Anantam IASHindi Note · 5 October 2026

मुथुरामलिंगा थेवर: आपराधिक जनजाति अधिनियम, फॉरवर्ड ब्लॉक और गुरु पूजा

मुथुरामलिंगा थेवर: आपराधिक जनजाति अधिनियम के खिलाफ अभियान, बोस के साथ फॉरवर्ड ब्लॉक, 1957 की घटनाएं और पसुमपोन की गुरु पूजा।

मुथुरामलिंगा थेवर (1908 से 1963) दक्षिणी तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के राजनेता थे। अपने पैतृक गांव के नाम पर उन्हें अक्सर पसुमपोन मुथुरामलिंगा थेवर कहा जाता है। उन्होंने मद्रास प्रेसिडेंसी में आपराधिक जनजाति अधिनियम (Criminal Tribes Act) के खिलाफ अभियान की अगुवाई की। 1939 में वे सुभाष चंद्र बोस के पीछे-पीछे फॉरवर्ड ब्लॉक में गए और अपनी मृत्यु तक उसकी तमिलनाडु इकाई का नेतृत्व किया। वे 1937 में मद्रास विधानसभा के लिए और तीन बार लोकसभा के लिए चुने गए। 30 अक्टूबर को उनकी जयंती और पुण्यतिथि दोनों पड़ती हैं, और इस दिन हर साल पसुमपोन में गुरु पूजा मनाई जाती है।

ज्यादातर लोग उनके बारे में या तो इस सालाना स्मृति आयोजन से जानते हैं, या दक्षिणी जिलों में जातीय तनाव की खबरों से। दोनों रास्ते अधूरी तस्वीर देते हैं। रिकॉर्ड एक राष्ट्रवादी और मजदूर नेता को दिखाता है, जिसने उस औपनिवेशिक कानून के खिलाफ काम किया जो पूरे के पूरे समुदायों पर अपराधी होने का ठप्पा लगाता था। वही रिकॉर्ड यह भी दिखाता है कि 1957 में उनका राजनीतिक जीवन जातीय टकराव में उलझ गया। यह नोट दर्ज तथ्यों को उनके इर्द-गिर्द बनी श्रद्धा वाली कहानियों से अलग रखता है, और तारीखें वैसी ही देता है जैसी स्रोत देते हैं।

मुथुरामलिंगा थेवर एक नजर में

तालिका में मुख्य तथ्य दिए गए हैं। जहां आधिकारिक और दूसरे स्रोत अलग-अलग बात कहते हैं, वहां वह फर्क दर्ज किया गया है।

तथ्यविवरण
जन्म30 अक्टूबर 1908, पसुमपोन, कमुदी के पास, रामनाथपुरम जिला
निधनलोकसभा सचिवालय के अनुसार 30 अक्टूबर 1963; कुछ विवरण 29 अक्टूबर बताते हैं
पार्टी1939 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस; 1939 से ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक
मुख्य अभियानआपराधिक जनजाति अधिनियम के खिलाफ; अभिरामम सम्मेलन, 12 और 13 मई 1934
विधानसभामद्रास विधानसभा, 1937 (रामनाथपुरम) और 1946; 1952 और 1957 में मुदुकुलतूर
लोकसभा1952, 1957 और 1962 में चुने गए
पार्टी पद1948 से फॉरवर्ड ब्लॉक की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष; 1955 से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
स्मृति30 अक्टूबर को पसुमपोन में गुरु पूजा; संसद भवन परिसर में प्रतिमा, 1 अक्टूबर 2002

शुरुआती जीवन और राजनीति में प्रवेश

थेवर का जन्म 30 अक्टूबर 1908 को रामनाथपुरम जिले में कमुदी के पास के गांव पसुमपोन में हुआ। उनका परिवार मरवर समुदाय का जमीन वाला परिवार था। लोकसभा सचिवालय की 2002 की प्रोफाइल दर्ज करती है कि उन्होंने कमुदी में अमेरिकी मिशनरियों के चलाए एक प्राथमिक स्कूल में पढ़ाई की, फिर मदुरै के पास पसुमलै मिशन हाई स्कूल में पढ़े, और कॉलेज नहीं गए।

लगभग उन्नीस साल की उम्र में वे कांग्रेस के साथ सार्वजनिक जीवन में आए। वही प्रोफाइल एस. श्रीनिवास अयंगर को उनका राजनीतिक गुरु बताती है। 1930 के दशक के बीच तक वे दक्षिणी जिलों में ऐसे वक्ता बन चुके थे जिनकी हर जगह मांग थी। उनके शुरुआती सालों का प्रोफाइल वाला विवरण तारीफ के लहजे में लिखा गया है। इसलिए इसे एक आलोचनात्मक जीवनी की तरह नहीं, बल्कि स्मृति में तैयार किए गए दस्तावेज की तरह पढ़ना चाहिए।

आपराधिक जनजाति अधिनियम के खिलाफ अभियान

आपराधिक जनजाति अधिनियम एक औपनिवेशिक कानून था, जिसके तहत सरकार पूरे समुदाय को “जन्म से अपराधी” घोषित कर सकती थी। अधिसूचित समुदाय के सदस्यों को पुलिस में अपना नाम दर्ज कराना पड़ता था, नियमित रूप से हाजिरी देनी पड़ती थी और कहीं आने-जाने के लिए इजाजत लेनी पड़ती थी। इसे ऐसे समझिए कि किसी एक व्यक्ति के कुछ भी करने से पहले ही पूरे समुदाय के नाम आपराधिक रिकॉर्ड जारी कर दिया गया हो। मूल अधिनियम 1871 का है। विमुक्त जनजातियों पर PIB का एक पृष्ठभूमि नोट इसे औपनिवेशिक राज्य का सबसे कठोर कानून बताता है।

मद्रास प्रेसिडेंसी में यह अधिनियम दक्षिणी जिलों के कल्लर और मरवर समुदायों के कुछ हिस्सों पर लागू किया गया था। लोकसभा प्रोफाइल बताती है कि पुरुषों को थानों में हाजिरी लगानी पड़ती थी, और समुदाय इस नियम को रोज की बेइज्जती के रूप में जीते थे। थेवर ने इस अधिनियम को खत्म करवाना अपना पहला मकसद बनाया।

अभिरामम सम्मेलन और उसके बाद

उनके अभियान ने 12 और 13 मई 1934 को अभिरामम में हुए एक सम्मेलन में संगठित रूप लिया। इसकी अध्यक्षता कांग्रेस नेता पी. वरदराजुलु नायडु ने की। सम्मेलन ने अधिनियम की निंदा करने वाला प्रस्ताव पास किया और उसे सरकार को भेजा। थेवर ने दौरों, रैलियों और 1937 के बाद मद्रास विधानसभा में भाषणों के जरिए यह अभियान जारी रखा।

एक तारीख पर ध्यान देना जरूरी है। लोकसभा प्रोफाइल कहती है कि अधिनियम “1934 में” लाया गया, लेकिन यह अभिरामम सम्मेलन का साल है, कानून का नहीं। कानून 1871 का है। राष्ट्रीय स्तर पर यह अधिनियम आपराधिक जनजाति (निरसन) अधिनियम, 1952 के जरिए 31 अगस्त 1952 से खत्म किया गया। इसके बाद ये समुदाय विमुक्त जनजातियों के नाम से जाने गए। तब से इन समुदायों की कहानी साइट के विमुक्त और घुमंतू जनजातियों वाले नोट में दी गई है। लोकसभा प्रोफाइल अधिनियम के खत्म होने का श्रेय थेवर की लगातार कोशिश को देती है।

कांग्रेस, मजदूर संघ और फॉरवर्ड ब्लॉक

1930 के दशक के आखिर में थेवर की राजनीति एक साथ तीन पटरियों पर चल रही थी: कांग्रेस में चुनावी राजनीति, मदुरै में मजदूर संघ का काम, और सुभाष चंद्र बोस के साथ बढ़ता जुड़ाव।

1937 का चुनाव

भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत 1937 में हुए प्रांतीय चुनावों में कांग्रेस ने उन्हें रामनाथपुरम से उतारा, और उन्होंने मद्रास विधानसभा की सीट जीती। लोकसभा प्रोफाइल दर्ज करती है कि प्रचार के दौरान सरकार ने उनके सार्वजनिक सभाओं को संबोधित करने पर रोक लगा दी थी।

मदुरै में मजदूर संघ

उन्होंने मिल मजदूरों के बीच भी अपना आधार बनाया। उन्होंने पसुमलै महालक्ष्मी मिल्स और मीनाक्षी मिल्स के संघों का नेतृत्व किया। महालक्ष्मी मिल्स आंदोलन के दौरान 15 अक्टूबर 1938 को उन्हें गिरफ्तार किया गया। 1945 में उन्होंने मदुरै के TVS समूह में मजदूर संघ की स्थापना की और उसके पहले अध्यक्ष बने।

मदुरै में मंदिर प्रवेश, 1939

इन्हीं सालों में एक ऐसी घटना हुई जो जाति की राजनीति वाली उनकी बाद की छवि से मेल नहीं खाती। 1939 में, जिस साल राजगोपालाचारी मंत्रिमंडल ने मंदिर प्रवेश कानून पास किया, कांग्रेस कार्यकर्ता ए. वैद्यनाथ अय्यर 8 जुलाई 1939 को दलितों के एक समूह को मदुरै के मीनाक्षी मंदिर में ले गए। लोकसभा प्रोफाइल दर्ज करती है कि थेवर ने उन लोगों के खिलाफ खुलकर इस प्रवेश का साथ दिया जो इसे रोकने की धमकी दे रहे थे। दक्षिण के मंदिर प्रवेश आंदोलनों पर लिखा उत्तर इस घटना का इस्तेमाल कर सकता है, बशर्ते वह वैद्यनाथ अय्यर को वही मुख्य भूमिका दे जो रिकॉर्ड उन्हें देता है।

कांग्रेस से अलगाव

1939 के त्रिपुरी अधिवेशन में थेवर ने पट्टाभि सीतारमैया के खिलाफ बोस का साथ दिया। सीतारमैया को गांधी का समर्थन था। जब बोस ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर 1939 में फॉरवर्ड ब्लॉक बनाया, तो थेवर ने तमिलनाडु में नई पार्टी खड़ी की। युद्ध के सालों में उन्हें गिरफ्तार किया गया। 22 जून 1942 को फॉरवर्ड ब्लॉक पर प्रतिबंध लगने के बाद वे फिर गिरफ्तार हुए, और 5 सितंबर 1945 को वेल्लोर जेल से रिहा हुए। सुभाष चंद्र बोस के प्रति उनकी वफादारी बोस के बाद भी बनी रही: वे सार्वजनिक रूप से कहते रहे कि बोस की मौत 1945 में नहीं हुई थी।

आजादी के बाद का चुनावी रिकॉर्ड

थेवर के करियर का चुनाव वाला हिस्सा आधिकारिक स्रोतों में सबसे अच्छी तरह दर्ज है। यह दिखाता है कि दक्षिणी जिलों में उनका आधार कितना मजबूत था:

1957 की लोकसभा सीट एक छोटा जाल है। लोकसभा प्रोफाइल श्रीविल्लिपुत्तूर का नाम लेती है, जबकि दूसरे विवरण अरुप्पुकोट्टई बताते हैं। सुरक्षित बात वही है जिस पर सभी स्रोत सहमत हैं: वे तीन बार, 1952, 1957 और 1962 में, लोकसभा के लिए चुने गए।

1957 की मुदुकुलतूर हिंसा और अदालती मामला

1957 में उनके विधानसभा सीट छोड़ने से मुदुकुलतूर में उपचुनाव हुआ। इसके बाद के महीनों में रामनाथपुरम जिले में थेवर समुदायों और दलित समूह देवेंद्रकुल वेलालर (पल्लर) समुदाय के बीच झड़पें हुईं, जो फॉरवर्ड ब्लॉक और कांग्रेस की होड़ की तर्ज पर बंटी थीं। जिला कलेक्टर ने 10 सितंबर 1957 को एक शांति बैठक बुलाई, जिसमें थेवर और दलित नेता इमैनुएल सेकरन दोनों बोले। अगले दिन, 11 सितंबर 1957 को, सेकरन की हत्या कर दी गई।

थेवर को निवारक निरोध अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया और हत्या के सिलसिले में उन पर आरोप लगाए गए। अदालत ने उन्हें बरी कर दिया, और लोकसभा प्रोफाइल 1959 में उनकी रिहाई दर्ज करती है। आज दोनों की याद उसी जिले में मनाई जाती है: थेवर की 30 अक्टूबर को और सेकरन की 11 सितंबर को। 2024 में तमिलनाडु सरकार ने 11 सितंबर को रामनाथपुरम और शिवगंगा जिलों में स्थानीय अवकाश घोषित किया। जो विवरण एक स्मृति दिवस का जिक्र करता है और दूसरे का नहीं, वह इलाके के इतिहास की एकतरफा तस्वीर देता है।

धार्मिक जीवन, लेखन और श्रद्धा वाली छवि

राजनीति के साथ-साथ थेवर धार्मिक वक्ता भी थे। लोकसभा प्रोफाइल उन्हें भगवान मुरुगन का भक्त और स्वामी विवेकानंद और तमिल संत रामलिंग अडिगल का प्रशंसक बताती है। वे शैव सिद्धांत पर भी प्रवचन देते थे, जो तमिल शैव धर्म का दार्शनिक संप्रदाय है। उन्होंने शादी नहीं की और संन्यासी की तरह रहे। उन्होंने दो तमिल पत्रिकाएं चलाईं: नेताजी, जो 1942 तक चली, और साप्ताहिक कण्णगी, जो उनकी मृत्यु तक चली।

यही वह जगह है जहां रिकॉर्ड और श्रद्धा आपस में घुल जाते हैं। उनके बारे में दोहराई जाने वाली कई कहानियां, जैसे 1949 में कोरिया और चीन की एक गुप्त यात्रा, उसी स्मृति प्रोफाइल से आती हैं, और वहां भी उन्हें ऐसी बातों के रूप में लिखा गया है जो “कही जाती हैं”। उनके अनुयायियों के लिए वे एक संत जैसी शख्सियत हैं। इसीलिए उनकी वर्षगांठ को सिर्फ जयंती नहीं, बल्कि गुरु पूजा, यानी गुरु की पूजा, कहा जाता है। परीक्षा के नोट को इस श्रद्धा को इस तथ्य के रूप में दर्ज करना चाहिए कि उन्हें कैसे याद किया जाता है, उसे अपना फैसला बनाए बिना।

मुथुरामलिंगा थेवर आज

30 अक्टूबर को पसुमपोन की गुरु पूजा मुख्य सालाना आयोजन है, और इसमें तमिलनाडु की ज्यादातर पार्टियों के नेता पहुंचते हैं। 30 अक्टूबर 2025 को प्रधानमंत्री ने गुरु पूजा पर थेवर को श्रद्धांजलि दी और न्याय, समानता और किसानों और गरीबों के कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का जिक्र किया। आधिकारिक सम्मान के दूसरे रूप पुराने हैं:

यह स्मृति आयोजन बिना खिंचाव के नहीं है। 30 अक्टूबर और 11 सितंबर, दोनों वर्षगांठें कई बार दक्षिणी जिलों में जातीय तनाव का मौका बनी हैं। इसीलिए संतुलित विवरण दोनों का नाम लेता है।

परीक्षा के लिए मुथुरामलिंगा थेवर कैसे पढ़ें

थेवर GS पेपर I में दो जगह आते हैं। पहली जगह राष्ट्रीय आंदोलन का क्षेत्रीय चेहरा है (1930 के दशक के आखिर में फॉरवर्ड ब्लॉक और कांग्रेस का वामपंथी धड़ा)। दूसरी जगह समुदायों पर बने औपनिवेशिक कानूनों का इतिहास है (आपराधिक जनजाति अधिनियम और विमुक्त जनजातियां, जो GS पेपर II के कमजोर वर्गों वाले हिस्से से भी जुड़ता है)। मुख्य परीक्षा व्यक्ति से ज्यादा विषय को बड़े दायरे में पूछती है, जैसे मुख्य परीक्षा 2019, GS पेपर I में: “गांधीवादी चरण के दौरान अनेक स्वरों ने राष्ट्रवादी आंदोलन को मजबूत और समृद्ध किया था। विस्तार से बताइए।” गांधी से असहमत क्षेत्रीय नेता, जैसे त्रिपुरी में थेवर, ठीक वैसे ही स्वर हैं जिनकी ऐसा प्रश्न मांग करता है। साइट के प्रीलिम्स प्रश्न बैंक के 1,403 प्रश्नों में से 184 इतिहास के हैं।

दोहराने के लिए पक्के तथ्य:

1957 की घटनाएं भारतीय समाज में जाति के बड़े अध्ययन से भी जुड़ती हैं, जो साइट के भारत में जाति व्यवस्था वाले नोट में दिया गया है।

आम गड़बड़ियां नामों और तारीखों को लेकर होती हैं। “थेवर” उनकी उपाधि भी है और कल्लर, मरवर और अगमुदैयार समुदायों का साझा नाम भी, इसलिए प्रश्न ध्यान से पढ़िए। आपराधिक जनजाति अधिनियम 1934 का कानून नहीं है। और 1939 का फॉरवर्ड ब्लॉक 1934 की कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी नहीं है, हालांकि दोनों ने कांग्रेस के वामपंथी धड़े से ताकत ली।

नेताइलाकापार्टीमुख्य मुद्दा
मुथुरामलिंगा थेवरदक्षिणी तमिलनाडुफॉरवर्ड ब्लॉकआपराधिक जनजाति अधिनियम को खत्म करवाना; बोस की राजनीति
सुभाष चंद्र बोसबंगालफॉरवर्ड ब्लॉक (संस्थापक, 1939)उग्र उपनिवेश-विरोधी संघर्ष
ई. वी. रामासामी (पेरियार)तमिलनाडुआत्म-सम्मान आंदोलन, द्रविड़ कषगमजाति-विरोधी तर्कवाद
के. कामराजतमिलनाडुकांग्रेसकांग्रेस संगठन और बाद में स्कूली शिक्षा

आपकी तैयारी के लिए थेवर याददाश्त से ज्यादा संतुलन की परीक्षा हैं। जो उत्तर उस औपनिवेशिक अन्याय को बता सके जिसके खिलाफ वे लड़े, उन्हें राष्ट्रीय आंदोलन के बोस वाले धड़े में रख सके, और 1957 की घटनाओं को तटस्थ भाषा में बता सके, वह परीक्षक को उसी तरह की समझ दिखाता है जिसकी सिविल सेवाओं को सच में जरूरत है।

सामान्य प्रश्न

मुथुरामलिंगा थेवर कौन थे?

मुथुरामलिंगा थेवर (1908 से 1963) तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के राजनेता थे। उन्होंने औपनिवेशिक आपराधिक जनजाति अधिनियम के खिलाफ अभियान चलाया, सुभाष चंद्र बोस के साथ फॉरवर्ड ब्लॉक में गए और उसकी तमिलनाडु इकाई का नेतृत्व किया। वे मद्रास विधानसभा के लिए और तीन बार लोकसभा के लिए चुने गए।

थेवर जयंती या गुरु पूजा क्या है?

यह मुथुरामलिंगा थेवर की याद में 30 अक्टूबर को पसुमपोन में होने वाला सालाना आयोजन है। यही उनकी जन्म तिथि है, और लोकसभा सचिवालय के अनुसार यही उनकी पुण्यतिथि भी है। अनुयायी इसे गुरु पूजा, यानी गुरु की पूजा, कहते हैं। तमिलनाडु की ज्यादातर पार्टियों के नेता इसमें शामिल होते हैं।

आपराधिक जनजाति अधिनियम क्या था?

यह एक औपनिवेशिक कानून था, जो पहली बार 1871 में पास हुआ। इसके तहत सरकार पूरे समुदायों को जन्म से अपराधी घोषित कर सकती थी और उनके सदस्यों को पुलिस में नाम दर्ज कराने और निगरानी में रहने पर मजबूर कर सकती थी। मद्रास प्रेसिडेंसी में इसे कल्लर और मरवर समुदायों के कुछ हिस्सों पर लागू किया गया। इसे 31 अगस्त 1952 से खत्म कर दिया गया।

मुथुरामलिंगा थेवर फॉरवर्ड ब्लॉक में क्यों शामिल हुए?

1939 के त्रिपुरी कांग्रेस अधिवेशन में उन्होंने गांधी समर्थित उम्मीदवार के खिलाफ सुभाष चंद्र बोस का साथ दिया। उसी साल जब बोस ने इस्तीफा देकर फॉरवर्ड ब्लॉक बनाया, तो थेवर ने तमिलनाडु में पार्टी खड़ी की। 1948 से अपनी मृत्यु तक वे इसकी राज्य इकाई के अध्यक्ष रहे।

मुथुरामलिंगा थेवर कितनी बार लोकसभा के लिए चुने गए?

वे तीन बार, 1952, 1957 और 1962 में, चुने गए। 1952 में उन्होंने लोकसभा सीट छोड़ी और विधानसभा सीट रखी, और 1957 में इसका उल्टा किया। 1957 में उनका निर्वाचन क्षेत्र श्रीविल्लिपुत्तूर था या अरुप्पुकोट्टई, इस पर स्रोत एकमत नहीं हैं।

1957 में मुदुकुलतूर में क्या हुआ था?

मुदुकुलतूर उपचुनाव के बाद रामनाथपुरम जिले में थेवर समुदायों और दलित देवेंद्रकुल वेलालर समुदाय के बीच झड़पें हुईं। दलित नेता इमैनुएल सेकरन की 11 सितंबर 1957 को हत्या कर दी गई। थेवर को हिरासत में लिया गया और इस मामले के सिलसिले में उन पर आरोप लगे, लेकिन अदालत ने उन्हें बरी कर दिया।

संसद में मुथुरामलिंगा थेवर की प्रतिमा कहां है?

उनकी प्रतिमा नई दिल्ली में संसद भवन परिसर में है। राष्ट्रपति ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ने 1 अक्टूबर 2002 को इसका उद्घाटन किया, और इस मौके पर लोकसभा सचिवालय ने उन पर एक प्रोफाइल प्रकाशित की। इसे मूर्तिकार किशोर जे. नागप्पा ने बनाया था।

अभ्यास प्रश्न

प्रीलिम्स MCQ

1. आपराधिक जनजाति अधिनियम के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह पहली बार 1934 में बनाया गया था। 2. इसे 31 अगस्त 1952 से खत्म कर दिया गया। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

उत्तर: (b) अधिनियम 1871 का है; 1934 उसके खिलाफ हुए अभिरामम सम्मेलन का साल है।

2. 1939 के बाद मुथुरामलिंगा थेवर निम्नलिखित में से किस पार्टी से जुड़े थे?

उत्तर: (c) वे सुभाष चंद्र बोस के साथ फॉरवर्ड ब्लॉक में गए और उसकी तमिलनाडु इकाई का नेतृत्व किया।

3. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मुथुरामलिंगा थेवर ने 1939 के त्रिपुरी अधिवेशन में सुभाष चंद्र बोस का समर्थन किया। 2. वे 1952, 1957 और 1962 में लोकसभा के लिए चुने गए। 3. वे आत्म-सम्मान आंदोलन के संस्थापक थे। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर: (a) आत्म-सम्मान आंदोलन की स्थापना ई. वी. रामासामी (पेरियार) ने की थी।

4. मई 1934 का अभिरामम सम्मेलन निम्नलिखित में से किससे जुड़ा है?

उत्तर: (b) पी. वरदराजुलु नायडु की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन ने अधिनियम की निंदा करने वाला प्रस्ताव पास किया।

5. 30 अक्टूबर को पसुमपोन में होने वाली सालाना गुरु पूजा किसकी स्मृति में होती है?

उत्तर: (b) इमैनुएल सेकरन की स्मृति 11 सितंबर को मनाई जाती है।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

  1. 1920 के दशक से राष्ट्रीय आंदोलन ने कई वैचारिक धाराएं ग्रहण कीं और इस तरह अपना सामाजिक आधार बढ़ाया। चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2020, GS पेपर I।
  2. आपराधिक जनजाति अधिनियम ने पूरे के पूरे समुदायों को अपराधी बना दिया। मद्रास प्रेसिडेंसी के संदर्भ में इसके असर और इसे खत्म करवाने वाले आंदोलन का परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
  3. फॉरवर्ड ब्लॉक ने सुभाष चंद्र बोस के प्रभाव को दक्षिण भारत तक कैसे पहुंचाया? (10 अंक, 150 शब्द)
  4. विमुक्त जनजातियां आज भी औपनिवेशिक कानूनों की विरासत झेल रही हैं। 1952 से अब तक की नीतिगत प्रतिक्रिया की चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
  5. क्षेत्रीय नेताओं की स्मृति समुदायों को जोड़ भी सकती है और बांट भी सकती है। दक्षिणी तमिलनाडु के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)