Anantam IASHindi Note · 14 September 2026

त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (PCA): RBI की सीमाएँ, पाबंदियाँ और NBFC के नियम

त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई आसान भाषा में: RBI की पूंजी, शुद्ध NPA और लीवरेज वाली सीमाएँ, उनके बाद की पाबंदियाँ, यह किन पर लागू है और यह कर्ज पर रोक क्यों नहीं है।

त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (Prompt Corrective Action, PCA) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का शुरुआती चेतावनी वाला फ्रेमवर्क है। यह उन कर्ज देने वाली संस्थाओं पर लागू होता है जिनकी पूंजी या परिसंपत्ति की गुणवत्ता तय खतरे की रेखा से नीचे फिसल जाती है। कोई बैंक ऐसी एक भी रेखा पार करे, तो सुधार के कई कदम अपने-आप शुरू हो जाते हैं। ये कदम डिविडेंड पर रोक से लेकर नई पूंजी लाने की माँग तक जाते हैं। और ये तब तक बने रहते हैं, जब तक लगातार चार साफ तिमाहियाँ यह न दिखा दें कि मरम्मत टिक गई है। यह फ्रेमवर्क दिसंबर 2002 से चल रहा है, और मार्च 2018 तक सार्वजनिक क्षेत्र के 11 बैंक इसके दायरे में आ चुके थे। वाणिज्यिक बैंकों के लिए जो संस्करण 1 जनवरी 2022 से लागू है, उसी की तर्ज पर अब NBFC और शहरी सहकारी बैंकों के लिए भी अलग फ्रेमवर्क हैं।

सबसे आम गलतफहमी यह है कि PCA में आए बैंक पर कर्ज देने की रोक लग गई है, या वह बंद होने वाला है। दोनों में से कोई बात सही नहीं है। 2017 में जब सोशल मीडिया समेत कई जगह इस फ्रेमवर्क के बारे में गलत संदेश फैले, तो RBI ने साफ कहा कि PCA “आम जनता के लिए बैंकों के सामान्य कामकाज पर रोक लगाने के इरादे से नहीं है।” ग्राहक पहले की तरह बैंकिंग करते रहते हैं। पाबंदियाँ इस पर लगती हैं कि बैंक कितना पैसा बाहर बाँटता है और कितनी तेजी से बढ़ता है। यह नोट पहले तय करता है कि कौन-सी पाबंदियाँ अपने-आप लगती हैं और कौन-सी RBI अपनी मर्जी से लगाता है। फिर यह PCA में रखे गए बैंकों का पीछा उनके बाहर निकलने तक करता है।

त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई एक नजर में

PCA को जमीन पर बिछे ऐसे तारों की तरह समझिए, जिन पर पैर पड़ते ही अलार्म बज उठता है। RBI अपने दायरे वाले हर कर्जदाता के कुछ अनुपातों पर नजर रखता है। जब कोई अनुपात तय रेखा पार करता है, तो सुधार के कदमों की एक सूची खुल जाती है। और उल्लंघन जितना गहरा होता है, ये कदम उतने ही सख्त होते जाते हैं

तथ्यविवरण
यह क्या हैRBI का निगरानी फ्रेमवर्क, जो किसी कर्जदाता के तय जोखिम सीमाएँ पार करने पर सुधार की कार्रवाइयाँ शुरू कर देता है
पहली बार कब आयादिसंबर 2002, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के लिए
बैंकों के लिए लागू फ्रेमवर्कRBI का 2 नवंबर 2021 का परिपत्र, 1 जनवरी 2022 से लागू
किन बैंकों पर लागूसभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, विदेशी बैंकों की शाखाओं और सहायक कंपनियों समेत; स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट्स बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) बाहर
बैंकों के संकेतकपूंजी के लिए CRAR या CET1 अनुपात, परिसंपत्ति गुणवत्ता के लिए शुद्ध NPA अनुपात, लीवरेज के लिए टियर 1 लीवरेज अनुपात
डूबे कर्ज का पहला ट्रिगर6% का शुद्ध NPA अनुपात (जोखिम सीमा यानी Risk Threshold 1)
बाहर निकलने की शर्तलगातार 4 तिमाही नतीजों में कोई उल्लंघन नहीं, जिनमें एक ऑडिट किया गया सालाना नतीजा हो, और साथ में RBI की निगरानी वाली संतुष्टि
NBFC1 अक्टूबर 2022 से दायरे में; सरकारी NBFC 1 अक्टूबर 2024 से जोड़े गए
शहरी सहकारी बैंक1 अप्रैल 2025 से दायरे में, टियर 2, 3 और 4 के UCB के लिए

बैंकों के लिए PCA फ्रेमवर्क कैसे काम करता है

वाणिज्यिक बैंक बैंकिंग व्यवस्था के केंद्र में हैं, और उनका फ्रेमवर्क ही वह ढाँचा है जिसकी नकल बाकी संस्करण करते हैं। यह तीन क्षेत्रों पर नजर रखता है, और हर क्षेत्र के लिए एक पैमाना है:

आम तौर पर किसी बैंक को PCA में उसके ऑडिट किए गए सालाना नतीजों और RBI के लगातार चलने वाले निगरानी आकलन के आधार पर रखा जाता है। हालात की माँग हो, तो RBI साल के बीच में भी कदम उठा सकता है, या किसी बैंक को ज्यादा खराब सीमा में डाल सकता है।

जोखिम सीमा की तालिका

परिपत्र हर सीमा को एक न्यूनतम स्तर से नीचे की दूरी के रूप में लिखता है, और यह दूरी बेसिस पॉइंट (bps) में होती है। 100 bps मिलकर एक प्रतिशत अंक बनाते हैं। पूंजी के लिए यह न्यूनतम स्तर है न्यूनतम जरूरत और उसके ऊपर पूंजी संरक्षण बफर। यह बफर एक अतिरिक्त गद्दी है, जो 1 अक्टूबर 2021 को अपने पूरे 2.5% पर पहुँची। इसलिए CRAR की रेखा 9% और 2.5% मिलाकर 11.5% बनती है। CET1 की रेखा 2017 के परिपत्र में लिखे 5.5% के ट्रिगर में यही बफर जोड़कर 8% बनती है। लीवरेज का न्यूनतम स्तर 3.5% है, और घरेलू रूप से प्रणालीगत महत्वपूर्ण बैंकों (D-SIB) के लिए 4%। D-SIB वे बैंक हैं जिनके डूबने से पूरी व्यवस्था हिल जाए।

संकेतकजोखिम सीमा 1जोखिम सीमा 2जोखिम सीमा 3
CRAR (रेखा: 11.5%)250 bps तक नीचे: 11.5% से कम, 9% तक250 से ज्यादा, 400 bps तक नीचे: 9% से कम, 7.5% तक400 bps से ज्यादा नीचे: 7.5% से कम
CET1 अनुपात (रेखा: 8%)162.5 bps तक नीचे: 8% से कम, 6.375% तक162.5 से ज्यादा, 312.5 bps तक नीचे: 6.375% से कम, 4.875% तक312.5 bps से ज्यादा नीचे: 4.875% से कम
शुद्ध NPA अनुपात6% या ज्यादा, 9% से कम9% या ज्यादा, 12% से कम12% या ज्यादा
टियर 1 लीवरेज अनुपात (न्यूनतम: 3.5%, D-SIB के लिए 4%)न्यूनतम स्तर से 50 bps तक नीचे50 से ज्यादा, 100 bps तक नीचे100 bps से ज्यादा नीचे

एक उदाहरण से समझिए

एक काल्पनिक बैंक पर आँकड़े रखकर देखिए, तब तालिका पढ़ना आसान हो जाएगा। उसके ऑडिट किए गए सालाना नतीजे ये दिखाते हैं:

किसी भी एक सीमा का उल्लंघन PCA को न्योता दे सकता है, और इस बैंक के दो उल्लंघन हैं। इनमें ज्यादा खराब शुद्ध NPA वाला है, जो सीमा 2 में बैठता है। इसलिए सीधी समझ यही है कि यह सीमा 2 का मामला है, और अनिवार्य पाबंदियाँ एक के ऊपर एक जुड़ती हैं: सीमा 1 की सारी शर्तें, और साथ में नई शाखाएँ खोलने पर रोक। अब देखिए कि इस उदाहरण में क्या नहीं है। इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है जो बैंक को कर्ज देने से रोके।

PCA क्या रोकता है और क्या नहीं

रोजमर्रा की जिंदगी में इसकी सबसे करीबी तस्वीर है कॉलेज का वह छात्र, जिसे अकादमिक प्रोबेशन पर रखा गया हो। वह क्लास में आता रहता है, लेकिन जब तक कई टर्म साफ न निकल जाएँ, उसे बाकी गतिविधियों से रोक दिया जाता है। यह तुलना एक जगह टूटती है। कॉलेज शायद ही कभी किसी छात्र का टाइमटेबल अपने हाथ में लेता है, जबकि RBI बैंक का प्रबंधन तक बदल सकता है। PCA में दो तरह की कार्रवाइयाँ होती हैं: अनिवार्य कार्रवाइयाँ, जो हर सीमा के लिए तय हैं, और मर्जी वाले कदम, जिन्हें RBI खुद चुनता है।

अनिवार्य कार्रवाइयाँ

परिपत्र हर सीमा के लिए ये कार्रवाइयाँ तय करता है, और हर स्तर पर उससे पहले की सारी शर्तें भी लागू रहती हैं:

इस सूची में “कर्ज” शब्द ढूँढ़िए, वह आपको नहीं मिलेगा। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के मामले में जिस मालिक से पूंजी लाने को कहा जाता है, वह भारत सरकार है। इसीलिए 2019 में बैंकों को बाहर निकालने के फैसलों में सरकारी पूंजी बार-बार दिखती है।

RBI की मर्जी वाले कदम

मर्जी वाले कदमों (discretionary actions) की सूची दस शीर्षकों में बँटी है। यह तिमाही निगरानी बैठकों से शुरू होकर प्रबंधन हटाने तक जाती है। इनमें सबसे अहम शीर्षक ये हैं:

तो क्या PCA के तहत बैंक कर्ज दे सकता है? हाँ, लेकिन RBI उसे सावधानी से कर्ज देने को कह सकता है, और सबसे बुरे मामले में उसकी लोन बुक को बढ़ने से रोक सकता है। यह बढ़त पर सीमा है, रोक नहीं। और इससे ग्राहक के पैसे निकालने के हक पर कोई असर नहीं पड़ता।

पैसे निकालने पर सीमा असल में कौन लगाता है

लोग PCA से जो डर जोड़ते हैं, वह असल में दो दूसरे औजारों का है। बैंकिंग रेगुलेशन अधिनियम की धारा 35A के तहत RBI ऐसे निर्देश जारी कर सकता है, जो पैसे निकालने की सीमा तय कर दें। सितंबर 2019 में उसने यही किया था, जब पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक के जमाकर्ताओं के लिए हर खाते से ₹1,000 की सीमा तय की गई। धारा 45 के तहत केंद्र सरकार RBI के आवेदन पर मोरेटोरियम लगा सकती है, जैसा 17 नवंबर 2020 को लक्ष्मी विलास बैंक के साथ हुआ। सुधार नाकाम हो जाए, तो PCA वाला बैंक वहाँ तक पहुँच सकता है। लेकिन PCA इन दोनों में से कोई भी औजार नहीं है।

PCA का कानूनी आधार और टाइमलाइन

PCA किसी अधिनियम की कोई धारा नहीं है। यह एक निगरानी फ्रेमवर्क है, जिसे RBI परिपत्र के जरिए तय करता है। इसलिए इसे संसद के बिना दोबारा लिखा जा सकता है। लेकिन इसकी भारी कार्रवाइयाँ कानूनी शक्तियों से ताकत लेती हैं: बैंकों के लिए बैंकिंग रेगुलेशन अधिनियम, 1949 से, और NBFC के लिए भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 से। यह बैंकों के पर्यवेक्षक के रूप में RBI के कार्यों का हिस्सा है। तारीखवार सिलसिला यह है:

2021 के संशोधन ने क्या बदला

2021 में दोबारा लिखा गया संस्करण ही अभी लागू है, और चार बदलाव इसे 2017 वाले से अलग करते हैं:

RoA वाले बदलाव की झलक पहले ही मिल गई थी। 31 जनवरी 2019 को जब RBI ने बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र को PCA से बाहर निकाला, तब भी उनका RoA नकारात्मक था। RBI का तर्क था कि घाटा पहले ही पूंजी अनुपात में दिख रहा है। 2021 का परिपत्र इस बदलाव की कोई वजह नहीं बताता। इसलिए इन दोनों के रिश्ते को रिकॉर्ड की एक व्याख्या भर मानिए।

किन बैंकों को PCA में रखा गया

बड़ी लहर RBI की 2015 की परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा (Asset Quality Review) के बाद आई, जब दबाव वाले कर्जों को NPA के रूप में दोबारा दर्ज किया गया। 16 मार्च 2018 को वित्त मंत्रालय ने लोकसभा को बताया कि RBI ने सार्वजनिक क्षेत्र के 11 बैंकों को PCA में रखा है। निजी बैंकों में धनलक्ष्मी बैंक फरवरी 2019 तक PCA में रहा, और लक्ष्मी विलास बैंक को सितंबर 2019 में इसमें रखा गया। नीचे की तालिका दिखाती है कि PCA में रखे गए बैंक किस तरह बाहर निकले। तारीखें वही हैं जिनकी घोषणा RBI और सरकार ने की।

बैंकPCA से कैसे निकलातारीख
बैंक ऑफ इंडियाRBI ने बाहर निकाला31 जनवरी 2019
बैंक ऑफ महाराष्ट्रRBI ने बाहर निकाला31 जनवरी 2019
ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्सनई पूंजी से शुद्ध NPA 6% से नीचे आया, तो पाबंदियाँ हटीं31 जनवरी 2019
इलाहाबाद बैंक₹6,896 करोड़ की सरकारी पूंजी के बाद बाहर निकाला गया26 फरवरी 2019
कॉर्पोरेशन बैंक₹9,086 करोड़ की सरकारी पूंजी के बाद बाहर निकाला गया26 फरवरी 2019
धनलक्ष्मी बैंक (निजी)बाहर निकाला गया, कोई सीमा पार नहीं थी26 फरवरी 2019
देना बैंकबैंक ऑफ बड़ौदा में विलय1 अप्रैल 2019
यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडियापंजाब नेशनल बैंक में विलय1 अप्रैल 2020
लक्ष्मी विलास बैंक (निजी)पहले मोरेटोरियम, फिर DBS बैंक इंडिया के साथ विलय27 नवंबर 2020
IDBI बैंकRBI ने बाहर निकाला10 मार्च 2021
यूको बैंकPCA की पाबंदियों से बाहर8 सितंबर 2021
इंडियन ओवरसीज बैंकPCA की पाबंदियों से बाहर29 सितंबर 2021
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडियाPCA की पाबंदियों से बाहर20 सितंबर 2022

इस तालिका में तारीखें नहीं, पैटर्न पढ़िए। सरकारी पूंजी, चाहे डाली गई हो या उसका वादा हुआ हो, 2019 के एग्जिट में हर जगह दिखती है। 2021-22 के एग्जिट साफ नतीजों पर हुए, और हर बैंक ने लिखित वादा किया कि वह आगे भी मानक पूरे करता रहेगा। देना बैंक और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया साफ एग्जिट से नहीं, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय के जरिए बाहर निकले। लक्ष्मी विलास बैंक 31 मार्च 2019 की स्थिति के उल्लंघनों के कारण सितंबर 2019 से PCA में था। उसकी कहानी 14 महीने बाद मोरेटोरियम और विलय पर खत्म हुई।

NBFC और शहरी सहकारी बैंकों के लिए PCA

RBI ने 14 दिसंबर 2021 को PCA को NBFC तक बढ़ाया, और वजह सीधी बताई: NBFC का आकार बढ़ा है, और बाकी वित्तीय व्यवस्था से उनका जुड़ाव भी। यह फ्रेमवर्क 1 अक्टूबर 2022 से लागू हुआ, और 31 मार्च 2022 या उसके बाद की बैलेंस शीट पर। इन कर्जदाताओं की बुनियादी बातें भारत में NBFC वाले नोट में हैं।

कौन-से NBFC दायरे में हैं

दायरा RBI के अक्टूबर 2021 के पैमाना-आधारित विनियमन (scale-based regulation) की लेयरों से तय होता है। यह व्यवस्था NBFC को आकार और जोखिम के आधार पर छाँटती है:

बेस लेयर से बाहर के सरकारी NBFC 1 अक्टूबर 2024 से जुड़े, 10 अक्टूबर 2023 के एक परिपत्र के तहत। RBI किसी NBFC को PCA में रखते समय प्रेस रिलीज जारी कर सकता है, और PCA हटाते समय भी।

NBFC की सीमाएँ और पाबंदियाँ

आम NBFC को पूंजी और परिसंपत्ति गुणवत्ता पर परखा जाता है। उनके शुद्ध NPA में कर्जों के साथ गैर-निष्पादित निवेश (NPI) भी गिने जाते हैं। CIC मुख्य रूप से अपने ही समूह की कंपनियों में निवेश करती हैं। उन्हें शुद्ध NPA के अलावा दो पैमानों पर परखा जाता है: जोखिम-भारित परिसंपत्तियों के मुकाबले समायोजित नेट वर्थ (adjusted net worth), और लीवरेज। आम NBFC के बैंड ये हैं:

संकेतकजोखिम सीमा 1जोखिम सीमा 2जोखिम सीमा 3
CRAR (न्यूनतम: 15%)15% से कम, 12% तक12% से कम, 9% तक9% से कम
टियर 1 पूंजी अनुपात (न्यूनतम: 10%)10% से कम, 8% तक8% से कम, 6% तक6% से कम
शुद्ध NPA अनुपात, NPI समेत6% से ज्यादा, 9% तक9% से ज्यादा, 12% तक12% से ज्यादा

बैंकों से दो फर्क छात्रों को अक्सर उलझा देते हैं। पहला, पूंजी का न्यूनतम स्तर ऊँचा है: बैंक की 11.5% रेखा के मुकाबले 15% CRAR। दूसरा, अनिवार्य सूची प्रमोटरों से इक्विटी बढ़ाने के साथ लीवरेज घटाने को भी कहती है, और CIC के लिए समूह की कंपनियों को गारंटी देने पर रोक भी जोड़ी गई है। मर्जी वाले कदमों की सूची भी और आगे तक जाती है:

शहरी सहकारी बैंक

शहरी सहकारी बैंक (UCB) 1 अप्रैल 2025 को PCA में आए। यह 26 जुलाई 2024 के परिपत्र के तहत हुआ, जिसने पर्यवेक्षी कार्रवाई फ्रेमवर्क को विदा कर दिया। यह टियर 2, 3 और 4 के UCB पर लागू है। सर्व-समावेशी निर्देशों (All Inclusive Directions) वाले बैंक इससे बाहर हैं। ये ऐसे व्यापक निर्देश हैं जो बैंक के ज्यादातर कामकाज पर रोक लगा देते हैं। टियर 1 के UCB फिलहाल बाहर हैं, लेकिन कड़ी निगरानी में। इसकी खास बातें:

क्या PCA काम करता है? रिकॉर्ड और आलोचनाएँ

जिन बैंकों की मरम्मत हो सकती थी, उनके लिए PCA ने वही किया जिसका वादा था। और सरकारी आँकड़ों के मुताबिक पूरी व्यवस्था के आँकड़े भी उसी दिशा में चले:

अब 5.94% को जोखिम सीमा वाली तालिका के सामने रखिए। मार्च 2018 में पूरी व्यवस्था का शुद्ध NPA अनुपात उस 6% की रेखा से बस बाल भर नीचे था, जो किसी एक बैंक को जोखिम सीमा 1 में डाल देती है। और जब औसत इतना ऊँचा हो, तो इसका मतलब है कि कई बैंक अलग-अलग उस रेखा के ऊपर थे।

यह कहाँ चूकता है

इसकी सीमाएँ साफ-साफ कह देनी चाहिए:

सही फैसला यह है कि PCA पक्की सीमाओं वाला एक अलार्म है, इलाज नहीं। बैंक तब सँभले, जब पूंजी आई और IBC जैसे वसूली कानूनों ने काम करना शुरू किया। जहाँ गवर्नेंस नाकाम हो चुकी थी, जैसे लक्ष्मी विलास बैंक में, वहाँ इन सीमाओं ने सिर्फ समय खरीदा।

PCA आज कहाँ खड़ा है

वाणिज्यिक बैंकों में सार्वजनिक क्षेत्र के 11 बैंकों में से आखिरी, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, 20 सितंबर 2022 को बाहर आया। वित्त मंत्रालय की 26 दिसंबर 2024 की सालाना समीक्षा ने दर्ज किया कि पहले PCA में रखा गया हर बैंक अब उसकी पाबंदियों से बाहर है। तब से तारीखवार बदलाव नए फ्रेमवर्कों और आँकड़ों में दिखते हैं:

सहकारी क्षेत्र में यह फ्रेमवर्क सबसे नया है, और यह शहरी सहकारी बैंक लाइसेंसिंग वाली बहस के भीतर बैठता है। 2025 की RBI की ट्रेंड एंड प्रोग्रेस रिपोर्ट परिसंपत्ति गुणवत्ता के आँकड़ों पर नजर रखती है।

परीक्षा के लिए त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई कैसे पढ़ें

PCA, GS पेपर III में भारतीय अर्थव्यवस्था और संसाधन जुटाने वाले हिस्से में आता है, और प्रीलिम्स के अर्थव्यवस्था वाले हिस्से में भी। Anantam IAS के प्रीलिम्स प्रश्न बैंक में भारतीय अर्थव्यवस्था के 1,403 में से 256 प्रश्न हैं, जो किसी भी विषय का सबसे बड़ा हिस्सा है।

साइट के संग्रह में मुख्य परीक्षा का कोई भी असली प्रश्न सीधे PCA का नाम नहीं लेता। इसे डूबे कर्ज और बैंकिंग सुधार वाले उत्तरों में सबूत की तरह इस्तेमाल कीजिए। मुख्य परीक्षा के लिए अर्थव्यवस्था के विषयवार प्रश्न दिखाते हैं कि ये विषय कहाँ बैठते हैं। दोहराने लायक तथ्य:

इन जोड़ियों को अलग-अलग रखिए:

मिलते-जुलते औजार, एक साथ:

औजारकानूनी आधारकौन कार्रवाई करता हैजमाकर्ताओं पर असर
त्वरित सुधारात्मक कार्रवाईRBI के निगरानी परिपत्रRBI, जब तय अनुपात टूटेंसामान्य बैंकिंग चलती रहती है
धारा 35A के तहत निर्देशबैंकिंग रेगुलेशन अधिनियम, 1949RBI, हर मामले को अलग से देखकरपैसे निकालने की सीमा लग सकती है, जैसे 2019 में PMC बैंक में
धारा 45 के तहत मोरेटोरियमबैंकिंग रेगुलेशन अधिनियम, 1949केंद्र सरकार, RBI के आवेदन परतय अवधि के लिए कामकाज ठप, 2020 में लक्ष्मी विलास बैंक में 30 दिन
दिवाला और शोधन अक्षमता संहितासंसद का अधिनियम, 2016कर्जदाता, डिफॉल्ट करने वाले कर्जदार के खिलाफकोई नहीं; यह कर्जदार से निपटती है, बैंक से नहीं

PCA सटीकता को इनाम देता है। बैंक वाली तालिका पक्की याद कर लीजिए। NBFC और UCB वाले संस्करणों को उसी में किए गए बदलावों की तरह पढ़िए। वजह यह है कि कथन वाले प्रश्न अपने जाल इन्हीं छोटे फर्कों में छिपाते हैं। बैंकों की सेहत पर किसी उत्तर में PCA आपका सबूत है कि भारत के पास अब किसी बैंक के डूबने का इंतजार करने के बजाय जल्दी कदम उठाने का नियम है।

सामान्य प्रश्न

बैंकिंग में त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई क्या है?

त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई, यानी RBI का PCA फ्रेमवर्क, वह व्यवस्था है जिसके तहत RBI तब जल्दी दखल देता है, जब किसी कर्जदाता की पूंजी, डूबे कर्ज या लीवरेज तय सीमाएँ पार कर जाएँ। वाणिज्यिक बैंकों के लिए यह CRAR या CET1 अनुपात, शुद्ध NPA अनुपात और टियर 1 लीवरेज अनुपात पर नजर रखता है। उल्लंघन होने पर डिविडेंड पर रोक जैसी अनिवार्य पाबंदियाँ लग सकती हैं, और साथ में RBI के चुने हुए मर्जी वाले कदम भी।

क्या PCA कर्ज देने पर रोक है?

नहीं। RBI ने जून 2017 में कहा था कि PCA का मकसद आम जनता के लिए बैंकों के सामान्य कामकाज को रोकना नहीं है, और अनिवार्य पाबंदियों में से कोई भी कर्ज देने का जिक्र नहीं करती। RBI मर्जी वाले कदम के तौर पर कम रेटिंग वाले या बिना जमानत वाले कर्ज पर रोक लगा सकता है, और गंभीर मामलों में लोन बुक को बढ़ने से रोक सकता है। लेकिन यह बढ़त पर सीमा है, कर्ज पर रोक नहीं।

क्या PCA वाले बैंक में मेरा पैसा सुरक्षित है?

PCA अपने आप में आम ग्राहकों के लिए जमा या पैसे निकालने पर कोई सीमा नहीं लगाता। पैसे निकालने की सीमा अलग औजारों से आती है, जैसे बैंकिंग रेगुलेशन अधिनियम की धारा 35A के तहत निर्देश या धारा 45 के तहत मोरेटोरियम। इसके अलावा बैंक जमा DICGC से बीमित होती हैं: हर बैंक में हर जमाकर्ता के ₹5 लाख तक, मूलधन और ब्याज मिलाकर।

कौन-से बैंक PCA में थे?

मार्च 2018 तक RBI ने सार्वजनिक क्षेत्र के 11 बैंकों को PCA में रखा था, जिनमें IDBI बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया भी थे। निजी बैंकों में धनलक्ष्मी बैंक और, सितंबर 2019 से, लक्ष्मी विलास बैंक भी इसके दायरे में थे। ज्यादातर बैंक जनवरी 2019 से सितंबर 2022 के बीच बाहर निकाले गए। देना बैंक और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया विलय के जरिए बाहर निकले, और नवंबर 2020 में लक्ष्मी विलास बैंक का DBS बैंक इंडिया के साथ विलय हुआ।

बैंकों के लिए PCA की सीमाएँ क्या हैं?

जोखिम सीमा 1 तब शुरू होती है जब किसी बैंक का CRAR 11.5% से नीचे चला जाए, यानी 9% न्यूनतम और 2.5% संरक्षण बफर के जोड़ से नीचे, या जब उसका शुद्ध NPA अनुपात 6% तक पहुँच जाए। शुद्ध NPA के बैंड 9% और 12% पर अगले स्तर पर जाते हैं, और लीवरेज के बैंड RBI के तय न्यूनतम स्तर से 50 और 100 बेसिस पॉइंट नीचे हैं। किसी भी एक संकेतक का उल्लंघन PCA लागू करा सकता है।

क्या PCA NBFC पर लागू होता है?

हाँ, 1 अक्टूबर 2022 से। NBFC के लिए PCA सभी जमा लेने वाले NBFC पर लागू होता है। मिडिल, अपर और टॉप लेयर के जमा न लेने वाले NBFC भी इसके दायरे में हैं। हाउसिंग फाइनेंस कंपनियाँ, प्राइमरी डीलर और जनता का पैसा न लेने वाले NBFC इससे बाहर हैं। बेस लेयर से बाहर के सरकारी NBFC 1 अक्टूबर 2024 से जोड़े गए।

कोई बैंक PCA से बाहर कैसे निकलता है?

बैंक तब बाहर आ सकता है, जब लगातार चार तिमाही नतीजे, जिनमें एक ऑडिट किया गया सालाना विवरण हो, किसी भी सीमा का उल्लंघन न दिखाएँ। RBI को यह भरोसा भी होना चाहिए कि सुधार टिकेगा, और इसमें मुनाफे का टिकाऊ होना भी शामिल है। 2021 और 2022 के बीच बाहर निकले बैंकों ने RBI को यह लिखित वादा भी दिया कि वे पूंजी, शुद्ध NPA और लीवरेज के मानक आगे भी पूरे करते रहेंगे।

PCA और मोरेटोरियम में क्या फर्क है?

PCA शुरुआती चेतावनी वाला फ्रेमवर्क है, जो बैंक के पैसा बाहर बाँटने और जोखिम वाली बढ़त पर रोक लगाता है, जबकि सामान्य बैंकिंग चलती रहती है। बैंकिंग रेगुलेशन अधिनियम की धारा 45 के तहत मोरेटोरियम केंद्र सरकार RBI के आवेदन पर लगाती है। यह तय अवधि के लिए बैंक का कामकाज रोक देता है, जैसा नवंबर 2020 में लक्ष्मी विलास बैंक के साथ हुआ। सुधार नाकाम हो जाए, तो PCA वाला बैंक मोरेटोरियम तक पहुँच सकता है।

अभ्यास प्रश्न

प्रीलिम्स MCQ

1. 1 जनवरी 2022 से लागू, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के लिए RBI के त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई फ्रेमवर्क के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. परिसंपत्तियों पर रिटर्न उन संकेतकों में से एक है जिन पर नजर रखी जाती है। 2. स्मॉल फाइनेंस बैंक और पेमेंट्स बैंक इसके दायरे से बाहर हैं। 3. किसी भी एक जोखिम सीमा का उल्लंघन PCA लागू करा सकता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर: (b) परिसंपत्तियों पर रिटर्न 2021 में हटा दिया गया था; स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट्स बैंक और RRB बाहर हैं, और किसी भी सीमा का उल्लंघन PCA लागू करा सकता है।

2. अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के लिए RBI के PCA फ्रेमवर्क के तहत, 9.5% शुद्ध NPA अनुपात दिखाने वाला बैंक किसमें आता है?

उत्तर: (b) जोखिम सीमा 2 में 9% या उससे ज्यादा, लेकिन 12% से कम शुद्ध NPA अनुपात आता है।

3. NBFC के लिए PCA फ्रेमवर्क के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह 1 अक्टूबर 2022 से लागू हुआ। 2. यह हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों पर लागू होता है। 3. बेस लेयर से बाहर के सरकारी NBFC तक इसका विस्तार 1 अक्टूबर 2024 से हुआ। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर: (b) हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को साफ तौर पर बाहर रखा गया है; कथन 1 और 3 दिसंबर 2021 और अक्टूबर 2023 के RBI परिपत्रों से मेल खाते हैं।

4. बैंकों और उन्हें PCA से बाहर निकाले जाने की तारीखों के निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. IDBI बैंक: मार्च 2021 2. यूको बैंक: सितंबर 2021 3. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: सितंबर 2022। ऊपर दिए गए युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?

उत्तर: (c) RBI ने IDBI बैंक को 10 मार्च 2021 को, यूको बैंक को 8 सितंबर 2021 को और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 20 सितंबर 2022 को बाहर निकाला।

5. 1 अप्रैल 2025 से लागू, शहरी सहकारी बैंकों के लिए RBI का PCA फ्रेमवर्क संकेतकों के किस समूह पर नजर रखता है?

उत्तर: (a) UCB फ्रेमवर्क CRAR, शुद्ध NPA और शुद्ध मुनाफे के जरिए पूंजी, परिसंपत्ति गुणवत्ता और मुनाफे पर नजर रखता है।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

  1. RBI का त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई फ्रेमवर्क क्या है? समझाइए कि इसे कर्ज देने पर रोक के बजाय निगरानी का औजार कहना ज्यादा सही क्यों है। (10 अंक, 150 शब्द)
  2. त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई, धारा 35A के तहत निर्देश और बैंकिंग रेगुलेशन अधिनियम, 1949 की धारा 45 के तहत मोरेटोरियम में अंतर स्पष्ट कीजिए, और हर एक का एक उदाहरण दीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
  3. सितंबर 2022 तक सार्वजनिक क्षेत्र का कोई भी बैंक PCA में नहीं बचा था। आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए कि इस सुधार का कितना श्रेय खुद फ्रेमवर्क को जाता है, और कितना बैंकों में दोबारा पूंजी डालने को, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता को, और बैंकों के विलय को। (15 अंक, 250 शब्द)
  4. NBFC और शहरी सहकारी बैंकों तक PCA का विस्तार भारत की वित्तीय व्यवस्था के बढ़ते आपसी जुड़ाव को दिखाता है। चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
  5. लक्ष्मी विलास बैंक मामले के संदर्भ में, बैंकों को डूबने से रोकने में नियम-आधारित शुरुआती चेतावनी फ्रेमवर्क की ताकत और सीमाओं का परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)