प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY): योजना, चरण और असर
PMKVY 2015 से चल रही स्किल इंडिया मिशन की सबसे बड़ी हुनर योजना है। इसके दो हिस्से STT और RPL, चारों चरण, संस्थाओं का ढाँचा, अब तक के आँकड़े और CAG की गिनाई कमज़ोरियाँ आसान हिंदी में।
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की सबसे बड़ी हुनर-प्रशिक्षण योजना है। इसे 15 जुलाई 2015 को शुरू किया गया था — यही दिन हर साल विश्व युवा कौशल दिवस के रूप में मनाया जाता है — और यही स्किल इंडिया मिशन का असली इंजन है। PMKVY का मक़सद है कि बड़ी संख्या में भारतीय युवा ऐसा हुनर सीखें जिसकी उद्योग में सचमुच माँग है, ताकि उन्हें बेहतर रोज़गार मिल सके। अपने चार चरणों में यह योजना 1.4 करोड़ से ज़्यादा लोगों को प्रशिक्षण दे चुकी है। UPSC की तैयारी करने वालों के लिए PMKVY बड़े पैमाने पर मानव संसाधन विकास, नीति के डिज़ाइन, और दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देश में हुनर सिखाने की मुश्किलों — तीनों का केस स्टडी है।
पृष्ठभूमि — युवा आबादी वाली खिड़की

भारत की क़रीब 65% आबादी 35 साल से कम उम्र की है और औसत उम्र क़रीब 29 साल है। 2030 तक भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी कामकाजी आबादी होगी। अगर इन्हें हुनर नहीं सिखाया गया, तो जनसांख्यिकीय लाभांश उलटकर बोझ बन सकता है।
| संकेतक | अनुमान (PMKVY से पहले) |
|---|---|
| औपचारिक रूप से हुनरमंद कामगार | ~4.7% (NSSO 2011–12) |
| चीन (तुलना के लिए) | ~24% |
| जर्मनी | ~75% |
| दक्षिण कोरिया | ~96% |
| हर साल नौकरी बाज़ार में आने वाले युवा | ~1.2 करोड़ |
इसी पृष्ठभूमि में शारदा प्रसाद समिति (2016) की सेक्टर स्किल काउंसिलों पर समीक्षा और सरकार के राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन (2015) ने मिलकर यह ज़रूरत सामने रखी कि एक केंद्रित और नतीजों से जुड़ा हुनर कार्यक्रम चाहिए — यानी PMKVY।
योजना का ढाँचा
PMKVY को राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) चलाता है, MSDE और राष्ट्रीय कौशल विकास एजेंसी (NSDA) के मार्गदर्शन में।
| हिस्सा | संस्था / भूमिका |
|---|---|
| मंत्रालय | कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE), बना नवंबर 2014 में |
| चलाने वाली संस्था | राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) — PPP, 49% सरकार + 51% निजी |
| मानक तय करने वाली संस्था | राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (NCVET) |
| क्षेत्रवार संस्थाएँ | 37 सेक्टर स्किल काउंसिल (SSC) |
| प्रशिक्षण केंद्र | प्रधानमंत्री कौशल केंद्र (PMKK) + जुड़े हुए प्रशिक्षण साझेदार |
| ढाँचा | राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचा (NSQF) — 10 स्तर |
दो हिस्से

PMKVY में प्रशिक्षण के दो मुख्य रास्ते हैं:
1. अल्पकालिक प्रशिक्षण (STT)
- उनके लिए जिन्होंने स्कूल या कॉलेज बीच में छोड़ दिया या जो बेरोज़गार हैं
- अवधि: काम के हिसाब से 150–300 घंटे
- इसमें बातचीत का हुनर, उद्यमिता, पैसे की समझ और डिजिटल साक्षरता भी शामिल है
- सीखने वालों को प्रशिक्षण, प्रमाणपत्र और नौकरी दिलाने में मदद मिलती है
- प्रमाणपत्र और नौकरी मिलने पर सीखने वाले को नक़द इनाम
2. पहले से सीखे हुनर की पहचान (RPL)
- उन कामगारों के लिए जो काम करते-करते ख़ुद ही हुनर सीख चुके हैं (बिजली मिस्त्री, दर्ज़ी, मैकेनिक, घरेलू कामगार)
- अवधि: 12–80 घंटे का छोटा प्रशिक्षण
- हुनर परखा जाता है और NSQF के तहत प्रमाणपत्र दिया जाता है
- असंगठित कामगार औपचारिक प्रमाणपत्र वाली व्यवस्था में आ जाते हैं
- यह प्रमाणपत्र नौकरी, क़र्ज़ और सरकारी योजनाओं में मान्य है
RPL इस योजना की सबसे नई सोच वाली बात है — यह दशकों से काम कर रहे लोगों के हुनर को काग़ज़ पर दर्ज कर देती है, जिससे उन्हें वह क़र्ज़ और वे सरकारी फ़ायदे मिल पाते हैं जिनसे वे अब तक बाहर थे।
PMKVY के चार चरण
PMKVY चरणों में आगे बढ़ी है, और हर चरण पिछले चरण के सबक़ पर टिका है।
| चरण | समय | ख़र्च | लक्ष्य / ख़ास बातें |
|---|---|---|---|
| PMKVY 1.0 | 2015–16 | 1,500 करोड़ रुपये | पायलट; 24 लाख को प्रशिक्षण |
| PMKVY 2.0 | 2016–20 | 12,000 करोड़ रुपये | 1 करोड़ का लक्ष्य; केंद्र प्रायोजित + केंद्र से पैसा, दोनों धाराएँ |
| PMKVY 3.0 | 2020–21 | 948.90 करोड़ रुपये | कोविड-19 के दौर का प्रशिक्षण, माँग के हिसाब से, ज़िला कौशल समितियाँ |
| PMKVY 4.0 | 2022–26 | 8,800 करोड़ रुपये का हिस्सा (विश्व बैंक की मदद वाले SANKALP + STRIVE के साथ जोड़कर) | इंडस्ट्री 4.0 पर ज़ोर — AI, ML, रोबोटिक्स, ड्रोन, 3D प्रिंटिंग, 5G |
PMKVY 1.0 (2015–16)
- पायलट योजना; 1,500 करोड़ रुपये का ख़र्च
- नक़द इनाम वाला मॉडल
- 24 लाख लोगों को प्रशिक्षण
- नौकरी मिली या नहीं, इसका हिसाब कमज़ोर रहने पर आलोचना हुई
PMKVY 2.0 (2016–20)
- ख़र्च बढ़कर 12,000 करोड़ रुपये — 40% RPL के लिए, 60% STT के लिए
- केंद्र प्रायोजित, केंद्र संचालित (CSCM) धारा — 75% पैसा NSDC के ज़रिए
- केंद्र प्रायोजित, राज्य संचालित (CSSM) धारा — 25% पैसा राज्यों के ज़रिए
- ज़िलों में कौशल और रोज़गार मेले
- 1 करोड़ से ज़्यादा लोगों को प्रमाणपत्र
PMKVY 3.0 (2020–21)
- कोविड-19 के दौरान का छोटा बदलाव-चरण
- माँग के हिसाब से — स्थानीय उद्योग की ज़रूरत देखकर प्रशिक्षण
- ज़िला कौशल समितियों (DSC) को ज़्यादा अधिकार
- 8 लाख लोगों का लक्ष्य; आत्मनिर्भर भारत पर ज़ोर
PMKVY 4.0 (2023 में शुरू, अवधि 2022–26)
- बजट 2023–24 में घोषित
- इंडस्ट्री 4.0 पर ज़ोर: AI, ML, रोबोटिक्स, ड्रोन, IoT, 5G
- काम के दौरान प्रशिक्षण और उद्योग के साथ साझेदारी केंद्र में
- उभरते क्षेत्रों से जुड़े नए ज़माने के कोर्स
- विश्व बैंक के SANKALP और STRIVE कार्यक्रमों के साथ जोड़ा गया
मुख्य संस्थाएँ और शब्द
| शब्द | पूरा नाम / मतलब |
|---|---|
| MSDE | कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय |
| NSDC | राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (PPP) |
| NSDA | राष्ट्रीय कौशल विकास एजेंसी (2018 में NCVET में मिला दी गई) |
| NCVET | राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (नियामक) |
| NSQF | राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचा |
| SSC | सेक्टर स्किल काउंसिल (उद्योग की अगुवाई वाली मानक संस्था) |
| PMKK | प्रधानमंत्री कौशल केंद्र — ज़िले का आदर्श प्रशिक्षण केंद्र |
| RPL | पहले से सीखे हुनर की पहचान |
| STT | अल्पकालिक प्रशिक्षण |
| SANKALP | Skills Acquisition and Knowledge Awareness for Livelihood Promotion |
| STRIVE | Skills Strengthening for Industrial Value Enhancement |
अब तक क्या हासिल हुआ
MSDE के आँकड़ों के मुताबिक़ (PMKVY 1.0–3.0 मिलाकर, 2023 के मध्य तक):
| पैमाना | संख्या |
|---|---|
| कुल नामांकन | 1.39 करोड़+ |
| प्रशिक्षण पाया | 1.37 करोड़+ |
| प्रमाणपत्र मिला | 1.09 करोड़+ |
| नौकरी मिली (PMKVY 2.0 CSCM) | 21 लाख से ज़्यादा |
| चालू PMKK | 717+, 680 ज़िलों में |
| सेक्टर स्किल काउंसिल | 37 |
PMKVY 4.0 में जो नया जुड़ा:
- विदेश में काम के लिए तैयार करने वाले 30 स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (SIIC) की योजना
- हुनर की आपसी मान्यता पर UAE, जापान, जर्मनी, इज़रायल के साथ साझेदारी
- अपनी रफ़्तार से सीखने के लिए डिजिटल स्किल वाउचर का पायलट
आलोचनाएँ और चुनौतियाँ
सरकारी और बाहरी — दोनों तरह के कई आकलनों ने लगातार बनी हुई दिक़्क़तें गिनाई हैं।
| आलोचना | सबूत |
|---|---|
| नौकरी बहुत कम को मिली | PMKVY 2.0 में नौकरी की दर 40–45% के आसपास रही |
| प्रशिक्षण बहुत छोटा | गहरा हुनर सिखाने के लिए 150–300 घंटे कम माने जाते हैं |
| प्रशिक्षण केंद्रों की हालत | कुछ केंद्र सिर्फ़ पैसा लेने के लिए खुले और फिर बंद हो गए |
| स्थानीय नौकरी बाज़ार से मेल नहीं | ऐसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण जहाँ आसपास कोई माँग ही नहीं |
| उद्योग से कमज़ोर रिश्ता | कोर्स बनाते समय उद्योग की राय बहुत कम ली गई |
| बीच में छोड़ने वाले | संख्या ज़्यादा; ख़ासकर RPL में |
| महिलाओं की कम भागीदारी | महिलाओं की हिस्सेदारी सिर्फ़ ~40% |
| आँकड़ों पर भरोसा | CAG रिपोर्ट 2022 ने नामांकन के आँकड़े बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए जाने की बात कही |
| ITI और पॉलिटेक्निक से दोहराव | एक ही काम दो जगह; पुराने व्यावसायिक संस्थान कमज़ोर पड़े |
शारदा प्रसाद समिति की रिपोर्ट (2016) और CAG का निष्पादन ऑडिट (2022) आज भी सबसे ज़्यादा हवाला दी जाने वाली आलोचनात्मक रिपोर्टें हैं।
दूसरी हुनर योजनाओं से तुलना
| योजना | मंत्रालय | किस पर ज़ोर |
|---|---|---|
| PMKVY | MSDE | अल्पकालिक प्रशिक्षण + RPL |
| DDU-GKY (दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना) | ग्रामीण विकास मंत्रालय | ग़रीब ग्रामीण युवा (15–35), नौकरी से जुड़ा प्रशिक्षण |
| DAY-NULM कौशल | आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय | शहरी ग़रीबों का प्रशिक्षण |
| राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (NAPS) | MSDE | शिक्षुता (अप्रेंटिसशिप) |
| PM-DAKSH | सामाजिक न्याय मंत्रालय | SC/OBC/DNT/सफ़ाई कर्मचारी |
| स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर | MSDE | विदेश में नौकरी के लिए तैयारी |
| शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (ITI) | MSDE (DGT) | लंबा (1–2 साल का) तकनीकी प्रशिक्षण |
पैमाने के हिसाब से PMKVY सबसे बड़ी है, लेकिन यह इन योजनाओं के साथ-साथ चलती है। अब एक नई चिंता यह है कि दोहराव कैसे घटाया जाए बिना यह भूले कि हर योजना का अपना ख़ास तबक़ा है।
आगे का रास्ता
आर्थिक सर्वेक्षण 2023–24 और नीति आयोग की 2030 की रणनीति कई सुझावों पर एक जैसी बात कहते हैं:
- संख्या नहीं, गुणवत्ता — कम लेकिन बेहतर साज़ो-सामान वाले प्रशिक्षण केंद्र
- मुश्किल हुनर के लिए लंबे कोर्स
- उद्योग की साझेदारी — NAPS के तहत बड़े पैमाने पर शिक्षुता
- डिजिटल प्रमाणपत्र — DigiLocker पर स्किल पासपोर्ट
- महिलाओं के लिए अलग से बनी योजनाएँ और सुरक्षित आना-जाना व प्रशिक्षण
- मुद्रा और PM-विश्वकर्मा के साथ क़र्ज़ का तालमेल
- दूसरे देशों के साथ आने-जाने के समझौतों से विदेश में नौकरी
UPSC में इसका काम
PMKVY शासन और अर्थव्यवस्था — दोनों में बार-बार आने वाला विषय है।
- प्रीलिम्स: शुरू होने का साल (2015), मंत्रालय (MSDE — 2014 में बना), चलाने वाली संस्था (NSDC), नियामक (NCVET), ढाँचा (NSQF), दो हिस्से (STT, RPL), चार चरण, जुड़ी योजनाएँ (PMKK, NAPS, DDU-GKY, SANKALP, STRIVE, PM-DAKSH)
- मुख्य परीक्षा GS पेपर II: हुनर विकास पर सरकारी नीतियाँ, संस्थाओं का ढाँचा, कमज़ोर वर्गों का कल्याण
- मुख्य परीक्षा GS पेपर III: जनसांख्यिकीय लाभांश, रोज़गार और हुनर की चुनौती, समावेशी विकास, इंडस्ट्री 4.0 के लिए तैयारी
- करेंट अफ़ेयर्स: बजट 2023–24 में स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर की घोषणा, CAG की 2022 की रिपोर्ट, PMKVY 4.0 की शुरुआत, PM विश्वकर्मा योजना (2023), डिजिटल स्किल वाउचर
- निबंध: "भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश को हक़ीक़त में बदलना" या "हुनर चाहिए, नारे नहीं"
उम्मीदवारों को MSDE, NSDC, NSDA, NCVET और SSC का फ़र्क़ साफ़ पता होना चाहिए, PMKVY को बड़े स्किल इंडिया मिशन के भीतर रखकर देखना चाहिए, और इसकी उपलब्धियों पर भी और CAG की गिनाई कमज़ोरियों पर भी ठोस आँकड़ों के साथ बात करनी चाहिए।