राजगड किला: शिवाजी की पहली राजधानी, उसकी तीन माची और बालेकिल्ला
राजगड किला एक नजर में: शिवाजी के शासन का पहला केंद्र, तीन माची और बालेकिल्ला, 1704 में औरंगजेब की घेराबंदी, और यह रायगड क्यों नहीं है।
राजगड किला (हिंदी में इसे राजगढ़ किला भी लिखा जाता है) महाराष्ट्र के पुणे जिले का एक पहाड़ी किला है। यह सह्याद्रि की एक ऊँची पहाड़ी धार (spur) पर बना है, तोरणा से करीब 5 मील पूरब में। इस पहाड़ी का पुराना नाम मुरुंबदेव था। छत्रपति शिवाजी महाराज ने 1640 के दशक के आखिर में इसकी किलेबंदी की, और अपने उभार के ज्यादातर दौर में यहीं से राज चलाया। रायगड उनकी राजधानी इसके बाद बना। यह किला अपनी इसी भूमिका के लिए जाना जाता है, और अपनी अलग तरह की बनावट के लिए भी। बीच में एक मुख्य गढ़ी है, और उससे तीन लंबी किलेबंद धारें बाहर की ओर निकलती हैं। इन्हें माची (machi) कहा जाता है।
नाम पर लगभग हर कोई अटकता है। नाम के लिहाज से राजगड और रायगड में अंतर सिर्फ एक अक्षर का है, और दोनों ही शिवाजी की राजधानी रहे। राजगड पहले आया। रायगड जाने की तारीख स्रोत के हिसाब से 1662 से 1674 के बीच कहीं भी रखी जाती है। खुद राजगड की शुरुआत की तारीख भी करीब 1646 से 1648 के बीच बदलती रहती है। यह नोट दोनों किलों को आमने-सामने रखता है और हर तारीख उसके स्रोत के साथ देता है। फिर यह माची वाली उस बनावट को समझाता है, जिसकी वजह से राजगड को घेरना इतना मुश्किल था।
राजगड किला कहाँ है और किस बात के लिए जाना जाता है
राजगड किला वह ठिकाना है, जहाँ से शिवाजी रायगड से पहले अपना बढ़ता हुआ राज्य चलाते थे। यह पश्चिमी घाट के पुणे वाले हिस्से में बना एक पहाड़ी किला है, जिसमें एक मुख्य गढ़ी और तीन धारें हैं। इतिहासकार जदुनाथ सरकार औरंगजेब की घेराबंदी का ब्योरा देते हुए पूरी पहाड़ी को एक ही गढ़ मानते हैं, और इस पहाड़ी का घेरा 24 मील का है। इस किले के बारे में सबसे पहले यही आकार याद रखिए।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| स्थान | पुणे जिला, महाराष्ट्र; उसी पहाड़ी धार पर तोरणा से करीब 5 मील पूरब में |
| पुराना नाम | मुरुंबदेव |
| किलेबंदी किसने की | शिवाजी ने, करीब 1646 से 1648 के बीच |
| मुख्य दौर | 1640 के दशक के आखिर से रायगड जाने तक (जिसकी तारीख 1662 से 1674 के बीच रखी जाती है) शिवाजी के शासन का केंद्र |
| ऊँचाई | समुद्र तल से 1,376 मीटर, महाराष्ट्र पर्यटन के आँकड़े के मुताबिक |
| बनावट | एक बालेकिल्ला (citadel), साथ में तीन माची: पद्मावती, सुवेला और संजीवनी |
| बाद के कब्जेदार | मुगल, करीब जुलाई 1689 में और फिर फरवरी 1704 में; बीच में और उसके बाद मराठा |
| संरक्षण | राज्य-संरक्षित, महाराष्ट्र के पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय के तहत |
| UNESCO दर्जा | भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य (Maratha Military Landscapes of India) का एक हिस्सा, 2025 में मानदंड (iv) और (vi) के तहत सूची में शामिल |
शिवाजी के हाथ राजगड कैसे आया
शिवाजी ने करीब 1646 में पास का तोरणा किला लिया, और फिर उसके 5 मील पूरब वाली पहाड़ी की किलेबंदी की। यही पहाड़ी आगे चलकर राजगड बनी। इसका सबसे साफ ब्योरा जदुनाथ सरकार देते हैं। तोरणा किसी लड़ाई से नहीं, एक चाल से हाथ आया। उसके बीजापुरी किलेदार को हटा दिया गया, और शिवाजी को वहाँ करीब 2 लाख हून (उस दौर का सोने का सिक्का) का सरकारी खजाना मिला। उन्होंने तोरणा का नाम बदलकर प्रचंडगढ़ रखा, लेकिन यह नाम टिका नहीं। फिर उसी धार की चोटी पर उन्होंने राजगड खड़ा किया, और पहाड़ी की निचली सीढ़ीदार सतहों पर दीवारों से घिरे तीन मोर्चे (redoubt) बनवाए।
शुरुआत को सारे स्रोत एक ही तरह से नहीं बताते, और इसकी वजह समझ लेना काम का है:
- जदुनाथ सरकार राजगड को एक नया किला मानते हैं, जिसे शिवाजी ने बनवाया।
- महाराष्ट्र पर्यटन के मुताबिक किले का मूल नाम मुरुंबदेव था, और शिवाजी ने इसे 1647 में जीता।
- कोलाबा गजेटियर रायगड के बारे में लिखते हुए राजगड को बस उनकी पुरानी राजधानी कहता है।
ये ब्योरे तब आपस में बैठ जाते हैं, जब मान लें कि पहाड़ी पर पहले से कोई पुरानी चौकी थी, जिसे कब्जे में लेकर कहीं बड़े पैमाने पर दोबारा बनाया गया। लेकिन यह एक अनुमान है, स्रोत खुद ऐसा नहीं कहते। इसलिए उत्तर में सबसे ईमानदार क्रिया “किलेबंदी की” है, “बनवाया” या “जीता” नहीं। नतीजे पर कोई शक नहीं है। जदुनाथ सरकार बताते हैं कि 1648 तक छत्रपति शिवाजी महाराज के इलाके की दक्षिणी सीमा पर राजगड और तोरणा खड़े थे। ये पहाड़ी किलों की एक कड़ी थे, जो पुणे के इलाके की चौकसी करती थी।
बीजापुर को इसकी खबर लगी। जदुनाथ सरकार लिखते हैं कि इन आक्रामक कदमों की शिकायत दरबार तक पहुँची, लेकिन शिवाजी ने रिश्वत देकर मंत्रियों को अपने पक्ष में रखा। इससे उन्हें वे साल मिल गए, जिनकी उन्हें काम पूरा करने के लिए जरूरत थी।
राजगड: शिवाजी के शासन का केंद्र
राजगड शिवाजी के शासन का पहला केंद्र था। 1640 के दशक के आखिर से लेकर रायगड के उसकी जगह लेने तक, परिवार की जिंदगी और राज्य का कामकाज, दोनों यहीं से चलते थे। महाराष्ट्र पर्यटन इसे 26 से ज्यादा साल गिनता है, 1647 से 1674 तक। कोलाबा गजेटियर के स्रोत रायगड को चुनने की तारीख इससे पहले रखते हैं: खाफी खान के मुताबिक 1662, और एस. वी. अवलस्कर के मुताबिक 1672।
तारीखों वाली घटनाएँ बताती हैं कि इस किले में लोग सचमुच रहते थे, इसे सिर्फ कब्जे में नहीं रखा गया था:
- 5 सितंबर 1659: शिवाजी की पहली पत्नी और संभाजी की माँ सईबाई का राजगड में निधन हुआ। यह अफजल खान से हुई मुठभेड़ से दो महीने पहले की बात है।
- फरवरी 1664: सूरत की पहली लूट के बाद शिवाजी राजगड लौटे। महाराष्ट्र पर्यटन के मुताबिक सूरत से आया धन यहीं रखा गया।
- 5 मार्च 1666: वे अपने परिवार को राजगड में छोड़कर बेटे संभाजी के साथ आगरा के लिए निकले।
- 12 सितंबर 1666: आगरा से बच निकलने के बाद वे वापस राजगड पहुँचे। जदुनाथ सरकार जेधे शकावली में दी गई बाद की तारीख, 20 नवंबर, को नहीं मानते।
- 1668 और 1669: कारवार के अंग्रेज व्यापारी बताते हैं कि वे राजगड में चुपचाप रह रहे थे।
- 24 फरवरी 1670: उनके छोटे बेटे राजाराम का जन्म राजगड में हुआ।
आखिरी तीन बिंदुओं को साथ रखकर देखिए, तारीख की उलझन छोटी हो जाती है। 1660 के दशक के आखिर तक शिवाजी का ठिकाना राजगड ही था। इसलिए 1662 में एकदम साफ बदलाव की बात मानना मुश्किल है, भले ही खाफी खान इस बात में सही हों कि रायगड उसी समय के आसपास चुना गया। सुरक्षित जवाब के दो हिस्से हैं। पहला, राजगड शासन का पहला केंद्र था। दूसरा, 1674 के राज्याभिषेक से रायगड औपचारिक रूप से राजधानी बना, और बीच के साल धीरे-धीरे हुए बदलाव के साल थे। बाद वाली उस राजधानी और खुद राज्याभिषेक की पूरी बात रायगड किला वाले नोट में है।
परिवार की घटनाओं की तारीखें कहाँ से आती हैं, इस पर एक-एक वाक्य काफी है। सईबाई के निधन की तारीख जदुनाथ सरकार जेधे शकावली से लेते हैं, जो घटनाओं को तारीख के साथ दर्ज करने वाली एक मराठी पोथी है। राजाराम के जन्म की तारीख वे शिवाजी के परिवार पर लिखे अपने परिशिष्ट में देते हैं। ये दोनों घटनाएँ राजगड में ही हुईं, यह बात महाराष्ट्र पर्यटन के किले वाले ब्योरे से आती है।
राजगड और पुरंदर की संधि
1665 की पुरंदर की संधि के तहत शिवाजी ने किलों का एक बड़ा हिस्सा मुगल सेनापति मिर्जा राजा जय सिंह को सौंप दिया, लेकिन राजगड उनके पास ही रहा। यह संधि उनके शुरुआती दौर का सबसे बुरा मोड़ है। और यहीं पर तैयारी करने वाले छात्र राजगड को लेकर सबसे ज्यादा गलती करते हैं।
कितने किले सौंपे गए, यह स्रोत पर निर्भर करता है। जदुनाथ सरकार उन 23 किलों की बात करते हैं, जो शिवाजी ने जय सिंह के समय छोड़े थे। पुराना पूना जिला गजेटियर ग्रांट डफ के हवाले से कहता है कि उन्होंने अपने 32 में से 20 किले दिए। इन्हीं में पुरंदर और सिंहगड भी थे। जो भी आँकड़ा लें, पुणे के इलाके का दिल कुछ समय के लिए मुगल साम्राज्य के हाथ चला गया।
राजगड सौंपे गए किलों में नहीं था, इसका सबूत संधि के बाद की घटनाओं में ही मिल जाता है। मार्च 1666 में जब शिवाजी आगरा में औरंगजेब के दरबार के लिए निकले, तो जदुनाथ सरकार के मुताबिक वे अपना परिवार राजगड में छोड़कर गए। और आगरा से बच निकलने के बाद वे राजगड ही लौटे। उनके बड़े बेटे, जो आगे चलकर छत्रपति संभाजी बने, इस सफर में उनके साथ थे, और कुछ महीने बाद एक अलग रास्ते से घर लौटे। जिस किले में आप अपनी माँ और पूरा घर-परिवार छोड़कर जाते हैं, वह किला आपके ही हाथ में होता है।
शिवाजी के बाद राजगड का क्या हुआ
राजगड किले का इतिहास 1689 से 1704 के बीच सबसे तेजी से बदला, जब यह तीन बार एक हाथ से दूसरे हाथ गया। मुगलों ने इसे करीब जुलाई 1689 में लिया, मराठों ने 1690 में इसे वापस जीत लिया, और फिर दस हफ्ते से ज्यादा चली घेराबंदी के बाद फरवरी 1704 में औरंगजेब ने इसे दोबारा ले लिया।
पहली बार यह किला उस बिखराव में हाथ से निकला, जो 1689 की शुरुआत में संभाजी के पकड़े जाने के बाद आया। उस समय एक के बाद एक किले या तो गिरे या खरीद लिए गए। जदुनाथ सरकार लिखते हैं कि मुगलों ने राजगड अबुल खैर को सौंपा, जो लंबे समय तक जुन्नर का किलेदार रह चुका था। जब एक मराठा टुकड़ी ने पहाड़ी के आसपास ताकत दिखाई, तो उसकी हिम्मत जवाब दे गई और वह भाग निकला। राजाराम उस समय जिंजी में थे, और घर के इलाके का कामकाज दो मराठा सरदार, रामचंद्र और शंकराजी, संभाल रहे थे। इन्हीं दोनों ने 1690 में राजगड वापस जीता। साथ में तोरणा और आसपास के दूसरे किले भी वापस आए। 1694 तक शंकराजी राजगड से मुहिमें भेज रहे थे, और एक गद्दार को इसके बालेकिल्ले में कैद करके रखे हुए थे।
दूसरी बार इसे खुद औरंगजेब ने लिया। 1699 से यह बूढ़ा बादशाह छह साल तक बड़े मराठा पहाड़ी किलों को एक-एक करके घेरता रहा। उसकी फौज राजगड पहुँची और 2 दिसंबर 1703 को घेराबंदी शुरू हुई। किला 16 फरवरी 1704 तक टिका रहा। पूरे अभियान पर जदुनाथ सरकार का फैसला ही याद रखने वाली लाइन है: तोरणा को छोड़कर इनमें से कोई भी किला हमले से नहीं जीता गया। हर किले ने कुछ समय बाद, और कीमत लेकर, हथियार डाले।
यानी रायगड की तरह राजगड भी कभी धावा बोलने वाली टुकड़ी के हाथ नहीं गिरा। एक चालू गढ़ के तौर पर इसकी कहानी मराठा साम्राज्य के पतन के साथ खत्म होती है, जिसे ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1818 में हराया।
माची: राजगड की बनावट कैसी है
राजगड एक मुख्य गढ़ी है, जिससे तीन किलेबंद धारें निकलती हैं। माची चोटी से नीचे की ओर दीवार से घिरी एक सीढ़ीनुमा सतह या धार होती है, यानी एक किलेबंद चबूतरा, जिसकी अपनी दीवारें और अपने दरवाजे होते हैं। बालेकिल्ला किले का मुख्य गढ़ होता है, यानी सबसे ऊँचा हिस्सा, जिसे सबसे आखिर तक बचाया जाता है। जदुनाथ सरकार माचियों को दीवारों से घिरे मोर्चे कहते हैं, और मोर्चा ठीक यही होता है: किले का एक घिरा हुआ बाहरी हिस्सा, जो अपने दम पर लड़ सकता है।
महाराष्ट्र पर्यटन इसके चार हिस्सों को इस तरह बताता है:
- पद्मावती माची: किले का दिल और शाही निवास। यहाँ पद्मावती मंदिर, पद्मावती तालाब और महल के खंडहर हैं।
- संजीवनी माची: पश्चिम की ओर। इसे एक के पीछे एक, किलेबंदी की तीन परतें घेरती हैं।
- सुवेला माची: पूरब की ओर, एक पतली धार। इसमें नेढे है, यानी चट्टान के आर-पार बना एक कुदरती छेद।
- बालेकिल्ला: सबसे ऊँचा हिस्सा, जिसमें शाही आवास के अवशेष हैं।
अब इस किले को उस नजर से देखिए, जिससे किसी घेरने वाले को देखना पड़ता। आज भी ऊपर जाने के आम रास्ते इन्हीं धारों के साथ चलते हैं: गुंजवणे रास्ता पद्मावती माची तक चढ़ता है, और ज्यादा खड़ी चढ़ाई वाला पाली रास्ता संजीवनी माची तक पहुँचता है। जो फौज जोर लगाकर किसी एक माची पर पहुँच जाती, वह किले के अंदर नहीं होती थी। वह एक पतली धार पर खड़ी होती, ऊपर बालेकिल्ला होता, और बाकी दो माचियों पर अब भी सैनिक तैनात होते। हर माची जिस धार की रखवाली करती थी, उसकी पूरी लंबाई पर मार कर सकती थी।
इस बनावट का विचार एक लाइन में यही है: राजगड अपनी रक्षा तीन धारों पर फैला देता है, ताकि हमलावर को अपनी फौज बाँटनी पड़े, जबकि किले की सेना (garrison) एक चबूतरे से दूसरे चबूतरे पर पीछे हटती जाए। इस बनावट की कीमत है इसका आकार। इसकी ठीक से नाकेबंदी करने के लिए घेरने वाले को 24 मील के ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी घेरे को ढकना पड़ता था। इसीलिए औरंगजेब की फौज को एक सीधे हमले की जगह दस हफ्ते और एक सौदे की जरूरत पड़ी।
दोनों राजधानियों की तुलना कीजिए, फर्क खुद समझ में आ जाता है। रायगड खड़ी चट्टानों से घिरी पहाड़ी पर ऊपर जाने वाला एक ही रास्ता बंद करता है, और अपनी पूरी ताकत एक दरवाजे पर झोंक देता है। राजगड कई धारें सामने रखता है और हर एक की रक्षा करता है। तीसरा नमूना दौलताबाद किला है, जिसने अपनी खड़ी चट्टान खुद काटकर बनाई और हर हमलावर को एक अंधेरी सुरंग में धकेल दिया। तीन किले, और एक ही सवाल के तीन जवाब: किसी पहाड़ी को टिकाऊ गढ़ कैसे बनाया जाए।
राजगड किला आज
राजगड किला आज UNESCO के एक विश्व धरोहर स्थल का हिस्सा है। संस्कृति मंत्रालय के मुताबिक 11 जुलाई 2025 को पेरिस में विश्व धरोहर समिति के 47वें सत्र में भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य को देश की 44वीं विश्व धरोहर संपत्ति के रूप में सूची में शामिल किया गया। इस फैसले पर Anantam IAS का करेंट अफेयर्स नोट सभी 12 किलों के नाम देता है, और UNESCO की सूची वाला पेज मानदंड बताता है।
सीधे शब्दों में, मानदंड (iv) किसी खास तरह की इमारत या भू-दृश्य के असाधारण उदाहरण को मान्यता देता है, जो इतिहास के किसी दौर को दिखाता हो। यहाँ वह उदाहरण किलों का एक जाल है, जिसे सह्याद्रि और समुद्र तट का फायदा उठाने के लिए बनाया गया। मानदंड (vi) असाधारण महत्व वाली घटनाओं या परंपराओं से सीधे जुड़ाव को मान्यता देता है। राजगड का दावा उन सालों पर टिका है, जब यह शिवाजी के शासन का केंद्र था।
राजगड का संरक्षण उसके ज्यादा मशहूर पड़ोसियों से अलग है। यह राज्य-संरक्षित है। यह उन चार हिस्सों में से एक है, जिनकी देखरेख महाराष्ट्र का पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय करता है। वहीं रायगड और शिवनेरी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में हैं। प्रीलिम्स के कथन वाले सवाल में जाल अक्सर इसी एक शब्द, “राज्य”, में छिपा होता है। बड़ी तस्वीर के लिए भारत में UNESCO विश्व धरोहर स्थल वाला नोट देखिए।
आज किले पर दबाव जितना उसकी उम्र से है, उतना ही उसकी लोकप्रियता से भी। महाराष्ट्र पर्यटन पद्मावती मंदिर के पास रात भर की कैंपिंग का प्रचार करता है, साथ ही पहाड़ी पर चढ़ने के तीन ट्रेकिंग रास्तों का भी। लंबी धारों पर फैले खंडहर पर इतनी आवाजाही संभालना मुश्किल है। UNESCO की सूची में आने से राज्य की देखरेख ज्यादा नजर में आती है, और इससे यह उम्मीद भी बढ़ जाती है कि वह देखरेख असल में क्या करके दिखाए।
परीक्षा के लिए राजगड किला कैसे पढ़ें
राजगड सिलेबस के दो अध्यायों में आता है। पहला, मध्यकालीन इतिहास में मराठा राज्य का उदय। दूसरा, कला और संस्कृति वाले हिस्से में किलों की वास्तुकला, और अब तो इसे भारत की धरोहर सूची में जगह भी मिल चुकी है। इसे शायद ही कभी अकेले पढ़ा जाता है। इसे रायगड के मुकाबले में पढ़ा जाता है, इसलिए इसे एक जोड़ी के पहले हिस्से की तरह याद कीजिए।
इस किले का सबसे अच्छा इस्तेमाल मराठा राज्य पर पूछे गए किसी बड़े सवाल के भीतर होता है। इतिहास ऑप्शनल 2026, पेपर I में पूछा गया: “शिवाजी से पेशवा बालाजी बाजीराव तक मराठा राजव्यवस्था के सफर का खाका खींचिए। पानीपत की तीसरी लड़ाई (1761) का मराठा राज्य पर क्या असर पड़ा? विश्लेषण कीजिए।” शासन के पहले केंद्र के रूप में राजगड के साल ही वह जगह हैं, जहाँ से यह सफर शुरू होता है।
इतिहास ऑप्शनल 2024, पेपर I का सवाल किले के और करीब आया: “बड़ी और ज्यादा जमी-जमाई सेनाओं के खिलाफ मराठों की सैन्य सफलताओं में उनकी छापामार युद्ध-नीति ने किस तरह योगदान दिया?” इस उत्तर में राजगड छापामार युद्ध के दूसरे पहलू के रूप में आता है। पहाड़ी किलों की कड़ी ने तेजी से घूमने वाली टुकड़ियों को हमला करने के लिए एक अड्डा दिया, और लौटकर टिकने के लिए एक चट्टान। राजगड की माचियों ने एक अकेली पहाड़ी को खुद औरंगजेब की फौज के सामने दस हफ्ते तक टिकाए रखा।
प्रीलिम्स की बात करें, तो Anantam IAS के प्रीलिम्स प्रश्न बैंक में 2013 से 2026 तक के 1,403 सवालों में से 94 पर कला और संस्कृति का टैग लगा है। किलों की वास्तुकला इसी हिस्से में आती है। यानी मोटे तौर पर पंद्रह में से एक सवाल।
दोहराने के लिए ये तथ्य पक्के कर लीजिए:
- पुराना नाम मुरुंबदेव; शिवाजी ने करीब 1646 से 1648 के बीच इसकी किलेबंदी की, तोरणा से 5 मील पूरब में।
- शासन का पहला केंद्र; रायगड जाने की तारीख 1662 से 1674 के बीच रखी जाती है, और 1674 में रायगड औपचारिक राजधानी बना।
- 1659 में सईबाई का निधन यहीं हुआ, और 1670 में राजाराम का जन्म भी यहीं हुआ।
- पुरंदर की संधि (1665) के बाद भी शिवाजी के पास रहा। जदुनाथ सरकार की गिनती के मुताबिक इस संधि में उन्होंने 23 किले छोड़े।
- मुगलों ने इसे करीब जुलाई 1689 में लिया, 1690 में यह वापस जीता गया, और 2 दिसंबर 1703 से चली घेराबंदी के बाद फरवरी 1704 में इसे औरंगजेब को सौंप दिया गया।
- बनावट: एक बालेकिल्ला, साथ में तीन माची: पद्मावती, सुवेला और संजीवनी।
- राज्य-संरक्षित; भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य का हिस्सा, जिसे 2025 में सूची में शामिल किया गया।
तीन उलझनों पर एक-एक लाइन जरूरी है। रायगड, रायगड जिले का वह किला है जहाँ राज्याभिषेक हुआ; राजगड पुणे जिले की पहले वाली राजधानी है, जो रायगड से करीब 20 मील पूरब में है। पुरानी किताबें इसे Rajgarh लिखती हैं, और मध्य प्रदेश के एक जिले का नाम भी राजगढ़ है। जदुनाथ सरकार तो जिंजी के किले की सबसे ऊँची पहाड़ी के लिए भी “Rajgarh” लिखते हैं। जिंजी यानी गिंगी, जो इसी UNESCO धरोहर का एक और हिस्सा है। इसलिए नाम पढ़ने से पहले संदर्भ पढ़िए।
| किला | जिला | शिवाजी के समय भूमिका | संरक्षण किसके पास |
|---|---|---|---|
| शिवनेरी | पुणे (जुन्नर के पास) | जन्मस्थान; शिवाजी के कब्जे में कभी नहीं रहा | ASI |
| राजगड | पुणे (तोरणा के पूरब में) | 1640 के दशक के आखिर से शासन का पहला केंद्र | महाराष्ट्र का पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय |
| रायगड | रायगड (महाड के पास) | राजधानी; 1674 में राज्याभिषेक; 1680 में मृत्यु | ASI |
राजगड वह जगह है, जहाँ मराठा राज्य ने खुद को राजशाही कहलाने से पहले राज चलाना सीखा। अगर आप इसे रायगड के मुकाबले सही जगह रख पाते हैं, और समझा पाते हैं कि इसकी माचियों ने औरंगजेब को सौदे तक क्यों पहुँचाया, तो इस किले के बारे में आपके पास ज्यादातर उत्तरों से ज्यादा सामग्री है।
सामान्य प्रश्न
राजगड किला किसने बनवाया?
छत्रपति शिवाजी ने 1640 के दशक के आखिर में राजगड की किलेबंदी की। यह पास के तोरणा किले को करीब 1646 में लेने के कुछ ही समय बाद की बात है। जदुनाथ सरकार इसे उनका बनवाया हुआ एक नया किला बताते हैं, जिसमें दीवारों से घिरी तीन सीढ़ीनुमा सतहें थीं। वहीं महाराष्ट्र पर्यटन कहता है कि इस पहाड़ी का पहले नाम मुरुंबदेव था, और इसे 1647 में जीता गया।
क्या राजगड शिवाजी की राजधानी था?
हाँ। राजगड शिवाजी के शासन का पहला केंद्र था, 1640 के दशक के आखिर से लेकर तब तक, जब तक रायगड ने उसकी जगह नहीं ले ली। स्रोत इस बदलाव की तारीख 1662 से 1674 के बीच रखते हैं, और 1674 के राज्याभिषेक के साथ रायगड औपचारिक राजधानी बना।
राजगड और रायगड में क्या अंतर है?
ये दो अलग किले हैं, जो एक-दूसरे से करीब 20 मील दूर हैं। पुणे जिले का राजगड पहले वाली राजधानी था, जहाँ राजाराम का जन्म हुआ और सईबाई का निधन हुआ। रायगड जिले में महाड के पास का रायगड बाद वाली राजधानी था, जहाँ 1674 में शिवाजी का राज्याभिषेक हुआ और 1680 में उनकी मृत्यु हुई।
राजगड किले की माची क्या हैं?
माची चोटी से नीचे की ओर दीवार से घिरी एक सीढ़ीनुमा सतह या धार होती है, जिसकी रक्षा अलग से की जा सकती है। राजगड में ऐसी तीन माची हैं, पद्मावती, सुवेला और संजीवनी, जो बीच के मुख्य गढ़ यानी बालेकिल्ले के चारों ओर फैली हैं। पद्मावती माची पर शाही निवास और पद्मावती मंदिर था।
राजगड किले का पुराना नाम क्या था?
महाराष्ट्र पर्यटन के मुताबिक इस पहाड़ी का पहले नाम मुरुंबदेव था। 1640 के दशक के आखिर में इसकी किलेबंदी करने के बाद शिवाजी ने इसका नाम राजगड रखा, जिसका मतलब है राजा का किला।
क्या राजगड किला UNESCO विश्व धरोहर स्थल है?
हाँ। राजगड भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य के 12 हिस्सों में से एक है, जिसे 11 जुलाई 2025 को मानदंड (iv) और (vi) के तहत विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। रायगड और शिवनेरी से अलग, इसका संरक्षण ASI नहीं, बल्कि महाराष्ट्र का पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय करता है।
क्या औरंगजेब ने राजगड किला जीता था?
हाँ, असल में दो बार। मुगल सेना ने करीब जुलाई 1689 में राजगड लिया और 1690 में उसे खो दिया। फिर औरंगजेब ने 2 दिसंबर 1703 से खुद इसकी घेराबंदी की, जब तक कि 16 फरवरी 1704 को किले ने हथियार नहीं डाल दिए। उस अभियान के ज्यादातर किलों की तरह यह भी हमले से नहीं गिरा, बल्कि शर्तों पर सौंपा गया।
अभ्यास प्रश्न
प्रीलिम्स MCQ
1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रायगड से पहले राजगड शिवाजी के शासन का केंद्र था। 2. शिवाजी का 1674 का राज्याभिषेक राजगड में हुआ था। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (a) राजगड पहले वाला शासन का केंद्र था; राज्याभिषेक रायगड में हुआ था।
2. राजगड किले के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में है। 2. यह भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य का एक हिस्सा है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (b) राजगड UNESCO की सीरियल प्रॉपर्टी (कई जगहों को मिलाकर बनी एक धरोहर) का हिस्सा है, लेकिन इसका संरक्षण ASI नहीं, बल्कि महाराष्ट्र का पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय करता है।
3. निम्नलिखित में से कौन-सी राजगड किले की माची (किलेबंद पहाड़ी धार) हैं? 1. पद्मावती 2. सुवेला 3. संजीवनी 4. टकमक। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- (a) केवल 1, 2 और 3
- (b) केवल 1 और 4
- (c) केवल 2, 3 और 4
- (d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: (a) टकमक टोक रायगड पर खड़ी चट्टान का एक सिरा है, राजगड की माची नहीं।
4. निम्नलिखित में से कौन-सी एक घटना राजगड किले से जुड़ी है?
- (a) शिवाजी का राज्याभिषेक
- (b) 1670 में राजाराम का जन्म
- (c) शिवाजी का जन्म
- (d) 1680 में शिवाजी की मृत्यु
उत्तर: (b) राजाराम का जन्म 24 फरवरी 1670 को राजगड में हुआ था; बाकी घटनाएँ रायगड और शिवनेरी से जुड़ी हैं।
5. 1703-04 में औरंगजेब की राजगड की घेराबंदी किस तरह खत्म हुई?
- (a) सीधे हमले से किला जीत लिया गया
- (b) करीब दस हफ्ते बाद किले की सेना ने हथियार डाल दिए
- (c) मानसून आने पर मुगलों ने घेराबंदी छोड़ दी
- (d) सुरंग में बारूद भरकर किले को उड़ा दिया गया
उत्तर: (b) घेराबंदी 2 दिसंबर 1703 से 16 फरवरी 1704 तक चली, और शर्तों पर हथियार डालने के साथ खत्म हुई।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
- राजगड की माची वाली बनावट ने उसकी रक्षा को किस तरह आकार दिया, समझाइए। साथ ही, रायगड जैसे एक ही रास्ते वाले किले से इसकी तुलना कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
- “राजगड एक उभरते हुए राज्य की राजधानी था; रायगड उस राज्य की राजधानी था, जिसका राज्याभिषेक हो चुका था।” चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
- पुरंदर की संधि (1665) की शर्तों का परीक्षण कीजिए, और शिवाजी के किलों के जाल पर उनके असर का मूल्यांकन कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
- 1699 से मराठा पहाड़ी किलों के खिलाफ औरंगजेब के अभियान को अक्सर थका-थकाकर लड़ा गया युद्ध (war of attrition) कहा जाता है। राजगड और तोरणा के संदर्भ में इस मत का मूल्यांकन कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
- भारतीय कला विरासत का संरक्षण इस समय की जरूरत है। चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2018, GS पेपर I।