Anantam IASHindi Note · 3 September 2026

पी. वी. सिंधु: दो ओलंपिक पदक जीतने वाली भारतीय शटलर

पी. वी. सिंधु दो ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला शटलर हैं और 2019 की BWF विश्व चैंपियन। उनका करियर, गोपीचंद की कोचिंग और बड़े सम्मान एक जगह।

पी. वी. सिंधु आधुनिक ओलंपिक इतिहास में भारत की सबसे ज़्यादा पदक जीतने वाली बैडमिंटन खिलाड़ी हैं, और दो व्यक्तिगत ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला — रियो 2016 में रजत और टोक्यो 2020 में कांस्य। 2019 में वे BWF विश्व चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय बनीं। ओलंपिक, विश्व और एशियाई सर्किट पर पी. वी. सिंधु ने ऐसा करियर बनाया जिसने भारतीय महिला बैडमिंटन को कभी-कभी हो जाने वाले उलटफेर से निकालकर अंतरराष्ट्रीय पोडियम पर पक्की मौजूदगी तक पहुँचा दिया।

पी. वी. सिंधु का नाम UPSC के खेल से जुड़े सवालों में, खेल सम्मानों की आम तालिकाओं में और भारतीय खेल में महिलाओं पर निबंध की सामग्री में आता है। सानिया मिर्ज़ा के बाद दक्षिण भारत से निकली वे इस स्तर की पहली स्पोर्ट्स-मार्केटिंग शख़्सियत भी हैं, और उनके ब्रांड एंडोर्समेंट उन्हें लगातार दुनिया की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली महिला खिलाड़ियों में रखते हैं।

यह लेख पी. वी. सिंधु के शुरुआती जीवन, हैदराबाद की पुलेला गोपीचंद अकादमी में बीते उनके सालों, रियो और टोक्यो के ओलंपिक पदकों, 2019 के विश्व चैंपियनशिप ख़िताब, कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों के रिकॉर्ड, बड़े नागरिक सम्मानों और कोर्ट के बाहर की उनकी हाल की ज़िंदगी को समेटता है।

शुरुआती जीवन और परिवार

पी. वी. सिंधु की तस्वीर

पुसरला वेंकट सिंधु का जन्म 5 जुलाई 1995 को हैदराबाद में हुआ। खेल परिवार में पहले से था — उनके माता-पिता, दोनों राष्ट्रीय स्तर पर वॉलीबॉल खेले हैं। उनके पिता पी. वी. रमना 1986 के सियोल एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष वॉलीबॉल टीम के सदस्य थे, और उन्हें 2000 में अर्जुन पुरस्कार मिला। उनकी माँ पी. विजया ने भी वॉलीबॉल में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

बैडमिंटन क्यों

माता-पिता की पृष्ठभूमि के बावजूद पी. वी. सिंधु ने आठ साल की उम्र में बैडमिंटन शुरू किया — 2001 में पुलेला गोपीचंद की ऑल-इंग्लैंड ओपन जीत से प्रेरित होकर। शुरुआत उन्होंने इंडियन रेलवे इंस्टिट्यूट ऑफ़ सिग्नल इंजीनियरिंग एंड टेलीकम्युनिकेशंस में महबूब अली की कोचिंग में की, और 2004 में हैदराबाद की पुलेला गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी में आ गईं।

गोपीचंद की कोचिंग में

गोपीचंद अकादमी उनके करियर की धुरी बन गई। पी. वी. सिंधु वहाँ के शुरुआती सालों के बारे में कई बार बोल चुकी हैं — सुबह 4 बजे का सफ़र, घंटों की ट्रेनिंग, सख़्त खाना-पीना — और यह भी कि गोपीचंद और उनके कोचों ने लंबी रैलियाँ खेलने की ताक़त उनमें कैसे भरी। उनका कद (1.79 मीटर), पहुँच और शारीरिक ताक़त उन्हें उस आधुनिक, हमलावर खेल के लिए बिल्कुल फ़िट बनाते थे जो गोपीचंद सिखा रहे थे।

पहली बड़ी कामयाबी के साल (2009 से 2013)

पी. वी. सिंधु पहली बार देश भर में चर्चा में तब आईं जब उन्होंने घरेलू मुक़ाबलों में अंडर-10 और अंडर-14 ख़िताब जीते। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहली बड़ी कामयाबी 2009 में आई, जब उन्होंने कोलंबो में सब-जूनियर एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप में कांस्य जीता।

पहला सीनियर ख़िताब

अपना पहला सीनियर अंतरराष्ट्रीय ख़िताब उन्होंने 2013 के मलेशियन ओपन ग्रां प्री गोल्ड में जीता। उसी साल गुआंगझू में हुई 2013 BWF विश्व चैंपियनशिप में वे विश्व चैंपियनशिप में सिंगल्स का पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं — कांस्य। 2014 में कोपेनहेगन की विश्व चैंपियनशिप में एक और कांस्य जीतकर उन्होंने इसे दोहराया।

2015 में पद्म श्री

भारत सरकार ने 2015 में उन्हें पद्म श्री दिया। इससे वे खेल के लिए यह सम्मान पाने वाले सबसे कम उम्र के लोगों में शामिल हो गईं।

रियो 2016: रजत पदक

रियो ओलंपिक ने पी. वी. सिंधु को पूरे भारत में घर-घर का नाम बना दिया। चोट और गोपीचंद के साथ ख़ुद को दोबारा खड़ा करने के एक साल के बाद वे दुनिया की नंबर 10 खिलाड़ी के तौर पर, नौवीं सीड के साथ इन खेलों में उतरी थीं।

फ़ाइनल तक का रास्ता

फ़ाइनल तक पहुँचने के रास्ते में उन्होंने हंगरी की लॉरा सरोसी, कनाडा की मिशेल ली, चीनी ताइपे की ताई त्ज़ु यिंग, चीन की वांग यिहान और जापान की नोज़ोमी ओकुहारा को हराया — यानी लगातार दौरों में दुनिया की नंबर 1, नंबर 6 और नंबर 2 खिलाड़ियों को मात दी। 19 अगस्त 2016 के फ़ाइनल में वे स्पेन की कैरोलिना मारिन से 21-19, 12-21, 15-21 से हार गईं। मुक़ाबला तीन गेम तक चला और 1 घंटा 23 मिनट लंबा रहा।

इसकी अहमियत

पी. वी. सिंधु का रियो रजत उन खेलों में भारत का एकमात्र रजत था, और किसी भारतीय महिला का जीता हुआ बस चौथा ओलंपिक पदक — कर्णम मल्लेश्वरी (वेटलिफ़्टिंग, सिडनी 2000), मैरी कॉम (मुक्केबाज़ी, लंदन 2012) और साइना नेहवाल (बैडमिंटन, लंदन 2012) के बाद। उस वक़्त वे 21 साल की थीं।

विश्व चैंपियनशिप का ख़िताब: 2019

पी. वी. सिंधु लगातार तीन विश्व चैंपियनशिप में उपविजेता रह चुकी थीं — 2014 में कांस्य, 2017 में रजत, 2018 में रजत। 2019 में बासेल में उन्होंने आख़िरकार यह दीवार तोड़ दी।

फ़ाइनल

25 अगस्त 2019 को उन्होंने फ़ाइनल में जापान की नोज़ोमी ओकुहारा को 21-7, 21-7 से हराया — BWF विश्व चैंपियनशिप के इतिहास में महिला सिंगल्स का सबसे एकतरफ़ा फ़ाइनल। 38 मिनट में वे BWF विश्व चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय बन गईं, और विश्व चैंपियनशिप का किसी भी रंग का पदक जीतने वाली सिर्फ़ चौथी भारतीय।

टोक्यो 2020: दूसरा ओलंपिक पदक

टोक्यो ओलंपिक (कोविड-19 महामारी के चलते 2021 में हुआ) ने पक्का कर दिया कि ओलंपिक में भारत की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी पी. वी. सिंधु ही हैं।

कांस्य पदक का मुक़ाबला

सेमीफ़ाइनल में ताई त्ज़ु यिंग से हारने के बाद उन्होंने 1 अगस्त 2021 को कांस्य पदक के मुक़ाबले में चीन की हे बिंगजियाओ को 21-13, 21-15 से हराकर अपना दूसरा ओलंपिक पदक जीता। 26 साल की सिंधु दो ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं, और पहलवान सुशील कुमार के बाद ऐसा करने वाली दूसरी भारतीय।

पद्म भूषण

भारत सरकार ने 2019 की विश्व चैंपियनशिप और उनके ओलंपिक रिकॉर्ड को देखते हुए 2020 में उन्हें पद्म भूषण दिया। खेल रत्न उन्हें 2016 में ही मिल चुका था।

बाक़ी बड़े सम्मान

ओलंपिक से बाहर के बड़े मुक़ाबलों में पी. वी. सिंधु के पदक भारत की सबसे आगे की महिला शटलर के तौर पर उनका दावा पूरा कर देते हैं।

एशियाई खेल और कॉमनवेल्थ खेल

उन्होंने 2018 के एशियाई खेलों (जकार्ता-पालेमबांग) में रजत जीता, फ़ाइनल में ताई त्ज़ु यिंग से हारकर। 2014 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेलों में उन्हें रजत मिला और 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ खेलों में महिला सिंगल्स का स्वर्ण। 2022 CWG में मिक्स्ड-टीम का स्वर्ण जीतने वाली भारतीय टीम में भी वे शामिल थीं।

BWF वर्ल्ड टूर

उन्होंने कई सुपरसीरीज़ / वर्ल्ड टूर ख़िताब जीते हैं, जिनमें 2017 इंडिया ओपन, 2017 कोरिया ओपन, 2018 BWF वर्ल्ड टूर फ़ाइनल्स (इसे जीतने वाली पहली भारतीय शटलर), 2019 इंडोनेशिया ओपन, 2022 सिंगापुर ओपन और 2025 चाइना मास्टर्स शामिल हैं।

नागरिक और खेल पुरस्कार

अर्जुन पुरस्कार (2013), पद्म श्री (2015), खेल रत्न (पहले राजीव गांधी खेल रत्न, 2016), पद्म भूषण (2020)। कई भारतीय विश्वविद्यालयों से उन्हें मानद डॉक्टरेट भी मिली है।

कोर्ट के बाहर की ज़िंदगी

पी. वी. सिंधु कई उपभोक्ता कंपनियों की ब्रांड एंबेसडर रही हैं — ब्रिजस्टोन, JBL, वीज़ा, गेटोरेड, बैंक ऑफ़ बड़ौदा — और फ़ोर्ब्स लगातार उन्हें दुनिया की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली महिला खिलाड़ियों में गिनता रहा है।

शादी

उन्होंने 22 दिसंबर 2024 को उदयपुर में एक निजी समारोह में हैदराबाद के कारोबारी वेंकट दत्ता साई से शादी की, और उसके बाद हैदराबाद में बड़ा रिसेप्शन हुआ। शादी के बाद भी वे अंतरराष्ट्रीय टूर पर खेलती रही हैं।

खेल का बुनियादी ढाँचा

सरकारी खेल पहलों में भी वे दिखती रही हैं — खेलो इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम, फ़िट इंडिया मूवमेंट — और महानगरों के बाहर महिला खेल के बुनियादी ढाँचे में जो कमियाँ हैं, उन पर उन्होंने खुलकर बात की है।

पी. वी. सिंधु UPSC के लिए क्यों मायने रखती हैं

पी. वी. सिंधु पाठ्यक्रम के तीन हिस्सों के जोड़ पर बैठती हैं। GS-II (शासन और कल्याण) में उनका करियर दिखाता है कि पुलेला गोपीचंद अकादमी जैसी राज्य की अकादमियाँ, भारतीय खेल प्राधिकरण (Sports Authority of India) जैसा सरकारी ट्रेनिंग ढाँचा और खेलो इंडिया का तंत्र मिलकर हैदराबाद जैसे शहर से विश्व स्तर के खिलाड़ी कैसे तैयार कर देते हैं।

GS-I (भारतीय समाज) में वे दक्षिण भारत की उन महिला खिलाड़ियों की लहर का हिस्सा हैं जो कर्णम मल्लेश्वरी और सानिया मिर्ज़ा से शुरू होकर आज तक चली आ रही है। छात्र उन्हें मुक्केबाज़ मैरी कॉम के साथ रख सकते हैं, जो महिलाओं के व्यक्तिगत खेल में भारत की दूसरी ओलंपिक पदक विजेता हैं। और उस बड़ी परंपरा में भी, जिसमें विज्ञान में कल्पना चावला, राजनीति में सुचेता कृपलानी और राष्ट्रपति भवन में द्रौपदी मुर्मू आती हैं — यह परंपरा उन्नीसवीं सदी की रानी लक्ष्मीबाई जैसी शख़्सियतों तक पीछे जाती है।

निबंध के पेपर और नीतिशास्त्र (GS-IV) में पी. वी. सिंधु का अनुशासन, उनका ट्रेनिंग शेड्यूल और ओलंपिक के चार साल लंबे चक्र को लेकर उनका रवैया वही सामग्री है जिससे लगन, मार्गदर्शन और सरकारी पैसे से चलने वाले खेल में लंबे समय तक साथ रहने वाले कोचों की भूमिका पर मूल्य-आधारित तर्क बनते हैं।

सामान्य प्रश्न

पी. वी. सिंधु कौन हैं?

पी. वी. सिंधु भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। वे दो ओलंपिक पदक जीत चुकी हैं (रियो 2016 में रजत और टोक्यो 2020 में कांस्य), 2019 की BWF विश्व चैंपियन हैं, और भारत की सबसे ज़्यादा सम्मान पाने वाली शटलरों में गिनी जाती हैं।

पी. वी. सिंधु का जन्म कब हुआ?

उनका जन्म 5 जुलाई 1995 को हैदराबाद में हुआ, एक ऐसे परिवार में जहाँ माता-पिता दोनों राष्ट्रीय स्तर के वॉलीबॉल खिलाड़ी रहे हैं।

पी. वी. सिंधु को किसने कोचिंग दी?

उन्हें मुख्य रूप से हैदराबाद की पुलेला गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी में पुलेला गोपीचंद ने कोचिंग दी। अलग-अलग दौर में मुल्यो हांदोयो, किम जी-ह्युन, पार्क ताए सांग और दूसरे कोच भी उनके साथ रहे।

पी. वी. सिंधु ने कितने ओलंपिक पदक जीते हैं?

उन्होंने दो ओलंपिक पदक जीते हैं — रियो 2016 ओलंपिक में महिला सिंगल्स का रजत और टोक्यो 2020 ओलंपिक (जो 2021 में हुआ) में महिला सिंगल्स का कांस्य। वे दो ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं।

विश्व चैंपियनशिप में पी. वी. सिंधु का रिकॉर्ड क्या है?

उन्होंने विश्व चैंपियनशिप के पाँच पदक जीते हैं — कांस्य (2013), कांस्य (2014), रजत (2017), रजत (2018) और स्वर्ण (2019)। यह किसी भी भारतीय शटलर, पुरुष या महिला, का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। 2019 के स्वर्ण से वे BWF विश्व चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय बनीं।

पी. वी. सिंधु को कौन-कौन से पुरस्कार मिले हैं?

उन्हें अर्जुन पुरस्कार (2013), पद्म श्री (2015), मेजर ध्यानचंद खेल रत्न (2016) और पद्म भूषण (2020) समेत कई सम्मान मिले हैं।

क्या पी. वी. सिंधु की शादी हो चुकी है?

हाँ — उन्होंने 22 दिसंबर 2024 को उदयपुर में एक निजी समारोह में कारोबारी वेंकट दत्ता साई से शादी की।

पी. वी. सिंधु UPSC के लिए क्यों ज़रूरी हैं?

उनका करियर GS-II (खेल नीति, खेलो इंडिया, TOPS), GS-I (भारतीय समाज और खेल में महिलाएँ) और GS-IV / निबंध (लगन और मार्गदर्शन पर मूल्य-आधारित सवाल) में काम आता है, और खेल सम्मानों की आम तालिकाओं में भी आता है।