हिंदी व्याकरण में शब्दों को उनके रूप-परिवर्तन के आधार पर दो वर्गों में बाँटा जाता है — विकारी (जिनका रूप बदलता है, जैसे संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया) और अविकारी (जिनका रूप कभी नहीं बदलता)। इसी दूसरे वर्ग को अव्यय कहते हैं। ‘अव्यय’ शब्द ही इसका अर्थ खोल देता है — ‘अ + व्यय’, अर्थात् जिसमें कोई व्यय या परिवर्तन न हो। लिंग, वचन, पुरुष, कारक या काल — किसी भी कारण से अव्यय का रूप ज्यों-का-त्यों बना रहता है।
UPSC अनिवार्य हिंदी प्रश्नपत्र की दृष्टि से अव्यय एक छोटा किंतु बहुत उपयोगी अध्याय है। शुद्ध वाक्य-रचना, संक्षेपण, अनुवाद और पत्र-लेखन — हर भाग में अव्ययों का सही चुनाव और प्रयोग आपकी भाषा को सहज तथा प्रवाहपूर्ण बनाता है। इस नोट में अव्यय की पहचान, उसके चार भेद, उपभेद, अनेक उदाहरण, निपात की अवधारणा तथा हल सहित अभ्यास — सब एक साथ क्रम से दिए गए हैं।
अव्यय की पहचान और मूल विशेषता
किसी शब्द को अव्यय कहने की एकमात्र कसौटी यह है कि वह वाक्य में चाहे जिस स्थान पर आए, उसका रूप वही रहता है। उदाहरण देखिए —
- लड़का दौड़ा। → लड़के दौड़े। (संज्ञा का रूप बदला — विकारी)
- वह धीरे चला। → वे धीरे चले। (अव्यय ‘धीरे’ अपरिवर्तित — अविकारी)
यहाँ संज्ञा ‘लड़का’ वचन के साथ बदल गई, पर क्रियाविशेषण ‘धीरे’ दोनों वाक्यों में एक जैसा रहा। यही अव्यय का स्थायी लक्षण है। ध्यान रहे, ‘धीरे-धीरे’ जैसी पुनरुक्ति भी अव्यय ही है; पुनरुक्ति से रूप नहीं बदलता।
अर्थ और कार्य के आधार पर अव्यय चार प्रकार के होते हैं। नीचे की तालिका में चारों भेदों का सार एक साथ देखिए, फिर प्रत्येक को विस्तार से समझेंगे।
| भेद | कार्य | प्रमुख उदाहरण |
|---|---|---|
| क्रियाविशेषण अव्यय | क्रिया की विशेषता बताना | धीरे, यहाँ, अभी, बहुत |
| संबंधबोधक अव्यय | संज्ञा/सर्वनाम का अन्य पद से संबंध जोड़ना | के ऊपर, के नीचे, के पास, के बिना |
| समुच्चयबोधक अव्यय | शब्दों/वाक्यों को आपस में जोड़ना | और, या, किंतु, क्योंकि |
| विस्मयादिबोधक अव्यय | हर्ष, शोक, आश्चर्य आदि भाव प्रकट करना | वाह!, हाय!, अरे!, छि! |
क्रियाविशेषण अव्यय और उसके चार भेद
जो अव्यय क्रिया की विशेषता बताए — अर्थात् क्रिया कब, कहाँ, कैसे या कितनी हुई, यह स्पष्ट करे — वह क्रियाविशेषण अव्यय कहलाता है। जैसे विशेषण संज्ञा की विशेषता बताता है, वैसे ही क्रियाविशेषण क्रिया की विशेषता बताता है। अर्थ के आधार पर इसके चार भेद हैं।
| भेद | क्या बताता है | उदाहरण |
|---|---|---|
| कालवाचक | क्रिया के समय का बोध | अभी, कल, आज, पहले, सदा, नित्य, तुरंत |
| स्थानवाचक | क्रिया के स्थान का बोध | यहाँ, वहाँ, ऊपर, नीचे, भीतर, बाहर, आगे, पीछे |
| रीतिवाचक | क्रिया की रीति या ढंग का बोध | धीरे, तेज़, अचानक, ध्यानपूर्वक, ऐसे, वैसे |
| परिमाणवाचक | क्रिया की मात्रा या परिमाण का बोध | बहुत, थोड़ा, कम, अधिक, ज़रा, इतना |
कालवाचक के उदाहरण
- वह अभी आया।
- कल हम परीक्षा देंगे।
- सूरज सदा पूर्व में उगता है।
- मैं तुरंत लौट आऊँगा।
स्थानवाचक के उदाहरण
- बच्चे यहाँ खेलते हैं।
- पक्षी ऊपर उड़ रहे हैं।
- कुत्ता बाहर बैठा है।
- सेना आगे बढ़ी।
रीतिवाचक के उदाहरण
- वह धीरे-धीरे चलता है।
- घोड़ा तेज़ दौड़ा।
- वर्षा अचानक आरंभ हो गई।
- विद्यार्थी ध्यानपूर्वक सुन रहे थे।
- मैंने बहुत पढ़ा।
- उसने थोड़ा खाया।
- आज कम बोलो।
- ज़रा ठहरिए।
सावधानी: एक ही शब्द संदर्भ बदलने पर विशेषण या क्रियाविशेषण हो सकता है। ‘बहुत पानी है’ में ‘बहुत’ संज्ञा (पानी) की मात्रा बता रहा है — यह विशेषण है; पर ‘वह बहुत दौड़ा’ में ‘बहुत’ क्रिया (दौड़ना) की मात्रा बता रहा है — यह क्रियाविशेषण है। कसौटी सरल है: यह किसकी विशेषता बता रहा है — संज्ञा की या क्रिया की?
संबंधबोधक अव्यय
जो अव्यय संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य के किसी अन्य शब्द से संबंध जोड़ता है, वह संबंधबोधक अव्यय कहलाता है। ये प्रायः संज्ञा के बाद आते हैं और अधिकांशतः ‘के’, ‘की’ या ‘से’ के साथ प्रयुक्त होते हैं — जैसे के ऊपर, के बिना, की ओर।
| अर्थ | संबंधबोधक अव्यय |
|---|---|
| स्थान | के ऊपर, के नीचे, के पास, के सामने, के बीच |
| दिशा | की ओर, के बाहर, के भीतर, के आर-पार |
| साथ | के साथ, के संग, सहित, समेत |
| विरोध | के विरुद्ध, के विपरीत, के खिलाफ़ |
| कारण/परिणाम | के कारण, के फलस्वरूप, के मारे |
| तुलना | की अपेक्षा, के समान, की तरह, की भाँति |
| रहित/सहित | के बिना, के सिवा, के अतिरिक्त |
उदाहरण वाक्य
- पुस्तक मेज़ के ऊपर है।
- पेड़ के नीचे बैठो।
- राम के साथ श्याम गया।
- वर्षा के कारण खेल रुक गया।
- तुम्हारी अपेक्षा वह अधिक परिश्रमी है।
- धन के बिना जीवन कठिन है।
संबंधबोधक बनाम क्रियाविशेषण की पहचान: एक ही शब्द दोनों रूपों में आ सकता है। यदि उस शब्द के साथ कोई संज्ञा/सर्वनाम जुड़ा है तो वह संबंधबोधक है, और यदि वह अकेला क्रिया की विशेषता बता रहा है तो क्रियाविशेषण है। तुलना करें — ‘वह बाहर गया’ (क्रियाविशेषण, स्थान) और ‘वह गाँव के बाहर गया’ (संबंधबोधक, ‘गाँव’ से जुड़ा)।
समुच्चयबोधक अव्यय
जो अव्यय दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को परस्पर जोड़ता है, वह समुच्चयबोधक अव्यय (योजक) कहलाता है। इसके दो भेद हैं।
1. समानाधिकरण समुच्चयबोधक — जो समान स्तर के दो शब्दों या स्वतंत्र वाक्यों को जोड़े। जैसे — और, तथा, एवं, या, अथवा, परंतु, किंतु, पर, लेकिन, अतः, इसलिए।
2. व्यधिकरण समुच्चयबोधक — जो एक मुख्य वाक्य को उस पर आश्रित (अधीन) उपवाक्य से जोड़े। जैसे — कि, क्योंकि, ताकि, जिससे, यदि…तो, यद्यपि…तथापि, चूँकि…इसलिए।
| भेद | प्रमुख योजक | उदाहरण वाक्य |
|---|---|---|
| समानाधिकरण | और, तथा, या, परंतु, इसलिए | राम और श्याम भाई हैं। |
| समानाधिकरण (विकल्प) | या, अथवा | चाय पिओगे या कॉफ़ी? |
| समानाधिकरण (विरोध) | परंतु, किंतु, पर, लेकिन | वह आया परंतु बैठा नहीं। |
| व्यधिकरण (कारण) | क्योंकि, चूँकि | मैं नहीं आया क्योंकि बीमार था। |
| व्यधिकरण (शर्त) | यदि…तो | यदि मेहनत करोगे तो सफल होगे। |
| व्यधिकरण (स्वीकृति) | यद्यपि…तथापि | यद्यपि वह निर्धन है, तथापि ईमानदार है। |
| व्यधिकरण (उद्देश्य) | ताकि, जिससे | जल्दी चलो ताकि गाड़ी न छूटे। |
मूल अंतर समझिए: समानाधिकरण योजक से जुड़े दोनों वाक्य स्वतंत्र रहते हैं — एक को हटाने पर भी दूसरा पूरा अर्थ देता है (‘राम आया’ और ‘श्याम आया’ दोनों पूर्ण हैं)। व्यधिकरण योजक से जुड़ा एक उपवाक्य दूसरे पर आश्रित रहता है — ‘क्योंकि बीमार था’ अकेला अधूरा है।
विस्मयादिबोधक अव्यय और निपात
जो अव्यय हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा, भय, संबोधन आदि मन के अचानक उठे भावों को प्रकट करता है, वह विस्मयादिबोधक अव्यय कहलाता है। इसके बाद सदैव विस्मयादिबोधक चिह्न (!) लगता है, पूर्णविराम नहीं।
| भाव | विस्मयादिबोधक अव्यय |
|---|---|
| हर्ष | वाह!, अहा!, शाबाश!, धन्य! |
| शोक | हाय!, आह!, उफ़!, हे राम! |
| आश्चर्य | अरे!, ओह!, क्या!, अहो! |
| घृणा/तिरस्कार | छि!, धिक्!, थू! |
| भय | बाप रे!, हे भगवान! |
| संबोधन | हे!, अरे!, अजी!, रे! |
| स्वीकृति | हाँ!, जी!, अच्छा!, ठीक! |
उदाहरण
- वाह! कितना सुंदर दृश्य है।
- हाय! वह चला गया।
- अरे! तुम कब आए?
- छि! यह कैसा कार्य है।
- शाबाश! तुमने अच्छा किया।
निपात (अवधारक अव्यय)
निपात वे छोटे अव्यय हैं जो किसी शब्द या वाक्य के साथ जुड़कर उस पर बल देते हैं या विशेष अर्थ-छटा जोड़ते हैं। प्रमुख निपात हैं — ही, भी, तो, तक, मात्र, भर, केवल, सिर्फ़, जी। ये वाक्य का व्याकरणिक ढाँचा नहीं बदलते, केवल अर्थ को सूक्ष्म रूप से प्रभावित करते हैं।
| निपात | अर्थ-प्रभाव | उदाहरण |
|---|---|---|
| ही | सीमा/अवधारण (केवल वही) | राम ही आया। (और कोई नहीं) |
| भी | समावेश (अतिरिक्त) | राम भी आया। (दूसरों के साथ राम भी) |
| तो | बल/शर्त-संकेत | तुम तो चले जाओ। |
| तक | सीमा/चरम | वह बोला तक नहीं। |
| भर | मात्र/केवल | दिन भर सोता रहा। |
‘ही’ और ‘भी’ का अंतर ध्यान देने योग्य है — ‘मुझे ही पता था’ का अर्थ है केवल मुझे; ‘मुझे भी पता था’ का अर्थ है औरों के अलावा मुझे भी।
अव्ययों से जुड़ी सामान्य अशुद्धियाँ
- संबंधबोधक को विभक्ति (कारक-चिह्न) समझ लेना; जबकि ‘के बिना’, ‘की ओर’ स्वतंत्र अव्यय हैं।
- क्रियाविशेषण और विशेषण में भ्रम — क्रियाविशेषण क्रिया की, विशेषण संज्ञा की विशेषता बताता है।
- समानाधिकरण और व्यधिकरण योजक में अंतर न कर पाना।
- विस्मयादिबोधक के बाद पूर्णविराम लगाना; सही चिह्न ‘!’ है।
- अव्यय का रूप बदल देना — अव्यय कभी विभक्ति, लिंग या वचन से नहीं बदलता।
अभ्यास प्रश्न
नीचे दिए प्रश्न हल करें; अंत में उत्तर दिए गए हैं।
अ. रिक्त स्थान भरिए (उपयुक्त अव्यय से)
- वह ______ आया, ______ बैठा नहीं। (योजक)
- पुस्तक मेज़ ______ रखी है। (संबंधबोधक)
- ______ परिश्रम करोगे ______ सफल होगे। (योजक-युग्म)
- ______! कितना मनोहर दृश्य है। (विस्मयादिबोधक)
- राम ______ आया, और कोई नहीं। (निपात)
ब. कोष्ठक के अव्यय का भेद बताइए
- वह धीरे चलता है। ( )
- गाँव के बाहर खेत हैं। ( )
- राम और श्याम मित्र हैं। ( )
- हाय! यह क्या हुआ। ( )
- हम कल जाएँगे। ( )
स. लघु उत्तरीय
- अव्यय किसे कहते हैं? इसके चार भेद उदाहरण सहित बताइए।
- समानाधिकरण और व्यधिकरण समुच्चयबोधक में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- निपात क्या है? ‘ही’ और ‘भी’ के प्रयोग का अंतर उदाहरण सहित लिखिए।
—
उत्तर
- आया परंतु बैठा नहीं।
- मेज़ के ऊपर / पर रखी है।
- यदि परिश्रम करोगे तो सफल होगे।
- वाह! कितना मनोहर दृश्य है।
- राम ही आया।
- रीतिवाचक क्रियाविशेषण अव्यय।
- संबंधबोधक अव्यय (‘गाँव’ से संबंध)।
- समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय।
- विस्मयादिबोधक अव्यय (शोक)।
- कालवाचक क्रियाविशेषण अव्यय।
- जिन शब्दों का रूप लिंग, वचन, पुरुष, कारक, काल से नहीं बदलता वे अव्यय हैं। चार भेद — क्रियाविशेषण (धीरे, यहाँ), संबंधबोधक (के ऊपर), समुच्चयबोधक (और, क्योंकि), विस्मयादिबोधक (वाह!, हाय!)।
- समानाधिकरण योजक समान स्तर के स्वतंत्र शब्द/वाक्य जोड़ता है (राम और श्याम); व्यधिकरण योजक मुख्य वाक्य को उस पर आश्रित उपवाक्य से जोड़ता है (मैं नहीं आया क्योंकि बीमार था)।
- निपात वे अव्यय हैं जो शब्द/वाक्य पर बल देते हैं — ही, भी, तो, तक। ‘राम ही आया’ = केवल राम; ‘राम भी आया’ = औरों के साथ राम भी।
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