहीं। असली UPSC PYQ के साथ देखिए कि हर गलती कैसे दिखती है और उसे कैसे सुधारें।
मेन्स उत्तर लेखन की गलतियाँ, जिनसे सबसे ज़्यादा अंक कटते हैं, आमतौर पर ज्ञान की कमी से नहीं होतीं। असल बात ये है कि आप अपना ज्ञान कॉपी पर कहाँ खर्च करते हैं: गलत माँग पर, शब्द सीमा के गलत हिस्से पर, या ऐसे वाक्यों पर जो किसी भी उत्तर में फिट हो जाएँ। तो अगर आप सिलेबस एक बार पूरा कर चुके हैं और टेस्ट में नंबर अब भी आपकी तैयारी से कम आ रहे हैं, तो ये गाइड आपके काम की है।
हर अभ्यर्थी की कॉपी की अपनी आदतें होती हैं, इसलिए एक लेख सबकी जाँच नहीं कर सकता। लेकिन तीन गलतियाँ ऐसी हैं जिन्हें UPSC की अपनी छपी हुई बातों से मिलाकर देखा जा सकता है: मुख्य परीक्षा की योजना, हर GS पेपर पर छपी शब्द सीमा और असली सवालों में आने वाले निर्देशक शब्द (directive words)। यही तीन गलतियाँ इस गाइड में हैं। हर गलती के साथ एक असली पिछले साल का सवाल (PYQ) है, उत्तर की शुरुआत का पहले और बाद वाला रूप है, और एक रूटीन है जिसे आप अपने अगले अभ्यास उत्तर में आज़मा सकते हैं।
UPSC के मुताबिक मेन्स पेपर क्या परखता है
UPSC कहता है कि मुख्य परीक्षा उम्मीदवार की समझ की गहराई परखती है, सिर्फ़ उसकी जानकारी और याददाश्त का दायरा नहीं। ये लिखने की परीक्षा है जिसका बजट तय है, और 2026 की अधिसूचना इस बजट को साफ़-साफ़ बताती है:
- पारंपरिक निबंधात्मक तरीके के 9 पेपर, हर पेपर तीन घंटे का
- 2 क्वालिफ़ाइंग पेपर: पेपर A (एक भारतीय भाषा, 300 अंक) और पेपर B (अंग्रेज़ी, 300 अंक)। बाकी पेपर तभी गिने जाते हैं जब दोनों में 25% अंक आएँ
- मेरिट में गिने जाने वाले 7 पेपर: निबंध, GS I से GS IV और वैकल्पिक विषय के दो पेपर, हर एक 250 अंक का, कुल 1,750 अंक
- 275 अंक का व्यक्तित्व परीक्षण, यानी कुल 2,025 अंक
GS पेपर के अंदर बजट और तंग हो जाता है। 2026 के GS II पेपर के कवर पर वही ढाँचा छपा था जिस पर GS I से GS III के पेपर आमतौर पर चलते हैं:
- 20 सवाल, सभी अनिवार्य, हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में छपे हुए
- सवाल 1 से 10 तक हर उत्तर 150 शब्दों में, हर सवाल 10 अंक का
- सवाल 11 से 20 तक हर उत्तर 250 शब्दों में, हर सवाल 15 अंक का
- लंबाई पर एक ही निर्देश: शब्द सीमा का पालन किया जाए
- उत्तर प्रश्न-सह-उत्तर (QCA) पुस्तिका में लिखे जाते हैं, और कोई भी खाली पन्ना या पन्ने का खाली हिस्सा साफ़ तौर पर काट देना होता है
जोड़कर देखें तो एक GS पेपर 180 मिनट में करीब 4,000 शब्द माँगता है, यानी औसतन एक सवाल पर 9 मिनट। GS IV का ढाँचा अलग है, क्योंकि अधिसूचना कहती है कि उसमें केस स्टडी वाला तरीका अपनाया जा सकता है। पूरी योजना, पात्रता और प्रयासों की जानकारी हमारे UPSC परीक्षा पैटर्न पेज पर है।
अब उत्तरों के बारे में UPSC की अपनी बातें साथ रखकर पढ़िए। अधिसूचना प्रासंगिक, सार्थक और संक्षिप्त उत्तर माँगती है। वो कहती है कि सिर्फ़ ऊपरी जानकारी पर अंक नहीं दिए जाएँगे। और वो क्रम से, असरदार और सटीक ढंग से कही गई बात के साथ शब्दों की किफ़ायत को श्रेय देती है।
यानी तीन माँगें: सही सामग्री, सही मात्रा में, सटीक ढंग से कही गई। नीचे दी गई तीनों मेन्स उत्तर लेखन की गलतियाँ इनमें से एक-एक माँग तोड़ती हैं।
गलती 1: सवाल की जगह टॉपिक पर लिख देना
पहली गलती है टॉपिक के बारे में जो कुछ आता है वो लिख देना, जबकि सवाल ने कुछ सीमित चीज़ माँगी थी या एक से ज़्यादा चीज़ें माँगी थीं। ये गलती प्रासंगिकता की कसौटी तोड़ती है। GS के सवाल में आमतौर पर एक निर्देशक शब्द होता है, और अक्सर पहले पूर्ण विराम के बाद दूसरी माँग भी होती है। दूसरी माँग छूट गई तो उत्तर अच्छा लिखा होकर भी आधा ही रहेगा।
हमारा mains-qa आर्काइव बताता है कि ये ढाँचा कितना आम है। आर्काइव में 2021 से 2025 तक के 360 GS सवालों में:
- “discuss” (चर्चा कीजिए) 84 सवालों में है, “explain” (स्पष्ट कीजिए) 49 में और “examine” (परीक्षण कीजिए) 41 में
- “critically” (आलोचनात्मक) 23 सवालों में है, और “suggest” (सुझाव दीजिए) भी 23 में
- 191 सवाल, यानी आधे से थोड़ा ज़्यादा, दो या उससे ज़्यादा चीज़ें माँगते हैं। ये गिनती हमने निर्देशक शब्दों और प्रश्नचिह्नों के आधार पर की है
मतलब आपके सामने वाले सवाल में पहले वाक्य के बाद दूसरी माँग छिपी होने की संभावना आधे से ज़्यादा है।
असली PYQ: कॉलेजियम वाला सवाल (GS II, 2025)
2025 के GS II पेपर में 15 अंक का ये सवाल आया था, 250 शब्दों की सीमा के साथ (सवालों का हिंदी रूप यहाँ हमारा अनुवाद है, मूल पाठ UPSC के प्रश्न-पत्र में देखें):
भारत में कॉलेजियम व्यवस्था के विकास की चर्चा कीजिए। भारत के सुप्रीम कोर्ट और USA के सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति व्यवस्था के फ़ायदों और नुकसानों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
एक भी शब्द लिखने से पहले माँगों का नक्शा बनाइए:
- माँग 1: भारत में कॉलेजियम कैसे विकसित हुआ, इसकी चर्चा
- माँग 2: भारत की व्यवस्था के फ़ायदों और नुकसानों का आलोचनात्मक परीक्षण
- माँग 3: यही काम USA के लिए, जिससे उत्तर एक तुलना बन जाता है
जाल पहली माँग में है। जजेज़ केस इस टॉपिक का वो हिस्सा है जो सबको सबसे अच्छी तरह याद रहता है, इसलिए वही पूरा पन्ना घेर लेता है और USA को नीचे दो लाइनें मिलती हैं, या कुछ भी नहीं। अगर इस सवाल पर आपकी पहली कोशिश ऐसी ही रही, तो ये आम बात है। और इसे पहली तीन लाइनों में ही सुधारा जा सकता है।
पहले: न्यायपालिका संविधान की संरक्षक है, और उसकी स्वतंत्रता इस बात पर टिकी है कि जजों की नियुक्ति कैसे होती है। अनुच्छेद 124 कहता है कि सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति राष्ट्रपति जजों से परामर्श के बाद करते हैं। 1981 के पहले जजेज़ केस में सुप्रीम कोर्ट ने कार्यपालिका का पलड़ा भारी रखा। 1993 में ये बदला, जब…
इसमें कुछ भी गलत नहीं है। लेकिन करीब 60 शब्दों के बाद भी उत्तर 1981 में ही अटका है, USA कहीं नज़र नहीं आता और “आलोचनात्मक परीक्षण” शुरू ही नहीं हुआ।
बाद में: भारत का कॉलेजियम जजों की अगुवाई वाली व्यवस्था है। अनुच्छेद 124(2) में राष्ट्रपति के जजों से परामर्श करने के कर्तव्य को सुप्रीम कोर्ट ने दूसरे (1993) और तीसरे (1998) जजेज़ केस में न्यायिक प्रधानता माना, और 2015 में NJAC रद्द करके इसे बनाए रखा। USA उल्टा चलता है: राष्ट्रपति नाम तय करते हैं, सीनेट पुष्टि करती है।
लगभग उतनी ही लंबाई में शुरुआत ने विकास को संक्षेप में कवर कर दिया और USA को भी सामने रख दिया। बचे हुए करीब 190 शब्द अब उस तुलना पर जा सकते हैं जो सवाल ने माँगी थी। पूरा मॉडल उत्तर कॉलेजियम PYQ पेज पर है।
2026 में भी यही ढाँचा दिखा। GS II पेपर ने पूछा कि क्या मौजूदा दल-बदल विरोधी व्यवस्था में लोकसभा अध्यक्ष का पद दलगत राजनीति के आगे कमज़ोर हो गया है, और फिर पूछा कि अध्यक्ष की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कौन-से संस्थागत बदलाव ज़रूरी हैं। दो माँगें, 150 शब्द।
इलाज: 30 सेकंड का माँग-नक्शा
इलाज एक आदत है, जो उत्तर शुरू करने से पहले प्रश्न-पत्र पर ही की जाती है:
- हर निर्देशक शब्द और हर प्रश्नचिह्न के नीचे लाइन खींचिए।
- हाशिये में माँगों पर नंबर डालिए: 1, 2, 3।
- लिखने से पहले शब्द सीमा को इन माँगों में बाँट दीजिए। कॉलेजियम वाले सवाल में कुछ ऐसा: शुरुआत और विकास के लिए 60 शब्द, भारत के लिए 90, USA के लिए 70 और समापन के लिए 30।
निर्देशक शब्दों पर एक सावधानी ज़रूरी है। UPSC इनकी कोई आधिकारिक परिभाषा नहीं छापता, इसलिए नीचे दिए अर्थ एक काम चलाऊ गाइड हैं, नियम नहीं:
| निर्देशक शब्द | क्या माँगता है | कॉपी पर कैसा दिखता है |
|---|---|---|
| Discuss (चर्चा कीजिए) | मुद्दे के मुख्य पक्ष, कारणों के साथ | दो या ज़्यादा नज़रिए, फिर आपकी राय |
| Examine (परीक्षण कीजिए) | किसी चीज़ के कारण, सबूत या काम करने का तरीका | “क्यों” और “कैसे”, सबूत के साथ |
| Critically examine / evaluate (आलोचनात्मक परीक्षण / मूल्यांकन) | ऐसा परीक्षण जो किसी फ़ैसले पर खत्म हो | खूबियाँ, सीमाएँ और साफ़ निष्कर्ष |
| Explain (स्पष्ट कीजिए) | कोई चीज़ कैसे या क्यों होती है | कारण से असर तक की पूरी प्रक्रिया |
| Suggest (सुझाव दीजिए) | उपाय | ठोस कदम, हर कदम के साथ ज़िम्मेदार संस्था का नाम |
| To what extent / how far (किस हद तक) | नपा-तुला फ़ैसला | शर्तों के साथ हाँ या ना, कारणों सहित |
और हल किए गए ढाँचे हमारे UPSC मेन्स उत्तर लेखन पेज पर हैं।
गलती 2: शब्द और समय का बजट शुरू में ही खर्च कर देना
दूसरी गलती है शब्द सीमा और घड़ी को ढीला मान लेना। दोनों पक्के बजट हैं, और ये गलती किफ़ायत की कसौटी तोड़ती है। शुरुआती सवालों पर ज़्यादा लिख दिया तो उसका नुकसान पेपर के आख़िर में होता है, उन सवालों पर जो आपको आते हैं पर जिन तक आप पहुँच नहीं पाते।
GS पेपर का हिसाब ये है:
- 20 सवालों के लिए 180 मिनट, यानी औसतन हर सवाल पर 9 मिनट
- 150 शब्दों के 10 उत्तर और 250 शब्दों के 10 उत्तर मिलकर 4,000 शब्द बनते हैं
- 180 मिनट में 4,000 शब्द यानी करीब 22 शब्द प्रति मिनट, और पढ़ने या सोचने का समय इसमें शामिल ही नहीं
अब गलती को चलाकर देखिए। मान लीजिए आपने पहले पाँच 10-अंक वाले सवालों में 150 की जगह 220-220 शब्द लिखे। ये 350 शब्द ज़्यादा हुए, जो 22 शब्द प्रति मिनट की रफ़्तार से करीब 16 मिनट बनते हैं, यानी लगभग डेढ़ 15-अंक वाले उत्तर। अगर आख़िर में 15 अंक के दो सवाल छूट गए, तो पेपर के 250 में से 30 अंक, यानी 12%, आपकी पहुँच में ही नहीं रहे।
तेज़ लिखना भी रास्ता नहीं है। अधिसूचना कहती है कि अगर लिखावट आसानी से पढ़ी न जा सके तो अंक काटे जा सकते हैं, इसलिए आख़िरी सवालों में भागने की भी अपनी कीमत है।
ज़्यादातर बार ज़्यादा लिखना पहले पैराग्राफ़ से ही शुरू होता है। 150 शब्द के उत्तर में एक छोटी शुरुआत और दो-तीन काम के पैराग्राफ़ की जगह होती है। जो शुरुआत पृष्ठभूमि पर 60 शब्द खर्च कर दे, वो सवाल को छूने से पहले ही बजट का 40% खा चुकी है।
असली PYQ: वामपंथी उग्रवाद वाला सवाल (GS III, 2025)
2025 के GS III पेपर ने 10 अंक और 150 शब्द के एक सवाल में तीन माँगें रख दीं:
भारत सरकार ने हाल में कहा है कि वामपंथी उग्रवाद (LWE) को 2026 तक खत्म कर दिया जाएगा। LWE से आप क्या समझते हैं और लोग इससे कैसे प्रभावित होते हैं? LWE को खत्म करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
पहले: आज़ादी के बाद से भारत ने आंतरिक सुरक्षा की कई चुनौतियों का सामना किया है, जैसे पूर्वोत्तर में विद्रोह, जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद और वामपंथी उग्रवाद। LWE देश के लिए एक गंभीर समस्या है। इसका लंबा इतिहास है और दशकों में ये कई राज्यों में फैल गया है। हाल में सरकार ने कहा है कि LWE को 2026 तक खत्म कर दिया जाएगा। इस संदर्भ में आइए इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करें।
ये करीब 75 शब्द हैं, यानी सीमा का आधा, और इसने न LWE की परिभाषा दी, न किसी प्रभावित समूह का नाम लिया, न एक भी कदम बताया।
बाद में: वामपंथी उग्रवाद हथियारबंद माओवादी विद्रोह है, जिसकी अगुवाई मुख्य रूप से CPI (Maoist) करती है और जो हिंसा से सरकार को उखाड़ना चाहता है। इसकी सबसे भारी कीमत वही लोग चुकाते हैं जिनके नाम पर ये लड़ता है।
करीब 40 शब्द, और पहली माँग पूरी। अब बाकी बजट का साफ़ ढाँचा बन जाता है:
- प्रभावित लोग (करीब 45 शब्द): गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड के मुताबिक 2004 से 30 नवंबर 2025 के बीच LWE ने 8,956 लोगों की जान ली, और मारे गए नागरिकों में ज़्यादातर आदिवासी थे; माओवादी शासन में खालीपन पैदा करने के लिए निचले स्तर के अधिकारियों, स्थानीय पुलिस और पंचायत प्रतिनिधियों को निशाना बनाते हैं
- कदम (करीब 55 शब्द): केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की तैनाती, सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE) योजना, विशेष अवसंरचना योजना और विशेष केंद्रीय सहायता, और दूसरे मंत्रालयों की विकास योजनाओं का तालमेल गृह मंत्रालय के LWE डिवीज़न के ज़रिए
- समापन (करीब 15 शब्द): सुरक्षा और विकास को दो नहीं, एक ही रणनीति के रूप में
सवाल वही, जानकारी वही। दूसरा रूप पहले ही वाक्य में सवाल पर पहुँच जाता है और बाकी दो माँगों के लिए उसके पास करीब 110 शब्द बचे रहते हैं। पूरा मॉडल उत्तर LWE PYQ पेज पर है।
इलाज: पेपर शुरू होने से पहले बजट तय कर लें
बजट घर पर तय कीजिए, परीक्षा हॉल में नहीं। मेरी सलाह वाला बँटवारा कुछ ऐसा है:
- शुरुआत: 150 शब्द के उत्तर में 30 से 40 शब्द, 250 शब्द के उत्तर में 40 से 60 शब्द (हिंदी में वही बात आमतौर पर कुछ ज़्यादा शब्दों में आती है)
- समय: 10 अंक वाले हर उत्तर को करीब 7 मिनट और 15 अंक वाले हर उत्तर को 10 मिनट। कुल 170 मिनट, और 10 मिनट पेपर पढ़ने और आख़िरी बार देखने के लिए
- चेकपॉइंट प्रश्न-पत्र पर लिख लीजिए: सवाल 5 मिनट 35 तक, सवाल 10 मिनट 70 तक, सवाल 15 मिनट 120 तक और सवाल 20 मिनट 170 तक
अगर किसी चेकपॉइंट पर आप पीछे हैं, तो आख़िरी सवाल छोड़ने की जगह अगला उत्तर छोटा कर दीजिए। आख़िरी सवाल पर पतले उत्तर के भी अंक मिल सकते हैं। खाली पन्ने के कोई अंक नहीं।
ये आदत सिर्फ़ समय बाँधकर किए गए और जाँचे गए अभ्यास से पक्की होती है। अगर आपको वो ढाँचा चाहिए, तो मेन्स क्रैश कोर्स उत्तर लेखन और GS रणनीति के इर्द-गिर्द ही बना है।
गलती 3: ऐसे दावे जिनके पीछे कुछ ठोस नहीं
तीसरी गलती है घिसा-पिटा वाक्य: “कई कदम उठाए गए हैं”, “जागरूकता फैलानी चाहिए”, “सहकारी संघवाद को मज़बूत करना चाहिए”। हर वाक्य सही है, और हर वाक्य सौ अलग-अलग उत्तरों में फिट हो सकता है। ये गलती सटीकता की कसौटी तोड़ती है। अधिसूचना कहती है कि सिर्फ़ ऊपरी जानकारी पर अंक नहीं मिलेंगे, और वो सटीक ढंग से कही गई बात को श्रेय देती है।
इसका इलाज है एंकर: वो ठोस चीज़ जो किसी वाक्य को इसी सवाल का बना दे, किसी और का नहीं। ये कोई अनुच्छेद हो सकता है, सुप्रीम कोर्ट का कोई केस, किसी समिति की रिपोर्ट या स्रोत के साथ कोई सरकारी आँकड़ा। इसे ऐसे समझिए जैसे आपने वाक्य के अंदर ही एक फ़ुटनोट जोड़ दिया हो।
असली PYQ: 101वें संशोधन वाला सवाल (GS II, 2023)
2023 के GS II पेपर ने 15 अंक और 250 शब्दों के लिए पूछा:
101वें संविधान संशोधन अधिनियम का महत्व स्पष्ट कीजिए। ये संघवाद की सबको साथ लेकर चलने वाली भावना को किस हद तक दर्शाता है?
पहले: 101वाँ संविधान संशोधन अधिनियम भारत की कर व्यवस्था में एक ऐतिहासिक सुधार है। इसने GST लागू किया, जो एक राष्ट्र, एक कर की दिशा में बहुत अहम कदम है। ये सहकारी संघवाद को दर्शाता है क्योंकि केंद्र और राज्य दोनों मिलकर काम करते हैं। लेकिन इसमें कुछ चुनौतियाँ भी हैं, जिन्हें दूर करने की ज़रूरत है।
हर वाक्य का बचाव किया जा सकता है, और कोई भी वाक्य सिर्फ़ इसी उत्तर का नहीं है। GST की जगह कोई और सुधार रख दीजिए, पैराग्राफ़ फिर भी ठीक पढ़ा जाएगा। यही वो कसौटी है जिस पर ये फेल होता है।
बाद में: संविधान (101वाँ संशोधन) अधिनियम, 2016 ने अनुच्छेद 246A के ज़रिए GST का रास्ता खोला, जो संसद और हर राज्य विधानमंडल को GST पर कानून बनाने की शक्ति देता है, और अनुच्छेद 279A के ज़रिए GST परिषद बनाई। परिषद में केंद्र के पास भारित वोट का एक-तिहाई है, राज्यों के पास मिलकर दो-तिहाई, और फ़ैसले के लिए तीन-चौथाई चाहिए।
लंबाई लगभग उतनी ही। अब देखिए “किस हद तक” वाला हिस्सा अपने आप कैसे लिखा जाता है, क्योंकि तर्क एंकर ही उठा लेता है। अनुच्छेद 279A के तहत फ़ैसले के लिए उपस्थित और वोट देने वाले सदस्यों के भारित वोटों का कम से कम तीन-चौथाई चाहिए, इसलिए:
- केंद्र का एक-तिहाई, तीन-चौथाई से कम है, इसलिए वो राज्यों के बिना कोई फ़ैसला पास नहीं करा सकता
- राज्यों का दो-तिहाई भी तीन-चौथाई से कम है, इसलिए वो केंद्र के बिना फ़ैसला पास नहीं करा सकते
- इसलिए दोनों पक्षों के पास एक तरह का वीटो है, जो सहमति के लिए मजबूर करता है (साथ लेकर चलने वाला हिस्सा) और किसी भी पक्ष को फ़ैसला रोकने देता है (सीमा)
घिसे-पिटे रूप ने सहकारी संघवाद का सिर्फ़ दावा किया। एंकर वाला रूप दिखाता है कि वो कहाँ से आता है और कहाँ रुक जाता है। पूरा मॉडल उत्तर 101वें संशोधन PYQ पेज पर है।
इलाज: एंकर बैंक बनाइए, एक-एक टॉपिक करके
एंकर बैंक हर सिलेबस टॉपिक के लिए एक पन्ने की शीट है, जो पूरी तैयारी के दौरान धीरे-धीरे बनती है। हर टॉपिक के लिए इनमें से हर एक की एक लाइन रखिए:
- संविधान का कोई अनुच्छेद या किसी कानून की धारा
- साल के साथ सुप्रीम कोर्ट का कोई केस
- साल के साथ कोई समिति, आयोग या सरकारी रिपोर्ट
- स्रोत और तारीख के साथ एक सरकारी आँकड़ा
- एक योजना या जगह, जहाँ वो विचार ज़मीन पर दिखता हो
इसे किसी किताब के अध्यायों के हिसाब से नहीं, UPSC मुख्य परीक्षा के सिलेबस की टॉपिक सूची के हिसाब से बनाइए, ताकि कमियाँ सामने आ जाएँ। एक चेतावनी: गलत एंकर, एंकर न होने से ज़्यादा नुकसान करता है। अगर किसी आँकड़े पर भरोसा नहीं है, तो प्रक्रिया लिखिए और आँकड़ा छोड़ दीजिए।
एक रूटीन, जो तीनों गलतियाँ पकड़ ले
मेन्स उत्तर लेखन की गलतियाँ तीनों ही हर सवाल पर करीब एक मिनट की प्लानिंग से पकड़ी जा सकती हैं, और वो एक मिनट इनमें से किसी भी गलती से सस्ता है। अगले टेस्ट में हर उत्तर को इस टेबल से गुज़ारिए:
| गलती | कॉपी पर कैसी दिखती है | इलाज | लिखने के बाद जाँच |
|---|---|---|---|
| सवाल नहीं, टॉपिक | लंबी पृष्ठभूमि; कोई माँग छूटी हुई | माँग-नक्शा | क्या हर नंबर वाली माँग का जवाब है? |
| बजट शुरू में खर्च | लंबी शुरुआत; आख़िरी सवाल खाली | शब्दों का बँटवारा और चेकपॉइंट | क्या शुरुआत 40 शब्दों (150 शब्द वाला उत्तर) या 60 शब्दों (250 शब्द वाला उत्तर) में खत्म हुई? |
| एंकर नहीं | “कई कदम”, “मज़बूत करना चाहिए” | एंकर बैंक | क्या हर मुख्य पैराग्राफ़ में कोई अनुच्छेद, केस, रिपोर्ट या आँकड़ा है? |
निबंध पेपर के लिए अधिसूचना में अलग निर्देश हैं: विषय के करीब रहिए, विचारों को क्रम से रखिए और संक्षेप में लिखिए। हमारी UPSC निबंध रणनीति गाइड उस पेपर को अलग से कवर करती है।
मार्किंग के बारे में UPSC क्या बताता है और क्या नहीं
ये साफ़ समझ लेना अच्छा है कि UPSC के नियम कहाँ खत्म होते हैं और सलाह कहाँ से शुरू होती है। UPSC ये बातें छापता है:
- परीक्षा की योजना, अंक और हर पेपर की तीन घंटे की अवधि
- हर सवाल के सामने शब्द सीमा और अंक, खुद प्रश्न-पत्र पर
- कि सिर्फ़ ऊपरी जानकारी पर अंक नहीं दिए जाएँगे
- कि क्रम से, असरदार और सटीक ढंग से कही गई बात और शब्दों की किफ़ायत को श्रेय मिलेगा
- कि आसानी से न पढ़ी जा सकने वाली लिखावट पर अंक कट सकते हैं
UPSC ये बातें नहीं छापता:
- सवाल-दर-सवाल मार्किंग स्कीम या मॉडल उत्तर
- निर्देशक शब्दों की आधिकारिक परिभाषाएँ
- भूमिका, डायग्राम, हेडिंग या अंडरलाइन के बारे में कोई नियम
इसलिए इस गाइड में इन बातों के आगे जो कुछ है, वो सलाह है। इसे अपने उत्तरों पर आज़माइए और जो आपके नंबर बढ़ाए, उसे रखिए।
एक ईमानदार सीमा भी: इनमें से कोई भी इलाज वो सामग्री पैदा नहीं कर सकता जो आपके पास है ही नहीं। अगर किसी टॉपिक पर आपके नोट्स कमज़ोर हैं, तो बेहतर ढाँचा उस कमज़ोरी को और साफ़ दिखा देगा। वहाँ इलाज पढ़ाई है, और UPSC की तैयारी कैसे करें वाली हमारी गाइड योजना का वो हिस्सा बताती है।
आख़िरी बात
अगर आप यहाँ तक पढ़ चुके हैं, तो आप जानते हैं कि आपके उत्तरों से अंक सबसे ज़्यादा कहाँ से रिस रहे हैं: माँग, बजट और एंकर। इनमें से किसी के लिए नई किताब नहीं चाहिए। चाहिए बस हर उत्तर से पहले एक मिनट की प्लानिंग, और लिखने के बाद कॉपी को सवाल से मिलाने की आदत।
अगला पूरा GS पेपर जो आप लिखें, उसके हर उत्तर को ऊपर की टेबल की तीनों जाँचों से गुज़ारिए। गिनिए कि कितने उत्तर तीनों जाँचें पास करते हैं। ये गिनती आपकी प्रगति के बारे में भरे हुए पन्नों की गिनती से ज़्यादा बताएगी।
अगला उत्तर एक-एक माँग करके लिखिए। शुभकामनाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मेन्स उत्तर लेखन की सबसे आम गलतियाँ कौन-सी हैं?
तीन गलतियाँ UPSC की छपी हुई बातों से मिलाकर जाँची जा सकती हैं: सवाल की हर माँग की जगह टॉपिक पर लिखना, शब्द और समय का बजट शुरुआती सवालों पर खर्च कर देना, और ऐसे घिसे-पिटे दावे लिखना जिनके पीछे कोई अनुच्छेद, केस, रिपोर्ट या आँकड़ा न हो। हर गलती UPSC अधिसूचना की एक बात तोड़ती है, जो प्रासंगिक, संक्षिप्त और सटीक उत्तर माँगती है।
UPSC मेन्स में GS का उत्तर कितने शब्दों का होना चाहिए?
2026 के GS II पेपर में सवाल 1 से 10 के लिए 150 शब्द और सवाल 11 से 20 के लिए 250 शब्द माँगे गए थे, और कवर पर लिखा था कि शब्द सीमा का पालन किया जाए। शब्द सीमा हर सवाल के सामने छपी होती है, इसलिए वहीं देखिए। GS IV और वैकल्पिक विषय के पेपर का ढाँचा अलग होता है।
क्या शब्द सीमा पार करने पर UPSC अंक काटता है?
UPSC प्रति शब्द कोई कटौती नहीं छापता। वो शब्द सीमा का पालन करने को कहता है और शब्दों की किफ़ायत को श्रेय देता है। ज़्यादा लिखने की असली कीमत समय है, क्योंकि शुरुआती उत्तरों के अतिरिक्त शब्द आख़िरी सवालों के समय से कटते हैं।
GS पेपर में हर सवाल को कितना समय देना चाहिए?
औसत 9 मिनट है, क्योंकि पेपर 20 सवालों के लिए 180 मिनट देता है। काम का बँटवारा है: 10 अंक वाले हर उत्तर को करीब 7 मिनट और 15 अंक वाले हर उत्तर को 10 मिनट। इससे पढ़ने और आख़िरी जाँच के लिए 10 मिनट बचते हैं।
क्या UPSC मेन्स में लिखावट मायने रखती है?
पढ़ी जा सकने वाली लिखावट मायने रखती है। अधिसूचना कहती है कि अगर लिखावट आसानी से पढ़ी न जा सके तो अंक काटे जाएँगे। इसके आगे स्टाइल पर UPSC कोई नियम नहीं छापता, इसलिए सुंदर से ज़्यादा साफ़ लिखने पर ध्यान दीजिए।
क्या हर उत्तर में भूमिका और निष्कर्ष ज़रूरी है?
UPSC का इस पर कोई छपा हुआ नियम नहीं है। एक छोटी शुरुआत जो सवाल का जवाब देना शुरू कर दे, और एक-दो लाइन का समापन, आमतौर पर शब्द बजट में सबसे अच्छे बैठते हैं। जो पृष्ठभूमि वाला पैराग्राफ़ जवाब को टाल दे, उससे बचना है।
कैसे पता करें कि मेरे उत्तर ने सवाल का जवाब दिया या नहीं?
लिखने से पहले सवाल की माँगों पर नंबर डालिए, फिर लिखने के बाद जाँचिए कि हर नंबर का अपना पैराग्राफ़ या पॉइंट्स का हिस्सा है। अगर किसी नंबर का कोई पैराग्राफ़ नहीं है, तो उत्तर अधूरा है, चाहे बाकी कितना भी अच्छा हो।
अभ्यास प्रश्न
प्रीलिम्स वाले सवाल UPSC की अपनी संवैधानिक स्थिति और ऊपर के एक उदाहरण से जुड़े हैं। मेन्स वाले सवाल घड़ी देखकर लिखिए, और हर उत्तर को माँग-नक्शे, शब्द बजट और एंकर जाँच से गुज़ारिए।
प्रीलिम्स MCQ
- संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और दूसरे सदस्यों की नियुक्ति कौन करता है? (a) प्रधानमंत्री (b) राष्ट्रपति (c) संसद (d) भारत के मुख्य न्यायाधीश
उत्तर: (b) अनुच्छेद 316(1) के तहत संघ आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। - संघ लोक सेवा आयोग का सदस्य कितने समय तक पद पर रहता है? (a) पाँच साल या 62 साल की उम्र तक, जो पहले हो (b) छह साल या 65 साल की उम्र तक, जो पहले हो (c) छह साल या 62 साल की उम्र तक, जो पहले हो (d) पाँच साल या 65 साल की उम्र तक, जो पहले हो
उत्तर: (b) अनुच्छेद 316(2) संघ आयोग के लिए छह साल या 65 साल की उम्र, जो पहले हो, तय करता है। - संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को कदाचार के आधार पर हटाने से पहले क्या ज़रूरी है? (a) संसद के दोनों सदनों का विशेष बहुमत से प्रस्ताव (b) राष्ट्रपति के भेजे गए संदर्भ पर सुप्रीम कोर्ट की जाँच (c) केंद्रीय सतर्कता आयोग की जाँच (d) केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सिफ़ारिश
उत्तर: (b) अनुच्छेद 317(1) के तहत राष्ट्रपति के संदर्भ पर सुप्रीम कोर्ट की जाँच और उसकी रिपोर्ट ज़रूरी है। - GST परिषद के बारे में इन कथनों पर विचार कीजिए। कथन 1: केंद्र सरकार के वोट का भार कुल डाले गए वोटों का एक-तिहाई है। कथन 2: फ़ैसले के लिए उपस्थित और वोट देने वाले सदस्यों के भारित वोटों का कम से कम तीन-चौथाई बहुमत चाहिए। कथन 3: केंद्रीय वित्त मंत्री इसके अध्यक्ष हैं। ऊपर दिए गए कौन-से कथन सही हैं? (a) केवल 1 और 2 (b) केवल 2 और 3 (c) केवल 1 और 3 (d) 1, 2 और 3
उत्तर: (d) तीनों बातें सीधे अनुच्छेद 279A से हैं, जिसे संविधान (101वाँ संशोधन) अधिनियम, 2016 ने जोड़ा। - संघ लोक सेवा आयोग के बारे में इन कथनों पर विचार कीजिए। कथन 1: इसका खर्च भारत की संचित निधि पर भारित होता है। कथन 2: ये अपनी सालाना रिपोर्ट राष्ट्रपति को देता है, जो उसे संसद के हर सदन के सामने रखवाते हैं। ऊपर दिए गए कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (a) केवल 1 (b) केवल 2 (c) 1 और 2 दोनों (d) न 1, न 2
उत्तर: (c) अनुच्छेद 322 खर्च को भारत की संचित निधि पर भारित करता है, और अनुच्छेद 323(1) के तहत सालाना रिपोर्ट राष्ट्रपति के ज़रिए संसद तक जाती है।
मेन्स अभ्यास प्रश्न
- भारत में राजकोषीय संघवाद को आकार देने में GST परिषद की भूमिका की चर्चा कीजिए। इसने केंद्र और राज्यों के हितों में किस हद तक संतुलन बनाया है? (15 अंक, 250 शब्द)
- संघ लोक सेवा आयोग की स्वतंत्रता की रक्षा करने वाले संवैधानिक प्रावधानों का परीक्षण कीजिए। योग्यता आधारित भर्ती में इसकी भूमिका मज़बूत करने के उपाय सुझाइए। (10 अंक, 150 शब्द)
- भारत में जजों की नियुक्ति की कॉलेजियम व्यवस्था का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। ऐसे सुधार सुझाइए जो न्यायिक स्वतंत्रता को कमज़ोर किए बिना पारदर्शिता बढ़ाएँ। (15 अंक, 250 शब्द)
- वामपंथी उग्रवाद जितनी सुरक्षा की चुनौती है, उतनी ही विकास की भी। केंद्र सरकार के अपनाए गए तरीके के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
- सरकारी संवाद में स्पष्टता और संक्षेप प्रशासनिक गुण होने के साथ-साथ नैतिक गुण भी हैं। लोक प्रशासन के उदाहरणों के साथ चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)