मिलन अभ्यास: पोर्ट ब्लेयर से विशाखापत्तनम तक भारतीय नौसेना का बहुपक्षीय अभ्यास
मिलन अभ्यास आसान भाषा में: भारतीय नौसेना का यह बहुपक्षीय अभ्यास 1995 में पोर्ट ब्लेयर से विशाखापत्तनम तक कैसे पहुँचा, और यह मालाबार से कैसे अलग है।
मिलन अभ्यास भारतीय नौसेना का सबसे अहम बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है। करीब हर दो साल में होने वाले इस आयोजन में हिंद महासागर और उससे आगे की नौसेनाएँ भारतीय तट के पास एक साथ ट्रेनिंग करती हैं। इसकी शुरुआत 1995 में पोर्ट ब्लेयर में चार विदेशी नौसेनाओं के साथ हुई थी, और 2022 से यह विशाखापत्तनम में हो रहा है। फरवरी 2026 के 13वें संस्करण में 74 देश जुटे। इसलिए भारत की समुद्री पहुँच आज कहाँ तक फैली है, इसे मापने का सबसे साफ पैमाना मिलन ही है।
ज्यादातर पाठक मिलन को मालाबार के बगल में रख देते हैं और मान लेते हैं कि यह भी क्वाड जैसा कोई अभ्यास है, जिसके पीछे कोई रणनीतिक निशाना छिपा है। ऐसा नहीं है। मिलन खुले न्योते वाला अभ्यास है। और जिन देशों को “भाग लेने वाला” गिना जाता है, उनमें से ज्यादातर युद्धपोत नहीं, बल्कि प्रतिनिधिमंडल भेजते हैं। यह नोट ये बातें साफ करता है: मिलन क्या है, इसका एक संस्करण असल में कैसे चलता है, भागीदारी के आंकड़े सच में क्या मापते हैं, और भारत की समुद्री नीति में यह मालाबार से अलग जगह पर क्यों खड़ा है।
मिलन अभ्यास क्या है?
मिलन अभ्यास भारतीय नौसेना की मेजबानी में होने वाला एक द्विवार्षिक बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है। द्विवार्षिक यानी हर दो साल में एक बार। बहुपक्षीय का मतलब है कि एक नौसेना एक-एक साथी के साथ अलग-अलग ट्रेनिंग करने के बजाय, कई नौसेनाओं को एक ही आयोजन में बुलाती है। मिलन शब्द का हिंदी में अर्थ ही “मुलाकात” है, और PIB की विज्ञप्तियाँ इस आयोजन को बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास कहती हैं। नीचे दिए गए तथ्य रक्षा मंत्रालय की उन विज्ञप्तियों से लिए गए हैं, जो हर संस्करण पर जारी हुईं।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| प्रकार | भारतीय नौसेना की मेजबानी में होने वाला बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास |
| पहली बार | 1995, पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार कमान |
| पहले विदेशी भागीदार | इंडोनेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका और थाईलैंड |
| आवृत्ति | हर दो साल में, लेकिन 2001, 2005, 2016 और 2020 में अंतराल |
| 2022 से आयोजन स्थल | विशाखापत्तनम, पूर्वी नौसेना कमान का मुख्यालय |
| ढाँचा | पहले हार्बर चरण, फिर समुद्री चरण |
| ताजा संस्करण | 13वां संस्करण, 15 से 25 फरवरी 2026, 74 देशों के साथ |
| 2026 की थीम | सौहार्द, सहयोग, सहभागिता (Camaraderie, Cooperation, Collaboration) |
| नीतिगत ढाँचा | लुक ईस्ट, फिर एक्ट ईस्ट, सागर (SAGAR) और अब महासागर (MAHASAGAR) |
मिलन का एक संस्करण कैसे चलता है?
हर संस्करण दो चरणों में चलता है: पहले तट पर हार्बर चरण, फिर खुले समुद्र में समुद्री चरण। इसे समझने का सबसे आसान तरीका है कि पहले एक पेशेवर सम्मेलन होता है, फिर एक साझा अभ्यास सत्र। सम्मेलन वाले हिस्से में नौसेनाएँ तय करती हैं कि वे आपस में कैसे बात करेंगी। अभ्यास वाले हिस्से में वे परखती हैं कि यह तालमेल सच में काम करता है या नहीं।
यह उपमा क्रम के मामले में तो ठीक बैठती है, लेकिन एक जगह टूट जाती है। सम्मेलन तो बातचीत खत्म होते ही खत्म हो जाता है, जबकि हार्बर चरण का असली मकसद समुद्री चरण को सुरक्षित बनाना है। दर्जनों नौसेनाओं के जहाज पास-पास कतार में नहीं चल सकते। वे एक डेक से दूसरे डेक पर हेलिकॉप्टर नहीं भेज सकते, और न ही एक-दूसरे के पास हथियार चला सकते हैं। यह सब तभी हो सकता है, जब सिग्नल, प्रक्रियाएँ और सुरक्षा के नियम पहले से तय हो जाएँ।
हार्बर चरण
हार्बर चरण आम लोगों को सबसे ज्यादा दिखने वाला हिस्सा है। यही वह हिस्सा भी है जिसमें हर भाग लेने वाला देश शामिल होता है, चाहे उसने जहाज भेजा हो या नहीं। 2022, 2024 और 2026 के संस्करणों पर PIB की विज्ञप्तियाँ एक जैसे मुख्य कार्यक्रम गिनाती हैं:
- अंतरराष्ट्रीय समुद्री सेमिनार, जहाँ नौसेना प्रमुख, अधिकारी और विद्वान समुद्री सुरक्षा, तकनीक और मानवीय सहायता पर चर्चा करते हैं;
- विषय विशेषज्ञ आदान-प्रदान (SMEE), जिसमें युद्धकला और नौसंचालन के विषयों पर एक विशेषज्ञ सीधे दूसरे विशेषज्ञ से बात करता है;
- विशाखापत्तनम के RK बीच पर अंतरराष्ट्रीय सिटी परेड, जिसमें विदेशी नौसेनाओं की टुकड़ियाँ हिस्सा लेती हैं;
- युवा अधिकारियों का मिलन, जो जूनियर अधिकारियों के आपसी मेलजोल का कार्यक्रम है;
- द्विपक्षीय बैठकें, खेल मुकाबले और सांस्कृतिक दौरे। 2026 में 15 फरवरी को एक मिलन विलेज भी खोला गया, जो 70 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधियों के लिए था।
समुद्री चरण
समुद्री चरण में ही यह अभ्यास अपने नाम के लायक बनता है। 2026 में PIB ने कई अभ्यासों का ब्योरा दिया: एकीकृत वायु रक्षा, पनडुब्बी-रोधी युद्ध, समुद्री अवरोधन, सतह पर हमले का तालमेल, संचार अभ्यास और क्रॉस-डेक फ्लाइंग। साथ में तोपों और विमान-रोधी हथियारों से असली फायरिंग भी हुई। नौसेना इस पूरे मकसद को एक शब्द में कहती है: इंटरऑपरेबिलिटी (interoperability)। यानी अलग-अलग नौसेनाओं के जहाजों की एक ताकत की तरह काम करने की क्षमता। ऐसी क्षमता कि एक देश का हेलिकॉप्टर दूसरे देश के डेक पर उतर सके, और एक रेडियो कॉल का मतलब हर जहाज के ब्रिज पर एक ही हो।
2022 के संस्करण को एक उदाहरण की तरह देखिए। हार्बर चरण 25 से 28 फरवरी 2022 तक चला और समुद्री चरण 1 से 4 मार्च तक। समुद्र में 26 जहाज, 1 पनडुब्बी और 21 विमान शामिल हुए। पहले दो दिन विमान-रोधी युद्ध के अभ्यास से शुरू हुए। इनमें अमेरिका के एक P-8A विमान ने भारतीय लड़ाकू विमानों को राह दिखाई, ताकि वे भाग लेने वाले युद्धपोतों के एक समूह पर हमला कर सकें। फिर रफ्तार बढ़ी। पनडुब्बी-रोधी अभ्यास हुए, और भारतीय नौसेना के एक टैंकर से समुद्र में ही ईंधन भरने का अभ्यास भी हुआ। आसान अभ्यास पहले, और कठिन अभ्यास तब, जब भरोसा बन जाए।
इस अभ्यास की पूरी बनावट यही है।
मिलन में कौन-कौन भाग लेता है?
मिलन में भागीदारी भारतीय नौसेना के न्योते पर होती है। कोई देश दो तरीकों से भाग ले सकता है: समुद्री चरण में जहाज या विमान भेजकर, या हार्बर चरण में प्रतिनिधिमंडल भेजकर। सुर्खियों वाला आंकड़ा, यानी मिलन अभ्यास में भाग लेने वाले देश, इन दोनों को गिनता है। इसीलिए यह आंकड़ा जहाजों की संख्या से बहुत आगे निकल जाता है।
2026 के आंकड़े पढ़ने वाले लगभग हर व्यक्ति से यहीं चूक होती है। PIB ने इस संस्करण में 74 देश बताए। लेकिन समुद्री चरण में 42 जहाज और पनडुब्बियाँ और 29 विमान थे, और इनमें से सिर्फ 18 जहाज विदेशी नौसेनाओं के थे। तो 74 में से ज्यादातर देश अपने नौसेना प्रमुखों, अधिकारियों और पर्यवेक्षकों के जरिए मौजूद थे, अपने जहाजों के जरिए नहीं। 2022 का संस्करण यही अंतर छोटे पैमाने पर दिखाता है: 39 देशों ने भाग लिया, जबकि समुद्र में सिर्फ 26 जहाज और 1 पनडुब्बी उतरे।
कौन आता है, इस पर आधिकारिक रिकॉर्ड सीधा-सादा है, और इसे वैसा ही रखना बेहतर है। 1995 के संस्करण में इंडोनेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका और थाईलैंड थे। 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अलग से नौ ASEAN सदस्य देशों के नौसैनिक प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की। फ्रांस, जर्मनी और अमेरिका के समुद्री गश्ती विमानों ने भी समुद्री चरण में उड़ान भरी। ऐसे जिक्रों के अलावा PIB की विज्ञप्तियाँ आम तौर पर पूरी सूची नहीं, बल्कि कुल संख्या बताती हैं। इसलिए किसी सूची में किसी देश का नाम न होना, अपने आप में, भारत के साथ उसके रिश्तों के बारे में कुछ भी भरोसेमंद नहीं बताता।
1995 से अब तक मिलन कैसे बढ़ा?
मिलन तीन चरणों में बढ़ा। पहले यह दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़ा अंडमान का एक छोटा जमावड़ा था। फिर यह हिंद महासागर का बड़ा आयोजन बना। और 2022 से यह मुख्य भूमि पर होने वाला अभ्यास है, जो दुनिया भर की नौसेनाओं के लिए खुला है। हर चरण भारत की विदेश नीति में आए किसी बदलाव के साथ चलता है। इसीलिए इस टाइमलाइन को रटने के बजाय समझना फायदेमंद है।
| संस्करण या वर्ष | क्या हुआ | स्रोत का ब्योरा |
|---|---|---|
| 1995 | पोर्ट ब्लेयर में 4 विदेशी नौसेनाओं के साथ पहला संस्करण | लुक ईस्ट नीति के तहत इसकी कल्पना हुई |
| 2001 | आयोजन नहीं हुआ | भारत ने मुंबई में अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा (IFR) की मेजबानी की |
| 2005 | 2006 तक खिसका | 2004 की हिंद महासागर सुनामी के बाद नई तारीख तय हुई |
| 2014 | हिंद महासागर के तटीय देशों समेत 18 देश | पहले करीब 6 क्षेत्रीय देशों से बढ़कर |
| 2016 | आयोजन नहीं हुआ | भारत ने विशाखापत्तनम में अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा की मेजबानी की |
| 2020 | 2022 तक टला | कोविड-19 |
| 2022 (11वां) | विशाखापत्तनम पहुँचा; 39 देश | थीम: सौहार्द, एकजुटता, सहभागिता (Camaraderie, Cohesion, Collaboration) |
| 2024 (12वां) | 19 से 27 फरवरी; 50 से ज्यादा देश | समुद्री चरण 24 फरवरी से |
| 2026 (13वां) | 15 से 25 फरवरी; 74 देश | IFR 2026 और IONS के प्रमुखों के सम्मेलन के साथ आयोजित |
पहला चरण 1990 के दशक की लुक ईस्ट नीति का है, जब भारत ने दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर रुख किया। पोर्ट ब्लेयर अंडमान और निकोबार कमान का मुख्यालय है, और यह मलक्का जलडमरूमध्य की ओर जाने वाले समुद्री रास्तों के पास पड़ता है। इसलिए दक्षिण-पूर्व एशियाई नौसेनाओं का जमावड़ा वहाँ होना स्वाभाविक था।
दूसरे चरण में मेहमानों की सूची बड़ी हुई। PIB के मुताबिक मिलन का दायरा एक्ट ईस्ट नीति और सागर दृष्टि के साथ बढ़ा। इसमें पश्चिमी हिंद महासागर के द्वीपीय देश और हिंद महासागर के तटीय देश जुड़े, और 2014 तक संख्या 18 देशों तक पहुँच गई। तब तक असली रुकावट न्योते नहीं, बल्कि अंडमान की सुविधाएँ बन चुकी थीं।
तीसरा चरण मुख्य भूमि पर आने का है। रक्षा मंत्रालय ने साफ कहा कि इतने बड़े नौसैनिक जमावड़े के लिए जो बुनियादी ढाँचा चाहिए, वह पोर्ट ब्लेयर नहीं दे सकता था। इसलिए पूर्वी नौसेना कमान के मुख्यालय विशाखापत्तनम को चुना गया। असर तुरंत दिखा: 2022 में 39 देश, 2024 में 50 से ज्यादा और 2026 में 74 देश।
एक छोटी बात भी साफ कर लेनी चाहिए, क्योंकि दो विज्ञप्तियाँ साथ पढ़ने वाले अक्सर इसमें उलझ जाते हैं। 2024 में नौसेना प्रमुख ने “1995 में पाँच IOR नौसेनाओं” की बात कही, जबकि दूसरी विज्ञप्तियाँ चार देश बताती हैं। दोनों सही हैं। चार विदेशी नौसेनाएँ भारतीय नौसेना के साथ जुड़ीं, तो कुल मिलाकर पाँच नौसेनाएँ हुईं।
भारत के लिए मिलन क्यों अहम है?
मिलन इसलिए अहम है क्योंकि यह वह इकलौता नौसैनिक आयोजन है जहाँ भारत कुछ साझेदारों में से एक बनकर नहीं, बल्कि संयोजक बनकर सामने आता है। संयोजक यानी वह मेजबान, जो कई नौसेनाओं को एक ही मेज पर और एक ही समुद्र में ले आता है। यही भूमिका भारत की घोषित समुद्री नीति का व्यावहारिक पक्ष है।
इस नीति की वंश-रेखा बिल्कुल साफ है। 12 मार्च 2015 को मॉरीशस में गश्ती जहाज बाराकुडा के कमीशनिंग समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सागर (SAGAR) की बात रखी, यानी क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास। दस साल बाद, फिर मॉरीशस में ही, इस दृष्टि को महासागर (MAHASAGAR) के रूप में आगे बढ़ाया गया, यानी क्षेत्रों के पार सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति। PIB के मुताबिक महासागर, सागर वाली सोच को हिंद महासागर से दूसरे क्षेत्रों तक ले जाता है। साइट का सागर और महासागर वाला नोट इस सिद्धांत को विस्तार से समझाता है। मिलन के लिए बात इससे आसान है। रक्षा मंत्रालय ने 2026 के संस्करण को महासागर की व्यावहारिक अभिव्यक्ति कहा।
इस भूमिका से तीन व्यावहारिक फायदे निकलते हैं:
- इंटरऑपरेबिलिटी, उन नौसेनाओं के साथ जिनके साथ भारत को किसी आपात स्थिति में काम करना पड़ सकता है, चाहे वह समुद्री डकैती-रोधी गश्त हो या चक्रवात राहत का अभियान;
- समुद्री क्षेत्र जागरूकता (maritime domain awareness), यानी समुद्र में कौन और क्या चल रहा है, इसकी साझा तस्वीर, जो तब और साफ होती है जब नौसेनाएँ एक-दूसरे की प्रक्रियाओं और लोगों को जानती हैं;
- कामकाजी स्तर पर भरोसा, जो हर संस्करण में मिलने वाले युवा अधिकारियों, विशेषज्ञों और कमांडिंग अफसरों के जरिए बनता है।
2024 के उद्घाटन में राजनाथ सिंह ने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का लक्ष्य बताया: “सबसे पहले मदद पहुँचाने वाला और पसंदीदा सुरक्षा साझेदार” बनना। मिलन वह मंच है जहाँ इस दावे का पूर्वाभ्यास उन्हीं नौसेनाओं के सामने होता है, जिनसे यह दावा कहा गया है। यह उस बड़ी हिंद महासागर कूटनीति से भी जुड़ता है, जो IORA, कोलंबो सुरक्षा कॉन्क्लेव और IONS से होकर चलती है।
मिलन की सीमाएँ कहाँ हैं
एक निष्पक्ष आकलन में यह भी बताना होगा कि मिलन क्या नहीं कर सकता। पैमाना गहराई नहीं होता। जब 74 में से ज्यादातर देश प्रतिनिधिमंडलों के जरिए आते हैं, तो जटिल ट्रेनिंग जहाजों के एक काफी छोटे समूह के बीच ही होती है। यह अभ्यास द्विवार्षिक भी है, इसलिए इससे बने कामकाजी रिश्तों को टिके रहने के लिए बीच के सालों में दूसरे संपर्कों की जरूरत पड़ती है। और मिलन ट्रेनिंग है, कोई वादा नहीं। किसी भी भागीदार पर संकट के समय भारत के साथ खड़े होने की कोई बाध्यता नहीं आती। इसलिए समझदारी यही है कि आप मिलन को भारत की संयोजक पहुँच का पैमाना मानिए। किसी एक साझेदारी की गहराई देखनी हो, तो द्विपक्षीय अभ्यासों और समझौतों को देखिए।
मिलन, मालाबार से कैसे अलग है?
मिलन समावेशी और बहुपक्षीय है; मालाबार मिनीलेटरल (minilateral) है, यानी एक जैसी सोच वाली नौसेनाओं का एक छोटा, तय समूह। मिलन और मालाबार अभ्यास में अंतर की लगभग हर दूसरी बात इसी एक फर्क से निकलती है।
मालाबार की शुरुआत 1992 में भारतीय और अमेरिकी नौसेनाओं के बीच एक द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में हुई थी। आज इसमें चारों क्वाड देश साथ आते हैं। 2024 का संस्करण भारत ने 8 से 18 अक्टूबर तक विशाखापत्तनम में आयोजित किया। इसमें भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका थे, और हर देश ने कुछ युद्धपोत, विमान और विशेष बल भेजे। जो चार नौसेनाएँ नियमित रूप से साथ ट्रेनिंग करती हैं, वे ज्यादा कठिन और ज्यादा गहरे तालमेल वाले अभ्यास कर सकती हैं। हर दो साल में मिलने वाली दर्जनों नौसेनाएँ ऐसा नहीं कर सकतीं।
मिलन उल्टी दिशा में चलता है। इसकी असली कीमत इस बात में है कि एक कमरे में कौन-कौन बैठ सकता है। जिन नौसेनाओं की सरकारें दूसरे मुद्दों पर असहमत हैं, वे भी भारत की मेजबानी में एक सेमिनार हॉल और बंगाल की खाड़ी का एक हिस्सा साझा कर सकती हैं। यह व्यापकता एक मुक्त, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत की भारत की घोषित पसंद से मेल खाती है, जिसे भारत की हिंद-प्रशांत रणनीति में रखा गया है। और यह भारत को किसी एक गुट से बाँधती भी नहीं।
| विशेषता | मिलन अभ्यास | मालाबार अभ्यास |
|---|---|---|
| स्वरूप | बहुपक्षीय, खुला न्योता | मिनीलेटरल, तय समूह |
| शुरुआत | 1995, पोर्ट ब्लेयर | 1992, भारत-अमेरिका द्विपक्षीय |
| भागीदार | 2026 में 74 देश | 2024 में 4 नौसेनाएँ |
| मेजबान | हमेशा भारतीय नौसेना | सदस्यों के बीच बारी-बारी से |
| मुख्य महत्व | साझेदारी की व्यापकता और सबको एक मंच पर लाना | करीबी साझेदारों के बीच तालमेल की गहराई |
आज का मिलन अभ्यास
मिलन अभ्यास अब विशाखापत्तनम में होता है, और मिलन अभ्यास 2026 अब तक का सबसे बड़ा संस्करण रहा। 15 से 25 फरवरी 2026 तक भारत ने मिलन, अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2026 और हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (IONS) के प्रमुखों के सम्मेलन की एक साथ मेजबानी की। PIB के मुताबिक यह पहला मौका था, जब ये आयोजन एक साथ हुए।
बेड़ा समीक्षा के साथ यह जोड़ी उन लोगों के लिए मायने रखती है, जिन्होंने पुराना पैटर्न पढ़ा है। 2001 और 2016 में मिलन इसलिए छोड़ा गया था क्योंकि भारत बेड़ा समीक्षा की मेजबानी कर रहा था; 2026 में दोनों साथ-साथ चले। इसी पखवाड़े में भारत ने दूसरी बार IONS की अध्यक्षता भी संभाली, 2025 से 2027 के लिए। IONS में 25 सदस्य नौसेनाएँ और 9 पर्यवेक्षक हैं।
समापन विज्ञप्ति के आंकड़े याद रखने लायक हैं: 42 जहाज और पनडुब्बियाँ और 29 विमान, जिनमें 18 जहाज विदेशी नौसेनाओं के थे। थीम थी सौहार्द, सहयोग, सहभागिता। समापन समारोह 25 फरवरी 2026 को विशाखापत्तनम के पास INS विक्रांत पर हुआ, जो भारत में बना पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत है। 2026 का संस्करण भारत की समुद्री पहुँच के एक व्यस्त दौर के बीच आया। इसी दौर की एक तैनाती का ब्योरा साइट के करेंट अफेयर्स नोट IOS सागर में दिया गया है।
अगर हर दो साल वाला पैटर्न बना रहा, तो अगला संस्करण 2028 में होगा। इसे कार्यक्रम से निकाला गया अनुमान मानिए, घोषित तारीख नहीं।
परीक्षा के लिए मिलन अभ्यास कैसे पढ़ें
मिलन अभ्यास सिलेबस में दो जगह आता है। पहली जगह GS पेपर II है, जहाँ यह भारत, उसके पड़ोस और क्षेत्रीय समूहों वाले हिस्से में आता है। दूसरी जगह GS पेपर III है, जहाँ यह सीमावर्ती इलाकों और समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों वाले हिस्से में आता है। प्रीलिम्स में यह रक्षा अभ्यासों वाले करेंट अफेयर्स के हिस्से से पूछा जाता है। वहाँ जाल तारीखों, जगहों और अलग-अलग अभ्यासों के फर्क में होता है।
मुख्य परीक्षा मिलन का नाम लेकर सवाल नहीं पूछती। वह समुद्री सुरक्षा पर पूछती है, और मिलन जैसे अभ्यासों को सबूत की तरह इस्तेमाल करती है। मुख्य परीक्षा 2022 के GS पेपर III में पूछा गया था: “भारत में समुद्री सुरक्षा की चुनौतियाँ क्या हैं? समुद्री सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए उठाए गए संगठनात्मक, तकनीकी और प्रक्रियात्मक कदमों की चर्चा कीजिए।” ऐसे उत्तर के प्रक्रियात्मक हिस्से में मिलन एक सहयोगी तंत्र के रूप में आता है। प्रीलिम्स की बात करें, तो Anantam IAS के प्रीलिम्स प्रश्न बैंक के 1,403 प्रश्नों में से 104 अंतरराष्ट्रीय संबंधों से हैं। अभ्यासों और समूहों वाले सवाल उस हिस्से में लगातार आते रहते हैं।
दोहराने लायक तथ्य:
- मिलन की शुरुआत 1995 में पोर्ट ब्लेयर में इंडोनेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका और थाईलैंड के साथ हुई;
- यह द्विवार्षिक है, लेकिन 2001 और 2016 (बेड़ा समीक्षा), 2005 (सुनामी, फिर 2006 में हुआ) और 2020 (कोविड-19, फिर 2022 में हुआ) में अंतराल आया;
- यह 2022 में विशाखापत्तनम आया, जो पूर्वी नौसेना कमान का मुख्यालय है;
- भागीदारी: 2022 में 39 देश, 2024 में 50 से ज्यादा और 2026 में 74;
- 2026 का संस्करण 13वां था, जो 15 से 25 फरवरी तक IFR 2026 और IONS के प्रमुखों के सम्मेलन के साथ हुआ;
- हर संस्करण में एक हार्बर चरण और एक समुद्री चरण होता है;
- नीति की रेखा ऐसे चलती है: लुक ईस्ट, एक्ट ईस्ट, सागर (2015) और महासागर (2025)।
आम उलझनें, और उन्हें अलग रखने का तरीका:
- देश बनाम जहाज। “74 देश” प्रतिनिधिमंडलों की गिनती है; 2026 में सिर्फ 18 विदेशी जहाज समुद्र में उतरे।
- 1995 में चार या पाँच। चार विदेशी नौसेनाएँ और भारतीय नौसेना मिलकर पाँच होती हैं।
- मिलन बनाम मालाबार। मिलन की मेजबानी भारत करता है और यह सबके लिए खुला है; मालाबार चार नौसेनाओं वाला क्वाड अभ्यास है, जो 1992 में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में शुरू हुआ।
- मिलन बनाम IONS। IONS सदस्यों और पर्यवेक्षकों वाली एक संगोष्ठी है, कोई अभ्यास नहीं; 2026 में दोनों विशाखापत्तनम में साथ हुए, लेकिन दोनों अलग-अलग ही हैं।
| आयोजन | यह क्या है | कौन चलाता है | मुख्य तथ्य |
|---|---|---|---|
| मिलन अभ्यास | बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास | भारतीय नौसेना | 1995 में शुरुआत, 2026 में 74 देश |
| मालाबार अभ्यास | मिनीलेटरल नौसैनिक अभ्यास | भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया के बीच बारी-बारी से | 1992 में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में शुरू |
| अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा | राष्ट्राध्यक्ष द्वारा जहाजों का औपचारिक निरीक्षण | मेजबान नौसेना | भारत ने 2001, 2016 और 2026 में मेजबानी की |
| IONS | हिंद महासागर की नौसेनाओं का मंच | अध्यक्षता बारी-बारी से | 25 सदस्य, 9 पर्यवेक्षक; 2025 से 2027 तक भारत अध्यक्ष |
मिलन छोटा विषय है, लेकिन इसका फायदा बड़ा है। चार मुख्य तथ्य याद कर लीजिए (1995, पोर्ट ब्लेयर, विशाखापत्तनम, 74 देश), और व्यापकता व गहराई का फर्क समझ लीजिए। फिर भारत की समुद्री कूटनीति पर किसी भी उत्तर के लिए आपके पास एक तैयार उदाहरण होगा। इसमें दक्षिण-पूर्व एशिया से रिश्ते भी शामिल हैं, जिन पर भारत-ASEAN संबंध वाला नोट है। जो अभ्यर्थी यह समझा सके कि 74 देश लेकिन सिर्फ 18 विदेशी जहाज, यह एक साथ ताकत भी है और सीमा भी, वही बेहतर उत्तर लिखेगा।
सामान्य प्रश्न
मिलन अभ्यास क्या है?
मिलन अभ्यास भारतीय नौसेना की मेजबानी में होने वाला द्विवार्षिक बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है। इसकी शुरुआत 1995 में पोर्ट ब्लेयर में चार विदेशी नौसेनाओं के साथ हुई, और 2022 से यह विशाखापत्तनम में हो रहा है। हर संस्करण में सेमिनारों और आदान-प्रदान वाला एक हार्बर चरण होता है, और साझा अभ्यासों वाला एक समुद्री चरण।
मिलन नौसैनिक अभ्यास कहाँ होता है?
2022 के संस्करण से मिलन पूर्वी नौसेना कमान के मुख्यालय विशाखापत्तनम में हो रहा है। इससे पहले के संस्करण अंडमान और निकोबार कमान के तहत पोर्ट ब्लेयर में होते थे। रक्षा मंत्रालय ने इसे मुख्य भूमि पर इसलिए भेजा, क्योंकि बड़े नौसैनिक जमावड़े के लिए ज्यादा बुनियादी ढाँचे की जरूरत थी।
मिलन 2026 में कितने देशों ने भाग लिया?
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक मिलन 2026 में 74 देश शामिल हुए, और यह अब तक का सबसे बड़ा संस्करण रहा। समुद्री चरण में 42 जहाज और पनडुब्बियाँ और 29 विमान थे, जिनमें से 18 जहाज विदेशी नौसेनाओं के थे। ज्यादातर देशों ने युद्धपोतों के बजाय प्रतिनिधिमंडलों के जरिए भाग लिया।
1995 के पहले मिलन में किन देशों ने भाग लिया?
1995 के पहले मिलन में चार विदेशी नौसेनाएँ थीं: इंडोनेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका और थाईलैंड। भारतीय नौसेना को मिलाकर कुल पाँच नौसेनाएँ हुईं, इसीलिए कुछ आधिकारिक बयान 1995 में पाँच नौसेनाओं की बात करते हैं।
क्या मिलन हर साल होता है?
नहीं। मिलन द्विवार्षिक है, यानी करीब हर दो साल में होता है। 2001 और 2016 में यह नहीं हुआ, क्योंकि भारत ने अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षाओं की मेजबानी की। 2005 का संस्करण 2004 की सुनामी के बाद 2006 में खिसका, और 2020 का संस्करण कोविड-19 की वजह से 2022 तक टल गया।
मिलन 2026 की थीम क्या थी?
मिलन 2026 की थीम थी ‘सौहार्द, सहयोग, सहभागिता’ (Camaraderie, Cooperation, Collaboration)। 2022 के संस्करण की थीम भी मिलती-जुलती थी: ‘सौहार्द, एकजुटता, सहभागिता’ (Camaraderie, Cohesion, Collaboration)। रक्षा मंत्रालय ने 2026 के संस्करण को महासागर दृष्टि से जोड़ा।
मिलन, मालाबार अभ्यास से कैसे अलग है?
मिलन एक खुला, बहुपक्षीय अभ्यास है जिसकी मेजबानी हमेशा भारतीय नौसेना करती है; 2026 में इसमें 74 देश थे। मालाबार चार नौसेनाओं, यानी भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का मिनीलेटरल अभ्यास है, जो 1992 में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में शुरू हुआ था। मिलन साझेदारी की व्यापकता बनाता है, जबकि मालाबार करीबी साझेदारों के बीच गहराई बनाता है।
मिलन और महासागर में क्या संबंध है?
महासागर की घोषणा 2025 में हुई। इसका मतलब है क्षेत्रों के पार सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति, और यह 2015 की सागर दृष्टि को हिंद महासागर से आगे ले जाता है। रक्षा मंत्रालय ने मिलन 2026 को इसी दृष्टि की व्यावहारिक अभिव्यक्ति बताया। मिलन वह जगह है जहाँ भारत कई नौसेनाओं के संयोजक की भूमिका निभाता है, और यही उस नीति का व्यावहारिक पक्ष है।
अभ्यास प्रश्न
प्रीलिम्स MCQ
1. मिलन अभ्यास के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसे पहली बार 1995 में पोर्ट ब्लेयर में आयोजित किया गया था। 2. 2022 से इसकी मेजबानी पूर्वी नौसेना कमान के मुख्यालय विशाखापत्तनम में हो रही है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (c) मिलन 1995 में पोर्ट ब्लेयर में शुरू हुआ, और 2022 के संस्करण से विशाखापत्तनम आ गया।
2. 1995 में मिलन के पहले संस्करण में निम्नलिखित में से किन देशों ने भाग लिया था? 1. इंडोनेशिया 2. सिंगापुर 3. श्रीलंका 4. मालदीव। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिए।
- (a) केवल 1, 2 और 3
- (b) केवल 2, 3 और 4
- (c) केवल 1, 3 और 4
- (d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: (a) 1995 में चार विदेशी नौसेनाएँ इंडोनेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका और थाईलैंड की थीं; मालदीव इनमें शामिल नहीं था।
3. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 2001 और 2016 में मिलन नहीं हुआ, क्योंकि उन वर्षों में भारत ने अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षाओं की मेजबानी की। 2. कोविड-19 के कारण मिलन का 2020 का संस्करण वर्चुअल रूप में हुआ। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (a) 2020 का संस्करण वर्चुअल रूप में नहीं हुआ, बल्कि 2022 तक टाल दिया गया।
4. मिलन 2026 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह विशाखापत्तनम में अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2026 और IONS के प्रमुखों के सम्मेलन के साथ आयोजित हुआ। 2. इसके समुद्री चरण में आधे से ज्यादा जहाज विदेशी नौसेनाओं के थे। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (a) 42 जहाजों और पनडुब्बियों में से 18 जहाज विदेशी नौसेनाओं के थे, जो आधे से कम है।
5. कौन-सा नौसैनिक अभ्यास 1992 में भारतीय नौसेना और अमेरिकी नौसेना के बीच द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में शुरू हुआ था?
- (a) मिलन
- (b) मालाबार
- (c) वरुण
- (d) SIMBEX
उत्तर: (b) मालाबार 1992 में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में शुरू हुआ और अब इसमें जापान और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हैं; वरुण फ्रांस के साथ होता है और SIMBEX सिंगापुर के साथ।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
- “IPMDA (हिंद-प्रशांत समुद्री क्षेत्र जागरूकता साझेदारी) भारत की सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) दृष्टि और क्वाड की साझा हिंद-प्रशांत रणनीति के बीच की खाई को पाटती है।” IPMDA पर ध्यान केंद्रित करते हुए इस कथन का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2026, GS पेपर II।
- भारत के समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए समुद्री सुरक्षा क्यों जरूरी है? समुद्री और तटीय सुरक्षा की चुनौतियों और आगे की राह की चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2025, GS पेपर III।
- मिलन अभ्यास 1995 की चार विदेशी नौसेनाओं से बढ़कर 2026 में 74 देशों तक पहुँच गया है। क्या यह पैमाना एक नौसैनिक अभ्यास के रूप में इसके महत्व को मजबूत करता है, या उसे कमजोर करता है? (15 अंक, 250 शब्द)
- भारत की समुद्री रणनीति में मिलन जैसे समावेशी बहुपक्षीय अभ्यासों और मालाबार जैसे मिनीलेटरल अभ्यासों के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
- परीक्षण कीजिए कि मिलन अभ्यास हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे भारत की सागर और महासागर दृष्टियों के उद्देश्यों को कैसे पूरा करता है। (15 अंक, 250 शब्द)