Anantam IASPost · 5 October 2026

वाक्य भेद: रचना के आधार पर 3 और अर्थ के आधार पर 8 भेद, उदाहरण सहित

Study Notes · Hindi - Compulsory

वाक्य भेद समझिए: Vakya Bhed में रचना के तीन और अर्थ के आठ भेद, मिश्र और संयुक्त का फर्क, उपवाक्य पहचानने की कसौटी और रूपांतरण के हल।

वाक्य भेद का मतलब है वाक्यों को दो कसौटियों पर बाँटना: वे बने कैसे हैं, और कहना क्या चाहते हैं। रचना के आधार पर वाक्य तीन तरह के होते हैं: सरल (या साधारण), मिश्र और संयुक्त। अर्थ के आधार पर आठ: विधानवाचक, निषेधवाचक, प्रश्नवाचक, विस्मयादिबोधक, आज्ञावाचक, इच्छावाचक, संदेहवाचक और संकेतवाचक। हर वाक्य दोनों में एक साथ गिना जाता है, जैसे “यदि बारिश हुई तो फसल अच्छी होगी” अर्थ से संकेतवाचक है और रचना से मिश्र।

सबसे ज्यादा गलती मिश्र और संयुक्त वाक्य में होती है। बहुत-से विद्यार्थी मान लेते हैं कि दो हिस्सों वाला हर वाक्य संयुक्त है, जबकि असली सवाल यह है कि दोनों हिस्से बराबर के हैं या एक दूसरे पर टिका है। यह नोट दोनों वर्गीकरण उदाहरण के साथ देता है, उपवाक्य पहचानने की कसौटी देता है, और बोर्ड के नमूना प्रश्नपत्र वाले वाक्यों से रूपांतरण हल करता है।

वाक्य भेद एक नजर में

नीचे की तालिका पूरे अध्याय का सार है। हर भेद आगे के खंडों में विस्तार से है।

बिंदुविवरण
वाक्यएक पूरा विचार देने वाला सार्थक शब्द-समूह, जिसमें उद्देश्य और विधेय हों
वर्गीकरण के आधार2: रचना (बनावट) और अर्थ
रचना के आधार पर भेद3: सरल या साधारण, मिश्र, संयुक्त
अर्थ के आधार पर भेद8: विधान, निषेध, प्रश्न, विस्मय, आज्ञा, इच्छा, संदेह, संकेत
आश्रित उपवाक्य के भेद3: संज्ञा, विशेषण, क्रिया विशेषण उपवाक्य
मिश्र की पहचानकि, जो-वह, जब-तब, यदि-तो, क्योंकि जैसे जोड़ने वाले शब्द
संयुक्त की पहचानऔर, या, परंतु, लेकिन, इसलिए से जुड़े बराबर के उपवाक्य
बोर्ड मेंCBSE हिंदी A: कक्षा 9 में अर्थ वाले भेद, कक्षा 10 में रचना वाले, दोनों 4 अंक

वाक्य, उपवाक्य और वाक्यांश

वाक्य भेद समझने से पहले तीन शब्द साफ होने चाहिए। वाक्य वह शब्द-समूह है जो एक पूरा विचार दे। उसके दो हिस्से होते हैं: उद्देश्य (जिसके बारे में कहा जाए) और विधेय (जो कहा जाए)। “बिजली चमकती है” में “बिजली” उद्देश्य है और “चमकती है” विधेय।

उपवाक्य वह हिस्सा है जिसकी अपनी क्रिया हो, पर जो किसी बड़े वाक्य का अंग हो। “जब बारिश रुकी, तब हम निकले” में दो उपवाक्य हैं, क्योंकि दो क्रियाएँ (रुकी, निकले) हैं। वाक्यांश में पूरी क्रिया नहीं होती, जैसे “नदी के किनारे” या “सुबह जल्दी उठना”। कामताप्रसाद गुरु यही फर्क बताते हैं: वाक्य में क्रिया रहती है, वाक्यांश में ज्यादातर कृदंत या संबंधबोधक।

इसका सीधा फायदा रचना वाले भेद में मिलता है। वाक्य में कितनी समापिका क्रियाएँ हैं (वे क्रियाएँ जिन पर वाक्य पूरा होता है, जैसे गया, खाता है, आएगा), यह गिनना पहला कदम है। “खाकर”, “पढ़ते हुए” जैसी अधूरी क्रियाएँ गिनती में नहीं आतीं। क्रिया के इन रूपों का फर्क हिंदी क्रिया के भेद वाले नोट में है।

रचना के आधार पर वाक्य के तीन भेद

गुरु के अनुसार रचना के आधार पर वाक्य तीन प्रकार के होते हैं। वे पहले भेद को साधारण वाक्य कहते हैं, जबकि आज की पाठ्यपुस्तकें और CBSE की अंक योजना इसे सरल वाक्य कहती हैं। दोनों नाम एक ही चीज के हैं।

भेदपहचानउदाहरण
सरल (साधारण) वाक्यएक उद्देश्य, एक समापिका क्रियाबच्चे मैदान में खेल रहे हैं।
मिश्र वाक्यएक प्रधान उपवाक्य और उस पर टिका एक या अधिक आश्रित उपवाक्यजब घंटी बजी, तब बच्चे बाहर निकले।
संयुक्त वाक्यदो या अधिक स्वतंत्र उपवाक्य, समानाधिकरण योजक से जुड़ेघंटी बजी और बच्चे बाहर निकले।

सरल वाक्य

जिस वाक्य में एक ही उद्देश्य और एक ही विधेय हो, यानी एक समापिका क्रिया, वह सरल वाक्य है। वाक्य लंबा हो सकता है, फिर भी सरल रहेगा:

दूसरे और तीसरे वाक्य में “झाड़कर”, “उठकर” जैसी पूर्वकालिक क्रियाएँ हैं, पर वाक्य “बिछा लिया” और “टहलते हैं” पर ही पूरा होता है। इसलिए दोनों सरल हैं। यही वजह है कि मिश्र या संयुक्त वाक्य को सरल बनाते समय दूसरी क्रिया को “कर” वाले रूप में बदला जाता है।

मिश्र वाक्य

जिस वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य हो और उस पर टिके एक या अधिक आश्रित उपवाक्य, वह मिश्र वाक्य है। गुरु के शब्दों में आश्रित उपवाक्य अपने आप में पूरा अर्थ नहीं देते, प्रधान उपवाक्य के साथ आने पर ही उनका अर्थ निकलता है। “जब घंटी बजी” अकेले अधूरा लगता है; “तब बच्चे बाहर निकले” के साथ पूरा होता है।

मिश्र वाक्य ज्यादातर इन जोड़ने वाले शब्दों से पहचाने जाते हैं: कि, जो-वह, जिसे, जिसका, जब-तब, जहाँ-वहाँ, जैसे-वैसे, यदि-तो, क्योंकि, ताकि, यद्यपि-तथापि। ये व्यधिकरण योजक कहलाते हैं, और इनका पूरा वर्गीकरण हिंदी अव्यय वाले नोट में समुच्चयबोधक के खंड में है।

संयुक्त वाक्य

जिस वाक्य में दो या अधिक स्वतंत्र उपवाक्य हों, जो एक-दूसरे पर टिके न हों, वह संयुक्त वाक्य है। गुरु इन्हें समानाधिकरण उपवाक्य कहते हैं, यानी बराबर के अधिकार वाले। हर उपवाक्य को अलग कर दें, तब भी वह पूरा वाक्य रहेगा।

संयुक्त वाक्य जोड़ने वाले शब्द हैं और, तथा, एवं, या, अथवा, परंतु, किंतु, लेकिन, पर, इसलिए, अतः।

गुरु एक बात और दर्ज करते हैं: संयुक्त वाक्य के हिस्से खुद मिश्र वाक्य भी हो सकते हैं। उनके एक उदाहरण को छोटा करके देखिए: जब भाप जमीन के पास दिखती है तब उसे कुहरा कहते हैं, और जब वह ऊपर दिखती है तब उसे बादल कहते हैं। यहाँ दो मिश्र वाक्य “और” से जुड़े हैं, इसलिए पूरा वाक्य संयुक्त है।

मिश्र वाक्य के आश्रित उपवाक्य के तीन भेद

कक्षा 10 और प्रतियोगी परीक्षाओं में “रेखांकित उपवाक्य का भेद लिखिए” आम प्रश्न है। गुरु के अनुसार आश्रित उपवाक्य तीन प्रकार के होते हैं, और उनकी पहचान का तरीका भी वही देते हैं: आश्रित उपवाक्य की जगह एक शब्द रखकर देखिए। अगर उसकी जगह संज्ञा बैठती है तो संज्ञा उपवाक्य, विशेषण बैठता है तो विशेषण उपवाक्य, क्रिया विशेषण बैठता है तो क्रिया विशेषण उपवाक्य।

उपवाक्यक्या काम करता हैआम योजकउदाहरण (आश्रित उपवाक्य मोटे अक्षरों में)
संज्ञा उपवाक्यप्रधान उपवाक्य की संज्ञा या कर्म की जगह आता हैकिमाँ ने कहा कि कल छुट्टी है।
विशेषण उपवाक्यप्रधान उपवाक्य की किसी संज्ञा की विशेषता बताता हैजो, जिसे, जिसका, जिसकीवह लड़का जो कल आया था मेरा भाई है।
क्रिया विशेषण उपवाक्यप्रधान उपवाक्य की क्रिया का समय, स्थान, ढंग, कारण या शर्त बताता हैजब, जहाँ, जैसे, क्योंकि, यदि, ताकिजब सूरज निकला तब हम चले।

गुरु का अपना उदाहरण इस कसौटी को साफ कर देता है। “जब सबेरा हुआ तब हम लोग बाहर गए” में “जब सबेरा हुआ” की जगह “सबेरे” रख दीजिए: “सबेरे हम लोग बाहर गए”। “सबेरे” क्रिया विशेषण है, इसलिए वह उपवाक्य क्रिया विशेषण उपवाक्य था, और बदलने पर वाक्य सरल हो गया।

“कि” वाला उपवाक्य हमेशा संज्ञा उपवाक्य नहीं होता, यह भी याद रखिए। “वह इतना थका था कि तुरंत सो गया” में “कि तुरंत सो गया” परिणाम बताता है, यानी क्रिया विशेषण उपवाक्य है। इसी तरह “जो” से शुरू होने वाला उपवाक्य कभी-कभी संज्ञा का काम करता है, जैसे “जो बीत गया, उसे भूल जाओ” में। संबंधवाचक “जो” का पूरा व्यवहार हिंदी सर्वनाम वाले नोट में है।

वाक्य रूपांतरण: एक वाक्य, तीन रूप

रचना वाले भेदों का असली अभ्यास रूपांतरण है: अर्थ बदले बिना वाक्य का ढाँचा बदलना। नियम सीधा है:

  1. सरल से मिश्र: एक हिस्से को आश्रित उपवाक्य बनाइए और जब-तब, जो-वह, कि जैसा योजक जोड़िए।
  2. सरल से संयुक्त: “कर” वाली क्रिया को पूरी क्रिया बनाइए और “और”, “इसलिए” जैसे योजक से जोड़िए।
  3. मिश्र या संयुक्त से सरल: एक क्रिया को “कर” वाले रूप या संज्ञा-वाक्यांश में बदलिए और योजक हटाइए।
सरलमिश्रसंयुक्त
नवाब साहब ने तौलिया झाड़कर सामने बिछा लिया।जब नवाब साहब ने तौलिया झाड़ा तब उसे सामने बिछा लिया।नवाब साहब ने तौलिया झाड़ा और सामने बिछा लिया।
मेहनती विद्यार्थी सफल होते हैं।जो विद्यार्थी मेहनत करते हैं वे सफल होते हैं।विद्यार्थी मेहनत करते हैं और सफल होते हैं।
बीमार होने के कारण वह स्कूल नहीं गया।वह स्कूल नहीं गया क्योंकि वह बीमार था।वह बीमार था, इसलिए स्कूल नहीं गया।
सूरज निकलते ही अँधेरा छँट गया।जैसे ही सूरज निकला, वैसे ही अँधेरा छँट गया।सूरज निकला और अँधेरा छँट गया।

पहली पंक्ति का सरल रूप CBSE के 2025-26 के हिंदी A नमूना प्रश्नपत्र में पूछा गया था। उसी प्रश्नपत्र में “हालदार साहब को उधर से गुजरते समय मूर्ति में कुछ अंतर दिखाई दिया” को मिश्र में बदलना था, और अंक योजना का उत्तर है: “जब हालदार साहब उधर से गुजरे तब उन्हें मूर्ति में कुछ अंतर दिखाई दिया।”

इसी प्रश्नपत्र के दो और वाक्य पहचान का अच्छा अभ्यास हैं। “कार्तिक आया नहीं कि बालगोबिन भगत की प्रभातियाँ शुरू हुईं” को अंक योजना मिश्र वाक्य मानती है, क्योंकि “कि” से जुड़ा दूसरा हिस्सा पहले पर टिका है। “सबसे बड़ी बात है कि काशी के पास उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ जैसा नायाब हीरा रहा है” में “कि” वाला हिस्सा संज्ञा उपवाक्य है, क्योंकि वह “बात” क्या है, यही बताता है।

अर्थ के आधार पर वाक्य के आठ भेद

अर्थ वाला वर्गीकरण यह देखता है कि बोलने वाला वाक्य से क्या करना चाहता है: सूचना देना, मना करना, पूछना, हुक्म देना या मन का भाव जताना। स्कूली व्याकरण इसके आठ भेद मानता है।

भेदक्या बताता हैपहचानउदाहरण
विधानवाचककिसी काम के होने या करने की सीधी सूचनासामान्य कथन, पूर्ण विरामसूर्य पश्चिम में अस्त होता है।
निषेधवाचककाम का न होनान, नहीं, मतमैं आज नहीं पढ़ूँगा।
प्रश्नवाचककुछ पूछनाक्या, कौन, कब, कहाँ, कैसे; प्रश्नचिह्नतुम पढ़ने कब जाओगे?
विस्मयादिबोधकआश्चर्य, हर्ष, शोक, घृणा जैसे भावअरे, वाह, ओह, हाय; विस्मयादिबोधक चिह्नअहा! कैसा सुंदर दृश्य है।
आज्ञावाचकआज्ञा, अनुरोध या अनुमतिजाओ, जाइए, जा सकते हैंआप चुप रहिए।
इच्छावाचकइच्छा, आशा या आशीर्वादकाश, ईश्वर करे, भगवान करेनववर्ष मंगलमय हो।
संदेहवाचककाम के होने में शक या संभावनाशायद, संभवतः, क्या पताशायद वह आज आए।
संकेतवाचकएक काम दूसरे पर निर्भर (शर्त या कारण)यदि-तो, अगर-तोवर्षा होती तो फसल अच्छी होती।

इन आठों के नाम किताबों में थोड़े अलग मिलते हैं, पर भेद वही हैं:

आज्ञावाचक में अनुरोध और अनुमति भी

आज्ञावाचक सिर्फ हुक्म नहीं है। “कृपया बैठिए” अनुरोध है, और “आप जा सकते हैं” अनुमति, पर दोनों आज्ञावाचक में गिने जाते हैं, क्योंकि सामने वाले से कोई काम करवाने या उसे इजाजत देने की बात है। इसके उलट “ईश्वर तुम्हें लंबी उम्र दे” में सामने वाले से कुछ करवाया नहीं जा रहा, बोलने वाला अपनी इच्छा जता रहा है, इसलिए वह इच्छावाचक है।

एक वाक्य, आठ रूप

अर्थ वाले भेदों का अभ्यास भी रूपांतरण से होता है। एक ही विधानवाचक वाक्य लीजिए, “वह आज आएगा”, और उसे बाकी सात में बदलिए:

भेदरूप
विधानवाचकवह आज आएगा।
निषेधवाचकवह आज नहीं आएगा।
प्रश्नवाचकक्या वह आज आएगा?
विस्मयादिबोधकअरे! वह आज आएगा!
आज्ञावाचकतुम आज आना।
इच्छावाचककाश, वह आज आ जाए।
संदेहवाचकशायद वह आज आए।
संकेतवाचकयदि वह आज आएगा तो हम साथ चलेंगे।

ध्यान दीजिए कि संदेहवाचक और इच्छावाचक में क्रिया का रूप भी बदलता है (“आएगा” से “आए”)। सिर्फ “शायद” जोड़कर “शायद वह आज आएगा” लिखना बोलचाल में चलता है, पर परीक्षा में संभावना वाला रूप “आए” ज्यादा सुरक्षित है।

वे जोड़े जिनमें सबसे ज्यादा नंबर कटते हैं

ज्यादातर गलतियाँ इसलिए होती हैं क्योंकि विद्यार्थी एक शब्द देखकर फैसला कर लेता है, पूरा वाक्य नहीं देखता। ये पाँच जोड़े सबसे ज्यादा उलझाते हैं:

एक और बात: अर्थ और रचना अलग-अलग सवाल हैं। “यदि तुम आओगे तो मैं चलूँगा” अर्थ से संकेतवाचक है और रचना से मिश्र। प्रश्न में जो आधार पूछा गया है, उत्तर उसी का दीजिए।

वाक्य लिखते समय की आम गलतियाँ

वाक्य भेद की समझ लिखने में भी दिखती है। मिश्र और संयुक्त वाक्यों में सबसे आम चूकें ये हैं:

ऐसी अशुद्धियों का पूरा अभ्यास हिंदी वाक्य शुद्धि वाले नोट में है, जहाँ पदक्रम और अन्विति की गलतियाँ भी हैं।

परीक्षा में वाक्य भेद

स्कूल बोर्ड में दोनों वर्गीकरण अलग कक्षाओं में बँटे हैं। CBSE के 2025-26 के पाठ्यक्रम के अनुसार:

राज्य स्तर की भर्ती और शिक्षक पात्रता परीक्षाओं के सामान्य हिंदी में “रचना की दृष्टि से वाक्य का भेद चुनिए” जैसे बहुविकल्पीय प्रश्न आम हैं। सिविल सेवा के अनिवार्य हिंदी प्रश्नपत्र में वाक्य भेद नाम लेकर नहीं पूछा जाता, पर संक्षेपण और अनुवाद में लंबे संयुक्त वाक्यों को साफ सरल या मिश्र वाक्यों में बदलना ही अच्छी भाषा की पहचान है। पूरा व्याकरण क्रम अनिवार्य हिंदी व्याकरण गाइड में है।

इस अध्याय को रटने की जगह रोज तीन वाक्य लीजिए और हर एक को तीनों रचना वाले रूपों में लिखिए। दो हफ्ते में मिश्र और संयुक्त का फर्क आँख से दिखने लगता है, और वही समझ अनुवाद में भी काम आती है।

अभ्यास प्रश्न

पहले छह वाक्यों का रचना के आधार पर भेद लिखिए, फिर अगले चार का अर्थ के आधार पर। उसके बाद के प्रश्न रूपांतरण और उपवाक्य पर हैं। उत्तर इस खंड के अंत में हैं।

  1. सुबह होते ही चिड़ियाँ चहचहाने लगीं।
  2. जो पेड़ आँगन में है, उसे मेरे दादाजी ने लगाया था।
  3. मैं बाजार गया और फल ले आया।
  4. वह इतना तेज दौड़ा कि सबसे आगे निकल गया।
  5. तुम चाय पिओगे या शरबत?
  6. पिताजी ने कहा कि कल हम गाँव चलेंगे।
  7. भगवान तुम्हारा भला करे।
  8. संभवतः आज रात बारिश हो।
  9. कृपया दरवाजा बंद कर दीजिए।
  10. अगर तुम समय पर आते तो गाड़ी नहीं छूटती।
  11. “वह मेहनत करता है और सफल होता है” को मिश्र वाक्य में बदलिए।
  12. “जब वह घर पहुँचा तब बारिश शुरू हो गई” को सरल वाक्य में बदलिए।
  13. “मुझे पता है कि वह सच बोल रहा है” में आश्रित उपवाक्य और उसका भेद बताइए।
  14. “जिस लड़के ने इनाम जीता, वह मेरी कक्षा में है” में आश्रित उपवाक्य का भेद बताइए।
  15. “राधा गाना गाती है” को निषेधवाचक और प्रश्नवाचक वाक्य में बदलिए।

उत्तर

  1. सरल वाक्य। “होते ही” अधूरी क्रिया है; वाक्य “चहचहाने लगीं” पर पूरा होता है।
  2. मिश्र वाक्य। “जो पेड़ आँगन में है” विशेषण उपवाक्य है।
  3. संयुक्त वाक्य। दोनों उपवाक्य स्वतंत्र हैं और “और” से जुड़े हैं।
  4. मिश्र वाक्य। “कि सबसे आगे निकल गया” परिणाम बताने वाला क्रिया विशेषण उपवाक्य है।
  5. संयुक्त वाक्य। “या” से दो स्वतंत्र विकल्प जुड़े हैं।
  6. मिश्र वाक्य। “कि कल हम गाँव चलेंगे” संज्ञा उपवाक्य है, “कहा” का कर्म।
  7. इच्छावाचक वाक्य।
  8. संदेहवाचक वाक्य।
  9. आज्ञावाचक वाक्य (अनुरोध)।
  10. संकेतवाचक वाक्य। रचना से यह मिश्र वाक्य भी है।
  11. जो मेहनत करता है, वह सफल होता है।
  12. घर पहुँचते ही बारिश शुरू हो गई।
  13. “कि वह सच बोल रहा है”; संज्ञा उपवाक्य, क्योंकि यह “पता है” का कर्म है।
  14. “जिस लड़के ने इनाम जीता”; विशेषण उपवाक्य, क्योंकि यह “लड़के” की विशेषता बताता है।
  15. निषेधवाचक: राधा गाना नहीं गाती। प्रश्नवाचक: क्या राधा गाना गाती है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाक्य के कितने भेद होते हैं?

वाक्य के भेद दो आधारों पर किए जाते हैं। रचना के आधार पर तीन भेद हैं: सरल, मिश्र और संयुक्त। अर्थ के आधार पर आठ भेद हैं: विधानवाचक, निषेधवाचक, प्रश्नवाचक, विस्मयादिबोधक, आज्ञावाचक, इच्छावाचक, संदेहवाचक और संकेतवाचक।

रचना के आधार पर वाक्य के भेद कौन-से हैं?

रचना के आधार पर वाक्य तीन तरह के होते हैं: सरल वाक्य, जिसमें एक समापिका क्रिया हो; मिश्र वाक्य, जिसमें एक प्रधान और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य हों; और संयुक्त वाक्य, जिसमें दो या अधिक स्वतंत्र उपवाक्य जुड़े हों। कामताप्रसाद गुरु सरल वाक्य को साधारण वाक्य कहते हैं।

अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद कौन-से हैं?

अर्थ के आधार पर वाक्य के आठ भेद हैं: विधानवाचक, निषेधवाचक, प्रश्नवाचक, विस्मयादिबोधक, आज्ञावाचक, इच्छावाचक, संदेहवाचक और संकेतवाचक। यह वर्गीकरण देखता है कि वाक्य सूचना दे रहा है, मना कर रहा है, पूछ रहा है या कोई भाव, इच्छा या शर्त जता रहा है।

मिश्र और संयुक्त वाक्य में क्या अंतर है?

मिश्र वाक्य में एक उपवाक्य दूसरे पर टिका होता है, जबकि संयुक्त वाक्य के सभी उपवाक्य स्वतंत्र होते हैं। ‘जब घंटी बजी तब बच्चे निकले’ मिश्र है, क्योंकि ‘जब घंटी बजी’ अकेले अधूरा है। ‘घंटी बजी और बच्चे निकले’ संयुक्त है, क्योंकि दोनों हिस्से अपने आप में पूरे हैं।

आश्रित उपवाक्य के कितने भेद होते हैं?

आश्रित उपवाक्य के तीन भेद होते हैं: संज्ञा उपवाक्य, विशेषण उपवाक्य और क्रिया विशेषण उपवाक्य। पहचान के लिए उपवाक्य की जगह एक शब्द रखकर देखिए: संज्ञा बैठे तो संज्ञा उपवाक्य, विशेषण बैठे तो विशेषण उपवाक्य, क्रिया विशेषण बैठे तो क्रिया विशेषण उपवाक्य।

सरल वाक्य को मिश्र वाक्य में कैसे बदलें?

सरल वाक्य के एक हिस्से को अलग उपवाक्य बनाइए और जब-तब, जो-वह या कि जैसे योजक से जोड़िए। जैसे ‘मेहनती विद्यार्थी सफल होते हैं’ का मिश्र रूप है ‘जो विद्यार्थी मेहनत करते हैं वे सफल होते हैं’। अर्थ वही रहना चाहिए, सिर्फ ढाँचा बदले।

संकेतवाचक वाक्य किसे कहते हैं?

जिस वाक्य में एक काम का होना दूसरे काम पर निर्भर हो, वह संकेतवाचक वाक्य है, जैसे ‘वर्षा होती तो फसल अच्छी होती’। इसे हेतुवाचक या शर्तवाचक भी कहते हैं, और इसमें ज्यादातर यदि-तो या अगर-तो आता है। रचना के हिसाब से ऐसा वाक्य मिश्र होता है।

क्या ‘आप जा सकते हैं’ आज्ञावाचक वाक्य है?

हाँ, आज्ञावाचक वाक्य में आज्ञा के साथ अनुरोध और अनुमति भी गिने जाते हैं। ‘आप जा सकते हैं’ में अनुमति दी जा रही है और ‘कृपया बैठिए’ में अनुरोध है, इसलिए दोनों आज्ञावाचक हैं। ‘ईश्वर तुम्हें लंबी उम्र दे’ इच्छावाचक है, क्योंकि उसमें बोलने वाले की इच्छा है।