होमगार्ड: पुलिस का स्वयंसेवी सहायक बल, राज्यों के कानून और सिविल डिफेंस से रिश्ता
होमगार्ड की पूरी तस्वीर: 1946 में बॉम्बे से शुरुआत, राज्यों के होमगार्ड अधिनियम, ड्यूटी भत्ते पर अदालती फैसले, बॉर्डर विंग बटालियनें और सिविल डिफेंस से रिश्ता।
होमगार्ड एक प्रशिक्षित नागरिक स्वयंसेवक होता है, जो पुलिस के सहायक के रूप में काम करता है। वह, चाहे पुरुष हो या महिला, वर्दी तभी पहनता है जब राज्य उसे ड्यूटी पर बुलाता है। पहले होमगार्ड का गठन दिसंबर 1946 में बॉम्बे में हुआ था। मकसद था आजादी की दहलीज पर पुलिस को नागरिक अशांति और सांप्रदायिक दंगों से निपटने में मदद देना। आज हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश अपने होमगार्ड अपने राज्य के कानून के तहत चलाता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय नीति तय करता है और खर्च का एक हिस्सा उठाता है। इसी व्यवस्था से कोई जिला चुनाव या बाढ़ के वक्त जमीन पर अतिरिक्त प्रशिक्षित हाथ उतार पाता है, और उसे कोई स्थायी पद नहीं बनाना पड़ता।
ज्यादातर पाठक होमगार्ड को या तो पुलिस के खाते में डाल देते हैं या अर्धसैनिक बलों के खाते में। दोनों खाते गलत हैं। होमगार्ड सरकारी कर्मचारी नहीं है, और उसे वेतन नहीं मिलता। कानून उसे पुलिस की शक्तियाँ सिर्फ तभी देता है, जब उसे ड्यूटी पर बुलाया गया हो। और होमगार्ड का कोई केंद्रीय अधिनियम है ही नहीं, सिर्फ राज्यों के अधिनियम हैं। होमगार्ड पर लगभग हर गलत उत्तर इन्हीं रेखाओं को धुंधला करने से निकलता है, इसलिए आगे का नोट इन्हें अलग-अलग रखता है।
होमगार्ड क्या हैं?
होमगार्ड एक स्वयंसेवी बल है। हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इसे अपने होमगार्ड अधिनियम और नियमों के तहत खड़ा करता है, ताकि यह पुलिस का साथ दे और आपात स्थिति में लोगों की मदद करे। गृह मंत्रालय (MHA) अपने अग्निशमन सेवा, सिविल डिफेंस और होमगार्ड महानिदेशालय के जरिए नीति बनाता है। सिविल डिफेंस को हिंदी में नागरिक सुरक्षा (civil defence) भी कहते हैं। लेकिन बल का रोज का कामकाज, भर्ती से लेकर ड्यूटी पर बुलाने तक, राज्य के स्तर पर ही होता है।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| पहला गठन | दिसंबर 1946, बॉम्बे में, नागरिक अशांति और सांप्रदायिक दंगों के दौरान पुलिस की मदद के लिए |
| स्थापना दिवस | 6 दिसंबर, होमगार्ड और सिविल डिफेंस का सालाना दिवस |
| स्वरूप | स्वयंसेवी बल, पुलिस का सहायक, ग्रामीण और शहरी इकाइयों के साथ |
| कानूनी आधार | राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के होमगार्ड अधिनियम और नियम; बॉम्बे होमगार्ड अधिनियम, 1947 शुरुआती मॉडल है |
| केंद्रीय तालमेल | अग्निशमन सेवा, सिविल डिफेंस और होमगार्ड महानिदेशालय, गृह मंत्रालय (इसका सिविल डिफेंस महानिदेशालय 1962 से है) |
| राज्य में प्रमुख | राज्य सरकार की ओर से नियुक्त कमांडेंट जनरल |
| संख्या | 5,73,793 स्वीकृत; 4,33,803 भर्ती, महानिदेशालय की प्रकाशित गिनती के अनुसार |
| बॉर्डर विंग | सीमावर्ती राज्यों में 18 बटालियनें, BSF के सहायक के रूप में |
| भुगतान | ड्यूटी पर बुलाए गए हर दिन का ड्यूटी भत्ता, वेतन नहीं |
संख्या वाली पंक्ति दोबारा पढ़िए। करीब 1.4 लाख स्वीकृत पद खाली पड़े हैं। यानी यह बल इस पर टिका है कि कौन अपनी मर्जी से आगे आता है, इस पर नहीं कि राज्य किसे नौकरी पर रखता है। यह आँकड़ा महानिदेशालय के अपने पेज की पुरानी गिनती है, और भर्ती की संख्या हर साल बदलती है। इसलिए इसे पैमाने का संकेत मानिए, आज की पक्की सूची नहीं।
होमगार्ड की स्थापना कब हुई?
होमगार्ड की स्थापना दिसंबर 1946 में बॉम्बे में हुई थी। पहली इकाई का गठन 6 दिसंबर को हुआ, और यही तारीख आज पूरा देश स्थापना दिवस (Raising Day) के रूप में मनाता है। असम का महानिदेशालय इस गठन को आजादी की पूर्व संध्या पर रखता है, जब माहौल में नागरिक अशांति और सांप्रदायिक दंगे थे।
नाम ब्रिटेन से आया। दिल्ली का होमगार्ड निदेशालय इस विचार की जड़ उस स्वयंसेवी नागरिक बल में बताता है, जिसे ब्रिटेन ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अपने ही इलाकों की रखवाली के लिए खड़ा किया था। लेकिन बॉम्बे में काम शुरू से अलग था: दंगों में पुलिस की मदद करना। इसीलिए यह बल आज भी सबसे पहले पुलिस का सहायक है, और युद्ध के समय का रिजर्व सिर्फ सीमा वाले इलाके में।
इसका फैलाव कई चरणों में हुआ, और इन तारीखों को क्रम से याद कर लेना चाहिए:
- 1946: बॉम्बे प्रेसीडेंसी में पहली इकाई का गठन होता है।
- 1947: बॉम्बे होमगार्ड अधिनियम, 1947 और असम होमगार्ड अधिनियम, 1947 इस विचार को कानूनी आधार देते हैं।
- 1959: बॉम्बे अधिनियम दिल्ली पर लागू किया जाता है, और दिल्ली होमगार्ड नियम बनाए जाते हैं।
- 1962: चीनी आक्रमण के बाद केंद्र सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सलाह देता है कि वे अपने स्वयंसेवी संगठनों को मिलाकर होमगार्ड नाम का एक समान बल बना लें। उसी साल गृह मंत्रालय में सिविल डिफेंस महानिदेशालय बनता है, और 18 अक्टूबर 1962 की एक अधिसूचना बॉम्बे अधिनियम को त्रिपुरा पर लागू करती है।
1962 वाला कदम समझना सबसे जरूरी है। उससे पहले यह नाम ऐसे स्थानीय प्रयोगों पर लगता था, जो हर प्रांत में अलग थे। उसके बाद इस नाम का मतलब हो गया हर जगह एक ही तरह का संगठन। इसका आदर्श वाक्य है निष्काम सेवा, यानी बिना स्वार्थ की सेवा।
होमगार्ड किस कानून से चलते हैं?
होमगार्ड के लिए कोई एक केंद्रीय कानून नहीं है। लोक व्यवस्था और पुलिस सातवीं अनुसूची की राज्य सूची में प्रविष्टि 1 और 2 के रूप में दर्ज हैं। इसलिए हर राज्य अपने होमगार्ड अपने अधिनियम और नियमों के तहत खड़ा करता है। केंद्र की भूमिका नीति बनाने और खर्च बाँटने तक है: वह इस बल पर मंजूर खर्च के 25% की भरपाई करता है, और असम को छोड़कर पूर्वोत्तर राज्यों में 50% की।
बॉम्बे होमगार्ड अधिनियम, 1947 क्या इजाजत देता है
बॉम्बे का कानून (1947 का अधिनियम III) ही सबसे पहले पढ़ने लायक है, क्योंकि दूसरे राज्यों ने इसी को अपने यहाँ लागू किया या इसकी नकल की। इसका दिल्ली वाला पाठ कुछ छोटी धाराओं में पूरा ढाँचा सामने रख देता है:
- धारा 2: सरकार लोगों और संपत्ति की रक्षा और जनता की सुरक्षा के लिए होमगार्ड नाम का एक स्वयंसेवी संगठन बनाती है, और उसकी निगरानी के लिए एक कमांडेंट जनरल नियुक्त करती है।
- धारा 3: सदस्य ऐसे लोग होते हैं जो “सेवा के लिए योग्य और इच्छुक” हों। उन्हें कमांडेंट नियुक्त करता है, लेकिन कमांडेंट जनरल की मंजूरी से।
- धारा 4: कमांडेंट किसी सदस्य को प्रशिक्षण या ड्यूटी के लिए बुला सकता है, और आपात स्थिति में कमांडेंट जनरल कहीं भी ऐसा कर सकता है।
- धारा 5: बुलाए जाने के बाद सदस्य के पास पुलिस अधिकारी जैसी ही शक्तियाँ और सुरक्षा होती हैं। ड्यूटी पर किए गए काम के लिए उस पर मुकदमा सिर्फ जिला मजिस्ट्रेट की पहले से ली गई मंजूरी से ही चल सकता है।
- धारा 6: पुलिस की मदद के लिए बुलाए गए सदस्य, नियमों में बताए तरीके से, पुलिस अधिकारियों के नियंत्रण में काम करते हैं।
- धारा 7: बिना उचित कारण बुलावे से इनकार करने पर 3 महीने तक की साधारण कैद, या ₹250 तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
पूरा अधिनियम एक ही विचार पर घूमता है: कॉल-आउट, यानी वह आदेश जो एक स्वयंसेवक को आम नागरिक से ड्यूटी वाले व्यक्ति में बदल देता है। आदेश से पहले होमगार्ड बस एक प्रशिक्षित नागरिक है, जिसके पास पुलिस की कोई शक्ति नहीं। आदेश के बाद वही व्यक्ति भीड़ संभाल सकता है या किसी मतदान केंद्र की रखवाली कर सकता है, और उसे सिपाही जैसा कानूनी कवच मिलता है। ड्यूटी खत्म होते ही शक्तियाँ भी खत्म हो जाती हैं।
दूसरे राज्यों के कानून
दूसरे राज्यों ने दो में से एक रास्ता चुना। कुछ ने अपना अलग कानून पास किया, जैसे असम होमगार्ड अधिनियम, 1947, जिसे बाद में मेघालय ने अपनाया। कुछ ने बॉम्बे का कानून ही अपने यहाँ लागू कर लिया, जैसा दिल्ली और त्रिपुरा ने किया। इंडिया कोड अब खुद बॉम्बे वाले कानून को महाराष्ट्र होमगार्ड अधिनियम के नाम से दिखाता है। ये कानून दिखने में एक जैसे हैं, लेकिन ब्योरे में अलग हैं। इसीलिए गृह मंत्रालय ने एक समिति बनाई है, जो होमगार्ड की स्थिति की समीक्षा करेगी और राज्यों के लिए नए सिरे से मॉडल होमगार्ड विधेयक का मसौदा तैयार करेगी।
होमगार्ड ड्यूटी में क्या-क्या आता है?
होमगार्ड ड्यूटी वह हर काम है, जिसके लिए राज्य किसी स्वयंसेवक को बुलाता है, बशर्ते वह गृह मंत्रालय की तय भूमिकाओं के भीतर हो। मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट ये भूमिकाएँ गिनाती है:
- कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने में राज्य पुलिस के सहायक के रूप में काम करना;
- किसी भी आपात स्थिति में समुदाय की मदद करना, हवाई हमले या आग से लेकर चक्रवात या महामारी तक;
- जरूरी सेवाओं को चालू रखने में मदद करना;
- सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ाना, और कमजोर वर्गों की रक्षा में प्रशासन की मदद करना;
- सामाजिक-आर्थिक और कल्याण से जुड़े कामों में हिस्सा लेना;
- सिविल डिफेंस की ड्यूटी निभाना।
मतदान वाले दिन किसी जिले की कल्पना कीजिए। थाने में उसकी नियमित संख्या मौजूद है, लेकिन चुनाव को उससे ज्यादा हाथ चाहिए। कमांडेंट भर्ती किए गए स्वयंसेवकों को कॉल-आउट के आदेश जारी करता है। उसी पल से वे पुलिस अधिकारियों के तहत काम करते हैं, और उनके पास पुलिस की शक्तियाँ और सुरक्षा होती है। मतदान खत्म होते ही ये शक्तियाँ खत्म हो जाती हैं। स्वयंसेवक अपने काम-धंधे और खेतों पर लौट जाते हैं, और हर एक को काम किए गए दिनों का ड्यूटी भत्ता मिलता है।
यह बल दो तरह का है, ग्रामीण और शहरी, और सेवा के साथ-साथ प्रशिक्षण भी बढ़ता जाता है। मेघालय अपने स्वयंसेवकों को जिला केंद्रों पर 40 से 45 दिन तक प्रशिक्षण देता है। 3 साल की सेवा पूरी कर चुके सदस्यों के लिए महानिदेशालय आगे का प्रशिक्षण इन विषयों में गिनाता है:
- पुलिसिंग, कानून-व्यवस्था और अपराध की रोकथाम;
- डकैती-रोधी उपाय और सीमा पर गश्त;
- बाढ़ राहत, आग बुझाना और चुनाव ड्यूटी।
यही फैलाव होमगार्ड को समुदाय-आधारित आपदा प्रबंधन के लिए काम का बनाता है, जहाँ मौके पर पहले से मौजूद लोग सबसे पहले मदद के लिए आगे आते हैं।
बॉर्डर विंग होमगार्ड कौन हैं?
बॉर्डर विंग होमगार्ड (BWHG) होमगार्ड की वे बटालियनें हैं, जिन्हें सीमावर्ती राज्यों में सीमा सुरक्षा बल के सहायक के रूप में काम करने के लिए खड़ा किया गया है। गृह मंत्रालय की 2024-25 की सालाना रिपोर्ट ऐसी 18 बटालियनें गिनाती है, जिन्हें सीमा के गाँवों को मजबूत करने और सीमा वाले इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए खड़ा किया गया है, और इनसे BSF को एक प्रशिक्षित स्थानीय रिजर्व मिलता है।
महानिदेशालय की पुरानी सूची 15 बटालियनों की है, और वह दिखाती है कि ये कहाँ तैनात हैं:
- पंजाब: 6 बटालियनें;
- राजस्थान: 4 बटालियनें;
- गुजरात: 2 बटालियनें;
- मेघालय, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल: हर राज्य में 1 बटालियन।
सालाना रिपोर्ट यह नहीं बताती कि 3 नई बटालियनें कहाँ गईं, इसलिए यही रिकॉर्ड पर मौजूद आखिरी बँटवारा है।
बाहरी आक्रमण की स्थिति में महानिदेशालय BWHG बटालियनों को 3 काम सौंपता है:
- अंतरराष्ट्रीय सीमा पर और तटीय इलाकों में घुसपैठ रोकना;
- अहम इलाकों और अहम ठिकानों की रखवाली करना;
- संवेदनशील इलाकों में संचार लाइनों की रखवाली करना।
राजस्थान की 4 बटालियनें उसके सीमावर्ती जिलों में तैनात हैं, पश्चिम में बाड़मेर और जैसलमेर से लेकर थोड़ा उत्तर में बीकानेर और श्रीगंगानगर तक। राज्य के मुताबिक इनकी मुख्य भूमिका यह है कि युद्ध छिड़ने पर ये सेना के साथ मिलकर अहम प्रतिष्ठानों की रखवाली करें। शांति के समय यही स्वयंसेवक जेलों से लेकर राजस्थान हाई कोर्ट तक, कई तरह की जगहों पर सुरक्षा ड्यूटी करते हैं, और कानून-व्यवस्था में पुलिस का हाथ बँटाते हैं।
इसकी सीमा साफ है। स्वयंसेवकों की बटालियन किसी पुल या टेलीफोन एक्सचेंज की रखवाली कर सकती है, लेकिन वह किसी सेना के सामने मोर्चा संभालने के लिए नहीं बनी। वह काम BSF और सेना का ही रहता है।
होमगार्ड और सिविल डिफेंस का आपस में क्या रिश्ता है?
होमगार्ड और सिविल डिफेंस एक ही केंद्रीय महानिदेशालय के तहत आने वाले बहन संगठन हैं, लेकिन दोनों अलग-अलग कानूनों पर खड़े हैं। होमगार्ड राज्यों के होमगार्ड अधिनियमों पर टिके हैं और पुलिस का साथ देते हैं। सिविल डिफेंस केंद्र के सिविल डिफेंस अधिनियम, 1968 पर टिका है। यह शत्रुतापूर्ण हमले (hostile attack) से लोगों और संपत्ति को बचाता है, और 2010 से आपदाओं के दौरान भी यही काम करता है।
यह अधिनियम (1968 का अधिनियम 27, दिनांक 24 मई 1968) सिविल डिफेंस को ऐसे उपायों के रूप में परिभाषित करता है, जो “वास्तविक लड़ाई की हद तक नहीं पहुँचते”। ये उपाय भारत में किसी भी व्यक्ति, संपत्ति, जगह या चीज को शत्रुतापूर्ण हमले से बचाते हैं, या उसका असर कम करते हैं। सिविल डिफेंस (संशोधन) अधिनियम, 2009 को लोकसभा ने 18 दिसंबर 2009 को और राज्यसभा ने 22 दिसंबर 2009 को पास किया। इस संशोधन ने 21 जनवरी 2010 से इस परिभाषा में आपदा प्रबंधन जोड़ दिया। आपदा और आपदा प्रबंधन के अर्थ इसने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 से लिए, यानी उसी कानून से जिस पर NDRF टिका है।
अधिनियम की धारा 4 राज्य को किसी भी इलाके के लिए एक सिविल डिफेंस कोर बनाने की छूट देती है। इसकी कमान एक नियंत्रक (Controller) के हाथ में होती है, जो जिला मजिस्ट्रेट से नीचे के रैंक का नहीं हो सकता। एक शर्त वाला प्रावधान राज्य को यह छूट भी देता है कि वह नया संगठन खड़ा करने के बजाय कोर के काम उस इलाके में पहले से मौजूद किसी संगठन को सौंप दे।
दोनों संगठन 3 जगहों पर मिलते हैं:
- होमगार्ड की आधिकारिक भूमिका में सिविल डिफेंस की ड्यूटी निभाना शामिल है।
- दोनों 6 दिसंबर को अपना सालाना दिवस मनाते हैं।
- कई राज्य दोनों को एक ही दफ्तर से चलाते हैं, जैसे असम और मेघालय अपने सिविल डिफेंस और होमगार्ड निदेशालयों के जरिए चलाते हैं।
फिर भी दोनों का पैमाना अलग है। गृह मंत्रालय ने सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों का लक्ष्य 14.11 लाख रखा है, जिनमें से 5.38 लाख भर्ती हो चुके हैं। दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग ने संकट प्रबंधन पर अपनी 3री रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि शत्रुतापूर्ण हमले या प्राकृतिक आपदा के खतरे वाले हर जिले में सिविल डिफेंस हो। अब तक 295 सिविल डिफेंस जिले और कस्बे अधिसूचित हो चुके हैं। पूरी व्यवस्था भारत में आपदा प्रबंधन वाले नोट में समझाई गई है।
क्या होमगार्ड को वेतन मिलता है? ड्यूटी भत्ता और अदालतें
होमगार्ड को वेतन नहीं मिलता। उन्हें ड्यूटी पर बुलाए गए हर दिन के लिए ड्यूटी भत्ता मिलता है, और 2015 से सुप्रीम कोर्ट ने इस भत्ते को राज्य के पुलिसकर्मियों के न्यूनतम वेतन से जोड़ रखा है। होमगार्ड ड्यूटी भत्ता आज जहाँ खड़ा है, वहाँ तक वह इन फैसलों के क्रम से पहुँचा:
- 11 मार्च 2015: गृह रक्षक, होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने होमगार्ड को नियमित करने से इनकार कर दिया। लेकिन उसने राज्यों को निर्देश दिया कि वे ऐसा ड्यूटी भत्ता दें, जिसका 30 दिन का कुल जोड़ कम से कम राज्य के पुलिसकर्मियों के न्यूनतम वेतन के बराबर हो।
- 2016: 4 मई के एक स्पष्टीकरण आदेश ने इस न्यूनतम वेतन का मतलब मूल वेतन + ग्रेड पे + महंगाई भत्ता + धुलाई भत्ता बताया। फिर 16 सितंबर को गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से इसका पालन करने को कहा।
- 17 मार्च 2023: प्रकाश कुमार जेना बनाम ओडिशा राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के होमगार्ड के लिए ₹533 प्रतिदिन के ड्यूटी कॉल-अप भत्ते को सही ठहराया, और साथ में 1 जून 2018 से बकाया भी दिलाया।
- 10 मार्च 2026: गुजरात हाई कोर्ट ने गुजरात को निर्देश दिया कि वह एक महीने के भीतर अपना दैनिक भत्ता ₹450 से बढ़ाकर राज्य के पुलिसकर्मियों के न्यूनतम वेतन तक ले जाए।
यह फॉर्मूला दिन के हिसाब से भुगतान करता है, और ज्यादातर सारांश यही हिस्सा छोड़ देते हैं। ₹533 प्रतिदिन का मतलब पूरे 30 दिन के महीने में ₹15,990 है, लेकिन 10 दिन के लिए बुलाए गए स्वयंसेवक को ₹5,330 ही मिलते हैं। अदालतों ने दर तय की है, दिनों की संख्या नहीं। इसलिए महीने की कमाई अब भी इस पर निर्भर है कि राज्य अपने स्वयंसेवकों को कितनी बार बुलाता है।
ओडिशा का मामला इस व्यवस्था के भीतर का तनाव भी दिखाता है। अदालत ने दर्ज किया कि राज्य में 17,765 होमगार्ड काम कर रहे थे, और उनमें से कुछ 10 से 15 साल से सेवा दे रहे थे। यह 1947 के कानून की कल्पना वाले कभी-कभार के स्वयंसेवक से बहुत दूर की तस्वीर है। जब कोई राज्य लगभग नियमित काम के लिए स्वयंसेवकों पर टिक जाता है, तो वेतन का सवाल फिर अदालत पहुँच जाता है। इसीलिए भारत में पुलिस सुधार की किसी भी चर्चा में होमगार्ड की जगह बनती है।
होमगार्ड आज: 2024 से 2026 तक के घटनाक्रम
2024 के बाद से कानूनी स्थिति नहीं बदली है, लेकिन होमगार्ड पहले से ज्यादा नजर आए हैं, और वह भी ज्यादातर सिविल डिफेंस के जरिए:
- 22 अक्टूबर 2024: होमगार्ड और सिविल डिफेंस का 14वाँ अखिल भारतीय वार्षिक सम्मेलन गांधीनगर में केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में हुआ।
- 16 नवंबर 2024: केंद्र ने सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण के लिए ₹115.67 करोड़ की परियोजना मंजूर की, जिसका पैसा राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष से आना है।
- 7 मई 2025: देश भर के 244 जिलों में सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल हुईं, जिनमें होमगार्ड ने सिविल डिफेंस वार्डनों और छात्र स्वयंसेवकों के साथ काम किया।
- 9 मई 2025: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अग्निशमन सेवा, सिविल डिफेंस और होमगार्ड के महानिदेशक ने मुख्य सचिवों को सिविल डिफेंस नियम, 1968 की धारा 11 की याद दिलाई। यह धारा शत्रुतापूर्ण हमले की स्थिति में राज्यों को बचाव के उपाय करने की छूट देती है।
- 31 मई 2025: इसके बाद पंजाब में ऑपरेशन शील्ड नाम की एक और ड्रिल हुई, जिसमें होमगार्ड और सिविल डिफेंस की इकाइयाँ शामिल थीं।
- 15 अगस्त 2026: प्रधानमंत्री ने एक देशव्यापी स्वयंसेवी सिविल डिफेंस नेटवर्क की घोषणा की, जिसका निशाना बुनियादी ढाँचे पर ड्रोन और साइबर घटनाओं जैसे नए खतरे हैं। इसका ब्योरा, मुख्य मंत्रालय से लेकर स्वयंसेवकों की संख्या तक, अभी अधिसूचित नहीं हुआ है।
पुरानी समस्याएँ अब भी बनी हुई हैं:
- भर्ती का अंतर: महानिदेशालय की गिनती के हिसाब से करीब 1.4 लाख स्वीकृत पद खाली हैं।
- भुगतान: जब किसी राज्य की दैनिक दर सुप्रीम कोर्ट के फॉर्मूले से कम पड़ती है, तो मामले अदालतों तक पहुँचते रहते हैं, 2023 में ओडिशा से लेकर 2026 में गुजरात तक।
- असमान कानून: हर राज्य का अधिनियम ब्योरे में अलग है, और प्रस्तावित मॉडल होमगार्ड विधेयक इसी को ठीक करने के लिए है।
- स्वयंसेवक या कर्मचारी: लंबे समय से सेवा दे रहे होमगार्ड नियमित पुलिस वाला काम करते हैं, लेकिन उनके पास किसी पद की सुरक्षा नहीं होती।
भर्ती हुए होमगार्ड की कोई ताजा राज्यवार सार्वजनिक गिनती भी नहीं है। इसलिए किसी एक राज्य में कमी का दावा करना हो, तो उसी राज्य के अपने आँकड़े देखने होंगे।
परीक्षा के लिए होमगार्ड कैसे पढ़ें
UPSC में होमगार्ड GS पेपर III में आते हैं, विभिन्न सुरक्षा बलों, एजेंसियों और उनके अधिदेश वाले हिस्से में, और आपदा प्रबंधन में भी। राज्य के विषय के रूप में पुलिस के जरिए इनका एक सिरा GS पेपर II से भी जुड़ता है। इन्हें उन आंतरिक सुरक्षा बलों और एजेंसियों के साथ पढ़िए, जिन्हें आप पहले से जानते हैं, किसी अलग डिब्बे में बंद करके नहीं।
2013 से 2026 तक मुख्य परीक्षा का कोई भी प्रश्न सीधे होमगार्ड का नाम नहीं लेता। यह विषय बड़े प्रश्नों के भीतर आता है। मुख्य परीक्षा 2016 के GS पेपर III में पूछा गया था “कठिन भूभाग और कुछ देशों के साथ शत्रुतापूर्ण संबंधों के कारण सीमा प्रबंधन एक जटिल काम है। प्रभावी सीमा प्रबंधन की चुनौतियों और रणनीतियों को स्पष्ट कीजिए।“, और बॉर्डर विंग होमगार्ड यहाँ सीमा बल के पीछे खड़ी स्थानीय ताकत का तैयार उदाहरण हैं। मुख्य परीक्षा 2026 के GS पेपर III ने उम्मीदवारों से आपदा प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी का विश्लेषण करने को कहा। वह प्रश्न नीचे के अभ्यास सेट में है, और होमगार्ड उसमें सीधे फिट होते हैं।
इन तथ्यों को दोहराइए:
- बॉम्बे में पहला गठन दिसंबर 1946 में; स्थापना दिवस 6 दिसंबर।
- 1962 में चीनी आक्रमण के बाद केंद्र ने राज्यों को सलाह दी कि वे अपने स्वयंसेवी संगठनों को मिलाकर होमगार्ड नाम का एक समान बल बना लें।
- गठन राज्यों के होमगार्ड अधिनियमों के तहत होता है; बॉम्बे मॉडल में बुलाए गए सदस्य को पुलिस की शक्तियाँ और सुरक्षा मिलती है (धारा 5)।
- तालमेल MHA का अग्निशमन सेवा, सिविल डिफेंस और होमगार्ड महानिदेशालय करता है; केंद्र खर्च के 25% की भरपाई करता है (असम को छोड़कर पूर्वोत्तर में 50%)।
- बॉर्डर विंग होमगार्ड की 18 बटालियनें BSF के सहायक के रूप में काम करती हैं।
- गृह रक्षक (11 मार्च 2015) फैसले ने नियमितीकरण से इनकार किया, लेकिन ऐसा ड्यूटी भत्ता तय किया जो 30 दिन में राज्य पुलिसकर्मियों के न्यूनतम वेतन के बराबर बैठे।
- सिविल डिफेंस अधिनियम, 1968 सिविल डिफेंस पर लागू होता है, होमगार्ड पर नहीं, और इसके 2009 के संशोधन ने आपदा प्रबंधन जोड़ा।
इन जोड़ियों को अलग-अलग रखिए:
- होमगार्ड बनाम सिविल डिफेंस: कानून अलग (राज्यों के अधिनियम बनाम सिविल डिफेंस अधिनियम, 1968) और काम अलग (पुलिस का सहायक बनाम बचाव और राहत), लेकिन केंद्रीय महानिदेशालय एक ही।
- होमगार्ड बनाम CAPF: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल अपने-अपने अधिनियमों के तहत चलने वाले पूर्णकालिक केंद्रीय बल हैं; होमगार्ड राज्यों के स्वयंसेवक हैं।
- बॉर्डर विंग होमगार्ड बनाम BSF: BWHG बटालियनें राज्यों की स्वयंसेवी इकाइयाँ हैं, जो BSF का साथ देती हैं; वे उसका हिस्सा नहीं हैं।
- 1946 बनाम 1962: 1946 पहला गठन है; 1962 एक समान बल में राष्ट्रीय विलय है।
| संगठन | कानूनी आधार | नियंत्रण | कौन सेवा देता है | भुगतान |
|---|---|---|---|---|
| होमगार्ड | राज्यों के होमगार्ड अधिनियम और नियम | राज्य सरकारें; नीति MHA तय करता है | जरूरत पड़ने पर बुलाए जाने वाले स्वयंसेवक | प्रतिदिन का ड्यूटी भत्ता |
| सिविल डिफेंस कोर | सिविल डिफेंस अधिनियम, 1968 | राज्य सरकारें, केंद्रीय नीति के तहत | स्वयंसेवक, साथ में वेतन पाने वाला एक छोटा स्थायी दस्ता | ड्यूटी या प्रशिक्षण भत्ता |
| BSF | सीमा सुरक्षा बल अधिनियम, 1968 | MHA | पूर्णकालिक कर्मी | वेतन |
| प्रादेशिक सेना | प्रादेशिक सेना अधिनियम, 1948 | रक्षा मंत्रालय | अपने नागरिक करियर वाले लोग, जो अंशकालिक सेवा देते हैं | प्रशिक्षण या सेवा के लिए बुलाए जाने पर भुगतान |
| NDRF | आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 | MHA | 16 बटालियनों में पूर्णकालिक कर्मी | वेतन |
होमगार्ड उस अभ्यर्थी को इनाम देते हैं, जो सूची से पहले कानून पढ़ता है। एक बार आप यह देख लें कि कॉल-आउट एक नागरिक को एक दिन के लिए पुलिस का सहायक बना देता है, और सुप्रीम कोर्ट उस दिन की कीमत तय करता है, तो स्वयंसेवकों, सीमा के गाँवों या आपदा राहत पर किसी भी उत्तर के लिए आपके पास एक ठोस उदाहरण तैयार रहता है। यही बात इस छोटे-से विषय को एक घंटा देने लायक बनाती है।
सामान्य प्रश्न
होमगार्ड क्या होता है?
होम गार्ड एक प्रशिक्षित नागरिक स्वयंसेवक है, जो पुलिस के सहायक के रूप में काम करता है और बाढ़ या आग जैसी आपात स्थितियों में मदद करता है। होमगार्ड को राज्य सरकारें राज्यों के होमगार्ड अधिनियमों के तहत भर्ती करती हैं। उनके पास पुलिस की शक्तियाँ सिर्फ तभी होती हैं, जब उन्हें ड्यूटी पर बुलाया गया हो।
भारत में होमगार्ड की स्थापना कब हुई?
होमगार्ड का पहला गठन दिसंबर 1946 में बॉम्बे में हुआ था, ताकि पुलिस नागरिक अशांति और सांप्रदायिक दंगों पर काबू पा सके। 6 दिसंबर के उस गठन को हर साल स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। 1962 में चीनी आक्रमण के बाद केंद्र ने सभी राज्यों को सलाह दी कि वे अपने स्वयंसेवी संगठनों को मिलाकर होमगार्ड नाम का एक समान बल बना लें।
क्या होमगार्ड सरकारी कर्मचारी होता है?
नहीं। होमगार्ड एक स्वयंसेवक है, और 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने होमगार्ड को सरकारी कर्मचारी के रूप में नियमित करने से इनकार कर दिया था। उन्हें ड्यूटी पर बुलाए गए दिनों का ड्यूटी भत्ता मिलता है, हर महीने का वेतन नहीं।
होमगार्ड ड्यूटी क्या है?
होमगार्ड ड्यूटी वह कोई भी काम है, जिसके लिए राज्य के होमगार्ड अधिनियम के तहत किसी स्वयंसेवक को बुलाया जाता है, और आमतौर पर यह पुलिस की मदद के लिए होता है। इसमें चुनाव में पुलिस का साथ देने से लेकर आपदा राहत में हाथ बँटाने तक सब आता है। बुलाए जाने के दौरान स्वयंसेवक के पास पुलिस अधिकारी जैसी ही शक्तियाँ और सुरक्षा होती हैं।
होमगार्ड और सिविल डिफेंस में क्या अंतर है?
होमगार्ड का गठन राज्यों के होमगार्ड अधिनियमों के तहत होता है, और वे मुख्य रूप से पुलिस के सहायक के रूप में काम करते हैं। सिविल डिफेंस केंद्र के सिविल डिफेंस अधिनियम, 1968 के तहत संगठित है। इसका काम शत्रुतापूर्ण हमले से लोगों और संपत्ति को बचाना है, और 2010 से आपदाओं के दौरान भी। दोनों की निगरानी गृह मंत्रालय का एक ही महानिदेशालय करता है, और दोनों 6 दिसंबर को अपना सालाना दिवस मनाते हैं।
होमगार्ड की देखरेख कौन-सा मंत्रालय करता है?
होमगार्ड को राज्य सरकारें खड़ा करती हैं और चलाती हैं, क्योंकि पुलिस और लोक व्यवस्था राज्य के विषय हैं। गृह मंत्रालय अपने अग्निशमन सेवा, सिविल डिफेंस और होमगार्ड महानिदेशालय के जरिए नीति बनाता है, और खर्च के एक हिस्से की भरपाई करता है।
बॉर्डर विंग होमगार्ड क्या हैं?
बॉर्डर विंग होमगार्ड, होमगार्ड की वे बटालियनें हैं जिन्हें सीमावर्ती राज्यों में सीमा सुरक्षा बल के सहायक के रूप में काम करने के लिए खड़ा किया गया है। गृह मंत्रालय की 2024-25 की सालाना रिपोर्ट ऐसी 18 बटालियनें गिनाती है। युद्ध के समय ये घुसपैठ रोकने में मदद करती हैं, और अहम ठिकानों और संचार लाइनों की रखवाली करती हैं।
होमगार्ड को प्रतिदिन कितना भुगतान मिलता है?
दैनिक दर हर राज्य में अलग है। सुप्रीम कोर्ट के 2015 के फैसले के तहत 30 दिन का ड्यूटी भत्ता जोड़ने पर कम से कम राज्य के पुलिसकर्मियों के न्यूनतम वेतन के बराबर होना चाहिए। उदाहरण के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में ओडिशा के लिए ₹533 प्रतिदिन को सही ठहराया, और 2026 में गुजरात हाई कोर्ट ने गुजरात को अपनी ₹450 की दैनिक दर बढ़ाने का आदेश दिया।
अभ्यास प्रश्न
प्रीलिम्स MCQ
1. भारत में होमगार्ड के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इनका पहला गठन दिसंबर 1946 में बॉम्बे में हुआ था। 2. इनका गठन सिविल डिफेंस अधिनियम, 1968 के तहत होता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (a) होमगार्ड का गठन राज्यों के होमगार्ड अधिनियमों के तहत होता है; सिविल डिफेंस अधिनियम, 1968 सिविल डिफेंस कोर पर लागू होता है।
2. बॉर्डर विंग होमगार्ड बटालियनें किस बल के सहायक के रूप में काम करती हैं?
- (a) भारत-तिब्बत सीमा पुलिस
- (b) सीमा सुरक्षा बल
- (c) असम राइफल्स
- (d) सशस्त्र सीमा बल
उत्तर: (b) गृह मंत्रालय सीमावर्ती राज्यों की बॉर्डर विंग होमगार्ड बटालियनों को BSF का सहायक बताता है।
3. बॉम्बे होमगार्ड अधिनियम, 1947 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बुलाए जाने पर होमगार्ड के सदस्य के पास पुलिस अधिकारी जैसी ही शक्तियाँ और सुरक्षा होती हैं। 2. ड्यूटी पर किए गए कामों के लिए किसी सदस्य पर मुकदमा सिर्फ जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व मंजूरी से ही चलाया जा सकता है। 3. यह अधिनियम हर सदस्य के लिए मासिक वेतन तय करता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 2 और 3
- (c) केवल 1 और 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a) धारा 5 शक्तियाँ भी देती है और मंजूरी वाला नियम भी; होमगार्ड को ड्यूटी भत्ता मिलता है, वेतन नहीं।
4. गृह रक्षक, होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य (2015) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि होमगार्ड:
- (a) को पुलिस कांस्टेबल के रूप में नियमित किया जाना चाहिए
- (b) को ऐसा ड्यूटी भत्ता मिलना चाहिए, जो 30 दिन के लिए कम से कम राज्य के पुलिसकर्मियों के न्यूनतम वेतन के बराबर हो
- (c) केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के सदस्य हैं
- (d) 10 साल की सेवा के बाद पेंशन के हकदार हैं
उत्तर: (b) अदालत ने नियमितीकरण से इनकार किया, लेकिन ड्यूटी भत्ते को राज्य पुलिसकर्मियों के न्यूनतम वेतन से जोड़ दिया।
5. सिविल डिफेंस अधिनियम, 1968 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 2009 में पास हुए एक संशोधन ने सिविल डिफेंस की परिभाषा में आपदा प्रबंधन जोड़ा। 2. सिविल डिफेंस कोर का नियंत्रक जिला मजिस्ट्रेट से नीचे के रैंक का नहीं होना चाहिए। 3. यह अधिनियम सिर्फ घोषित युद्ध के दौरान लागू होता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 1 और 2
- (c) केवल 2 और 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b) 2009 का संशोधन 21 जनवरी 2010 से लागू हुआ, और धारा 4 नियंत्रक का रैंक तय करती है; अधिनियम सिर्फ घोषित युद्ध तक सीमित नहीं है, और 2010 से यह आपदा प्रबंधन पर भी लागू होता है।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
- “सामुदायिक भागीदारी प्रभावी आपदा प्रबंधन की आधारशिला है।” भारत से उपयुक्त उदाहरणों के साथ इस कथन का विश्लेषण कीजिए। सामुदायिक भागीदारी के सामने की चुनौतियों और इसे मजबूत करने के उपायों पर भी चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2026, GS पेपर III।
- होमगार्ड कानून में स्वयंसेवक हैं, लेकिन व्यवहार में अक्सर लगभग नियमित पुलिस वाला काम करते हैं। ड्यूटी भत्ते पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के आलोक में इस तनाव का परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
- कानूनी आधार और कामकाज के लिहाज से होमगार्ड और सिविल डिफेंस कोर के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
- भारत के सीमा प्रबंधन में बॉर्डर विंग होमगार्ड की भूमिका पर चर्चा कीजिए, और साथ ही सीमा वाले इलाकों में स्वयंसेवी बटालियनों पर निर्भर रहने की सीमाओं पर भी। (10 अंक, 150 शब्द)
- केंद्र ने नए सिरे से मॉडल होमगार्ड विधेयक का मसौदा बनाने के लिए एक समिति बनाई है। होमगार्ड को ज्यादा प्रभावी और स्वयंसेवकों के प्रति ज्यादा न्यायपूर्ण बनाने के लिए ऐसे मॉडल कानून में कौन-से प्रावधान होने चाहिए? (15 अंक, 250 शब्द)