Anantam IASHindi Note · 13 September 2026

UP भूलेख खतौनी: खसरा नंबर से देखें और प्रमाणित नकल पाएँ

UP भूलेख पर खसरा नंबर या ULPIN से खतौनी कैसे खोजें, उसकी हर जानकारी कैसे पढ़ें, प्लॉट की स्थिति और बंधक कैसे देखें, और डिजिटल हस्ताक्षर वाली प्रमाणित नकल कैसे पाएँ।

UP भूलेख उत्तर प्रदेश सरकार का ऑनलाइन भू-अभिलेख पोर्टल है। इसे खोलने वाले ज़्यादातर लोग एक ही चीज़ ढूँढते हैं: उस ज़मीन की खतौनी जो उनकी है, जिसे वे खरीदना चाहते हैं या जिस पर झगड़ा चल रहा है। पोर्टल को राजस्व परिषद (Board of Revenue), उत्तर प्रदेश चलाता है। यह upbhulekh.gov.in पर है, और इसमें राज्य के हर गाँव की ज़मीन का डेटा है। खोजना मुफ़्त है। प्लॉट नंबर पता हो, तो बस कुछ मिनट लगते हैं।

लोग खोज में नहीं अटकते। वे उस फ़र्क़ में अटकते हैं जो स्क्रीन पर दिखी कॉपी और बैंक, कोर्ट या रजिस्ट्री दफ़्तर में मानी जाने वाली कॉपी के बीच है। स्क्रीन वाली कॉपी पर अप्रमाणित प्रति लिखा होता है, और पोर्टल ख़ुद कहता है कि यह डेटा सिर्फ़ देखने के लिए है। प्रमाणित प्रति, जिसे ज़्यादातर लोग खतौनी की नकल कहते हैं, पोर्टल के ऑनलाइन भुगतान वाले रास्ते से, तहसील के कंप्यूटर केंद्र से या किसी CSC या लोकवाणी केंद्र से मिलती है। यह एक फ़र्क़ याद रखिए, बाक़ी UP भूलेख आसान है।

UP भूलेख में क्या दिखता है

UP भूलेख उत्तर प्रदेश के कंप्यूटरीकृत अधिकार अभिलेख (record of rights) की सार्वजनिक खिड़की है। यह वह रजिस्टर है जो बताता है कि ज़मीन का कौन-सा टुकड़ा किसके नाम दर्ज है। इसमें किसी भी गाँव की खतौनी दिखती है, अलग-अलग प्लॉट की स्थिति दिखती है, और गाँव के नक्शे का लिंक भी मिलता है।

हर स्क्रीन पर कुछ शब्द बार-बार आते हैं, इसलिए पहले इन्हें समझ लीजिए:

अप्रमाणित खतौनी उद्धरण में ये जानकारियाँ होती हैं:

आख़िरी वाली जानकारी को खरीदार अक्सर छोड़ देते हैं, और बाद में पछताते हैं। प्लॉट पर किसी लंबित राजस्व वाद का नंबर दर्ज है, तो किसी आदेश के बाद एंट्री बदल सकती है। बेचने वाला चाहे जो कहे।

खतौनी किसे चाहिए और क्यों

उत्तर प्रदेश में ज़मीन से जुड़ा हर आदमी UP भूलेख इस्तेमाल करता है। रिकॉर्ड देखने के लिए किसी रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत नहीं है। मालिक, खरीदार, वारिस और कर्ज़ देने वाले, सब एक ही स्क्रीन पर एक ही एंट्री देख सकते हैं।

आम वजहें:

इस रिकॉर्ड के पीछे लंबा इतिहास है। UP में गाँव को इकाई मानकर लगान तय करने की व्यवस्था महालवाड़ी व्यवस्था से चली आती है। ऐसे रजिस्टरों को डिजिटल बनाने की राष्ट्रीय मुहिम भारत में भूमि अभिलेख प्रबंधन में समझाई गई है।

खोज से पहले क्या चाहिए

जगह और एक नंबर चाहिए। बाक़ी सब ज़रूरी नहीं।

कामक्या तैयार रखें
खतौनी देखनाजनपद, तहसील और गाँव; खसरा/गाटा संख्या या यूनिक कोड (ULPIN)
हाल का ट्रांसफ़र खोजनादाखिल-ख़ारिज (mutation) की तारीख़, तारीख़ वाली खोज के लिए
प्लॉट की स्थिति देखनाखोज के नतीजे में आया खसरा/गाटा नंबर
बैंक बंधक देखनाखोज के नतीजे में आया खाता
ऑनलाइन प्रमाणित प्रतिखोज का नतीजा और चालू ऑनलाइन भुगतान का तरीक़ा
काउंटर से प्रमाणित प्रतिप्लॉट का ब्योरा, तहसील के कंप्यूटर केंद्र या CSC या लोकवाणी केंद्र पर

गाँव या तहसील का कोड नहीं पता, तो पोर्टल का FAQ हिस्सा बताता है कि उसे कैसे खोजें। पक्का नहीं कि गाँव अब किस ज़िले में आता है, तो शुरू करने से पहले UP के ज़िलों की सूची देख लीजिए।

UP भूलेख पर खतौनी कैसे देखें

UP भूलेख पर खतौनी की खोज कुछ ड्रॉप-डाउन और फिर एक कैप्चा से होती है। गाँवों के नाम हिंदी में दिखते हैं।

  1. https://upbhulekh.gov.in/ खोलें।
  2. ऊपर दाईं ओर भूलेख सेवाएं मेन्यू खोलें और “खतौनी (अधिकार अभिलेख) की नक़ल देखें” चुनें।
  3. सूची से जनपद चुनें, फिर तहसील। हर सूची में खोजने का अपना बॉक्स है।
  4. गाँव चुनें। सूची हिंदी में है, और गाँव के नाम के पहले अक्षर से सूची छोटी की जा सकती है।
  5. खोज का तरीक़ा चुनें: खसरा/गाटा संख्या या यूनिक कोड (ULPIN) से, या कोई ट्रांसफ़र ढूँढ रहे हैं तो दाखिल-ख़ारिज की तारीख़ से।
  6. नंबर और कैप्चा भरें, फिर खोजें।
  7. नतीजों में से सही खाता चुनें। इससे “उद्धरण खतौनी (अप्रमाणित प्रति)” खुलती है।
  8. इसे स्क्रीन पर पढ़ें, या अपने काम के लिए प्रिंट कर लें।

इस स्क्रीन का प्रिंट अपनी जाँच-पड़ताल के लिए ठीक है। यह बैंक को देने वाला दस्तावेज़ नहीं है। बेचने वाले से सबूत के तौर पर लेने वाला दस्तावेज़ भी नहीं है।

प्लॉट की स्थिति, नक्शा और बंधक कैसे देखें

नतीजे में किसी खसरा नंबर पर क्लिक करने से उस प्लॉट की स्थिति खुलती है। पोर्टल इसे चार बातों पर प्लॉट की स्थिति बताता है: प्लॉट विवादित है या नहीं, बिक चुका है या नहीं, उसका भू-नक्शा, और दाखिल-ख़ारिज रजिस्टर में उसकी एंट्री।

इसी भूलेख सेवाएं मेन्यू में दो सीधे विकल्प भी हैं। प्लॉट की बिक्री की स्थिति के लिए “भूखण्ड/गाटे के विक्रय की स्थिति जानें” है। प्लॉट पर मुक़दमा चल रहा है या नहीं, यह जानने के लिए “भूखण्ड/गाटे के वाद ग्रस्त होने की स्थिति जानें” है।

  1. ऊपर बताई खतौनी खोज करें।
  2. नतीजे में दिखे खसरा/गाटा नंबर पर क्लिक करें।
  3. स्थिति वाले हिस्से में विवाद, बिक्री, नक्शा और दाखिल-ख़ारिज की एंट्री पढ़ें।
  4. खाते पर दर्ज बंधक का ब्योरा देखने के लिए बैंक बंधक वाला विकल्प इस्तेमाल करें।
  5. नक्शे के लिए राज्य का भू-नक्शा पोर्टल https://upbhunaksha.gov.in/ खोलें।
  6. उद्धरण में किसी लंबित राजस्व वाद का नंबर है, तो उस वाद को राजस्व न्यायालय की व्यवस्था https://vaad.up.nic.in/ पर देखें।

किसी बिक्री या वरासत का वादा किया गया है, तो वह रिकॉर्ड में चढ़ी या नहीं, यह जानने का सबसे तेज़ रास्ता दाखिल-ख़ारिज की तारीख़ वाली खोज है। तारीख़ वाली खोज में कुछ न दिखे, तो मतलब है कि दाखिल-ख़ारिज अभी रिकॉर्ड तक नहीं पहुँचा।

प्रमाणित खतौनी की नकल कहाँ से मिलती है

मुफ़्त उद्धरण सिर्फ़ देखने के लिए है, और पोर्टल अपने अस्वीकरण (disclaimer) में ख़ुद यह कहता है। डेटा जानकारी के लिए है, और उद्धरण की प्रमाणित प्रति तहसील के कंप्यूटर केंद्र और CSC या लोकवाणी केंद्रों से ली जा सकती है। पोर्टल पर ही एक ऑनलाइन रास्ता भी है।

ऑनलाइन प्रमाणित खतौनी लेने के लिए:

  1. भूलेख सेवाएं मेन्यू खोलें और “ऑनलाइन पेमेन्ट द्वारा खतौनी की प्रमाणित प्रति प्राप्त करें” चुनें।
  2. जनपद, तहसील और गाँव चुनें। फिर मुफ़्त खोज की तरह ही अपना खाता ढूँढें।
  3. प्रमाणित प्रति के लिए भुगतान पूरा करें।
  4. पैसे दे दिए, लेकिन भुगतान की पुष्टि नहीं दिख रही, तो दोबारा भुगतान मत कीजिए। उसी स्क्रीन पर भुगतान की पुष्टि वाला विकल्प इस्तेमाल करें।
  5. प्रमाणित उद्धरण डाउनलोड करें। इसमें लिखा होता है कि यह इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी सिस्टम से तैयार हुआ है, और डेटा पर डिजिटल हस्ताक्षर है।

प्रमाणित प्रति कहाँ और कब जारी हुई, यह कोई भी जाँच सकता है। पोर्टल का FAQ इसके लिए “Verify ROR by RoR Id” विकल्प बताता है, जहाँ आप उद्धरण का नंबर डालते हैं।

पुराने हाथ से लिखे रिकॉर्ड का मामला अलग है। रिकॉर्ड रूम में रखे अधिकार अभिलेख की प्रमाणित प्रति के लिए इसी मेन्यू में अलग विकल्प है: “अधिकार अभिलेख (रिकॉर्ड रूम) की प्रमाणित प्रति प्राप्त करें”।

डिजिटल हस्ताक्षर वाला यह रास्ता उत्तर प्रदेश अधिकार अभिलेख (कंप्यूटरीकरण) (द्वितीय संशोधन) नियमावली, 2011 पर टिका है। साथ में राज्य का वह आदेश भी है जो डिजिटल हस्ताक्षर वाले कंप्यूटरीकृत खतौनी उद्धरण जारी करने के बारे में है।

फ़ीस और समय

देखना मुफ़्त है। प्रमाणित प्रति पैसे वाली सेवा है, और पोर्टल इसका शुल्क किसी सार्वजनिक फ़ीस पेज पर नहीं, भुगतान वाले चरण पर दिखाता है।

सेवाख़र्चकहाँ
अप्रमाणित खतौनी देखनामुफ़्तupbhulekh.gov.in
प्लॉट की स्थिति, दाखिल-ख़ारिज की तारीख़ से खोज, बंधक देखनामुफ़्तupbhulekh.gov.in
गाँव का नक्शा (भू-नक्शा)देखना मुफ़्तupbhunaksha.gov.in
ऑनलाइन प्रमाणित खतौनीभुगतान वाले चरण पर दिखता हैupbhulekh.gov.in, ऑनलाइन भुगतान
काउंटर से प्रमाणित खतौनीकाउंटर पर यूज़र चार्ज लिया जाता हैतहसील कंप्यूटर केंद्र, CSC या लोकवाणी केंद्र

आम दिक़्क़तें और उनका हल

UP भूलेख की ज़्यादातर दिक़्क़तों की वजह सीधी होती है।

हेल्पलाइन और शिकायत

UP भूलेख के होमपेज पर शिकायत की स्थिति देखने का विकल्प है। यह शिकायतों को राज्य की जनसुनवाई व्यवस्था की ओर भेजता है।

जिस बात का जवाब पोर्टल न दे, उसके लिए तहसील जाइए, क्योंकि रिकॉर्ड उसी के पास है। लेखपाल और तहसीलदार ही उस पर कार्रवाई करते हैं। SDM वाली गाइड बताती है कि राजस्व मामलों में उप-ज़िलाधिकारी इनके ऊपर कहाँ आते हैं।

UP भूलेख क्या नहीं कर सकता

UP भूलेख देखने और नकल देने की सेवा है। यह रिकॉर्ड में कुछ भी बदल नहीं सकता।

सलाह सीधी है। किसी प्लॉट पर बयाना देने से पहले मुफ़्त खतौनी ख़ुद निकालिए। बंधक और लंबित वाद वाले हिस्से लाइन-दर-लाइन पढ़िए। प्रमाणित प्रति के पैसे तभी दीजिए जब कोई संस्था उसे माँगे। बेचने वाले का प्रिंटआउट कितना भी साफ़-सुथरा हो, आपकी अपनी खोज की जगह नहीं ले सकता।

सामान्य प्रश्न

क्या UP भूलेख की खतौनी क़ानूनी दस्तावेज़ के तौर पर मान्य है?

मुफ़्त में दिखने वाली कॉपी पर अप्रमाणित उद्धरण लिखा होता है, और पोर्टल कहता है कि डेटा सिर्फ़ देखने के लिए है। बैंक, कोर्ट या रजिस्ट्री के लिए प्रमाणित प्रति लें। यह पोर्टल के ऑनलाइन भुगतान वाले रास्ते से, या तहसील के कंप्यूटर केंद्र, CSC या लोकवाणी केंद्र से मिलती है।

क्या UP भूलेख पर मालिक के नाम से खोज सकते हैं?

पोर्टल पर साफ़ तौर पर खोज के तीन विकल्प मिलते हैं: खसरा या गाटा संख्या, प्लॉट का यूनिक कोड (ULPIN) और दाखिल-ख़ारिज की तारीख़। आपको सिर्फ़ मालिक का नाम पता है, तो तहसील या CSC ऑपरेटर खाता ढूँढने में मदद कर सकते हैं।

खतौनी और खसरा में क्या फ़र्क़ है?

खतौनी पूरे खाते का अधिकार अभिलेख है। इसमें दर्ज खातेदार, उनके हिस्से और उस खाते के सारे प्लॉट होते हैं। खसरा या गाटा संख्या एक अकेले प्लॉट की पहचान है। पोर्टल खसरा और गाटा को एक ही नंबर मानता है।

मेरे गाँव की खतौनी की नकल क्यों नहीं बन रही?

पोर्टल के FAQ के मुताबिक़ ऐसा तब होता है जब गाँव की नई खतौनी बनी हो, पुरानी से दोबारा तैयार हुई हो या चकबंदी के बाद बनी हो, और उस पर अभी डिजिटल हस्ताक्षर न हुए हों। हस्ताक्षर होने का इंतज़ार करें, या तहसील से संपर्क करें।

UP में किसी प्लॉट पर बैंक का कर्ज़ है या नहीं, कैसे पता करें?

खतौनी खोलकर कॉलम 18.1 और 18.2 पढ़ें। इनमें बंधक और बंधक छूटने की एंट्री बैंक के नाम, तारीख़ और रक़म के साथ दर्ज होती है। पोर्टल पर खाते के लिए बैंक बंधक देखने का विकल्प भी है।

क्या UP भूलेख पर ग़लत नाम या हिस्सा ठीक करवा सकते हैं?

नहीं। पोर्टल सिर्फ़ रिकॉर्ड दिखाता है और उसकी नकल देता है। सुधार के लिए तहसील के राजस्व अधिकारियों का आदेश चाहिए। उसके बाद कंप्यूटर वाला रिकॉर्ड अपडेट होता है।