UPSC मुख्य परीक्षा PYQ टॉपिक-वाइज़ (2013–2025): पेपर-वार वेटेज का नक़्शा
तेरह साल और GS-1 से GS-4 तक कुल 1,066 सवाल। थीम के हिसाब से छाँटने पर मुख्य परीक्षा प्रीलिम्स से कहीं ज़्यादा अंदाज़े में आने वाली निकलती है, और उसका बँटवारा उतना बराबर नहीं जितना लोग मानते हैं।
प्रीलिम्स कवरेज को इनाम देती है। मुख्य परीक्षा पहले से अंदाज़ा लगा लेने को। एक जवाब पर आपके पास मोटे तौर पर सात मिनट होते हैं और शुरू से सोचने का वक़्त नहीं होता, इसलिए नंबर वही जवाब लाते हैं जो आप आधे-अधूरे अपने दिमाग़ में पहले ही लिख चुके हैं। इसी वजह से पिछले साल के पेपर मुख्य परीक्षा में प्रीलिम्स से ज़्यादा क़ीमती हैं, कम नहीं — वे उस सूची के सबसे क़रीब हैं जो बताती है कि आपसे क्या पूछा जाएगा।
हमारे मुख्य परीक्षा बैंक में 1,066 सवाल हैं: 2013 से 2025 तक GS-1, GS-2, GS-3 और GS-4 का हर सवाल और निबंध का हर विषय। यह पेज उन्हें सिलेबस की थीम के हिसाब से छाँटता है और बताता है कि बँटवारा दिखता कैसा है।
तरीक़े को लेकर एक बात शुरू में ही, क्योंकि उससे तालिकाएँ पढ़ने का ढंग बदल जाता है। हमारे प्रीलिम्स विश्लेषण में हर सवाल पर विषय का टैग दाख़िले के वक़्त ही लग जाता है; मुख्य परीक्षा के सवालों को थीम के हिसाब से बाद में छाँटना पड़ा। मुख्य परीक्षा के सवाल जान-बूझकर कई विषयों में फैले होते हैं — शहरी बाढ़ पर पूछा गया सवाल एक साथ भूगोल भी है, आपदा प्रबंधन भी और शासन भी — इसलिए एक ही लेबल हमेशा एक सरलीकृत तस्वीर होती है। जहाँ सिलेबस का कोई एक हिस्सा साफ़-साफ़ किसी सवाल पर दावा नहीं करता, वहाँ हमने उसे किसी टोकरी में ठूँसने के बजाय “कई विषयों में फैला” लिख दिया है। पेपर के हिसाब से यह बचा हुआ हिस्सा 5% से 12% के बीच रहता है, और यह अपने आप में एक नतीजा है।
चारों पेपर एक ही तरह बने हुए नहीं हैं
थीम की तालिकाओं से पहले वे ढाँचागत बातें, जिन्हें ज़्यादातर अभ्यर्थी कभी जाँचते ही नहीं:
| पेपर | सवाल (2013-2025) | अंकों का बँटवारा |
|---|---|---|
| GS-1 | 270 | 140 × 10 अंक · 40 × 12.5 · 90 × 15 |
| GS-2 | 265 | 115 × 10 अंक · 60 × 12.5 · 90 × 15 |
| GS-3 | 265 | 115 × 10 अंक · 60 × 12.5 · 90 × 15 |
| GS-4 | 166 | 19 × 10 अंक · 132 × 20 · 6 × 25 · 9 × 30 |
GS-1 से GS-3 की बनावट एक जैसी है। GS-4 की नहीं: इसके सवाल 20, 25 और 30 अंकों के होते हैं, और 166 में से 132 बीस अंक वाले हैं। इनमें से 78 — पूरे पेपर का 47% — केस स्टडी हैं। GS-4 का लगभग आधा हिस्सा जानकारी की जाँच है ही नहीं। अगर आपकी नैतिकता की तैयारी परिभाषाओं और विचारकों के सारांश तक है, तो आप पेपर के छोटे आधे हिस्से की तैयारी कर रहे हैं।
GS-1: समाज और भूगोल, इतिहास नहीं
| थीम | सवाल | हिस्सा | औसत/साल |
|---|---|---|---|
| भारतीय समाज | 52 | 19.3% | 4.0 |
| भारत का भूगोल | 41 | 15.2% | 3.2 |
| कला एवं संस्कृति | 38 | 14.1% | 2.9 |
| भौतिक भूगोल | 36 | 13.3% | 2.8 |
| आधुनिक भारत का इतिहास | 32 | 11.9% | 2.5 |
| शहरीकरण एवं बसाव | 15 | 5.6% | 1.2 |
| कई विषयों में फैले | 13 | 4.8% | 1.0 |
| विश्व इतिहास | 12 | 4.4% | 0.9 |
| आज़ादी के बाद का भारत | 11 | 4.1% | 0.8 |
| प्राचीन एवं मध्यकालीन इतिहास | 11 | 4.1% | 0.8 |
| आर्थिक भूगोल एवं उद्योग | 9 | 3.3% | 0.7 |
भूगोल अपने तीनों रूपों में — भारत का, भौतिक, और आर्थिक/औद्योगिक जगह वाला — GS-1 का 31.9% है, और आराम से सबसे बड़ा हिस्सा। इसमें शहरीकरण जोड़ दीजिए, जो नाम भर के अलावा बसाव-भूगोल ही है, तो यह 37.4% हो जाता है।
दूसरी तरफ़ आधुनिक, विश्व और प्राचीन-मध्यकालीन इतिहास मिलकर 20.4% बनते हैं (आज़ादी के बाद के भारत को इतिहास गिनें तो 24.4%), और अकेले प्राचीन और मध्यकालीन भारत 4.1% — यानी हर साल क़रीब एक सवाल। वही ढर्रा जो हमें प्रीलिम्स में मिला, यहाँ भी दोहराता है: प्राचीन और मध्यकालीन दौर पूछे तो जाते हैं, पर कला एवं संस्कृति के रास्ते, जो 14.1% और है।
दूसरी बात जिस पर ठहरना चाहिए: भारतीय समाज 19.3% के साथ अकेली सबसे बड़ी थीम है। गिग इकॉनमी और महिला सशक्तीकरण, जनजातीय लिंगानुपात, धर्मनिरपेक्षता, वैश्वीकरण और उपभोग की संस्कृति, बच्चों का समाजीकरण — इन सवालों की न कोई किताब है और न कोई तय जवाब, और GS-1 में सबसे ज़्यादा यही पूछे जाते हैं। जो अभ्यर्थी GS-1 को “इतिहास और भूगोल” मानकर चलते हैं, वे पेपर के पाँचवें हिस्से को ग़लत पढ़ रहे हैं।
GS-1 में हर साल पूछे गए सवाल, सीधे प्रश्न बैंक से:
| Year | 2013 | 2014 | 2015 | 2016 | 2017 | 2018 | 2019 | 2020 | 2021 | 2022 | 2023 | 2024 | 2025 | 2026 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Questions | 25 | 25 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 |
ब्योरेवार गाइड: मुख्य परीक्षा के लिए आधुनिक इतिहास PYQ, मुख्य परीक्षा के लिए भूगोल PYQ, मुख्य परीक्षा के लिए कला एवं संस्कृति PYQ।
GS-2: अंतरराष्ट्रीय संबंध सबसे बड़ी अकेली थीम है
| थीम | सवाल | हिस्सा | औसत/साल |
|---|---|---|---|
| अंतरराष्ट्रीय संबंध | 55 | 20.8% | 4.2 |
| संविधान एवं राजव्यवस्था | 47 | 17.7% | 3.6 |
| शासन एवं पारदर्शिता | 39 | 14.7% | 3.0 |
| सामाजिक न्याय एवं कल्याण | 34 | 12.8% | 2.6 |
| संसद एवं विधायिका | 29 | 10.9% | 2.2 |
| कई विषयों में फैले | 16 | 6.0% | 1.2 |
| संवैधानिक एवं वैधानिक निकाय | 14 | 5.3% | 1.1 |
| न्यायपालिका | 12 | 4.5% | 0.9 |
| ग़रीबी, भूख एवं मानव विकास | 11 | 4.2% | 0.8 |
| कार्यपालिका एवं सिविल सेवाएँ | 8 | 3.0% | 0.6 |
पूरी मुख्य परीक्षा में सबसे टिकाऊ थीम अंतरराष्ट्रीय संबंध है। सालों की क़तार देखिए: 8, 4, 4, 4, 4, 5, 3, 3, 4, 4, 4, 4, 4। 2013 के असामान्य साल के बाद यह लगभग हर साल, एक दशक से, चार सवाल रही है। मुख्य परीक्षा में और कुछ इतना अंदाज़े में नहीं आता।
यह भरोसा काम का है। आप लगभग तय मानकर चल सकते हैं कि क़रीब चार सवाल अंतरराष्ट्रीय संबंधों के होंगे, और उपविषय भी एक जाने-पहचाने सेट में घूमते हैं — पड़ोस से रिश्ते, किसी बड़ी ताक़त के साथ द्विपक्षीय संबंध, कोई बहुपक्षीय समूह, और वैश्विक शासन या किसी संस्था पर सवाल। चार पक्के IR जवाब-ढाँचे तैयार कर लेना मुख्य परीक्षा की तैयारी के सबसे ज़्यादा लौटाने वाले कामों में है।
इसका जोड़ीदार नतीजा संवैधानिक तरफ़ है। संसद और विधायिका चुपचाप ऊपर जा रही है — 2013 में 1 सवाल, 2022 में 5, 2023 में 4 — जबकि कार्यपालिका और सिविल सेवाएँ 0.6 सवाल सालाना पर लगभग ग़ायब हो चुकी हैं।
| Year | 2013 | 2014 | 2015 | 2016 | 2017 | 2018 | 2019 | 2020 | 2021 | 2022 | 2023 | 2024 | 2025 | 2026 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Questions | 25 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 |
ब्योरेवार गाइड: मुख्य परीक्षा के लिए राजव्यवस्था PYQ, मुख्य परीक्षा के लिए शासन PYQ।
GS-3: आंतरिक सुरक्षा अर्थव्यवस्था से बड़ी है
| थीम | सवाल | हिस्सा | औसत/साल |
|---|---|---|---|
| आंतरिक सुरक्षा | 44 | 16.6% | 3.4 |
| कृषि एवं खाद्य | 40 | 15.1% | 3.1 |
| भारतीय अर्थव्यवस्था एवं वृद्धि | 37 | 14.0% | 2.8 |
| विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | 34 | 12.8% | 2.6 |
| पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी | 28 | 10.6% | 2.2 |
| कई विषयों में फैले | 27 | 10.2% | 2.1 |
| बुनियादी ढाँचा एवं उद्योग | 22 | 8.3% | 1.7 |
| आपदा प्रबंधन | 17 | 6.4% | 1.3 |
| सार्वजनिक वित्त एवं बैंकिंग | 16 | 6.0% | 1.2 |
यही वह तालिका है जो GS-3 की असल पढ़ाई से सबसे ज़्यादा उलट बैठती है। आंतरिक सुरक्षा 16.6% के साथ सबसे बड़ी थीम है और कृषि 15.1% के साथ दूसरी — जबकि सार्वजनिक वित्त और बैंकिंग, जो अपनी मुश्किल अवधारणाओं की वजह से तैयारी का बहुत सारा वक़्त खा जाती है, 6.0% के साथ सबसे छोटी है।
आंतरिक सुरक्षा ज़्यादातर अभ्यर्थियों की तैयारी का सबसे कमज़ोर हिस्सा भी है, क्योंकि इसकी कोई मान्य किताब नहीं है और यह सिलेबस के आख़िर में बैठती है, जहाँ पहुँचते-पहुँचते रिवीज़न की सड़क ख़त्म हो जाती है। हर साल साढ़े तीन सवाल क़िस्मत के भरोसे छोड़ देने के लिए बहुत बड़ी रक़म है।
हर साल 3.1 सवालों वाली कृषि पर भी यही बात लागू होती है। यह चमक-दमक से दूर का टॉपिक है और व्यवस्थित तैयारी को अच्छा लौटाता है — फ़सल चक्र, MSP और ख़रीद, सिंचाई, खाद्य प्रसंस्करण, और खेती के क़र्ज़ की पूरी कड़ी बार-बार लौटती है।
| Year | 2013 | 2014 | 2015 | 2016 | 2017 | 2018 | 2019 | 2020 | 2021 | 2022 | 2023 | 2024 | 2025 | 2026 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Questions | 25 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 |
ब्योरेवार गाइड: मुख्य परीक्षा के लिए अर्थव्यवस्था PYQ।
GS-4: आधा पेपर केस स्टडी है
| थीम | सवाल | हिस्सा |
|---|---|---|
| केस स्टडी | 78 | 47.0% |
| लोक सेवा के मूल्य एवं सत्यनिष्ठा | 33 | 19.9% |
| कई विषयों में फैले | 20 | 12.0% |
| विचारक एवं दार्शनिक | 13 | 7.8% |
| अभिवृत्ति, अभिरुचि एवं मूल्य | 11 | 6.6% |
| नैतिकता एवं मानवीय अंतःक्रिया | 9 | 5.4% |
| कॉर्पोरेट एवं अंतरराष्ट्रीय नैतिकता | 2 | 1.2% |
सिद्धांत वाले आधे हिस्से में शासन में सत्यनिष्ठा 19.9% के साथ छाई हुई है — बाक़ी सब मिलाकर जितना है, उसका लगभग दोगुना। विचारक और दार्शनिक, जिन्हें रटने में बहुत सारे अभ्यर्थी महीनों लगाते हैं, 7.8% हैं, यानी हर साल एक सवाल।
इसका काम का मतलब असहज है पर साफ़ है: GS-4 के नंबर केस स्टडी अच्छी लिखकर जीते जाते हैं, और केस स्टडी एक हुनर है, जानकारी का ढेर नहीं। वे एक दोहराने लायक़ ढाँचे को इनाम देती हैं — कौन-कौन इससे जुड़ा है, दाँव पर कौन-से नैतिक सवाल हैं, कौन-से रास्ते हैं और हर रास्ते का नतीजा क्या, और फिर एक तर्क के साथ लिया गया फ़ैसला — जिसे इतना अभ्यास मिले कि वह अपने आप आने लगे। और नैतिकता का सिद्धांत जितना भी पढ़ लीजिए, केस स्टडी के जवाब उससे बेहतर नहीं होते।
GS-4 के सबसे नए सवाल, सीधे बैंक से — किसी भी सवाल को खोलिए और पूरा केस और मॉडल उत्तर सामने है:
- Ethics Case Study: Ravi is a senior police officer with vast experience in riot control and cyber-policing. Since one year, he has been the Superintendent of Police (SP) of a distr…2026
- Ethics Case Study: Seema is a senior bureaucrat with a reputation of honesty and professional efficiency. She has recently been posted as the District Collector (DC) to Surinder Na…2026
- Ethics Case Study: Vikas is a government officer with over a decade of service in public administration. He has recently moved as the District Collector (DC) of Nainipura, a remote…2026
- Ethics Case Study: Rajapuram is a border district. Jhara and Biru, its two major communities, are in continual conflict with each other. The social fabric is fractured and demands…2026
- Ethics Case Study: Ajit has been recently promoted as the Head of the Department of Weapon Sales (DWS) in the Ministry of Defence Production (MDP). His charter of duties includes i…2026
उत्तर लेखन के लिए इसका मतलब क्या है
इन तालिकाओं से तीन बातें निकलती हैं, और वे ख़ुद तालिकाओं से ज़्यादा क़ीमती हैं।
ढाँचे तैयार कीजिए, तथ्य नहीं। जिस पेपर में अंतरराष्ट्रीय संबंध भरोसे से चार सवाल हैं और आंतरिक सुरक्षा साढ़े तीन, वहाँ जीतने वाली तैयारी वह है जिसमें बार-बार लौटने वाली थीमों के लिए दोबारा इस्तेमाल होने लायक़ जवाब-ढाँचे तैयार हों, और उनमें रखने के लिए उदाहरण और आँकड़े भी। इन्हें बनाना कैसे है, यह हमारी UPSC मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन रणनीति गाइड बताती है।
अभ्यास का वज़न पेपर के हिसाब से रखिए, अपनी पसंद के हिसाब से नहीं। ज़्यादातर अभ्यर्थी वही ज़्यादा लिखते हैं जो उन्हें अच्छा लगता है। अगर आपकी उत्तर लेखन की कॉपी ज़्यादातर राजव्यवस्था और आधुनिक इतिहास से भरी है, तो आप GS-1 और GS-2 को मिलाकर उसके क़रीब चौथाई हिस्से का ही अभ्यास कर रहे हैं।
GS-4 की केस स्टडी को अलग हुनर मानकर अभ्यास कीजिए। पेपर का सैंतालीस प्रतिशत कोई टॉपिक नहीं होता। वह एक फ़ॉर्मैट है, और उसे हफ़्ते में अपनी अलग जगह चाहिए। ऐसी जगह बनाने का तरीक़ा रोज़ाना उत्तर लेखन अभ्यास में है।
इस पेज पर गिना गया हर सवाल एक जीती-जागती पोस्ट है, जिसे आप खोल सकते हैं, पढ़ सकते हैं और उसका जवाब लिख सकते हैं। पूरा बैंक Mains Practice Questions पर देखिए, या रोज़ एक सवाल के हिसाब से Daily Answer Writing के साथ चलिए। प्रीलिम्स के लिए वैसा ही प्रश्न बैंक Practice पर है।
ये आँकड़े बने कैसे
ये 1,066 सवाल हमारे मुख्य परीक्षा प्रश्न बैंक से आते हैं, जिसमें 2013 से 2025 तक का हर GS और निबंध सवाल साल, पेपर, सवाल संख्या, अंक और शब्द सीमा के साथ रखा है।
थीम की छँटाई नियम से होती है: हर सवाल को उसके पेपर के हर सिलेबस हिस्से के लिए बने शब्द-कोश पर नंबर दिए जाते हैं, और वह सबसे ज़्यादा नंबर वाले हिस्से को दे दिया जाता है। जो सवाल किसी से मेल नहीं खाते, उन्हें “कई विषयों में फैला” लिख दिया जाता है। इस बचे हुए हिस्से को हमने जान-बूझकर छिपाया नहीं — GS-1 में 4.8%, GS-2 में 6.0%, GS-3 में 10.2% और GS-4 में 12.0% — क्योंकि यह पेपरों की एक असली बात दिखाता है। GS-3 और GS-4 के सवाल किसी एक हिस्से में बैठने से GS-1 और GS-2 के मुक़ाबले ज़्यादा इनकार करते हैं।
इन हिस्सों को एक-दो प्रतिशत अंक तक सही मानिए, दशमलव तक नहीं। क्रम पक्का है; ठीक-ठीक आँकड़े इस पर टिके हैं कि आप एक हिस्से और दूसरे के बीच की लकीर कहाँ खींचते हैं।
सामान्य प्रश्न
UPSC मुख्य परीक्षा के GS-1 में सबसे ज़्यादा वेटेज किस टॉपिक का है? भारतीय समाज का, 2013 से 2025 के बीच 19.3% सवालों के साथ। भूगोल अपने तीनों रूपों को मिलाकर — भारत का, भौतिक और आर्थिक — इससे भी बड़ा है, 31.7%, पर वह सिलेबस के तीन अलग-अलग हिस्सों में फैला है।
GS-2 में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के कितने सवाल आते हैं? हर साल चार, और हैरान करने वाली नियमितता के साथ। 2014 से 2025 तक हर एक साल यह गिनती 3, 4 या 5 रही है। अंतरराष्ट्रीय संबंध GS-2 का 20.8% हैं, उस पेपर की सबसे बड़ी अकेली थीम।
क्या UPSC मुख्य परीक्षा के लिए आंतरिक सुरक्षा ज़रूरी है? ज़्यादातर अभ्यर्थी जितना मानते हैं, उससे कहीं ज़्यादा। यह GS-3 की सबसे बड़ी थीम है, 16.6% के साथ, और हर साल औसतन 3.4 सवाल — अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों से आगे।
UPSC के नैतिकता पेपर में कितनी केस स्टडी आती हैं? 2013 से 2025 के बीच GS-4 के 166 में से 78 सवाल केस स्टडी थे, यानी पेपर का 47%। भारी अंक भी इन्हीं के पास हैं: पेपर के 132 सवाल बीस अंक वाले हैं।
मुख्य परीक्षा के कितने साल के PYQ हल करने चाहिए? वेटेज की तस्वीर के लिए पूरे तेरह, पर जवाब पिछले पाँच से सात साल के लिखिए। पुराने सवाल ढर्रा पहचानने के काम आते हैं; नए सवाल आज के परीक्षक की भाषा के ज़्यादा क़रीब हैं।
क्या UPSC मुख्य परीक्षा में सवाल दोहराए जाते हैं? थीम ख़ूब दोहराई जाती हैं, शब्द लगभग कभी नहीं। सिलेबस के उसी हिस्से पर नए कोण से लौटा जाता है — और ठीक इसीलिए ढाँचे तैयार करना मॉडल उत्तर रटने से बेहतर है।