राम सेतु (एडम्स ब्रिज): भूविज्ञान, सेतुसमुद्रम परियोजना और अदालत का मामला
राम सेतु को समझिए: ये उथले टीले कैसे बने, 2024 का इसरो का नक्शा क्या दिखाता है, सेतुसमुद्रम परियोजना और स्मारक के दर्जे पर सुप्रीम कोर्ट का मामला।
राम सेतु, जिसे एडम्स ब्रिज या रामसेतु भी कहा जाता है, चूना-पत्थर के उथले टीलों (shoals) और रेत के टापुओं की एक कड़ी है। यह कड़ी समुद्र के आर-पार तमिलनाडु के रामेश्वरम (पंबन) द्वीप से उत्तर-पश्चिमी श्रीलंका के पास मन्नार द्वीप तक जाती है। यह दक्षिण-पश्चिम में मन्नार की खाड़ी को उत्तर-पूर्व में पाक जलडमरूमध्य से अलग करती है। इसका ज्यादातर हिस्सा एक-दो मीटर पानी के नीचे है, और इसी वजह से बड़े जहाज आज भी इस रास्ते से निकलने की जगह पूरे श्रीलंका का चक्कर लगाकर जाते हैं।
ज्यादातर पाठक दो में से एक पक्की धारणा लेकर आते हैं। पहली, कि किसी उपग्रह ने साबित कर दिया है कि इसे बनाया गया था। दूसरी, कि विज्ञान ने साबित कर दिया है कि यह सिर्फ रेत है। रिकॉर्ड इन दोनों में से कुछ भी नहीं कहता। इसका भूविज्ञान काफी हद तक तय है, लेकिन इसकी उम्र तय नहीं है। और सरकार इसे स्मारक के तौर पर संरक्षित करे या नहीं, यह सवाल अब भी सुप्रीम कोर्ट के सामने है। यह नोट इन तीनों बातों को अलग-अलग रखता है।
राम सेतु क्या है और कहाँ है?
राम सेतु पानी में डूबी हुई एक कटक (ridge) है, चट्टान की कोई एक पट्टी नहीं। यह उथले टीलों की एक माला है। इनमें से कुछ भाटे के समय सूखे दिखते हैं, और ज्यादातर इतने उथले हैं कि मछली पकड़ने वाली नाव भी इनमें फंस जाए। यह माला भारत की तरफ धनुषकोडि के पूर्वी सिरे को श्रीलंका की तरफ तलैमन्नार से जोड़ती है। तो अगर कोई पूछे कि राम सेतु कहाँ है, तो जवाब है: धनुषकोडि से तलैमन्नार के बीच।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| दूसरे नाम | एडम्स ब्रिज, रामसेतु, शुरुआती अरबी लेखन में सेत बंधाई |
| भारतीय सिरा | धनुषकोडि, रामेश्वरम (पंबन) द्वीप पर, रामनाथपुरम जिला, तमिलनाडु |
| श्रीलंकाई सिरा | तलैमन्नार, मन्नार द्वीप पर |
| लंबाई | लगभग 29 किलोमीटर (ISRO-NRSC अध्ययन, 2024); ब्रिटानिका 48 किलोमीटर बताता है |
| किन समुद्रों को अलग करता है | मन्नार की खाड़ी (दक्षिण-पश्चिम) और पाक जलडमरूमध्य (उत्तर-पूर्व) |
| गहराई | कई टीले 1 मीटर से कम गहरे; कटक का लगभग 99.98 प्रतिशत हिस्सा औसत समुद्र तल से नीचे |
| बनावट | मूंगे, चूनेदार बलुआ पत्थर और कॉन्ग्लोमरेट के ऊपर रेत |
| कानूनी दर्जा | राष्ट्रीय स्मारक की कोई अधिसूचना नहीं; इसकी मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित |
लंबाई के आंकड़े एक सीधी-सी वजह से अलग हैं: ये अलग-अलग सिरों के बीच नापे गए हैं। 2024 का अध्ययन सिर्फ धनुषकोडि और तलैमन्नार के बीच की टीलों की माला को गिनता है। पुराने स्रोत दोनों तरफ के द्वीपों के सिरे भी जोड़ लेते हैं। दिसंबर 2022 में अंतरिक्ष राज्य मंत्री ने राज्यसभा को बताया था कि “अगर इतिहास के हिसाब से चलें” तो यह पुल लगभग 56 किलोमीटर लंबा था। इसलिए 29 किलोमीटर को टीलों की नापी गई लंबाई मानिए, और बड़े आंकड़ों को एक सिरे से दूसरे सिरे तक का विवरण।
एडम्स ब्रिज कैसे बना?
छोटा जवाब यह है: एडम्स ब्रिज एक प्राकृतिक भू-आकृति है। इसे रेत और मूंगे ने एक उथले शेल्फ पर बनाया, जो कभी भारत और श्रीलंका को पानी के ऊपर जोड़ता था। वैज्ञानिक अब भी जिस बात पर बहस करते हैं, वह है घटनाओं का क्रम और उनकी तारीख।
ब्रिटानिका दो मुख्य व्याख्याओं का सार देता है। दोनों एक ही तथ्य से शुरू होती हैं: यह जलडमरूमध्य इसलिए उथला है क्योंकि यह महाद्वीपीय शेल्फ पर टिका है।
- विवर्तनिक और मूंगा उत्पत्ति। एक मत के अनुसार पाक जलडमरूमध्य और मन्नार की खाड़ी कभी कावेरी नदी बेसिन का हिस्सा थे। भूपर्पटी की धीमी हलचल ने इस इलाके की रूपरेखा बनाई, ऊंची जमीन पर मूंगा उगा, और मूंगे ने रेत को रोककर टूटी-फूटी पंक्ति में टीले बना दिए।
- तटीय धारा (longshore current) से उत्पत्ति। दूसरा मत धाराओं से शुरू होता है। तटीय धाराएं, यानी वे धाराएं जो तट के समानांतर चलती हैं और रेत को साथ बहा ले जाती हैं, उन्होंने लगभग सीधी पंक्ति में रेत जमा कर दी। फिर उन जमावों के ऊपर मूंगा उग आया।
दोनों कहानियों की धुरी समुद्र का स्तर है। ठंडे दौर में जब समुद्र नीचे था, तब पूरा शेल्फ सूखी जमीन था। तब यह कटक जमीन की एक ऐसी पतली पट्टी थी जिस पर पैदल चला जा सकता था, जिसे भूगोलवेत्ता पाक स्थलडमरूमध्य (Palk isthmus) कहते हैं। जब समुद्र ऊपर उठा, तो सिर्फ सबसे ऊंची पट्टी सतह के पास बची रह गई।
उम्र का सवाल
यहीं स्रोतों में असली मतभेद है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अध्ययनों ने रामेश्वरम द्वीप पर मूंगे की उम्र लगभग 125,000 साल आंकी है। दूसरे अध्ययन बताते हैं कि पुल का मौजूदा रूप सिर्फ लगभग 3,500 साल पुराना है। दोनों बातें आंशिक रूप से सही हो सकती हैं, क्योंकि नीचे की मूंगे की नींव और ऊपर की ढीली रेत एक ही उम्र की नहीं हैं।
पुराने ब्रिटिश ड्रिलिंग सर्वेक्षणों का हवाला 2024 के शोधपत्र में दिया गया है। इनमें सख्त आधार तक पहुंचने से पहले 7 से 9 मीटर रेत मिली थी। यह आधार होलोसीन कॉन्ग्लोमरेट या चूनेदार बलुआ पत्थर (समुद्री जीवों के चूने से जुड़ा बलुआ पत्थर) का है। सीधे शब्दों में कहें तो यह कटक खिसकती रेत का एक ढेर है, जो पुरानी प्रवाल-भित्ति की चट्टान पर बैठा है। इसीलिए रेत के टीले मौसम-दर-मौसम जगह बदलते हैं, और इसीलिए खोदे गए चैनल बार-बार भरते रहे।
2024 के ISRO नक्शे में क्या दिखा?
2024 के नक्शे ने कटक का आकार तय किया, उसकी उत्पत्ति नहीं। ISRO के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) के वैज्ञानिकों ने यह अध्ययन 28 जून 2024 को साइंटिफिक रिपोर्ट्स (Scientific Reports) में छापा। इसमें NASA के उपग्रह आइससैट-2 (ICESat-2) का लेजर डेटा इस्तेमाल हुआ, जो अक्टूबर 2018 से अक्टूबर 2023 के बीच जुटाया गया था।
आइससैट-2 एक हरी लेजर किरण छोड़ता है, जो साफ पानी में लगभग 40 मीटर गहराई तक समुद्र तल को छू सकती है। टीम ने समुद्र तल से लौटे लगभग 0.2 मिलियन फोटॉन जुटाए और पूरी कटक का 10 मीटर रेजोल्यूशन वाला गहराई का मॉडल बनाया। इसके मुख्य नतीजे ये रहे:
- यह कटक धनुषकोडि और तलैमन्नार का ही समुद्र के नीचे फैला हिस्सा है, यानी दोनों सिरों पर यह जमीन से जुड़ी है;
- इसका आयतन लगभग 1 घन किलोमीटर है, और इसका सिर्फ 0.02 प्रतिशत हिस्सा औसत समुद्र तल से ऊपर है, यानी लगभग 99.98 प्रतिशत हिस्सा डूबा हुआ है;
- 2 से 3 मीटर गहरे पतले चैनल बीच-बीच में इसे काटते हैं और मन्नार की खाड़ी और पाक जलडमरूमध्य के बीच पानी बहने देते हैं;
- मन्नार की खाड़ी वाली तरफ ढलानें ज्यादा खड़ी हैं, जिससे पता चलता है कि लहरों की ज्यादा ताकत दक्षिण-पश्चिम से आती है।
यहीं जाल है। खबरों ने इसे “राम सेतु” का नक्शा कहा, और कुछ पाठकों ने इसे महाकाव्य की पुष्टि मान लिया। शोधपत्र निर्माण के बारे में कुछ नहीं कहता। वह एक प्राकृतिक कटक को उसके मौजूदा रूप में बताता है। 2022 में संसद में मंत्री के जवाब ने यही बात आसान शब्दों में कही थी: उपग्रह चूना-पत्थर के टीले दिखाते हैं, जिनके बारे में “ठीक-ठीक नहीं कहा जा सकता कि वे किसी पुल के अवशेष या हिस्से हैं।”
इसे राम सेतु और एडम्स ब्रिज क्यों कहते हैं?
ये दोनों नाम दो अलग परंपराओं से आते हैं, और इनमें से कोई भी भूवैज्ञानिक शब्द नहीं है।
रामायण में राम की वानर सेना लंका पहुंचने और सीता को छुड़ाने के लिए समुद्र पर एक मार्ग बनाती है, और इस काम की देखरेख इंजीनियर नल करते हैं। इस परंपरा में कटक का भारतीय सिरा, रामेश्वरम पर, सेतु कहलाता है, और रामेश्वरम का मंदिर नगर इसी के आसपास बसा।
एडम्स ब्रिज नाम एक मुस्लिम किंवदंती से आता है, जिसमें आदम इस पुल को पार करके श्रीलंका की एडम्स पीक तक गए थे। ब्रिटानिका बताता है कि यह शब्द शायद अल-बिरूनी (973 से लगभग 1052) के समय के आसपास चलन में आया। उससे पहले के अरबी लेखन इसे सेत बंधाई, यानी समुद्र का पुल, कहते थे।
एक और दावा इस पुल के साथ चलता है: कि यह पूरा था और इस पर पैदल चला जा सकता था, जब तक 1480 में एक तूफान ने इसे तोड़ नहीं दिया। ब्रिटानिका इसे वैसे ही लिखता है जैसा “रिकॉर्ड बताते हैं।” यह मंदिर और ऐतिहासिक रिकॉर्ड का दावा है, तारीख वाली कोई भूवैज्ञानिक खोज नहीं। इसलिए उत्तर में इसे इसी तरह लिखिए।
अभ्यर्थी के लिए ईमानदार रुख सीधा है। आस्था की परंपरा असली है और राजनीतिक रूप से भारी है। कटक प्राकृतिक है। ऐसा कहना किसी भी पक्ष का अपमान नहीं है, और अदालतों ने भी इन दोनों सवालों को अलग-अलग रखा है।
सेतुसमुद्रम शिप चैनल परियोजना क्या थी?
सेतुसमुद्रम शिप चैनल परियोजना भारत और श्रीलंका के बीच के उथले समुद्र में खुदाई (dredging) करके जहाजों के चलने लायक एक चैनल बनाने की योजना थी। मकसद यह था कि जहाज श्रीलंका का चक्कर लगाए बिना भारत के पश्चिमी और पूर्वी तटों के बीच आ-जा सकें। 2005 में मंजूरी मिली, 2007 में यह कटक पर आकर रुक गई, और तब से फिर शुरू नहीं हुई।
यह विचार पुराना है। सबसे पहली ज्ञात खुदाई 1838 में हुई थी, और एक ब्रिटिश नौसेना अधिकारी ने 1860 में नहर का प्रस्ताव रखा था। दोनों एक ही दिक्कत में फंसे: हर कटाव को रेत फिर भर देती थी। आजादी के बाद कई समितियों ने इस रास्ते का अध्ययन किया।
आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने 19 मई 2005 को लगभग 2,427 करोड़ रुपये से थोड़ी ज्यादा लागत पर इस परियोजना को मंजूरी दी। इसका चुना हुआ रास्ता, जिसे अलाइनमेंट 6 कहा गया, एडम्स ब्रिज के चूना-पत्थर के टीलों को खोदकर 83 किलोमीटर लंबा गहरे पानी का चैनल बनाने वाला था।
यह क्यों अटकी
विरोध तीन तरफ से आया, और तीनों ने एक-दूसरे को मजबूत किया:
- आस्था। जिन समूहों के लिए यह कटक राम का पुल है, उन्होंने इसे काटने पर आपत्ति की, और सुब्रमण्यम स्वामी की एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची।
- पारिस्थितिकी। मन्नार की खाड़ी में प्रवाल भित्तियां, समुद्री घास के मैदान और डुगोंग हैं, और इसका भारतीय हिस्सा देश के बायोस्फीयर रिजर्व में से एक है। आलोचकों को डर था कि खुदाई और जहाजों की आवाजाही इसे नुकसान पहुंचाएगी। ब्रिटानिका उस तट पर सुनामी के खतरे की चिंता भी दर्ज करता है, जिस पर मंजूरी से कुछ ही महीने पहले 2004 की हिंद महासागर सुनामी आई थी। साथ ही तट की थोरियम वाली रेत को लेकर भी चिंता थी।
- अर्थशास्त्र। जिस चैनल को बार-बार खोदना पड़े, उसे खुला रखना महंगा पड़ता है, और वह सिर्फ छोटे जहाजों के काम आता।
2007 में सुप्रीम कोर्ट ने राम सेतु वाले हिस्से पर काम रोक दिया। फिर सरकार ने आर.के. पचौरी की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति से दूसरे रास्ते, अलाइनमेंट 4A, की जांच करवाई। इसकी 2013 की रिपोर्ट ने पाया कि कोई भी अलाइनमेंट 12 प्रतिशत आंतरिक प्रतिफल दर (internal rate of return) की कसौटी पर खरा नहीं उतरता, और परियोजना को आर्थिक और पारिस्थितिक, दोनों आधारों पर अव्यवहारिक बताया। उस समय की सरकार ने यह रिपोर्ट नामंजूर कर दी, लेकिन काम फिर शुरू नहीं हुआ।
आज राम सेतु की कानूनी स्थिति
आज राम सेतु कोई अधिसूचित स्मारक नहीं है, और सेतुसमुद्रम परियोजना कटक पर आकर जमी हुई है। अब असली विवाद संरक्षण का है, खुदाई का नहीं।
- 16 मार्च 2018। जहाजरानी मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह पहले वाले अलाइनमेंट का एक विकल्प तलाशेगा, “राष्ट्र के हित में एडम्स ब्रिज/राम सेतु को प्रभावित किए या नुकसान पहुंचाए बिना।”
- 12 जनवरी 2023। तमिलनाडु विधानसभा ने सर्वसम्मति से केंद्र से कहा कि सेतुसमुद्रम परियोजना को बिना देरी लागू किया जाए। राज्य BJP ने इसका समर्थन इस शर्त पर किया कि राम सेतु को छुआ न जाए।
- 19 जनवरी 2023। सॉलिसिटर जनरल ने मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ को बताया कि राष्ट्रीय धरोहर के दर्जे का सवाल संस्कृति मंत्रालय में विचाराधीन है। अदालत ने स्वामी को मंत्रालय के सामने अपना अभ्यावेदन देने की इजाजत दी।
- 3 अक्टूबर 2023। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और सुधांशु धूलिया की पीठ ने स्मारक के दर्जे और एक सुरक्षा दीवार की मांग वाली एक अलग याचिका पर सुनवाई से इनकार किया। पीठ ने कहा कि ये सरकार के प्रशासनिक मामले हैं।
- 29 अगस्त 2025। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने स्वामी की नई याचिका पर संस्कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को नोटिस जारी किया। याचिका कहती है कि 13 मई 2025 के उनके अभ्यावेदन पर कोई फैसला नहीं बताया गया।
तो सरकार कटक को काटने का इरादा छोड़ चुकी है, लेकिन उसने इसे औपचारिक रूप से संरक्षित भी नहीं किया है। राष्ट्रीय महत्व का स्मारक प्राचीन संस्मारक और पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत घोषित होता है। यह कानून इंसान के बनाए ढांचों और स्थलों के लिए बना है। मामले की चुपचाप वाली कानूनी मुश्किल यही है: गहरे धार्मिक महत्व वाली एक प्राकृतिक भू-आकृति, इंसानी धरोहर के लिए लिखे गए कानून में आसानी से फिट नहीं बैठती। अदालत का नोटिस इस सवाल को खुला रखता है।
कटक के आसपास के रिश्तों को समझने के लिए पाक खाड़ी में कच्चातिवु द्वीप का पड़ोसी विवाद और बड़ा भारत-श्रीलंका संबंध वाला नोट सही साथी हैं। जहाजरानी वाले पहलू के लिए देखिए कि भारत सागरमाला कार्यक्रम के तहत तटीय रास्तों की योजना कैसे बनाता है।
परीक्षा के लिए राम सेतु कैसे पढ़ें
राम सेतु पाठ्यक्रम में तीन जगह आता है। पहला, भौतिक और भारतीय भूगोल (शेल्फ की भू-आकृतियां, पाक जलडमरूमध्य, मूंगा)। दूसरा, पर्यावरण (मन्नार की खाड़ी की पारिस्थितिकी)। तीसरा, शासन या अंतरराष्ट्रीय संबंध (सेतुसमुद्रम, अदालत का मामला और भारत-श्रीलंका रिश्ते)। प्रीलिम्स आमतौर पर इसकी जगह और इसके अलग किए दो समुद्रों को पूछता है। मुख्य परीक्षा में यह बुनियादी ढांचा बनाम पारिस्थितिकी वाले उत्तरों में, या घरेलू राजनीति श्रीलंका से रिश्तों को कैसे आकार देती है, इस पर उदाहरण बनता है।
परीक्षा हॉल तक ले जाने वाले दोहराने के तथ्य:
- यह धनुषकोडि (रामेश्वरम द्वीप) से तलैमन्नार (मन्नार द्वीप) तक जाता है।
- यह मन्नार की खाड़ी (दक्षिण-पश्चिम) को पाक जलडमरूमध्य (उत्तर-पूर्व) से अलग करता है।
- 2024 के ISRO-NRSC अध्ययन ने इसे लगभग 29 किलोमीटर नापा और पाया कि इसका लगभग 99.98 प्रतिशत हिस्सा डूबा हुआ है।
- डेटा NASA के आइससैट-2 लेजर उपग्रह से आया, 10 मीटर रेजोल्यूशन पर।
- सेतुसमुद्रम परियोजना को 2005 में मंजूरी मिली, और सुप्रीम कोर्ट ने 2007 में कटक पर काम रोक दिया।
- पचौरी समिति (रिपोर्ट 2013) ने पाया कि न अलाइनमेंट 6 और न ही 4A 12 प्रतिशत प्रतिफल की कसौटी पूरी करता है।
- 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने स्मारक के दर्जे पर समयबद्ध फैसले की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।
आम उलझनें और उन्हें अलग रखने का तरीका:
- पाक जलडमरूमध्य बनाम पाक खाड़ी। पाक खाड़ी कटक के ठीक उत्तर में उथली खाड़ी है, और कच्चातिवु इसी में है। पाक जलडमरूमध्य और उत्तर में वह चौड़ा चैनल है जो बंगाल की खाड़ी में खुलता है। आम संक्षिप्त कथन, कि कटक मन्नार की खाड़ी को पाक जलडमरूमध्य से अलग करती है, खाड़ी को जलडमरूमध्य का ही हिस्सा मानकर चलता है।
- नक्शा बनाम सबूत। 2024 का नक्शा आकार और गहराई बताता है। निर्माण पर वह कोई नतीजा नहीं देता।
- मंजूर बनाम बना हुआ। सेतुसमुद्रम को 2005 में मंजूरी मिली थी, लेकिन कोई चैनल कटक को पार नहीं करता।
| पहलू | राम सेतु | कच्चातिवु | पंबन पुल |
|---|---|---|---|
| यह क्या है | टीलों की प्राकृतिक माला | निर्जन छोटा द्वीप | रेल और सड़क पुल |
| कहाँ | धनुषकोडि से तलैमन्नार | पाक खाड़ी | मंडपम से पंबन द्वीप |
| खबरों में क्यों | सेतुसमुद्रम और स्मारक की याचिका | 1974 का भारत-श्रीलंका समुद्री समझौता और मछली पकड़ना | रामेश्वरम तक रेल संपर्क |
मुख्य परीक्षा के बैंक में एक सवाल है जो इसके राजनीतिक पहलू पर सच में फिट बैठता है। मुख्य परीक्षा 2013, GS पेपर II में पूछा गया था: “भारत-श्रीलंका संबंधों के संदर्भ में चर्चा कीजिए कि घरेलू कारक विदेश नीति को कैसे प्रभावित करते हैं।” सेतुसमुद्रम के लिए तमिलनाडु का दबाव वहां एक काम का उदाहरण है। Anantam IAS के प्रीलिम्स प्रश्न बैंक में 1,403 में से 82 सवाल भूगोल के हैं, इसलिए परीक्षा से पहले उस सेट में पाक जलडमरूमध्य और मन्नार की खाड़ी को खोज लेना फायदेमंद है।
राम सेतु उस अभ्यर्थी को इनाम देता है जो एक साथ दो रजिस्टर संभाल सके: नापा-तौला, तारीख वाला विज्ञान, और आस्था का दावा, जिसे दावे की तरह ही बताया जाए। अगर आप एक पैराग्राफ में 29 किलोमीटर, 99.98 प्रतिशत और 2007 की रोक लिख सकें, और राम के सवाल पर कोई पक्ष न लें, तो आपने यह विषय वैसे सीख लिया है जैसे परीक्षक चाहता है। मूंगे के संदर्भ के लिए इसके साथ प्रवाल भित्तियां भी दोहराइए।
सामान्य प्रश्न
राम सेतु क्या है?
राम सेतु, जिसे एडम्स ब्रिज भी कहते हैं, तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप और श्रीलंका के मन्नार द्वीप के बीच चूना-पत्थर के उथले टीलों और रेत के टापुओं की एक माला है। यह मन्नार की खाड़ी को पाक जलडमरूमध्य से अलग करता है, और इसका ज्यादातर हिस्सा बहुत उथले पानी में डूबा रहता है।
राम सेतु कितना लंबा है?
ISRO के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र के 2024 के एक अध्ययन ने धनुषकोडि से तलैमन्नार तक टीलों की माला को लगभग 29 किलोमीटर नापा। ब्रिटानिका 48 किलोमीटर बताता है, जिसमें द्वीपों के सिरे भी शामिल हैं। यानी फर्क इस बात से आता है कि नाप कहाँ से शुरू होकर कहाँ खत्म होती है।
राम सेतु इंसान का बनाया है या प्राकृतिक?
वैज्ञानिक सबूत राम सेतु को एक उथले शेल्फ पर मूंगे और बलुआ पत्थर के ऊपर रेत की प्राकृतिक कटक बताते हैं। रामायण की परंपरा मानती है कि इसे राम की सेना ने बनाया, और यह मान्यता आस्था का विषय है, कोई भूवैज्ञानिक खोज नहीं। 2022 में सरकार ने संसद को बताया कि उपग्रह ऐसे टीले दिखाते हैं जिन्हें ठीक-ठीक किसी पुल के अवशेष नहीं कहा जा सकता।
2024 में ISRO को राम सेतु के बारे में क्या मिला?
ISRO के वैज्ञानिकों ने NASA के आइससैट-2 के लेजर डेटा से कटक का 10 मीटर रेजोल्यूशन वाला गहराई का नक्शा बनाया। उन्होंने पाया कि इसका लगभग 99.98 प्रतिशत हिस्सा औसत समुद्र तल से नीचे है, और 2 से 3 मीटर गहरे पतले चैनल बीच-बीच में इसे पार करते हैं।
सेतुसमुद्रम परियोजना क्या है?
सेतुसमुद्रम शिप चैनल परियोजना भारत और श्रीलंका के बीच के उथले समुद्र में खुदाई करके जहाजों का चैनल बनाने की योजना थी, जिसे 2005 में मंजूरी मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2007 में राम सेतु वाले हिस्से पर काम रोक दिया, और बाद में एक विशेषज्ञ समिति ने परियोजना को आर्थिक और पारिस्थितिक रूप से अव्यवहारिक पाया।
क्या राम सेतु राष्ट्रीय स्मारक है?
नहीं। राम सेतु को राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है। जनवरी 2023 में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यह सवाल संस्कृति मंत्रालय में विचाराधीन है, और अगस्त 2025 में अदालत ने समयबद्ध फैसले की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।
इसे एडम्स ब्रिज क्यों कहते हैं?
यह नाम एक मुस्लिम किंवदंती से आता है, जिसमें आदम श्रीलंका की एडम्स पीक तक पहुंचने के लिए इस पुल को पार करते हैं। ब्रिटानिका बताता है कि यह शब्द शायद 11वीं सदी में अल-बिरूनी के समय के आसपास से चला।
अभ्यास प्रश्न
प्रीलिम्स MCQ
1. राम सेतु (एडम्स ब्रिज) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह मन्नार की खाड़ी को पाक जलडमरूमध्य से अलग करता है। 2. इसका भारतीय सिरा पॉइंट कैलिमेरे पर है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (a) भारतीय सिरा रामेश्वरम द्वीप पर धनुषकोडि है, पॉइंट कैलिमेरे नहीं।
2. एडम्स ब्रिज का 2024 का हाई-रेजोल्यूशन गहराई नक्शा मुख्य रूप से किस उपग्रह के डेटा से बना था?
- (a) कार्टोसैट-3
- (b) आइससैट-2
- (c) सेंटिनल-1
- (d) ओशनसैट-3
उत्तर: (b) NRSC के वैज्ञानिकों ने NASA के आइससैट-2 लेजर अल्टीमीटर से समुद्र तल के फोटॉन इस्तेमाल किए।
3. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सेतुसमुद्रम परियोजना का अलाइनमेंट 6 एडम्स ब्रिज के टीलों से होकर गुजरना था। 2. पचौरी समिति ने वैकल्पिक अलाइनमेंट 4A को आर्थिक रूप से व्यवहारिक पाया। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (a) समिति ने पाया कि न अलाइनमेंट 6 और न ही 4A 12 प्रतिशत प्रतिफल की कसौटी पूरी करता है।
4. राम सेतु का श्रीलंकाई सिरा तलैमन्नार किस द्वीप पर है?
- (a) डेल्फ्ट द्वीप
- (b) जाफना प्रायद्वीप
- (c) मन्नार द्वीप
- (d) कच्चातिवु
उत्तर: (c) तलैमन्नार उत्तर-पश्चिमी श्रीलंका के पास मन्नार द्वीप पर है।
5. भारत में किसी स्थल को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक किस कानून के तहत घोषित किया जाता है?
- (a) पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
- (b) प्राचीन संस्मारक और पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958
- (c) जैव विविधता अधिनियम, 2002
- (d) तटीय विनियमन क्षेत्र अधिसूचना, 2019
उत्तर: (b) AMASR अधिनियम, 1958 के तहत ASI राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों की देखरेख करता है।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
- भारत-श्रीलंका संबंधों के संदर्भ में चर्चा कीजिए कि घरेलू कारक विदेश नीति को कैसे प्रभावित करते हैं। (10 अंक, 200 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2013, GS पेपर II।
- उन भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं को समझाइए जिनसे एडम्स ब्रिज बना, और बताइए कि इसकी उम्र अब भी विवादित क्यों है। (10 अंक, 150 शब्द)
- सेतुसमुद्रम शिप चैनल परियोजना दिखाती है कि बुनियादी ढांचा, पारिस्थितिकी और आस्था आपस में कैसे टकरा सकते हैं। आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
- उपग्रह सुदूर संवेदन ने एडम्स ब्रिज जैसी डूबी हुई भू-आकृतियों के बारे में हमारी समझ को कैसे बदला है? (10 अंक, 150 शब्द)
- क्या धार्मिक महत्व वाली प्राकृतिक भू-आकृतियों को धरोहर कानून के तहत संरक्षित किया जाना चाहिए? राम सेतु के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)