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GS-2 को अक्सर गवर्नेंस का पेपर कह दिया जाता है। यही समझ नंबर कटवाती है। सवाल गिनकर देखिए तो यह सबसे पहले संविधान का पेपर है।
2013 से 2025 के बीच GS-2 में कुल 265 सवाल पूछे गए। इनमें संवैधानिक हिस्सा अकेले 110 सवाल यानी पेपर का 41.5% है। इस हिस्से में पाँच चीज़ें आती हैं: संविधान और राजव्यवस्था, संसद और विधायिका, न्यायपालिका, संवैधानिक और वैधानिक निकाय, और कार्यपालिका।
पूरा ब्योरा
| थीम | सवाल | GS-2 में हिस्सा | औसत/साल |
|---|---|---|---|
| संविधान और राजव्यवस्था | 47 | 17.7% | 3.6 |
| संसद और विधायिका | 29 | 10.9% | 2.2 |
| संवैधानिक और वैधानिक निकाय | 14 | 5.3% | 1.1 |
| न्यायपालिका | 12 | 4.5% | 0.9 |
| कार्यपालिका और सिविल सेवा | 8 | 3.0% | 0.6 |
| संवैधानिक हिस्सा (कुल) | 110 | 41.5% | 8.5 |
साल दर साल:
| थीम | 2013 | 2014 | 2015 | 2016 | 2017 | 2018 | 2019 | 2020 | 2021 | 2022 | 2023 | 2024 | 2025 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| संविधान और राजव्यवस्था | 4 | 3 | 5 | 7 | 3 | 1 | 4 | 4 | 3 | 2 | 5 | 3 | 3 |
| संसद और विधायिका | 1 | 0 | 2 | 1 | 2 | 2 | 2 | 3 | 3 | 5 | 4 | 2 | 2 |
| न्यायपालिका | 0 | 2 | 0 | 0 | 1 | 2 | 1 | 1 | 1 | 0 | 0 | 2 | 2 |
| संवैधानिक और वैधानिक निकाय | 3 | 1 | 1 | 0 | 0 | 3 | 0 | 0 | 2 | 1 | 2 | 1 | 0 |
| कार्यपालिका और सिविल सेवा | 0 | 2 | 0 | 1 | 1 | 1 | 1 | 1 | 0 | 0 | 0 | 0 | 1 |
| Year | 2013 | 2014 | 2015 | 2016 | 2017 | 2018 | 2019 | 2020 | 2021 | 2022 | 2023 | 2024 | 2025 | 2026 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Questions | 25 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 | 20 |
संसद ऊपर जा रही है, कार्यपालिका ग़ायब हो रही है
आँकड़ों में दो चीज़ें साफ़ दिखती हैं।
संसद और विधायिका बढ़ी है। 2013 में एक सवाल, 2014 में एक भी नहीं, और फिर लगातार चढ़ाई: 2022 में 5 और 2023 में 4। इसे बढ़ा रहे हैं संस्थाओं के कमज़ोर पड़ने वाले सवाल। बैठकों के दिन घटना, बिना जाँच-परख के क़ानून पास होना, समितियों का कमज़ोर होना, दलबदल विरोधी क़ानून, चुनाव सुधार और एक साथ चुनाव का मुद्दा।
कार्यपालिका और सिविल सेवा लगभग ग़ायब हो गई है। तेरह साल में आठ सवाल, और 2022, 2023 या 2024 में एक भी नहीं। सिविल सेवा सुधार कभी पक्का सवाल हुआ करता था, अब GS-2 में कम ही आता है। हाँ, उसी सामग्री का नैतिक पक्ष GS-4 में ज़िंदा है।
संविधान वाले सवाल किस चीज़ पर नंबर देते हैं
संविधान और राजव्यवस्था पर 47 सवाल हैं, और ये रटी हुई थ्योरी नहीं पूछते। जो ढाँचे बार-बार लौटते हैं:
दो संवैधानिक सिद्धांतों के बीच खिंचाव। संघवाद बनाम राष्ट्रीय एकता, मौलिक अधिकार बनाम नीति-निदेशक तत्व, विधायी सर्वोच्चता बनाम न्यायिक समीक्षा। सवाल चाहता है कि आप दोनों पक्ष रखें।
कोई प्रावधान, ज़मीनी हक़ीक़त के सामने रखकर परखा गया। क्या वह संवैधानिक इंतज़ाम वही कर पाया जिसके लिए बना था। अंतरराज्यीय जल विवाद का तंत्र, आपातकाल के प्रावधान, राज्यपाल की भूमिका।
सिद्धांत को किसी चालू विवाद पर लगाना। मूल ढाँचा, संघीय सौहार्द, अर्ध-न्यायिक शक्तियाँ, किसी अधिकार का दायरा।
ध्यान दीजिए कि यह प्रीलिम्स की राजव्यवस्था से कितना अलग है, जहाँ 198 सवाल प्रक्रिया की बारीकियाँ और अनुच्छेद संख्याएँ पूछते हैं। मुख्य परीक्षा लगभग कभी नहीं पूछती कि कौन-सा अनुच्छेद क्या कहता है। वह पूछती है कि यह इंतज़ाम चल रहा है या नहीं।
न्यायपालिका का हिस्सा छोटा है, पर पक्का है
बारह सवाल, यानी क़रीब एक हर साल, और विषय हैरान कर देने वाली हद तक एक जैसे रहते हैं: न्यायिक समीक्षा और उसकी हदें, जजों की नियुक्ति का विवाद, लंबित मुक़दमे और अदालत तक पहुँच, ट्रिब्यूनल बढ़ना, और जनहित याचिका का सफ़र और उसकी ज़्यादतियाँ।
हिस्सा छोटा है और विषय गिने-चुने, इसलिए GS-2 में इसे तैयार करना सबसे फ़ायदे का सौदा है। चार मज़बूत ढाँचे तेरह साल में पूछे गए ज़्यादातर सवालों को ढक लेते हैं।
जो उत्तर-ढाँचे काम करते हैं
खिंचाव वाले सवाल में राय से नहीं, सिद्धांत से ढाँचा बनाइए। दोनों तरफ़ का संवैधानिक मूल्य लिखिए, फिर एक ठोस उदाहरण से दिखाइए कि दोनों कहाँ टकराते हैं, और उसके बाद नतीजा निकालिए। शुरुआत अपने नतीजे से मत कीजिए।
संस्थाओं के कमज़ोर पड़ने वाले सवाल में आँकड़ा दीजिए। बैठकों के दिन, कितने बिल बिना समिति के पास हुए, कितने मुक़दमे लंबित हैं। बिना आँकड़े के गिरावट का दावा राय जैसा पढ़ा जाता है; वही बात दो आँकड़ों के साथ विश्लेषण बन जाती है।
किताब नहीं, रिपोर्ट का नाम लीजिए। पुंछी आयोग, दूसरा प्रशासनिक सुधार आयोग, विधि आयोग, सरकारिया। नाम लेकर बताई गई एक सिफ़ारिश, सामान्य बातों के पूरे पैराग्राफ़ पर भारी पड़ती है।
प्रावधान का बखान मत कीजिए। जाँचने वाले को पता है कि अनुच्छेद 356 क्या कहता है। नंबर इस बात के मिलते हैं कि उसके साथ किया क्या गया।
पूरे पेपर की तस्वीर के लिए UPSC Mains PYQ Topic-wise देखिए। GS-2 का दूसरा बड़ा हिस्सा Governance PYQs for GS-2 पर है। टॉपिक नोट्स हमारे भारतीय राजव्यवस्था हब में हैं, और सवाल Mains Practice Questions पर मिलेंगे।
सामान्य प्रश्न
UPSC मुख्य परीक्षा के GS-2 में राजव्यवस्था कितनी आती है? 2013 से 2025 के बीच 265 में से 110 सवाल संवैधानिक हिस्से के हैं, यानी पेपर का 41.5%। पाँच उप-थीम मिलाकर हर साल आठ से नौ सवाल।
GS-2 में सबसे ज़्यादा किस थीम से पूछा जाता है? अकेली सबसे बड़ी थीम अंतरराष्ट्रीय संबंध है, 20.8% पर। लेकिन संवैधानिक हिस्सा पूरा जोड़ लें तो वह कहीं बड़ा है, 41.5%। उसके भीतर संविधान और राजव्यवस्था सबसे आगे है, 47 सवालों के साथ।
क्या मुख्य परीक्षा की राजव्यवस्था के लिए लक्ष्मीकांत काफ़ी है? वह आपको प्रावधान देती है, और मुख्य परीक्षा ज़्यादातर यह मान चलती है कि प्रावधान आपको आते हैं। जिस पर नंबर मिलते हैं, वह उस किताब के बाहर है: संस्थाएँ कैसा काम कर रही हैं, आयोगों की सिफ़ारिशें, चालू विवाद और आँकड़े।
क्या न्यायपालिका को अलग से तैयार करना चाहिए? हाँ, गिनती कम होने के बावजूद। तेरह साल के बारह सवाल चार-पाँच लौटती हुई थीम पर टिके हैं, इसलिए इसकी तैयारी असामान्य रूप से फ़ायदेमंद है।
सिविल सेवा से अब इतने कम सवाल क्यों आते हैं? यह थीम GS-2 से हल्की पड़ गई है। तेरह साल में आठ सवाल, और 2022, 2023 या 2024 में एक भी नहीं। उसकी बहुत-सी सामग्री GS-4 में चली गई है, जहाँ लोक सेवा के मूल्य और सत्यनिष्ठा सबसे बड़ी थ्योरी थीम है, 19.9% पर।