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अनुच्छेद 35A: यह क्या करता था, विवाद क्यों हुआ, और 2019 में क्या बदला

अनुच्छेद 35A को समझिए — 1954 का राष्ट्रपति आदेश जिसने इसे बनाया, स्थायी निवासियों के वे अधिकार जो इसने बचाए, इसके जुड़ने के तरीक़े पर उठी संवैधानिक आपत्ति, और 2019 में इसके ख़त्म होने के नतीजे।

Two identical rights fields holding land, employment, scholarship and voting entitlements: one with a barrier admitting four people and holding three outside, and one with the barrier removed and all seven inside

अनुच्छेद 35A वह प्रावधान था जो जम्मू-कश्मीर विधानमंडल को यह तय करने का अधिकार देता था कि राज्य का “स्थायी निवासी” (permanent resident) कौन है, और कुछ अधिकार सिर्फ़ उन्हीं के लिए सुरक्षित रखने की छूट देता था। 5 अगस्त 2019 को यह प्रावधान ख़त्म हो गया। संवैधानिक रूप से इसे असामान्य इस बात ने नहीं बनाया कि इसने क्या बचाया, बल्कि इस बात ने कि यह संविधान में आया कैसे — अनुच्छेद 368 के तहत संसदीय संशोधन से नहीं, बल्कि 1954 के एक राष्ट्रपति आदेश (Presidential Order) से।

यह संविधान में आया कैसे

  • संविधान (जम्मू-कश्मीर पर लागू) आदेश, 1954 के ज़रिए जोड़ा गया, जिसे राष्ट्रपति ने अनुच्छेद 370(1)(d) की शक्तियों के तहत जारी किया था।
  • इसे भाग 3 में, अनुच्छेद 35 के बाद रखा गया, और यह संविधान के मुख्य पाठ में नहीं बल्कि सिर्फ़ एक परिशिष्ट में दिखता था।
  • इसे संसद ने पारित नहीं किया था और यह अनुच्छेद 368 की संशोधन प्रक्रिया से नहीं गुज़रा। यही एक तथ्य इसके ख़िलाफ़ उठी संवैधानिक आपत्ति की जड़ था।
  • इसने डोगरा शासक की 1927 और 1932 की स्टेट सब्जेक्ट अधिसूचनाओं को प्रभावी बनाया, जिन्होंने मूल रूप से वंशानुगत राज्य प्रजा की परिभाषा तय की थी।

यह असल में करता क्या था

अनुच्छेद 35A राज्य के उस हर क़ानून को बचा लेता था जो स्थायी निवासी की परिभाषा तय करता हो या उन्हें विशेष अधिकार देता हो — ऐसे क़ानून को मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) के उल्लंघन के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता था। यानी इसने कोई अधिकार नहीं दिया, एक छूट (immunity) दी।

  • परिभाषा तय करने की शक्ति। राज्य विधानमंडल तय कर सकता था कि जम्मू-कश्मीर का स्थायी निवासी कौन है।
  • अचल संपत्ति। राज्य में ज़मीन और संपत्ति सिर्फ़ स्थायी निवासी ही ख़रीद सकते थे।
  • सरकारी नौकरी। राज्य की नौकरियाँ स्थायी निवासियों के लिए आरक्षित थीं।
  • बसने का अधिकार। राज्य में बसने से जुड़े नियम स्थायी निवासियों पर लागू होते थे।
  • छात्रवृत्ति और सहायता। राज्य की छात्रवृत्तियाँ और दूसरी मदद स्थायी निवासियों तक सीमित थीं।

सबसे अहम बात यह थी कि ऐसे किसी भी क़ानून को अनुच्छेद 14, 19 या 21 के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती थी। यही छूट इस प्रावधान की ताक़त थी, और यही इसके विवाद की वजह भी।

इसके नतीजे

  • बाहरी लोग न ज़मीन ख़रीद सकते थे न राज्य सरकार की नौकरी ले सकते थे, जिससे बाहर से निवेश और औद्योगिक विकास सीमित रहा।
  • लैंगिक भेदभाव। ग़ैर-स्थायी निवासी से शादी करने वाली महिला की संतानों के अधिकार छिन जाते थे। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने 2002 में माना कि महिला का अपना दर्जा बना रहता है, पर उसके बच्चों की स्थिति अनसुलझी रही।
  • पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थी, जो 1947 में आकर ज़्यादातर जम्मू क्षेत्र में बसे, पीढ़ियों तक स्थायी निवासी का दर्जा नहीं पा सके। वे लोकसभा चुनाव में वोट दे सकते थे, विधानसभा चुनाव में नहीं।
  • वाल्मीकि समुदाय, जिसे 1950 के दशक में सफ़ाई कर्मचारी के रूप में राज्य में लाया गया था, पीढ़ी-दर-पीढ़ी उसी काम तक सीमित रह गया।
  • गोरखा पीढ़ियों से वहाँ रहने के बावजूद इस परिभाषा से बाहर रहे।
  • इसके पक्ष में तर्क: समर्थकों का कहना था कि यह उस राज्य की आबादी के ढाँचे, ज़मीन और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करता है जो कुछ ख़ास शर्तों पर भारत में शामिल हुआ था, और यह भी कि इससे मिलती-जुलती भूमि सुरक्षाएँ भारत के दूसरे हिस्सों में भी मौजूद हैं।

2019 में क्या बदला

  • 5 अगस्त 2019 को संविधान (जम्मू-कश्मीर पर लागू) आदेश, 2019 ने 1954 के आदेश की जगह ले ली, और उसके बाद अनुच्छेद 370(3) के तहत जारी राष्ट्रपति आदेश ने विशेष प्रावधानों को बेअसर कर दिया। अनुच्छेद 35A ख़त्म हो गया।
  • जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 ने राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाँट दिया: विधानसभा वाला जम्मू-कश्मीर, और बिना विधानसभा वाला लद्दाख।
  • अब वहाँ पूरा भारतीय संविधान, सारे मौलिक अधिकार और सभी केंद्रीय क़ानून लागू होते हैं। राज्य का अपना संविधान और झंडा समाप्त हो गया।
  • डोमिसाइल नियम 2020 में अधिसूचित हुए और उन्होंने स्थायी निवासी की श्रेणी की जगह ले ली। अब पंद्रह साल से वहाँ रह रहे लोग, वे छात्र जिन्होंने सात साल वहाँ पढ़ाई की और कक्षा 10 या 12 की परीक्षा वहीं दी, और वहाँ सेवा दे चुके केंद्रीय कर्मचारियों के बच्चे भी पात्र हैं।
  • In Re Article 370 (दिसंबर 2023) में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अनुच्छेद 370 हटाने के फ़ैसले को सही ठहराया। पीठ ने माना कि अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान था और विलय के बाद जम्मू-कश्मीर के पास आंतरिक संप्रभुता का कोई अंश नहीं बचा था। उसने जल्द से जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने और चुनाव कराने का निर्देश दिया, जो 2024 में हुए।

उसके बाद क्या असर पड़ा

  • अधिकार सब पर समान रूप से लागू। शिक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार, अनुसूचित जाति-जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भूमि सुधार क़ानून पहली बार पूरी तरह लागू हुए।
  • पहले बाहर रखे गए समूहों — पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थी, वाल्मीकि समुदाय और गोरखा — को डोमिसाइल और विधानसभा चुनाव में वोट का अधिकार मिला।
  • लैंगिक बराबरी। बाहर शादी करने पर संपत्ति और उत्तराधिकार के अधिकार खोने वाली व्यवस्था हट गई।
  • निवेश और ज़मीन। ज़मीन की रुकावट हटने से नई औद्योगिक विकास योजना और बड़ी कनेक्टिविटी परियोजनाओं का रास्ता खुला।
  • स्थानीय लोकतंत्र। पंचायत और ज़िला विकास परिषद के चुनाव हुए, और 2024 में निर्वाचित सरकार बहाल हुई।
  • अनसुलझा सवाल राज्य का दर्जा लौटाने का है, जिसका निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने दिया था और जो अब भी एक जीवित राजनीतिक माँग है।

सामान्य प्रश्न

अनुच्छेद 35A क्या था?

यह वह प्रावधान था जो जम्मू-कश्मीर विधानमंडल को राज्य के स्थायी निवासियों की परिभाषा तय करने और उन्हें अचल संपत्ति, सरकारी नौकरी, बसने के अधिकार और छात्रवृत्ति में विशेष अधिकार देने की छूट देता था, और ऐसे क़ानूनों को मौलिक अधिकारों के आधार पर चुनौती से बचा लेता था।

अनुच्छेद 35A संविधान में जोड़ा कैसे गया था?

संविधान (जम्मू-कश्मीर पर लागू) आदेश, 1954 के ज़रिए, जो अनुच्छेद 370(1)(d) के तहत जारी एक राष्ट्रपति आदेश था। इसे संसद ने कभी पारित नहीं किया और यह अनुच्छेद 368 की संशोधन प्रक्रिया से नहीं गुज़रा — यही इसके ख़िलाफ़ मुख्य संवैधानिक आपत्ति थी।

अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35A में फ़र्क़ क्या है?

अनुच्छेद 370 भाग 21 का एक अस्थायी प्रावधान था, जो जम्मू-कश्मीर और संघ के बीच संवैधानिक रिश्ता तय करता था और संसद की विधायी शक्ति को सीमित करता था। अनुच्छेद 35A इससे कहीं संकरा था: वह सिर्फ़ स्थायी निवासियों की परिभाषा और उनके विशेष अधिकारों वाले राज्य क़ानूनों को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर रद्द होने से बचाता था।

स्थायी निवासी की श्रेणी से कौन बाहर रह गए थे?

1947 में आए पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थी, 1950 के दशक में राज्य में लाया गया वाल्मीकि समुदाय, और पीढ़ियों से वहाँ रह रहे गोरखा। ग़ैर-स्थायी निवासी से शादी करने वाली महिलाओं की संतानों के अधिकार भी छिन जाते थे।

अनुच्छेद 35A कब ख़त्म हुआ?

5 अगस्त 2019 को, जब संविधान (जम्मू-कश्मीर पर लागू) आदेश, 2019 ने 1954 के आदेश की जगह ली और अनुच्छेद 370(3) के तहत जारी राष्ट्रपति आदेश ने विशेष प्रावधानों को बेअसर कर दिया।

अनुच्छेद 370 हटाने पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

दिसंबर 2023 में तय हुए In Re Article 370 मामले में संविधान पीठ ने इस फ़ैसले को सही ठहराया। उसने माना कि अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान था और विलय के बाद जम्मू-कश्मीर के पास आंतरिक संप्रभुता का कोई अंश नहीं बचा था। पीठ ने जल्द से जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने और चुनाव कराने का निर्देश भी दिया।

अभ्यास प्रश्न

प्रीलिम्स MCQ

1. अनुच्छेद 35A संविधान में किस रास्ते से जोड़ा गया था?

  • (a) अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन से
  • (b) 1954 के एक राष्ट्रपति आदेश से
  • (c) जम्मू-कश्मीर संविधान सभा के प्रस्ताव से
  • (d) 1956 के एक संसदीय अधिनियम से

उत्तर: (b) 1954 के एक राष्ट्रपति आदेश से

2. अनुच्छेद 35A को संविधान के किस भाग में रखा गया था?

  • (a) भाग 3
  • (b) भाग 4
  • (c) भाग 21
  • (d) भाग 11

उत्तर: (a) भाग 3

3. अनुच्छेद 35A कब ख़त्म हुआ?

  • (a) 26 जनवरी 2019
  • (b) 5 अगस्त 2019
  • (c) 31 अक्टूबर 2019
  • (d) 11 दिसंबर 2023

उत्तर: (b) 5 अगस्त 2019

4. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 ने क्या बनाया?

  • (a) एक केंद्र शासित प्रदेश
  • (b) दो केंद्र शासित प्रदेश, दोनों में विधानसभा
  • (c) दो केंद्र शासित प्रदेश, एक में विधानसभा
  • (d) एक राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश

उत्तर: (c) दो केंद्र शासित प्रदेश, एक में विधानसभा

5. अनुच्छेद 370 हटाने को सही ठहराने वाला सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला कब आया?

  • (a) अगस्त 2019
  • (b) मार्च 2020
  • (c) दिसंबर 2023
  • (d) अक्टूबर 2024

उत्तर: (c) दिसंबर 2023

मुख्य परीक्षा प्रश्न

  • अनुच्छेद 370 और 35A की समाप्ति से पहले और बाद की स्थिति पर चर्चा कीजिए, और जम्मू-कश्मीर को मुख्यधारा से जोड़ने पर पड़े सकारात्मक प्रभावों को बताइए। (15 अंक, 250 शब्द)
  • “अनुच्छेद 35A पर आपत्ति सिर्फ़ इस बात पर नहीं थी कि उसने क्या बचाया, बल्कि इस पर थी कि वह संविधान में आया कैसे।” आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
  • जम्मू-कश्मीर में स्थायी निवासी श्रेणी से बाहर रह गए समुदायों पर पड़े असर का परीक्षण कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
  • 2020 में अधिसूचित डोमिसाइल नियमों पर चर्चा कीजिए और बताइए कि वे पुरानी स्थायी निवासी श्रेणी से किस तरह अलग हैं। (10 अंक, 150 शब्द)
  • In Re Article 370 (2023) में सुप्रीम कोर्ट के तर्क का विश्लेषण कीजिए और भारतीय संघवाद पर उसके निहितार्थ बताइए। (15 अंक, 250 शब्द)

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

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