क्रिया विशेषण: परिभाषा, चार भेद, उपभेद और पहचान के आसान तरीके
क्रिया विशेषण समझिए: Kriya Visheshan के चार भेद और उपभेद, विशेषण और संबंधबोधक से फर्क, बोर्ड वाले पद परिचय का तरीका और हल सहित अभ्यास।
क्रिया विशेषण वह शब्द है जो बताता है कि काम कब हुआ, कहाँ हुआ, कैसे हुआ या कितना हुआ। “बच्चा धीरे चलता है” में “धीरे” चलने का ढंग बताता है, इसलिए वह क्रिया विशेषण है। कामताप्रसाद गुरु के हिंदी व्याकरण में इसकी परिभाषा यही है: जिस अव्यय से क्रिया की कोई विशेषता जानी जाए, वह क्रिया विशेषण है, और विशेषता का मतलब है स्थान, काल, रीति और परिमाण। यही चार बातें इसके चार मुख्य भेद बनाती हैं।
गलती ज्यादातर पहचान में होती है, परिभाषा में नहीं। “बहुत” कहीं विशेषण होता है और कहीं क्रिया विशेषण, “बाहर” कहीं क्रिया विशेषण होता है और कहीं संबंधबोधक, और “लगातार” को एक किताब कालवाचक कहती है तो बोर्ड की अंक योजना रीतिवाचक। यह नोट चारों भेद उनके उपभेदों के साथ देता है, फिर वे कसौटियाँ देता है जिनसे एक ही शब्द की भूमिका वाक्य के हिसाब से तय होती है।
क्रिया विशेषण एक नजर में
नीचे की तालिका पूरे अध्याय का सार है। हर बिंदु आगे के खंडों में उदाहरण के साथ खुलता है।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| परिभाषा | वह अव्यय जो क्रिया की विशेषता (स्थान, काल, रीति, परिमाण) बताए |
| शब्द-वर्ग | अविकारी शब्द, यानी अव्यय का एक भेद |
| अर्थ के आधार पर भेद | 4: स्थानवाचक, कालवाचक, परिमाणवाचक, रीतिवाचक |
| प्रयोग के आधार पर भेद | 3: साधारण, संयोजक, अनुबद्ध (कामताप्रसाद गुरु) |
| रूप के आधार पर भेद | 3: मूल, यौगिक, स्थानीय (कामताप्रसाद गुरु) |
| और किसकी विशेषता | विशेषण और दूसरे क्रिया विशेषण की भी, जैसे “बहुत सुंदर”, “बहुत धीरे” |
| पहचान का सवाल | क्रिया से पूछिए: कब, कहाँ, कैसे, कितना? |
| परीक्षा में | पद परिचय में भेद और विशेषित क्रिया लिखनी होती है |
क्रिया विशेषण किसे कहते हैं और यह अव्यय क्यों है
सीधी परिभाषा: जो शब्द क्रिया की विशेषता बताए, वह क्रिया विशेषण है। जैसे विशेषण संज्ञा के बारे में कुछ जोड़ता है (मीठा आम), वैसे ही क्रिया विशेषण क्रिया के बारे में कुछ जोड़ता है (मीठा बोलता है)। शब्द ही अपना काम बता देता है: क्रिया का विशेषण।
यह अविकारी शब्द है, यानी लिंग, वचन या काल बदलने पर इसका रूप नहीं बदलता। “लड़का धीरे चला”, “लड़की धीरे चली”, “लड़के धीरे चले”: तीनों में क्रिया बदल गई, “धीरे” वैसा ही रहा। इसी वजह से हिंदी व्याकरण इसे अव्यय के चार भेदों में पहले नंबर पर रखता है। बाकी तीन भेद, यानी संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक, हिंदी अव्यय वाले नोट में हैं।
गुरु एक बारीक बात भी दर्ज करते हैं। कुछ क्रिया विशेषणों के साथ विभक्ति लग जाती है, जैसे “यहाँ से”, “कब से”, “इधर का”। ऐसे रूप गिने-चुने हैं, इसलिए वे इन्हें अपवाद मानकर क्रिया विशेषण को अव्यय ही मानते हैं।
क्रिया के अलावा और किसकी विशेषता बताता है
क्रिया विशेषण सिर्फ क्रिया तक सीमित नहीं है। गुरु के अनुसार जो शब्द विशेषण या दूसरे क्रिया विशेषण की विशेषता बताते हैं, उन्हें भी क्रिया विशेषण कहते हैं, और ये ज्यादातर परिमाणवाचक होते हैं।
- क्रिया की विशेषता: वह बहुत बोलता है।
- विशेषण की विशेषता: यह बहुत सुंदर चित्र है। (यहाँ “सुंदर” विशेषण है, “बहुत” उसकी मात्रा बताता है)
- दूसरे क्रिया विशेषण की विशेषता: गाड़ी बहुत धीरे चल रही है। (“धीरे” क्रिया विशेषण है, “बहुत” उसकी मात्रा बताता है)
कई किताबें विशेषण की विशेषता बताने वाले शब्द को प्रविशेषण कहती हैं। यह नाम हिंदी विशेषण वाले नोट में भी आया है। पद परिचय लिखते समय दोनों में से कोई भी नाम चलेगा, बस यह लिखिए कि वह किस शब्द की विशेषता बता रहा है।
अर्थ के आधार पर क्रिया विशेषण के चार भेद
सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला वर्गीकरण यही है। क्रिया से चार सवाल पूछिए: कहाँ, कब, कितना, कैसे। जिस सवाल का जवाब शब्द देता है, वही उसका भेद है।
| भेद | क्रिया से सवाल | उदाहरण शब्द | वाक्य |
|---|---|---|---|
| स्थानवाचक | कहाँ? किधर? | यहाँ, वहाँ, ऊपर, नीचे, बाहर, इधर, दूर | बच्चे बाहर खेल रहे हैं। |
| कालवाचक | कब? कब तक? कितनी बार? | आज, कल, अभी, तुरंत, सदा, बार-बार | वह कल आएगा। |
| परिमाणवाचक | कितना? | बहुत, थोड़ा, कम, अधिक, केवल, लगभग | उसने थोड़ा खाया। |
| रीतिवाचक | कैसे? किस ढंग से? | धीरे, अचानक, ध्यानपूर्वक, ऐसे, जरूर | बारिश अचानक शुरू हुई। |
स्थानवाचक क्रिया विशेषण
जो शब्द क्रिया के होने की जगह या दिशा बताए, वह स्थानवाचक है। गुरु इसके दो उपभेद मानते हैं:
- स्थितिवाचक (जगह): यहाँ, वहाँ, जहाँ, कहाँ, आगे, पीछे, ऊपर, नीचे, सामने, बाहर, भीतर, पास।
- दिशावाचक (दिशा): इधर, उधर, किधर, दूर, परे, दाहिने, बाएँ, चारों ओर।
कुछ किताबें दिशावाचक को पाँचवाँ अलग भेद बना देती हैं। ज्यादातर व्याकरण उसे स्थानवाचक का उपभेद ही मानते हैं, इसलिए “भेद कितने हैं” पूछा जाए तो चार लिखिए।
कालवाचक क्रिया विशेषण
जो शब्द क्रिया का समय बताए, वह कालवाचक है। गुरु इसे तीन हिस्सों में बाँटते हैं, और यह बँटवारा याद रखने में मदद करता है:
- समयवाचक (ठीक कब): आज, कल, परसों, अब, तब, अभी, तुरंत, पहले, फिर।
- अवधिवाचक (कब तक, कितनी देर): आजकल, नित्य, सदा, निरंतर, लगातार, दिन भर, अब तक।
- पौनःपुन्यवाचक (कितनी बार): बार-बार, बहुधा, प्रतिदिन, कई बार, हर बार।
“सूरज सदा पूर्व में उगता है” और “वह प्रतिदिन टहलता है” दोनों कालवाचक हैं, पहला अवधि बताता है और दूसरा दोहराव।
परिमाणवाचक क्रिया विशेषण
जो शब्द क्रिया की मात्रा या हद बताए, वह परिमाणवाचक है। इसकी संख्या दूसरे भेदों से कम है, पर इसके उपभेद सबसे साफ हैं:
- अधिकताबोधक: बहुत, अति, बिल्कुल, खूब, अत्यंत।
- न्यूनताबोधक: कुछ, लगभग, थोड़ा, जरा, प्रायः।
- पर्याप्तिवाचक: केवल, बस, काफी, यथेष्ट।
- तुलनावाचक: अधिक, कम, इतना, उतना, जितना, कितना, बढ़कर।
- श्रेणीवाचक: थोड़ा-थोड़ा, बारी-बारी से, एक-एक करके।
“उतना ही खाओ जितना पचा सको” में तुलना है, और “बच्चे बारी-बारी से अंदर आए” में क्रम।
रीतिवाचक क्रिया विशेषण
जो शब्द क्रिया का ढंग बताए, वह रीतिवाचक है। गुरु लिखते हैं कि इनकी संख्या गुणवाचक विशेषणों की तरह अनगिनत है, इसलिए जो क्रिया विशेषण पहले तीन भेदों में नहीं आते, वे सब इसी में गिने जाते हैं। यही वजह है कि इस भेद में सिर्फ “कैसे” वाले शब्द नहीं, कई और अर्थ भी आते हैं:
- प्रकार: धीरे, अचानक, सहसा, ऐसे, वैसे, ध्यानपूर्वक, एकाएक, हँसकर, फटाफट।
- निश्चय: अवश्य, सचमुच, बेशक, जरूर।
- अनिश्चय: शायद, कदाचित, यथासंभव।
- स्वीकार: हाँ, जी, ठीक।
- कारण: इसलिए, क्यों।
- निषेध: न, नहीं, मत।
- अवधारण (जोर देना): तो, ही, मात्र, भर, तक।
इसका सीधा फायदा पद परिचय में मिलता है। “वह नहीं आया” में “नहीं” का भेद पूछा जाए, तो वह रीतिवाचक (निषेधबोधक) क्रिया विशेषण है।
प्रयोग और रूप के आधार पर भेद
स्कूल की किताबें अक्सर सिर्फ अर्थ वाले चार भेद पढ़ाती हैं, पर गुरु दो और आधार देते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में “रचना या प्रयोग के आधार पर” वाले सवाल यहीं से आते हैं।
प्रयोग के आधार पर तीन भेद हैं:
- साधारण: जो वाक्य में अपने आप में आए। “बेटा, जल्दी आओ।”
- संयोजक: जो एक उपवाक्य को दूसरे से जोड़े। ये संबंधवाचक “जो” से बने हैं: जब, जहाँ, जैसे, ज्यों, जितना। “जब बारिश रुकी, तब हम निकले।”
- अनुबद्ध: जो किसी भी शब्द के साथ लगकर उस पर जोर दें। “मैंने उसे देखा तक नहीं।” “आपके आने भर की देर है।”
रूप के आधार पर भी तीन भेद हैं:
- मूल: जो किसी दूसरे शब्द से नहीं बने, जैसे ठीक, दूर, अचानक, फिर, नहीं।
- यौगिक: जो दूसरे शब्दों में प्रत्यय या शब्द जोड़कर बने, जैसे मन से, रात को, दिन-भर, प्रेमपूर्वक, क्रमशः।
- स्थानीय: दूसरे शब्द-भेद जो बिना रूप बदले किसी खास जगह क्रिया विशेषण का काम करें। “मनुष्य उदास बैठा है” में “उदास” विशेषण होकर भी बैठने का ढंग बता रहा है, और “तुम दौड़कर चलते हो” में पूर्वकालिक क्रिया वही काम कर रही है।
स्थानीय क्रिया विशेषण यह भी दिखाता है कि हिंदी में शब्द का भेद शब्दकोश से नहीं, वाक्य में उसके काम से तय होता है। अगले खंड की सारी उलझनें इसी एक बात से सुलझती हैं।
वे जोड़े जिनमें सबसे ज्यादा नंबर कटते हैं
एक ही शब्द तीन अलग वाक्यों में तीन अलग भेद का हो सकता है। गुरु “आगे” का उदाहरण देते हैं: वह कहीं क्रिया विशेषण है, कहीं संबंधबोधक और कहीं संज्ञा। इसलिए हर बार एक ही सवाल पूछिए: यह शब्द किसके बारे में बता रहा है?
| शब्द | क्रिया विशेषण के रूप में | दूसरी भूमिका में |
|---|---|---|
| बहुत | वह बहुत हँसा। (क्रिया की मात्रा) | बहुत पानी बह गया। (संज्ञा “पानी” की मात्रा, विशेषण) |
| थोड़ा | थोड़ा रुकिए। | थोड़ा दूध दीजिए। (विशेषण) |
| बाहर | बच्चे बाहर गए। | बच्चे घर के बाहर गए। (संबंधबोधक) |
| आगे | सेना आगे बढ़ी। | मंदिर के आगे भीड़ है। (संबंधबोधक) |
| अच्छा | वह अच्छा गाती है। (स्थानीय) | अच्छा गाना सुनाओ। (विशेषण) |
| कल | वह कल आएगा। | कल का दिन भारी था। (संज्ञा) |
तीन कसौटियाँ याद रखिए:
- विशेषण या क्रिया विशेषण: शब्द के ठीक बाद संज्ञा है और वह उसी की बात कर रहा है, तो विशेषण। क्रिया की बात कर रहा है, तो क्रिया विशेषण।
- संबंधबोधक या क्रिया विशेषण: शब्द से पहले संज्ञा या सर्वनाम के साथ “के”, “की” या “से” लगा है (घर के बाहर), तो संबंधबोधक। अकेला है (बाहर गया), तो क्रिया विशेषण।
- संज्ञा या क्रिया विशेषण: शब्द के बाद विभक्ति लगकर वह कर्ता या संबंध का काम करे (कल का दिन), तो संज्ञा।
“लगातार” कालवाचक है या रीतिवाचक
यह उलझन असली है, और विद्यार्थी की गलती नहीं। गुरु “लगातार” को कालवाचक के अवधिवाचक उपभेद में रखते हैं, क्योंकि वह बताता है कि काम कितनी देर बिना रुके चला। दूसरी ओर CBSE के 2025-26 के हिंदी A नमूना प्रश्नपत्र की अंक योजना में “उनकी अँगुलियाँ खँजड़ी पर लगातार चल रही थीं” वाले वाक्य में “लगातार” को रीतिवाचक क्रिया विशेषण लिखा गया है, यानी चलने का ढंग।
दोनों के पीछे तर्क है। बोर्ड परीक्षा में अंक योजना ही मानी जाती है, इसलिए वहाँ रीतिवाचक लिखिए। प्रतियोगी परीक्षा में अगर विकल्पों में दोनों हों, तो प्रश्न का संदर्भ देखिए: “कितनी देर” पर जोर हो तो कालवाचक, “किस तरह” पर जोर हो तो रीतिवाचक।
आम गलतियाँ और उनका सुधार
क्रिया विशेषण वाक्य शुद्धि में भी आता है, क्योंकि गलत जगह रखा गया क्रिया विशेषण अर्थ बदल देता है। नीचे सबसे आम चूकें हैं:
- दोहरा अर्थ: “केवल मैंने उसे दो रुपये दिए” और “मैंने उसे केवल दो रुपये दिए” के अर्थ अलग हैं। “केवल” उसी शब्द के पास रखिए जिस पर जोर देना है।
- दोहराव: “वह प्रतिदिन रोज टहलता है” गलत है। “प्रतिदिन” और “रोज” एक ही बात हैं, एक हटाइए।
- निश्चय और अनिश्चय एक साथ: “वह शायद जरूर आएगा” गलत है। “शायद” और “जरूर” उलटे अर्थ देते हैं, इनमें से एक ही रखिए।
- “बहुत” को हमेशा क्रिया विशेषण मान लेना: “बहुत लोग आए” में वह संख्या बताने वाला विशेषण है।
- “नहीं” को अलग शब्द-भेद मानना: निषेध के शब्द (न, नहीं, मत) रीतिवाचक क्रिया विशेषण में गिने जाते हैं।
पदक्रम और दोहराव वाली बाकी अशुद्धियाँ हिंदी वाक्य शुद्धि वाले नोट में विस्तार से हैं।
पद परिचय में क्रिया विशेषण कैसे लिखें
बोर्ड परीक्षा में यह विषय ज्यादातर पद परिचय के रूप में आता है। CBSE के 2025-26 के हिंदी A पाठ्यक्रम में कक्षा 10 के व्याकरण खंड में पद परिचय पर 4 अंक हैं, पाँच में से चार प्रश्न करने होते हैं। गुरु के अनुसार क्रिया विशेषण के पद परिचय में तीन बातें आती हैं: प्रकार, विशेष्य (जिस क्रिया या शब्द की विशेषता बताई गई) और विकार, अगर हो।
उदाहरण: “बच्चे मैदान में खूब खेले।”
खूब: परिमाणवाचक क्रिया विशेषण (अधिकताबोधक), “खेले” क्रिया की विशेषता बताता है।
उदाहरण: “डाकिया रोज सुबह आता है।”
रोज: कालवाचक क्रिया विशेषण (पौनःपुन्यवाचक), “आता है” क्रिया की विशेषता बताता है।
सिर्फ “क्रिया विशेषण” लिखकर छोड़ देना आधा उत्तर है। भेद और विशेषित क्रिया, दोनों लिखिए। क्रिया के अपने भेद (सकर्मक, अकर्मक, संयुक्त) हिंदी क्रिया के भेद वाले नोट में हैं, और पद परिचय का पूरा तरीका इसी शृंखला के पद परिचय वाले नोट में आएगा।
सिविल सेवा के अनिवार्य हिंदी प्रश्नपत्र में क्रिया विशेषण सीधे नहीं पूछा जाता, पर संक्षेपण और अनुवाद में सही क्रिया विशेषण चुनना भाषा को साफ बनाता है। पूरे व्याकरण का क्रम अनिवार्य हिंदी व्याकरण गाइड में है। इस अध्याय के लिए एक हफ्ता नहीं चाहिए: चार सवाल (कहाँ, कब, कितना, कैसे) और ऊपर की तीन कसौटियाँ पक्की कर लीजिए, बाकी अभ्यास से आ जाता है।
अभ्यास प्रश्न
पहले आठ वाक्यों में क्रिया विशेषण पहचानिए और उसका भेद लिखिए। उसके बाद के प्रश्न पहचान और नियमों पर हैं। उत्तर इस खंड के अंत में हैं।
- वह अभी-अभी घर लौटा है।
- पक्षी ऊपर उड़ रहे हैं।
- उसने थोड़ा पानी पिया और फिर सो गया।
- विद्यार्थी ध्यानपूर्वक सुन रहे थे।
- माँ प्रतिदिन मंदिर जाती हैं।
- तुम इधर आओ।
- शायद आज बारिश हो।
- उतना ही बोलो जितना जरूरी हो।
- “बहुत पानी बह गया” और “वह बहुत रोया” में “बहुत” के भेद बताइए।
- “वह घर के भीतर गया” में “भीतर” क्रिया विशेषण है या नहीं? कारण बताइए।
- “यह बहुत ऊँची इमारत है” में “बहुत” किसकी विशेषता बताता है?
- प्रयोग के आधार पर “जहाँ” किस प्रकार का क्रिया विशेषण है? एक वाक्य बनाइए।
- “मैंने उसे देखा तक नहीं” में “तक” का भेद बताइए।
- “उनकी अँगुलियाँ खँजड़ी पर लगातार चल रही थीं” में “लगातार” का पद परिचय CBSE अंक योजना के अनुसार लिखिए।
उत्तर
- अभी-अभी: कालवाचक (समयवाचक), “लौटा है” की विशेषता।
- ऊपर: स्थानवाचक (स्थितिवाचक)।
- थोड़ा: यहाँ “पानी” संज्ञा की मात्रा बताता है, इसलिए परिमाणवाचक विशेषण है। फिर: कालवाचक क्रिया विशेषण, “सो गया” की विशेषता।
- ध्यानपूर्वक: रीतिवाचक (प्रकार), रूप के हिसाब से यौगिक।
- प्रतिदिन: कालवाचक (पौनःपुन्यवाचक)।
- इधर: स्थानवाचक (दिशावाचक)।
- शायद: रीतिवाचक (अनिश्चयबोधक)। आज: कालवाचक।
- उतना और जितना: परिमाणवाचक (तुलनावाचक)। “जितना” दो उपवाक्यों को जोड़ता भी है, इसलिए प्रयोग के हिसाब से संयोजक है।
- पहले वाक्य में “बहुत” संज्ञा “पानी” की मात्रा बताता है, इसलिए परिमाणवाचक विशेषण। दूसरे में क्रिया “रोया” की मात्रा बताता है, इसलिए परिमाणवाचक क्रिया विशेषण।
- नहीं। “भीतर” से पहले “घर के” है, यानी वह संज्ञा का संबंध क्रिया से जोड़ रहा है, इसलिए संबंधबोधक अव्यय है। “वह भीतर गया” में वह क्रिया विशेषण होता।
- विशेषण “ऊँची” की। ऐसे शब्द को परिमाणवाचक क्रिया विशेषण या प्रविशेषण कहते हैं।
- संयोजक। “जहाँ चाह होती है, वहाँ राह निकलती है।”
- अनुबद्ध क्रिया विशेषण, अर्थ के हिसाब से रीतिवाचक (अवधारणबोधक)। यह “देखा” पर जोर देता है।
- लगातार: रीतिवाचक क्रिया विशेषण, “चल रही थीं” क्रिया की विशेषता बताता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्रिया विशेषण किसे कहते हैं?
जो शब्द क्रिया की विशेषता बताए, यानी काम कब, कहाँ, कैसे या कितना हुआ, उसे क्रिया विशेषण कहते हैं। जैसे ‘वह धीरे चलता है’ में ‘धीरे’ चलने का ढंग बताता है। यह अविकारी शब्द है, इसलिए लिंग या वचन बदलने पर इसका रूप नहीं बदलता।
क्रिया विशेषण के कितने भेद होते हैं?
अर्थ के आधार पर क्रिया विशेषण के चार भेद होते हैं: स्थानवाचक, कालवाचक, परिमाणवाचक और रीतिवाचक। कामताप्रसाद गुरु प्रयोग के आधार पर तीन (साधारण, संयोजक, अनुबद्ध) और रूप के आधार पर तीन (मूल, यौगिक, स्थानीय) भेद भी देते हैं। सवाल में आधार न लिखा हो, तो अर्थ वाले चार भेद लिखिए।
रीतिवाचक क्रिया विशेषण किसे कहते हैं?
जो शब्द बताए कि क्रिया किस ढंग से हुई, वह रीतिवाचक क्रिया विशेषण है, जैसे धीरे, अचानक, ध्यानपूर्वक। जो क्रिया विशेषण बाकी तीन भेदों में नहीं आते, वे भी इसी में गिने जाते हैं, इसलिए निश्चय (जरूर), अनिश्चय (शायद), निषेध (नहीं) और अवधारण (ही, तक) भी रीतिवाचक माने जाते हैं।
विशेषण और क्रिया विशेषण में क्या अंतर है?
विशेषण संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है, जबकि क्रिया विशेषण क्रिया की। ‘बहुत पानी’ में ‘बहुत’ विशेषण है, क्योंकि वह पानी की मात्रा बताता है, पर ‘बहुत रोया’ में क्रिया विशेषण। पहचान के लिए देखिए कि शब्द किसके बारे में बता रहा है।
क्या क्रिया विशेषण विशेषण की भी विशेषता बताता है?
हाँ। ‘यह बहुत सुंदर चित्र है’ में ‘बहुत’ विशेषण ‘सुंदर’ की मात्रा बताता है, और ‘वह बहुत धीरे चलता है’ में क्रिया विशेषण ‘धीरे’ की। ऐसे शब्द ज्यादातर परिमाणवाचक होते हैं, और कई किताबें इन्हें प्रविशेषण भी कहती हैं।
कालवाचक क्रिया विशेषण के उदाहरण क्या हैं?
आज, कल, अभी, तुरंत, पहले, सदा, नित्य, लगातार, बार-बार और प्रतिदिन कालवाचक क्रिया विशेषण हैं। कामताप्रसाद गुरु इन्हें समयवाचक (कब), अवधिवाचक (कब तक) और पौनःपुन्यवाचक (कितनी बार) में बाँटते हैं। जैसे ‘वह प्रतिदिन टहलता है’ में ‘प्रतिदिन’ दोहराव बताता है।
बाहर, भीतर, आगे जैसे शब्द क्रिया विशेषण हैं या संबंधबोधक?
दोनों हो सकते हैं, वाक्य देखकर तय होता है। ‘बच्चे बाहर गए’ में ‘बाहर’ अकेला है और क्रिया की जगह बताता है, इसलिए क्रिया विशेषण है। ‘बच्चे घर के बाहर गए’ में वह ‘घर’ को क्रिया से जोड़ता है, इसलिए संबंधबोधक अव्यय है।
पद परिचय में क्रिया विशेषण का क्या लिखा जाता है?
क्रिया विशेषण के पद परिचय में उसका भेद और वह किस क्रिया या शब्द की विशेषता बता रहा है, ये दोनों बातें लिखी जाती हैं। जैसे ‘बच्चे खूब खेले’ में खूब: परिमाणवाचक क्रिया विशेषण, ‘खेले’ क्रिया की विशेषता। सिर्फ ‘क्रिया विशेषण’ लिखने पर पूरे अंक नहीं मिलते।