Anantam IASHindi Note · 13 September 2026

मूल निवास प्रमाण पत्र: कहाँ काम आता है, दस्तावेज़ और राज्यवार ऑनलाइन आवेदन

मूल निवास प्रमाण पत्र क्या है, कहाँ लगता है और राज्य कौन-से दस्तावेज़ माँगते हैं। साथ में UP, बिहार, MP, राजस्थान, महाराष्ट्र और दिल्ली के पोर्टल पर आवेदन का तरीका।

मूल निवास प्रमाण पत्र वह दस्तावेज़ है जो साबित करता है कि आप किस राज्य के निवासी हैं। भारत में इससे जितना लोग सोचते हैं, उससे ज़्यादा चीज़ें तय होती हैं: स्टेट कोटा की सीटें, राज्य की छात्रवृत्तियाँ और वे सरकारी नौकरियाँ जिनमें राज्य अपने निवासियों के लिए पद रखता है। हर राज्य यह प्रमाण पत्र खुद जारी करता है, और हर जगह इसका नाम अलग है। उत्तर प्रदेश इसे अधिवास प्रमाण पत्र कहता है, मध्य प्रदेश स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र और राजस्थान मूल निवास प्रमाण पत्र। महाराष्ट्र इसे “Age, Nationality and Domicile” सर्टिफ़िकेट में ही जोड़ देता है।

आवेदन का तरीका लगभग हर राज्य में एक जैसा है। आप आधार के साथ ऑनलाइन आवेदन करते हैं और राज्य में रहने का सबूत लगाते हैं। फिर राजस्व विभाग का कर्मचारी आपके दावे की जाँच करता है, और आख़िर में तहसीलदार या SDM दस्तख़त करते हैं। राज्यों में असली फ़र्क़ समय का है। राजस्थान में अधिसूचित समय-सीमा 5 दिन है। मध्य प्रदेश स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र 7 कामकाजी दिनों में देने का वादा करता है, बिहार 10 कामकाजी दिनों में, दिल्ली 14 दिन में, महाराष्ट्र 15 दिन में और उत्तर प्रदेश 20 दिन में।

मूल निवास प्रमाण पत्र का मतलब क्या है

मूल निवास प्रमाण पत्र राज्य सरकार का रिकॉर्ड है कि आप उस राज्य के बसे हुए निवासी हैं। भारत में एक ही नागरिकता है, इसलिए यह प्रमाण पत्र आपको किसी राज्य का नागरिक नहीं बनाता। यह सिर्फ़ इतना दर्ज करता है कि राज्य के अपने कामों के लिए आप कहाँ बसे हुए हैं।

यह शब्द (domicile, यानी अधिवास) संविधान से ही आया है। संविधान लागू होने के दिन कौन भारत का नागरिक बना, यह तय करने के लिए अनुच्छेद 5 ने अधिवास का सहारा लिया। शर्त यह थी कि व्यक्ति का अधिवास भारत में हो। साथ ही इन तीन में से एक बात सही हो: वह यहाँ पैदा हुआ हो, उसके माता या पिता में से कोई यहाँ पैदा हुआ हो, या वह संविधान लागू होने से पहले कम से कम पाँच साल से आम तौर पर यहीं रह रहा हो। सरकारी नौकरियों में भी निवास का सवाल फिर आता है:

इसी वजह से नौकरियों में निवास के नियम बार-बार अदालत और राजनीति तक पहुँचते हैं। पुराने अनुच्छेद 35A के स्थायी निवासी नियमों से लेकर लद्दाख के मूल निवास पर आधारित कोटे तक, यही सवाल उठता रहा है। पूरी बहस भारत में आरक्षण के विश्लेषण में है। लद्दाख और आरक्षण वाले ये दोनों पेज अंग्रेज़ी में हैं।

मूल निवास और निवास हमेशा एक ही काग़ज़ नहीं होते। महाराष्ट्र के Aaple Sarkar पोर्टल पर “Temporary Residence Certificate” एक अलग सेवा है, और “Age, Nationality and Domicile Certificate” अलग। इसलिए अगर किसी फ़ॉर्म में “residence certificate” माँगा गया है, तो पहले देख लें कि वहाँ मूल निवास प्रमाण पत्र चलेगा या उन्हें अपने फ़ॉर्मेट वाला अलग काग़ज़ चाहिए।

किसे और कब चाहिए

जब कोई दफ़्तर यह सबूत माँगे कि आप उसके राज्य के हैं, सिर्फ़ किसी पते पर रहते नहीं हैं, तब मूल निवास प्रमाण पत्र चाहिए। आम तौर पर ये मौके होते हैं:

पात्रता का आधार निवास है। UP के प्रक्रिया वाले दस्तावेज़ में लिखा है कि उत्तर प्रदेश का कोई भी निवासी आवेदन कर सकता है। दिल्ली का आवेदन फ़ॉर्म पिछले तीन सालों में से हर साल दिल्ली में लगातार रहने का सबूत माँगता है। वह यह भी पूछता है कि क्या आपके पास पहले से किसी दूसरे राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का वैध मूल निवास प्रमाण पत्र है। अगर है, तो उसकी कॉपी लगानी होगी।

कौन-से दस्तावेज़ लगेंगे

अब ज़्यादातर राज्यों में शुरुआत आधार से होती है, क्योंकि आवेदन की जाँच उसी से होती है। UP साफ़ कहता है कि मूल निवास, आय और जाति प्रमाण पत्र के आवेदन सिर्फ़ आधार e-KYC से ही हो सकते हैं।

सबूतUP और दिल्ली के फ़ॉर्म में क्या चलता है
पहचानआधार (UP में e-KYC ज़रूरी); दिल्ली में वोटर ID, PAN, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या फ़ोटो वाला राशन कार्ड भी
निवासराशन कार्ड या बिजली का बिल, और वोटर ID (UP); दिल्ली में पिछले 3 सालों में हर साल का एक सबूत, जैसे आधार, वोटर ID, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, राशन कार्ड, यूटिलिटी बिल, किराया समझौता या बैंक पासबुक
पढ़ाईपढ़ रहे हैं तो शैक्षिक प्रमाण पत्र (UP); दिल्ली में तीनों साल के लिए सिर्फ़ स्कूल के प्रमाण पत्र नहीं चलते
घोषणास्व-घोषणा पत्र
नाबालिग के लिएमाता-पिता की पहचान और निवास का सबूत; दिल्ली में 5 साल से छोटे बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र, या स्कूल ID या प्रिंसिपल का पत्र

दिल्ली के फ़ॉर्म में यह भी लिखा है कि अगर पिछले तीन सालों के वैध दस्तावेज़ नहीं हैं, लेकिन आवेदक दिल्ली के मूल निवास का दावा करता है, तो फ़ील्ड वेरिफ़िकेशन यानी मौके पर जाँच होगी।

राज्यवार मूल निवास प्रमाण पत्र पोर्टल

हर राज्य का अपना पोर्टल है, और पोर्टल के साथ प्रमाण पत्र का नाम भी बदल जाता है।

राज्यप्रमाण पत्र का नामपोर्टलजारी करने वाले या नामित अधिकारी
उत्तर प्रदेशअधिवास प्रमाण पत्र (domicile certificate)edistrict.up.gov.in, e-Sathi से citizen loginतहसीलदार और लेखपाल की रिपोर्ट के बाद SDM
बिहारRTPS के तहत निवास प्रमाण पत्र (आवासीय प्रमाण-पत्र)serviceonline.bihar.gov.inअंचल अधिकारी (Circle Officer); अपील अनुमंडल पदाधिकारी (Sub-Division Officer) के पास
मध्य प्रदेशस्थानीय निवासी प्रमाण पत्र (सेवा 6.1)mpedistrict.gov.inसेवा पेज पर दिखता है
राजस्थानमूल निवास प्रमाण पत्र (bonafide certificate)sso.rajasthan.gov.in, फिर eMitraराजस्व और उपनिवेशन विभाग (Revenue and Colonisation Department) की सेवा
महाराष्ट्रAge, Nationality and Domicile Certificateaaplesarkar.mahaonline.gov.inतहसीलदार
दिल्लीDomicile Certificateedistrict.delhigovt.nic.inराजस्व विभाग (Department of Revenue)

मूल निवास प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें

नीचे के स्टेप वही हैं जो हर राज्य का पोर्टल खुद बताता है। ढाँचा हर जगह एक है: रजिस्टर करें, राजस्व विभाग की सेवा चुनें, फ़ीस भरें, दस्तावेज़ लगाएँ और आवेदन ट्रैक करें।

उत्तर प्रदेश

UP का अपना प्रक्रिया और चेकलिस्ट वाला दस्तावेज़ मूल निवास प्रमाण पत्र के ऑनलाइन आवेदन का पूरा तरीका बताता है।

  1. https://edistrict.up.gov.in/edistrictup/ खोलें और “Citizen Login (e-Sathi)” पर क्लिक करें।
  2. अपनी निजी जानकारी और संपर्क की जानकारी भरकर रजिस्टर करें। पासवर्ड SMS या ईमेल पर आता है।
  3. लॉग इन करें और “e-Sathi Integrated Services” चुनें।
  4. “Revenue Department” में “Domicile Certificate” चुनें।
  5. ज़िला, जन्म तिथि और मोबाइल नंबर डालकर अपनी प्रोफ़ाइल बनाएँ।
  6. ₹15 का यूज़र चार्ज ऑनलाइन भरें।
  7. फ़ॉर्म भरें, दस्तावेज़ लगाएँ और सबमिट करें।
  8. SDM आवेदन तहसीलदार को भेजते हैं। तहसीलदार उसे जाँच के लिए लेखपाल को भेजते हैं। उनकी रिपोर्ट के आधार पर SDM मंज़ूरी देकर प्रमाण पत्र जारी करते हैं।
  9. प्रमाण पत्र पोर्टल से या DigiLocker से डाउनलोड करें।

आख़िरी स्टेप ज़रूर इस्तेमाल करें। प्रमाण पत्र DigiLocker में रहेगा, तो हर काउंटर पर फ़ोटोकॉपी लेकर नहीं घूमना पड़ेगा।

मध्य प्रदेश

MP अपने e-District पोर्टल पर स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र को सेवा 6.1 के रूप में दिखाता है।

  1. https://mpedistrict.gov.in/ खोलें और ऑनलाइन सेवा के लिए आवेदन वाला विकल्प चुनें।
  2. स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र चुनें और आवेदन करें।
  3. “know application status” से आवेदन ट्रैक करें। डिजिटल दस्तख़त वाले प्रमाण पत्र को पोर्टल के वेरिफ़िकेशन विकल्प से जाँच लें।

आप लोक सेवा केंद्र, MPOnline कियोस्क या CSC पर भी आवेदन कर सकते हैं। “समाधान एक दिन” व्यवस्था में लोक सेवा केंद्र यह प्रमाण पत्र एक कामकाजी दिन में दे देता है। अपनी समग्र ID पास रखें, क्योंकि MP की सेवाएँ परिवार के उसी रिकॉर्ड पर चलती हैं।

महाराष्ट्र

Aaple Sarkar के “Revenue Department” वाले हिस्से में “Age, Nationality and Domicile Certificate” मिलता है।

  1. https://aaplesarkar.mahaonline.gov.in/ खोलें और नए यूज़र के तौर पर रजिस्टर करें, या लॉग इन करें।
  2. “Revenue Department” में “Age, Nationality and Domicile Certificate” चुनें।
  3. दस्तावेज़ों के साथ फ़ॉर्म सबमिट करें और फ़ीस भरें।
  4. मिली हुई application ID से आवेदन ट्रैक करें।
  5. जारी हुए प्रमाण पत्र को उसके 18 अंकों के बारकोड से इसी पोर्टल पर जाँचें।

होमपेज पर एक सूचना है कि कुछ सेवाएँ राज्य के MAITRI पोर्टल पर चली गई हैं। लेकिन मूल निवास और आय प्रमाण पत्र अभी भी Aaple Sarkar पर “Revenue Department” में ही हैं।

दिल्ली

दिल्ली का e-District पोर्टल “Department of Revenue” के तहत Domicile Certificate देता है।

  1. https://edistrict.delhigovt.nic.in/ खोलें, नए यूज़र के तौर पर रजिस्टर करें और लॉग इन करें।
  2. “Issuance of Domicile Certificate” चुनें।
  3. फ़ॉर्म भरें, पिछले तीन सालों का साल-दर-साल निवास का सबूत लगाएँ और सबमिट करें।
  4. “Track your Application” से आवेदन देखते रहें। प्रमाण पत्र जारी होने पर “Print/Download Certificate” इस्तेमाल करें।
  5. कोई भी व्यक्ति “Verify your Certificate” से दिल्ली का प्रमाण पत्र जाँच सकता है।

बिहार और राजस्थान

बिहार में निवास प्रमाण पत्र serviceonline.bihar.gov.in पर RTPS की एक सेवा है। यह अंचल, अनुमंडल और ज़िला स्तर पर मिलती है। राज्य की RTPS सेवा तालिका इसकी शर्तें तय करती है:

फ़ॉर्म में आधार नंबर देते हैं, तो आधार से जुड़े मोबाइल पर OTP आता है। नहीं देते, तो चुनाव आयोग के माने हुए 12 पहचान दस्तावेज़ों में से कोई एक अपलोड करना होता है। RTPS के दस्तावेज़ों में कोई फ़ीस नहीं लिखी है। फ़ॉर्म पर “Make Payment” बटन तभी दिखता है जब किसी सेवा की फ़ीस हो।

राजस्थान में आप https://sso.rajasthan.gov.in/ पर Rajasthan SSO ID से लॉग इन करते हैं और eMitra से आवेदन करते हैं, या किसी eMitra कियोस्क पर चले जाते हैं।

दस्तावेज़ों की सूची आवेदन करते समय eMitra सेवा पर दिखती है।

फ़ीस और समय-सीमा

राज्यसमय-सीमाफ़ीस
उत्तर प्रदेश20 दिनखुद ऑनलाइन आवेदन करने पर ₹15 यूज़र चार्ज; सेवाओं वाले पेज पर ₹30 सेवा शुल्क की एक लाइन भी है
मध्य प्रदेश7 कामकाजी दिन; “समाधान एक दिन” में लोक सेवा केंद्र पर 1 कामकाजी दिनखुद ऑनलाइन आवेदन करने पर मुफ़्त; लोक सेवा केंद्र, MPOnline कियोस्क या CSC पर ₹20 के साथ लीगल फ़ीस
महाराष्ट्र15 दिनआवेदन के समय भरनी होती है; सेवा पेज पर रक़म नहीं लिखी
दिल्ली14 दिनसमय-सीमा वाले पेज पर नहीं लिखी
बिहारअंचल अधिकारी के स्तर पर 10 कामकाजी दिन; तत्काल में 2 कामकाजी दिनRTPS सेवा के दस्तावेज़ों में नहीं लिखी
राजस्थान5 दिन, अधिसूचित सेवा के रूप में₹50 eMitra आवेदन चार्ज, साथ में विभाग का कोई चार्ज हो तो वह भी

महाराष्ट्र की समय-सीमा के पीछे क़ानून की ताक़त है। वहाँ के Right to Public Services Act, 2015 के तहत, प्रमाण पत्र देर से मिले या गलत तरीके से मना कर दिया जाए, तो आप अपील कर सकते हैं। पहली अपील उप-विभागीय अधिकारी (Sub Divisional Officer) के पास होती है, दूसरी अपर कलेक्टर (Additional Collector) के पास और तीसरी राज्य आयोग के पास।

आम गलतियाँ और उनका हल

हेल्पलाइन और शिकायत

मूल निवास प्रमाण पत्र क्या नहीं करता

मूल निवास प्रमाण पत्र एक राज्य के लिए एक ही सवाल का जवाब देता है। बाकी किसी सवाल का नहीं।

ऑफ़लाइन आवेदन के लिए तहसील, MP में लोक सेवा केंद्र, UP में CSC या e-District सेवा केंद्र, या राजस्थान में eMitra कियोस्क आपकी तरफ़ से आवेदन भर सकते हैं।

ज़रूरत पड़ने से पहले ही आवेदन कर दें। काग़ज़ पर समय-सीमा 5 दिन से 20 दिन तक है, लेकिन दाख़िले या भर्ती की आख़िरी तारीख़ लेखपाल की रिपोर्ट का इंतज़ार नहीं करती। एक बार बनवाएँ, PDF को DigiLocker में सेव करें और प्रमाण पत्र हाथ में आने तक application ID संभालकर रखें।

सामान्य प्रश्न

क्या मूल निवास प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र एक ही हैं?

हमेशा नहीं। कई राज्यों में राज्य के कामों के लिए मूल निवास प्रमाण पत्र ही निवास का सबूत होता है। लेकिन महाराष्ट्र, उदाहरण के लिए, Temporary Residence Certificate को अपने Age, Nationality and Domicile Certificate से अलग सेवा के रूप में रखता है। फ़ॉर्म कौन-सा प्रमाण पत्र माँग रहा है, यह पहले देख लें।

मूल निवास प्रमाण पत्र के लिए कितने साल का निवास चाहिए?

यह राज्य पर निर्भर है। दिल्ली का आवेदन फ़ॉर्म पिछले तीन सालों में से हर साल लगातार रहने का सबूत माँगता है। दूसरे राज्य अपने नियम पोर्टल के सेवा पेज पर बताते हैं।

मूल निवास प्रमाण पत्र बनने में कितना समय लगता है?

घोषित समय-सीमा राजस्थान में 5 दिन है। मध्य प्रदेश में यह 7 कामकाजी दिन है (समाधान एक दिन में लोक सेवा केंद्र पर 1 कामकाजी दिन), और बिहार में 10 कामकाजी दिन (तत्काल में 2)। दिल्ली में यह 14 दिन, महाराष्ट्र में 15 दिन और उत्तर प्रदेश में 20 दिन है।

क्या मूल निवास प्रमाण पत्र के लिए आधार ज़रूरी है?

उत्तर प्रदेश में हाँ। वहाँ का e-District पोर्टल कहता है कि मूल निवास, आय और जाति के आवेदन सिर्फ़ आधार e-KYC से हो सकते हैं। ज़्यादातर दूसरे राज्य भी आधार को पहचान का मुख्य सबूत मानते हैं।

क्या दो राज्यों के मूल निवास प्रमाण पत्र रख सकते हैं?

दिल्ली का आवेदन फ़ॉर्म पूछता है कि क्या आपके पास पहले से किसी दूसरे राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का वैध मूल निवास प्रमाण पत्र है, और उसे लगाने को कहता है। उसी राज्य में आवेदन करें जहाँ आप सच में रहते हैं। पहले का कोई प्रमाण पत्र हो, तो उसे ईमानदारी से बताएँ।

क्या मूल निवास प्रमाण पत्र भारतीय नागरिकता का सबूत है?

नहीं। भारत में एक ही नागरिकता है, जो राष्ट्रीय क़ानून से तय होती है। मूल निवास प्रमाण पत्र सिर्फ़ यह दर्ज करता है कि उस राज्य के कामों के लिए आप वहाँ के बसे हुए निवासी हैं।