संपदा 2.0: मध्य प्रदेश में संपत्ति रजिस्ट्री, ई-स्टांप और गाइडलाइन मूल्य की पूरी गाइड
संपदा 2.0 की पूरी जानकारी: साइन-अप, लॉगिन, ई-स्टांप, वीडियो KYC से फेसलेस रजिस्ट्री, गाइडलाइन मूल्य की जाँच, और मध्य प्रदेश के संपत्ति पोर्टल पर लगने वाले शुल्क।
संपदा 2.0 मध्य प्रदेश का ऑनलाइन सिस्टम है, जिस पर संपत्ति के दस्तावेजों का पंजीयन होता है और ई-स्टांप खरीदे जाते हैं। इसे राज्य के वाणिज्यिक कर विभाग के तहत महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक चलाते हैं। यह 10 अक्टूबर 2024 को पूरे राज्य में लागू हुआ। इसने पुराने संपदा पोर्टल की जगह ली, जो जुलाई 2015 से ई-पंजीयन संभाल रहा था। अगर आप इंदौर में फ्लैट खरीद रहे हैं, या दुबई में बैठकर रतलाम के किसी प्लॉट की पावर ऑफ अटॉर्नी पर दस्तखत कर रहे हैं, तो डीड और उस पर लगने वाला स्टांप शुल्क, दोनों संपदा 2.0 से होकर गुजरेंगे।
ज्यादातर लोग एक गलत धारणा लेकर आते हैं: कि नया पोर्टल घर बैठे किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री करा देता है। ऐसा नहीं है, कम से कम हर डीड के लिए तो नहीं। राज्य के मुताबिक लगभग 140 में से 75 तरह के दस्तावेज वीडियो KYC के जरिए बिना दफ्तर गए, यानी फेसलेस तरीके से रजिस्टर हो सकते हैं। वह भी तभी, जब जमीन या नगरीय रिकॉर्ड पहले से रिकॉर्ड रखने वाले विभाग के पास हो और हर पक्षकार ने आधार ई-KYC कर लिया हो। बाकी सब मामलों में आखिर में उप-पंजीयक के दफ्तर में बुक किया गया स्लॉट ही रास्ता है। यह गाइड पहले बताती है कि आपका रास्ता कौन-सा है। फिर यह साइन-अप, लॉगिन, ई-स्टांप, ई-रजिस्ट्री और गाइडलाइन मूल्य देखने का पूरा तरीका समझाती है।
संपदा 2.0 एक नजर में
SAMPADA का पूरा नाम Stamps and Management of Property and Documents Application है। नीचे की तालिका में बुनियादी जानकारी है, जो विभाग के अपने मैनुअल और राज्य सरकार की प्रेस विज्ञप्तियों से ली गई है।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| संचालन | महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक (IGRS), वाणिज्यिक कर विभाग, मध्य प्रदेश सरकार |
| पोर्टल | sampada.mpigr.gov.in, साथ में संपदा 2.0 मोबाइल ऐप |
| शुरुआत | अप्रैल 2024 में गुना, हरदा, डिंडोरी और रतलाम में पायलट; 10 अक्टूबर 2024 से पूरे राज्य में |
| किसकी जगह ली | संपदा 1.0 की, जो 1 जुलाई 2015 से ई-पंजीयन के लिए इस्तेमाल हो रहा था |
| मुख्य सेवाएँ | नागरिक पंजीकरण, ई-स्टांप, ई-रजिस्ट्री (दफ्तर में, इंटरैक्टिव वीडियो KYC से या खुद रिकॉर्ड किए गए वीडियो KYC से), संपत्ति का मूल्यांकन, गाइडलाइन मूल्य, दस्तावेज खोज और प्रमाणित प्रति, रिफंड |
| भुगतान | संपदा वॉलेट, या मध्य प्रदेश साइबर ट्रेजरी के जरिए ऑनलाइन भुगतान |
| पोर्टल पर दिखने वाले शुल्क | वीडियो KYC ₹500; प्रमाणित प्रति ₹300; स्टांप शुल्क और पंजीयन शुल्क दस्तावेज के हिसाब से |
| मदद | हेल्पडेस्क 0755-2780133, और पोर्टल के भीतर “Raise Ticket” |
| सम्मान | राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार 2025 (DARPG) |
संपदा 2.0 क्या करता है और यह किसके लिए है
संपदा 2.0 सौदा तय होने से लेकर रजिस्टर्ड डीड हाथ में आने तक का हर कदम संभालता है। एक ही खाते में यह पोर्टल:
- स्टांप शुल्क की गणना करता है, यानी वह टैक्स जो राज्य किसी कानूनी दस्तावेज पर लगाता है;
- ई-स्टांप जारी करता है, जो साबित करता है कि शुल्क चुका दिया गया है;
- टेम्पलेट से डीड का मसौदा बनाता है और सभी के ई-हस्ताक्षर जुटाता है;
- उप-पंजीयक के यहाँ दस्तावेज का पंजीयन करता है।
रजिस्टर्ड प्रति फिर पक्षकारों तक ईमेल और व्हाट्सऐप से पहुँचती है। अक्टूबर 2024 के लॉन्च नोट में डिजीलॉकर भी जोड़ा गया है, जिसके बारे में डिजीलॉकर पर हमारा लेख विस्तार से बताता है।
संपदा 1.0 से असली बदलाव यह है कि डेटा कहाँ से आता है। पुराने सिस्टम में जिला, तहसील, वार्ड और गाइडलाइन लोकेशन ड्रॉप-डाउन से चुननी पड़ती थी। क्षेत्रफल भी खुद भरना पड़ता था। नया सिस्टम संपत्ति का ब्योरा उन विभागों से खींच लेता है, जिनके पास उसका रिकॉर्ड रहता है:
- खेती की जमीन के लिए आयुक्त भू-अभिलेख (CLR), जहाँ खोज लैंड पार्सल ID या ULPIN से होती है;
- नगरीय संपत्ति ID के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (UADD);
- पंचायत संपत्ति ID के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग (PNRD)।
यह वही अधिकार-अभिलेख का डेटा है, जिसे भारत में भू-अभिलेख प्रबंधन की राष्ट्रीय मुहिम साफ-सुथरा करने में लगी है। अगर उस रिकॉर्ड में मालिक का नाम और विक्रेता के आधार ई-KYC का नाम एक जैसा है, तो डीड का ज्यादातर हिस्सा अपने आप भर जाता है। अगर नहीं, तो आपका समय डीड ठीक करने में नहीं, रिकॉर्ड ठीक करने में जाएगा।
यह पोर्टल चार तरह के यूजर्स के लिए है:
- नागरिक, भारतीय या अनिवासी, जो संपत्ति खरीदते, बेचते, दान करते, लीज पर देते या गिरवी रखते हैं
- कानूनी संस्थाएँ, जैसे कंपनियाँ, फर्म, सोसाइटी और बैंक, जो किसी अधिकृत व्यक्ति के जरिए पंजीकरण करती हैं
- सेवा प्रदाता, यानी लाइसेंसधारी डीड लेखक, जो दूसरों के लिए दस्तावेज तैयार करते हैं
- आंशिक यूजर, जो सिर्फ रजिस्टर्ड दस्तावेज खोजना और उनकी प्रमाणित प्रतियाँ खरीदना चाहते हैं
नागरिक के तौर पर संपदा 2.0 रजिस्ट्रेशन कैसे करें
संपदा 2.0 रजिस्ट्रेशन का मतलब है अपना यूजर खाता बनाना, और यह आधार ई-KYC से जुड़ा है। ई-रजिस्ट्री के हर पक्षकार का रजिस्टर्ड यूजर होना जरूरी है। इसलिए खरीदार, विक्रेता और हर गवाह को एक बार यह प्रक्रिया पूरी करनी होती है। शुरू करने से पहले वह फोन पास रखिए, जो आपके आधार से लिंक है।
- sampada.mpigr.gov.in खोलिए और “Register” पर क्लिक कीजिए।
- “Register as Citizen” चुनिए। कंपनी, फर्म या बैंक के लिए “Register as Legal Entity” चुनिए।
- भारतीय नागरिक या अनिवासी भारतीय, इन दोनों में से एक चुनिए।
- अपना मोबाइल नंबर डालिए, “Get OTP” पर क्लिक कीजिए, OTP भरिए और सबमिट कीजिए।
- आधार ई-KYC के लिए अपना आधार नंबर या VID डालिए। फिर मोबाइल OTP, फिंगरप्रिंट या आइरिस में से एक तरीका चुनिए, सहमति दीजिए और सत्यापन कीजिए।
- आधार से अपने आप भरे ब्योरे जाँचिए। फिर बाकी व्यक्तिगत ब्योरा, स्थायी पता, संपर्क का ब्योरा और खाते का ब्योरा भरिए।
- शर्तें स्वीकार कीजिए और सबमिट कीजिए।
अनिवासी भारतीय आधार ई-KYC की जगह पासपोर्ट नंबर डालते हैं और पासपोर्ट की PDF अपलोड करते हैं। उसके बाद वे भी पते और खाते वाली वही स्क्रीनें भरते हैं। कंपनियाँ CIN, GSTIN या PAN से अपना सत्यापन करती हैं। साथ ही वे उस व्यक्ति के नाम एक अधिकार-पत्र अपलोड करती हैं, जो उनकी ओर से काम करेगा।
अगर आपको सिर्फ दस्तावेज खोजने हैं, तो लॉगिन स्क्रीन पर एक हल्का रास्ता भी है: “Citizen Registration for Document Search/Certified Copy”। इसमें आपका नाम, एक मोबाइल नंबर और एक ईमेल ID माँगी जाती है, और हर एक का सत्यापन OTP से होता है।
संपदा 2.0 लॉगिन कैसे होता है
संपदा 2.0 लॉगिन के दो रास्ते हैं, और दोनों होम पेज के “Login” बटन से शुरू होते हैं।
- “Login” पर क्लिक कीजिए और “Citizen/Service provider” विकल्प चुनिए।
- या तो अपना यूजर नेम या मोबाइल नंबर और पासवर्ड डालिए, या “login with mobile OTP” पर क्लिक करके अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालिए।
- कैप्चा भरिए। अगर आपने OTP वाला रास्ता चुना है, तो OTP भी भरिए।
- लॉगिन पर क्लिक कीजिए, आप अपने डैशबोर्ड पर पहुँच जाएँगे।
कभी-कभार आने वाले यूजर्स के लिए OTP वाला रास्ता ज्यादा सुरक्षित आदत है। जो लोग किसी एक बिक्री के लिए एक बार रजिस्टर करते हैं और साल भर बाद लौटते हैं, उन्हें पासवर्ड शायद ही याद रहता है। लेकिन रजिस्टर्ड नंबर आमतौर पर तब भी चालू रहता है।
संपदा 2.0 पर ई-स्टांप कैसे खरीदें
ई-स्टांप एक इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणपत्र है, जो बताता है कि किसी दस्तावेज पर स्टांप शुल्क चुका दिया गया है। राज्य में इसने कागजी स्टांप पेपर और फ्रैंकिंग की जगह ले ली है। विभाग के ई-स्टांप मैनुअल के मुताबिक सिस्टम में 141 इंस्ट्रूमेंट यानी दस्तावेज के प्रकार दर्ज हैं, हलफनामे से लेकर बिक्री विलेख तक, और हर एक का अपना शुल्क नियम है। संपदा 2.0 ई-स्टांप हर ई-रजिस्ट्री का पहला आधा हिस्सा भी है, क्योंकि डीड के पंजीयन से पहले शुल्क चुकाना पड़ता है।
- लॉगिन कीजिए और “E-stamp” मेन्यू खोलिए, फिर “Initiate E-stamp” चुनिए।
- तय कीजिए कि आप अपने लिए खरीद रहे हैं या किसी कानूनी संस्था के प्रतिनिधि के तौर पर।
- इंस्ट्रूमेंट को नाम से खोजिए, या ड्रॉप-डाउन से पहले डीड का प्रकार और फिर इंस्ट्रूमेंट चुनिए।
- पक्षकार जोड़िए। शुरू करने वाला व्यक्ति पहले पक्षकार के रूप में अपने आप जुड़ता है। बाकी पक्षकार अगर रजिस्टर्ड हैं, तो उन्हें यूजर नेम या मोबाइल नंबर से खोजिए; अगर नहीं हैं, तो उनका ब्योरा हाथ से भरिए। द्विपक्षीय डीड में दोनों पक्षकार चाहिए, एकपक्षीय डीड में सिर्फ पहला।
- “Save and Next” पर क्लिक कीजिए। अब शुल्क का पूरा ब्योरा दिखेगा: सरकारी स्टांप शुल्क, नगरीय शुल्क, जनपद शुल्क, उपकर और छूट वाली कोई राशि।
- “Judicial” या “Non-Judicial” चुनिए, फिर अपने संपदा वॉलेट से या ऑनलाइन साइबर ट्रेजरी वाले विकल्प से भुगतान कीजिए।
- जिस इंस्ट्रूमेंट के लिए ड्राफ्टिंग अनिवार्य है, वहाँ आगे बढ़ने के लिए “proceed” पर क्लिक कीजिए, टेम्पलेट पर डीड भरिए और सबमिट कीजिए।
- आधार OTP (CDAC या eMudra के जरिए) या डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) से ई-हस्ताक्षर कीजिए।
जिसके पास भी ई-स्टांप है, वह होम पेज पर “Verify e-Stamp” से या मोबाइल ऐप में उसका QR कोड स्कैन करके उसे जाँच सकता है। जब ई-स्टांप किसी रजिस्ट्री में इस्तेमाल होता है, तो “Consume E-stamp” विकल्प से किसी पक्षकार के OTP के साथ उसे इस्तेमाल हो चुका मान लिया जाता है। इससे एक ही प्रमाणपत्र दो बार इस्तेमाल नहीं हो सकता।
ई-रजिस्ट्री से संपत्ति के दस्तावेज का पंजीयन कैसे कराएँ
ई-रजिस्ट्री किसी दस्तावेज का पूरा पंजीयन है। इसके शुरुआती कदम एक जैसे हैं, चाहे आखिर में आप दफ्तर जाएँ या वीडियो से काम पूरा करें।
- लॉगिन कीजिए, “E-Registry” टैब में “Initiate Registry” पर क्लिक कीजिए, फिर निर्देश और घोषणा वाली स्क्रीन स्वीकार कीजिए।
- इंस्ट्रूमेंट चुनिए, जैसे बिक्री विलेख या दान विलेख।
- संपत्ति की पहचान कीजिए: प्रॉपर्टी ID, लैंड पार्सल ID या ULPIN, संपदा जियो टैग ID, पते की खोज या नक्शे पर पिन से। पोर्टल जो गाइडलाइन लोकेशन और मालिक दिखाता है, उसे जाँचिए, फिर “Confirm and Save Property Location” पर क्लिक कीजिए।
- पहला पक्षकार (विक्रेता, दाता या निष्पादक) और दूसरा पक्षकार (खरीदार या पाने वाला) जोड़िए। इसमें कोई पावर ऑफ अटॉर्नी धारक, नाबालिग का अभिभावक और गवाह भी शामिल हैं।
- जहाँ माँगा जाए, संपत्ति की पिछली रजिस्ट्रियाँ जोड़िए। फिर सिस्टम जो मूल्यांकन निकालता है, उसे देखिए।
- शुल्क और पंजीयन शुल्क वाली स्क्रीन जाँचिए, डीड तैयार कीजिए और उसे हर पक्षकार को पुष्टि के लिए भेजिए।
- वॉलेट से या साइबर ट्रेजरी के जरिए शुल्क और फीस चुकाइए।
- आधार ई-साइन के लिए डीड हर पक्षकार को भेजिए।
- स्लॉट बुक कीजिए और चुनिए कि पंजीयन किस तरह पूरा होगा।
इस आखिरी कदम पर तीन तक रास्ते मिलते हैं। “Office based registry” का मतलब है कि बुक किए गए स्लॉट पर सभी लोग उप-पंजीयक के दफ्तर पहुँचें। “Non-Interactive Video KYC” में हर पक्षकार एक लिंक से अपना छोटा सत्यापन वीडियो खुद रिकॉर्ड करता है। उसके बाद बिना किसी के दफ्तर गए दस्तावेज का पंजीयन हो सकता है। “Interactive Video KYC” में पक्षकार साइबर उप-पंजीयक के साथ लाइव वीडियो कॉल पर जुड़ते हैं, आधार OTP देते हैं और कैमरे पर एक बयान पढ़ते हैं। पोर्टल वीडियो KYC के लिए ₹500 लेता है।
अगर वीडियो वाले विकल्प नहीं दिखते, तो मैनुअल के मुताबिक ये चार शर्तें जाँचिए:
- इंस्ट्रूमेंट में फेसलेस पंजीयन की अनुमति होनी चाहिए;
- संपत्ति का ब्योरा रिकॉर्ड रखने वाले विभाग से आना चाहिए;
- हर पक्षकार का आधार ई-KYC होना चाहिए;
- दस्तावेज में 10 से ज्यादा पक्षकार नहीं हो सकते।
संपदा 2.0 पर गाइडलाइन मूल्य कैसे देखें
गाइडलाइन मूल्य वह न्यूनतम मूल्य है, जो राज्य हर लोकेशन के लिए प्रति वर्ग मीटर या प्रति हेक्टेयर तय करता है। दूसरे राज्यों में इसे अक्सर कलेक्टर रेट या सर्किल रेट कहा जाता है। पोर्टल शुल्क की गणना में संपत्ति का मूल्य इसी से निकालता है। जिला कलेक्टर ये दरें तब जारी करते हैं, जब महानिरीक्षक पंजीयन तीन-स्तरीय समितियों के जरिए इन्हें मंजूरी दे देते हैं। पोर्टल चालू वित्त वर्ष की दरें दिखाता है। संपदा 2.0 गाइडलाइन मूल्य देखने के लिए लॉगिन की जरूरत नहीं है।
- पोर्टल का होम पेज खोलिए। दरों का नक्शा देखने के लिए “View Guideline” पर, और पूरी गणना के लिए “Property Valuation” पर क्लिक कीजिए।
- संपत्ति को पते की खोज, प्रॉपर्टी ID, लैंड पार्सल ID, ULPIN, जियो टैग ID या नक्शे पर पिन से ढूँढ़िए।
- पोर्टल जो गाइडलाइन लोकेशन पिन करता है, उसे जाँचिए। उस लोकेशन की दरें देखने के लिए “Guideline Rates” बटन पर क्लिक कीजिए।
- मूल्यांकन के लिए संपत्ति का प्रकार (खेती की जमीन, भवन या प्लॉट) पक्का कीजिए और क्षेत्रफल डालिए। अगर संपत्ति का सिर्फ एक हिस्सा बिक रहा है, तो “Do You Wish to Transact the Partial Area of Property” चुनिए और उतना क्षेत्रफल डालिए।
- उपयोग भरिए। भवन हो तो निर्माण का ब्योरा भी दीजिए, जैसे फर्श का प्रकार और निर्माण का साल। कोई उप-खंड लागू होता हो, तो उसे भी चुनिए।
- गाइडलाइन के हिसाब से मूल्य देखने के लिए “Show Market Value” पर क्लिक कीजिए, फिर उसे प्रिंट कीजिए या आगे बढ़िए।
मोबाइल ऐप में यही काम “Know Your Guideline Rates” के तहत होता है। टोकन राशि देने से पहले विक्रेता की माँगी कीमत परखने का यह सबसे तेज तरीका है।
संपदा 2.0 के लिए जरूरी दस्तावेज
पोर्टल ज्यादातर कागज की जरूरत खत्म कर देता है, लेकिन जिन चीजों से वह मिलान करता है, वे आपके पास होनी चाहिए। ई-रजिस्ट्री शुरू करने से पहले ये तैयार रखिए:
- हर पक्षकार का आधार, और उससे लिंक मोबाइल नंबर चालू हालत में, ताकि ई-KYC और ई-साइन हो सके
- ऐसे हर लेन-देन के लिए PAN, जिसमें संपत्ति का मूल्य या सौदे की रकम ₹10 लाख से ज्यादा हो; जहाँ नियम अनुमति दें, वहाँ फॉर्म 60/61
- अनिवासी पक्षकारों के लिए पासपोर्ट (PDF के रूप में)
- प्रॉपर्टी ID: खेती की जमीन के लिए लैंड पार्सल ID या ULPIN, शहरी या ग्रामीण संपत्ति के लिए नगरीय या पंचायत प्रॉपर्टी ID
- संपत्ति की पिछली रजिस्ट्रियों का ब्योरा
- लोन, बिजली (IVRS) और नगरीय कर का ब्योरा, अगर ये अपने आप न आएँ
- संपदा 2.0 मोबाइल ऐप से खींची गई संपत्ति की तस्वीरें, तीन कोणों से
- कंपनियों के लिए CIN, GSTIN या PAN, साथ में एक अधिकार-पत्र
- पावर ऑफ अटॉर्नी धारक के लिए रजिस्टर्ड या प्रमाणित POA दस्तावेज का नंबर, या ई-स्टांप कोड
अगर आपके आधार का ब्योरा पुराना है, तो पहले आधार अपडेट की प्रक्रिया से उसे ठीक कराइए। अगर अभी PAN नहीं है, तो PAN आवेदन गाइड पूरा तरीका बताती है। इन दोनों में से कोई भी बेमेल ई-रजिस्ट्री को बीच में रोक देता है।
संपदा 2.0 पर शुल्क, स्टांप ड्यूटी और समय-सीमा
आपको कितना देना होगा, यह इंस्ट्रूमेंट पर निर्भर करता है, और हिसाब पोर्टल का शुल्क कैलकुलेटर कर देता है। विभाग का प्रकाशित चार्ट दिखाता है कि बिक्री विलेख पर शुल्क कैसे जुड़ते जाते हैं। यह चार्ट 1 जनवरी 2021 का है। इसलिए इसे ढाँचा समझिए, और मौजूदा आँकड़ों के लिए कैलकुलेटर के ब्योरे पर भरोसा कीजिए।
| बिक्री विलेख (हस्तांतरण पत्र) पर शुल्क | MPIGR चार्ट में दर |
|---|---|
| मूल स्टांप शुल्क | 5% |
| नगरीय शुल्क | 3% |
| जनपद शुल्क | 1% |
| उपकर | मूल स्टांप शुल्क का 10% |
| पंजीयन शुल्क | 3% |
चार्ट में नगरीय शुल्क और जनपद शुल्क अलग-अलग कॉलम में हैं। कैलकुलेटर संपत्ति की लोकेशन के हिसाब से सही स्थानीय शुल्क लगाता है। मान लीजिए संपत्ति का मूल्य ₹40 लाख है और उस पर 3% नगरीय शुल्क लगता है। तब हिसाब यह बनेगा:
- 5% की दर से मूल स्टांप शुल्क: ₹2,00,000
- 3% की दर से नगरीय शुल्क: ₹1,20,000
- ₹2,00,000 के 10% की दर से उपकर: ₹20,000
- कुल शुल्क: ₹3,40,000, यानी मूल्य का 8.5%
- 3% की दर से पंजीयन शुल्क: ₹1,20,000
कुछ डीड पर चार्ट कहीं हल्का बोझ डालता है। परिवार के सदस्य को अचल संपत्ति का दान करने पर मूल शुल्क 2.5% है, जबकि बाकी मामलों में 5% है। परिवार के सदस्य को बिना प्रतिफल दी गई पावर ऑफ अटॉर्नी पर सिर्फ ₹1,000 का तय शुल्क लगता है। सभी 142 पंक्तियों वाली पूरी सूची स्टांप शुल्क और पंजीयन शुल्क चार्ट में है।
दरों जितनी ही अहम समय-सीमाएँ भी हैं:
- रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 23 के मुताबिक दस्तावेज के निष्पादन की तारीख से चार महीने के भीतर उसे पंजीयन के लिए पेश करना होता है।
- अगर शुरू की गई रजिस्ट्री का शुल्क और फीस शुरुआत के चार महीने के भीतर नहीं चुकाई जाती, तो पोर्टल उसे हटा देता है।
- अधिनियम की धारा 17 अचल संपत्ति के दान के लिए पंजीयन अनिवार्य करती है। यह उन दूसरी डीड के लिए भी अनिवार्य है, जो ₹100 या उससे ज्यादा मूल्य की अचल संपत्ति में कोई अधिकार बनाती या हस्तांतरित करती हैं। धारा 49 कहती है कि ऐसा बिना पंजीयन वाला दस्तावेज संपत्ति पर कोई असर नहीं डालता।
- रजिस्टर्ड दस्तावेज की प्रमाणित प्रति ₹300 में मिलती है; रजिस्टर्ड यूजर्स के लिए खोज मुफ्त है।
अपने आवेदन की स्थिति कैसे ट्रैक करें
संपदा 2.0 पर स्थिति देखने का कोई एक पेज नहीं है। हर सेवा आपके डैशबोर्ड में अपना अलग रिकॉर्ड रखती है।
- ई-रजिस्ट्री: “E-Registry Initiation Id” से खोजिए, जो पोर्टल अपनी स्टेटस स्क्रीनों पर माँगता है। रजिस्ट्री पूरी होने पर इसकी जगह रजिस्टर्ड दस्तावेज का नंबर ले लेता है।
- स्लॉट: दफ्तर का स्लॉट देखने या बदलने के लिए “Slot Availability / Reschedule” का इस्तेमाल कीजिए।
- वीडियो KYC: “Video KYC Dashboard” दिखाता है कि किन पक्षकारों ने अपना लिंक पूरा कर लिया है या कौन कॉल पर जुड़ चुके हैं।
- ई-स्टांप: “Verify e-Stamp” बताता है कि कोड असली है या नहीं, और वह इस्तेमाल हो चुका है या नहीं।
- भुगतान: “Payment Module” में वॉलेट और ट्रेजरी के सारे लेन-देन दिखते हैं। किसी फेल हुए भुगतान का पता भी यहीं चलता है।
- रिफंड: रिफंड अनुरोधों की सूची में हर अनुरोध का नंबर, तारीख, रकम और स्थिति दिखती है।
आम समस्याएँ और उनका हल
संपदा 2.0 पर ज्यादातर गड़बड़ियाँ सॉफ्टवेयर से नहीं, डेटा से जुड़ी होती हैं। मैनुअल और पोर्टल के संदेश ये हल बताते हैं:
- वीडियो KYC का विकल्प नहीं दिख रहा। चारों शर्तें जाँचिए: इंस्ट्रूमेंट में फेसलेस पंजीयन की अनुमति हो, संपत्ति का डेटा CLR, UADD या PNRD से आए, सभी पक्षकारों ने आधार ई-KYC किया हो और पक्षकार 10 से ज्यादा न हों। अगर इनमें से एक भी शर्त पूरी नहीं होती, तो दफ्तर का स्लॉट बुक कीजिए।
- KYC वाला नाम रिकॉर्ड के मालिक से मेल नहीं खाता। पक्षकारों का ब्योरा भरने वाले कदम पर पोर्टल यह बेमेल पकड़ लेता है। दोबारा शुरू करने से पहले जमीन या नगरीय रिकॉर्ड, या आधार का ब्योरा ठीक कराइए। स्पेलिंग का झगड़ा पोर्टल आपके लिए नहीं सुलझाएगा।
- ई-KYC या ई-साइन का OTP नहीं आ रहा। OTP आधार से लिंक मोबाइल पर जाता है, उस नंबर पर नहीं जो आपने संपदा पर रजिस्टर किया है। आधार से लिंक नंबर अपडेट कराइए, या फिंगरप्रिंट या आइरिस वाला ई-KYC चुनिए। उसके लिए आधार में रजिस्टर्ड बायोमेट्रिक डिवाइस चाहिए।
- बैंक से पैसा कट गया, लेकिन ई-स्टांप जारी नहीं हुआ। दोबारा भुगतान करने से पहले “Payment Module” में ट्रेजरी के लेन-देन जाँचिए और चालान देखिए।
- न इस्तेमाल हुए ई-स्टांप का पैसा वापस चाहिए। सिर्फ जारी कराने वाला व्यक्ति “Payment Module” में “Refund Request” से आवेदन कर सकता है। इसके साथ बैंक का ब्योरा और एक रद्द किया हुआ चेक देना होता है। ₹500 या उससे कम के ई-स्टांप रिफंड नहीं होते। पूरा हो चुका ई-स्टांप भुगतान के 2 महीने के भीतर, और अधूरा ई-स्टांप 6 महीने के भीतर रिफंड हो सकता है।
- रजिस्ट्री डैशबोर्ड से गायब हो गई। जिन रजिस्ट्रियों का भुगतान चार महीने तक नहीं होता, वे अपने आप हट जाती हैं। आपको नई रजिस्ट्री शुरू करनी होगी।
संपदा 2.0 की शिकायत कहाँ करें
शुरुआत पोर्टल के भीतर से कीजिए। “Need Help? Raise Ticket” विकल्प आपके खाते से एक शिकायत दर्ज कर देता है, और हेडर में हेल्पडेस्क का नंबर 0755-2780133 दिया है। किसी खास पंजीयन पर विवाद हो, जैसे दस्तावेज लौटा दिया गया या स्लॉट में देरी हुई, तो अगला कदम जिला पंजीयक हैं, जो आपके उप-पंजीयक दफ्तर की निगरानी करते हैं। वजह यह है कि हेल्पडेस्क पोर्टल की दिक्कतें देखता है। किसी दस्तावेज पर पंजीयन अधिकारी के फैसले पर वह कुछ नहीं कर सकता।
संपदा 2.0 आज
संपदा 2.0 अब मध्य प्रदेश के हर जिले में पंजीयन और ई-स्टांपिंग चला रहा है, और राज्य इसमें लगातार नई सेवाएँ जोड़ रहा है। यूजर्स के लिए तीन तारीखवार घटनाक्रम अहम हैं:
- 8 अगस्त 2025: राज्य ने घोषणा की कि संपदा 2.0 को प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) से राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार 2025 मिला है। यह पुरस्कार “डिजिटल बदलाव के लिए तकनीक के इस्तेमाल से सरकारी प्रक्रिया का पुनर्गठन” श्रेणी में मिला। इसे विशाखापत्तनम में ई-गवर्नेंस के राष्ट्रीय सम्मेलन में दिया गया, जैसा राज्य ने 22 सितंबर 2025 को बताया।
- 16 फरवरी 2026: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल के पंजीयन भवन में साइबर पंजीयन कार्यालय का उद्घाटन किया। राज्य के मुताबिक अब 75 से ज्यादा सेवाएँ इस तरह रजिस्टर हो सकती हैं, जिनमें लोन, पावर ऑफ अटॉर्नी, खनन पट्टे, हलफनामे और साझेदारी विलेख शामिल हैं। राज्य यह भी कहता है कि हाउसिंग बोर्ड और विकास प्राधिकरणों से जुड़े हस्तांतरणों के लिए अब दफ्तर जाने की जरूरत नहीं है।
- उसी विज्ञप्ति के मुताबिक इस सिस्टम पर 14.95 लाख से ज्यादा दस्तावेज रजिस्टर हो चुके हैं। उसमें यह भी कहा गया कि साइबर तहसील, जो 55 जिलों में चल रही है, राजस्व बंटवारा और नामांतरण का काम संपदा 2.0 के जरिए करती है।
नजर इसी आखिरी कड़ी पर रखिए। जब रजिस्टर्ड बिक्री सीधे नामांतरण तक पहुँचती है, तो रजिस्ट्री और भू-अभिलेख के बीच की पुरानी खाई बंद हो जाती है। यह वही खाई है, जिसे पाटने में DILRMP के तहत भू-अभिलेख के राष्ट्रीय सुधार लगे हैं। जो पाठक ई-गवर्नेंस को एक विषय के तौर पर पढ़ रहे हैं, उनके लिए संपदा 2.0 प्रक्रिया के पुनर्गठन का साफ उदाहरण है, न कि किसी PDF फॉर्म को बस ऑनलाइन डाल देने का। भू-अभिलेख की तरफ के किसी मिलते-जुलते राज्य पोर्टल के लिए UP भूलेख खतौनी गाइड देखिए।
सामान्य प्रश्न
संपदा 2.0 क्या है?
संपदा 2.0 मध्य प्रदेश सरकार का ऑनलाइन सिस्टम है, जिस पर संपत्ति और दूसरे दस्तावेजों का ई-पंजीयन होता है और ई-स्टांप जारी होते हैं। इसे वाणिज्यिक कर विभाग के तहत महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक चलाते हैं। यह 10 अक्टूबर 2024 को पूरे राज्य में लागू हुआ। इसने संपदा 1.0 की जगह ली, जो जुलाई 2015 से ई-पंजीयन संभाल रहा था।
संपदा 2.0 की आधिकारिक वेबसाइट कौन-सी है?
आधिकारिक संपदा 2.0 पोर्टल sampada.mpigr.gov.in है, और विभाग संपदा 2.0 मोबाइल ऐप भी चलाता है। पुरानी mpigr.gov.in साइट पर अब भी विभाग के अधिनियम, परिपत्र और शुल्क चार्ट मिलते हैं। ऐसी मिलती-जुलती वेबसाइटों से बचिए, जो पोर्टल के अपने वॉलेट या साइबर ट्रेजरी के अलावा किसी और रास्ते से भुगतान माँगें।
संपदा 2.0 पर रजिस्ट्रेशन कैसे करें?
पोर्टल पर "Register" पर क्लिक कीजिए, "Register as Citizen" चुनिए और OTP से अपना मोबाइल नंबर सत्यापित कीजिए। फिर OTP, फिंगरप्रिंट या आइरिस से आधार ई-KYC पूरा कीजिए। इसके बाद बाकी व्यक्तिगत ब्योरा, पता, संपर्क और खाते का ब्योरा भरिए। अनिवासी भारतीय आधार ई-KYC की जगह पासपोर्ट नंबर और पासपोर्ट की PDF देते हैं।
क्या उप-पंजीयक दफ्तर गए बिना संपत्ति की रजिस्ट्री हो सकती है?
हाँ, कई दस्तावेजों के लिए। राज्य के मुताबिक लगभग 140 में से 75 तरह के दस्तावेज वीडियो KYC से फेसलेस तरीके से रजिस्टर हो सकते हैं। शर्त यह है कि संपत्ति का डेटा रिकॉर्ड रखने वाले विभाग से आए, हर पक्षकार ने आधार ई-KYC किया हो और पक्षकार 10 से ज्यादा न हों। वरना रजिस्ट्री उप-पंजीयक के दफ्तर में बुक किए गए स्लॉट पर ही पूरी होती है।
संपदा 2.0 पर वीडियो KYC का कितना शुल्क है?
स्लॉट बुकिंग वाले कदम पर फेसलेस रजिस्ट्री चुनने पर पोर्टल वीडियो KYC के लिए ₹500 का शुल्क दिखाता है। यह दस्तावेज के स्टांप शुल्क और पंजीयन शुल्क से अलग है। इंटरैक्टिव और खुद रिकॉर्ड किए जाने वाले, दोनों वीडियो रास्ते इसी विकल्प में आते हैं।
संपदा 2.0 पर गाइडलाइन मूल्य कैसे देखें?
लॉगिन की जरूरत नहीं है। पोर्टल का "View Guideline" या "Property Valuation" विकल्प खोलिए और संपत्ति को पते, प्रॉपर्टी ID, लैंड पार्सल ID, ULPIN या नक्शे पर पिन से ढूँढ़िए। फिर "Guideline Rates" पर क्लिक कीजिए। मोबाइल ऐप में यही सुविधा "Know Your Guideline Rates" के तहत मिलती है।
क्या न इस्तेमाल हुए ई-स्टांप का रिफंड मिल सकता है?
हाँ, कुछ सीमाओं के साथ। सिर्फ वही व्यक्ति आवेदन कर सकता है जिसने ई-स्टांप खरीदा था, और आवेदन "Payment Module" में "Refund Request" से होता है। ₹500 या उससे कम के ई-स्टांप रिफंड नहीं होते। पूरे हो चुके ई-स्टांप का दावा भुगतान के 2 महीने के भीतर, और अधूरे ई-स्टांप का 6 महीने के भीतर करना होता है।
संपदा 2.0 का हेल्पलाइन नंबर क्या है?
पोर्टल पर हेल्पडेस्क का नंबर 0755-2780133 दिया गया है, और यही संपदा 2.0 की हेल्पलाइन है। आप अपने खाते से "Raise Ticket" विकल्प के जरिए शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं। किसी खास पंजीयन से जुड़े विवाद में अगला कदम जिला पंजीयक का दफ्तर है।